1. वन लाइन के 30 प्रश्न उत्तर (One-Line Answer Questions)
गैर-साधन आय का एक अन्य नाम क्या है?
हस्तांतरण आय।
वह अवधारणा क्या है जिसे एक विशेष समय बिंदु पर मापा जाता है?
स्टॉक।
वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह को क्या कहते हैं?
वास्तविक प्रवाह।
सकल (Gross) मान को निवल (Net) मान में बदलने के लिए क्या घटाया जाता है?
मूल्य ह्रास (Depreciation)।
अप्रत्यक्ष करों और आर्थिक सहायता के अंतर को क्या कहते हैं?
निवल अप्रत्यक्ष कर (\{NIT})।
कौन सी आय सामान्य निवासियों की आय से संबंधित है?
राष्ट्रीय आय।
राष्ट्रीय आय मापन की कौन सी विधि मूल्य वृद्धि विधि के रूप में भी जानी जाती है?
उत्पादन विधि।
प्रचालन अधिशेष के मुख्य घटक क्या हैं?
लगान, ब्याज और लाभ।
निवल निर्यात की गणना का सूत्र क्या है?
निर्यात \mu आयात।
\{NNP}_{\{FC}} को आमतौर पर क्या कहा जाता है?
राष्ट्रीय आय।
उपभोग फलन क्या दर्शाता है?
कुल उपभोग और कुल आय के बीच संबंध।
शून्य आय पर भी होने वाला उपभोग क्या कहलाता है?
स्वायत्त उपभोग (Autonomous Consumption)।
उपभोग की सीमांत प्रवृत्ति (\{MPC}) और बचत की सीमांत प्रवृत्ति (\{MPS}) का योग कितना होता है?
एक (\{MPC} + \{MPS} = 1)।
सम स्तर बिंदु (Break-Even Point) पर क्या शर्त होती है?
उपभोग = आय (\{C} = \{Y})।
सम स्तर बिंदु से पहले बचत कैसी होती है?
ऋणात्मक (निःबचत/Dis-Saving)।
कौन सा निवेश आय के स्तर से स्वतंत्र होता है?
स्वायत्त निवेश (Autonomous Investment)।
निवल निवेश का सूत्र क्या है?
सकल निवेश \mu मूल्य ह्रास।
दो-क्षेत्रक अर्थव्यवस्था में समग्र मांग (\{AD}) के दो मुख्य घटक कौन से हैं?
उपभोग (\{C}) और निवेश (\{I})।
आय और रोजगार के संतुलन स्तर की शर्त क्या है?
समग्र मांग = समग्र पूर्ति (\{AD} = \{AS})।
निवेश में परिवर्तन के कारण आय में होने वाले परिवर्तन के अनुपात को क्या कहते हैं?
गुणक (Multiplier)।
पूर्ण रोजगार संतुलन के लिए आवश्यक समग्र मांग से वास्तविक समग्र मांग कम होने की स्थिति क्या कहलाती है?
न्यून मांग (Deficient Demand)।
आधिक्य मांग को ठीक करने के लिए राजकोषीय नीति का एक उपाय बताइए।
सरकारी व्यय में कमी या करों में वृद्धि।
न्यून मांग को ठीक करने के लिए मौद्रिक नीति का एक उपाय बताइए।
बैंक दर में कमी या खुले बाजार में प्रतिभूतियों की खरीद।
मुद्रा के प्रयोग में आने से पहले कौन सी प्रणाली प्रचलित थी?
वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System)।
वस्तु विनिमय प्रणाली की मुख्य कमी क्या थी?
आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव।
मुद्रा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य क्या है?
विनिमय का माध्यम।
अर्थव्यवस्था में साख सृजन (Credit Creation) का कार्य कौन सी संस्थाएँ करती हैं?
वाणिज्यिक बैंक।
केंद्रीय बैंक (भारतीय रिज़र्व बैंक) का मुख्य कार्य क्या है?
मुद्रा जारी करना या साख का नियंत्रण करना।
केंद्रीय बैंक द्वारा साख नियंत्रण की दो विधियाँ कौन सी हैं?
परिमाणात्मक और गुणात्मक।
साख नियंत्रण का वह उपकरण कौन सा है जिसमें केंद्रीय बैंक बाजार में प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री करता है?
खुले बाजार की क्रियाएँ (Open Market Operations)।
2. अति लघुतात्मक के 20 प्रश्न उत्तर (Very Short Answer Questions)
साधन आय (Factor Income) और हस्तांतरण आय (Transfer Income) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
साधन आय उत्पादन के कारकों (सेवाओं) के बदले प्राप्त होती है, जबकि हस्तांतरण आय बिना किसी सेवा के एकतरफा प्राप्त होती है (जैसे उपहार या दान)।
मूल्य वृद्धि (Value Added) की गणना का सूत्र दीजिए।
मूल्य वृद्धि = उत्पादन का मूल्य \mu मध्यवर्ती उपभोग व्यय।
घरेलू उत्पाद (Domestic Product) राष्ट्रीय उत्पाद (National Product) से किस प्रकार भिन्न होता है?
घरेलू उत्पाद में शेष विश्व से प्राप्त निवल साधन आय (\NFIA}) शामिल नहीं होती है, जबकि राष्ट्रीय उत्पाद में यह शामिल होती है (\NP} = \{DP} + \NFIA})।
आय विधि द्वारा NDP}_{\{FC}} ज्ञात करने के लिए जोड़े जाने वाले तीन घटकों के नाम बताइए।
कर्मचारियों का पारिश्रमिक, प्रचालन अधिशेष, और स्वनियोजितों की मिश्रित आय।
\{GDP}_{\{MP}} को \{GDP}_{\{FC}} में बदलने के लिए क्या समायोजन आवश्यक है?
\{GDP}_{\{MP}} में से निवल अप्रत्यक्ष कर (\NIT}) घटाया जाता है।
व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय की गणना करते समय पुरानी वस्तुओं को क्यों शामिल नहीं किया जाता है?
क्योंकि पुरानी वस्तुओं का लेनदेन वर्तमान वर्ष के उत्पादन को नहीं दर्शाता है, बल्कि पिछले वर्षों के उत्पादन पर व्यय को दर्शाता है।
उपभोग की सीमांत प्रवृत्ति (\{MPC}) को परिभाषित कीजिए।
यह आय में परिवर्तन के परिणामस्वरूप उपभोग में हुए परिवर्तन का अनुपात है, जिसे \{MPC} = \Delta C / \Delta Y के रूप में व्यक्त किया जाता है।
\{MPC} का मान 0 और 1 के बीच क्यों होता है?
क्योंकि आय बढ़ने पर उपभोग बढ़ता है (\{MPC} > 0), लेकिन पूरी बढ़ी हुई आय खर्च नहीं होती है, कुछ बचा ली जाती है (\{MPC} < 1)।
बचत की औसत प्रवृत्ति (\APS}) का सूत्र क्या है?
\t
{APS} = \S}/\{Y} (कुल बचत और कुल आय का अनुपात)।
उपभोग फलन (\{C} = \bar{C} + bY) से बचत फलन ज्ञात करने का सूत्र क्या है?
\{S} = \mu \bar{C} + (1 \mu b) Y। (जहाँ (1 \mu b) बचत की सीमांत प्रवृत्ति (\{MPS}) है)।
समग्र मांग (\AD}) की अवधारणा क्या है?
\{AD} दिए गए कीमत स्तर पर अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की वह कुल मांग है, जिसे उपभोक्ता, उत्पादक और सरकार करने के लिए तैयार हैं।
दो-क्षेत्रक अर्थव्यवस्था में संतुलन की दो वैकल्पिक शर्तें बताइए।
समग्र मांग = समग्र पूर्ति (\AD} = \{AS})
बचत = निवेश (\{S} = \{I})
गुणक (\{K}) का अधिकतम संभव मान क्या है?
अनंत, जब \MPC} = 1 होता है। (\{K} = 1/(1 \mu 1) = 1/0 = \infty)
मुद्रास्फीति अंतराल (Inflationary Gap) या आधिक्य मांग को परिभाषित कीजिए।
यह वह स्थिति है जब वास्तविक \{AD}, पूर्ण रोजगार के लिए आवश्यक \AD} से अधिक होती है, जिससे कीमत स्तर में वृद्धि होती है।
न्यून मांग (Deficient Demand) का रोजगार के स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
न्यून मांग से अनैच्छिक बेरोजगारी उत्पन्न होती है, क्योंकि उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता है।
वस्तु विनिमय प्रणाली में "आवश्यकताओं के दोहरे संयोग" का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की वस्तु की आवश्यकता होनी चाहिए और दूसरे व्यक्ति को ठीक पहले व्यक्ति की वस्तु की आवश्यकता होनी चाहिए।
मुद्रा के दो द्वितीयक कार्य बताइए।
मूल्य का संचय, 2. स्थगित भुगतानों का मानक।
वाणिज्यिक बैंकों द्वारा साख सृजन (Credit Creation) से क्या तात्पर्य है?
यह वाणिज्यिक बैंकों की वह क्षमता है जिसके द्वारा वे अपनी प्रारंभिक नकद जमा के आधार पर \text{LRR} को ध्यान में रखते हुए, ऋण देने और व्युत्पन्न जमाओं का निर्माण करके, अर्थव्यवस्था में मुद्रा की आपूर्ति को कई गुना बढ़ा देते हैं।
साख गुणक और \{LRR} (वैधानिक आरक्षित अनुपात) के बीच क्या संबंध है?
साख गुणक और \{LRR} के बीच विपरीत संबंध होता है; \LRR} जितना कम होगा, साख गुणक उतना ही अधिक होगा (\{Credit Multiplier} = 1/\{LRR})।
केंद्रीय बैंक द्वारा साख नियंत्रण के लिए उपयोग की जाने वाली दो परिमाणात्मक (Quantitative) विधियों के नाम बताइए।
बैंक दर नीति और खुले बाजार की क्रियाएँ।
3. लघुत्रात्मक के 10 प्रश्न उत्तर (Short Answer Questions)
स्टॉक और प्रवाह (Stock and Flow) चरों में अंतर को एक-एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
स्टॉक: यह एक आर्थिक चर है जिसे समय के एक विशिष्ट बिंदु पर मापा जाता है। इसका कोई समय आयाम नहीं होता है। (उदा: धन या 31 मार्च को पूंजी)।
प्रवाह: यह एक आर्थिक चर है जिसे समय की एक निश्चित अवधि के दौरान मापा जाता है। इसका समय आयाम होता है। (उदा: राष्ट्रीय आय या एक वर्ष में निवेश)।
राष्ट्रीय आय की गणना के लिए आय विधि का उपयोग करते समय बरती जाने वाली किन्हीं तीन सावधानियों को स्पष्ट कीजिए।
हस्तांतरण भुगतानों को शामिल न करना: वृद्धावस्था पेंशन, छात्रवृत्ति जैसी एकतरफा प्राप्तियों को शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि उनके बदले कोई उत्पादक सेवा प्रदान नहीं की जाती।
पुरानी वस्तुओं की बिक्री से आय: इसे शामिल नहीं किया जाता, केवल उनकी बिक्री पर मिलने वाले कमीशन या दलाली को आय के रूप में जोड़ा जाता है।
अवैध गतिविधियों से प्राप्त आय: जुआ या तस्करी से प्राप्त आय को शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता और यह उत्पादक गतिविधि नहीं है।
उपभोग की सीमांत प्रवृत्ति (\text{MPC}) और बचत की सीमांत प्रवृत्ति (\text{MPS}) के बीच संबंध को सूत्र सहित समझाइए।
चूँकि आय का वह हिस्सा जो उपभोग नहीं होता, वह बचत होता है, इसलिए आय में वृद्धि (\Delta Y) का या तो उपभोग किया जाएगा (\Delta C) या बचाया जाएगा (\Delta S)।
अतः \Delta Y = \Delta C + \Delta S।
\Delta Y से भाग देने पर: 1 = \frac{\Delta C}{\Delta Y} + \frac{\Delta S}{\Delta Y}।
इसलिए, \mathbf{MPC + MPS = 1}। यह दर्शाता है कि दोनों प्रवृत्तियाँ एक-दूसरे के पूरक हैं।
स्वायत्त निवेश (Autonomous Investment) और प्रेरित निवेश (Induced Investment) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
स्वायत्त निवेश: आय के स्तर से स्वतंत्र होता है। यह लाभ की आशा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सामाजिक कल्याण/आवश्यकता पर निर्भर करता है (उदा: सरकारी निवेश)। आय बदलने पर यह स्थिर रहता है।
प्रेरित निवेश: आय के स्तर पर निर्भर करता है। यह लाभ कमाने की इच्छा से प्रेरित होता है (उदा: निजी क्षेत्र का निवेश)। आय बढ़ने पर यह बढ़ता है और आय घटने पर घटता है।
निवेश गुणक (\text{K}) की कार्यशीलता को \text{MPC} = 0.5 मानते हुए दो चरणों में संक्षेप में समझाइए।
माना निवेश में प्रारंभिक वृद्धि (\Delta I) \text{₹}100 है और \text{MPC} = 0.5 है।
चरण 1: निवेश \text{₹}100 से आय में \text{₹}100 की वृद्धि होती है। इस \text{₹}100 का \text{MPC}=0.5 (\text{₹}50) उपभोग पर खर्च होता है, जो दूसरे व्यक्ति की आय बन जाता है।
चरण 2: दूसरे व्यक्ति की आय में \text{₹}50 की वृद्धि होती है। इस \text{₹}50 का 0.5 (\text{₹}25) पुनः उपभोग पर खर्च होता है, जो तीसरे व्यक्ति की आय बन जाता है।
यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक \Delta Y शून्य न हो जाए। \text{MPC}=0.5 के साथ गुणक (\text{K}) 1/(1-0.5) = 2 होगा, और कुल आय में वृद्धि \text{₹}200 होगी।
आधिक्य मांग (Excess Demand) को ठीक करने के लिए करों (Taxation) के प्रभाव को संक्षेप में समझाइए।
आधिक्य मांग को कम करने के लिए सरकार को करों में वृद्धि करनी चाहिए। करों में वृद्धि से व्यक्तियों की प्रयोज्य (खर्च करने योग्य) आय कम हो जाती है। प्रयोज्य आय कम होने से उपभोग व्यय घट जाता है, जिससे समग्र मांग (\text{AD}) कम होती है और आधिक्य मांग की समस्या दूर होती है।
न्यून मांग (Deficient Demand) को दूर करने के लिए बैंक दर (Bank Rate) में परिवर्तन के प्रभाव को संक्षेप में समझाइए।
न्यून मांग को दूर करने के लिए केंद्रीय बैंक बैंक दर में कमी करता है। बैंक दर में कमी से वाणिज्यिक बैंकों के लिए केंद्रीय बैंक से ऋण लेना सस्ता हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप वाणिज्यिक बैंक भी ऋण की ब्याज दरें घटा देते हैं, जिससे ऋण सस्ता होता है। लोग और व्यवसाय अधिक ऋण लेते हैं, जिससे उपभोग और निवेश बढ़ता है और समग्र मांग (\text{AD}) में वृद्धि होती है, जिससे न्यून मांग की समस्या दूर होती है।
मुद्रा के प्राथमिक कार्यों की व्याख्या कीजिए।
1. विनिमय का माध्यम: मुद्रा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य वस्तुओं और सेवाओं के विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करना है, जिससे वस्तु विनिमय प्रणाली की दोहरे संयोग की समस्या दूर होती है।
2. मूल्य का मापक: मुद्रा वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापने के लिए एक सामान्य इकाई प्रदान करती है, जिससे विभिन्न वस्तुओं के मूल्यों की तुलना करना सरल हो जाता है।
वैधानिक आरक्षित अनुपात (\text{LRR}) की अवधारणा और साख सृजन में इसकी भूमिका को समझाइए।
\text{LRR} वह अनुपात है जिसका पालन करना वाणिज्यिक बैंकों के लिए कानूनी रूप से आवश्यक है। यह उनकी कुल जमाओं का वह हिस्सा होता है जो उन्हें कानूनी रूप से आरक्षित रखना होता है (नकद आरक्षित अनुपात और वैधानिक तरलता अनुपात के रूप में)। \text{LRR} साख सृजन की सीमा निर्धारित करता है: \text{LRR} जितना अधिक होगा, बैंकों की ऋण देने की क्षमता उतनी ही कम होगी और साख सृजन भी उतना ही कम होगा।
साख नियंत्रण की परिमाणात्मक (Quantitative) और गुणात्मक (Qualitative) विधियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
परिमाणात्मक विधियाँ: ये अर्थव्यवस्था में कुल साख की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए उपयोग की जाती हैं (उदा: बैंक दर, \text{OMOs}, \text{CRR})। ये सभी क्षेत्रों को समान रूप से प्रभावित करती हैं।
गुणात्मक विधियाँ: ये साख की मात्रा को प्रभावित करने के बजाय, साख के प्रवाह की दिशा या उपयोग को नियंत्रित करती हैं (उदा: साख की सीमांत आवश्यकता, नैतिक दबाव, साख का राशनिंग)।
4. निबंधात्मक के 5 प्रश्न उत्तर (Essay Type Questions)
राष्ट्रीय आय की गणना की आय वितरण विधि (Income Distribution Method) को परिभाषित कीजिए और इसके तीनों घटकों (कर्मचारियों का पारिश्रमिक, प्रचालन अधिशेष, मिश्रित आय) को विस्तार से समझाइए।
परिभाषा: आय विधि राष्ट्रीय आय को उत्पादन के कारकों को उनके योगदान के बदले दिए गए सभी साधन भुगतानों के योग के रूप में मापती है। इस विधि का अंतिम परिणाम साधन लागत पर निवल घरेलू उत्पाद (\text{NDP}_{\text{FC}}) होता है।
मुख्य घटक:
1. कर्मचारियों का पारिश्रमिक (\text{COE}): यह कर्मचारियों को नकद/वस्तु के रूप में वेतन, मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में नियोक्ता के योगदान का योग है।
2. प्रचालन अधिशेष (\text{OS}): यह संपत्ति (भूमि और पूंजी) और उद्यमशीलता से प्राप्त आय का योग है। इसके मुख्य घटक लगान (किराया), ब्याज और लाभ हैं। लाभ को आगे लाभांश, निगम कर और निजी निगमित क्षेत्र की बचतों में विभाजित किया जाता है।
3. स्वनियोजितों की मिश्रित आय (\text{MI}): यह स्वनियोजित व्यक्तियों (जैसे डॉक्टर, किसान, छोटे व्यापारी) की आय होती है, जिसमें उनके अपने श्रम, पूंजी और उद्यम का पारिश्रमिक अलग-अलग करना कठिन होता है। \text{NDP}_{\text{FC}} ज्ञात करने के लिए इन तीनों घटकों को जोड़ा जाता है।
समग्र मांग (AD) और समग्र पूर्ति (AS) के संदर्भ में आय और रोजगार के संतुलन स्तर को परिभाषित कीजिए। न्यून मांग (Deficient Demand) और आधिक्य मांग (Excess Demand) को दूर करने के लिए मौद्रिक नीति के उपकरणों की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
संतुलन स्तर: आय और रोजगार का संतुलन स्तर उस बिंदु पर निर्धारित होता है जहाँ समग्र मांग समग्र पूर्ति के बराबर होती है (\text{AD} = \text{AS})।
न्यून मांग दूर करने के लिए मौद्रिक उपाय: (AD बढ़ाने के लिए)
बैंक दर में कमी: ऋण सस्ता होता है, जिससे \text{AD} बढ़ती है।
खुले बाजार में प्रतिभूतियों की खरीद: केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियाँ खरीदता है, जिससे वाणिज्यिक बैंकों की नकदी बढ़ती है और वे अधिक ऋण दे पाते हैं।
वैधानिक आरक्षित अनुपात (\text{LRR}) में कमी: वाणिज्यिक बैंकों की ऋण देने की क्षमता बढ़ती है।
आधिक्य मांग दूर करने के लिए मौद्रिक उपाय: (AD घटाने के लिए)
बैंक दर में वृद्धि: ऋण महंगा होता है, जिससे \text{AD} घटती है।
खुले बाजार में प्रतिभूतियों की बिक्री: केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियाँ बेचता है, जिससे वाणिज्यिक बैंकों की नकदी घटती है और वे कम ऋण दे पाते हैं।
वैधानिक आरक्षित अनुपात (\text{LRR}) में वृद्धि: वाणिज्यिक बैंकों की ऋण देने की क्षमता घटती है।
वाणिज्यिक बैंकों को परिभाषित कीजिए और उनके द्वारा साख सृजन (Credit Creation) की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन कीजिए।
वाणिज्यिक बैंक: वाणिज्यिक बैंक वे वित्तीय संस्थान हैं जो लाभ कमाने के उद्देश्य से जमाएँ स्वीकार करते हैं और ऋण प्रदान करते हैं।
साख सृजन प्रक्रिया: वाणिज्यिक बैंकों की ऋण सृजन की प्रक्रिया प्राथमिक जमाओं और वैधानिक आरक्षित अनुपात (\text{LRR}) पर निर्भर करती है।
चरण 1: प्राथमिक जमा: जब ग्राहक \text{₹}1000 जमा करता है, तो यह बैंक की प्राथमिक जमा होती है।
चरण 2: आरक्षित निधि: माना \text{LRR} 10\% है। बैंक \text{₹}100 आरक्षित रखता है और शेष \text{₹}900 ऋण के रूप में दे देता है।
चरण 3: व्युत्पन्न जमा: यह \text{₹}900 किसी अन्य बैंक में जमा होता है (व्युत्पन्न जमा)। यह बैंक फिर \text{₹}90 आरक्षित रखता है और \text{₹}810 ऋण देता है।
चरण 4: प्रक्रिया का निरंतरता: यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि कुल व्युत्पन्न जमाएँ प्रारंभिक जमा की कई गुना न हो जाएं।
कुल साख सृजन: कुल जमा \text{₹}1000 \times (1/\text{LRR}) = \text{₹}1000 \times (1/0.1) = \text{₹}10000 तक हो सकती है। इस प्रकार, बैंक प्रारंभिक जमा के आधार पर अर्थव्यवस्था में मुद्रा की आपूर्ति को कई गुना बढ़ा देते हैं।
उपभोग फलन और बचत फलन को परिभाषित कीजिए। \text{APC} और \text{APS} के संबंध में सम स्तर बिंदु (Break-Even Point) की स्थिति का विश्लेषण कीजिए।
उपभोग फलन: कुल उपभोग (\text{C}) और कुल आय (\text{Y}) के बीच संबंध को दर्शाता है (\text{C} = \text{f}(\text{Y}))।
बचत फलन: कुल बचत (\text{S}) और कुल आय (\text{Y}) के बीच संबंध को दर्शाता है (\text{S} = \text{f}(\text{Y}))।
सम स्तर बिंदु: यह वह बिंदु है जहाँ \mathbf{Y = C} होता है।
इस बिंदु पर: \text{APC} = \text{C}/\text{Y} = 1 और बचत (\text{S}) शून्य होती है, इसलिए \text{APS} = 0।
इससे पहले (\text{Y} < \text{C}): \text{APC} > 1 (उपभोग आय से अधिक) और \text{APS} ऋणात्मक (निःबचत) होता है।
इसके बाद (\text{Y} > \text{C}): \text{APC} < 1 (उपभोग आय से कम) और \text{APS} धनात्मक होता है, तथा आय बढ़ने पर \text{APC} घटता जाता है और \text{APS} बढ़ता जाता है।
आय के चक्रीय प्रवाह (Circular Flow of Income) के संदर्भ में तीनों पहचानों (Identities): उत्पादन का मूल्य = आय का सृजन = व्यय को समझाइए। राष्ट्रीय आय मापन की तीनों विधियाँ एक ही परिणाम क्यों देती हैं?
उत्पादन का मूल्य: चक्रीय प्रवाह का पहला चरण वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और उनके मूल्य में वृद्धि से संबंधित है (उत्पादन विधि)।
आय का सृजन: उत्पादन का मूल्य उत्पादन के कारकों (श्रम, भूमि, पूंजी, उद्यमी) को आय (मजदूरी, लगान, ब्याज, लाभ) के रूप में वितरित किया जाता है (आय विधि)।
व्यय: यह आय परिवारों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं पर उपभोग व्यय या निवेश व्यय के रूप में वापस फर्मों को कर दी जाती है (व्यय विधि)।
समतुल्यता: तीनों विधियाँ conceptually एक ही आर्थिक गतिविधि को माप रही हैं: उत्पादन का मूल्य हमेशा वितरित आय के बराबर होता है, और यह वितरित आय हमेशा वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए व्यय के बराबर होती है। \mathbf{\text{Value of Output} = \text{Factor Income} = \text{Expenditure}}। इसलिए, यदि दोहरी गणना से बचा जाए और उचित समायोजन किए जाएं, तो तीनों विधियों का परिणाम राष्ट्रीय आय के लिए सैद्धांतिक रूप से समान होता है।
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