2-(क) पूर्वयुगीन भारतीय इतिहास
* इतिहास का महत्व: इतिहास हमें अपने पूर्वजों की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक, शैक्षणिक, वैज्ञानिक, कलात्मक और सांस्कृतिक प्रगति के बारे में बताता है। यह एकता की भावना पैदा करता है और भविष्य को संवारने में मदद करता है।
* जानकारी के स्रोत:
* लिखित साहित्य: हाल के इतिहास के लिए उपलब्ध।
* पुराने समय का इतिहास: ताड़ के सूखे पत्ते, शिलालेख, अभिलेख।
* प्राचीनतम इतिहास: मिट्टी के बर्तन, औजारों का वैज्ञानिक विश्लेषण।
सिंधु-सरस्वती सभ्यता
* क्षेत्र: भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम का बड़ा भाग, सिंधु और सरस्वती नदियों के किनारे विकसित हुई।
* खोज: 1921 में दयाराम साहनी (हड़प्पा) और 1922 में राखालदास बनर्जी (मोहनजोदड़ो) द्वारा उत्खनन।
* प्रमुख स्थल:
* हड़प्पा: पाकिस्तान (रावी नदी), विशाल अन्नागार।
* मोहनजोदड़ो: पाकिस्तान (सिंधु नदी), "मृतकों का टीला", विशाल स्नानागार।
* कालीबंगा: राजस्थान (हनुमानगढ़ जिला), जुते हुए खेत के प्रमाण, "काली चूड़ियां"।
* बनावली: हरियाणा (हिसार जिला), दुर्ग और निचला नगर एक ही घेरे में, अग्नि वेदियां।
* सुरकोटड़ा: गुजरात (कच्छ जिला), घोड़े की हड्डियां।
* लोथल: अहमदाबाद (भोगवा नदी), प्रमुख बंदरगाह, व्यवस्थित नगर नियोजन।
* धोलावीरा: गुजरात (कच्छ जिला), नगर तीन भागों में विभाजित (दुर्ग, मध्यम नगर, निचला नगर)।
* अन्य स्थल: राखीगढ़ी, आलमगीरपुर, रोपड़, भगवानपुरा।
वैदिक सभ्यता
* आधार: वेदों पर आधारित, इसलिए "वैदिक सभ्यता" कहलाई।
* विभाजन:
* पूर्व-वैदिक काल (ऋग्वैदिक काल):
* ऋग्वेद का प्रतिनिधित्व।
* सिंधु और सरस्वती नदियां महत्वपूर्ण।
* "सप्त सैंधव प्रदेश" में निवास।
* इंद्र, अग्नि, वरुण प्रमुख देवता।
* पर्दाप्रथा का उल्लेख नहीं, मौखिक शिक्षा (गुरुकुल)।
* वस्तु विनिमय द्वारा व्यापार।
* उत्तर-वैदिक काल:
* सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद की रचना।
* ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक, उपनिषदों की रचना।
* वर्ण व्यवस्था: समाज चार वर्गों में विभक्त (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र)। शुरुआत में कर्म पर आधारित, बाद में जन्म पर आधारित।
* यज्ञ: राजा अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए राजसूय, अश्वमेध, वाजपेय जैसे यज्ञ करते थे।
* आश्रम व्यवस्था: जीवन को चार भागों में विभाजित (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास)।
जैन मत एवं बौद्ध मत
* उदय का कारण (600 ईसा पूर्व से 200 ईसा पूर्व): वैदिक धर्म के कर्मकांडी होने और यज्ञों के महंगे होने के कारण सुधारों की मांग।
* जैन मत:
* तीर्थंकर: जैन धर्म के संस्थापकों को तीर्थंकर कहते हैं।
* प्रथम तीर्थंकर: ऋषभदेव।
* 24वें तीर्थंकर: महावीर स्वामी (वास्तविक संस्थापक)।
* जन्म: 599 ईसा पूर्व, वैशाली के निकट कुंडग्राम।
* बचपन का नाम: वर्धमान।
* माता-पिता: सिद्धार्थ (पिता), त्रिशला (माता)।
* गृह त्याग: 30 वर्ष की आयु में।
* निधन: 527 ईसा पूर्व, पावापुरी में।
* सिद्धांत: कठोर तप और वैराग्य पर बल।
* पंचमहाव्रत: अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (संग्रह न करना), ब्रह्मचर्य (इंद्रिय नियंत्रण)।
* शाखाएं: श्वेतांबर और दिगंबर।
* बौद्ध मत:
* संस्थापक: महात्मा बुद्ध।
* जन्म: 563 ईसा पूर्व, लुंबिनी वन (नेपाल)।
* बचपन का नाम: सिद्धार्थ।
* माता-पिता: शुद्धोधन (पिता), महामाया (माता)। मौसी प्रजापति गौतमी ने पाला।
* महाभिनिष्क्रमण (गृह त्याग): 29 वर्ष की आयु में (चार घटनाओं से प्रेरित: वृद्ध, रोगी, शव, संन्यासी)।
* ज्ञान प्राप्ति: 35 वर्ष की आयु में, पीपल वृक्ष के नीचे।
* प्रथम उपदेश: सारनाथ में।
* चार आर्य सत्य: दुःख, दुःख समुदाय, दुःख निरोध, दुःख निरोध मार्ग।
* दुःख से मुक्ति: अष्टांगिक मार्ग।
* निधन: 483 ईसा पूर्व, कुशीनगर में।
* शाखाएं: हीनयान और महायान।
सोलह महाजनपद
* समय: प्रारंभिक भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ईसा पूर्व।
* स्रोत: बौद्ध अंगुत्तर निकाय में उल्लेख।
* सबसे शक्तिशाली: मगध महाजनपद।
* मगध पर शासन करने वाले वंश:
* हर्यक वंश:
* संस्थापक: बिंबिसार (वास्तविक)।
* विस्तार: विवाह संबंधों से (कौशल, वैशाली, मद्र के राजपरिवार)।
* अजातशत्रु: बिंबिसार का पुत्र, प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन राजगृह में।
* अंतिम शासक: नागदशक।
* शिशुनाग वंश:
* संस्थापक: शिशुनाग।
* विस्तार: अवंति और वत्स को मगध में मिलाया।
* कालाशोक: द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में।
* नंद वंश:
* स्थापना: महापद्मनंद (शक्तिशाली शासक)।
* धनानंद: अंतिम शासक, स्वार्थी और लोभी। चाणक्य (विष्णुगुप्त) को अपमानित किया।
* पतन: चाणक्य और चंद्रगुप्त ने धनानंद का वध कर मौर्य वंश की नींव डाली।
मौर्य वंश
* संस्थापक: चंद्रगुप्त मौर्य।
* महत्वपूर्ण घटनाएं:
* 305 ईसा पूर्व में सेल्यूकस को हराया, संधि हुई (मेगस्थनीज को चंद्रगुप्त के दरबार में भेजा, मेगस्थनीज ने 'इंडिका' लिखी)।
* सुदर्शन झील का निर्माण।
* अंतिम दिनों में जैन मुनि भद्रबाहु से दीक्षा लेकर श्रवणबेलगोला चले गए।
* अन्य शासक: बिंदुसार और अशोक।
* अंतिम शासक: बृहद्रथ।
अशोक महान
* उत्तराधिकार: बिंदुसार की मृत्यु के बाद शासक बने।
* कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व):
* अशोक की विजय, लेकिन भीषण रक्तपात से हृदय परिवर्तित।
* युद्ध न करने का संकल्प लिया, अहिंसा और सदाचार पर चले।
* धम्म:
* प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए नियमों का संकलन (अभिलेखों में "धम्म" कहा गया)।
* धम्म महामात्र नामक अधिकारी नियुक्त किए।
* धार्मिक यात्राएं प्रारम्भ की (दसवें वर्ष में बोधगया)।
* शांति और धर्म के प्रचार के लिए विदेशों में प्रचारक भेजे, बौद्ध धर्म विश्व में फैला।
* तीसरी बौद्ध संगीति: पाटलिपुत्र में।
* लोक-कल्याणकारी राज्य:
* मार्ग बनवाए, छायादार वृक्ष लगवाए, विश्राम गृह, कुएं।
* पशु-पक्षियों की हत्या पर रोक, बड़ों की आज्ञा पालन पर बल।
* प्रजा को अपनी संतान समझते थे।
* विचारों को पत्थर के स्तंभों और शिलाओं पर खुदवाया।
* महत्व: विश्व इतिहास में अद्वितीय स्थान, उनके सिद्धांत आज भी शांति स्थापना में मार्गदर्शक।
मौर्योत्तर काल
* परिदृश्य: मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद छोटे राजवंशों का उदय। यूनानी, शक, पार्थियन, कुषाण जैसे विदेशी स्थानीय जनता में घुलमिल गए।
* शुंग वंश:
* संस्थापक: पुष्यमित्र शुंग (बृहद्रथ की हत्या की)।
* कार्य: वैदिक धर्म की पुनः स्थापना (वैदिक पुनर्जागरण काल)। दो अश्वमेध यज्ञ किए।
* अंतिम शासक: देवभूति।
* कण्व वंश:
* संस्थापक: वासुदेव (देवभूति की हत्या की)।
* अंतिम शासक: सुशर्मा।
* सातवाहन वंश:
* संस्थापक: सिमुक (सुशर्मा की हत्या की)।
* गौतमीपुत्र सातकर्णि: 23वें शासक, वेदों का आश्रयदाता।
* यज्ञश्री सातकर्णि: शकों से खोया राज्य पुनः प्राप्त किया।
* कुषाण वंश:
* महान शासक: कनिष्क।
* चौथी बौद्ध संगीति: कश्मीर में।
* शक संवत्: 78 ई. में चलाया।
* दरबारी विद्वान: वसुमित्र, अश्वघोष, नागार्जुन, चरक (चरक संहिता के रचयिता)।
* कलिंग का राजा खारवेल:
* क्षेत्र: आधुनिक उड़ीसा और उत्तरी आंध्र प्रदेश का कुछ भाग।
* धर्म: जैन मतावलंबी।
* कार्य: महान प्रशासक और योद्धा, सड़कें बनवाईं, बगीचे लगवाए।
* दक्षिण भारत: कृष्णा और तुंगभद्रा नदी के दक्षिण का क्षेत्र।
* चोल:
* महत्वपूर्ण शासक: करिकाल।
* कार्य: चेर और पांड्य राज्यों की संयुक्त सेना को हराया। कई नहरें बनवाई (कावेरी का पानी सिंचाई के लिए)। वैदिक धर्म का अनुयायी।
* पांड्य:
* क्षेत्र: कावेरी नदी के दक्षिण में।
* राजधानी: मदुरै।
* महत्व: व्यापार, कला और साहित्य को बढ़ावा मिला।
गुप्त वंश
* समय: एक सुदृढ़ और शक्तिशाली राज्य।
* श्रीगुप्त: गुप्त वंश का प्रथम शासक।
* चंद्रगुप्त प्रथम:
* वास्तविक संस्थापक: 319-320 ई. में राज्यारोहण।
* गुप्त संवत्: चलाया।
* विवाह: लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से।
* समुद्रगुप्त:
* चंद्रगुप्त प्रथम के बाद शासक।
* गुप्त साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार हुआ।
* विजयों का उल्लेख: हरिषेण रचित प्रयाग प्रशस्ति में।
* चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य):
* विजय: शक शासक रुद्रसिंह तृतीय को हराकर पश्चिमी भारत में शकों का उन्मूलन किया।
* उपाधियां: विक्रमादित्य और शकारि।
* वैवाहिक संबंध: नागवंश की राजकुमारी कुबेरनागा से विवाह। पुत्री प्रभावती गुप्त का विवाह वाकाटक नरेश रुद्रसेन द्वितीय से।
* चीनी यात्री: फाह्यान इनके शासन काल में भारत आया।
* नवरत्न: नौ विद्वान दरबार में रहते थे (कालिदास, धन्वंतरि, वराहमिहिर प्रमुख)।
* स्कंदगुप्त: सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण करवाया।
* अंतिम शासक: विष्णुगुप्त।
गुप्तोत्तर एवं पूर्व मध्यकालीन भारत
हर्षवर्धन का युग
* राज्यारोहण: 606 ई. में, हर्ष संवत् चलाया।
* कार्य: प्रत्येक पांचवें वर्ष प्रयाग में महोत्सव करके दान करते थे।
* वर्णन: चीनी यात्री ह्वेनसांग और दरबारी कवि बाण ने हर्ष के राज्य का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है।
* प्रशासन: बेगारी नहीं करवाई जाती थी।
* जनकल्याण: अनेक चिकित्सालय और धर्मशालाएं बनवाईं। बौद्धों और हिंदुओं को अनुदान दिया।
* साहित्य: उच्च कोटि के कवि थे, संस्कृत में 'नागानन्द', 'रत्नावली' और 'प्रियदर्शिका' नामक तीन नाटकों की रचना की।
* शिक्षा: नालंदा विश्वविद्यालय शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र था।
* बाणभट्ट: हर्ष की जीवनी 'हर्षचरितम्' और 'कादम्बरी' की रचना की।
दक्कन के राजवंश
* सातवाहन: लंबे समय तक शासन किया।
* वाकाटक: सातवाहनों के पतन के बाद उभरे, मजबूत राज्य स्थापित किया।
* चालुक्य (वातापी और कल्याणी के):
* प्रभावशाली राजा: पुलकेशिन द्वितीय।
* संघर्ष: राष्ट्रकूटों और पल्लवों से लड़ते रहे।
* पतन: 753 ई. के बाद राष्ट्रकूटों ने परास्त कर दिया।
मध्यकालीन भारत
* प्रारंभ: भारत पर अरब एवं तुर्क आक्रमण के साथ।
* मुस्लिम शासन: यूरोपियनों के आने तक रहा, लेकिन भारत एक सांस्कृतिक राष्ट्र के रूप में जीवित रहा।
* अरब आक्रमण:
* पहले मुस्लिम आक्रमणकारी।
* 712 ई.: मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में अरब सेना ने राजा दाहिर से कड़ा संघर्ष किया। राजा दाहिर ने प्राणों की आहुति दी, लेकिन लगभग 300 वर्षों तक भारत पर कोई आक्रमण नहीं हुआ।
* तुर्की आक्रमण:
* उद्देश्य: भारत से धन लूटना और इस्लाम का प्रचार करना।
* महमूद गजनवी:
* आक्रमण: 1000 ई. से 1027 ई. के बीच कई बार।
* सोमनाथ मंदिर: 1025 ई. में आक्रमण कर अकूत धन लूटा।
* मुहम्मद गोरी:
* तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): पृथ्वीराज चौहान से कई बार हारा।
* तराइन का दूसरा युद्ध (1192 ई.): षड्यंत्रपूर्वक पृथ्वीराज चौहान को हराया। यह युद्ध भारतीय इतिहास का निर्णायक युद्ध था, जिसके बाद उत्तरी भारत में तुर्की सत्ता स्थापित हुई।
* मृत्यु: 1206 ई. में।
* गुलाम: कुतुबुद्दीन ऐबक ने गुलाम वंश की नींव रखी, दिल्ली सल्तनत की शुरुआत हुई।
दिल्ली सल्तनत
* गुलाम वंश:
* संस्थापक: कुतुबुद्दीन ऐबक (भारत में गुलाम वंश और दिल्ली सल्तनत का संस्थापक, पहला मुस्लिम शासक)।
* निर्माण: अजमेर में संस्कृत पाठशाला को तोड़कर 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' मस्जिद बनवाई।
* मृत्यु: 1210 ई. में लाहौर में पोलो खेलते समय घोड़े से गिरकर।
* अन्य शासक: इल्तुतमिश, बलबन। रजिया एक महिला सुल्तान थी।
* खिलजी वंश:
* स्थापना: जलालुद्दीन खिलजी ने 1290 ई. में अंतिम गुलाम शासक कैकबाद की हत्या कर।
* अलाउद्दीन खिलजी:
* जलालुद्दीन खिलजी की हत्या कर 1296 ई. में शासक बना।
* प्रशासनिक सुधार: बाजार नियंत्रण प्रणाली स्थापित की, घोड़ों को दागना शुरू किया।
* तुगलक वंश:
* स्थापना: गयासुद्दीन तुगलक ने 1320 ई. में।
* मुहम्मद बिन तुगलक:
* "पागल सुल्तान" भी कहा जाता है।
* अविवेकपूर्ण निर्णय: राजधानी दिल्ली से देवगिरी (दौलताबाद) स्थानांतरित की, बाद में दिल्ली वापस लाया। सांकेतिक सिक्के चलाए, जो असफल रहे।
* तैमूर का आक्रमण: 1398 ई. में भारत पर आक्रमण किया।
* लोदी वंश:
* स्थापना: बहलोल लोदी ने 1451 ई. में।
* सिकंदर लोदी: 1504 ई. में आगरा की स्थापना की।
* अंतिम शासक: इब्राहीम लोदी।
* पानीपत का प्रथम युद्ध (1526 ई.): बाबर से पराजित होकर युद्ध के मैदान में मारा गया।
विजयनगर एवं बहमनी साम्राज्य
* विजयनगर साम्राज्य:
* स्थापना: हरिहर एवं बुक्का नामक दो भाइयों ने 1336 ई. में।
* राजवंश: संगम, सालुव, तुलुव, आरवीडु।
* अंतिम शासक (संगम वंश): विरुपाक्ष द्वितीय।
* कृष्णदेवराय (तुलुव): विजयनगर के सबसे महान शासक।
* निर्माण: हजाराराम मंदिर और विट्ठलस्वामी मंदिर बनवाए।
* बाबर की आत्मकथा में: बाबर ने उन्हें भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली हिंदू शासक कहा।
* बहमनी साम्राज्य:
* स्थापना: 1347 ई. में अबुल मुजफ्फर अलाउद्दीन बहमनशाह के नाम से शासक बना।
मुगल वंश
* स्थापना: बाबर ने 1526 ई. में इब्राहीम लोदी को हराकर।
* बाबर:
* वंश: पिता की ओर से तैमूर और माता की ओर से मंगोल।
* पानीपत का प्रथम युद्ध (1526 ई.): इब्राहीम लोदी को हराया।
* खानवा का युद्ध (17 मार्च 1527 ई.): राणा सांगा को हराया, तुलुगमा पद्धति का प्रयोग किया।
* चंदेरी का युद्ध (1528 ई.): मालवा क्षेत्र में मेदिनीराय को हराया।
* हुमायूं:
* सिंहासन: बाबर की मृत्यु के बाद 1530 ई. में 23 वर्ष की आयु में।
* चौसा का युद्ध (1539 ई.): शेर खां (शेरशाह) से हारा, निजाम सिक्का नामक भिश्ती ने जान बचाई।
* कन्नौज का युद्ध (1540 ई.): शेरशाह ने फिर हुमायूं को हराया।
* पुनर्विजय: लंबे निर्वासन के बाद 1555 ई. में बैरम खां के नेतृत्व में मच्छीवाड़ा और सरहिंद युद्ध में सिकंदर शाह को हराकर दिल्ली का तख्त पुनः प्राप्त किया।
* मृत्यु: 1556 ई. में पुस्तकालय की सीढ़ियों से फिसलकर।
* अकबर:
* सिंहासन: हुमायूं के बाद कलानौर में।
* पानीपत का द्वितीय युद्ध (5 नवंबर 1556): बैरम खां और हेमू के बीच, हेमू की हार।
* साम्राज्यवादी: महाराणा प्रताप ने अकबर से समझौता नहीं किया।
* हल्दीघाटी का युद्ध (18 जून 1576): अकबर की सेना (मानसिंह और आसफ खां के नेतृत्व में) और महाराणा प्रताप की सेना के बीच। अकबर प्रताप को पराजित या बंदी नहीं कर पाया।
* जहांगीर: अकबर की मृत्यु के बाद बादशाह बना, नूरजहां का हस्तक्षेप था।
* शाहजहां:
* बचपन का नाम: खुर्रम।
* बीमारी (1657 ई.): दाराशिकोह को साम्राज्य का भार सौंपा।
* उत्तराधिकार युद्ध: शुजा, औरंगजेब, मुराद के बीच युद्ध हुआ, औरंगजेब विजयी हुआ।
* औरंगजेब:
* सिंहासन: 1658 ई. में।
* कार्य: शाहजहां को बंदी बनाया, भाइयों की हत्या की।
* पतन का कारण: धार्मिक और प्रशासनिक नीति के कारण मुगल साम्राज्य का पतन शुरू हुआ।
मराठों का उत्थान एवं शिवाजी महाराज
* महत्व: मराठा शक्ति का उत्कर्ष भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटना।
* श्रेय: शिवाजी को (एक सेनापति ही नहीं, राष्ट्र निर्माता भी)।
* जन्म: अप्रैल 1627 को शिवनेर के किले में।
* वंश: पिता शाहजी भोंसले (मेवाड़ के सिसोदिया), माता जीजाबाई (देवगिरी के यादव)।
* प्रभाव: पूर्वजों की वीरता, जीजाबाई द्वारा रामायण-महाभारत की कहानियां (देश प्रेम, गोरक्षा की भावना)।
* शिक्षा: दादाजी कोंडदेव ने घुड़सवारी और तलवारबाजी सिखाई।
* आध्यात्मिक गुरु: रामदास।
* दुर्गों पर अधिकार: सिंहगढ़, पुरंदर, तोरण, चाकन, कोंडाना, सूपा आदि।
* अफजल खां से संघर्ष (1659 ई.): बीजापुर के अफजल खां ने शिवाजी का धोखे से वध करने की योजना बनाई, लेकिन शिवाजी ने उसका वध कर दिया।
* औरंगजेब से संघर्ष:
* शाइस्ता खां पर आक्रमण (1663 ई.): शिवाजी ने शाइस्ता खां के पूना स्थित लाल महल पर आक्रमण किया, शाइस्ता खां भाग गया।
* सूरत की लूट (1664 ई.): मुगलों की प्रतिष्ठा को गहरा आघात लगा।
* पुरंदर की संधि (1665 ई.): शिवाजी और मुगलों के बीच।
* सूरत की दूसरी लूट: 5 वर्ष बाद।
* राज्याभिषेक: 1674 में रायगढ़ को राजधानी बनाकर वैदिक रीति से।
* निधन: 1680 ई. में।
भक्ति आंदोलन
* उद्देश्य: भारत के सामाजिक-धार्मिक जीवन में सुधार लाना, भक्ति को माध्यम बनाया।
* विशेषताएं: कट्टरता का विरोध, जाति प्रथा की उपेक्षा, स्त्रियों को धार्मिक सम्मेलनों में प्रोत्साहित किया, स्थानीय भाषाओं में उपदेश।
* प्रचारक (दक्षिण भारत): तमिल भक्ति संप्रदाय के आलवार और नयनार भक्त।
* प्रमुख संत:
* रामानुज: दक्षिण भारत से, सगुण ईश्वर की उपासना पर बल दिया।
* रामानंद: रामानुज के शिष्य, इलाहाबाद में जन्म, वाराणसी में शिक्षा। सगुण ईश्वर में विश्वास, भक्ति से मोक्ष, समाज की कुरीतियों का विरोध, समानता पर बल।
* कबीर: रामानंद के शिष्य। हिंदू-मुस्लिम एकता पर बल, कुरीतियों और आडंबरों का विरोध, निराकार ईश्वर में विश्वास, जाति प्रथा का प्रबल विरोध।
* रैदास: रामानंद के प्रमुख शिष्य। निर्गुण एवं निराकार ईश्वर उपासना पर बल, तीर्थयात्रा के विरोधी। प्रसिद्ध उक्ति: "मन चंगा तो कठौती में गंगा।"
* मीरा: मेड़ता के राठौड़ राव रत्नसिंह की पुत्री। पति भोजराज की मृत्यु के बाद संत सेवा और कृष्ण-भक्ति में लीन। कृष्ण की भक्ति में गीत रचे।
* नामदेव: महाराष्ट्र के मध्ययुगीन सुधारक। साधुओं की सेवा और सत्संग में समय व्यतीत करते थे। मराठी भाषा के माध्यम से महाराष्ट्र में नव-चेतना जगाई।
* चैतन्य महाप्रभु: बंगाल के नादिया जिले में जन्म। वैराग्य उत्पन्न होने पर संन्यासी बने। प्रेम और भक्ति का उपदेश दिया। जाति प्रथा का विरोध किया। भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे।
* नानक (गुरु नानक): पंजाब के तलवंडी (ननकाना साहब) में जन्म। युवावस्था में संन्यास लिया। सरल भाषा में उपदेश दिए। आडंबरों, ऊंच-नीच का विरोध। एक मात्र निर्गुण निराकार ईश्वर के प्रति भक्ति और प्रेम पर बल दिया।
* पीपा: गागरोन के खींची वंश के प्रतापी राजा, रामानंद के शिष्य। गृहस्थ जीवन के साथ ईश्वर-भक्ति और साधु-संतों की सेवा का आदेश। राजपाट त्यागकर धर्म प्रचार-प्रसार पर निकले। भेदभाव का विरोध किया।
* दादू: कबीर के अनुयायी, अहमदाबाद में जन्म। अकबर को भी प्रभावित किया। संप्रदायों में एकता और समन्वय चाहते थे। कर्मकांड, जाति प्रथा, मूर्ति पूजा, रूढ़िवादिता का घोर विरोध। उपदेश 'दादूजी की वाणी' और 'दादू रा दूहा' में संग्रहित।
* भक्ति आंदोलन की लोकप्रियता:
* संतों ने जाति-व्यवस्था का विरोध किया, समानता और भाईचारे का स्वागत किया।
* हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित करना भी एक उद्देश्य था।
* सभी संतों ने एकेश्वरवाद पर बल दिया।
* ईश्वर की प्राप्ति केवल भक्ति से, न कि कर्मकांडों से।
* सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों तथा पाखंडों को दूर करने का प्रयास किया।
* धाराएं (उत्तरी भारत में):
* निर्गुण भक्ति: निराकार ईश्वर (कबीर, नानक)।
* सगुण भक्ति: राम और कृष्ण की पूजा (तुलसीदास, सूरदास, रसखान)।
* भाषा का विकास: स्थानीय भाषाओं के विकास को प्रोत्साहित किया।
सिख धर्म
* स्थापना: गुरु नानक देव ने।
* सिद्धांत: ईश्वर को निराकार व सर्वव्यापी माना, भक्ति ही ईश्वर प्राप्ति का श्रेष्ठ साधन। जाति प्रथा, मूर्ति पूजा, कर्मकांड और आडंबरों का घोर विरोध।
* गुरु अंगद: सिख धर्म को लोकप्रिय बनाया।
* गुरुमुखी लिपि में गुरु नानक के उपदेशों का संकलन किया।
* लंगर प्रथा: शुरू की, जिससे ऊंच-नीच की भावना समाप्त हुई और भाईचारा बढ़ा।
* गुरु अर्जुनदेव (पांचवें गुरु):
* पूर्व के गुरुओं की शिक्षाओं का संकलन 'आदिग्रंथ' में किया।
* मुगल-सिख संघर्ष: जहांगीर ने उनकी बढ़ती लोकप्रियता को पसंद नहीं किया। जहांगीर के विरुद्ध बगावत करने वाले शहजादे खुसरो को आशीर्वाद दिया, जिससे जहांगीर ने उन पर जुर्माना लगाया और जुर्माना न चुकाने पर हत्या करवा दी।
* गुरु हरगोविंद साहिब:
* अकाल तख्त की स्थापना की।
* अनुयायियों को शस्त्र-प्रयोग की शिक्षा देना और सैनिक बनाना शुरू किया। जहांगीर ने उन्हें ग्वालियर के किले में बंदी बनाया।
* गुरु हरिराय एवं हरिकिशन: इनके भी मुगल शासकों के साथ संबंध अच्छे नहीं रहे।
* गुरु तेगबहादुर (नौवें गुरु):
* 1664 ई. में गुरु घोषित किए गए।
* औरंगजेब ने उन्हें दिल्ली बुलवाकर इस्लाम स्वीकार करने को कहा। मना करने पर औरंगजेब ने उनकी हत्या करवा दी।
* गुरु गोविंद सिंह (दसवें गुरु):
* सिखों को सशस्त्र संघर्ष के लिए तैयार करने हेतु खालसा दल की स्थापना की।
* उनके दोनों पुत्रों को औरंगजेब द्वारा जीवित दीवार में चुनवा दिया गया।
समाज-सुधार आंदोलन (19वीं शताब्दी)
* महत्व: भारतीय समाज में व्याप्त बुराइयों और आडंबरों को दूर करने का प्रयास।
* प्रमुख संगठन और नेता:
* राजा राममोहन राय:
* उपाधि: आधुनिक भारत के अग्रदूत।
* स्थापना: ब्रह्म समाज (हिंदू समाज की बुराइयों को दूर करने, ईसाई धर्म के बढ़ते प्रभाव को रोकने, एकता स्थापित करने हेतु)।
* विरोध: मूर्ति पूजा, कर्मकांड, बहुविवाह, बाल विवाह, पर्दा प्रथा, छुआछूत।
* मुख्य योगदान: सती प्रथा का विरोध (उन्हीं के प्रयास से सती प्रथा विरोधी कानून बना)।
* देवेंद्रनाथ टैगोर: राजा राममोहन राय के बाद ब्रह्म समाज का नेतृत्व किया।
* केशवचंद्र सेन: टैगोर के बाद नेतृत्व संभाला। ब्रह्म समाज राष्ट्रीय जागरूकता का साधन बना।
* स्वामी दयानंद सरस्वती:
* संस्कृत और वेदों का गहन ज्ञान था।
* विरोध: कुरीतियों, पाखंडों, बहुदेववाद, अवतारवाद, कर्मकांडों का विरोध।
* बल दिया: वेदों की प्रामाणिकता पर ("वेद विद्या और ज्ञान के अपार भंडार हैं")।
* नारा: "वेदों की ओर लौटो"।
* रचना: 1874 ई. में 'सत्यार्थ प्रकाश'।
* स्थापना: 1875 ई. में आर्य समाज की।
* कार्य: छुआछूत, बाल-विवाह का विरोध, विधवा व अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित किया।
* रामकृष्ण परमहंस:
* कोलकाता में मां काली के दक्षिणेश्वर मंदिर के पुजारी।
* विश्वास: ईश्वर को साकार एवं निराकार दोनों रूपों में देखा जा सकता है। सभी मतों को समान बताया।
* स्वामी विवेकानंद:
* बचपन का नाम: नरेंद्र दत्त।
* गुरु: रामकृष्ण परमहंस।
* कार्य: भारत के युवा वर्ग को प्रेरणा दी। भारत को उसकी गौरवशाली धार्मिक संस्कृति और ज्ञान की श्रेष्ठता से अवगत कराया।
* विश्व धर्म सम्मेलन (1893): शिकागो में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया।
* स्थापना: 5 मई 1897 ई. को कलकत्ता के पास बेलूर में रामकृष्ण मिशन की।
* प्रार्थना समाज:
* स्थापना: 1867 ई. में डॉ. आत्माराम पांडुरंग ने बंबई में।
* उद्देश्य: अंतरजातीय विवाह और विधवा विवाह का पक्ष लिया।
* गोविंद रानाडे: संस्था को गति प्रदान की। एक प्रभु में विश्वास रखते थे, मूर्ति पूजा और जाति प्रथा का खंडन करते थे।
* थियोसोफिकल सोसाइटी:
* स्थापना: मैडम एच.पी. ब्लेवत्स्की और कर्नल एच.एस. ओल्कॉट ने।
* एनी बेसेंट: प्राचीन भारतीय धर्म, दर्शन तथा सिद्धांत का प्रचार किया। भारतीय शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय हिंदू विद्यालय की स्थापना की।
* नारायण गुरु:
* दक्षिण भारत के महान संत।
* धर्म सुधारक और समाज सुधारक।
* केरलवासियों के सामाजिक एवं आध्यात्मिक जीवन को सुधारने का प्रयास किया।
* ज्योतिराव गोविंदराव फुले (ज्योतिबा फुले):
* जन्म: पुणे में।
* विश्वास: शिक्षा से निचली जातियों और महिलाओं की स्थिति सुधारी जा सकती है।
* कार्य: निचली जातियों के लिए विद्यालय और विधवाओं के लिए अनाथालय शुरू किया।
* स्थापना: 1873 ई. में सत्यशोधक समाज की।
* पंडिता रमाबाई:
* महाराष्ट्र में महिला समाज सुधारकों में महत्वपूर्ण।
* कीर्ति: विदुषी वक्ता, "पंडिता" कहलाईं।
* कार्य: महाराष्ट्र में ब्रह्म समाज का प्रचार-प्रसार किया। महिलाओं की स्थिति सुधारने पर विशेष ध्यान दिया।
* आश्रम: 1890 ई. में विधवाओं के लिए शारदा सदन खोला।
* बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय:
* रचना: 'बंग दर्शन' के माध्यम से भारतीयों का नवजागरण किया।
* विरोध: बाल विवाह, बहु विवाह।
* उपन्यास: 'आनंद मठ' (हमारा राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' इसी उपन्यास से लिया गया है)।
1857 का स्वाधीनता संग्राम
* महत्व: अंग्रेजों को पहली बार भारतीयों के संगठित विरोध का सामना करना पड़ा। अंग्रेजों को भारतीयों की चुनौती का अहसास हुआ।
* कारण:
* आर्थिक कारण:
* ब्रिटिश नीतियों ने भारतीय उद्योगों को बंद कर दिया (इंग्लैंड से आने वाले माल पर कम कर, भारत से निर्यात पर अधिक कर)।
* भू-राजस्व व्यवस्था से किसानों की स्थिति दयनीय हो गई।
* सामाजिक एवं धार्मिक कारण:
* अंग्रेज भारतीयों को घृणा की दृष्टि से देखते थे, अमानवीय व्यवहार करते थे।
* धार्मिक अयोग्यता अधिनियम (1850): ईसाई बनने वाले पुत्र को पैतृक संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता था, जो पारंपरिक हिंदू उत्तराधिकार के विपरीत था।
* राजनीतिक एवं प्रशासनिक कारण:
* वेलजली की सहायक संधियों और डलहौजी की व्यपगत नीति ने भारतीय रियासतों को अंग्रेजी साम्राज्य का अंग बना लिया।
* ईस्ट इंडिया कंपनी ने कई जमींदारों की भूमि छीन ली।
* सैनिक कारण:
* भारतीय सैनिकों के लिए पदोन्नति के अवसर कम थे, उच्च पद केवल अंग्रेजों के लिए।
* वेतन कम मिलता था।
* युद्ध में भारतीय सैनिकों को आगे रखा जाता था।
* तात्कालिक कारण (चर्बी वाले कारतूस):
* नई एनफील्ड राइफल के कारतूसों को मुंह से काटना पड़ता था, अफवाह फैली कि उन पर गाय और सूअर की चर्बी लगी है।
* मंगल पांडे: 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में कारतूसों को मुंह से काटने से मना कर विद्रोह कर दिया, फांसी दी गई।
* मेरठ: 10 मई को सैनिकों ने विद्रोह किया, जेल तोड़ी, दिल्ली की ओर चल दिए।
* राजस्थान: नसीराबाद, नीमच, एरनपुरा में भी विद्रोह।
* दिल्ली पर अधिकार: 12 मई 1857 को क्रांतिकारियों ने दिल्ली पर अधिकार कर बहादुर शाह जफर को सम्राट घोषित किया। अंग्रेजों ने बहादुर शाह को रंगून भेज दिया।
* विभिन्न स्थानों पर नेतृत्व:
* अवध: बेगम हजरत महल।
* कानपुर: नाना साहब व तात्या टोपे।
* झांसी: रानी लक्ष्मीबाई।
* बिहार: कुंवर सिंह।
* क्रांति का दमन और उसके कारण:
* भारतीय राजाओं ने अंग्रेजों की मदद की।
* कोई देशव्यापी नेतृत्व नहीं था (बहादुर शाह वृद्ध व दुर्बल)।
* भारतीयों के पास नवीनतम हथियार नहीं थे।
* क्रांति की तिथि (31 मई 1857) से पहले 10 मई 1857 को ही शुरू हो गई, जिससे अंग्रेजों को अलग-अलग स्थानों पर विद्रोह दबाने में आसानी हुई।
* कुछ जमींदारों और व्यापारियों ने ब्रिटिश शासन का सहयोग किया।
* क्रांति के परिणाम:
* सत्ता परिवर्तन: 1857 के बाद ब्रिटिश सम्राट (ताज) ने ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत की सत्ता अपने हाथों में ले ली।
* फूट डालो और राज करो: अंग्रेजों ने हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य बढ़ाया।
* सेना में बदलाव: ब्रिटिश सैनिकों की संख्या बढ़ाई, तोपखाना भारतीयों के पास नहीं रखा गया।
* देशी रियासतों के प्रति नीति: विलय की नीति का परित्याग कर पुत्र गोद लेने की अनुमति प्रदान की गई।
स्वतंत्रता आंदोलन (प्रारंभिक काल)
* उपनिवेशवाद का प्रभाव: किसान, मजदूर, उद्योगपति सभी अंग्रेजों से असंतुष्ट थे।
* जागरूकता: 19वीं सदी तक भारतीय समझने लगे कि अंग्रेज उनके शत्रु हैं।
* प्रारंभिक चरण (1885-1905 ई.): शांतिपूर्ण और अहिंसक।
* भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना: दिसंबर 1885 ई. में।
* उदारवादी नेता: दादाभाई नौरोजी, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, गोपालकृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता।
* मांगें: प्रतिवेदन और प्रार्थना पत्रों के माध्यम से संवैधानिक और प्रशासनिक सुधारों की मांग।
* दादाभाई नौरोजी: भारत में भीषण गरीबी का कारण धन का निष्कासन बताया।
* उपलब्धियां: लोगों में राजनीतिक जागरूकता और एकता की भावना जगाई।
* मुस्लिम लीग का जन्म: अंग्रेजों की "फूट डालो और राज करो" नीति के परिणामस्वरूप, सांप्रदायिकता का जन्म हुआ।
* होम रूल आंदोलन (1914-1916 ई.):
* पृष्ठभूमि: प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ, कांग्रेस ने अंग्रेजों की सहायता की उम्मीद से कि युद्ध के बाद भारत को स्वतंत्रता मिलेगी।
* आशा भंग: शीघ्र ही यह आशा पूरी नहीं हुई।
* स्थापना: 1915-1916 ई. में दो होम रूल लीग की स्थापना हुई।
* एक तिलक ने पूना में।
* दूसरी एनी बेसेंट ने मद्रास में।
* उद्देश्य: स्वराज्य प्राप्ति।
स्वतंत्रता आंदोलन (1905-1918)
* समय: 1905 ई. से 1918 ई. तक को उग्रवादी/गरमपंथी विचारधारा का युग माना गया।
* उग्रवादी नेताओं का दृष्टिकोण: उदारवादी नेताओं की अनुनय-विनय की नीति को राजनीतिक भिक्षावृत्ति मानते थे। राजनीतिक कार्यवाही करने और स्वराज्य प्राप्त करने के पक्षधर थे।
* गरमपंथी नेतृत्व: लाल, बाल, पाल (लाला लाजपत राय, बालगंगाधर तिलक, विपिनचंद्र पाल)।
* तिलक के कार्य: गणपति महोत्सव और शिवाजी उत्सव प्रारंभ किए। मराठी में 'केसरी' अखबार शुरू किया।
* बंगाल का विभाजन (1905 ई.): कर्जन ने किया, विरोध स्वरूप बंगाल में शोक दिवस मनाया गया।
* कलकत्ता में उपवास रखे गए।
* "वंदे मातरम्" का गान करते हुए प्रभातफेरियां निकाली गईं।
* कांग्रेस अधिवेशन (1905 ई.): विदेशी सामान का बहिष्कार करने और स्वदेशी अपनाने का समर्थन किया गया। यह आंदोलन एक स्वदेशी जन-आंदोलन बन गया।
* गांधीजी का आगमन: 1919 ई. के बाद स्वतंत्रता आंदोलन की बागडोर गांधीजी के हाथ में आ गई।
स्वतंत्रता आंदोलन (1919-1934 ई.)
* मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार:
* भारत शासन अधिनियम 1919 द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली लागू की।
* नरम दल ने स्वागत किया, उग्रवादी नेताओं ने अस्वीकार किया।
* रौलट एक्ट (1919 ई.): राजनीतिक हिंसा को कुचलने के लिए पारित किया गया।
* महात्मा गांधी:
* सत्याग्रह: राजनीतिक साधन के रूप में प्रयोग किया।
* चंपारण सत्याग्रह (1917 ई.): पहली विजय।
* अन्य आंदोलन: 1918 ई. में खेड़ा एवं अहमदाबाद के मिल मजदूरों के लिए।
* रौलट एक्ट का विरोध: आंदोलन प्रारंभ किया।
* जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): जनरल डायर ने सभा पर गोली चलाने का आदेश दिया, हजारों निर्दोष मारे गए।
* खिलाफत आंदोलन (1919 ई.): भारतीय मुस्लिमों द्वारा, गांधीजी भी शामिल हुए।
* असहयोग आंदोलन (1 अगस्त 1920):
* घोषणा: गांधीजी द्वारा।
* गतिविधियां: विदेशी माल का बहिष्कार, उपाधियों व पदों का त्याग, सरकारी कॉलेजों व विद्यालयों का बहिष्कार।
* स्थगन: 1922 ई. में चौरी-चौरा की हिंसा के बाद।
* साइमन कमीशन (1927 ई.): भारत आया।
* विरोध (1928 ई.): बंबई पहुंचने पर जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा।
* लाला लाजपत राय की मृत्यु: लाहौर में पुलिस लाठीचार्ज से।
* नेहरू रिपोर्ट (1928 ई.): भारत के संविधान का मसौदा तैयार किया गया।
* लाहौर अधिवेशन (1929 ई.): कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज्य' का नारा स्वीकार किया।
* स्वतंत्रता दिवस: 26 जनवरी 1930 को मनाया गया।
* सविनय अवज्ञा आंदोलन:
* प्रारंभ: 12 मार्च 1930 को दांडी यात्रा के साथ।
* दांडी: गांधीजी ने नमक कानून तोड़ा।
* समाप्ति: मई 1934 में।
* अन्य: इसी दौरान गोलमेज सम्मेलन आयोजित हुए।
स्वतंत्रता की प्राप्ति
* भारत शासन अधिनियम (1935 ई.):
* प्रांतीय स्वायत्तता का प्रस्ताव।
* मुस्लिम, सिख, ईसाइयों, यूरोपियनों आदि के लिए अलग-अलग निर्वाचन निर्धारित (अलगाववाद और सांप्रदायिकता को बढ़ावा मिला)।
* अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' नीति से वैमनस्य बढ़ा।
* दो राष्ट्र की अवधारणा: 1938 ई. में बनी, 1940 ई. में जिन्ना ने अंतिम रूप दिया।
* राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS):
* स्थापना: 1925 ई. में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने।
* उद्देश्य: भारतीयों में राष्ट्रीयता की भावना जाग्रत करना।
* हिंदू महासभा: 1933 ई. में वाराणसी में अधिवेशन आयोजित किया गया।
* आर्य समाज: स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित, हिंदू समाज को पवित्र और शक्तिशाली बनाने में महत्वपूर्ण योगदान।
* द्वितीय विश्व युद्ध (1939 ई.): प्रारंभ हुआ।
* कांग्रेस की मांग: पूर्ण स्वराज्य।
* क्रिप्स मिशन (1942 ई.): युद्ध समाप्ति के बाद भारत को अंग्रेजों के अधिराज्य के रूप में मान्यता देने को तैयार, लेकिन देश ने अस्वीकार कर दिया।
* भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त 1942 ई.): महात्मा गांधी ने प्रारंभ किया।
* आजाद हिंद फौज: सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में जापानियों की सहायता से भारत की सीमा तक पहुंची (कोहिमा पर अधिकार), लेकिन जापान ब्रिटिश सेना से हार गया।
* चुनाव (1946 ई.): कांग्रेस ने अधिकांश सीटें जीतीं।
* कैबिनेट मिशन (मार्च 1946): भारतीयों को राज्य हस्तांतरित करने के लिए भारत आया।
* प्रस्ताव: 16 मई 1946 को घोषणा की।
* असहमति: कांग्रेस और मुस्लिम लीग में।
* अंतरिम सरकार: वायसराय ने नेहरू जी के प्रतिनिधित्व में कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।
* देश में दंगे: मुस्लिम लीग भड़क उठी और पाकिस्तान की मांग पर अड़ गई।
* लॉर्ड माउंटबेटन (मार्च 1947): भारत भेजे गए।
* विभाजन: देश को विभाजन सहना पड़ा।
* स्वतंत्रता: भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हो गया।
प्रमुख क्रांतिकारी घटनाएं
* चापेकर बंधु (दामोदर हरि एवं बालकृष्ण):
* घटना: 22 जून 1897 को पूना के प्लेग कमिश्नर रैंड एवं लेफ्टिनेंट आयर्स्ट की हत्या (कठोर और निर्दयी अधिकारी थे)।
* परिणाम: गिरफ्तार कर फांसी दी गई।
* विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर):
* उल्लेखनीय: भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी नेताओं में।
* मामला: नासिक षड्यंत्र केस में अंडमान द्वीप की सेलुलर जेल भेजे गए, लंबे समय तक वहां रहे।
* गणेश सावरकर:
* वीर सावरकर के बड़े भाई, क्रांतिकारी थे।
* कारण: देशभक्ति से परिपूर्ण कविताओं की रचना के कारण नासिक के जज जैक्सन ने राजद्रोह का आरोप लगाकर काले पानी की सजा दी।
* खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी:
* घटना: 30 अप्रैल 1908 को बंगाल के मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड को मारने के लिए उसकी मोटरगाड़ी पर बम फेंका (वह देशभक्तों पर जुल्म ढा रहा था)। अंग्रेज वकील पी. केनेडी, उसकी पत्नी और बेटी मारी गईं।
* परिणाम: खुदीराम बोस को गिरफ्तार कर फांसी दी गई, प्रफुल्ल चाकी ने स्वयं को गोली मार ली।
* रास बिहारी बोस:
* कार्य: बंग-भंग का विरोध करने के लिए क्रांतिकारी योजनाएं बनाईं।
* दिल्ली षड्यंत्र केस: वायसराय लॉर्ड हार्डिंग के जुलूस पर राजस्थान के क्रांतिकारी जोरावर सिंह ने बम विस्फोट किया, जिसमें लॉर्ड हार्डिंग बच गया। यह योजना रास बिहारी बोस ने बनाई थी।
* भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु:
* प्रेरणा: साइमन कमीशन के विरोध-प्रदर्शन में लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेना।
* घटना: 17 दिसंबर 1928 को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या कर दी।
* केंद्रीय असेंबली में बम (8 अप्रैल 1929): भगत सिंह ने फेंका और नारे लगाए।
* परिणाम: भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई।
* रामप्रसाद बिस्मिल:
* प्रेरणा: क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन की व्यवस्था करना।
* योजना: सरकारी खजाना लूटने की योजना बनाई।
* काकोरी कांड: चंद्रशेखर आजाद, अशफाक उल्ला खां, लाहिड़ी आदि क्रांतिकारियों के साथ काकोरी रेलवे स्टेशन पर सरकारी खजाना लूटा।
* परिणाम: रामप्रसाद बिस्मिल को मृत्युदंड दिया गया, अशफाक उल्ला खां को भी फांसी की सजा दी गई।
* चंद्रशेखर आजाद:
* भागीदारी: 14 वर्ष की आयु में असहयोग आंदोलन के दौरान बनारस में।
* क्रांतिकारी गतिविधियां: काकोरी कांड में शामिल थे, लेकिन पुलिस के हाथ नहीं आए।
* योजना: भगत सिंह को जेल से छुड़ाने की योजना बनाई।
* बम विस्फोट: 21 दिसंबर 1930 को वायसराय लॉर्ड इरविन की ट्रेन को उड़ाने के लिए निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास रेलवे लाइन पर बम विस्फोट किया, वायसराय बाल-बाल बच गया।
* निधन: 27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क में पुलिस से घिर जाने पर स्वयं को गोली मार ली (पुलिस जीवित नहीं पकड़ पाई)।
* विदेशों में प्रमुख क्रांतिकारी गतिविधियां:
* मदनलाल ढींगरा: भारत सचिव का सहायक कर्नल विलियम कर्जन वायली भारतीय विद्यार्थियों की जासूसी करता था। मदनलाल ढींगरा ने इंग्लैंड में वायली को गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। ढींगरा को फांसी दी गई।
* अन्य: ऊधम सिंह, लाला हरदयाल, राजा महेंद्र प्रताप, मैडम कामा, श्यामजी कृष्ण वर्मा ने भी विदेशों में क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन किया।
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