कक्षा दसवीं सामाजिक पाठ15 'अध्याय 15: केन्द्र सरकार का गठन एवं शक्तियों' पाठ के प्रश्न उत्तर

 

​📝 वन-लाइनर प्रश्न और उत्तर (30 प्रश्न)

  1. संघीय सरकार के तीन प्रमुख अंग कौन-से हैं? व्यवस्थापिका (संसद), कार्यपालिका और न्यायपालिका।
  2. भारतीय संघीय व्यवस्थापिका को किस नाम से जाना जाता है? संसद (Parliament)।
  3. संविधान के किस अनुच्छेद के अनुसार भारतीय संघ की एक संसद होगी? अनुच्छेद 79 के अनुसार।
  4. संसद का निर्माण किन तीन अंगों से मिलकर होता है? राष्ट्रपति, लोकसभा तथा राज्यसभा।
  5. लोकसभा को संसद का कौन-सा सदन कहा जाता है? प्रथम या निम्न सदन।
  6. वर्तमान में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या कितनी हो सकती है? 552 सदस्य।
  7. लोकसभा सदस्यों का चुनाव किस आधार पर होता है? प्रत्यक्ष रूप से वयस्क मताधिकार के आधार पर।
  8. लोकसभा सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए? 25 वर्ष या इससे अधिक।
  9. लोकसभा का सामान्य कार्यकाल कितने वर्ष का होता है? 5 वर्ष।
  10. राज्यसभा को संसद का कौन-सा सदन कहा जाता है? द्वितीय या उच्च सदन।
  11. राज्यसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है? 250 सदस्य।
  12. राज्यसभा में राष्ट्रपति कितने सदस्य मनोनीत करता है? 12 सदस्य (जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा आदि में विशेष ज्ञान या अनुभव प्राप्त हो)।
  13. राज्यसभा सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए? 30 वर्ष या इससे अधिक।
  14. राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है? 6 वर्ष।
  15. राज्यसभा का पदेन सभापति कौन होता है? भारत का उपराष्ट्रपति।
  16. कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय कौन करता है? लोकसभा अध्यक्ष।
  17. धन विधेयक सर्वप्रथम किस सदन में प्रस्तावित किया जाता है? लोकसभा में।
  18. संविधान के किस अनुच्छेद के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा? अनुच्छेद 52 के अनुसार।
  19. राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित होने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए? 35 वर्ष।
  20. राष्ट्रपति का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है? 5 वर्ष।
  21. राष्ट्रपति को पदच्युत करने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं? महाभियोग (Impeachment)।
  22. उपराष्ट्रपति का निर्वाचन कौन करता है? संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित तथा मनोनीत सदस्य।
  23. संविधान के किस अनुच्छेद के अनुसार प्रधानमंत्री पद की व्यवस्था की गई है? अनुच्छेद 74 के अनुसार।
  24. प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है? राष्ट्रपति।
  25. कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री किसकी श्रेणियाँ हैं? मन्त्रिपरिषद् की।
  26. सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की वर्तमान संख्या कितनी है? 31 (एक मुख्य न्यायाधीश + 30 अन्य न्यायाधीश)।
  27. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है? राष्ट्रपति।
  28. सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश कितनी आयु तक अपने पद पर रह सकता है? 65 वर्ष की आयु तक।
  29. सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य स्थान (प्रधान कार्यालय) कहाँ है? दिल्ली में (संविधान के अनुच्छेद 130 के अनुसार)।
  30. मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए न्यायालय कौन-से लेख (Writs) जारी करता है? बन्दी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा और उत्प्रेषण।

​🔍 अति लघुतात्मक प्रश्न और उत्तर (20 प्रश्न)

  1. सरकार की परिभाषा कानूनी दृष्टि से लिखिए। कानूनी दृष्टि से, सरकार वह अभिकरण या मशीन है जिसके द्वारा राज्य की नीतियाँ निर्धारित की जाती हैं, सामान्य हितों को नियमित किया जाता है और उन्नत किया जाता है।
  2. संसद के दोनों सदनों के अधिवेशन कौन बुलाता और स्थगित करता है? राष्ट्रपति के द्वारा।
  3. लोकसभा अध्यक्ष की दो प्रमुख शक्तियों का उल्लेख कीजिए।
    • ​वह लोकसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है और शांति-व्यवस्था बनाए रखता है।
    • ​वह निर्णय करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है अथवा नहीं।
  4. राज्यसभा एक स्थायी सदन क्यों है? क्योंकि यह कभी भंग नहीं होता है, और इसके एक-तिहाई सदस्य प्रति दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त होते रहते हैं।
  5. लोकसभा की विधायी शक्ति का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है कि संसद संघीय सूची, समवर्ती सूची और अवशिष्ट विषयों पर कानून का निर्माण कर सकती है।
  6. केन्द्रीय कार्यपालिका का वैधानिक और वास्तविक प्रधान कौन होता है?
    • वैधानिक (औपचारिक) प्रधान: राष्ट्रपति।
    • वास्तविक प्रधान: प्रधानमंत्री और मन्त्रिपरिषद्।
  7. राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति का नाम बताइए। एकल संक्रमणीय मत पद्धति (आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली)।
  8. महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा में तभी पेश हो सकेगा, जबकि कितने दिन की पूर्व सूचना दी गई हो? 14 दिन की पूर्व सूचना।
  9. राष्ट्रपति की नियुक्ति सम्बन्धी कोई दो शक्तियाँ बताइए।
    • ​प्रधानमंत्री तथा केन्द्रीय मंत्रियों की नियुक्ति।
    • ​राज्यों के राज्यपाल, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति।
  10. संसद के अधिवेशन न होने की स्थिति में राष्ट्रपति को कौन-सी शक्ति प्राप्त है? अध्यादेश जारी करने की शक्ति (अनुच्छेद 123 के तहत)।
  11. राष्ट्रपति द्वारा घोषित संकटकालीन घोषणा की प्रभाविकता के लिए उसे कितने माह के अन्दर संसद की स्वीकृति आवश्यक होती है? एक माह के अन्दर।
  12. उपराष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व उसे कैसे हटाया जा सकता है? राज्यसभा द्वारा प्रस्ताव पारित करने पर, जिसे लोकसभा भी साधारण बहुमत से पारित कर दे।
  13. प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद का निर्माण करते समय वैधानिक सीमा के रूप में किसे चुन सकता है? संसद (लोकसभा/राज्यसभा) के सदस्यों को। यदि कोई मंत्री संसद का सदस्य नहीं है, तो उसे 6 माह के भीतर सदस्य बनना आवश्यक है।
  14. मंत्रिमंडल के दो प्रमुख कार्य लिखिए।
    • ​राष्ट्रीय नीतियों का निर्धारण करना।
    • ​कानून निर्माण पर नियन्त्रण रखना।
  15. मंत्रिमंडल और मन्त्रिपरिषद् में मुख्य अन्तर क्या है? मंत्रिमंडल (Cabinet) मन्त्रिपरिषद् का केवल प्रथम श्रेणी का भाग है जिसमें केवल कैबिनेट मंत्री आते हैं, जबकि मन्त्रिपरिषद् में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री तीनों श्रेणियाँ शामिल होती हैं।
  16. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए वर्तमान में कौन-सी व्यवस्था अपनाई जाती है? कॉलेजियम व्यवस्था (मुख्य न्यायाधीश व चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों का समूह नामों की सिफारिश करता है)।
  17. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को किस आधार पर पद से हटाया जा सकता है? कदाचार सिद्ध होने या असमर्थता के कारण महाभियोग द्वारा।
  18. सर्वोच्च न्यायालय के प्रारम्भिक एकमेव क्षेत्राधिकार से क्या आशय है? उन विवादों की सुनवाई, जो केवल और केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ही की जा सकती है (जैसे केंद्र और राज्यों के बीच विवाद)।
  19. सर्वोच्च न्यायालय को 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) क्यों कहा जाता है? क्योंकि इसके निर्णय सब जगह साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाते हैं और यह अपनी अवमानना (Contempt) के लिए दंड दे सकता है।
  20. न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की शक्ति का क्या अर्थ है? सर्वोच्च न्यायालय को संघीय तथा राज्य सरकारों द्वारा निर्मित कानूनों की संवैधानिकता की जाँच करने की शक्ति। यदि वे संविधान का अतिक्रमण करते हैं तो उन्हें अवैध घोषित किया जा सकता है।

​💡 लघुत्रात्मक प्रश्न और उत्तर (10 प्रश्न)

​1. संसद के तीन अंग व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में मुख्य अन्तर स्पष्ट कीजिए।

  • व्यवस्थापिका (संसद): इसका मुख्य कार्य कानूनों का निर्माण करना है। यह दो सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) तथा राष्ट्रपति से मिलकर बनी होती है।
  • कार्यपालिका (राष्ट्रपति, PM, मंत्रिपरिषद): इसका मुख्य कार्य व्यवस्थापिका द्वारा निर्मित कानूनों को लागू करना (निष्पादन) और शासन का संचालन करना है।
  • न्यायपालिका (सर्वोच्च न्यायालय): इसका मुख्य कार्य कानूनों की व्याख्या करना, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना, तथा कानून का उल्लंघन करने वालों को दंडित कर न्याय प्रदान करना है।

​2. लोकसभा का गठन और उसके सदस्यों की योग्यताएँ संक्षेप में समझाइए।

गठन: लोकसभा संसद का प्रथम/निम्न सदन है, जिसकी अधिकतम सदस्य संख्या 552 हो सकती है। इसमें से 530 सदस्य राज्यों से, 20 सदस्य संघीय क्षेत्रों से निर्वाचित होते हैं, और 2 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जा सकते हैं। सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से वयस्क मताधिकार के आधार पर होता है।

योग्यताएँ:

  1. ​वह भारत का नागरिक हो।
  2. ​उसकी आयु 25 वर्ष या इससे अधिक हो।
  3. ​वह किसी लाभ के पद को धारण किए हुए नहीं हो।
  4. ​किसी न्यायालय द्वारा पागल या दिवालिया नहीं ठहराया गया हो।

​3. राज्यसभा की विशेष शक्तियों का उल्लेख कीजिए जो उसे लोकसभा से अलग बनाती हैं।

​राज्यसभा को लोकसभा के समान शक्तियाँ प्राप्त होने के बावजूद, दो क्षेत्रों में इसे विशेष शक्तियाँ प्राप्त हैं:

  1. राज्य सूची के विषय पर कानून: अनुच्छेद 249 के अनुसार, राज्यसभा उपस्थित सदस्यों के 2/3 बहुमत से राज्य सूची के किसी विषय को राष्ट्रीय महत्त्व का घोषित कर सकती है, जिसके बाद संसद उस विषय पर कानून बना सकती है।
  2. अखिल भारतीय सेवाएँ: अनुच्छेद 312 के अनुसार, राज्यसभा अपने 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पास कर नई अखिल भारतीय सेवाएँ (All India Services) स्थापित करने का अधिकार संसद को दे सकती है।

​4. राष्ट्रपति पर महाभियोग द्वारा पदच्युत करने की प्रक्रिया को संक्षेप में समझाइए।

  1. अभियोग का प्रस्ताव: अभियोग चलाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में लाया जा सकता है।
  2. हस्ताक्षर और सूचना: प्रस्ताव पर सदन की कुल सदस्य संख्या के एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर होने आवश्यक हैं, और राष्ट्रपति को 14 दिन की पूर्व सूचना दी जानी चाहिए।
  3. स्वीकृति: प्रस्ताव को अभियोग लगाने वाले सदन की कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई (2/3) बहुमत से स्वीकृत होना चाहिए।
  4. जाँच: इसके बाद प्रस्ताव दूसरे सदन को भेजा जाता है, जो आरोपों की जाँच करता है।
  5. पदच्युति: यदि दूसरा सदन भी जाँच में आरोप सिद्ध होने पर अपने 2/3 बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है, तो उसी तिथि से राष्ट्रपति पदच्युत समझा जाता है।

​5. राष्ट्रपति की दो सामान्यकालीन शक्तियों और दो संकटकालीन शक्तियों का वर्णन कीजिए।

सामान्यकालीन शक्तियाँ:

  1. कार्यपालिका शक्तियाँ: प्रधानमंत्री, मंत्रियों, राज्यपालों, न्यायाधीशों आदि की नियुक्ति करना, तथा शासन का समस्त कार्य अपने नाम से करना।
  2. विधायी शक्तियाँ: संसद का अधिवेशन बुलाना, स्थगित करना, लोकसभा को भंग करना, विधेयकों पर स्वीकृति देना, और अध्यादेश जारी करना।

संकटकालीन शक्तियाँ:

  1. युद्ध या बाहरी आक्रमण/सशस्त्र विद्रोह सम्बन्धी संकटकाल (अनुच्छेद 352): युद्ध, बाहरी आक्रमण, या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में आपातकाल की घोषणा।
  2. राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने सम्बन्धी संकटकाल (अनुच्छेद 356): किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन लागू करना।

​6. प्रधानमंत्री की शक्तियों एवं अधिकारों के संदर्भ में उसकी केन्द्रीय भूमिका को समझाइए।

​प्रधानमंत्री की शक्तियाँ उसे शासन का केन्द्र बिन्दु बनाती हैं:

  1. मंत्रिपरिषद् का निर्माण: वह कैबिनेट मंत्रियों का चयन करता है, विभागों का बँटवारा करता है और मंत्रियों को हटा भी सकता है।
  2. मन्त्रिमण्डल का कार्य संचालन: वह मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करता है, समस्त विभागों में समन्वय स्थापित करता है और कार्यवाही का संचालन करता है।
  3. लोकसभा का नेता: वह बहुमत दल का नेता होता है और कानून निर्माण के समस्त कार्य उसी के निर्देशन में होते हैं।
  4. राष्ट्रपति और मन्त्रिमंडल के बीच समन्वयक: वह मन्त्रिमंडल के निर्णयों से राष्ट्रपति को परिचित कराता है और राष्ट्रपति के परामर्श को मंत्रिमंडल तक पहुँचाता है।

​7. मन्त्रिपरिषद् के प्रमुख कार्यों की व्याख्या कीजिए।

​मन्त्रिपरिषद् भारतीय शासन व्यवस्था की सर्वोच्च इकाई है, जिसके कार्य निम्नलिखित हैं:

  1. राष्ट्रीय नीतियों का निर्धारण: यह देश की आंतरिक और वैदेशिक क्षेत्र की नीतियों का निर्धारण करती है।
  2. कानून निर्माण पर नियन्त्रण: यह कानून निर्माण के कार्यक्रम को निश्चित करती है और महत्त्वपूर्ण विधेयक सदन में प्रस्तुत करती है।
  3. कार्यपालिका पर नियन्त्रण: मन्त्रिपरिषद् के सदस्य विभिन्न विभागों के अध्यक्ष होते हैं और वे ही वास्तविक रूप में शासन का संचालन करते हैं।
  4. वित्तीय कार्य: यह राष्ट्रीय आय-व्यय का बजट निर्धारित करती है और उसे संसद में प्रस्तुत करवाती है।

​8. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की योग्यताएँ और कार्यकाल के बारे में बताइए।

योग्यताएँ:

  1. ​वह भारत का नागरिक हो।
  2. ​वह किसी उच्च न्यायालय अथवा दो या अधिक न्यायालयों में लगातार 5 वर्ष तक न्यायाधीश रह चुका हो।
  3. अथवा किसी उच्च न्यायालय अथवा न्यायालयों में लगातार 10 वर्ष तक अधिवक्ता (वकील) रह चुका हो।
  4. अथवा राष्ट्रपति की दृष्टि में कानून का उच्च ज्ञाता हो।

कार्यकाल:

  • ​सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर आसीन रह सकता है।
  • ​वह स्वयं त्यागपत्र दे सकता है या संसद में महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है।

​9. सर्वोच्च न्यायालय के अपीलीय क्षेत्राधिकार के चार वर्गों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

​सर्वोच्च न्यायालय भारत का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है। यह उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपीलें सुनता है, जिसके चार वर्ग हैं:

  1. संवैधानिक अपील: जब विवाद में संविधान की व्याख्या से संबंधित कोई महत्त्वपूर्ण प्रश्न निहित हो।
  2. दीवानी अपील: 30वें संविधान संशोधन के बाद, सभी दीवानी विवादों की अपील सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकती है।
  3. फौजदारी अपील: उच्च न्यायालय द्वारा नीचे के न्यायालय के निर्णय को रद्द कर अभियुक्त को मृत्युदंड देने जैसे गंभीर मामलों में।
  4. विशिष्ट अपील: सैनिक न्यायालयों को छोड़कर, भारत क्षेत्र के किसी भी न्यायालय या न्यायाधिकरण के निर्णय के विरुद्ध अपील करने की अनुमति सर्वोच्च न्यायालय स्वयं दे सकता है।

​10. न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति से आप क्या समझते हैं?

​न्यायिक पुनर्विलोकन सर्वोच्च न्यायालय की वह शक्ति है जिसके द्वारा वह संसद (संघीय) या राज्य विधानमंडलों द्वारा निर्मित कानूनों की संवैधानिकता (validity) की जाँच करता है। यदि न्यायालय यह पाता है कि कोई कानून संविधान का अतिक्रमण करता है या मौलिक अधिकारों के विरुद्ध है, तो सर्वोच्च न्यायालय उस विधि को अवैधानिक (अवैध) घोषित कर सकता है। इस शक्ति से सर्वोच्च न्यायालय संविधान के संरक्षक का कार्य करता है।

​🏛️ निबंधात्मक प्रश्न और उत्तर (5 प्रश्न)

​1. भारतीय संसद के संगठन (गठन) और शक्तियों का विस्तृत वर्णन कीजिए।

संगठन (गठन):

  1. राष्ट्रपति: यह संसद का अभिन्न अंग है।
  2. लोकसभा (निम्न सदन): अधिकतम 552 सदस्य, प्रत्यक्ष चुनाव, 5 वर्ष कार्यकाल (भंग हो सकता है), अध्यक्षता अध्यक्ष करता है। योग्यता: 25 वर्ष आयु।
  3. राज्यसभा (उच्च सदन): अधिकतम 250 सदस्य (238 निर्वाचित + 12 मनोनीत), अप्रत्यक्ष चुनाव, 6 वर्ष कार्यकाल (स्थायी सदन), अध्यक्षता उपराष्ट्रपति (पदेन सभापति) करता है। योग्यता: 30 वर्ष आयु। शक्तियाँ एवं कार्य:
  4. विधायी शक्तियाँ: संघीय सूची, समवर्ती सूची और अवशिष्ट विषयों पर कानून बनाना।
  5. संविधान में संशोधन की शक्तियाँ: संविधान के अधिकांश भाग में संशोधन करना (साधारण या विशेष बहुमत से)।
  6. वित्तीय शक्तियाँ: राष्ट्रीय वित्त पर पूर्ण नियंत्रण, बजट को पारित करना। धन विधेयक पर लोकसभा को अधिक शक्ति।
  7. प्रशासनिक शक्तियाँ: कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद) पर नियंत्रण रखना, क्योंकि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
  8. निर्वाचन सम्बन्धी शक्तियाँ: राष्ट्रपति (निर्वाचक मंडल) और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेना।
  9. विविध शक्तियाँ: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, न्यायाधीशों पर महाभियोग लगाना, संकटकालीन घोषणाओं को स्वीकृति देना।

2. भारतीय राष्ट्रपति की सामान्यकालीन शक्तियों एवं कार्यों की व्याख्या कीजिए।

​सामान्यकालीन शक्तियों को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया गया है:

  1. कार्यपालिका सम्बन्धी शक्तियाँ:
    • नियुक्ति: प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, राज्यपाल, न्यायाधीश, महालेखा परीक्षक आदि की नियुक्ति।
    • शासन संचालन: शासन संचालन के नियम बनाना, मन्त्रिपरिषद के सदस्यों में विभागों का वितरण।
    • वैदेशिक क्षेत्र: विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व करना, राजदूतों की नियुक्ति और विदेशी राजदूतों के प्रमाण पत्रों को स्वीकार करना।
    • सैनिक क्षेत्र: भारत की समस्त सेनाओं का प्रधान सेनापति होना (प्रयोग कानून के अनुसार)।
  2. विधायी शक्तियाँ:
    • विधायी क्षेत्र का प्रशासन: संसद का अधिवेशन बुलाना/स्थगित करना, लोकसभा को भंग करना, दोनों सदनों को सम्बोधित करना।
    • सदस्यों को मनोनीत करना: राज्यसभा में 12 और लोकसभा में 2 आंग्ल भारतीय सदस्यों को मनोनीत करना।
    • विधेयक पर निषेधाधिकार: संसद द्वारा स्वीकृत विधेयक को कानून बनने से पूर्व स्वीकृति देना, या पुनर्विचार के लिए लौटाना।
    • अध्यादेश जारी करना: संसद का अधिवेशन न होने पर कानून के समान अध्यादेश जारी करना (6 सप्ताह तक प्रभावी)।
  3. वित्तीय शक्तियाँ: वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) संसद में प्रस्तुत करवाना, तथा धन विधेयक एवं अनुदान माँगों को उसकी आज्ञा के बिना प्रस्तुत न करना।
  4. न्यायिक शक्तियाँ:
    • ​उच्चतम और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति।
    • क्षमादान की शक्ति: दंड को क्षमा, कम, या स्थगित करने का अधिकार।

​3. भारत के प्रधानमंत्री की शक्तियों एवं कार्यों का विस्तार से वर्णन करते हुए उसकी स्थिति का आकलन कीजिए।

शक्तियाँ एवं अधिकार:

  1. मन्त्री परिषद् का निर्माण, विभागों का बँटवारा और परिवर्तन: अपनी इच्छानुसार मंत्रियों का चयन, विभागों का वितरण और उनमें फेरबदल करना।
  2. मन्त्रिपरिषद् का कार्य संचालन: मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करना, कार्यवाही का संचालन करना, और विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित करना।
  3. लोकसभा का नेता: बहुमत दल का नेता होने के नाते, समस्त कानून निर्माण और संसदीय कार्य उसी के नेतृत्व में होते हैं।
  4. राष्ट्रपति एवं मन्त्रिमंडल के मध्य समन्वयक: मन्त्रिमंडल के निर्णयों और राष्ट्रपति के परामर्श के बीच सेतु का कार्य करना।
  5. विभिन्न पदों पर नियुक्तियाँ: यद्यपि नियुक्तियाँ राष्ट्रपति करता है, व्यवहार में सभी उच्च अधिकारियों की नियुक्तियाँ प्रधानमंत्री के परामर्श से ही की जाती हैं।

स्थिति का आकलन:

संसदात्मक शासन व्यवस्था में प्रधानमंत्री शासन का वास्तविक प्रमुख होता है। राष्ट्रपति एक वैधानिक प्रमुख मात्र है, जबकि सभी प्रमुख नीतियाँ, निर्णय, और प्रशासनिक कार्य प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल द्वारा ही किए जाते हैं। वह देश की आंतरिक और वैदेशिक नीतियों का नियामक होता है।

​4. सर्वोच्च न्यायालय के प्रारम्भिक एवं अपीलीय क्षेत्राधिकार की विवेचना कीजिए।

​सर्वोच्च न्यायालय को व्यापक क्षेत्राधिकार प्राप्त है:

1. प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction): उन विवादों की सुनवाई जो सीधे सर्वोच्च न्यायालय में शुरू हो सकते हैं।

  • प्रारम्भिक एकमेव क्षेत्राधिकार:
    • ​भारत सरकार और एक या एक से अधिक राज्यों के बीच विवाद।
    • ​दो या दो से अधिक राज्यों के बीच संवैधानिक विषयों के विवाद।
  • प्रारम्भिक समवर्ती क्षेत्राधिकार:
    • मौलिक अधिकारों को लागू करने से संबंधित विवाद। ये उच्च न्यायालयों में भी शुरू किए जा सकते हैं।

2. अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction): उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनने का अधिकार।

  • संवैधानिक अपील: संविधान की व्याख्या से संबंधित महत्त्वपूर्ण प्रश्न निहित होने पर।
  • दीवानी अपील: सभी दीवानी विवादों की अपील (30वें संशोधन के बाद)।
  • फौजदारी अपील: उच्च न्यायालय द्वारा नीचे के न्यायालय के निर्णय को रद्द कर मृत्युदंड देने जैसे गंभीर मामलों में।
  • विशिष्ट अपील: सैनिक न्यायालय को छोड़कर भारत के किसी भी न्यायालय के विरुद्ध अपील की विशेष आज्ञा देना (अनुच्छेद 136)।

​5. भारतीय न्यायपालिका के दो प्रमुख विशिष्ट कार्य- मौलिक अधिकारों का रक्षक और न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति- को समझाइए।

1. मौलिक अधिकारों का रक्षक:

  • ​सर्वोच्च न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का संरक्षक है।
  • ​अधिकारों का उल्लंघन होने पर, न्यायालय अनुच्छेद 32 के तहत निम्नलिखित पाँच प्रकार के लेख (Writ) जारी कर सकता है, जिससे मौलिक अधिकारों को लागू किया जाता है:
    1. बन्दी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
    2. परमादेश (Mandamus)
    3. प्रतिषेध (Prohibition)
    4. अधिकार पृच्छा (Quo Warranto)
    5. उत्प्रेषण (Certiorari)

2. न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति:

  • ​यह सर्वोच्च न्यायालय की वह शक्ति है जिसके द्वारा वह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिकता (constitutionality) की जाँच करता है।
  • ​यदि न्यायालय पाता है कि कोई कानून संविधान का अतिक्रमण करता है या मौलिक अधिकारों के विरुद्ध है, तो न्यायालय उसे अवैधानिक (unconstitutional) या शून्य घोषित कर सकता है।
  • ​यह शक्ति संविधान के संरक्षण का कार्य करती है और विधायिका (संसद/विधानमंडल) को संविधान की सीमाओं में रखती है।

Post a Comment

0 Comments