क्र.सं.
प्रश्न
उत्तर (संक्षेप में)
1.
भारतीय अर्थव्यवस्था की किन्हीं दो नकारात्मक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
निम्न प्रति व्यक्ति आय और जनसंख्या का अत्यधिक दबाव।
2.
भारतीय अर्थव्यवस्था की किन्हीं दो सकारात्मक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
पूंजी निर्माण का उच्च स्तर और नियोजित अर्थव्यवस्था।
3.
भारत में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
मृत्यु दर में तेजी से कमी आना, जबकि जन्म दर का इतनी तेजी से नहीं घटना।
4.
निम्न मृत्यु दर किसका प्रतीक है?
यह विकास का प्रतीक है और एक अच्छी स्वास्थ्य प्रणाली का पता चलता है।
5.
भारत के लिए उच्च जन्म दर एक समस्या क्यों है?
क्योंकि यह प्रत्यक्ष रूप से जनसंख्या में वृद्धि पर दबाव डालती है, जिससे राजकोष पर बोझ पड़ता है।
6.
भारत में कृषि से संबंधित मुख्य समस्या क्या है?
इस क्षेत्र में उत्पादकता बहुत कम है।
7.
कृषि में निम्न उत्पादकता के दो मुख्य कारण बताइए।
प्रति व्यक्ति भूमि की कम उपलब्धता और अच्छी तकनीकी तथा सिंचाई सुविधाओं की कमी।
8.
ग्रामीण क्षेत्र के लिए गरीबी रेखा की परिभाषा न्यूनतम कैलोरी के संदर्भ में दीजिए।
वह स्थिति जब व्यक्ति न्यूनतम 2400 कैलोरी मूल्य के भोजन का उपभोग करने योग्य नहीं है।
9.
भारत में गरीबी का एक मुख्य कारण क्या है?
उन सभी लोगों के लिए, जो देश की श्रम शक्ति में हैं, कार्य के अवसरों का अभाव (बेरोजगारी)।
10.
पूंजी निर्माण की उच्च दर को सकारात्मक विशेषता क्यों माना जाता है?
क्योंकि यह उच्च बचत (31.7%) और निवेश (36.6%) के अनुपात को दर्शाती है, जो विकास के लिए आवश्यक है।
11.
भारत को नियोजित अर्थव्यवस्था क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इसकी विकास प्रक्रिया पंचवर्षीय योजनाओं के द्वारा निरंतर चल रही है।
12.
नियोजन के द्वारा देश सर्वप्रथम क्या करता है?
देश सर्वप्रथम अपनी प्राथमिकताएं तय करता है और उन्हें प्राप्त करने के लिए वित्तीय अनुमान उपलब्ध कराता है।
13.
आर्थिक विकास के साथ श्रम शक्ति में क्या प्रवृत्ति देखने को मिलती है?
श्रम शक्ति कृषि क्षेत्र से उद्योग और सेवा क्षेत्र में स्थानांतरित होती है।
14.
खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि का एक महत्वपूर्ण परिणाम बताइए।
भारत की खाद्यान्नों के आयात पर निर्भरता में कमी आई है और लगभग समाप्त हो गई है।
15.
1950-51 में राष्ट्रीय आय में कृषि का कितना अंश था?
56.6 प्रतिशत।
16.
1956 की औद्योगिक नीति ने किस क्षेत्र को महत्वपूर्ण भूमिका देने पर बल दिया?
सार्वजनिक क्षेत्र को।
17.
भारी उद्योगों को अपनाने का एक मुख्य औचित्य क्या था?
यह रोजगार के सृजन में सहायक होगी और कृषि पर बोझ में कमी लाएगी।
18.
1990 के दशक के आरंभ में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में क्या समस्याएँ पाई गईं?
वे आशा के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे थे और कुप्रबंध के कारण हानि उठा रहे थे।
19.
'वैश्वीकरण' (Globalization) का क्या अभिप्राय है?
अंतर्राष्ट्रीय उत्पादकों को घरेलू देश में और घरेलू उत्पादकों को भी विदेशी सीमाओं में स्पर्धा करने के लिए स्वीकृति प्रदान करना।
20.
1991 के बाद औद्योगीकरण की विकास दर धीमी पड़ने का एक कारण क्या था?
अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों से कड़ी स्पर्धा या अपर्याप्त आधारिक संरचना सुविधाओं।
क्र.सं.
प्रश्न
उत्तर
1
आर्थिक नियोजन की प्रक्रिया में 'लक्ष्य' को किस प्रकार निश्चित किया जा सकता है?
लक्ष्य कोई एक विशेष समय अवधि हो सकता है जिसमें समस्या को हल करना है, या कोई एक मात्रा (जैसे उत्पादन, सरकार मात्रा) हो सकती है जिसे प्राप्त करना है।
2
भौतिक संसाधनों के दो उदाहरण दीजिए जिनका आकलन नियोजन प्रक्रिया में आवश्यक है।
भौतिक संसाधनों में ऑफिस की इमारतें, मोटर गाड़ियाँ, फर्नीचर, या लेखन-सामग्री आदि को सम्मिलित किया जाता है।
3
क्रय शक्ति में वृद्धि से व्यक्तियों और पूरे देश को क्या लाभ होता है?
आय में वृद्धि लोगों और देश की क्रय शक्ति को बढ़ाती है, जिससे व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए अधिक वस्तुएँ खरीद सकते हैं और देश विदेशों से आयात के लिए भुगतान कर सकता है।
4
पूंजीगत स्टॉक में कौन सी चीज़ें सम्मिलित हैं?
पूंजीगत स्टॉक में प्लांट, मशीनरी, बैंकिंग तथा बीमा आदि सम्मिलित हैं।
5
उत्पादन के साधनों को उनकी आय किस रूप में प्राप्त होती है?
श्रम को मजदूरी, भूमि तथा भवन के स्वामी को लगान, पूंजी के स्वामी को ब्याज तथा उद्यमी को लाभ के रूप में उत्पादन का मूल्य वितरित किया जाता है।
6
यदि देश श्रम संसाधन का उपयोग करने में असमर्थ है तो इसका क्या परिणाम होता है?
यदि रोजगार के अवसर नहीं हैं तो लोग बेरोजगार रहेंगे, उनका उपयोग नहीं हो पाएगा, आवश्यक उत्पादन की मात्रा का उत्पादन नहीं हो सकता, और इसलिए आय का सृजन नहीं हो सकता।
7
ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश लोग किस प्रकार के होते हैं और उनकी मुख्य समस्या क्या है?
अधिकांश छोटे कृषक और कृषि मजदूर हैं। उनकी मुख्य समस्या यह है कि उनके पास जोतने के लिए अपनी भूमि नहीं है और वे दैनिक/साप्ताहिक मजदूरी पर कार्य की तलाश में घूमते रहते हैं।
8
भूस्वामी और गरीब के बीच संपत्ति की विषमता क्यों बनी रहती है?
भूस्वामी अपनी संपत्तियों पर अधिक आय कमाते हैं और उत्तराधिकार नियमों के कारण संपत्ति उनकी भावी पीढ़ी के पास ही रहती है, जबकि गरीबों के पास अपनी पीढ़ियों को सुधारने के लिए कुछ नहीं होता।
9
अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए क्या सुधार आवश्यक हैं?
मानवीय संसाधनों की गुणवत्ता में सुधार करके तथा उद्योगों और सेवा क्षेत्रक के विकास द्वारा भारत की GDP की संरचना में परिवर्तन करना आवश्यक है।
10
नियोजन के दो मुख्य उद्देश्य कौन से हैं जो सामाजिक न्याय प्राप्त करने के लिए आवश्यक हैं?
आर्थिक संवृद्धि, रोजगार में वृद्धि, आय की असमानताओं में कमी, और गरीबी में कमी आदि सभी उद्देश्य सामाजिक न्याय प्राप्त करने के लिए आवश्यक हैं।
11
नियोजन की आवश्यकता क्यों होती है? कोई एक कारण बताइए।
नियोजन आवश्यक है ताकि व्यर्थ के खर्चों से बचा जा सके, लागत को न्यूनतम किया जा सके, और लक्ष्यों को तय समय में प्राप्त किया जा सके।
12
द्वितीय योजना में औद्योगीकरण की व्यूह रचना को अपनाने का एक तर्क कृषि से संबंधित बताइए।
औद्योगीकरण स्वयं कृषि के विकास के लिए भी आवश्यक है, क्योंकि कृषि क्षेत्र को औद्योगिक मशीनें तथा उपकरण, जैसे-पंप सेट, ट्रैक्टर आदि की आवश्यकता होती है।
13
LPG मॉडल का कार्यान्वयन किन समस्याओं के कारण हुआ?
यह सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में कुप्रबंध, श्रम संबंधित समस्याओं, और आधे से अधिक इकाइयों के घाटे में चलने के कारण हुआ।
14
उदारीकरण के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को प्रबंध संपादन में क्या अधिकार दिए गए?
उन्हें 'सहम्मति पत्र' (MOU) पर हस्ताक्षर कर प्रबंध संपादन में स्वायत्तता अधिकार दिए जाएँगे, परंतु वे उत्तरदायी भी होंगे।
15
लाइसेंस प्रणाली हटाने का एक सकारात्मक परिणाम क्या हुआ?
रुचि रखने वाले व्यक्तियों को अपनी औद्योगिक गतिविधि बिना सरकारी अनुमति लिए आरंभ करने के लिए स्वीकृति दे दी गई।
16
निजी क्षेत्र के प्रवेश से उपभोक्ता को क्या लाभ हुआ?
दूसरी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के कारण उत्पादन तथा सेवाओं की गुणवत्ता में गिरावट को रोका जा सका, जिससे प्रमुख रूप से उपभोक्ता को लाभ हुआ।
17
भारत ने वैश्वीकरण के अंतर्गत विदेशी कंपनियों को क्या अनुमति दी?
भारत ने विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग की स्थिति में उन्हें 51 प्रतिशत अथवा अधिक अंश रखने की भी स्वीकृति दी, ताकि वे स्वामियों की भाँति स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।
18
नियोजन की अवधि में खाद्यान्नों के उत्पादन में क्या उपलब्धि रही है?
खाद्यान्नों का उत्पादन प्रथम योजना के आरंभ में 5.1 करोड़ टन से बढ़कर 2011-12 में 25.74 करोड़ टन हो गया है।
19
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास में भारत की क्या स्थिति है?
तकनीकी तथा कुशल मानव शक्ति में वृद्धि हुई है, और भारत अब मध्य पूर्व तथा अफ्रीका आदि में अनेक देशों में अपने तकनीकी विशेषज्ञ भेजने में सक्षम है।
20
काले धन से समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?
काला धन मुद्रा स्फीति उत्पन्न करता है और यह आय के वितरण में विषमता का एक मूल कारण है।
3. लघुत्रात्मक प्रश्न (10 प्रश्न)
ये प्रश्न संक्षिप्त पैराग्राफ या 3-4 वाक्यों में उत्तर की मांग करते हैं।
प्रश्न: योजना आयोग की स्थापना किस उद्देश्य से की गई थी और इसकी भूमिका क्या थी? उत्तर: योजना आयोग की स्थापना स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू जी ने 1950 में की थी. इसका प्रमुख कार्य देश के संसाधनों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाना तथा उनको प्रभावशाली एवं संतुलित ढंग से प्रयोग करने के लिए सुझाव देना था. आयोग ने ही प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) की अवधि के लिए योजना तैयार की थी.
प्रश्न: आर्थिक नियोजन की प्रक्रिया में अंतिम उपलब्धि प्राप्त न होने तक सामयिक पुनरावलोकन क्यों किया जाना चाहिए? उत्तर: सामयिक पुनरावलोकन इसलिए करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर चीज़ सुचारू रूप से चल रही है. यदि कोई त्रुटियाँ हैं तो उन्हें ठीक किया जा सके, अथवा कार्य करने के ढंग को रूपांतरित किया जा सके, जब तक कि अंतिम लक्ष्य प्राप्त न कर लिया जाए.
प्रश्न: वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि का अर्थव्यवस्था के लिए क्या अर्थ है और इसके लिए क्या आवश्यक है? उत्तर: वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि का अर्थ है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रकों में उत्पादन का स्तर पहले से अधिक है. भारत की बढ़ती हुई जनसंख्या की आवश्यकताओं को संतुष्ट करने के लिए प्रत्येक वर्ष उत्पादन में वृद्धि प्राप्त करनी है. इस ऊँची दर को प्राप्त करने के लिए आधारिक संरचना तथा पूंजीगत स्टॉक में निवेश की दर को बढ़ाना आवश्यक है.
प्रश्न: नियोजन द्वारा आय की विषमताओं को कम करने का उद्देश्य क्यों रखा गया? उत्तर: भारत में एक बड़ा वर्ग निम्न आय वाला है, जबकि कुछ लोग बहुत ऊँचे आय स्तर वाले धनवान हैं. गरीब लोग क्रय शक्ति के अभाव में बाजार को सहारा नहीं दे पाते, जबकि अमीर अपने बेकार के उपभोग में वृद्धि करते हैं. अधिकतर सामाजिक बुराइयाँ विषमता के कारण ही उत्पन्न होती हैं, अतः योजनाकारों ने नियोजन द्वारा इन विषमताओं को कम करने का उद्देश्य रखा.
प्रश्न: स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारतीय अर्थव्यवस्था की व्यावसायिक ढाँचे का झुकाव कैसा था और इसे बदलने के लिए क्या आवश्यक था? उत्तर: स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के GDP में प्रमुख योगदान देने वाला व्यावसायिक ढाँचे का झुकाव कृषि की ओर ही रहा. इसका कारण अल्पविकसित औद्योगिक तथा सेवा क्षेत्रक तथा अच्छी शिक्षा और जनसंख्या में कौशल विकास का अभाव था. इस प्रवृत्ति को उल्टा करने के लिए मानवीय संसाधनों की गुणवत्ता में सुधार करके तथा उद्योगों और सेवा क्षेत्रक के विकास द्वारा अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण करना आवश्यक था.
प्रश्न: भारत ने अपनी पहली पंचवर्षीय योजना में किस प्रकार की व्यूह रचना अपनाई थी? उत्तर: प्रथम योजना अवधि (1951-56) में किसी विशेष व्यूह रचना का पालन नहीं किया गया. इस बात को ध्यान में रखते हुए कि अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी और भोजन की कमी को दूर करना तत्कालिक विचारणीय विषय था, भारत सरकार ने कृषि पर अधिक बल दिया. यह योजना एक बड़ी सफलता थी, जिसके कारण भारत भविष्य में दीर्घ अवधि वाली व्यूह रचना अपनाने की स्थिति में आ गया.
प्रश्न: भारी उद्योगों की व्यूह रचना को अपनाने के बाद भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र का सृजन क्यों किया? उत्तर: भारी उद्योगों की व्यूह रचना को अपनाने के पश्चात् भारत सरकार ने ऐसे उद्योगों की स्थापना तथा प्रबंध के लिए सार्वजनिक क्षेत्र का सृजन किया. इसका कारण यह था कि ये मूलभूत उद्योग अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी होते हैं और अन्य उद्योगों के लिए आवश्यक मशीन तथा उपस्करों का उत्पादन करते हैं. इस प्रकार, सरकार ने SAIL, BALCO, BHEL आदि जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की स्थापना की.
प्रश्न: उदारीकरण की नीति के अंतर्गत सरकार ने लाइसेंस प्रणाली को समाप्त करने का निर्णय क्यों लिया? उत्तर: लाइसेंस प्रणाली के कारण कोई भी निजी व्यक्ति या संगठन औद्योगिक गतिविधि आरंभ करने के लिए सरकार से अनुमति लेता था. इस प्रणाली ने लाइसेंस प्राप्त करने में देरी को जन्म दिया और सरकारी कर्मचारियों ने फाइल निपटाने के लिए रिश्वत लेना आरंभ कर दिया. इन भ्रष्ट तरीकों ने सरकार को बदनाम किया, अतः 1991 में सरकार ने लाइसेंस प्रणाली को छोड़ देने का निश्चय किया.
प्रश्न: आर्थिक नियोजन की उपलब्धि के रूप में शिक्षा के विकास पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। उत्तर: नियोजन का सबसे अधिक दीप्तिमान क्षेत्र भारत में शिक्षा का विकास रहा है. विद्यालय स्तर पर बच्चों के नामांकन में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है. साथ ही, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अच्छा विकास हुआ है. उदाहरण के लिए, भारत में 378 विश्वविद्यालय और 18,064 कॉलेज मौजूद हैं, जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
प्रश्न: भारत में नियोजन की असफलता के कारण आय और संपत्ति की विषमताओं पर क्या प्रभाव पड़ा है? उत्तर: नियोजन के बावजूद आय और परिसंपत्तियों के वितरण में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं हुआ है, जिसके फलस्वरूप विषमताएँ अभी भी मौजूद हैं. भूमि जोतों वाली संख्या की तुलना में भूमिहीन कृषि श्रमिकों की संख्या बहुत अधिक है. औद्योगीकरण की प्रक्रिया ने कुछ बड़े औद्योगिक घरानों की सहायता की है, जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक संपत्ति कुछ ही हाथों में केंद्रित हो गई है.
4. निबंधात्मक प्रश्न (5 प्रश्न)
ये प्रश्न व्यापक और विस्तृत उत्तर की मांग करते हैं।
प्रश्न: भारत में आर्थिक नियोजन की प्रक्रिया में शामिल विभिन्न चरणों की विस्तार से व्याख्या कीजिए। उत्तर: आर्थिक नियोजन एक व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसमें निम्नलिखित चरण सम्मिलित होते हैं:
समस्याओं की सूची और प्राथमिकता तय करना: सर्वप्रथम, अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूद सभी समस्याओं की सूची तैयार की जाती है. इसके बाद, सूची का पुनः क्रम प्राथमिकता के आधार पर तय किया जाता है, जिसमें तुरंत समाधान आवश्यक वाली समस्याओं को प्रथम स्थान दिया जाता है. इसमें अल्पकाल और दीर्घकाल में हल की जाने वाली समस्याओं की पहचान भी शामिल है.
लक्ष्यों और संसाधनों का आकलन: इच्छित उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए समय अवधि (जैसे प्रथम वर्ष में कितनी समस्या हल होगी) या मात्रा (जैसे उत्पादन का लक्ष्य) के रूप में लक्ष्य निश्चित किए जाते हैं. इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक संसाधनों (वित्तीय, मानव और भौतिक) की मात्रा का आकलन किया जाता है.
संसाधनों का प्रबंध और क्रियान्वयन: योजनाकारों को बजट बनाकर वित्तीयन के विभिन्न स्रोतों (जैसे कर राजस्व, बैंक ऋण) को बताना चाहिए और उनसे कोष एकत्र करने की मात्रा निश्चित करनी चाहिए. मानव शक्ति के प्रकार और संख्या का आकलन कर, एक बार जब संसाधनों का प्रबंध हो जाए, तो व्यवस्थित ढंग से क्रियान्वयन की प्रक्रिया आरंभ होती है.
सामयिक पुनरावलोकन: यह सुनिश्चित करने के लिए कि हर चीज़ सुचारू रूप से चल रही है और यदि कोई त्रुटियाँ हैं तो उन्हें ठीक करने के लिए या कार्य करने के ढंग को रूपांतरित करने के लिए, अंतिम उपलब्धि प्राप्त न होने तक सामयिक पुनरावलोकन किया जाना चाहिए.
ाहिए.
प्रश्न: भारत में नियोजन के अंतर्गत आय की विषमताओं में कमी और गरीबी में कमी के उद्देश्यों की विस्तार से चर्चा कीजिए। उत्तर:
आय की विषमताओं में कमी: भारत में आय के स्तर के संदर्भ में बड़ी असमानताएँ हैं, जहाँ एक बड़ा वर्ग गरीब है और कुछ बहुत ऊँचे आय स्तर वाले धनवान हैं. यह असमानता सामाजिक दृष्टिकोण से एक प्रमुख चिंता का विषय है, खासकर स्त्रियों और सीमांतित वर्गों (अनुसूचित जाति/जनजाति) के लिए. असमानता का प्रमुख कारण परिसंपत्तियों, जैसे प्रति व्यक्ति भूमि जोत और पैतृक संपत्ति, का असमान वितरण है. परिणामस्वरूप, धनवान, धनवान ही रहता है और गरीब, गरीब ही रहता है. नियोजन का उद्देश्य इन विषमताओं को कम करना था, क्योंकि ये सामाजिक बुराइयाँ उत्पन्न करती हैं और बाजार को अस्थिर करती हैं.
गरीबी में कमी: नियोजन का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य 'गरीबी में कमी करना' है. स्वतंत्रता प्राप्ति के समय 50 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या गरीब थी, और 2014 तक भी लगभग 27-28 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी में रहती है. गरीबी वह स्थिति है जिसमें एक व्यक्ति अपने जीवन की न्यूनतम मूलभूत आवश्यकताओं की संतुष्टि करने में असमर्थ है. रोजगार का अभाव और आय-संपत्ति की विषमताएँ गरीबी का एक प्रमुख कारण हैं. नियोजन के माध्यम से गरीबी को पूरी तरह से हटाकर, मानवीय गरिमा को सुनिश्चित करने और विश्व में भारत की छवि को सुधारने का लक्ष्य रखा गया.
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प्रश्न: 1991 में लाई गई 'नई आर्थिक नीति' (LPG मॉडल) की मुख्य विशेषताओं (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) की व्याख्या कीजिए। उत्तर: 1991 में, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के कुप्रबंध, घाटे और सर्वांगीण विकास में कमी जैसी समस्याओं को देखते हुए, सरकार एक नई आर्थिक नीति लाई, जिसे LPG मॉडल कहा जाता है.
उदारीकरण (Liberalisation): इसका अर्थ है देश में उद्योगों की स्थापना तथा चलाने में सरकार द्वारा नियंत्रण एवं नियमों को हटाना. इसकी प्रमुख विशेषता लाइसेंस प्रणाली को समाप्त करना था, जिससे निजी व्यक्ति बिना सरकारी अनुमति के औद्योगिक गतिविधि आरंभ कर सकें. इसका उद्देश्य सरकारी हस्तक्षेप को कम करके, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को प्रबंध संपादन में स्वायत्तता प्रदान करना भी था.
निजीकरण (Privatisation): इसका अभिप्राय उन औद्योगिक गतिविधियों को निजी क्षेत्र के लिए खोलना था जो केवल सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित थीं (नाभिकीय ऊर्जा और रक्षा को छोड़कर). चूंकि सार्वजनिक क्षेत्र के एकाधिकार के कारण गुणवत्ता में गिरावट आई थी, इसलिए निजीकरण का उद्देश्य बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना था. इस नीति के तहत सरकार ने कुछ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश भी किया.
वैश्वीकरण (Globalisation): यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें विश्व के विभिन्न देशों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं, श्रम, प्रौद्योगिकी और निवेश आदि के स्वतंत्र प्रवाह के प्रयास किए जाते हैं. वैश्वीकरण के तहत भारत ने आयातित वस्तुओं पर शुल्क कम या समाप्त किया, निर्यात को प्रोत्साहित किया, और विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग की स्थिति में अधिक अंश (51%+) रखने की अनुमति दी, जिससे अद्यतन प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण सुगम हो सके.
सके.
प्रश्न: भारत में आर्थिक नियोजन की प्रमुख उपलब्धियों का विवरण दीजिए। उत्तर: नियोजन के 60 वर्ष से अधिक के अनुभव में भारत ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं:
आर्थिक संवृद्धि: प्रथम पंचवर्षीय योजना में लक्ष्य (2.1%) के विपरीत 3.6% की वृद्धि दर प्राप्त हुई. खाद्यान्नों का उत्पादन 5.1 करोड़ टन से बढ़कर 25.74 करोड़ टन हो गया है, जिसमें चावल और गेहूँ का उत्पादन उल्लेखनीय रहा है. उद्योगों में विविधता आई है और इस्पात, एल्यूमीनियम, रसायन आदि के उत्पादन में उन्नति हुई है.
आधारिक संरचना का सृजन: सड़कों और रेलवे के जाल का विस्तार हुआ है. सिंचाई और जल-विद्युत परियोजनाओं के विस्तार से कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिला है, और मोबाइल टेलीफोन एवं इंटरनेट के रूप में दूरसंचार के जाल में अत्यधिक विस्तार हुआ है.
शिक्षा और प्रौद्योगिकी का विकास: शिक्षा का विकास सबसे अधिक दीप्तिमान क्षेत्र रहा है, जहाँ स्कूली स्तर पर नामांकन में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, तथा 378 विश्वविद्यालय और 18,064 कॉलेज उच्च शिक्षा के क्षेत्र को दर्शाते हैं. तकनीकी और कुशल मानव शक्ति में वृद्धि के साथ, भारत अंतरिक्ष विकास और नाभिकीय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ा है और अब विदेशी विशेषज्ञों पर निर्भरता कम हुई है.
विदेशी व्यापार का विस्तार: देश में औद्योगीकरण के कारण भारत की पूंजीगत वस्तुओं के आयात पर निर्भरता कम हुई है, और अब भारत निर्मित तथा इंजीनियरिंग माल का निर्यात करने में भी सक्षम है.
्षम है.
प्रश्न: भारत में नियोजन की कमियों या असफलताओं का मूल्यांकन कीजिए। उत्तर: ऊपर बताई गई उपलब्धियों के बावजूद, भारत में नियोजन को अभी भी कई कार्य पूर्ण रूप से प्राप्त करने हैं:
गरीबी और विषमताओं को दूर करने में असफलता: नियोजन के 60 वर्षों के बाद भी, 24 करोड़ से भी अधिक लोग अभी भी निरपेक्ष गरीबी में रह रहे हैं. आय और परिसंपत्तियों के वितरण में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप भूमिहीन कृषि श्रमिकों की संख्या बहुत अधिक है, और आर्थिक संपत्ति कुछ ही औद्योगिक घरानों में केंद्रित हो गई है.
बेरोजगारी की समस्या बनी हुई: आय और उत्पादन में वृद्धि के बावजूद, जनसंख्या और श्रम शक्ति में तीव्र वृद्धि के कारण रोजगार की स्थिति में अधिक सुधार नहीं हुआ है. आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, भारत की बेरोजगारी की दर 6.6 प्रतिशत है, और हर वर्ष नौकरियों के सृजन के अभाव में संचित बेरोजगारी भी पाई जाती है.
भ्रष्टाचार तथा काले धन को कम करने में असफलता: सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार एक गंभीर चिंता का विषय है. रिश्वत, कर भुगतान न करना, और राजनीतिक दबाव जैसे भ्रष्टाचार के विभिन्न रूप काले धन को जन्म देते हैं, जो हिसाब-किताब में नहीं आता. यह काला धन मुद्रा स्फीति उत्पन्न करता है और आय के वितरण में विषमता का एक मूल कारण है, जिससे साधारण नागरिक गरीब बन जाते हैं.
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