कक्षा 12वीं अर्थशास्त्र पार्ट 5 सांख्यिकी : अर्थ, विषय-क्षेत्र और अर्थशास्त्र में इसकी आवश्यकता" पाठ के प्रश्न उत्तर

Q. No.
प्रश्न (Question)
उत्तर (Answer)
1
सांख्यिकी के लिए प्रयुक्त अंग्रेजी शब्द 'स्टेटिसटिक्स' का उद्गम किन शब्दों से हुआ है?
लैटिन के 'स्टेट्स', इतालवी के 'स्टेटिसटा' या जर्मन के 'स्टेटिस्क्' शब्दों से
2
पुराने युग में सांख्यिकी को मुख्य रूप से क्या कहा जाता था?
राज्य विज्ञान या राजसी विज्ञान
3
सांख्यिकी शब्द का प्रयोग कितने अर्थों में होता है?
दो अर्थों में: बहुवचन तथा एकवचन के रूप में
4
बहुवचन के रूप में सांख्यिकी किसे दर्शाती है?
परिमाणात्मक सूचनाओं या सांख्यिकीय आंकड़ों को
5
एकवचन के रूप में सांख्यिकी किसे दर्शाती है?
परिमाणात्मक सूचनाओं के अध्ययन विश्लेषण से जुड़ी विधि अथवा विधियों को / सांख्यिकीय विधियों को
6
सांख्यिकीय आंकड़ों को किस रूप में अभिव्यक्त किया जाता है?
संख्याओं में (परिमाणात्मक रूप में)
7
सांख्यिकीय आंकड़ों को किसका समुच्चय माना जाता है?
तथ्यों के समुच्चय (समूह) का
8
सांख्यिकीय आंकड़ों की प्राप्ति में किस स्तर की आवश्यकता होती है?
उचित स्तर की शुद्धता
9
सांख्यिकीय आंकड़ों का संग्रह किस प्रकार से किया जाना चाहिए?
व्यवस्थित एवं नियोजित ढंग से
10
सांख्यिकीय आंकड़ों का संग्रह किस ध्येय के अनुसार होता है?
किसी पूर्व निर्धारित ध्येय के अनुसार
11
सांख्यिकीय अध्ययन का पहला चरण क्या है?
आंकड़े एकत्रित करना
12
आंकड़े एकत्रित करने के दो मुख्य वर्ग कौन से हैं?
प्राथमिक और द्वितीयक आंकड़े
13
वह प्रक्रिया क्या कहलाती है जिसमें आंकड़ों को उनके गुणों पर आधारित वर्गों में विभाजित किया जाता है?
आंकड़ों का वर्गीकरण
14
आंकड़ों की प्रस्तुति की तीन प्रसिद्ध विधियाँ कौन सी हैं?
विवरणात्मक, तालिकाबद्ध, और चित्रात्मक प्रस्तुति
15
सांख्यिकीय अध्ययन का अंतिम चरण क्या है?
आंकड़ों का निर्वचन (Interpretation)
16
आर्थिक विश्लेषण में प्रयुक्त होने वाले केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों के उदाहरण दीजिए।
माध्य, मध्यिका, बहुलक
17
सांख्यिकी जटिल आंकड़ों को किस रूप में आसान करती है?
योग, औसत, प्रतिशत आदि के रूप में प्रस्तुत करके
18
सांख्यिकी किस प्रकार के तथ्यों का अध्ययन नहीं करती है?
गुणात्मक तथ्यों (जैसे- ईमानदारी, बुद्धिमत्ता, गरीबी आदि) का
19
सांख्यिकी व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन करती है या तथ्यों के समुच्चय का?
तथ्यों के समुच्चय (समूह) का
20
द्वितीयक आंकड़ों के दो उदाहरण दीजिए।
भारतीय रिजर्व बैंक बुलेटिन और राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी
21
सांख्यिकी का कौन सा उपकरण विभिन्न तथ्यों के कार्यात्मक संबंध की जानकारी देता है?
सह-संबंध विश्लेषण (Co-relation analysis)
22
एंजिल का सिद्धांत और माल्थस का सिद्धांत किस विश्लेषण के कारण विकसित हुए हैं?
सांख्यिकीय विश्लेषण
23
सांख्यिकी के नियमों की एक सीमा क्या है?
सांख्यिकीय नियम औसतन सही होते हैं, सार्वभौम मान्यता नहीं रखते
24
सांख्यिकीय परिणामों का व्यक्तिगत हित के लिए क्या किया जा सकता है?
दुरुपयोग
25
करों के उच्च स्तर से प्राप्त राजस्व की जानकारी किससे मिलती है?
सांख्यिकीय सूचनाओं से
26
सांख्यिकी किस क्षेत्र में भविष्यवाणी करने में सहायक होती है?
बाजार स्थितियों के निर्धारण में
27
उत्पादन के साधनों का तुलनात्मक उत्पादकता का अध्ययन किसकी सहायता से किया जाता है?
सांख्यिकी
28
सांख्यिकी को आज लगभग कौन से क्षेत्र उपयोग कर रहे हैं?
प्राणीशास्त्र, खगोलशास्त्र, भौतिकी, रसायन शास्त्र, समाजशास्त्र या मनोविज्ञान जैसे प्रायः सभी विज्ञान
29
सांख्यिकीय विश्लेषण का एक प्रमुख ध्येय क्या होता है?
आंकड़ों के विशाल समुच्चय की सभी विशेषताओं को एक अकेले मान द्वारा स्पष्ट करना
30
सांख्यिकीय अध्ययन में गलत व्याख्या से क्या हो सकता है?
गलत नीतियां बन सकती हैं जिससे समाज का अहित अधिक हो जाता है


Q. No.
प्रश्न (Question)
उत्तर (Answer)
1
सांख्यिकी को पुराने युग में राज्य विज्ञान क्यों कहा जाता था?
पुराने युग में सरकारी काम-काज के सुचारू रूप से संचालन के लिए सांख्यिकी आवश्यक थी, और इसका प्रयोग मुख्यतः राजाओं द्वारा राजकार्य में होता था।
2
सांख्यिकी के बहुवचन स्वरूप का एक उदाहरण दीजिए। [cite: 45-47]
तालिका 5.1 में विभिन्न वर्षों में भारत की जनसंख्या (करोड़ में) दिखाई गई है। [cite_start]यहाँ हम जनसंख्या के परिमाणात्मक सूचना की बात कर रहे हैं, जो सांख्यिकी का बहुवचन रूप है। [cite: 45-47]
3
[cite_start]सांख्यिकी के एकवचन स्वरूप का एक उदाहरण दीजिए।
जब हम भारत की जनसंख्या का अनुमान जनगणना विधि से लगाने या आंकड़ों के संग्रह, एकत्रीकरण, प्रस्तुति, विवेचन की विधियों की बात करते हैं, तो यह सांख्यिकी का एकवचन रूप है।
4
सांख्यिकीय आंकड़ों की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता क्या है कि वे अनेक कारकों से प्रभावित होते हैं?
सामान्यतया तथ्यों और आंकड़ों पर अनेक सहचारी कारकों का प्रभाव पड़ता है, जैसे चावल का उत्पादन वर्षा, उत्पादन विधि, बीज, खाद, मृदा की उर्वरा क्षमता आदि अनेक बातों पर निर्भर करता है।
5
आर्थिक सिद्धांतों की रचना में सांख्यिकी कैसे सहायक होती है?
सिद्धांतों की रचना व्यावहारिक अवलोकनों के आधार पर होती है, और सांख्यिकीय आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर उन सिद्धांतों की पुष्टि या फिर उनका खंडन किया जाता है।
6
आर्थिक योजनाएं बनाने में सांख्यिकी की क्या भूमिका है?
सांख्यिकीय जानकारी के आधार पर योजनाकार आर्थिक विकास की नीतियों की रचना करते हैं, जिससे उन्हें जनसंख्या और उपलब्ध संसाधनों के सटीक आंकड़े मिल पाते हैं।
7
सांख्यिकी सरकारी नीतियों के मूल्यांकन में कैसे मदद करती है?
सांख्यिकीय समंक हमें यह जानने में सहायता करते हैं कि लागू की गई सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन ठीक-ठीक हो पाया है या नहीं, जैसे कर राजस्व की प्राप्ति का मूल्यांकन।
8
प्राथमिक आंकड़े और द्वितीयक आंकड़ों में मुख्य अंतर क्या है?
प्राथमिक आंकड़े अध्ययनकर्ता सीधे एकत्र करते हैं और ये पहले प्रकाशित नहीं होते हैं, जबकि द्वितीयक आंकड़े पहले से ही अनेक संस्थाओं द्वारा संकलित और प्रकाशित जानकारी में से प्राप्त किए जाते हैं।
9
'आंकड़ों का संगठन' किसे कहते हैं?
एकत्रित समंकों को इस प्रकार व्यवस्थित करना जिससे कि विशाल समंकों से आवश्यकतानुसार तुलना और विश्लेषण में सहायता मिल सके, आंकड़ों का संगठन कहलाता है।
10
'आंकड़ों के निर्वचन' से क्या आशय है?
यह सांख्यिकीय अध्ययन का अंतिम चरण है, जिसमें सांख्यिकीय तकनीकों के प्रयोग द्वारा विश्लेषण कर प्राप्त जानकारी की व्याख्या की जाती है, जिसके आधार पर नीतियों का निर्माण होता है।
11
सांख्यिकी 'उपभोग के अध्ययन' में क्या जानकारी देती है?
सांख्यिकी की सहायता से हम देखते हैं कि किस प्रकार अलग-अलग व्यक्ति समूह आवश्यक, आराम की, और विलास की वस्तुओं पर अपनी आय के आधार पर खर्च करते हैं।
12
सांख्यिकी 'उत्पादन के अध्ययन' में कैसे उपयोगी है?
हर वर्ष के उत्पादन की वृद्धि का अनुमान और उत्पादन के साधनों की तुलनात्मक उत्पादकता का अध्ययन सांख्यिकी की सहायता से मापा जाता है।
13
'विनिमय के अध्ययन' में उत्पादक को सांख्यिकी की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्पादक को उत्पादन व्यय और विक्रय कीमत के निर्धारण के लिए समंकों (आंकड़ों) की आवश्यकता होती है, जिससे वह बाजार की स्थिति का अध्ययन कर सके।
14
'वितरण के अध्ययन' में सांख्यिकी की क्या भूमिका है?
सांख्यिकीय विधियाँ राष्ट्रीय आय की गणना और आय के वितरण में सहायक होती हैं, साथ ही असमान वितरण से पैदा समस्याओं का निराकरण करती हैं।
15
सांख्यिकी गुणात्मक तथ्यों का अध्ययन क्यों नहीं कर पाती है?
सांख्यिकी उन्हीं तथ्यों का अध्ययन करती है, जिनको संख्यात्मक रूप में मापा जा सकता है, जबकि ईमानदारी, बुद्धिमत्ता आदि गुणात्मक तथ्यों को संख्या में व्यक्त नहीं किया जा सकता है।
16
सांख्यिकीय नियमों की एक महत्त्वपूर्ण सीमा क्या है?
सांख्यिकीय नियम औसतन सही होते हैं, किंतु चूंकि निष्कर्ष/निर्णय अनेक कारणों से प्रभावित होते हैं, इस कारण ये सार्वभौम मान्यता नहीं रखते।
17
अव्यवस्थित ढंग से संकलित जानकारी पर आधारित निष्कर्ष भ्रामक क्यों हो सकते हैं?
क्योंकि सांख्यिकी के लिए आंकड़ों को व्यवस्थित एवं नियोजित ढंग से संग्रहित किया जाना आवश्यक होता है, अन्यथा निष्कर्ष गलत दिशा में जा सकते हैं।
18
अर्थव्यवस्था की संरचना का निरूपण किन आंकड़ों के आधार पर होता है?
जनसंख्या, प्राकृतिक संसाधनों, रोजगार, बचत, विनियोग, राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, उत्पादन, आयात, निर्यात आदि के आंकड़ों के आधार पर।
19
आंकड़ों की प्रस्तुतीकरण से क्या अभिप्राय है?
प्रस्तुति से अभिप्राय आंकड़ों को इस प्रकार स्पष्ट और आकर्षक ढंग से पेश करने से है कि वे आसानी से समझे जाएं और उनके विश्लेषण में भी सुगमता रहे।
20
सांख्यिकी सिद्धांतों के प्रतिपादन और जांच में सहायक क्यों होती है?
सांख्यिकीय आंकड़े और विधियाँ स्थापित सिद्धांतों की जांच कर सकते हैं, जैसे कि मांग में वृद्धि, कीमत को प्रभावित करती है या नहीं।
3. लघुत्रात्मक प्रश्नोत्तर (10)

​ये प्रश्न संक्षिप्त पैराग्राफ या बिंदुओं में उत्तर की अपेक्षा रखते हैं।

​1. अर्थशास्त्र में सांख्यिकी की आवश्यकता के किन्हीं चार उपयोगों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। [cite: 20-37]

​अर्थशास्त्र में सांख्यिकी का प्रयोग कई महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए होता है: 

​[cite_start]आर्थिक सिद्धांतों की रचना में: सांख्यिकी व्यावहारिक अवलोकनों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण करके आर्थिक सिद्धांतों (जैसे मांग का नियम) की पुष्टि या खंडन करती है, जिससे वे सिद्धांत का रूप लेते हैं।

​योजनाओं का निर्माण करने में: सांख्यिकीय जानकारी (जैसे जनसंख्या, संसाधन) के आधार पर योजनाकार आर्थिक विकास और नियंत्रण की प्रभावी नीतियों (जैसे जनसंख्या नियंत्रण की नीति) की रचना करते हैं।

​सरकारी नीतियों के मूल्यांकन में: सांख्यिकीय समंक यह जांचने में सहायता करते हैं कि लागू की गई नीतियों का क्रियान्वयन ठीक से हुआ है या नहीं, जैसे करों के उच्च स्तर से प्राप्त राजस्व का मूल्यांकन।

​अर्थव्यवस्था की संरचना का निरूपण: जनसंख्या, राष्ट्रीय आय, रोजगार, बचत, विनियोग, आयात-निर्यात आदि के आंकड़ों के आधार पर अर्थव्यवस्था की संरचना और उसमें हो रहे परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है।

​2. बहुवचन के रूप में सांख्यिकीय समंकों (आंकड़ों) की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [cite: 80-84, 90, 92, 95, 100]

​सांख्यिकीय समंकों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: 

​[cite_start]तथ्यों के समुच्चय: कोई एक संख्या सांख्यिकी नहीं होती, बल्कि ये कई संख्याओं का समूह हैं, जो तुलना और विश्लेषण में सहायक होते हैं।

​संख्याओं में अभिव्यक्ति: सभी आंकड़ों को संख्यात्मक रूप में व्यक्त किया जाता है; गुणात्मक कथन (जैसे 'आय कम है') सांख्यिकी नहीं होते।

​व्यवस्थित ढंग से संकलन: आंकड़ों को व्यवस्थित एवं नियोजित ढंग से संग्रहित किया जाना चाहिए, क्योंकि अव्यवस्थित जानकारी से प्राप्त निष्कर्ष भ्रामक हो सकते हैं।

​उचित स्तर की शुद्धता: आंकड़ों की प्राप्ति में शुद्धता का उचित स्तर होना चाहिए, चाहे वह गणना से प्राप्त हो या अनुमान की विधियों से।

​पूर्व निर्धारित ध्येय: आंकड़ों का संग्रह किसी स्पष्ट रूप से परिभाषित पूर्व निश्चित उद्देश्य के लिए किया जाता है।

​3. सांख्यिकीय अध्ययन के किन्हीं चार चरणों को संक्षेप में समझाइए। [cite: 110-123]

​सांख्यिकीय अध्ययन के मुख्य चरण इस प्रकार हैं: 

​[cite_start]आंकड़े एकत्रित करना: यह पहला चरण है, जिसमें अध्ययनकर्ता प्राथमिक (सीधे) या द्वितीयक (प्रकाशित) स्रोतों से अपनी आवश्यकतानुसार आंकड़े प्राप्त करते हैं [cite: 111-114]।

​आंकड़ों का संगठन: एकत्रित विशाल समंकों को तुलना और विश्लेषण में सहायता के लिए व्यवस्थित करना संगठन कहलाता है। [cite_start]इसमें वर्गीकरण (उनके गुणों पर आधारित वर्गों में विभाजन) एक महत्त्वपूर्ण विधि है।

​आंकड़ों की प्रस्तुतीकरण: आंकड़ों को स्पष्ट और आकर्षक ढंग से पेश किया जाता है ताकि वे आसानी से समझे जाएं। इसकी विधियों में विवरणात्मक, तालिकाबद्ध और चित्रात्मक प्रस्तुति शामिल हैं।

​आंकड़ों का विश्लेषण: प्रस्तुतीकरण के बाद सांख्यिकीय उपकरणों (जैसे माध्य, मध्यिका) का प्रयोग करके आंकड़ों में निहित महत्त्वपूर्ण जानकारियां ज्ञात की जाती हैं। इसका मुख्य ध्येय सभी विशेषताओं को एक अकेले मान द्वारा स्पष्ट करना होता है [cite: 123-126]।

​[cite_start]4. सांख्यिकी के कोई चार कार्य बताइए।

​सांख्यिकी के चार मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:

​जटिल आंकड़ों को सरल बनाना: सांख्यिकी बड़े-बड़े आंकड़ों को योग, औसत, प्रतिशत आदि के रूप में प्रस्तुत कर उन्हें समझने में आसान बनाती है।

​तथ्यों को निश्चित रूप में प्रस्तुत करना: यह तथ्यों को गुणात्मक और परिमाणात्मक रूप में प्रस्तुत कर उनकी स्पष्ट और निश्चित जानकारी प्राप्त करने में सहायक है।

​तुलना की एक विधि प्रस्तुत करना: औसत, प्रतिशत, सह-संबंध जैसे उपकरणों का प्रयोग कर तथ्यों से तुलनात्मक निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

​विभिन्न तथ्यों के संबंध का अध्ययन करना: सह-संबंध विश्लेषण के माध्यम से विभिन्न तथ्यों के कार्यात्मक संबंध, जैसे मांग-पूर्ति का संबंध या विज्ञापन-बिक्री का संबंध, की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

​5. सांख्यिकी की चार प्रमुख सीमाएं क्या हैं? [cite: 141-146]

​सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएं इस प्रकार हैं: 

​[cite_start]गुणात्मक पहलू का अध्ययन नहीं: यह केवल संख्यात्मक रूप से मापे जा सकने वाले तथ्यों का अध्ययन करती है, ईमानदारी, बुद्धिमत्ता या गरीबी जैसे गुणात्मक तथ्यों का नहीं।

​व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन नहीं: यह सांख्यिकी तथ्यों के समुच्चय (समूह) का अध्ययन करती है, लेकिन अवलोकनों के व्यक्तिगत मूल्य (जैसे एक परिवार की आय) का कोई विशिष्ट महत्व नहीं होता।

​नियम औसतन सही होते हैं: निष्कर्ष अनेक कारणों से प्रभावित होते हैं, इसलिए सांख्यिकीय नियम सार्वभौम मान्यता नहीं रखते और औसतन ही सही माने जाते हैं।

​दुरुपयोग की संभावना: सांख्यिकी से प्राप्त परिणामों का व्यक्तिगत हित के लिए दुरूपयोग किया जा सकता है, जिससे समाज का अहित हो सकता है।

​6. सांख्यिकी 'विनिमय का अध्ययन' और 'वितरण का अध्ययन' में कैसे महत्त्व रखती है? [cite: 61-66]

​विनिमय का अध्ययन: उत्पादक को उत्पादन व्यय और विक्रय कीमत के निर्धारण के लिए समंकों की आवश्यकता होती है। [cite_start]सांख्यिकी की सहायता से वह बाजार में प्रतियोगिता, मांग और आपूर्ति पर निर्भर कीमत और लागत मूल्य का निर्धारण करता है [cite: 62-64]।

​वितरण का अध्ययन: सांख्यिकीय विधियाँ राष्ट्रीय आय की गणना और उसके वितरण में सहायक होती हैं। [cite_start]आय के असमान वितरण से पैदा होने वाली समस्याओं का अध्ययन और निराकरण सांख्यिकीय विधियों से किया जाता है।

​7. प्राथमिक और द्वितीयक आंकड़ों को उदाहरण सहित समझाइए। [cite: 112-115]

​[cite_start]प्राथमिक आंकड़े: ये वे आंकड़े हैं जो अध्ययनकर्ता प्रत्यक्षतः सीधे रूप में एकत्र करते हैं और ये पहले प्रकाशित नहीं होते हैं।

​द्वितीयक आंकड़े: ये वे आंकड़े हैं जो अनेक संस्थाओं द्वारा पहले से ही किसी-न-किसी प्रसंगवश संकलित और प्रकाशित जानकारी में से प्राप्त किए जाते हैं।

​उदाहरण: किसी शोधकर्ता द्वारा एक गाँव में जाकर सीधे परिवारों से आय की जानकारी एकत्र करना प्राथमिक आंकड़े है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक बुलेटिन या राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी में प्रकाशित आंकड़ों का उपयोग करना द्वितीयक आंकड़े है।

​8. सांख्यिकी किस प्रकार नीति-निर्धारण और भविष्यवाणी में सहायक होती है?

​नीति-निर्धारण में सहायता: सांख्यिकी के आधार पर अनेकों नीतियाँ, जैसे आयात-निर्यात नीति, मजदूरी-नीति आदि, निर्धारित की जाती हैं। यह सही निर्णय लेने के लिए आवश्यक तथ्यात्मक आधार प्रदान करती है।

​भविष्यवाणी में सहायक: सांख्यिकी वर्तमान और बीते समय के तथ्यों का विश्लेषण करती है। इस विश्लेषण से प्राप्त जानकारियों का उपयोग करके बाजार स्थितियों के निर्धारण और भविष्य में उनके व्यवहार के विषय में भविष्यवाणी की जा सकती है।

​9. सांख्यिकी व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन नहीं करती है, इस सीमा का क्या अर्थ है?

​इस सीमा का अर्थ यह है कि सांख्यिकी किसी एक तथ्य या व्यक्तिगत अवलोकन (जैसे राम ने 100 में से 60 अंक प्राप्त किए) का अध्ययन नहीं करती है। यह हमेशा तथ्यों के समुच्चय (समूह) का अध्ययन करती है, जैसे छात्रों के एक समूह द्वारा प्राप्त अंकों की जानकारी। व्यक्तिगत मूल्य का सांख्यिकीय रूप से कोई विशिष्ट महत्व नहीं होता, जब तक कि वह समूह के भाग के रूप में न हो। 

​10. एकवचन के रूप में सांख्यिकी का क्या अर्थ है? इसके चरणों को क्रम से लिखिए। [cite: 107-110]

​[cite_start]एकवचन के रूप में सांख्यिकी से अर्थ सांख्यिकी विज्ञान अथवा सांख्यिकीय विधियों से है। यह तकनीकों का बोध कराता है, जो परिमाणात्मक आंकड़े एकत्र करने, वर्गीकृत करने, उन्हें प्रस्तुत करने तथा उनके विश्लेषण और विवेचन द्वारा निष्कर्ष तक पहुंचने में काम आती हैं।
सांख्यिकीय अध्ययन के चरण क्रम से इस प्रकार हैं: 

​आंकड़े एकत्रित करना

​आंकड़ों का संगठन (वर्गीकरण)

​आंकड़ों की प्रस्तुतीकरण

​आंकड़ों का विश्लेषण

​आंकड़ों का निर्वचन

​4. निबंधात्मक प्रश्नोत्तर (5)

​ये प्रश्न विस्तृत और व्यापक उत्तर की अपेक्षा रखते हैं।

​1. सांख्यिकी के अर्थ को बहुवचन और एकवचन के स्वरूपों में अंतर स्पष्ट करते हुए समझाइए। [cite: 41-43, 73-75, 107-109]

​[cite_start]सांख्यिकी शब्द का प्रयोग दो अर्थों में होता है: बहुवचन के रूप में (सांख्यिकीय आंकड़े) और एकवचन के रूप में (सांख्यिकीय विधियाँ)। 
​बहुवचन के रूप में (Statistics as Data):

​अर्थ: बहुवचन के रूप में सांख्यिकी से अर्थ सांख्यिकीय समंकों (आंकड़ों) से है। यह तथ्यों की संख्याओं में अभिव्यक्ति है, जैसे आय, उत्पाद, जनसंख्या, कीमतों से संबंधित समंक।

​विशेषताएँ: ये वे तथ्य होते हैं जो अनेक कारणों से पर्याप्त मात्रा में प्रभावित होते हैं, संख्या में व्यक्त किए जाते हैं, जिनकी गणना या अनुमान उचित स्तर की शुद्धता से की जाती है, जिन्हें किसी पूर्व-निश्चित उद्देश्य के लिए व्यवस्थित ढंग से संग्रहित किया जाता है, और जो एक-दूसरे के संबंध में उपस्थित किए जाते हैं। संक्षेप में, बहुवचन में सांख्यिकी 'संख्यात्मक सूचना' है।

​एकवचन के रूप में (Statistics as Methods):

​अर्थ: एकवचन के रूप में सांख्यिकी से अर्थ सांख्यिकी विज्ञान अथवा सांख्यिकीय विधियों से है।

​विशेषताएँ: ये उन तकनीकों का बोध कराता है जो परिमाणात्मक आंकड़े एकत्र करने, वर्गीकृत करने, उन्हें प्रस्तुत करने, तथा उनके विश्लेषण और विवेचन द्वारा निष्कर्ष तक पहुँचने में काम आती हैं। इसमें आंकड़ों के संग्रह, संगठन, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण और निर्वचन के चरण शामिल होते हैं। संक्षेप में, एकवचन में सांख्यिकी 'संख्यात्मक सूचनाओं के अध्ययन से जुड़ी विधि' है।

​अंतर: बहुवचन में सांख्यिकी कच्चे तथ्य या संख्यात्मक जानकारी है, जबकि एकवचन में सांख्यिकी इन तथ्यों को संभालने, उनका विश्लेषण करने और निष्कर्ष निकालने की वैज्ञानिक विधि है।

​2. अर्थशास्त्र में सांख्यिकी की आवश्यकता क्यों है? आर्थिक सिद्धांतों की रचना, नियोजन, और सरकारी नीतियों के मूल्यांकन के संदर्भ में व्याख्या करें। [cite: 17, 19, 21-34]

​[cite_start]अर्थशास्त्र के क्षेत्र में सांख्यिकी की महत्त्वपूर्ण और अपरिहार्य भूमिका है। इसका मुख्य कारण यह है कि किसी भी प्रकार का अध्ययन तब तक संपूर्ण नहीं हो पाता, जब तक उसके पुष्टिकारक परिमाणात्मक प्रमाण नहीं मिल जाते। इसके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं: 

​आर्थिक सिद्धांतों की रचना में: आर्थिक सिद्धांतों की रचना पहले व्यावहारिक जीवन के अवलोकनों पर आधारित होती है (जैसे ऊंची कीमत पर कम मांग)। सांख्यिकीय आंकड़े ही वास्तविक जीवन के संदर्भ में इन सिद्धांतों के विश्लेषण, पुष्टि या खंडन का आधार बनते हैं, जिससे वे एक सिद्धांत का रूप ले पाते हैं।

​योजनाओं का निर्माण करने में: सांख्यिकी एक अत्यंत उपयोगी नियोजन उपकरण है। योजनाकार जनसंख्या, उपलब्ध संसाधनों, आय, और उत्पादन के सटीक सांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर ही आर्थिक विकास की नीतियां (जैसे जनसंख्या नियंत्रण, गरीबी उन्मूलन) तैयार करते हैं।

​सरकारी नीतियों के मूल्यांकन में: केवल नीतियों को लागू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह जानना भी आवश्यक है कि उनका क्रियान्वयन ठीक से हो पाया है या नहीं। सांख्यिकीय समंक (डेटा) हमें सरकारी नीतियों के परिणामों के मूल्यांकन में सहायता करते हैं। उदाहरण के लिए, वित्त मंत्री को सांख्यिकीय सूचनाओं से ही करों के उच्च स्तर से प्राप्त राजस्व की जानकारी मिलती है।

​3. सांख्यिकीय अध्ययन के विभिन्न चरणों का विस्तार से वर्णन कीजिए। [cite: 110-129]

​सांख्यिकीय अध्ययन, जो एकवचन के रूप में सांख्यिकी विज्ञान को दर्शाता है, निम्नलिखित पाँच चरणों से होकर गुजरता है: 

​[cite_start]आंकड़े एकत्रित करना: यह अध्ययन का पहला चरण है। इसमें आंकड़ों को दो मुख्य वर्गों - प्राथमिक आंकड़े (सीधे और पहली बार एकत्र) और द्वितीयक आंकड़े (पहले से प्रकाशित स्रोतों से प्राप्त) - से प्राप्त किया जाता है [cite: 112-114]।

​[cite_start]आंकड़ों का संगठन: एकत्रित समंक विशाल होते हैं, जिन्हें तुलना और विश्लेषण में सहायता के लिए व्यवस्थित करना आवश्यक होता है। इसकी महत्त्वपूर्ण विधि वर्गीकरण है, जिसमें आंकड़ों को उनके गुणों पर आधारित वर्गों/उपवर्गों में विभाजित किया जाता है।

​आंकड़ों की प्रस्तुतीकरण: आंकड़ों को स्पष्ट, आकर्षक और समझने में आसान ढंग से पेश किया जाता है। इसकी तीन प्रसिद्ध विधियाँ हैं: पाठगत विवरणात्मक प्रस्तुति, तालिकाबद्ध प्रस्तुति और चित्रात्मक प्रस्तुति।

​आंकड़ों का विश्लेषण: प्रस्तुतीकरण के बाद सांख्यिकीय उपकरणों का प्रयोग कर आंकड़ों में निहित महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ ज्ञात की जाती हैं। इसका मुख्य ध्येय केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों (माध्य, मध्यिका, बहुलक) के द्वारा समस्त समंकों की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करना होता है।

​आंकड़ों का निर्वचन: यह अंतिम चरण है, जिसमें विश्लेषण से प्राप्त जानकारी की व्याख्या की जाती है। इसी व्याख्या के आधार पर नीतियाँ बनाई जाती हैं, इसलिए गलत नीतियों से बचने के लिए यह चरण अत्यंत ध्यानपूर्वक और सावधानी से किया जाना चाहिए।

​4. व्यापार और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में सांख्यिकी के महत्त्व की विवेचना उपभोग, उत्पादन, और वितरण के अध्ययन के संदर्भ में कीजिए। [cite: 54-66]

​[cite_start]सांख्यिकी ने अर्थशास्त्र में कई आर्थिक सिद्धांतों के विकास को संभव बनाया है (जैसे एंजिल और माल्थस के सिद्धांत), और यह निम्नलिखित क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण है: 

​उपभोग का अध्ययन: सांख्यिकी की सहायता से यह समझा जाता है कि व्यक्ति या व्यक्ति समूह अपनी आय पर किस प्रकार खर्च करते हैं - पहले आवश्यक वस्तुओं पर, फिर आराम की, और अंत में विलास की वस्तुओं पर। यह उपभोग पैटर्न और मांग का आकलन करने में सहायक है।

​उत्पादन का अध्ययन: सांख्यिकी हर वर्ष के उत्पादन की वृद्धि का अनुमान लगाने में सहायक है। यह उत्पादन के साधनों (भूमि, श्रम, पूंजी, साहस) की तुलनात्मक उत्पादकता का अध्ययन करने और मांग एवं पूर्ति के सामंजस्य को बिठाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

​विनिमय का अध्ययन: उत्पादक को उत्पादन व्यय और विक्रय कीमत तय करने के लिए सांख्यिकीय समंकों की आवश्यकता होती है। सांख्यिकी बाजार में प्रतियोगिता, मांग और आपूर्ति के आधार पर कीमत और लागत मूल्य का निर्धारण करने में सहायक है।

​वितरण का अध्ययन: सांख्यिकीय विधियाँ राष्ट्रीय आय की गणना करने और उसके वितरण का अध्ययन करने में सहायक होती हैं। यह आय के असमान वितरण से उत्पन्न समस्याओं की पहचान करने और उनके निराकरण की विधियाँ खोजने में भी सहायक है।

​5. सांख्यिकी के मुख्य कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए और इसकी प्रमुख सीमाओं पर भी प्रकाश डालिए। [cite: 130-146]

​सांख्यिकी एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है, जिसके अनेक कार्य और कुछ सीमाएँ हैं। 
​सांख्यिकी के मुख्य कार्य (Functions of Statistics): 

​[cite_start]जटिल आंकड़ों को आसान करना: यह बड़े-बड़े और जटिल आंकड़ों को योग, औसत, प्रतिशत आदि के रूप में प्रस्तुत कर उन्हें सरल बनाती है, जिससे उन्हें समझना आसान हो जाता है।

​तुलना की एक विधि प्रस्तुत करना: औसत, प्रतिशत और सह-संबंध जैसे सांख्यिकीय उपकरणों का प्रयोग करके तथ्यों से तुलनात्मक निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं।

​विभिन्न तथ्यों के संबंध का अध्ययन: सह-संबंध विश्लेषण के माध्यम से विभिन्न तथ्यों के बीच कार्यात्मक संबंध (जैसे मांग-पूर्ति का संबंध, विज्ञापन और बिक्री का संबंध) की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

​नीति-निर्धारण और भविष्यवाणी में सहायता: सांख्यिकी, वर्तमान और बीते समय के तथ्यों के विश्लेषण के आधार पर, आयात-निर्यात या मजदूरी-नीति जैसी नीतियों के निर्धारण और बाजार स्थितियों के बारे में भविष्यवाणी करने में सहायक होती है।

​सांख्यिकी की सीमाएं (Limitations of Statistics):

​गुणात्मक पहलू का अध्ययन नहीं: सांख्यिकी केवल उन्हीं तथ्यों का अध्ययन करती है, जिनको संख्यात्मक रूप में मापा जा सकता है। ईमानदारी, बुद्धिमत्ता या गरीबी जैसे गुणात्मक तथ्यों का यह अध्ययन नहीं करती।

​व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन नहीं: यह तथ्यों के समुच्चय (समूह) का अध्ययन करती है, किसी एक व्यक्तिगत इकाई या अवलोकन के मूल्य का नहीं।

​नियम औसतन सही होते हैं: सांख्यिकीय नियम सार्वभौम मान्यता नहीं रखते, क्योंकि निष्कर्ष अनेक कारकों के सामूहिक प्रभाव से प्रभावित होते हैं, इसलिए वे केवल औसतन ही सही होते हैं।

​दुरुपयोग की संभावना: सांख्यिकी से प्राप्त परिणामों का व्यक्तिगत हित के लिए गलत तरीके से और जानबूझकर दुरुपयोग किया जा सकता है।

​ज्यामितीय शुद्धता की कमी: सांख्यिकीय आंकड़े सामान्यतया सन्निकट (approximation) द्वारा प्राप्त किए जाते हैं, इस कारण जहाँ शत-प्रतिशत शुद्धता वांछनीय होती है, सांख्यिकीय अनुसंधान विफल रहते हैं।

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