I. एक-पंक्ति वाले प्रश्नोत्तर (One-Liner Q&A)
- प्रश्न: अर्थव्यवस्था के मुख्यतः कितने क्षेत्रक हैं?
- उत्तर: अर्थव्यवस्था के मुख्यतः तीन क्षेत्रक हैं - प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक।
- प्रश्न: प्राथमिक क्षेत्रक में कौन-सी गतिविधियाँ शामिल होती हैं?
- उत्तर: वे सभी गतिविधियाँ जिनमें प्राकृतिक संसाधनों को प्रत्यक्ष रूप से उपयोग में लिया जाता है।
- प्रश्न: प्राथमिक क्षेत्र का मुख्य व्यवसाय क्या है?
- उत्तर: कृषि।
- प्रश्न: प्राथमिक क्षेत्रक को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
- उत्तर: कृषि एवं सहायक कृषि क्षेत्र भी कहा जाता है।
- प्रश्न: द्वितीयक क्षेत्रक में कौन-सी प्रमुख गतिविधियाँ शामिल हैं?
- उत्तर: विनिर्माण, निर्माण तथा जल और बिजली आपूर्ति उत्पादन गतिविधियाँ।
- प्रश्न: द्वितीयक क्षेत्र की विनिर्माण इकाइयों को क्या कहते हैं?
- उत्तर: फैक्ट्री तथा उद्योग।
- प्रश्न: लघु उद्योग के दो उदाहरण दीजिए।
- उत्तर: जूते बनाने वाली फैक्ट्री और कपड़े का उत्पादन करने वाली इकाइयाँ।
- प्रश्न: तृतीयक क्षेत्रक को और किस नाम से जाना जाता है?
- उत्तर: सेवा क्षेत्र (Service Sector)।
- प्रश्न: सेवा क्षेत्र की गतिविधियाँ किन क्षेत्रों के उत्पादन और विकास में सहयोग करती हैं?
- उत्तर: प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्र के उत्पादन और विकास में।
- प्रश्न: वर्तमान युग में सेवा क्षेत्र में आने वाली दो नई सेवाओं के उदाहरण दीजिए।
- उत्तर: इंटरनेट कैफे, ए.टी.एम. बूथ, ई-कियोस्क, कॉल सेंटर, या सॉफ्टवेयर कम्पनी।
- प्रश्न: बैंकिग और बीमा सेवाएँ कौन-से क्षेत्र से सम्बन्धित हैं?
- उत्तर: तृतीयक क्षेत्र से।
- प्रश्न: स्वतंत्रता के समय प्राथमिक क्षेत्र का राष्ट्रीय आय में अंश कैसा था?
- उत्तर: सबसे अधिक।
- प्रश्न: राष्ट्रीय आय की गणना किस दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है?
- उत्तर: राष्ट्र की आर्थिक प्रगति का बोध और आर्थिक स्थिति का ज्ञान होता है।
- प्रश्न: भारत में एक वित्त वर्ष की अवधि क्या है?
- उत्तर: 1 अप्रैल से 31 मार्च तक।
- प्रश्न: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या कहलाता है?
- उत्तर: एक वित्त वर्ष में देश की घरेलू सीमाओं में उत्पादित समस्त अन्तिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्यों का योग।
- प्रश्न: भारत में राष्ट्रीय आय की गणना कौन-सी संस्था करती है?
- उत्तर: केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (Central Statistical Organisation - CSO)।
- प्रश्न: राष्ट्रीय आय में जनसंख्या का भाग देने पर क्या प्राप्त होता है?
- उत्तर: प्रतिव्यक्ति आय (या औसत आय)।
- प्रश्न: आय में वृद्धि को समय के साथ क्या कहते हैं?
- उत्तर: आर्थिक वृद्धि (Economic Growth)।
- प्रश्न: राष्ट्रीय आय किस स्तर को मापने की दृष्टि से उपयोगी है?
- उत्तर: विकास स्तर को।
- प्रश्न: आर्थिक वृद्धि किस प्रकार का परिवर्तन है?
- उत्तर: एक दीर्घकालिक मात्रात्मक परिवर्तन।
- प्रश्न: आर्थिक विकास, आर्थिक वृद्धि की तुलना में कैसी अवधारणा है?
- उत्तर: व्यापक अवधारणा।
- प्रश्न: सतत विकास (Sustainable Development) का प्रमुख बल किस पर है?
- उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों के ऐसे दोहन पर जिसमें भावी पीढ़ी के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
- प्रश्न: समावेशी विकास किसे कहते हैं?
- उत्तर: समाज के वंचित वर्गों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करने पर बल देने वाले विकास को।
- प्रश्न: नियोजन क्या है?
- उत्तर: उपलब्ध संसाधनों को आवश्यकतानुसार उपयोग करके राष्ट्र के लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयास करने वाली एक तकनीक।
- प्रश्न: आर्थिक नियोजन की तकनीक सर्वप्रथम किस देश ने अपनाई?
- उत्तर: सोवियत संघ द्वारा।
- प्रश्न: भारत में आर्थिक नियोजन का प्रथम प्रयास कब और किसने किया?
- उत्तर: 1934 में एम. विशेश्वरैया द्वारा।
- प्रश्न: भारत सरकार ने योजना आयोग की स्थापना कब की?
- उत्तर: मार्च 1950 में।
- प्रश्न: योजना आयोग के स्थान पर कौन-सा नया संस्थान गठित किया गया है?
- उत्तर: नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान)।
- प्रश्न: नीति आयोग के अध्यक्ष कौन होते हैं?
- उत्तर: माननीय प्रधानमंत्री।
- प्रश्न: भारत में योजना अवकाश की अवधि कौनसी थी?
- उत्तर: 1966 से 1969。
II. अति लघुतात्मक प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Q&A)
- प्रश्न: आर्थिक गतिविधियाँ क्या हैं?
- उत्तर: आय अर्जन, व्यय तथा बचत जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों को आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं।
- प्रश्न: प्राथमिक क्षेत्रक ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित है या शहरी क्षेत्रों से?
- उत्तर: प्राथमिक क्षेत्रक मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित है क्योंकि गाँवों में रहने वाले अधिकतर लोग फसल उगाने के लिए खेतों में काम करते हैं。
- प्रश्न: प्राथमिक क्षेत्र की चार आर्थिक गतिविधियों के उदाहरण दीजिए।
- उत्तर: गेहूँ की खेती, दूध डेयरी, मछली पालन, खनन, पशुपालन, और वानिकी।
- प्रश्न: द्वितीयक क्षेत्रक में शामिल विनिर्माण करने वाली इकाइयों के आकार क्या होते हैं?
- उत्तर: इनके आकार तथा सम्बद्ध व्यय के आधार पर ये लघु उद्योग, मध्यम उद्योग और बड़े पैमाने के उद्योग होते हैं。
- प्रश्न: बड़े पैमाने के उद्योगों के दो उदाहरण दीजिए।
- उत्तर: इस्पात, मोटर-गाड़ियाँ, और एल्यूमिनियम आदि के उद्योग।
- प्रश्न: तृतीयक क्षेत्रक (सेवा क्षेत्र) की चार आर्थिक गतिविधियों के उदाहरण दीजिए।
- उत्तर: व्यापार, होटल तथा जलपान गृह, परिवहन, वित्तीय सेवाएँ (बैंकिंग, बीमा), लोक प्रशासन, स्थावर सम्पदा तथा व्यावसायिक सेवाएँ।
- प्रश्न: सेवा क्षेत्र में कौन-सी सेवाएँ सीधे रूप से वस्तुओं का उत्पादन नहीं करती हैं?
- उत्तर: शिक्षक, डॉक्टर, वकील, प्रशासनिक एवं लेखा कार्य करने वालों की सेवाएँ।
- प्रश्न: वर्तमान युग में कौनसे क्षेत्र को रोजगार क्षेत्र के रूप में पहचान मिली है?
- उत्तर: औद्योगिक क्षेत्रक (द्वितीयक क्षेत्रक) ने भारत की जनसंख्या को रोजगार के अवसर प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
- प्रश्न: राष्ट्रीय आय से आप क्या समझते हैं?
- उत्तर: किसी राष्ट्र की एक निश्चित अवधि (एक वित्त वर्ष) में उत्पादित समस्त अन्तिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मौद्रिक मूल्य का योग ही राष्ट्रीय आय है।
- प्रश्न: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को क्यों उपयोग में लिया जाता है?
- उत्तर: राष्ट्रीय आय को मापने हेतु सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को ही अधिक उपयोग में लिया जाता है।
- प्रश्न: उत्पादन के साधनों को उनके योगदान के अनुसार क्या पुरस्कार दिया जाता है?
- उत्तर: भूमि को लगान, श्रम को मजदूरी, पूँजी को ब्याज तथा उद्यमी को लाभ प्राप्त होता है।
- प्रश्न: घरेलू आय क्या है?
- उत्तर: देश की सीमाओं के अन्दर उत्पादन से होने वाली साधन आय को घरेलू आय कहते हैं।
- प्रश्न: राष्ट्रीय आय की प्रथम गणना किसने की थी?
- उत्तर: राष्ट्रीय आय की प्रथम गणना हेतु भारत सरकार द्वारा श्री पी.सी. महालनोबिस की अध्यक्षता में अगस्त 1949 में एक समिति गठित की गई थी।
- प्रश्न: आर्थिक वृद्धि क्या है?
- उत्तर: जब प्रतिव्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है, तो उसी को आर्थिक वृद्धि कहा जाता है।
- प्रश्न: औसत आय कल्याण को मापने की दृष्टि से क्यों उपयोगी है?
- उत्तर: क्योंकि विभिन्न राष्ट्रों की जनसंख्या अलग-अलग होती है, अतः उनकी तुलना के लिए राष्ट्रीय आय की जगह औसत आय (प्रतिव्यक्ति आय) उचित रहती है।
- प्रश्न: आर्थिक वृद्धि में किन परिवर्तनों पर ध्यान नहीं दिया जाता है?
- उत्तर: संरचनात्मक, संस्थागत, तकनीकी और सामाजिक परिवर्तनों पर ध्यान नहीं दिया जाता है。
- प्रश्न: वास्तविक विकास (Real Development) क्या है?
- उत्तर: जब आय में वृद्धि के साथ-साथ सामाजिक, राजनैतिक मूल्यों एवं जीवन के सभी आयामों में सुधार होता है, तो उसी को वास्तविक विकास कहा जाता है।
- प्रश्न: यदि किसी राष्ट्र की जनसंख्या वृद्धि, सकल घरेलू उत्पाद से अधिक है तो क्या आर्थिक विकास संभव है?
- उत्तर: नहीं, आर्थिक विकास तभी स्वीकार किया जाता है जब जनसंख्या वृद्धि की तुलना में सकल घरेलू उत्पाद अधिक हो。
- प्रश्न: नियोजन के तीन प्रमुख चरण (Steps) बताइए।
- उत्तर: 1. लक्ष्य एवं उद्देश्य निर्धारित करना। 2. उपलब्ध संसाधनों का आकलन करना। 3. संसाधनों का विभिन्न लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु उचित आबंटन करना।
- प्रश्न: भारत में राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की स्थापना कब की गई?
- उत्तर: 1952 में।
III. लघुतात्मक प्रश्नोत्तर (Short Answer Q&A)
- प्रश्न: प्राथमिक क्षेत्र से लोग दूसरे कार्यों में क्यों जाने लगे?
- उत्तर: स्वतंत्रता के समय से ही प्राथमिक क्षेत्रक में खेती सबसे प्रधान व्यवसाय था। समय के साथ कृषि पर जनसंख्या का दबाव बढ़ने लगा, और तकनीकी एवं जनसंख्या वृद्धि के कारण इस क्षेत्र में बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न होने लगी। इस बेरोजगारी और कृषि से संबंधित समस्याओं के कारण लोग शिल्पियों, व्यापारियों, सेना, परिवहन, प्रशासन, और सेवा क्षेत्र से जुड़कर दूसरे कार्यों में काम करने लगे。
-
प्रश्न: भारत में आर्थिक नियोजन के प्रमुख उद्देश्य क्या रहे हैं?
-
उत्तर: भारत में नियोजन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित रहे हैं:
- संसाधनों का कुशलतम उपयोग करना तथा रोजगार के अवसरों का सृजन करना।
- विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना।
- गरीबी की समस्या को दूर करना।
- आय की असमानता को दूर करना।
- सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की प्राप्ति करना।
- परम्परागत भारतीय अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण करना।
- सामाजिक एवं सामुदायिक सेवाओं का विस्तार करना और सामाजिक स्तर को सुधारना।
-
उत्तर: भारत में नियोजन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित रहे हैं:
को सुधारना।
- प्रश्न: सकल राष्ट्रीय उत्पाद और सकल राष्ट्रीय आय एक समान क्यों होते हैं?
- उत्तर: देश के सभी साधन आपसी सहयोग से जितने मूल्य की वस्तुएँ एवं सेवाएँ उत्पादित करते हैं, देश में उतने ही मूल्य की मूल्यवृद्धि का निर्माण होता है। इस मूल्यवृद्धि में सभी साधनों का हिस्सा होता है, और साधनों को उनके योगदान के अनुसार भुगतान किया जाता है (जैसे लगान, मजदूरी, ब्याज, लाभ)। सरल शब्दों में, साधनों द्वारा किया गया उत्पादन ही साधनों को आय के रूप में प्राप्त होता है। इस प्रकार, सकल राष्ट्रीय उत्पाद और सकल राष्ट्रीय आय एक समान होते हैं。
- प्रश्न: आर्थिक विकास की तुलना में आर्थिक वृद्धि की अवधारणा सीमित क्यों है?
- उत्तर: आर्थिक वृद्धि एक दीर्घकालिक मात्रात्मक परिवर्तन है। यह केवल प्रतिव्यक्ति आय व राष्ट्रीय आय में बढ़ोतरी को मापती है। यह एक संकीर्ण अवधारणा है क्योंकि इसमें संरचनात्मक, संस्थागत, तकनीकी, और सामाजिक परिवर्तनों पर ध्यान नहीं दिया जाता है, जबकि ये कारक जीवन की गुणवत्ता और कल्याण के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं।
- प्रश्न: समावेशी विकास से आप क्या समझते हैं?
- उत्तर: समावेशी विकास उस विकास को कहते हैं जिसमें समाज के वंचित वर्गों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करने पर बल दिया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक विकास का लाभ सभी वर्गों तक पहुँचे, और लिंग, भाषा, क्षेत्र, गरीबी तथा शिक्षा के भेदभाव को दूर किया जाए। यह अवसर की समानता और सभी आयामों में समान मानवीय अधिकारों का समर्थन करता है。
IV. निबंधात्मक प्रश्नोत्तर (Essay Type Q&A)
-
प्रश्न: अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रों (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) का विस्तृत वर्णन कीजिए और उनके बीच के संबंध को स्पष्ट कीजिए।
-
उत्तर:
- प्राथमिक क्षेत्रक: इसमें वे सभी गतिविधियाँ शामिल होती हैं जिनमें प्राकृतिक संसाधनों को प्रत्यक्ष रूप से उपयोग में लाया जाता है। यह मुख्यतः कृषि एवं सहायक कृषि क्षेत्र कहलाता है। उदाहरण: गेहूँ की खेती, पशुपालन, मछली पालन, खनन। यह ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित है और स्वतंत्रता के समय राष्ट्रीय आय में इसका अंश सबसे अधिक था।
- द्वितीयक क्षेत्रक: इस क्षेत्र में विनिर्माण, निर्माण तथा जल और बिजली आपूर्ति उत्पादन गतिविधियाँ शामिल होती हैं। इसमें कच्चे माल का प्रयोग कर वस्तुएँ बनाने वाली फैक्ट्रियों और उद्योगों को सम्मिलित किया जाता है। उदाहरण: जूते बनाने वाली फैक्ट्री, कपड़े का उत्पादन, इस्पात उद्योग, मोटर-गाड़ियाँ।
- तृतीयक क्षेत्रक (सेवा क्षेत्र): यह क्षेत्र सेवाओं के उत्पादन से संबंधित है। इसमें वे गतिविधियाँ शामिल हैं जो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्र के उत्पादन और विकास में सहयोग करती हैं。 उदाहरण: व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, लोक प्रशासन, सॉफ्टवेयर कम्पनियाँ。
- संबंध: प्राथमिक क्षेत्र द्वितीयक क्षेत्र के लिए कच्चे माल का स्रोत है (जैसे गेहूँ से आटा या कपास से कपड़ा)। तृतीयक क्षेत्र, प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्र दोनों के लिए सेवाएँ प्रदान करता है (जैसे परिवहन कच्चे माल और तैयार माल को लाता-ले जाता है, बैंकिंग वित्तीय सेवाएँ प्रदान करता है)。 समय के साथ, विकसित देशों में द्वितीयक क्षेत्र से तृतीयक क्षेत्र की ओर बदलाव आया है, और वर्तमान में कुल उत्पादन एवं रोजगार की दृष्टि से तृतीयक क्षेत्र का महत्त्व बढ़ गया है।
-
उत्तर:
ा है।
-
प्रश्न: राष्ट्रीय आय की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए इसके महत्त्व को समझाइए।
-
उत्तर:
- राष्ट्रीय आय की अवधारणा: राष्ट्रीय आय से तात्पर्य किसी राष्ट्र की एक निश्चित अवधि (भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च तक) में देश के सभी साधनों की सहायता से उत्पादन प्रक्रिया में योगदान से प्राप्त आय के योग से होता है। सरल शब्दों में, यह समस्त अन्तिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मौद्रिक मूल्य का योग है, जिसे देश के उत्पादन के साधनों को प्राप्त होने वाले भुगतान (लगान, मजदूरी, ब्याज, लाभ) के रूप में भी देखा जाता है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को राष्ट्रीय आय मापने के लिए सबसे अधिक उपयोग में लिया जाता है।
-
राष्ट्रीय आय का महत्त्व: राष्ट्रीय आय की गणना राष्ट्र के लिए निम्नलिखित दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण होती है:
- राष्ट्रीय आय से राष्ट्र की आर्थिक प्रगति का बोध तथा आर्थिक स्थिति का ज्ञान होता है।
- आर्थिक विकास के तत्त्वों का ज्ञान होता है।
- यह आर्थिक नीतियों के निर्माण में सहायक है।
- राष्ट्रीय आय के आधार पर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना की जा सकती है।
-
उत्तर:
सकती है।
-
प्रश्न: आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) और आर्थिक विकास (Economic Development) में मूलभूत अंतर स्पष्ट कीजिए।
- उत्तर: | विशेषता | आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) | आर्थिक विकास (Economic Development) | | :--- | :--- | :--- | | अवधारणा | संकीर्ण या सीमित अवधारणा | व्यापक अवधारणा | | परिभाषा | देश में प्रतिव्यक्ति आय व राष्ट्रीय आय में दीर्घकालिक मात्रात्मक वृद्धि | वास्तविक राष्ट्रीय आय में दीर्घकालिक वृद्धि के साथ-साथ लोगों के जीवन स्तर में गुणात्मक परिवर्तन | | परिवर्तन | केवल मात्रात्मक परिवर्तन पर ध्यान | मात्रात्मक के साथ-साथ गुणात्मक परिवर्तन (सामाजिक, संस्थागत, तकनीकी, सांस्कृतिक स्वरूप में अनुकूल परिवर्तन) | | उद्देश्य | आय एवं उत्पादन में वृद्धि | जनसमुदाय के कल्याण और जीवन स्तर में सुधार | | माप | प्रतिव्यक्ति आय, राष्ट्रीय आय, GDP | प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि के साथ-साथ निर्धनता में कमी, साक्षरता में वृद्धि, जीवन प्रत्याशा में वृद्धि | | निष्कर्ष | आय में वृद्धि आवश्यक है, परन्तु पर्याप्त नहीं | आय में वृद्धि के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता में सुधार ही वास्तविक विकास है |
-
प्रश्न: नियोजन किसे कहते हैं? भारत में नियोजन के इतिहास और संस्थागत ढाँचे को समझाइए।
-
उत्तर:
- नियोजन (Planning): नियोजन एक तकनीक है जिसके द्वारा उपलब्ध संसाधनों को आवश्यकतानुसार उपयोग करके राष्ट्र अपने लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयत्न करता है। यह किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए क्रियाकलापों के बारे में चिन्तन करना है। इसमें लक्ष्य निर्धारण, उपलब्ध संसाधनों का आकलन, और संसाधनों का उचित आबंटन शामिल होता है।
-
भारत में नियोजन का इतिहास और संस्थागत ढाँचा:
- प्रारंभ: 1930 से 1940 के दशक में भारतीय विद्वानों ने नियोजन द्वारा विकास का मार्ग अपनाने का समर्थन किया।
- प्रथम प्रयास: भारत में आर्थिक नियोजन का प्रथम प्रयास 1934 में एम. विशेश्वरैया द्वारा किया गया。
- योजना आयोग (1950): स्वतंत्रता के पश्चात, पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण हेतु भारत सरकार ने मार्च 1950 में योजना आयोग की स्थापना की। इसका उद्देश्य देश के संसाधनों का आकलन कर उन्हें बढ़ाना और प्रभावी उपयोग के लिए योजनाएँ बनाना था。
- राष्ट्रीय विकास परिषद (1952): योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन में राज्यों व केन्द्र को शामिल करने के लिए 1952 में राष्ट्रीय विकास परिषद की स्थापना की गई।
- पंचवर्षीय योजनाएँ: योजना आयोग ने अब तक बारह पंचवर्षीय योजनाएँ बनाईं (जैसे 1966-69 योजना अवकाश के रूप में जाना जाता है)。
- नीति आयोग (2015): योजना आयोग के स्थान पर भारत सरकार द्वारा नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) का गठन किया गया। यह सरकार के थिंक टैंक के रूप में सेवाएँ प्रदान करता है और राज्यों की वास्तविक व सतत भागीदारी सुनिश्चित करता है। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं।
-
उत्तर:
ष होते हैं।
-
प्रश्न: स्वतंत्रता के समय से भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में रोजगार के संदर्भ में आए परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
-
उत्तर:
- स्वतंत्रता के समय प्राथमिक क्षेत्र की प्रधानता: स्वतंत्रता के समय से ही प्राथमिक क्षेत्रक में खेती सबसे प्रधान व्यवसाय था और राष्ट्रीय आय में इसका अंश सबसे अधिक था। अधिकतर लोग इसी क्षेत्र से रोजगार प्राप्त करते थे।
- प्राथमिक क्षेत्र से बदलाव: समय के साथ, कृषि पर जनसंख्या का दबाव बढ़ा। तकनीकी विकास एवं जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि क्षेत्र में बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न होने लगी। इस वजह से लोग प्राथमिक क्षेत्र से काम छोड़कर दूसरे कार्यों में (जैसे शिल्पी, व्यापारी, सेना, परिवहन) काम करने लगे。
- द्वितीयक क्षेत्र का योगदान: औद्योगिक क्रांति की नवीन प्रणाली और कारखानों के निर्माण से प्राथमिक क्षेत्र के लोग कारखानों में काम करने लगे। औद्योगिक क्षेत्रक (द्वितीयक क्षेत्र) ने भारत की जनसंख्या को रोजगार के अवसर प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
- तृतीयक क्षेत्र का उदय: आधुनिक आधारिक संरचना के विकास (रेलगाड़ियाँ, हवाईजहाज, संचार साधन) के कारण तृतीयक क्षेत्र का महत्त्व बढ़ गया। कुल उत्पादन एवं रोजगार की दृष्टि से तृतीयक क्षेत्र का महत्व बढ़ गया है।
- वर्तमान स्थिति और असंतुलन: यद्यपि सकल घरेलू उत्पाद में द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी में परिवर्तन हुआ है, फिर भी रोजगार के अवसरों का पर्याप्त सृजन नहीं हुआ है। परिणामतः, आज भी देश में लगभग आधे श्रमिक प्राथमिक क्षेत्र मुख्यतः कृषि क्षेत्रक में कार्यरत हैं, क्योंकि उनका स्थानान्तरण नहीं हो पाया है।
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