1.2015 की वन रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल भू-भाग पर कितने प्रतिशत वन हैं?
21.34 प्रतिशत।
2.पर्यावरण नीति के अनुसार किसी भूभाग पर कितने प्रतिशत वन होना आवश्यक है?
33 प्रतिशत।
3.भारत में सर्वाधिक 'मैंग्रोव वनस्पति' किस क्षेत्र में पाई जाती है?
सुंदरवन क्षेत्र में।
4.उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन कितने सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में मिलते हैं?
200 सेमी से अधिक।
5.उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वनों के वृक्षों की ऊँचाई सामान्यतः कितनी होती है?
40 से 60 मीटर।
6.मानसूनी वनों को और किस नाम से जाना जाता है?
पतझड़ी वन।
7.भारत में सर्वाधिक प्रतिशत में कौन से वन पाए जाते हैं?
मानसूनी वन (पतझड़ी वन)।
8.सागवान, साल, चंदन, और शीशम किस प्रकार के वनों के महत्वपूर्ण वृक्ष हैं?
मानसूनी वन।
9.उष्ण कटिबन्धीय शुष्क पतझड़ वन भारत के कुल कितने प्रतिशत भू-भाग पर पाए जाते हैं?
41.8 प्रतिशत।
10.झाड़ियाँ, खेजड़ा, बबूल और केर किस प्रकार के वनों की विशेषता हैं?
उष्ण कटिबन्धीय कँटीले या शुष्क वन।
11.हिमालय में ऊँचे भागों में पाए जाने वाले वनों को क्या कहते हैं?
अल्पाईन वन।
12.जड़ी-बूटियाँ जैसे हरड़, बहेड़ा, अर्जुन और पलास किस प्रकार के वनों से प्राप्त होती हैं?
भारत की वनस्पति (सामान्यतः पतझड़ वनों से)।
13.भारत में वन्य जीवों की सुरक्षा हेतु कौन सा अधिनियम बनाया गया है?
वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (1972)।
14.भारत को वन्य जीवों की विविधता के कारण कितने "जीव भौगोलिक प्रदेशों" में विभाजित किया गया है?
छह (6)।
15.काजीरंगा राष्ट्रीय अभयारण्य किस जानवर के लिए विश्व प्रसिद्ध है?
गैंडा।
16.गुजरात के सौराष्ट्र में कौन-सा अभयारण्य शेरों (Lion) के लिए प्रसिद्ध है?
गिर अभयारण्य।
17.भारत में किस वर्ष राष्ट्रीय वन नीति की घोषणा की गई थी?
1952।
18.भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) के अनुसार भारत की मिट्टियों को कितने वर्गों में वर्गीकृत किया गया है?
आठ (8)।
19.नदियों के प्रवाह में फैली मिट्टियों को क्या कहते हैं?
जलोढ़ मिट्टी (कॉप मिट्टी)।
20.पुरातन जलोढ़ मिट्टी किस नाम से जानी जाती है?
बाँगड़।
21.नवीन जलोढ़ मिट्टियाँ किस नाम से जानी जाती हैं?
खादर।
22.किस मिट्टी में जल धारण शक्ति बांगड़ की मिट्टियों की अपेक्षा अधिक होती है?
नवीन जलोढ़ मिट्टियों (खादर) में।
23.दक्कन पठार के किस क्षेत्र में काली मिट्टी पाई जाती है?
तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा।
24.काली मिट्टी में कौन से तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं?
चूना, पोटाश, मैग्निशियम, एल्यूमिनियम एवं लोहा।
25.लेटराइट' मिट्टी किस मिट्टी का ही एक स्वरूप है?
लाल मिट्टी का।
26. मरुस्थलीय मिट्टी किस तत्व की कमी के कारण अनुपजाऊ होती है?
नत्रजन की कमी से।
27. अत्यधिक सिंचाई तथा वर्षाजल के एक जगह भरे रहने से कौन-सी मिट्टियाँ बनती हैं?
लवणीय या क्षारीय मिट्टियाँ।
28. किस प्रक्रिया द्वारा मिट्टी की उर्वरा शक्ति दिनों-दिन कम होती जा रही है?
मिट्टी का अपरदन (Erosion)।
29.राजस्थान का राज्य वृक्ष क्या है, और इसे पश्चिमी राजस्थान में क्या कहते हैं?
खेजड़ी, और इसे जाँटी भी कहते हैं।
30.राजस्थान में सर्वाधिक रूप से कौन-सा वृक्ष पाया जाता है?
धोंकड़ा।
II. अति लघुतात्मक प्रश्न (Very Short Answer Questions) - 20 प्रश्न
🌍 वन एवं वन्य जीव
1 पर्यावरण के प्रति भारतीय संस्कृति का दृष्टिकोण क्या है?
भारतीय संस्कृति में प्रकृति (जल, वायु, मिट्टी, वन, पशु) को माँ मानकर उसका संरक्षण किया जाता है, जैसे हजारों वर्षों से बड़, पीपल और तुलसी को पूजना।
2 वनों के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
पर्यावरण रक्षा, भूमंडलीय तापवृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) को कम करने, जहरीली गैसों के उत्सर्जन में कटौती करने, और समुद्री जीवों तथा ग्लेशियरों को बचाने के लिए वनों का संरक्षण आवश्यक है।
3.उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन भारत में किन-किन क्षेत्रों में मिलते हैं?
पश्चिमी घाट के तटवर्ती, मालाबार तट, पूर्वी हिमालय, नीलगिरी, अंडमान-निकोबार, ओडिसा तट, असम, अरुणाचल, मेघालय, और मणिपुर के क्षेत्रों में।
4.उष्ण कटिबन्धीय कँटीले वनों के वृक्षों की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
ये वृक्ष 6 से 9 मीटर ऊँचे होते हैं। इनकी जड़ें लंबी होती हैं जो गहराई से जल सोखती हैं, और पत्तियाँ नुकीली होती हैं।
5.वन्य जीवों के प्राकृतिक वास कम होने का मुख्य कारण क्या है?
जनसंख्या वृद्धि के कारण वनों का घनत्व घटना और वनों की कटाई।
6.राष्ट्रीय बाघ संरक्षण हेतु देश में कितने अभयारण्य हैं?
देश में 39 राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अभयारण्य हैं।
7.राजस्थान के किन्हीं तीन प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों के नाम लिखिए।
सरिस्का (अलवर), रणथम्भौर (सवाई माधोपुर), और केवलादेव (भरतपुर)।
8.वन्य जीवों के संरक्षण के लिए भारत सरकार की 1992 की नीति का उद्देश्य क्या था?
पारिस्थितिकी विकास बोर्ड बनाना और विकसित वन क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों तथा पश्चिमी घाट की परिस्थितियों को संरक्षित करना।
⛰️ मृदा
9.मृदा (मिट्टी) से क्या आशय है?
मृदा, जैविक और ह्यूमस युक्त ढीले पदार्थ होते हैं जो उपजाऊपन लिए होते हैं और फसलें पैदा करने में सहायक होते हैं।
10.पहाड़ी देशों की मिट्टियों की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
ये पर्वतीय ढालों पर होने के कारण अपरदित हो जाती हैं। इनमें जीवाश्म अधिक होते हैं, लेकिन फास्फोरस, पोटाश और चूने की कमी होती है।
11.जलोढ़ मिट्टियाँ भारत के किन मैदानी भागों में फैली हुई हैं?
उत्तरी मैदान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल तथा दक्षिणी भारत में गोदावरी, कृष्णा, कावेरी डेल्टा क्षेत्रों में।
12.काली मिट्टी में कौन-सी मुख्य फसलें पैदा होती हैं?
कपास और गेहूँ मुख्यतया पैदा होते हैं।
13.लाल-पीली मिट्टी का रंग लाल क्यों होता है?
ये मिट्टियाँ प्राचीन स्वेदार और परिवर्तित चट्टानों के टूट-फूट तथा लोहे के अंश (ऑक्साइड) के कारण लाल होती हैं।
14.लेटराइट मिट्टी की दो प्रमुख अवस्थाएँ क्या हैं?
सूखे मौसम में यह ईंट की तरह कठोर हो जाती है, और वर्षा ऋतु में चिपचिपी हो जाती है।
15.राजस्थान में मरुस्थलीय मिट्टी कहाँ मिलती है और इसकी मुख्य समस्या क्या है?
यह पश्चिमी राजस्थान, उत्तरी गुजरात, दक्षिणी हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मिलती है। इसकी मुख्य समस्या वायु अपरदन है।
16.लवणीय या क्षारीय मिट्टियों को किन्हीं दो अन्य नामों से लिखिए।
ऊसर, कल्लर, रेह, या चोपन।
17.दलदली मिट्टियाँ भारत में कहाँ-कहाँ पाई जाती हैं?
ओडिशा तट, सुंदरवन (पश्चिम बंगाल), उत्तरी बिहार, और केरल तट पर।
18.मृदा अपरदन रोकने के लिए दो उपाय बताएँ।
वृक्षारोपण करके, फसल चक्र अपनाकर, या मेड़बंदी लगाकर।
19.राजस्थान में सर्वाधिक वृक्ष 'धोंकड़ा' किस प्रकार के वनों का एक हिस्सा है?
ये मूल में पतझड़ वन हैं।
20.राजस्थान में काली मिट्टी कहाँ पाई जाती है?
राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी पठार क्षेत्र (हाड़ौती पठार - कोटा, बूँदी, झालावाड़, बारां) में।
III. लघुतात्मक प्रश्न (Short Answer Questions) - 10 प्रश्न
🌿 वनस्पति एवं लाभ
1.भारत में वनों के चार प्रमुख प्रकारों और उनके वितरण क्षेत्रों को संक्षेप में समझाइए।
उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन: (16.71%) पश्चिमी घाट, अंडमान, असम। सघन, 200 सेमी से अधिक वर्षा।
मानसूनी/पतझड़ी वन: (19.73%) उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र। 100-200 सेमी वर्षा, व्यापारिक लकड़ी के लिए महत्वपूर्ण।
उष्ण कटिबन्धीय शुष्क पतझड़ वन: (41.8%) पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात। 50-100 सेमी वर्षा।
पर्वतीय वन: हिमालय, नीलगिरी। ऊँचाई के अनुसार वनस्पति में बदलाव (ओक, देवदार, चीड)।
2.वनों से होने वाले चार महत्वपूर्ण आर्थिक लाभों का उल्लेख करें।
औद्योगिक: इमारती लकड़ी (सागवान, शीशम), लुग्दी से कागज, गोंद, लाख, मोम।
जड़ी-बूटियाँ: हरड़, बहेड़ा, आँवला, अर्जुन, पलास जैसी औषधीय जड़ी-बूटियाँ।
खाद्य पदार्थ: फल (आम, जामुन, सीताफल, अखरोट, महुआ, चिरौंजी)।
अन्य: बाँस, बेंत, रंग और औषधीय जड़ी-बूटियाँ।
3.भारत में वन्य जीवों के संरक्षण हेतु किए गए प्रमुख उपायों का वर्णन करें।
अधिनियम: वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (1972) लागू किया गया।
संरक्षित क्षेत्र: देश में राष्ट्रीय उद्यान (92), पशु विहार (500+), और 39 बाघ संरक्षण अभयारण्य स्थापित किए गए हैं।
जागरूकता: वन्य जीवों के बारे में जानकारी बढ़ाने हेतु सेमिनार, सम्मेलन और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाता है।
बोर्ड: पारिस्थितिकी विकास बोर्ड का गठन किया गया है।
⛰️ मृदा
4.जलोढ़ मिट्टी के प्रमुख प्रकारों (बाँगड़ और खादर) के बीच अंतर स्पष्ट करें।
पुरातन जलोढ़ (बाँगड़): ये ऊँची जगहों पर पाई जाने वाली पुरानी जलोढ़ मिट्टियाँ हैं। इनमें कंकड़ वाली कठोर मिट्टी की परत होती है और जलधारण क्षमता कम होती है। इन्हें पंजाब में क्षारीय मिट्टी भी कहते हैं।
नवीन जलोढ़ (खादर): ये निचली जगहों पर पाई जाने वाली नई जलोढ़ मिट्टियाँ हैं। ये अधिक उपजाऊ, महीन कणों से बनी होती हैं, और इनकी जलधारण शक्ति बांगड़ की अपेक्षा अधिक होती है। इनमें बार-बार नया जमाव होता रहता है।
5.काली मिट्टी की प्रमुख विशेषताएँ और उसमें पैदा होने वाली फसलों का उल्लेख करें।
विशेषताएँ: ये परिपक्व और गहरे काले रंग की होती हैं। कणों की बनावट घनी और महीन होती है, तथा इसमें चूना, पोटाश, मैग्निशियम, एल्यूमिनियम और लोहा पर्याप्त मात्रा में होता है।
फसलें: कपास, गेहूँ, ज्वार मुख्यतया पैदा होते हैं।
6.लाल-पीली मिट्टी का निर्माण कैसे होता है और ये कहाँ पाई जाती हैं?
निर्माण: इनका निर्माण प्राचीन स्वेदार और परिवर्तित चट्टानों के टूट-फूट से होता है। लोहे के ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण इनका रंग लाल होता है।
वितरण: ये तमिलनाडु, कर्नाटक, छोटानागपुर पठार, संथाल परगना, मेघालय तथा राजस्थान के अरावली एवं दक्षिणी-पूर्वी भागों में पाई जाती हैं।
7.मरुस्थलीय मिट्टी की विशेषताओं और उसमें पैदा होने वाली फसलों के बारे में संक्षेप में लिखें।
विशेषताएँ: ये मोटे रेत के कणों वाली होती हैं। इनमें नमी धारण करने की क्षमता बहुत कम होती है, और नत्रजन की कमी होती है।
फसलें: मोटा अनाज, बाजरा, ज्वार मुख्यतया पैदा होते हैं। कहीं-कहीं गेहूँ, कपास, दालें, सरसों और रसदार फल भी पैदा किए जाते हैं।
🌳 राजस्थान के वन
8.राजस्थान में 'खेजड़ी' वृक्ष का महत्व बताइए।
खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है। इसे पश्चिमी राजस्थान में जाँटी भी कहते हैं। मरुस्थलीय भाग में इसे कल्पवृक्ष कहा जाता है, क्योंकि यह शुष्क वनों में लंबी जड़ों द्वारा जल ग्रहण कर सकता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
9.राजस्थान में धोंकड़ा वन कहाँ मिलते हैं और इनका क्या महत्व है?
धोंकड़ा वन (पतझड़ वन) उदयपुर, बाँसवाड़ा, राजसमंद, प्रतापगढ़, सिरोही आदि जिलों में मिलते हैं। ये राज्य में सर्वाधिक रूप से पाए जाते हैं और सरकारी उपयोग हेतु उपयोगी लकड़ी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
10.राजस्थान में मृदा अपरदन को नियंत्रित करने के लिए चार उपाय लिखिए।
वृक्षारोपण करना।
फसल चक्र को अपनाना।
चरागाहों को विकसित करना।
मेड़बंदी लगाकर जल के बहाव को रोकना।
IV. निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions) - 5 प्रश्न
1."भारत में वनों के प्रकार" पर एक विस्तृत निबंध लिखें, जिसमें उनके वितरण, वर्षा की मात्रा और मुख्य वृक्षों का उल्लेख हो।
(परिचय): वन प्रकृति का आधार हैं। भारत में 21.34% वन हैं, जबकि आवश्यक 33% है।
(उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन): 16.71% भू-भाग पर। 200 सेमी से अधिक वर्षा। 40-60 मीटर ऊँचे। पश्चिमी घाट, अंडमान, असम। (जैसे- जंगली आम, ताड़, बाँस)।
(मानसूनी/पतझड़ी वन): 19.73% भू-भाग पर। 100-200 सेमी वर्षा। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र। (जैसे- सागवान, साल, चंदन, शीशम) - व्यापारिक महत्व।
(शुष्क पतझड़/कँटीले वन): 41.8% भू-भाग पर। 50-100 सेमी वर्षा। राजस्थान, गुजरात, हरियाणा। (जैसे- खेजड़ा, बबूल, केर) - छोटी झाड़ियाँ, लंबी जड़ें।
(पर्वतीय वन): हिमालय और नीलगिरी में। ऊँचाई के अनुसार ओक, देवदार, चीड, बर्च मिलते हैं।
(निष्कर्ष): देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संतुलन के लिए इन वनों का संरक्षण आवश्यक है।
2.भारत में वन्य जीवों की विविधता एवं उनके संरक्षण की नीति का विस्तार से वर्णन करें।
(विविधता): भारत में 81,251 प्रकार की जीव-पशु प्रजातियाँ हैं (विश्व की 6.7%)। इसे 6 जीव भौगोलिक प्रदेशों में बाँटा गया है (हिमालय, प्रायद्वीपीय पठार आदि)।
(संकट): घटते वन घनत्व के कारण वन्य जीवों के प्राकृतिक वास कम हो रहे हैं।
(संरक्षण नीति):
वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (1972) लागू।
राष्ट्रीय वन नीति (1952) और पारिस्थितिकी विकास बोर्ड (1992) का गठन।
संरक्षित क्षेत्र: 92 राष्ट्रीय उद्यान, 513 वन्य अभयारण्य और 39 बाघ अभयारण्य (जैसे कॉर्बेट, कान्हा, काजीरंगा)।
जागरूकता: सेमिनार और प्रदर्शनियों का आयोजन।
फोकस: बाँस, औषधीय पौधा लगाने और बायोफ्यूल पर अधिक ध्यान दिया गया है।
3.भारत में पाई जाने वाली जलोढ़ और काली मिट्टियों के निर्माण, विशेषताओं, और वितरण क्षेत्रों की तुलनात्मक व्याख्या करें।
(जलोढ़ मिट्टी - कॉप):
निर्माण: नदियों के प्रवाह द्वारा लाई गई और जमा की गई।
वितरण: उत्तरी मैदान (पंजाब से बंगाल), गोदावरी-कृष्णा-कावेरी डेल्टा। (30-35% क्षेत्र)।
विशेषता: अत्यधिक उपजाऊ, पोटाश, चूना, फॉस्फोरस और जीवांश अधिक।
प्रकार: बांगड़ (पुरातन, कम उपजाऊ), खादर (नवीन, अधिक उपजाऊ)।
फसलें: धान, गेहूँ, जूट, गन्ना।
(काली मिट्टी):
निर्माण: बेसाल्ट जैसी आग्नेय चट्टानों के अपक्षय से।
वितरण: दक्कन पठार (महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश)।
विशेषता: गहरे काले रंग की, जल धारण क्षमता बहुत अधिक (स्व-जुताई), चूना, लोहा, मैग्निशियम पर्याप्त।
फसलें: कपास, गेहूँ, ज्वार।
(निष्कर्ष): दोनों कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं, पर जलोढ़ नदियों से और काली पठारी चट्टानों से बनती है।
4.राजस्थान की प्रमुख मृदाओं का वर्गीकरण करते हुए प्रत्येक की दो-दो विशेषताएँ और संबंधित जिलों का उल्लेख करें।
(रेतीली/मरुस्थलीय मृदा):
विशेषता: मोटे रेत के कण, नमी धारण करने की क्षमता कम, नत्रजन की कमी।
जिले: जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर।
(भूरी और रेतीली मृदा):
विशेषता: महीन रेत के कण, नत्रजन और फॉस्फेट की मात्रा 3-4% (उपजाऊ)।
जिले: गंगानगर, हनुमानगढ़, झुन्झुनूँ, सीकर।
(लाल-पीली मिट्टी):
विशेषता: नाइट्रोजन, फॉस्फेट एवं कैल्शियम तत्वों की कमी, अम्लीयता अधिक।
जिले: अजमेर, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर (अरावली के ढाल)।
(काली मिट्टी):
विशेषता: पोटाश, चूना भरपूर, मोटी परतें, कृषि हेतु उपजाऊ।
जिले: कोटा, बूँदी, झालावाड़, बारां (हाड़ौती पठार)।
(कछारी मिट्टी):
विशेषता: अत्यधिक उपजाऊ, नत्रजन भरपूर, जलोढ़ मृदा।
जिले: जयपुर, दौसा, भरतपुर, उत्तरी कोटा।
5.भारत में मृदा संरक्षण की आवश्यकता और इसके मुख्य तरीकों का विस्तार से वर्णन करें।
(आवश्यकता): मृदा की 2-3 सेमी परत बनने में 200 वर्ष लग जाते हैं, लेकिन अपरदन से उर्वरा शक्ति कम हो रही है और 60% भूमि समस्याग्रस्त है। जल (187.8 मिलियन हेक्टेयर) और वायु अपरदन (राजस्थान, पंजाब) एक गंभीर समस्या है।
(संरक्षण के तरीके):
वृक्षारोपण: वृक्षों की जड़ें मिट्टी को बाँधकर रखती हैं और वायु अपरदन रोकती हैं।
फसल चक्र: अलग-अलग फसलें उगाने से मिट्टी के पोषक तत्व बने रहते हैं।
चरागाह विकास: विकसित चरागाहों से अत्यधिक चराई रुकती है जो मिट्टी को ढीला करती है।
मेड़बंदी: खेतों के चारों ओर मेड़ें बनाकर वर्षा जल के बहाव को नियंत्रित करना।
उपयुक्त जुताई: विपरीत दिशा में जुताई करना।
रेत के टीलों पर वनस्पति: मरुस्थलीय क्षेत्रों में वनस्पति लगाकर अपरदन को रोकना।
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