1.अर्थशास्त्र, दुर्लभता से निपटने के लिए किस तीव्र चीज़ से संबंधित अध्ययन है?
चुनाव से संबंधित
2.आर्थिक संवृद्धि का सबसे मौलिक माप क्या है?
दुर्लभ संसाधनों के आबंटन की सफलता का मूल्यांकन
3.राष्ट्र आर्थिक संवृद्धि मापने के किस आँकड़े पर निगरानी रखते हैं?
राष्ट्रीय आय और उत्पादकता आदि पर
4.आर्थिक संवृद्धि पद को किस रूप में परिभाषित किया जाता है?
वास्तविक राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय में दीर्घ अवधि तक वृद्धि की प्रक्रिया
5.आर्थिक संवृद्धि का एक बेहतर माप क्या है?
प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि
6.आर्थिक संवृद्धि की माप किसमें वास्तविक वृद्धि के रूप में की जाती है?
राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि
7.राष्ट्रीय आय में वृद्धि किस काल के लिए होनी चाहिए?
दीर्घ काल के लिए
8.अल्प कालीन, मौसमी या अस्थायी वृद्धि को किससे भ्रमित नहीं करना चाहिए?
आर्थिक संवृद्धि से
9.आर्थिक विकास को किस रूप में परिभाषित किया जाता है?
समाज के भौतिक कल्याण में निरंतर वृद्धि
10.आर्थिक संवृद्धि और आर्थिक विकास में कौन-सी अवधारणा अधिक व्यापक है?
आर्थिक विकास
11.आर्थिक संवृद्धि अर्थव्यवस्था में किस प्रकार के परिवर्तन लाती है?
मात्रात्मक परिवर्तन
12.आर्थिक विकास को मापने के लिए किस प्रकार के मापों का प्रयोग किया जाता है?
गुणात्मक माप (जैसे मानव सूचकांक, साक्षरता दर)
13.धारणीय विकास क्या है?
भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाला विकास
14.धारणीय विकास में भावी आर्थिक संवृद्धि के साथ और क्या सम्मिलित होता है?
भावी विकास का संरक्षण
15.धारणीय विकास किस बात को उच्चतम प्राथमिकता देता है?
निर्धनता कम करने, उत्पादक रोजगार, सामाजिक गठबंधन तथा पर्यावरण पुनरुत्थान को
16.संयुक्त राष्ट्र की विकास योजना के अनुसार मानव विकास क्या है?
लोगों के चयन में वृद्धि की प्रक्रिया
17.मानव विकास में तीन अनिवार्य चुनावों में से एक क्या है?
अच्छा ज्ञान प्राप्त करना
18.आर्थिक संवृद्धि को किस रूप में देखने की आवश्यकता है?
एक साधन के रूप में
19.मानव कल्याण के लिए संवृद्धि की कौन सी चीज़ महत्वपूर्ण है?
संवृद्धि की गुणवत्ता
20.मानव विकास सूचकांक (HDI) किनके मिला-जुला प्रभाव से मापा जाता है?
मानव विकास के विभिन्न घटकों का
21.मानव विकास सूचकांक का एक चर क्या है?
वयस्क साक्षरता दर
22.आर्थिक संवृद्धि को प्रभावित करने वाला मुख्य आर्थिक कारक क्या है?
प्राकृतिक संसाधन
23.पूंजी निर्माण में किसका निवेश होता है?
प्लांट, उपस्कर और मशीनों जैसी पूंजीगत वस्तुओं का
24.तकनीकी उन्नति किसका संकेत देती है?
पुरानी विधियों में सुधार तथा उत्पादन की नई और बेहतर विधियों के अनुसंधान का
25.उद्यमशीलता क्या है?
निवेश के नए अवसरों का पता लगाने की योग्यता
26.आर्थिक संवृद्धि के स्तर के निर्धारण के लिए कैसी जनसंख्या का होना बहुत महत्वपूर्ण है?
अच्छी गुणवत्ता वाली जनसंख्या का
27.आधुनिक आर्थिक संवृद्धि में कौन-सा गैर-आर्थिक कारक अनिवार्य तथा सहायक है?
राजनीतिक स्थिरता तथा मजबूत प्रशासन
28. अल्प विकसित देशों में प्रति व्यक्ति आय का स्तर कैसा होता है?
बहुत नीचा
29 अल्प विकसित देशों में बचत की दर कैसी होती है?
काफी नीची
1.आर्थिक संवृद्धि की परिभाषा में सम्मिलित दो मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
आर्थिक संवृद्धि राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि की प्रक्रिया का सम्मिलित संकेत करती है. यह वृद्धि उत्पादन क्षमता में स्थायी वृद्धि (जैसे आधुनिकीकरण या नई प्रौद्योगिकी के प्रयोग) पर आधारित होनी चाहिए.
2.प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि को आर्थिक संवृद्धि का बेहतर माप क्यों माना जाता है?
प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, आर्थिक संवृद्धि का एक बेहतर माप है, क्योंकि यह आम जनता के रहन-सहन के स्तर में वृद्धि की ओर संकेत करती है.
3.आर्थिक विकास, आर्थिक संवृद्धि से कैसे व्यापक है?
राष्ट्रीय आय में वृद्धि के अलावा, आर्थिक विकास में सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तथा आर्थिक परिवर्तन सम्मिलित होते हैं, जो कि भौतिक उन्नति में योगदान देते हैं.
4.आर्थिक विकास के दो विस्तृत उद्देश्य क्या हैं?
आर्थिक विकास आय के अधिक समान वितरण की सुनिश्चितता, अधिक रोजगार, और निर्धनता उन्मूलन जैसे अधिक विस्तृत उद्देश्यों को पूरा करते हैं.
5.धारणीय विकास में कौन से दो संरक्षण सम्मिलित होते हैं?
धारणीय विकास में भावी आर्थिक संवृद्धि का संरक्षण तथा भावी विकास का संरक्षण सम्मिलित होता है.
6.धारणीय विकास के लिए किन संसाधनों का अधिक प्रयोग आवश्यक है?
परिस्थितिकीय संसाधनों को सुरक्षित रखना तथा नवीकरणीय संसाधनों का अधिक प्रयोग करना आवश्यक है.
7.मानव विकास के दो आयाम क्या हैं?
मानव योग्यता प्राप्त करना और इन प्राप्त योग्यताओं का प्रयोग उत्पादकता, आराम और अन्य उद्देश्यों के लिए करना.
8.मानव विकास की अवधारणा आय विस्तर और धन संचय से आगे क्यों जाती है?
मानव विकास के लाभ, आय विस्तर और धन संचय से कहीं अधिक आगे तक जाते हैं, क्योंकि लोग मानव विकास की आवश्यकता का निर्माण करते हैं.
9.मानव विकास सभी मानवीय विकल्पों में वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करता है, इसके दो उदाहरण दीजिए।
मानव विकास जिन विकल्पों में वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करता है, उनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण और भौतिक कल्याण शामिल हैं.
10.मानव निर्धनता, आय की निर्धनता से कैसे अधिक बड़ी है?
आय का अभाव मानव निर्धनता का एक पहलू है, जबकि अभाव का कष्ट कम/अस्वस्थ जीवन, अशिक्षित होना, या भागीदारी की अनुमति न होने जैसे क्षेत्रों में भी हो सकता है.
11.मानव विकास सूचकांक (HDI) में 'ज्ञान की दिशा' का प्रतिनिधित्व करने वाले चर क्या हैं?
वयस्क साक्षरता दर और प्राथमिक, द्वितीयक तथा विश्वविद्यालय स्तर का मिश्रित नामांकन ज्ञान की दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं.
12.भारत का मानव विकास सूचकांक (2012) विश्व के कुल स्तर में कौन से स्थान पर था?
2012 में भारत का सूचकांक 0.554 था, जो विश्व के कुल स्तर में 186 में से 136 था.
13.कम विकसित देशों में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किस स्थिति में होता है?
कम विकसित देशों में प्राकृतिक संसाधन अप्रयुक्त, अल्पप्रयुक्त अथवा गलत प्रयुक्त होते हैं.
14.तकनीकी उन्नति का परिणाम कभी-कभी क्या होता है?
कभी-कभी तकनीकी उन्नति का परिणाम उत्पादकता में वृद्धि होता है.
15.अल्प विकसित देशों में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए क्या करना अनिवार्य है?
शिक्षा, नए अनुसंधान तथा वैज्ञानिक तथा तकनीकी विकास को प्रोत्साहन देकर उद्यमशीलता को बढ़ावा देने का वातावरण सृजित करना अनिवार्य है.
16.मानव संसाधन विकास क्या बढ़ाता है?
मानव संसाधन विकास लोगों के ज्ञान, कौशल तथा उनकी उत्पादकता बढ़ाने की क्षमता में वृद्धि लाता है.
17.एक स्थिर और कुशल सरकार, निवेशकों के विश्वास में विकास कैसे करती है?
एक स्थिर, शक्तिशाली तथा कुशल सरकार, ईमानदार प्रशासन और पारदर्शक नीतियां घरेलू तथा विदेशी पूंजी आकर्षित करती हैं.
18.सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारकों में क्या सम्मिलित हैं?
सामाजिक दृष्टिकोण, सामाजिक मूल्य तथा सामाजिक संस्थाएं सम्मिलित हैं, जो शिक्षा के विस्तार से परिवर्तित होते हैं.
19.पुराने सामाजिक रीति-रिवाज आर्थिक विकास में बाधा कैसे लाते हैं?
पुराने सामाजिक रीति-रिवाज व्यावसायिक और भौगोलिक गतिशीलता को सीमित करते हैं और इस प्रकार आर्थिक विकास में बाधा लाते हैं.
20.अल्प विकसित देशों में जनसंख्या में तीव्र दर से वृद्धि का क्या परिणाम होता है?
अधिक जनसंख्या से अभिप्राय अधिक उपभोग व्यय तथा उत्पादक गतिविधियों में निम्न निवेश, जो आर्थिक विकास को धीमा कर देता है.
3. लघुत्रात्मक प्रश्न (10 प्रश्न)
ये प्रश्न संक्षिप्त पैराग्राफ या 3-4 वाक्यों में उत्तर की मांग करते हैं।
प्रश्न: आर्थिक संवृद्धि और आर्थिक विकास में मौलिक अंतर क्या है? उत्तर: आर्थिक संवृद्धि एक संकुचित पद है जिसमें उत्पादन में केवल मात्रात्मक वृद्धि शामिल होती है और इसे वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद द्वारा मापा जाता है. यह केवल राष्ट्रीय आय अथवा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि पर प्रतिबिंब डालती है. इसके विपरीत, आर्थिक विकास एक व्यापक अवधारणा है जिसमें मात्रात्मक वृद्धि के साथ-साथ गुणात्मक परिवर्तन (जैसे सामाजिक दृष्टिकोण, संस्थागत और प्रौद्योगिकी परिवर्तन) भी सम्मिलित हैं. यह किसी अर्थव्यवस्था में जीवन की गुणवत्ता की उन्नति को प्रतिबिंबित करता है.
प्रश्न: आर्थिक विकास के लिए संसाधनों की आपूर्ति में किस प्रकार के परिवर्तन शामिल होते हैं? उत्तर: आर्थिक विकास, राष्ट्रीय आय में वृद्धि के अलावा व्यापक सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तथा आर्थिक परिवर्तनों को सम्मिलित करता है. इसमें संसाधनों की आपूर्ति, पूंजी निर्माण की दर, जनसंख्या का आकार और बनावट, प्रौद्योगिकी, कौशल और कार्य-कुशलता, तथा संस्थागत और प्रबंध व्यवस्था में परिवर्तन शामिल होते हैं. ये परिवर्तन अधिक विस्तृत उद्देश्यों जैसे आय के अधिक समान वितरण, अधिक रोजगार और निर्धनता उन्मूलन को पूरा करते हैं.
प्रश्न: धारणीय विकास के लिए पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकी का प्रयोग क्यों महत्वपूर्ण है? उत्तर: धारणीय विकास, भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है. यह विकास की ऐसी प्रक्रिया है जो परिस्थितिकीय धारणीय होती है. इसलिए, धारणीय विकास के लिए पर्यावरण के लिए सुरक्षित प्रौद्योगिकी के प्रयोग को प्रोत्साहन देना महत्वपूर्ण है. इसका अर्थ है कि आर्थिक क्रियाओं से होने वाले सभी प्रकार के प्रदूषणों को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए.
प्रश्न: मानव विकास को एक दीर्घकालीन स्वस्थ जीवन व्यतीत करने की क्षमता की आवश्यकता क्यों है? उत्तर: संयुक्त राष्ट्र की विकास योजना के अनुसार, मानव विकास को लोगों के चयन में वृद्धि की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है. विकास के सभी स्तरों पर, एक दीर्घकालीन स्वस्थ जीवन व्यतीत करना लोगों के तीन अनिवार्य चुनावों में सम्मिलित है. यदि यह आवश्यक चुनाव उपलब्ध नहीं है (अर्थात स्वास्थ्य खराब है या जीवन प्रत्याशा कम है), तो जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए बहुत से अन्य अवसर पहुंच के बाहर होंगे.
प्रश्न: पूंजी निर्माण की प्रक्रिया अर्थव्यवस्था के विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? उत्तर: पूंजी निर्माण किसी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है. यह समुदाय की बचतों को प्लांट, उपस्कर और मशीनों जैसी पूंजीगत वस्तुओं के निवेश के लिए प्रयोग करने की प्रक्रिया है. पूंजी निर्माण देश की उत्पादन क्षमता तथा श्रमिकों की कुशलता में वृद्धि लाता है. यह प्रक्रिया राष्ट्र की उत्पादन क्षमता में बहुत अधिक वृद्धि लाकर देश में वस्तुओं और सेवाओं के अधिक प्रवाह को सुनिश्चित करती है.
प्रश्न: तकनीकी उन्नति प्राकृतिक संसाधनों का अधिक प्रभावशाली प्रयोग करने में कैसे सहायता करती है? उत्तर: तकनीकी उन्नति उत्पादन की नई और बेहतर विधियों के अनुसंधान का संकेत देती है. यह प्राकृतिक संसाधनों तथा अन्य संसाधनों का उत्पादन में वृद्धि करने के लिए अधिक प्रभावशाली तथा अधिक लाभप्रद प्रयोग करने की क्षमता को बढ़ाती है. अच्छी तकनीक के प्रयोग से दिए गए संसाधनों की सहायता से अधिक उत्पादन करना अथवा संसाधनों की कम मात्रा से उतना ही उत्पादन करना संभव हो जाता है. तकनीकी उन्नति प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण प्रयोग करने की योग्यता में सुधार लाती है.
प्रश्न: अल्प विकसित देश पूंजी की कमी के बावजूद भी क्यों निर्धन रहते हैं? उत्तर: विश्व में बहुत से अल्प विकसित देश, पूंजी की कमी, आधारिक संरचना, या अकुशल श्रमिक की कमी के कारण नहीं, किंतु उद्यमशीलता की बहुत अधिक कमी के कारण निर्धन हैं. उद्यमशीलता की कमी से निवेश के नए अवसरों का पता लगाने की योग्यता कम होती है, जिससे जोखिम उठाने तथा नई व्यावसायिक इकाइयों में निवेश करने की इच्छा में वृद्धि नहीं होती. इसलिए, इन देशों में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने का वातावरण सृजित करना अनिवार्य है.
प्रश्न: राजनीतिक कारक आर्थिक संवृद्धि को कैसे निर्धारित करते हैं? उत्तर: राजनीतिक स्थिरता तथा मजबूत प्रशासन आधुनिक आर्थिक संवृद्धि में अनिवार्य तथा सहायक गैर-आर्थिक कारक हैं. एक स्थिर, शक्तिशाली तथा कुशल सरकार और ईमानदार प्रशासन निवेशकों के विश्वास में विकास करती है. पारदर्शक नीतियां और उनका कुशलतापूर्वक लागू होना घरेलू तथा विदेशी पूंजी को आकर्षित करता है, जिससे आर्थिक विकास तीव्र गति से होता है.
प्रश्न: शिक्षा, आर्थिक विकास में क्या भूमिका निभाती है? उत्तर: शिक्षा विकास का एक मुख्य साधन है, और जिन देशों में शिक्षा का अधिक विस्तार है, उन्होंने अधिक उन्नति प्राप्त कर ली है. शिक्षा की मानव संसाधन विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका है. इससे श्रम की कुशलता में सुधार होता है और मानसिक संकुचित विचार नए विचारों और ज्ञान में सुधार लाते हैं, जिनसे आर्थिक विकास में सहायता मिलती है.
प्रश्न: अल्प विकसित देशों में बेरोजगारी का स्तर ऊंचा होने का क्या कारण है? उत्तर: अल्प विकसित देशों में बेरोजगारी का स्तर बहुत ऊंचा होता है, क्योंकि इन देशों में पूंजी का अभाव होता है. विभिन्न आर्थिक क्षेत्र में निम्न स्तर का विकास होने के कारण, ये देश अपनी बढ़ती हुई श्रम शक्ति की पूर्ति को रोजगार देने में समर्थ नहीं होते.
4. निबंधात्मक प्रश्न (5 प्रश्न)
ये प्रश्न व्यापक और विस्तृत उत्तर की मांग करते हैं।
प्रश्न: आर्थिक विकास को परिभाषित कीजिए और इसके विस्तृत उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए। उत्तर: आर्थिक विकास की परिभाषा: आर्थिक विकास को समाज के भौतिक कल्याण में निरंतर वृद्धि के रूप में परिभाषित किया जाता है. यह आर्थिक संवृद्धि से अधिक व्यापक अवधारणा है. यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें पूर्ति के मौलिक कारकों तथा मांग की बनावट जैसे अंतर्संबंधित परिवर्तनों की एक लंबी श्रेणी सम्मिलित होती है, जिनसे देश के शुद्ध राष्ट्रीय उत्पादन में दीर्घकाल तक वृद्धि होती है. आर्थिक विकास में उत्पादन या राष्ट्रीय आय में मात्रात्मक वृद्धि के साथ-साथ गुणात्मक परिवर्तन (जैसे सामाजिक दृष्टिकोण, रीति-रिवाज) भी सम्मिलित हैं. आर्थिक विकास के विस्तृत उद्देश्य: राष्ट्रीय आय में वृद्धि के अलावा, आर्थिक विकास में सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तथा आर्थिक परिवर्तन, सम्मिलित होते हैं, जो कि भौतिक उन्नति में योगदान देते हैं. ये परिवर्तन निम्नलिखित विस्तृत उद्देश्यों को पूरा करते हैं:
आय के अधिक समान वितरण की सुनिश्चितता: विकास का लक्ष्य आय की असमानता को कम करना है, क्योंकि आय का असमान वितरण सामाजिक दृष्टिकोण से प्रमुख चिंता का विषय होता है.
अधिक रोजगार: आर्थिक विकास का उद्देश्य उत्पादन क्षमता में स्थायी वृद्धि लाकर अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करना है.
निर्धनता उन्मूलन: आर्थिक विकास, गरीबी हटाने, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा के माध्यम से अर्थव्यवस्था के सर्वांगीण विकास की अनुमति देता है.
उत्पादन क्षमता में स्थायी वृद्धि: आय में वृद्धि तभी निरंतर हो सकती है, जबकि यह वृद्धि उत्पादन क्षमता में स्थायी वृद्धि जैसे आधुनिकीकरण अथवा नई प्रौद्योगिकी के प्रयोग के कारण, या आधारिक संरचना के शक्तिशाली होने के कारण हो.
जीवन की गुणवत्ता में सुधार: विकास का संबंध मानव पूंजी में वृद्धि, असमानता के अंकों में कमी, और संरचनात्मक परिवर्तनों से है जिनसे जनसंख्या के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है.
ार होता है.
प्रश्न: मानव विकास, आर्थिक संवृद्धि से कैसे अधिक महत्वपूर्ण है? मानव विकास सूचकांक (HDI) की संरचना (चर) का भी वर्णन कीजिए। उत्तर: मानव विकास की श्रेष्ठता: मानव विकास, आर्थिक संवृद्धि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है.
दायरा: आर्थिक संवृद्धि केवल एक विकल्प में सुधार पर ध्यान केंद्रित करती है, अर्थात् आय या उत्पाद, जबकि मानव विकास सभी मानवीय विकल्पों में वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करता है, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण और भौतिक कल्याण शामिल हैं.
उद्देश्य: आर्थिक संवृद्धि को एक साधन के रूप में देखने की आवश्यकता है, यद्यपि एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में, किंतु विकास के एक अंतिम उद्देश्य के रूप में नहीं. मानव विकास की अवधारणा का संबंध मुख्य रूप से मानव प्रयास के अंतिम उद्देश्य, लोगों को अच्छा जीवन बिताने के योग्य बनाने से है.
गुणवत्ता बनाम परिमाण: आय में संवृद्धि अपने में एक उद्देश्य नहीं है. संवृद्धि की गुणवत्ता है, न कि इसका परिमाण, जो कि मानव के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है.
मानव विकास सूचकांक (HDI) के चर: मानव विकास सूचकांक (HDI) मानव विकास के विभिन्न घटकों का मिला-जुला प्रभाव है, जो तीन मौलिक योग्यताओं के आधार पर अनुमान लगाता है. इसके चार चर निम्नलिखित हैं:
जन्म के समय जीवन की प्रत्याशा: यह दीर्घ स्वस्थ जीवन की दिशा को प्रदर्शित करता है.
वयस्क साक्षरता दर और प्राथमिक, द्वितीयक तथा विश्वविद्यालय स्तर का मिश्रित नामांकन: ये दोनों ज्ञान की दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं.
प्रति व्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद: यह शानदार जीवन स्तर के लिए अनिवार्य संसाधनों का प्रतिनिधित्व करता है. इस प्रकार, HDI, देश के मानव विकास को मापने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, लिंग, असमानता तथा आय की स्थिर राशि पर भी विचार करता है.
िचार करता है.
प्रश्न: आर्थिक संवृद्धि को प्रभावित करने वाले प्रमुख आर्थिक कारकों का विस्तार से वर्णन कीजिए। उत्तर: आर्थिक संवृद्धि को प्रभावित करने वाले प्रमुख आर्थिक कारक निम्नलिखित हैं:
प्राकृतिक संसाधन: ये किसी अर्थव्यवस्था के विकास को प्रभावित करने वाला मुख्य कारक हैं. इनमें भूमि, मिट्टी की गुणवत्ता, वन संपत्ति, खनिज व तेल संसाधन आदि सम्मिलित हैं. आर्थिक संवृद्धि के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अधिक मात्रा में होना अनिवार्य है. हालाँकि, कम विकसित देशों में ये संसाधन अप्रयुक्त या अल्पप्रयुक्त होते हैं.
पूंजी निर्माण: यह किसी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है. यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा समुदाय की बचतों को प्लांट, उपस्कर और मशीनों जैसी पूंजीगत वस्तुओं में निवेश के लिए प्रयोग किया जाता है. इससे राष्ट्र की उत्पादन क्षमता में बहुत अधिक वृद्धि आती है और वस्तुओं तथा सेवाओं के अधिक प्रवाह को सुनिश्चित किया जाता है.
तकनीकी उन्नति: तकनीकी उन्नति उत्पादन की नई और बेहतर विधियों के अनुसंधान का संकेत देती है. यह प्राकृतिक संसाधनों का अधिक प्रभावशाली तथा लाभप्रद प्रयोग करने की क्षमता को बढ़ाती है. अच्छी तकनीक के प्रयोग से संसाधनों की कम मात्रा से भी उत्पादन करना संभव हो जाता है.
मानव संसाधन विकास: आर्थिक संवृद्धि के स्तर के निर्धारण के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली जनसंख्या का होना बहुत ही महत्वपूर्ण है. मानव पूंजी में शैक्षिक, चिकित्सा संबंधी और अन्य सामाजिक योजनाओं के रूप में निवेश वांछनीय है. मानव संसाधन विकास लोगों के ज्ञान, कौशल तथा उनकी उत्पादकता बढ़ाने की क्षमता में वृद्धि लाता है.
सामाजिक लागतें: आर्थिक संवृद्धि का एक अन्य निर्धारक सामाजिक लागतों (Social Costs) का प्रावधान है. जैसे- स्कूल, कॉलेज, तकनीकी संस्थाएं, अस्पताल तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं. ये सुविधाएं कार्यशील जनसंख्या को स्वस्थ, कुशल तथा उत्तरदायी बनाती हैं, जो देश को आर्थिक रूप से आगे बढ़ा सकते हैं.
ते हैं.
प्रश्न: आर्थिक संवृद्धि को प्रभावित करने वाले गैर-आर्थिक कारकों का विस्तार से मूल्यांकन कीजिए। उत्तर: गैर-आर्थिक कारक (जिनमें सामाजिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक तथा राजनीतिक कारक सम्मिलित हैं) भी आर्थिक विकास में उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने आर्थिक कारक हैं.
राजनीतिक कारक: आधुनिक आर्थिक संवृद्धि में राजनीतिक स्थिरता तथा मजबूत प्रशासन अनिवार्य तथा सहायक हैं. एक स्थिर, शक्तिशाली तथा कुशल सरकार, ईमानदार प्रशासन, पारदर्शक नीतियां और उनका कुशलतापूर्वक लागू होना निवेशकों के विश्वास में विकास करता है, जिससे घरेलू तथा विदेशी पूंजी आकर्षित होती है और आर्थिक विकास तीव्र गति से होता है.
सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारक: सामाजिक कारकों में सामाजिक दृष्टिकोण, सामाजिक मूल्य तथा सामाजिक संस्थाएं सम्मिलित हैं, जो शिक्षा के विस्तार और एक समाज से दूसरे समाज में रूपांतरण से परिवर्तित होते हैं. आधुनिक विचारधारा, मूल्य तथा दृष्टिकोण से नई खोज तथा नवोत्पाद लाते हैं, जिससे नए उद्यमियों में वृद्धि होती है. इसके विपरीत, पुराने सामाजिक रीति-रिवाज व्यावसायिक और भौगोलिक गतिशीलता को सीमित करते हैं और इस प्रकार आर्थिक विकास में बाधा लाते हैं.
शिक्षा: शिक्षा विकास का एक मुख्य साधन है, और उन देशों में अधिक उन्नति प्राप्त कर ली गई, जहाँ शिक्षा का अधिक विस्तार है. शिक्षा की मानव संसाधन विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका है. इससे श्रम की कुशलता में सुधार होता है और मानसिक संकुचित विचार नए विचारों और ज्ञान में सुधार लाते हैं, जिनसे आर्थिक विकास में सहायता मिलती है.
भौतिक सुधार की इच्छा: भौतिक उन्नति की इच्छा, आर्थिक विकास के लिए एक आवश्यक पहली शर्त है. वह समाज जो स्व-संतुष्टि, स्व-स्वीकार, भाग्य में विश्वास आदि रखते हैं, वे जोखिम तथा साहस को सीमित करते हैं तथा देश को पिछड़ा हुआ रखते हैं.
ते हैं.
प्रश्न: अल्प विकसित देशों (या विकासशील देशों) की सामान्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए जो उनकी कम संवृद्धि दर का कारण बनती हैं। उत्तर: अल्प विकसित देशों की कम संवृद्धि दर के लिए जिम्मेदार सामान्य विशेषताएं निम्न प्रकार हैं:
प्रति व्यक्ति निम्न आय और निर्वाह का निम्न स्तर: इन देशों में प्रति व्यक्ति आय का स्तर बहुत नीचा होता है, जिससे अधिकतर लोग निर्धनता, कुपोषण, बीमारी, अशिक्षा आदि की स्थिति में रहते हैं. निर्धन जनता को जीवन की मूल आवश्यकताएं भी आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं.
जनसंख्या में तीव्र दर से वृद्धि: इन देशों में जनसंख्या में तीव्र दर से वृद्धि होती है, जो आर्थिक संवृद्धि को निष्प्रभाव कर देती है. अधिक जनसंख्या से अभिप्राय, अधिक उपभोग व्यय तथा उत्पादक गतिविधियों में निम्न निवेश, जो आर्थिक विकास को धीमा कर देता है.
पूंजी निर्माण की नीची दर और तकनीकी पिछड़ापन: अल्प विकसित देशों में बचत की दर काफी नीची होती है, इसलिए पूंजी निर्माण की दर भी नीची होती है. पूंजी की कमी के कारण आम तौर पर पुरानी (अप्रचलित) उत्पादन तकनीक का प्रयोग किया जाता है.
उत्पादकता का नीचा स्तर और बेरोजगारी का ऊंचा स्तर: उत्पादकता का स्तर अर्थात् प्रति व्यक्ति उत्पाद बहुत नीचा होने की प्रवृत्ति होती है. इसके मुख्य कारणों में अकुशल श्रम शक्ति, खराब स्वास्थ्य और मशीनों का कम प्रयोग शामिल है. पूंजी के अभाव और निम्न विकास स्तर के कारण, बेरोजगारी का स्तर बहुत ऊंचा होता है.
आय का अत्यधिक असमान वितरण और सामाजिक निर्देशकों का नीचा स्तर: निर्धन तथा धनी व्यक्तियों में आय की असमानता बहुत अधिक होती है, जो आम जनता की व्यापक निर्धनता का कारण बनती है. इसके अलावा, साक्षरता दर, शिशु मृत्यु की ऊंची दर, और जीवन की कम प्रत्याशा जैसे विकास के सामाजिक निर्देशकों का स्तर भी विकसित देशों की तुलना में बहुत नीचा होता है.
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