कक्षा 12वीं अर्थशास्त्र पाठ 29सरकार का बजट पाठ के प्रश्न और उत्तर


​1. वन लाइन के 30 प्रश्न उत्तर (One-Line Answer Questions)

  1. अर्थव्यवस्था का मुख्य ध्येय क्या है?
    • ​जनता की आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए वस्तुएं और सेवाएं उपलब्ध कराना।
  2. सकल घरेलू उत्पाद (\text{GDP}) से निवल घरेलू उत्पाद (\text{NDP}) ज्ञात करने के लिए क्या घटाया जाता है?
    • ​मूल्य ह्रास (Depreciation)।
  3. साधन लागत (\text{FC}) और बाजार कीमत (\text{MP}) में मुख्य अंतर किस कारण होता है?
    • ​निवल अप्रत्यक्ष कर (\text{NIT})।
  4. राष्ट्रीय आय किस अवधारणा से जुड़ी है: स्टॉक या प्रवाह?
    • ​प्रवाह।
  5. आय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय की गणना करते समय कौन से साधन भुगतानों को जोड़ा जाता है?
    • ​कर्मचारियों का पारिश्रमिक, प्रचालन अधिशेष और मिश्रित आय।
  6. व्यय विधि द्वारा क्या प्राप्त होता है?
    • ​बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (\text{GDP}_{\text{MP}})।
  7. उपभोग में परिवर्तन और आय में परिवर्तन के अनुपात को क्या कहते हैं?
    • ​उपभोग की सीमांत प्रवृत्ति (\text{MPC})।
  8. \text{MPC} और \text{MPS} का योग कितना होता है?
    • ​एक (\text{MPC} + \text{MPS} = 1)।
  9. वह बिंदु जहाँ \text{C} = \text{Y} होता है, क्या कहलाता है?
    • ​सम स्तर बिंदु (Break-Even Point)।
  10. कौन सा निवेश आय के स्तर से स्वतंत्र होता है?
    • ​स्वायत्त निवेश (Autonomous Investment)।
  11. दो-क्षेत्रक अर्थव्यवस्था में समग्र मांग (\text{AD}) के दो घटक कौन से हैं?
    • ​उपभोग (\text{C}) और निवेश (\text{I})।
  12. आय और रोजगार के संतुलन की शर्त बचत और निवेश के संदर्भ में क्या है?
    • ​बचत = निवेश (\text{S} = \text{I})।
  13. निवेश में प्रारंभिक परिवर्तन के कारण आय में होने वाले अंतिम परिवर्तन के अनुपात को क्या कहते हैं?
    • ​गुणक (Multiplier)।
  14. न्यून मांग से अर्थव्यवस्था में कौन सा अंतराल उत्पन्न होता है?
    • ​अपस्फीति अंतराल (Deflationary Gap)।
  15. न्यून मांग दूर करने के लिए \text{RBI} कौन सी दर कम करता है?
    • ​बैंक दर या रेपो दर।
  16. वस्तु विनिमय प्रणाली की सबसे बड़ी कठिनाई क्या थी?
    • ​आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव।
  17. मुद्रा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य क्या है?
    • ​विनिमय का माध्यम।
  18. अर्थव्यवस्था में साख सृजन का कार्य कौन करते हैं?
    • ​वाणिज्यिक बैंक।
  19. केंद्रीय बैंक (भारतीय रिज़र्व बैंक) का एक प्रमुख कार्य क्या है?
    • ​साख का नियंत्रण या मुद्रा जारी करना।
  20. साख गुणक (\text{Credit Multiplier}) का सूत्र क्या है?
    • ​\text{K} = 1/\text{LRR}।
  21. वह साख नियंत्रण उपकरण क्या है जिसमें केंद्रीय बैंक बाजार में प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री करता है?
    • ​खुले बाजार की क्रियाएँ (Open Market Operations)।
  22. सरकारी बजट क्या है?
    • ​सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्ययों का वार्षिक विवरण।
  23. भारत में सरकारी बजट किस महीने में प्रस्तुत किया जाता है?
    • ​फरवरी।
  24. वह व्यय कौन सा है जिससे न तो परिसंपत्ति का सृजन होता है और न ही देनदारी कम होती है?
    • ​राजस्व व्यय।
  25. उधार लेना (Borrowing) किस प्रकार की प्राप्तियाँ हैं?
    • ​पूंजीगत प्राप्तियाँ।
  26. राजस्व घाटा क्या दर्शाता है?
    • ​सरकार के राजस्व व्यय का राजस्व प्राप्तियों से अधिक होना।
  27. राजकोषीय घाटा किसे दर्शाता है?
    • ​सरकार की कुल उधार आवश्यकताएँ।
  28. प्राथमिक घाटा शून्य होने पर राजकोषीय घाटा किसके बराबर होता है?
    • ​ब्याज भुगतान के।
  29. वह व्यय जो पंचवर्षीय योजनाओं के अनुरूप किया जाता है, क्या कहलाता है?
    • ​योजना व्यय।
  30. सरकारी बजट का एक मुख्य उद्देश्य क्या है?
    • ​आय और संपत्ति की असमानताओं को कम करना।

​2. अति लघुतात्मक के 20 प्रश्न उत्तर (Very Short Answer Questions)

  1. साधन आय और हस्तांतरण आय में मुख्य अंतर क्या है?
    • ​साधन आय उत्पादन के कारकों द्वारा सेवाओं के बदले प्राप्त होती है, जबकि हस्तांतरण आय एकतरफा और बिना किसी प्रतिदान के प्राप्त होती है (जैसे दान, पेंशन)।
  2. घरेलू सीमा और सामान्य निवासी की अवधारणा में मुख्य अंतर क्या है?
    • ​घरेलू सीमा भौगोलिक/आर्थिक क्षेत्र से संबंधित है (घरेलू आय के लिए), जबकि सामान्य निवासी आर्थिक हित के केंद्र से संबंधित है (राष्ट्रीय आय के लिए)।
  3. उत्पादन विधि में दोहरी गणना से बचने के लिए क्या उपाय किया जाता है?
    • ​दोहरी गणना से बचने के लिए, केवल अंतिम वस्तुओं का मूल्य या उत्पादन के प्रत्येक चरण में मूल्य वृद्धि को ही राष्ट्रीय आय में शामिल किया जाता है।
  4. \text{GDP}_{\text{MP}} को \text{NNP}_{\text{FC}} में बदलने के लिए आवश्यक तीन समायोजन क्या हैं?
      • ​\mu मूल्य ह्रास, 2. \mu निवल अप्रत्यक्ष कर (\text{NIT}), 3. +\text{NFIA} (शेष विश्व से प्राप्त निवल साधन आय)।
  5. स्वायत्त उपभोग (Autonomous Consumption) किसे कहते हैं?
    • ​यह वह उपभोग है जो आय के स्तर से स्वतंत्र होता है और आय शून्य होने पर भी विद्यमान रहता है; इसे पिछली बचतों या उधार से वित्तपोषित किया जाता है।
  6. \text{APS} ऋणात्मक कब होता है और यह क्या दर्शाता है?
    • ​\text{APS} तब ऋणात्मक होता है जब \text{APC} > 1 होता है, यानी उपभोग आय से अधिक होता है। यह निःबचत (Dis-Saving) की स्थिति को दर्शाता है।
  7. प्रेरित निवेश (Induced Investment) किसे कहते हैं?
    • ​यह वह निवेश है जो आय के स्तर और लाभ की संभावना पर निर्भर करता है; आय बढ़ने पर यह बढ़ता है और आय के घटने पर घटता है।
  8. समग्र मांग (\text{AD}) की अवधारणा क्या है?
    • ​\text{AD} दिए गए कीमत स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की वह कुल मांग है, जिसे उपभोक्ता, उत्पादक और सरकार करने के लिए तैयार हैं।
  9. न्यून मांग (\text{AD} < \text{AS}) का रोजगार के स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
    • ​न्यून मांग से अनैच्छिक बेरोजगारी उत्पन्न होती है, क्योंकि उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता है।
  10. आधिक्य मांग को दूर करने के लिए करों (Taxes) में क्या बदलाव किया जाना चाहिए?
    • ​आधिक्य मांग को नियंत्रित करने के लिए करों में वृद्धि की जानी चाहिए, जिससे लोगों की प्रयोज्य आय कम हो और समग्र मांग (\text{AD}) घटे।
  11. मुद्रा के दो द्वितीयक (Secondary) कार्य क्या हैं?
      • ​मूल्य का संचय (Store of Value), 2. स्थगित भुगतानों का मानक (Standard of Deferred Payments)।
  12. साख सृजन (Credit Creation) की अधिकतम सीमा किस पर निर्भर करती है?
    • ​यह प्रारंभिक जमाओं और वैधानिक आरक्षित अनुपात (\text{LRR}) पर निर्भर करती है।
  13. बैंक दर नीति क्या है?
    • ​यह वह ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को दीर्घकालिक ऋण देता है; यह साख नियंत्रण का एक परिमाणात्मक उपकरण है।
  14. साख नियंत्रण की परिमाणात्मक और गुणात्मक विधियों में मुख्य अंतर क्या है?
    • ​परिमाणात्मक विधियाँ कुल साख की मात्रा को नियंत्रित करती हैं, जबकि गुणात्मक विधियाँ साख के प्रवाह की दिशा या उपयोग को नियंत्रित करती हैं।
  15. राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts) किसे कहते हैं?
    • ​वे प्राप्तियाँ जो सरकार के लिए न तो कोई देनदारी (liability) उत्पन्न करती हैं और न ही परिसंपत्तियों (assets) को कम करती हैं (जैसे कर और गैर-कर राजस्व)।
  16. पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) किसे कहते हैं?
    • ​वह व्यय जिससे सरकार की परिसंपत्तियों का सृजन होता है (जैसे सड़क निर्माण) या देनदारियों में कमी आती है (जैसे ऋण चुकाना)।
  17. राजकोषीय घाटे को पूरा करने का मुख्य स्रोत क्या है?
    • ​उधार लेना (Borrowing)।
  18. राजस्व घाटा क्या दर्शाता है?
    • ​यह दर्शाता है कि सरकार अपने दिन-प्रतिदिन के खर्चों (राजस्व व्यय) को पूरा करने के लिए राजस्व प्राप्तियों में अक्षम है और उसे उधार लेना पड़ रहा है।
  19. प्राथमिक घाटा (Primary Deficit) क्या दर्शाता है?
    • ​यह राजकोषीय घाटे का वह हिस्सा है जो केवल वर्तमान व्ययों और प्राप्तियों के बीच के अंतर को दर्शाता है, यानी पिछले उधारों पर ब्याज भुगतान को छोड़कर वर्तमान उधार की आवश्यकता।
  20. योजना व्यय (Plan Expenditure) और गैर-योजना व्यय (Non-Plan Expenditure) में मुख्य अंतर क्या है?
    • ​योजना व्यय पंचवर्षीय योजनाओं के तहत खर्च होता है (विकास संबंधी), जबकि गैर-योजना व्यय प्रशासनिक कार्यकलापों और सामान्य सेवाओं (जैसे वेतन, पेंशन) पर होता है।

​3. लघुत्रात्मक के 10 प्रश्न उत्तर (Short Answer Questions)

  1. अंतिम व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय की गणना करते समय कौन सी दो सावधानियां आवश्यक हैं?
      • केवल अंतिम व्यय शामिल करें: मध्यवर्ती वस्तुओं पर किए गए व्यय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह दोहरी गणना का कारण बनेगा। 2. पुरानी वस्तुओं और वित्तीय परिसंपत्तियों पर व्यय शामिल न करें: पुराने सामानों की खरीद-बिक्री या शेयर/बॉन्ड की खरीद पर किया गया व्यय वर्तमान वर्ष के उत्पादन से संबंधित नहीं होता है।
  2. उपभोग फलन को परिभाषित कीजिए और \text{MPC} + \text{MPS} = 1 संबंध को सिद्ध कीजिए।
    • ​उपभोग फलन कुल उपभोग (\text{C}) और कुल आय (\text{Y}) के बीच कार्यात्मक संबंध को दर्शाता है। संबंध की सिद्धि: आय में परिवर्तन (\Delta Y) का या तो उपभोग (\Delta C) किया जाएगा या बचाया जाएगा (\Delta S)। \Delta Y = \Delta C + \Delta S। \Delta Y से भाग देने पर: \mathbf{1 = \text{MPC} + \text{MPS}}।
  3. न्यून मांग (Deficient Demand) को दूर करने के लिए राजकोषीय नीति के दो उपाय बताइए।
      • सरकारी व्यय में वृद्धि: सरकार को सार्वजनिक निर्माण जैसे वस्तुओं और सेवाओं की खरीद पर अपना व्यय बढ़ाना चाहिए, जिससे \text{AD} प्रत्यक्ष रूप से बढ़े। 2. करों में कमी: व्यक्तियों पर करों में कटौती करने से उनकी प्रयोज्य आय बढ़ जाती है, जिससे उपभोग व्यय में वृद्धि होती है और समग्र मांग बढ़ती है।
  4. निवेश गुणक (\text{K}) की अवधारणा क्या है? गुणक का मूल्य \text{MPC} = 0.8 होने पर कितना होगा?
    • ​निवेश गुणक वह अनुपात है जो निवेश में प्रारंभिक परिवर्तन के परिणामस्वरूप आय में होने वाले अंतिम परिवर्तन को मापता है (\text{K} = \Delta Y / \Delta I)। मूल्य: \text{K} = \frac{1}{(1 \mu \text{MPC})} = \frac{1}{(1 \mu 0.8)} = \frac{1}{0.2} = 5।
  5. मुद्रा के प्राथमिक कार्यों की व्याख्या कीजिए।
      • विनिमय का माध्यम: मुद्रा वस्तुओं और सेवाओं के विनिमय के लिए एक सामान्य माध्यम प्रदान करती है, जिससे वस्तु विनिमय प्रणाली की दोहरे संयोग की समस्या दूर होती है। 2. मूल्य का मापक: मुद्रा वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापने के लिए एक सामान्य इकाई प्रदान करती है, जिससे मूल्यों की तुलना करना सरल हो जाता है।
  6. साख सृजन में \text{LRR} की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
    • ​\text{LRR} वह न्यूनतम आरक्षित अनुपात है जिसे वाणिज्यिक बैंकों को कानूनी रूप से रखना होता है। \text{LRR} साख सृजन की सीमा निर्धारित करता है। \text{LRR} जितना अधिक होगा, साख गुणक (\text{K} = 1/\text{LRR}) उतना ही कम होगा और साख सृजन भी उतना ही कम होगा।
  7. केंद्रीय बैंक द्वारा साख नियंत्रण के लिए खुले बाजार की क्रियाओं (\text{OMO}) का उपयोग किस प्रकार किया जाता है?
    • मुद्रास्फीति (साख कम करना): केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियाँ बेचता है। इससे वाणिज्यिक बैंकों की नकदी (साख देने की क्षमता) कम हो जाती है। न्यून मांग (साख बढ़ाना): केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियाँ खरीदता है। इससे बैंकों की नकदी बढ़ती है और वे अधिक ऋण दे पाते हैं।
  8. सरकारी बजट की राजस्व प्राप्तियों और पूंजीगत प्राप्तियों में मुख्य अंतर क्या है?
    • राजस्व प्राप्तियाँ: ये वे प्राप्तियाँ हैं जो सरकार के लिए न तो देनदारी उत्पन्न करती हैं और न ही परिसंपत्तियों को कम करती हैं (उदा: कर)। पूंजीगत प्राप्तियाँ: ये वे प्राप्तियाँ हैं जो या तो सरकार की देनदारी उत्पन्न करती हैं (उदा: उधार लेना) या परिसंपत्तियों को कम करती हैं (उदा: विनिवेश)।
  9. राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा और प्राथमिक घाटा में अंतर को उनके सूत्रों के माध्यम से समझाइए।
    • राजस्व घाटा: राजस्व व्यय \mu राजस्व प्राप्तियाँ। राजकोषीय घाटा: कुल व्यय \mu (राजस्व प्राप्तियाँ + पूंजीगत प्राप्तियाँ जो उधार नहीं हैं)। प्राथमिक घाटा: राजकोषीय घाटा \mu ब्याज भुगतान।
  10. राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय में मुख्य अंतर क्या है?
    • राजस्व व्यय: यह न तो सरकार की परिसंपत्ति सृजित करता है और न ही देनदारी कम करता है (जैसे वेतन, पेंशन, आर्थिक सहायता)। पूंजीगत व्यय: यह सरकार की परिसंपत्ति सृजित करता है (जैसे स्कूल, सड़क) या देनदारी कम करता है (जैसे ऋण चुकाना)।

​4. निबंधात्मक के 5 प्रश्न उत्तर (Essay Type Questions)

  1. राष्ट्रीय आय की गणना की तीनों विधियों (उत्पादन, आय, व्यय) का नामोल्लेख कीजिए और समझाइए कि ये विधियाँ एक ही परिणाम क्यों देती हैं।
    • विधियाँ: 1. उत्पादन/मूल्य वृद्धि विधि, 2. आय वितरण विधि, 3. अंतिम व्यय विधि।
    • परिणाम की समतुल्यता: ये तीनों विधियाँ आय के चक्रीय प्रवाह (Circular Flow of Income) की एक ही आर्थिक प्रक्रिया को तीन भिन्न दृष्टिकोणों से देखती हैं: उत्पादन \to आय \to व्यय। उत्पादन प्रक्रिया में जो मूल्य जोड़ा जाता है (उत्पादन विधि), वह आय के रूप में वितरित होता है (आय विधि), और यह आय अंततः वस्तुओं और सेवाओं पर व्यय की जाती है (व्यय विधि)। चूँकि एक का मूल्य हमेशा दूसरे की आय और तीसरे के व्यय के बराबर होता है, इसलिए सैद्धांतिक रूप से इन तीनों विधियों का परिणाम राष्ट्रीय आय (\text{NNP}_{\text{FC}}) के लिए समान होता है।
  2. समग्र मांग (\text{AD}) और समग्र पूर्ति (\text{AS}) के संदर्भ में आय और रोजगार का संतुलन स्तर निर्धारण की व्याख्या कीजिए। न्यून मांग (Deficient Demand) और आधिक्य मांग (Excess Demand) की स्थितियों को समझाइए।
    • संतुलन निर्धारण: आय और रोजगार का संतुलन स्तर उस बिंदु पर निर्धारित होता है जहाँ समग्र मांग समग्र पूर्ति के बराबर होती है (\text{AD} = \text{AS})
    • न्यून मांग: यह वह स्थिति है जब वास्तविक \text{AD} पूर्ण रोजगार संतुलन के लिए आवश्यक \text{AD} से कम होती है। इससे अर्थव्यवस्था में उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता, अनैच्छिक बेरोजगारी फैलती है और कीमतों में गिरावट (अपस्फीति अंतराल) आती है।
    • आधिक्य मांग: यह वह स्थिति है जब वास्तविक \text{AD} पूर्ण रोजगार संतुलन के लिए आवश्यक \text{AD} से अधिक होती है। यह स्थिति मुद्रास्फीति का अंतराल उत्पन्न करती है, क्योंकि अर्थव्यवस्था अपनी उत्पादन क्षमता से अधिक उत्पादन नहीं कर सकती, केवल कीमतों में वृद्धि होती है।
  3. मुद्रा के चार मुख्य कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए। मुद्रा की आवश्यकता ने वस्तु विनिमय प्रणाली की किस सीमा को दूर किया?
    • मुद्रा के मुख्य कार्य: 1. विनिमय का माध्यम (Primary): मुद्रा विनिमय को सरल बनाती है और आवश्यकताओं के दोहरे संयोग के अभाव की सीमा को दूर करती है। 2. मूल्य का मापक (Primary): यह सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापने के लिए एक सामान्य इकाई प्रदान करती है। 3. मूल्य का संचय (Secondary): मुद्रा को आसानी से और कम लागत पर भविष्य के लिए संचित किया जा सकता है। 4. स्थगित भुगतानों का मानक (Secondary): मुद्रा भविष्य के भुगतानों या ऋणों के निपटान के लिए एक मानक इकाई प्रदान करती है।
  4. केंद्रीय बैंक की परिभाषा दीजिए और साख नियंत्रण के परिमाणात्मक उपकरणों (बैंक दर और खुले बाजार की क्रियाएँ) की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
    • केंद्रीय बैंक: यह देश की सर्वोच्च मौद्रिक संस्था है, जो मुद्रा जारी करने और साख को नियंत्रित करने का कार्य करती है। परिमाणात्मक उपकरण:
      • 1. बैंक दर (Bank Rate): यह वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है। मुद्रास्फीति में \text{RBI} इसे बढ़ाता है (ऋण महंगा होता है, साख कम होती है)। न्यून मांग में \text{RBI} इसे घटाता है।
      • 2. खुले बाजार की क्रियाएँ (\text{OMO}): यह केंद्रीय बैंक द्वारा बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री है। मुद्रास्फीति में \text{RBI} प्रतिभूतियाँ बेचता है (बैंकों की नकदी कम होती है)। न्यून मांग में \text{RBI} प्रतिभूतियाँ खरीदता है (बैंकों की नकदी बढ़ती है)।
  5. सरकारी बजट के तीन मुख्य उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए। सरकारी बजट के राजस्व और पूंजीगत घटक (प्राप्तियाँ और व्यय) को एक सारणी के माध्यम से विस्तार से समझाइए।
    • सरकारी बजट के उद्देश्य: 1. आय और संपत्ति की असमानताओं को कम करना: प्रगतिशील कराधान और लक्षित व्यय (गरीबों पर) के माध्यम से। 2. आर्थिक स्थिरता: \text{AD} को नियंत्रित करने के लिए राजकोषीय उपकरण (करों/व्यय में परिवर्तन) का उपयोग करना। 3. आर्थिक वृद्धि: सार्वजनिक निवेश और निजी निवेश को प्रोत्साहन देना।

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