I. वन-लाइनर प्रश्नोत्तर (One-Liner
1.पृथ्वी की सतह पर कितने प्रतिशत जल है?
71 प्रतिशत
2.मानव शरीर में कितने प्रतिशत जल होता है?
70 प्रतिशत
3.पृथ्वी पर शुद्ध पीने योग्य पानी कितने प्रतिशत है?
3 प्रतिशत
4.बहुउद्देशीय परियोजनाएँ किस पर बड़े-बड़े बाँध बनाकर बनाई जाती हैं?
नदियों पर
5.भारत की प्रथम बहुउद्देशीय परियोजना कौन-सी है?
दामोदर घाटी परियोजना
6.दामोदर घाटी परियोजना किन दो राज्यों में है?
झारखंड एवं पश्चिमी बंगाल
7.हीराकुण्ड परियोजना किस नदी पर स्थित है?
महानदी पर
8.भारत का सबसे लम्बा बाँध कौन-सा है और यह किस राज्य में है?
हीराकुण्ड बाँध, ओडिशा राज्य में
9.भाखड़ा नांगल परियोजना किन राज्यों की संयुक्त परियोजना है?
पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान
10.भाखड़ा बाँध किस नदी पर बना है?
सतलुज नदी पर
11.भाखड़ा बाँध से निर्मित कृत्रिम झील का क्या नाम है?
गोविन्द सागर झील
12.भारत का सबसे अधिक ऊँचाई पर बना दूसरा बाँध कौन-सा है?
भाखड़ा बाँध (टिहरी डेम के बाद)
13.कोसी नदी को किस राज्य का शोक कहा जाता था?
बिहार का
14.कोसी परियोजना के तहत कोसी पर बाँध कहाँ बनाया गया है?
नेपाल के हनुमान नगर के पास
15.नागार्जुन सागर परियोजना किस नदी पर बनी योजना है?
कृष्णा नदी पर
16.नागार्जुन सागर बाँध किन दो राज्यों से जल प्राप्त कर रहा है?
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
17.चम्बल नदी घाटी परियोजना किन दो राज्यों की महत्वपूर्ण योजना है?
राजस्थान एवं मध्य प्रदेश
18.चम्बल नदी पर कितने बाँध बने हैं?
चार
19.राजस्थान की मरुगंगा कौन-सी नहर कहलाती है?
इंदिरा गांधी नहर
20.इंदिरा गांधी नहर का उद्गम स्थल कहाँ है?
हरिके बैराज, पंजाब
21.इंदिरा गांधी नहर परियोजना में जोधपुर को पीने का जल उपलब्ध कराने वाली योजना कौन-सी है?
राजीव गांधी लिफ्ट नहर
22.बूंद-बूंद पानी की बचत तभी होगा भविष्य सुरक्षित' यह क्या है?
जल संरक्षण का नारा/उद्घोष
23.जल संरक्षण के घरेलू उपाय में नहाने के लिए किस चीज के प्रयोग का सुझाव दिया गया है?
बाल्टी
24.कृषि में जल बचाने हेतु किस सिंचाई योजना का प्रचलन बढ़ाना चाहिए?
ड्रिप सिंचाई योजना
25.राजस्थान में वर्षा जल एकत्रीकरण के प्राचीन तरीकों में सबसे प्रसिद्ध पश्चिमी राजस्थान में कौन सा है?
नाडी
26.टांके का निर्माण मुख्य रूप से किस उद्देश्य हेतु किया जाता था?
पेयजल हेतु
27.बावड़ियों का निर्माण वास्तु की दृष्टि से कैसा होता था?
1 से 7 मंजिल तक की होती थी
28.खडीन कहाँ बनाए जाते थे?
ढाल वाली भूमि के नीचे
29.मरुभूमि में टांके किस कारण लवणीय जल को छोड़कर स्वच्छ जल देते थे?
लवणीय गिट्टियों के कारण
30.जल प्रबंधन हेतु कौटिल्य के अर्थशास्त्र में किसका वर्णन है?
विशेष पूजा-अर्चना का
II. अति-लघुतात्मक प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Questions)
जल विकास का आधार क्यों है?
जल मत्स्यपालन, कृषिकार्य, विद्युत उत्पादन, उद्योग स्थापना, गृह निर्माण, यातायात जैसे विकास के सभी प्रमुख कार्यों का आधार है।
बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ क्या हैं?
ये नदियों पर बड़े-बड़े बाँध बनाकर, कृत्रिम झीलें बनाकर बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन, मत्स्यपालन आदि अनेक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाई गई योजनाएँ हैं।
दामोदर घाटी परियोजना से क्या लाभ हुए?
इससे 533 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन हुआ, 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई से कृषि उत्पादन हुआ, और नदी घाटी क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण में सफलता मिली।
हीराकुण्ड बाँध की दो मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
यह भारत का सबसे लम्बा बाँध है। यह राउरकेला स्टील प्लांट को विद्युत प्रदान करता है।
भाखड़ा नांगल बाँध परियोजना की प्रमुख नहरें कौन-सी हैं?
नांगल जल विद्युत नहर, भाखड़ा नहर, बिस्त-दो-आब नहर, सरहिन्द नहर, और नरवाना शाखा नहर।
कोसी नदी को 'बिहार का शोक' क्यों कहा जाता था?
कोसी नदी बार-बार अपना मार्ग परिवर्तित करती रहती थी, जिसके कारण भयंकर बाढ़ आती थी और जन-धन-पशु-वनस्पति की भारी हानि होती थी।
नागार्जुन सागर परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
आंध्र प्रदेश की 9 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करना, कृष्णा नदी की बाढ़ों पर रोक लगाना, और जल विद्युत उत्पादन करना।
चम्बल घाटी परियोजना के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
बाढ़ नियंत्रण, कृषि हेतु सिंचाई सुविधा का विकास, और जल विद्युत उत्पादन।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना के सिंचित क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
हनुमानगढ़, गंगानगर, चूरू, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, और जोधपुर जिले।
इंदिरा गांधी नहर के कारण मरुस्थल के प्रसार पर रोक कैसे लगी है?
नहर के आसपास वृक्षारोपण और चरागाहों का विकास होने से मरुस्थल के प्रसार में रोक लगी है।
III. लघुतात्मक प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)
राजस्थान में प्राचीन जल प्रबंधन की परम्परागत विधियाँ कौन-सी हैं?
राजस्थान में कम वर्षा के कारण लोग बूंद-बूंद जल बचाने के लिए तालाबों, नाड़ियों, जोहड़ों, कुण्डियों, बावड़ियों, टांके और खडीन का निर्माण करते थे। ये स्थानीय भौगोलिक दशाओं के अनुसार विकसित हुए थे।
खडीन से आप क्या समझते हैं? यह जल प्रबंधन में कैसे सहायक है?
खडीन ढाल वाली भूमि के नीचे एक लम्बी पाल बनाकर (सामान्यतः 100-300 मीटर लम्बी) वर्षा जल को रोकने की वैज्ञानिक पद्धति है। इससे सिंचित भूमि में खेती होती थी। रिसकर आगे जाने वाले जल को नीचे के कुईयों या कुओं में जमा किया जाता था जो पेयजल के काम आता था। यह वर्षभर पानी उपलब्ध कराता था।
IV. निबंधात्मक प्रश्नोत्तर (Essay Questions)
बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं की संकल्पना, प्रमुख उद्देश्य एवं भारत की किन्हीं दो प्रमुख योजनाओं का विस्तार से वर्णन करें।
संकल्पना: बहुउद्देशीय परियोजनाएँ वे योजनाएँ हैं जिनमें नदियों पर बड़े बाँध बनाकर एक साथ कई उद्देश्यों (बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, विद्युत, मत्स्यपालन आदि) की पूर्ति की जाती है, जो नदी घाटी क्षेत्र में चिरंजीवी (दीर्घकालिक) विकास लाती हैं।
उद्देश्य: बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई हेतु नहरें, जल विद्युत उत्पादन, मत्स्यपालन, भूमि क्षरण पर रोक, और जल यातायात का विकास।
दामोदर घाटी परियोजना: यह भारत की प्रथम बहुउद्देशीय परियोजना है, जो अमेरिका की टेनेसी घाटी परियोजना पर आधारित है। यह झारखंड और पश्चिमी बंगाल में है। इसमें दामोदर और उसकी सहायक नदियों (बाराकर, कोनार, बोकारो आदि) पर बाँध बनाए गए हैं, जिससे बाढ़ नियंत्रण, 533 मेगावाट विद्युत उत्पादन और 8 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है।
हीराकुण्ड परियोजना: यह ओडिशा में महानदी पर बना भारत का सबसे लम्बा बाँध है। यह 1957 में पूर्ण हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, 347.5 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन, और 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई करना है। यह राउरकेला स्टील प्लांट को भी विद्युत प्रदान करती है।
भाखड़ा नांगल बाँध परियोजना का संक्षिप्त परिचय देते हुए राजस्थान के लिए इसकी उपयोगिता का मूल्यांकन करें।
परिचय: यह पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की संयुक्त परियोजना है, जो सतलुज नदी पर स्थित है। इसमें रोपड़ जिले में भाखड़ा बाँध (भारत का दूसरा सबसे ऊँचा बाँध, गोविन्द सागर झील का निर्माण) और उससे 13 कि.मी. दक्षिण में नांगल बाँध है। इसका निर्माण 1963 में पूर्ण हुआ। यह जल विद्युत उत्पादन (12 लाख किलोवाट) और सिंचाई के लिए देश की प्रमुख नहरें (भाखड़ा नहर, नांगल जल विद्युत नहर, सरहिन्द नहर आदि) निकालती है।
राजस्थान के लिए उपयोगिता:
सिंचाई: यह राजस्थान, पंजाब व हरियाणा की 15 हजार वर्ग कि.मी. भूमि को सिंचित करती है, जिसमें राजस्थान की 15.2 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
विद्युत: राजस्थान को इन नहरों पर स्थापित विद्युत गृहों से जल विद्युत का हिस्सा मिलता है।
अन्य: इससे क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण होता है और कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है। यह राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हुई है।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना का मरुस्थल के विकास में क्या योगदान है? विस्तृत वर्णन करें।
परिचय: यह राजस्थान के मरु प्रदेश (गंगानगर से बाड़मेर तक) में जल उपलब्ध कराने वाली 'राजस्थान की मरुगंगा' है। इसका उद्गम पंजाब में हरिके बैराज से होता है। मुख्य नहर और वितरिकाएँ लाखों वर्ग कि.मी. में फैली हैं, जिसमें 9 शाखाओं, 21 उपशाखाओं और 8 लिफ्ट नहरों का निर्माण हुआ है।
मरुस्थल के विकास में योगदान (मूल्यांकन):
मरुस्थल के प्रसार पर रोक: वृक्षारोपण और चरागाहों के विकास से मरुस्थल के आगे बढ़ने पर रोक लगी है।
सिंचाई और अन्न उत्पादन: लगभग 16 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा विकसित हुई है, जिससे 40 लाख टन धान (गेहूँ, कपास) का उत्पादन हो रहा है। हनुमानगढ़ जिला गेहूँ उत्पादन में महत्वपूर्ण हो गया है।
पशुपालन में वृद्धि: श्रेष्ठ गायों और बकरियों के पालन-पोषण में वृद्धि हुई है, जिससे बीकानेर में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन होने लगा है।
जनसंख्या घनत्व में वृद्धि: कृषि और उद्योगों के विकास के कारण गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर आदि जिलों में जनसंख्या घनत्व बढ़ा है।
अकाल पर रोक और पेयजल: प्रचुर जल की उपलब्धता से अकाल की समस्या समाप्त हुई है। जोधपुर, बीकानेर, चूरू सहित हजारों गाँवों और शहरों को स्वच्छ पीने का पानी मिल रहा है।
जल संरक्षण के विभिन्न तरीकों का उल्लेख करते हुए आप राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में जल के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या सुझाव देंगे?
जल संरक्षण के तरीके:
घरेलू उपाय: नल को कम खोलना, नल का आकार छोटा रखना, शावर की जगह बाल्टी भरकर नहाना, शेव बनाते समय नल खुला न छोड़ना, पीने के लिए उतना ही पानी लेना जितना आवश्यक हो।
कृषि उपाय: खेत में मेड़बंदी, ड्रिप सिंचाई (बूँद-बूँद) और फव्वारों का प्रयोग, हरित गृहों का निर्माण, भूमिगत जल पुनर्भरण हेतु रिचार्ज गड्ढे बनाना।
व्यावसायिक उपाय: उद्योगों में जल के लिए आर.ओ. वेस्ट वाटर कलेक्शन सेंटर बनाना, ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर प्रदूषित पानी को नदियों में जाने से रोकना, पर्यावरण नियमों का कठोरता से पालन करना।
राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में जल के दुरुपयोग को रोकने के सुझाव:
जागरूकता: 'बूंद-बूंद पानी की बचत' के नारे को हर व्यक्ति तक पहुँचाना और इसे एक राष्ट्रीय संकल्प बनाना।
कठोर नियम: औद्योगिक अपशिष्ट नदियों में छोड़ने पर कठोर दण्ड का प्रावधान करना और जल प्रदूषण फैलाने पर रोक लगाना।
जल प्रबंधन: घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोग में 'जितना पीना है उतना ही लें' की भावना विकसित करना, और फर्श धोने जैसे कार्यों में स्वच्छ पानी को बर्बाद होने से रोकना।
प्राचीन स्रोतों का पुनरुद्धार: बावड़ियों, टांके, नाड़ियों जैसे प्राचीन परम्परागत जल स्रोतों की सफाई और उनका जीर्णोद्धार करके उन्हें उपयोग लायक बनाना।
राजस्थान के विशेष संदर्भ में प्राचीन जल प्रबंधन की परम्परागत पद्धतियों और आधुनिक बहुउद्देशीय परियोजनाओं की तुलनात्मक विवेचना करें।
प्राचीन परम्परागत पद्धतियाँ (राजस्थान संदर्भ में):
ये स्थानीय भौगोलिक दशाओं और कम वर्षा के अनुकूल विकसित हुई थीं। इनका मुख्य उद्देश्य पेयजल और स्थानीय सिंचाई की पूर्ति करना था।
विधियाँ: तालाब, नाड़ी, जोहड़, बावड़ी, टांका और खडीन।
विशेषता: ये विकेन्द्रीकृत और समुदाय-आधारित थीं। ये वर्षा जल के संचयन और भूजल के पुनर्भरण पर केंद्रित थीं। इनका निर्माण वास्तु की दृष्टि से भी श्रेष्ठ होता था (जैसे बावड़ियाँ और टांके)।
आधुनिक बहुउद्देशीय परियोजनाएँ (राजस्थान संदर्भ में):
ये केन्द्रीकृत, बड़े पैमाने की योजनाएँ हैं जिनका उद्देश्य दूर-दराज के क्षेत्रों को अधिक मात्रा में जल उपलब्ध कराना है।
विधियाँ: चम्बल घाटी परियोजना और इंदिरा गांधी नहर परियोजना।
विशेषता: इनका मुख्य उद्देश्य जल विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, और व्यापक कृषि सिंचाई है। इंदिरा गांधी नहर ने मरुस्थल में कृषि क्रांति लाई है, जबकि चम्बल परियोजना ने क्षेत्र को बाढ़ मुक्त किया है।
तुलनात्मक विवेचना: | विशेषता | परम्परागत पद्धतियाँ | आधुनिक परियोजनाएँ | | :--- | :--- | :--- | | उद्देश्य | मुख्यतः पेयजल, स्थानीय सिंचाई, भूजल पुनर्भरण। | सिंचाई, विद्युत, बाढ़ नियंत्रण, औद्योगिक उपयोग। | | पैमाना | स्थानीय, छोटे पैमाने पर। | राष्ट्रीय/राज्य स्तर, बड़े पैमाने पर। | | स्रोत | मुख्यतः वर्षा जल। | नदी जल, विशाल बाँध/नहरें। | | वर्तमान स्थिति | उपेक्षित, कई कचरे से भरे हैं। | सक्रिय, राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका
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