कक्षा दसवीं सामाजिक पाठ19 भारत की जलवायु पाठ के प्रश्न और उत्तर


​📝 30 एक-पंक्ति वाले (वन-लाइनर) प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न: भारत वर्ष की जलवायु कैसी है? उत्तर: उष्ण मानसूनी जलवायु।
  2. प्रश्न: भारत में वर्ष भर कैसा तापमान बना रहता है? उत्तर: उच्च तापमान।
  3. प्रश्न: उत्तरी और पश्चिमी भारत के मरुस्थलीय भागों में मई-जून में तापमान कहाँ तक पहुँच जाता है? उत्तर: 45^\circ से 48^\circ से.ग्रे. तक।
  4. प्रश्न: उत्तरी भारत में शीतकाल में तापमान कहाँ तक गिर जाता है? उत्तर: -2^\circ से 10^\circ से.ग्रे. तक।
  5. प्रश्न: भारत में सम्पूर्ण वर्षा का कितना प्रतिशत मानसूनी हवाओं द्वारा प्राप्त होता है? उत्तर: 80 प्रतिशत।
  6. प्रश्न: वर्षा ऋतु की अवधि कब से कब तक होती है? उत्तर: 15 जून से 15 सितम्बर तक।
  7. प्रश्न: सबसे कम वर्षा (10 सेमी से भी कम) राजस्थान में कहाँ होती है? उत्तर: फलौदी, जोधपुर।
  8. प्रश्न: भारत की जलवायु को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला कारक क्या है? उत्तर: समुद्र तटवर्ती भूभाग।
  9. प्रश्न: हिमालय पर्वतमाला का विस्तार पश्चिम से पूर्व में कितने किलोमीटर तक है? उत्तर: 2400 किमी।
  10. प्रश्न: जेट स्ट्रीम पवनें धरातल से कितनी ऊँचाई पर चलती हैं? उत्तर: 4 किलोमीटर।
  11. प्रश्न: कर्क रेखा भारत के कितने भागों से होकर निकलती है? उत्तर: बीचों बीच।
  12. प्रश्न: भारत का लगभग कितना प्रतिशत भूभाग उष्ण कटिबंध में है? उत्तर: 60-65 प्रतिशत।
  13. प्रश्न: भारत के प्रायद्वीपीय भाग के तीन तरफ कौन-कौन से जल निकाय हैं? उत्तर: अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिन्द महासागर।
  14. प्रश्न: भारत में मानसूनी पवनों को आगे बढ़ने में कौन सहायक होता है? उत्तर: जेट स्ट्रीम पवनें।
  15. प्रश्न: उत्तरी साइबेरियन शीत हवाओं को भारत में आने से कौन रोकता है? उत्तर: हिमालय पर्वत।
  16. प्रश्न: भारतीय मौसम विभाग ने भारतीय ऋतुओं को कितने भागों में विभक्त किया है? उत्तर: चार भागों में।
  17. प्रश्न: शीत ऋतु किस माह से प्रारम्भ होती है और कब तक चलती है? उत्तर: नवम्बर से प्रारम्भ होकर फरवरी तक।
  18. प्रश्न: शीत ऋतु में तापी नदी से महानदी तक कितने डिग्री से.ग्रे. की समताप रेखा विकसित होती है? उत्तर: 18^\circ से.ग्रे.।
  19. प्रश्न: उत्तरी-पश्चिमी भारत में शीतकाल में होने वाली वर्षा को क्या कहते हैं? उत्तर: मावट।
  20. प्रश्न: मावट किन हवाओं के कारण होती है? उत्तर: पश्चिमी विक्षोभ (पछुआ पवनें)।
  21. प्रश्न: तमिलनाडु तट पर शीतकाल में वर्षा क्यों होती है? उत्तर: उत्तर-पूर्व से आने वाली हवाएँ बंगाल की खाड़ी में तूफानों में परिवर्तित हो जाती हैं।
  22. प्रश्न: किस तिथि को सूर्य भूमध्य रेखा पर चमकता है? उत्तर: 21 मार्च को।
  23. प्रश्न: उत्तरी भारत में ग्रीष्मकाल में चलने वाली गर्म एवं धूलभरी हवाओं को क्या कहते हैं? उत्तर: लू।
  24. प्रश्न: किस स्थान पर मानसून सबसे पहले (1 जून को) पहुँचता है? उत्तर: केरल और चैन्नई।
  25. प्रश्न: किस स्थान पर सर्वाधिक वर्षा (1100 सेमी से अधिक) होती है? उत्तर: मोसिनराम (मेघालय)।
  26. प्रश्न: भारत की औसत वार्षिक वर्षा कितनी है? उत्तर: 100 से 120 सेमी।
  27. प्रश्न: राजस्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाला प्रमुख पर्वतीय कारक कौन-सा है? उत्तर: अरावली का दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर स्थित होना।
  28. प्रश्न: राजस्थान का कितना प्रतिशत क्षेत्र मरुस्थलीय है? उत्तर: 61.11 प्रतिशत।
  29. प्रश्न: राजस्थान में सबसे कम तापमान (माइनस 2^\circ तक) किन स्थानों पर जाता है? उत्तर: माउन्ट आबू, फलौदी, चूरु।
  30. प्रश्न: राजस्थान के किन जिलों में अरब सागरीय मानसून से सर्वाधिक वर्षा होती है? उत्तर: झालावाड़ एवं बांसवाड़ा।

​❓ 20 अति-लघुत्तरात्मक प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न: भारत की जलवायु उष्ण मानसूनी क्यों है? उत्तर: भारत वर्षभर उच्च तापमान वाला देश है और इसकी अधिकांश वर्षा मानसूनी हवाओं पर निर्भर करती है, इसलिए इसकी जलवायु उष्ण मानसूनी है।
  2. प्रश्न: उत्तरी भारत और प्रायद्वीपीय भारत के तापमान में क्या अंतर है? उत्तर: उत्तरी भारत में ग्रीष्मकाल में तापमान 40^\circ से.ग्रे. से अधिक हो जाता है, जबकि तटवर्ती भागों में तापमान वर्षभर लगभग समान बना रहता है।
  3. प्रश्न: बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की मानसूनी शाखाओं में क्या मुख्य अंतर है? उत्तर: बंगाल की खाड़ी की मानसूनी शाखा उत्तरी-पूर्वी भारत और पूर्वी मैदानों में वर्षा करती है, जबकि अरब सागर की शाखा पश्चिमी घाट और मध्य प्रदेश में वर्षा करती है।
  4. प्रश्न: भारत की जलवायु पर जेट स्ट्रीम पवनों का क्या प्रभाव है? उत्तर: जेट स्ट्रीम पवनें उष्ण मानसूनी हवाओं को गति देती हैं, लेकिन मई-जून में हिमालय इनकी गति कम कर देता है, जिससे भारत में वर्षा प्रारम्भ हो जाती है।
  5. प्रश्न: भारत की अक्षांशीय स्थिति जलवायु को कैसे प्रभावित करती है? उत्तर: कर्क रेखा भारत के बीचों बीच निकलती है, जिसके कारण भारत का लगभग 60-65% भूभाग उष्ण कटिबंध में आता है और वर्षभर उच्चताप बना रहता है।
  6. प्रश्न: समुद्र तट से दूरी उत्तरी भारत की जलवायु को कैसे प्रभावित करती है? उत्तर: उत्तरी भारत समुद्र से दूर होने के कारण महाद्वीपीय परिस्थितियों के अधीन है, जिससे यहाँ तापान्तर (दिन और रात के तापमान में अंतर) अधिक होता है और वर्षा में विविधता पाई जाती है।
  7. प्रश्न: हिमालय पर्वत भारत की जलवायु को दो प्रमुख तरीकों से कैसे प्रभावित करता है? उत्तर: 1. यह उत्तरी साइबेरियन शीत हवाओं को रोकता है, जिससे भारत शीत लहर के प्रकोप से बचता है। 2. यह मानसूनी पवनों को रोककर भारत में वर्षा कराने में सहायक होता है।
  8. प्रश्न: उत्तरी भारत और दक्षिण भारत की ऋतुओं में क्या मुख्य अंतर है? उत्तर: उत्तरी भारत में तीन प्रमुख ऋतुएँ (शीत, ग्रीष्म, वर्षा) होती हैं, जबकि दक्षिण भारत में सदैव ही (मौसम) जलवायु लगभग समान बनी रहती है।
  9. प्रश्न: शीतकाल में उत्तरी मैदानों और कन्या कुमारी के औसत तापमान में कितना अंतर होता है? उत्तर: उत्तरी मैदानों में तापमान 18^\circ से.ग्रे. से नीचे हो जाता है, जबकि कन्या कुमारी में इस समय औसत तापमान 24^\circ से 28^\circ से.ग्रे. होता है।
  10. प्रश्न: पश्चिमी विक्षोभ किसे कहते हैं? उत्तर: शीतकाल में मध्य एशिया एवं भूमध्य सागरीय क्षेत्र से उच्च दाब के कारण पछुआ पवनें भारत के पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश में वर्षा (मावट) करती हैं, इन्हीं हवाओं को पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं।
  11. प्रश्न: तमिलनाडु तट पर वर्षा मुख्य रूप से किस ऋतु में और क्यों होती है? उत्तर: तमिलनाडु तट पर वर्षा शीत ऋतु में होती है, क्योंकि इस समय उत्तर-पूर्व से चलने वाली हवाएँ बंगाल की खाड़ी में होकर गुजरती हैं और नमी लेकर तूफानों में परिवर्तित होकर वर्षा करती हैं।
  12. प्रश्न: ग्रीष्मकाल में उत्तरी पश्चिमी भारत में न्यून वायुदाब के केन्द्र क्यों विकसित होते हैं? उत्तर: 21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में आने से तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है और मई में 40^\circ से.ग्रे. से पार हो जाता है, जिससे तीव्र गर्मी के कारण यहाँ न्यून वायुदाब के केन्द्र विकसित होते हैं।
  13. प्रश्न: लू क्या है और यह कब चलती है? उत्तर: लू उत्तर भारत में मई प्रारम्भ से जून तक चलने वाली तेज स्थानीय, धूलभरी एवं गर्म हवाएँ हैं।
  14. प्रश्न: मानसून पूर्व वर्षा (प्री-मानसून शावर) भारत में कब प्रारम्भ हो जाती है? उत्तर: मई के अंतिम सप्ताह से जून के मध्य तक।
  15. प्रश्न: वर्षा ऋतु में बंगाल की खाड़ी में कौन-से मौसमी घटनाएँ होती हैं? उत्तर: इस समय बंगाल की खाड़ी में उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात आते हैं, जिससे तटवर्ती क्षेत्रों में जन-धन की हानि होती है।
  16. प्रश्न: वर्षा की अनिश्चितता भारत के कृषि तंत्र को कैसे प्रभावित करती है? उत्तर: वर्षा कभी समय पर तो कभी 5-10 दिन देरी से प्रारम्भ होती है, जिससे कृषि तंत्र बिगड़ जाता है, किसान परेशान होते हैं और कृषि उत्पादन घट जाता है।
  17. प्रश्न: भारत में वर्षा का वितरण असमान क्यों है? उत्तर: इसका मूल कारण भारत का धरातल विविधरूपी है, जैसे तटवर्ती भागों में अधिक वर्षा, मरुस्थलीय धरातल पर बहुत कम वर्षा।
  18. प्रश्न: राजस्थान में मरुस्थलीय दशाएँ जलवायु को कैसे प्रभावित करती हैं? उत्तर: 61.11 प्रतिशत क्षेत्र मरुस्थलीय होने के कारण यहाँ वनस्पति विहीनता, उच्च तापमान, और न्यून वर्षा (15 से 30 सेमी) होती है।
  19. प्रश्न: राजस्थान में शीत लहर का प्रकोप कब और क्यों रहता है? उत्तर: शीत लहर का प्रकोप दिसम्बर से फरवरी तक रहता है, जब उत्तरी-पश्चिमी भागों से ठण्डी हवाएँ चलती हैं और पश्चिमी विक्षोभ के कारण पाला (मावट) पड़ता है।
  20. प्रश्न: राजस्थान में 'लू' चलने का मुख्य कारण क्या है? उत्तर: 21 मार्च से सूर्य के उत्तरी गोलार्द्ध में आने से तापमान बढ़ने लगता है और शुष्क एवं गर्म हवाएँ मई एवं जून में चलती हैं, जिन्हें लू कहते हैं।

2. जेट स्ट्रीम पवनें भारत में मानसून को कैसे प्रभावित करती हैं?

उत्तर: जेट स्ट्रीम पवनें धरातल से 4 किमी ऊपर चलती हैं और उष्ण मानसूनी हवाओं को गति देती हैं। जैसे ही मई-जून में इनकी गति हिमालय के कारण कम होती है, उत्तरी-पश्चिमी भारत में न्यून वायुदाब केन्द्र विकसित होता है, जिससे दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक पवनें तेज गति से उत्तर भारत की ओर बढ़कर मानसून को प्रारम्भ करती हैं। ये पवनें हिमालय के सहारे आगे बढ़ती हैं और पंजाब, हरियाणा, राजस्थान आदि को वर्षा से वंचित रखती हैं।

​3. भारत में शीत ऋतु की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर: भारत में शीत ऋतु नवम्बर से फरवरी तक चलती है। इस समय उत्तर में उच्च वायुदाब केन्द्र विकसित होते हैं। तापी से महानदी तक 18^\circ से.ग्रे. की समताप रेखा विकसित होती है। उत्तरी मैदानों में तापमान 0^\circ से.ग्रे. तक हो जाता है। इस ऋतु में मध्य एशिया से आने वाले पश्चिमी विक्षोभों के कारण उत्तरी-पश्चिमी भारत में मावट (वर्षा) होती है, जो उत्तरी हिमालय में हिमपात में सहायक होती है।

​4. मावट या पश्चिमी विक्षोभ क्या है और इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: मावट शीतकाल में मध्य एशिया एवं भूमध्य सागरीय क्षेत्र से उच्च दाब के कारण पछुआ पवनों (जिन्हें पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं) के माध्यम से होने वाली वर्षा है। ये पवनें जनवरी के मध्य तक भारत के पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश में पहुँचकर हल्की वर्षा करती हैं। ये वर्षा गेहूँ की फसल के लिए अत्यंत लाभदायक मानी जाती है, लेकिन इसके कारण उत्तरी भारत में शीत लहर का प्रकोप भी बढ़ जाता है।

​5. ग्रीष्म ऋतु में उत्तरी भारत में तापमान की स्थिति और स्थानीय हवाओं का वर्णन करें।

उत्तर: 21 मार्च के बाद सूर्य के उत्तरी गोलार्द्ध में आने से मार्च से तापमान बढ़ने लगता है और मई-जून में यह 40^\circ से.ग्रे. से अधिक हो जाता है, जिससे न्यून वायुदाब के केन्द्र विकसित होते हैं। इस दौरान उत्तरी पश्चिमी भारत में तेज स्थानीय तौर पर धूलभरी एवं गर्म हवाएँ चलती हैं, जिन्हें लू कहते हैं। राजस्थान के थार मरुस्थल में तो तापमान 49^\circ से.ग्रे. तक पहुँच जाता है।

​6. भारत में वर्षा ऋतु की अवधि और प्रमुख शाखाओं की गति की व्याख्या करें।

उत्तर: भारत में वर्षाकाल जून से सितम्बर (4 महीनों) का होता है।

  • बंगाल की खाड़ी शाखा: 1 जून को मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा तक पहुँचती है, मोसिनराम में सर्वाधिक वर्षा करती है, और 10-11 जून तक कोलकता, बिहार पहुँचकर 15-20 जून तक दिल्ली, पंजाब, राजस्थान तक पहुँचती है।
  • अरब सागर शाखा: 1 जून तक केरल पहुँचती है, 7 जून तक पश्चिमी घाट बम्बई में वर्षा करती है, ताप्ती वेली से प्रवेश कर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र में वर्षा करती है, और उत्तराखण्ड-हिमाचल तक पहुँचकर खूब वर्षा करती है।

​7. भारत में वर्षा के असमान वितरण को उदाहरण सहित समझाएँ।

उत्तर: भारत में औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेमी है, लेकिन वर्षा का वितरण अत्यधिक असमान है।

  • सर्वाधिक वर्षा: उत्तरी पूर्वी क्षेत्रों (मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम) में 500 सेमी से अधिक, मालाबार-कोंकण में 300 सेमी से अधिक।
  • मध्यम वर्षा: बंगाल-बिहार में 200 सेमी, आंध्रप्रदेश में 80 से 100 सेमी।
  • न्यून वर्षा: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 60 से 80 सेमी, राजस्थान में 60 सेमी से कम, पश्चिमी राजस्थान में 15 सेमी से भी कम। यह असमानता धरातल की विविधता के कारण है।

​8. राजस्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाले धरातलीय और अक्षांशीय कारकों का उल्लेख करें।

उत्तर:

  1. अरावली का विस्तार: अरावली का दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर स्थित होना अरब सागर की मानसूनी पवनों के समानांतर होता है, जिससे राज्य कम वर्षा प्राप्त करता है।
  2. मरुस्थलीय दशाएँ: राज्य का 61.11% क्षेत्र मरुस्थल होने के कारण यहाँ उच्च तापमान, वनस्पति विहीनता और न्यून वर्षा (15 से 30 सेमी) होती है।
  3. अक्षांशीय स्थिति: दक्षिण में कर्क रेखा होने के कारण सूर्य का सीधा ताप 12 महीने मिलता है, जिससे उच्च ताप बना रहता है और राज्य की जलवायु पर उष्ण कटिबंध का प्रभाव रहता है।

​9. राजस्थान में शीतकाल की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर: राजस्थान में शीतकाल नवम्बर से प्रारम्भ होता है, जिसका वास्तविक प्रभाव दिसम्बर से फरवरी में दिखता है। इस समय उत्तरी-पश्चिमी भागों से ठण्डी हवाएँ चलती हैं, जिससे राज्य में ठण्ड रहती है। पश्चिमी राजस्थान (गंगानगर, फलौदी) और माउन्ट आबू में तापमान 0^\circ से.ग्रे. से भी कम हो जाता है। जनवरी में पश्चिमी विक्षोभों के कारण वर्षा (मावट) होती है और शीत लहर का प्रकोप भी रहता है।

​10. राजस्थान में वर्षा ऋतु और वर्षा के वितरण को संक्षेप में स्पष्ट करें।

उत्तर: राजस्थान में वर्षाकाल जून से सितम्बर होता है और औसत वर्षा 55 से 60 सेमी होती है। वर्षा 15 से 20 जून के मध्य प्रारम्भ होती है।

  • अरब सागरीय मानसून अरावली के समानांतर निकल जाता है, इसलिए अधिकांश क्षेत्रों में कम वर्षा होती है।
  • सर्वाधिक वर्षा झालावाड़ और बांसवाड़ा में (100 सेमी), जो अरावली के पूर्व में हैं।
  • पश्चिमी राजस्थान में मानसून की पवनें कम नमी के कारण पहुँचती हैं, जिससे जैसलमेर तक वर्षा 10 से 15 सेमी ही होती है।

भारत की जलवायु की विशेषताओं का विस्तार से वर्णन करते हुए, उन प्रमुख कारकों का विश्लेषण कीजिए जो इसे उष्ण मानसूनी स्वरूप प्रदान करते हैं।

उत्तर:

भारत की जलवायु उष्ण मानसूनी जलवायु है, जिसकी मुख्य विशेषता वर्षभर उच्च तापमान, वर्षा का असमान वितरण और वर्ष के चार स्पष्ट ऋतु चक्र हैं।

प्रमुख विशेषताएँ:

  1. उच्च तापमान: कर्क रेखा के मध्य से गुजरने के कारण अधिकांश भूभाग उष्ण कटिबंध में आता है, जिससे वर्षभर उच्च तापमान बना रहता है।
  2. मानसूनी वर्षा: सम्पूर्ण वर्षा का लगभग 80% भाग मानसूनी हवाओं से (15 जून से 15 सितम्बर) प्राप्त होता है।
  3. तापान्तर में भिन्नता: तटवर्ती भागों में तापमान समान रहता है, जबकि उत्तरी भारत में महाद्वीपीय स्थिति के कारण तापान्तर अधिक होता है।

उष्ण मानसूनी स्वरूप प्रदान करने वाले कारक:

  • अक्षांशीय स्थिति: भारत का 8^\circ}4' से 37^\circ}6' उत्तरी अक्षांश तक विस्तार इसे उष्ण और उपोष्ण कटिबंध में रखता है।
  • समुद्रतटवर्ती भूभाग: अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिन्द महासागर से घिरा होना प्रायद्वीपीय क्षेत्र के तापमान को नियंत्रित करता है और मानसूनी हवाओं को नमी प्रदान करता है।
  • हिमालय पर्वतमाला: यह मानसूनी पवनों को रोककर वर्षा कराता है और उत्तरी ध्रुव से आने वाली अत्यंत ठंडी साइबेरियन हवाओं को भारत में प्रवेश करने से रोकता है, जिससे भारत का उष्ण स्वरूप बना रहता है।
  • जेट स्ट्रीम पवनें: ये पवनें ऊपरी वायुमंडल में मानसूनी हवाओं को गति देने में सहायक होती हैं

. भारत में वर्षा के वितरण की असमानता के कारणों की विस्तृत व्याख्या कीजिए और इस असमानता का देश पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर:

भारत में औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेमी है, लेकिन इसका वितरण अत्यधिक असमान है।

असमान वितरण के कारण:

  1. धरातलीय विविधता (Relief): यह सबसे बड़ा कारण है। हिमालय, पश्चिमी घाट जैसे ऊँचे स्थान मानसूनी पवनों को रोककर अधिक वर्षा कराते हैं (मेघालय: 500+ सेमी), जबकि वृष्टि-छाया क्षेत्र (पश्चिमी राजस्थान, आंध्र प्रदेश का कुछ भाग) बहुत कम वर्षा प्राप्त करते हैं।
  2. मानसूनी शाखाओं की दिशा: अरब सागर की शाखा पश्चिमी घाट से टकराकर मालाबार-कोंकण में अधिक वर्षा करती है, लेकिन अरावली के समानांतर निकल जाने के कारण राजस्थान शुष्क रहता है।
  3. समुद्र से दूरी: जैसे-जैसे मानसूनी पवनें समुद्र से दूर जाती हैं (बंगाल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर), उनकी नमी कम होती जाती है और वर्षा की मात्रा भी घटती जाती है।
  4. मरुस्थलीय धरातल: थार मरुस्थल (फलौदी, 10 सेमी से कम) का उच्च ताप, वनस्पति विहीनता और शुष्क पवनें वर्षा को आकर्षित नहीं कर पाती हैं।

प्रभाव:

  • कृषि: वर्षा की अनिश्चितता और असमानता से कृषि तंत्र बिगड़ता है, जिससे कृषि उत्पादन घट जाता है और किसानों को भारी नुकसान होता है।
  • जल संकट: न्यून वर्षा वाले क्षेत्रों (पश्चिमी राजस्थान) में भयंकर जल संकट और सूखे की स्थिति बनी रहती है।
  • बाढ़: अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों (उत्तरी-पूर्वी भारत, तटवर्ती क्षेत्र) में अक्सर बाढ़ और जन-धन की हानि होती है।

​4. राजस्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण करते हुए, राज्य के ऋतु चक्रों की प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित कीजिए।

उत्तर:

राजस्थान की जलवायु पर उष्ण कटिबंध और महाद्वीपीयता का गहरा प्रभाव है।

जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक:

  • अरावली का दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व विस्तार: यह अरब सागरीय मानसून के समानांतर होने के कारण वर्षा कम कराता है।
  • मरुस्थलीय दशाएँ: 61.11% भूभाग मरुस्थल होने से उच्च तापमान, अधिक तापान्तर और न्यून वर्षा (15-30 सेमी) होती है।
  • अक्षांशीय स्थिति: कर्क रेखा दक्षिण से निकलने के कारण उष्ण कटिबंध का प्रभाव रहता है।
  • समुद्र तल से दूरी: लगभग 400 किमी की दूरी के कारण महाद्वीपीय जलवायु की दशाएँ हैं, जिससे तापान्तर सर्वाधिक होता है।

राजस्थान के ऋतु चक्र की विशेषताएँ:

  • शीतकाल (नवम्बर-फरवरी): पश्चिमी राजस्थान में तापमान 0^\circ से.ग्रे. से भी कम। पश्चिमी विक्षोभ से मावट (वर्षा)।
  • ग्रीष्म ऋतु (मार्च-जून): 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर सीधा चमकने से तेज गर्मी। मई-जून में लू और धूलभरी आँधियाँ। थार मरुस्थल में 49^\circ तक तापमान। उत्तरी-पश्चिमी भागों में निम्न वायुदाब केन्द्र विकसित।
  • वर्षा ऋतु (जून-सितम्बर): औसत वर्षा 55 से 60 सेमी। अरब सागरीय मानसून के समानांतर निकल जाने से न्यून वर्षा। सर्वाधिक वर्षा झालावाड़-बांसवाड़ा (अरावली के पूर्व) में 100 सेमी तक, जबकि पश्चिमी राजस्थान में 10 से 15 सेमी ही होती है।

​5. भारत में 'लू' की उत्पत्ति और उसके भौगोलिक वितरण का वर्णन कीजिए। ग्रीष्म ऋतु में 'लू' के कारण होने वाले प्रभावों की विवेचना करें।

उत्तर:

उत्पत्ति और वितरण:

'लू' उत्तरी भारत और पश्चिमी भारत में मई-जून में चलने वाली अत्यंत गर्म, शुष्क और धूलभरी स्थानीय हवाएँ हैं। 21 मार्च के बाद सूर्य के उत्तरी गोलार्द्ध में आने से तापमान धीरे-धीरे 40^\circ से.ग्रे. से अधिक हो जाता है, जिससे उत्तरी-पश्चिमी भारत (राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश, गुजरात, पश्चिमी उत्तर प्रदेश) में तीव्र गर्मी के कारण न्यून वायुदाब के केन्द्र विकसित होते हैं। ये न्यून वायुदाब और उच्च तापमान ही लू की उत्पत्ति का कारण बनते हैं। 'लू' की गति 30 किमी/घंटे से भी अधिक होती है।

भौगोलिक वितरण:

यह मुख्य रूप से उत्तरी एवं मध्य भारत में विस्तृत है, विशेषकर:

  • ​राजस्थान (जैसलमेर, गंगानगर, फलौदी)
  • ​पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश
  • ​मध्यप्रदेश, गुजरात

प्रभाव:

  • तापमान वृद्धि: 'लू' से तापमान 45^\circ से 49^\circ से.ग्रे. तक पहुँच जाता है, जिससे असहनीय गर्मी होती है।
  • वायु अपरदन: मरुस्थलीय भागों में लू और तेज आँधियों के कारण वायु अपरदन अधिक होता है, जिससे रेत के टीले एक स्थान से दूसरे स्थान पर खिसकते हैं।
  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: 'लू' का सीधा प्रभाव मनुष्य और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे डीहाइड्रेशन और हीट-स्ट्रोक की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
  • मानसून का आगमन: लू के कारण विकसित हुए निम्न वायुदाब केन्द्र ही बाद में दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक पवनों को आकर्षित करते हैं और भारत में मानसून के आगमन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

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