कक्षा दसवीं सामाजिक अध्याय 27 भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं पाठ के प्रश्न और उत्तर


​🎯 वन लाइन प्रश्नोत्तर (One-Line Answers)

  1. अर्थशास्त्र किसका अध्ययन है? उत्पादन, वितरण, विनिमय, और उपभोग की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन अर्थशास्त्र है।

  1. उपनिवेश काल में अंग्रेजों का भारतीय कृषि के प्रति क्या उद्देश्य था? भारत से कच्चा माल लेकर अपने देश के उद्योगों में उत्पादन करना।

  1. वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था किस प्रकार की अर्थव्यवस्था है? मिश्रित और अल्पविकसित अर्थव्यवस्था।

  1. 2018 में विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र के अनुसार भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय कितनी थी? 1590 अमेरिकी डॉलर।

  1. मानवीय पूँजी के मुख्य निर्धारक तत्व कौन से हैं? शिक्षा और स्वास्थ्य।

  1. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता दर कितनी थी? 74.04 प्रतिशत।

  1. भारत की विकास दर 1950 से 1980 के बीच कितनी थी? 3.5 प्रतिशत।

  1. 1980 के दशक में भारत की विकास दर कितनी हो गई? 5 प्रतिशत।

  1. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) में विकास दर कितनी रही? 7.9 प्रतिशत।

  1. वर्तमान समय में भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की किस प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं में से एक है? तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक।

  1. वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय आय में सेवा क्षेत्र का योगदान लगभग कितना था? 60 प्रतिशत से अधिक।

  1. आजादी के समय सड़कों की लम्बाई लगभग कितनी थी? 4 लाख किलोमीटर।

  1. भारत में साक्षरता दर 1950 में कितनी थी? 18.3 प्रतिशत।

  1. भुगतान संतुलन क्या कहलाता है? एक देश का शेष विश्व के साथ, एक वर्ष में समस्त लेन-देन का विवरण भुगतान संतुलन कहलाता है।

  1. मुद्रा स्फीति किसे कहते हैं? जब किसी अर्थव्यवस्था में लोगों के पास क्रय करने की मुद्रा बढ़ जाती है तो उसे मुद्रा स्फीति कहते हैं।

  1. उदारीकरण की नीति क्या थी? आर्थिक गतिविधियों के लिए बनाये गये नियमों और प्रतिबंधों को दूर कर अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को मुक्त करने की नीति।

  1. 1991 के बाद किस क्षेत्र में लाइसेंस प्रथा समाप्त कर दी गई? अल्कोहल, सिगरेट, जोखिम भरे रसायन, औद्योगिक विस्फोट, विमानन, आदि।

  1. कर व्यवस्था किस नीति के अंतर्गत आती है? राजकोषीय नीति।

  1. निजीकरण किस अर्थव्यवस्था की अवधारणा है? पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की।

  1. सार्वजनिक क्षेत्र किसे कहते हैं? वे जो सरकार की सहायता से स्थापित किए जाते हैं और इन पर स्वामित्व प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकार का होता है।

  1. वैश्वीकरण का उद्देश्य क्या है? देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ स्वीकृत करना और विश्व को और एकीकृत करना।

  1. बहुराष्ट्रीय कंपनी क्या है? एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन के स्वामित्व रखती है।

  1. वैश्वीकरण की प्रक्रिया को लागू करने में किन संस्थाओं ने भूमिका अदा की है? अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन।

  1. विश्व व्यापार संगठन (WTO) का कार्य क्या है? विश्व के देशों के बीच व्यापार के नियमों के निर्धारण तथा नियमन का कार्य करता है।

  1. स्वदेशी की अवधारणा का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में क्या उद्देश्य था? ब्रिटेन में बने माल का बहिष्कार करना तथा भारत में बने माल का अधिकाधिक प्रयोग करना।

  1. स्वदेशी को बढ़ावा देने से किसमें वृद्धि होगी? घरेलू उत्पाद और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होगी।

  1. उत्पादन के पाँच साधनों में सबसे महत्वपूर्ण साधन कौन सा है? श्रम।

  1. मानव पूँजी किसे कहा जाता है? जब श्रम को शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी योग्यता तथा कौशल प्रदान कर दिया जाता है।

  1. भारत में 'विश्व युवा कौशल दिवस' कब मनाया गया और 'राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन' कब प्रारम्भ किया गया? 2015 में।

  1. 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' का मुख्य जोर किन पर रहेगा? श्रम बाजार में पहली बार प्रवेश कर रहे लोगों और 10-12 के दौरान स्कूल छोड़ गए छात्रों पर।

​✏️ अति लघुतात्मक प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Questions)

  1. अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के कोई दो लक्षण बताइए। अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के लक्षण हैं: नीचा प्रतिव्यक्ति आय का स्तर और कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था।

  1. भारत में अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के कोई दो जनांकिकीय संकेतांक लिखिए। भारत में जन्मदर बहुत ऊँची है तथा मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर का स्तर भी ऊँचा बना हुआ है।

  1. भारत में धीमे आर्थिक विकास के कोई दो कारण बताइए। नवीन तकनीक का अभाव है और इस पर कम व्यय किया जाता है।

  1. भारतीय अर्थव्यवस्था को विकासशील अर्थव्यवस्था क्यों कहा जा सकता है? गत दशकों में प्रभावी आर्थिक एवं सामाजिक सुधारों की दिशा में परिवर्तनशील है तथा प्रतिव्यक्ति आय एवं राष्ट्रीय आय में लगातार वृद्धि हो रही है।

  1. उदारीकरण के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था किस प्रकार की अर्थव्यवस्था में बदल गई है? समाजवादी मिश्रित अर्थव्यवस्था से पूँजीवादी मिश्रित अर्थव्यवस्था में।

  1. प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर में क्या अंतर है? प्रत्यक्ष कर आय तथा व्यवसाय में होने वाले लाभ पर लगाए जाते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कर वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाते हैं।

  1. निजीकरण के कोई दो प्रमुख तत्व बताइए। सार्वजनिक उपक्रमों में सरकारी भागीदारी को घटाकर 26 प्रतिशत या इससे भी कम किया जाए और अस्वस्थ सरकारी प्रतिष्ठानों का विनिवेश किया जाए।

  1. वैश्वीकरण के कोई दो सकारात्मक प्रभाव बताइए। भारतीय व्यापार पर लगे प्रतिबंधों की समाप्ति हुई और पूँजी के स्वतंत्र आवागमन के लिए उचित वातावरण का निर्माण हुआ।

  1. भारत में स्वदेशी की अवधारणा क्यों पुनः जोर पकड़ने लगी है? वैश्वीकरण की प्रतिस्पर्धा के दबाव में अनेक उद्योग बंद होने की कगार पर हैं, बेरोजगारी की समस्या जटिल हो रही है, और न्याय संगत वैश्वीकरण नहीं हो रहा है।

  1. कौशल किसे कहते हैं? किसी कार्य को अधिक अच्छे तरीके से सम्पन्न करने की योग्यता और क्षमता को ही कौशल कहा जाता है।

​📜 लघुतात्मक प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)

  1. भारतीय अर्थव्यवस्था में अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के लक्षण किस प्रकार मौजूद हैं, संक्षेप में स्पष्ट कीजिए। भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान में मिश्रित और अल्पविकसित अर्थव्यवस्था दोनों के लक्षण रखती है। यह एक अल्पविकसित अर्थव्यवस्था है क्योंकि यहाँ प्रतिव्यक्ति आय का स्तर नीचा है। गरीबी की समस्या व्यापक है, जहाँ मूलभूत आवश्यकताओं को प्राप्त करने में भी असफलता मिलती है। जनांकिकीय संकेतांक जैसे ऊँची जन्म दर, मातृ मृत्यु दर, और शिशु मृत्यु दर भी अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के लक्षण हैं।

  1. भारत में आर्थिक विकास की दर में वृद्धि किस प्रकार हुई है? भारत में आर्थिक सुधारों की दरें 1980 के दशक में शुरू हुईं, लेकिन उल्लेखनीय प्रगति 1990 के दशक के आर्थिक सुधारों के बाद हुई। 1950 से 1980 के बीच विकास दर 3.5 प्रतिशत थी, जो 1980 के दशक में बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई। बाद के दशकों में यह दर और भी बढ़ी, जैसे 2007-2012 की ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में विकास दर 7.9 प्रतिशत रही। 1990-91 के पश्चात् प्रतिव्यक्ति आय लगभग 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि से बढ़ी।

  1. 1991 के आर्थिक संकट के कारणों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए। 1991 के आर्थिक संकट का मुख्य कारण सरकार का व्यय उसके राजस्व से इतना अधिक हो जाना था कि कर्ज लेकर भी वह काम नहीं चल पा रहा था। आयात अधिक होने लग गया और निर्यात में कमी आई। आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ने लगी और विदेशी मुद्रा का सुरक्षित भंडार इतना कम हो गया कि 15 दिन के आयातों का भुगतान करना भी मुश्किल हो गया था।

  1. उदारीकरण की प्रक्रिया के फलस्वरूप औद्योगिक क्षेत्र में क्या परिवर्तन हुए? उदारीकरण से पहले लाइसेंस व्यवस्था थी, जिसमें किसी भी फर्म को सरकारी अधिकारी से लाइसेंस लेकर ही कोई कार्य शुरू या बंद करना होता था। 1991 के बाद, कुछ क्षेत्रों (जैसे अल्कोहल, सिगरेट, जोखिम भरे रसायन, औद्योगिक विस्फोट, विमानन, आदि) को छोड़कर लाइसेंस प्रथा समाप्त कर दी गई। यह प्रक्रिया सरकारी बाधाओं को समाप्त करके अर्थव्यवस्था में उत्पादन की क्रियाओं को सरल बनाने के लिए की गई थी।

  1. निजीकरण से क्या तात्पर्य है और 1991 के बाद सार्वजनिक क्षेत्र पर इसका क्या प्रभाव पड़ा? निजीकरण का तात्पर्य अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र या व्यक्तियों की भागीदारी बढ़ाना है। 1991 से पहले, सार्वजनिक क्षेत्र ही उत्पादन की प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण थे। 1991 के बाद सरकार ने उत्पादन की प्रक्रिया सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित की। इसमें विनिवेश के माध्यम से सरकारी प्रतिष्ठानों में निजी निवेशकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई और कुछ प्रतिष्ठानों के अंश निजी निवेशकों के हाथों में बेचे गए।

  1. वैश्वीकरण से भारतीय अर्थव्यवस्था को हुए कोई तीन लाभ बताइए।
    • ​भारतीय व्यापार पर लगे प्रतिबंधों की समाप्ति हुई।
    • ​पूँजी के स्वतंत्र आवागमन के लिए उचित वातावरण का निर्माण हुआ।
    • ​नई तकनीक का प्रवेश हुआ और लागत में कमी आई है।

है।

  1. स्वदेशी की अवधारणा से होने वाले कोई तीन लाभों का उल्लेख कीजिए।
    • ​स्वदेशी उत्पादों का उपयोग होने पर घरेलू उत्पाद तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि होगी।
    • ​रोजगार के अवसर बढ़ेंगे क्योंकि भारतीय कंपनियाँ विदेशी कंपनियों की तुलना में अधिक श्रमशील हैं।
    • ​स्वदेशी भावना से उद्योग बढ़ेंगे तो देश में आत्मनिर्भरता की वृद्धि होगी।

गी।

  1. कौशल विकास को राष्ट्रीय विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण माना गया है? जब श्रम शक्ति स्वस्थ और तकनीकी ज्ञान से प्रशिक्षित हो जाती है, तो उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होती है। कौशल से श्रम की उत्पादकता बढ़ती है। यह आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है और बेरोजगारी की समस्या से निपटने में सहायक है।

  1. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का उद्देश्य क्या है? यह योजना युवाओं के कौशल, प्रशिक्षण के लिए एक प्रमुख विकास योजना है। इसका उद्देश्य कौशल प्रदान करने वाले प्रशिक्षणों के माध्यम से भारत को वैश्विक लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। इसमें सुधार, बेहतर शिक्षण और प्रशिक्षित शिक्षकों पर विशेष जोर दिया गया है।

  1. भारत में विदेशी मुद्रा भंडार का क्या महत्व है और यह कैसे प्रभावित हुआ था? विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखना अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए महत्वपूर्ण है। 1991 के संकट के दौरान, आयात अधिक होने और निर्यात में कमी के कारण सुरक्षित भंडार इतना कम हो गया था कि 15 दिन के आयातों का भुगतान करना मुश्किल हो गया था। इसके कारण भारत को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ा।

​essays 📝 निबंधात्मक प्रश्नोत्तर (Essay Type Questions)

  1. भारतीय अर्थव्यवस्था में अल्पविकसित और विकासशील दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लक्षण किस प्रकार विद्यमान हैं, विस्तार से समझाइए। ​भारतीय अर्थव्यवस्था एक मिश्रित और अल्पविकसित अर्थव्यवस्था है, जिसमें पिछड़ी अर्थव्यवस्था के लक्षण मौजूद हैं। ​अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के लक्षण:
    • नीची प्रतिव्यक्ति आय: भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय नीची है, जो अल्पविकसित अर्थव्यवस्था का आधार है।
    • गरीबी: भारत गरीबी की समस्या से ग्रस्त है, जहाँ एक बड़ा भाग मूलभूत आवश्यकताओं को प्राप्त करने में असफल रहता है।
    • जनसांख्यिकीय संकेतांक: ऊँची जन्म दर, मातृ मृत्यु दर, और शिशु मृत्यु दर का उच्च स्तर अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के लक्षण हैं।
    • पिछड़ी हुई तकनीक: तकनीकी का विस्तार तो हो रहा है, परन्तु उसकी गुणवत्ता कमजोर है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का ठीक से दोहन नहीं हो पाता।
    • कृषि पर निर्भरता: यह मुख्य रूप से कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था है।
    विकासशील अर्थव्यवस्था के लक्षण:
    • राष्ट्रीय आय और प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि: आर्थिक सुधारों के कारण प्रतिव्यक्ति आय एवं राष्ट्रीय आय में लगातार वृद्धि हो रही है, और भारत विश्व की तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
    • संरचना में सुधार: तृतीयक (सेवा) क्षेत्र का योगदान सकल घरेलू उत्पाद में लगातार बढ़ रहा है, जो विकासशील अर्थव्यवस्था का प्रतीक है।
    • साक्षरता और जीवन प्रत्याशा में सुधार: 1950 से 2011 तक साक्षरता दर में वृद्धि हुई है, और जीवन प्रत्याशा सहित स्वास्थ्य क्षेत्रों में आर्थिक विकास अग्रसर है।
    ​इन दोनों लक्षणों की उपस्थिति से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी अल्पविकसित अवस्था में है, लेकिन सुधारों के माध्यम से एक विकासशील अर्थव्यवस्था की ओर

अग्रसर हो रही है।

  1. भारत में 1991 के आर्थिक सुधारों को अपनाने के कारण एवं नई आर्थिक नीति की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।1991 के आर्थिक सुधारों को अपनाने के कारण (आर्थिक संकट): 1991 में भारत को एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा:
    • राजस्व से अधिक व्यय: सरकार का व्यय उसके राजस्व से इतना अधिक हो गया था कि कर्ज लेकर भी काम नहीं चल पा रहा था।
    • आयात-निर्यात असंतुलन: आयात अधिक होने लगा जबकि निर्यात में कमी आई।
    • मुद्रा भंडार की कमी: विदेशी मुद्रा का सुरक्षित भंडार इतना कम हो गया था कि केवल 15 दिन के आयातों का भुगतान करना मुश्किल हो गया।
    • निवेशकों का पलायन: विदेशी निवेशक भारत में निवेश करने से बचने लगे।
    • ​इस संकटकालीन समय में भारत को विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ा।
    नई आर्थिक नीति की प्रमुख विशेषताएँ (LPG): ऋण प्राप्त करने के लिए भारत को अनेक शर्तें माननी पड़ी, जिसके तहत नई आर्थिक नीति की घोषणा की गई। इस नीति में व्यापक सुधारों को शामिल किया गया और मुख्य रूप से तीन नीतियाँ अपनाई गईं:
    • उदारीकरण (Liberalisation): आर्थिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंधों को दूर कर अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को मुक्त करना। इसमें औद्योगिक, वित्तीय, कर, व्यापार और निवेश नीतियों में सुधार किए गए, और लाइसेंस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया।
    • निजीकरण (Privatisation): अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र या व्यक्तियों की भागीदारी को बढ़ाना। इसके तहत सार्वजनिक उपक्रमों से उत्पादन प्रक्रिया निजी क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित की गई और विनिवेश (सरकारी भागीदारी कम करना) किया गया।
    • वैश्वीकरण (Globalisation): देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ स्वीकृत करना और एकीकृत करना। इसके तहत विदेशी व्यापार और निवेश पर लगे प्रतिबंधों को हटाया गया।
    ​इन उपायों का उद्देश्य भुगतान संतुलन और मुद्रा स्फीति पर नियंत्रण करना तथा एक अनुकूल व्यावसायिक वातावरण क

निर्माण करना था।

  1. उदारीकरण से आप क्या समझते हैं? औद्योगिक, वित्तीय और कर व्यवस्था के क्षेत्र में उदारीकरण के प्रभावों की विवेचना कीजिए।उदारीकरण (Liberalisation): उदारीकरण का तात्पर्य आर्थिक गतिविधियों के लिए बनाए गए नियमों और प्रतिबंधों को दूर कर अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को मुक्त करने की नीति से है। यह सरकारी बाधाओं को समाप्त करके अर्थव्यवस्था में उत्पादन और विनिमय की क्रियाओं को सरल बनाने की प्रक्रिया है। ​विभिन्न क्षेत्रों में उदारीकरण के प्रभाव:
    • औद्योगिक क्षेत्र:
      • ​उदारीकरण से पहले मौजूद लाइसेंस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया, जिससे फर्मों के लिए व्यापार में प्रवेश करना और विस्तार करना आसान हो गया।
      • ​इसने व्यावसायिक वातावरण का निर्माण किया, फर्मों के व्यापार में प्रवेश करने और वृद्धि करने की बाधाओं को दूर किया।
      • वित्तीय क्षेत्र:
        • ​सुधारवादी नीतियों में भारतीय और विदेशी बैंकों के प्रवेश का अवसर दिया गया।
        • ​बैंकों की पूँजी में विदेशी भागीदारी 50 प्रतिशत कर दी गई।
        • ​विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs), व्यापारिक बैंकों, म्युचुअल फंड और पेंशन कोषों को भी भारतीय पूंजी बाजारों में निवेश की अनुमति मिल गई।
        गई।
        • कर व्यवस्था (राजकोषीय नीति):
          • ​कर व्यवस्था में सुधार किया गया।
          • ​आय तथा व्यवसाय में लाभ पर लगाए जाने वाले प्रत्यक्ष करों की दरों में कमी की गई।
          • ​वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाने वाले अप्रत्यक्ष करों में भी कमी की गई।
          गई। ​इन सुधारों के फलस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था समाजवादी मिश्रित अर्थव्यवस्था से पूँजीवादी मिश्रित व्यवस्था में बदल गई और मुक्त बाजार वाली व्यवस्थ

की ओर गतिमान है।

  1. वैश्वीकरण से क्या तात्पर्य है? वैश्वीकरण के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।वैश्वीकरण (Globalisation): वैश्वीकरण का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ स्वीकृत करना और एकीकृत करना है। यह वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी और बौद्धिक संपदा का बिना रोक-टोक आदान-प्रदान है, जिसके कारण पूरा विश्व एक गाँव के रूप में हो गया है। ​सकारात्मक प्रभाव:
    • व्यापार और निवेश में वृद्धि: भारतीय व्यापार पर लगे प्रतिबंधों की समाप्ति हुई और पूँजी के स्वतंत्र आवागमन के लिए उचित वातावरण का निर्माण हुआ।
    • प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता में सुधार: नई तकनीक का प्रवेश हुआ, लागत में कमी आई, और भारतीय उत्पादकों को विश्व के उत्पादकों से प्रतियोगिता करने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करना पड़ा।
    • सेवाओं का निर्यात: सूचना प्रौद्योगिकी के प्रसार ने सेवाओं को विशिष्ट आर्थिक गतिविधि का स्वरूप दिया, जिससे भारतीय कंपनियाँ भी विदेशों में अपना पैर फैलाने लगी हैं (उदाहरण: टाटा टी, टाटा इस्पात)।
    • विदेशी मुद्रा भंडार: विदेशी मुद्रा भंडार, विदेशी व्यापार संरचना में सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं।
    नकारात्मक प्रभाव (स्वदेशी की अवधारणा के संदर्भ में):
    • विकसित राष्ट्रों का अनुचित व्यापार: कुछ विकसित राष्ट्र विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और खुले व्यापार की नीति का ईमानदारी से पालन नहीं कर रहे हैं।
    • घरेलू उद्योगों पर दबाव: वैश्वीकरण की प्रतिस्पर्धा के दबाव में अनेक उद्योग या तो बंद हो गए हैं या बंद होने की कगार पर हैं।
    • सामाजिक समस्याएँ: बेरोजगारी की समस्या जटिल होती जा रही है।
    • प्राकृतिक संसाधनों का दोहन: आशंका है कि आर्थिक उदारीकरण की आड़ में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो सकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का जीवन निर्वाह प्रभावित हो।
    ​अतः वैश्वीकरण से लाभ तो हुए हैं, लेकिन न्याय संगत वैश्वीकरण नहीं होने के कारण स्वदेशी की अवधारणा पुनः

ोर पकड़ने लगी है।

  1. कौशल विकास से क्या तात्पर्य है? भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कौशल विकास के महत्व और 'राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन' का विस्तार से वर्णन कीजिए।कौशल विकास (Skill Development): कौशल का तात्पर्य किसी कार्य को अधिक अच्छे तरीके से सम्पन्न करने की योग्यता और क्षमता से है। जब श्रम को शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी योग्यता तथा कौशल प्रदान कर दिया जाता है, तो उसे मानव पूँजी कहा जाता है। ​भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्व:
    • उत्पादकता में वृद्धि: कौशल से श्रम की उत्पादकता (मात्रा और गुणवत्ता) दोनों में वृद्धि होती है।
    • बेरोजगारी में कमी: प्रशिक्षित श्रम शक्ति बेरोजगारी की स्थिति में कमी लाती है।
    • जनसांख्यिकीय लाभांश: भारत में बड़ी संख्या में युवा जनसंख्या (60.5 करोड़ लोग 25 वर्ष से कम आयु के) होने के कारण, कौशल विकास इस "सुनहरे अवसर" का लाभ उठाने के लिए महत्वपूर्ण है।
    • आर्थिक और सामाजिक विकास: कुशल श्रम शक्ति देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है।
    राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (National Skill Development Mission): कौशल विकास के महत्व को समझते हुए भारत सरकार द्वारा 2015 में 'विश्व युवा कौशल दिवस' के अवसर पर राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन प्रारम्भ किया गया।
    • ध्येय: इसका प्रमुख ध्येय कौशल प्रदान करने वाले प्रशिक्षणों के माध्यम से भारत को वैश्विक लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम बनाना है।
    • नेतृत्व: इस मिशन के मुखिया माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हैं।
    • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY): यह मिशन के तहत एक प्रमुख विकास योजना है।
      • ​इसका जोर श्रम बाजार में पहली बार प्रवेश कर रहे लोगों और 10-12 के दौरान स्कूल छोड़ गए छात्रों पर है।
      • ​इसके तहत लगभग 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
      • ​इसमें सुधार, बेहतर शिक्षण, प्रशिक्षित शिक्षकों, और व्यवहार में परिवर्तन पर विशेष जोर दिया गया है।

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