कक्षा दसवीं सामाजिक अध्याय 8: पुनर्जागरण और समाज सुधार आंदोलन - प्रश्न-उत्तर


1. अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (20 प्रश्न)

| 1. | भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत किसे माना जाता है? |
 राजा राममोहन राय। |
| 2. | राजा राममोहन राय का जन्म कहाँ हुआ था?  राधानगर, हुगली जिला, बंगाल (मई 1772 ई.)। |
| 3. | राजा राममोहन राय द्वारा 1821 ई. में बांग्ला में कौन-सा समाचार पत्र प्रकाशित करवाया गया? | 'संवाद कौमुदी'। |
| 4. | राजा राममोहन राय द्वारा 1822 ई. में फारसी में कौन-सा अखबार प्रकाशित करवाया गया? | 
'मिरातुल अखबार'। |
| 5. | राजा राममोहन राय ने किस कुरीति को समाप्त करवाया था? 
सती प्रथा। |
| 6. | सती प्रथा को अवैध कब घोषित किया गया?  4 दिसंबर 1829 ई. को (लॉर्ड विलियम बैंटिंक द्वारा)। |
| 7. | राजा राममोहन राय ने किस समाज की स्थापना की थी? | 
ब्रह्म समाज (20 अगस्त 1828 ई.)। |
| 8. | राजा राममोहन राय का निधन कहाँ पर हुआ था? | 
ब्रिस्टल नगर, इंग्लैंड (1833 ई.)। |
| 9. | स्वामी दयानन्द सरस्वती के बचपन का क्या नाम था? | 
मूलशंकर। |
| 10. | स्वामी दयानन्द सरस्वती के गुरु कौन थे? | स्वामी विरजानन्द (मथुरा)। |
| 11. | स्वामी दयानन्द सरस्वती ने किस ग्रंथ की रचना की थी? | 
'सत्यार्थ प्रकाश' (1874 ई.)। |
| 12. | स्वामी दयानन्द सरस्वती ने कौन-सा नारा दिया? | 
'वेदों की ओर लौटो'। |
| 13. | स्वामी दयानन्द सरस्वती ने किस समाज की स्थापना की थी? | 
आर्य समाज (10 अप्रैल 1875 ई. को बम्बई में)। |
| 14. | 'स्वराज' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया था? | 
स्वामी दयानन्द सरस्वती। |
| 15. | स्वामी विवेकानन्द का बचपन का क्या नाम था? 
 नरेन्द्र नाथ दत्त। |
| 16. | स्वामी विवेकानन्द के गुरु कौन थे? | रामकृष्ण परमहंस। |
| 17. | स्वामी विवेकानन्द को 'विवेकानन्द' नाम किसने दिया था? | 
खेतड़ी नरेश अजीत सिंह। |
| 18. | विश्व धर्म सम्मेलन कहाँ आयोजित हुआ था, जिसमें विवेकानन्द ने भाग लिया? | 
शिकागो, अमेरिका (1893 ई.)। |
| 19. | डॉ. भीमराव अम्बेडकर को किस उपनाम से जाना जाता है? | 
बाबा साहब। |
| 20. | डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म किस कुल में हुआ था? | 
महार कुल (14 अप्रैल 1891 ई., महू)। |
2. लघु उत्तरात्मक प्रश्न (10 प्रश्न)


| 1. | राजा राममोहन राय को भारतीय पुनर्जागरण का पिता क्यों कहा जाता है? | 
उन्होंने सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों का प्रारम्भ किया, सती प्रथा जैसी कुरीतियों का अंत कराया, तथा पाश्चात्य शिक्षा का समर्थन कर भारतीय समाज में नवजागृति लाने का प्रयास किया। |
| 2. | ब्रह्म समाज की प्रमुख शिक्षाएँ क्या थीं? | ईश्वर एक, अनादि और निराकार है। आत्मा अमर है। यह मूर्ति पूजा, अंधविश्वासों एवं कर्मकांडों का विरोध करता है और उपनिषदों पर आधारित अद्वैतवादी संस्था थी। |
| 3. | स्वामी दयानन्द सरस्वती ने मूर्तिपूजा से विश्वास क्यों खो दिया? | 
14 वर्ष की आयु में शिवरात्रि महोत्सव के दौरान उन्होंने देखा कि एक चूहा शिव की प्रतिमा पर चढ़कर खेल रहा था। इससे वे विचलित हुए कि जो प्रतिमा अपनी रक्षा नहीं कर सकती, वह शिव नहीं हो सकती। |
| 4. | आर्य समाज के शैक्षणिक क्षेत्र में योगदान को स्पष्ट करें। | 
उन्होंने अपने विचारों के प्रसार के लिए डीएवी स्कूल और कॉलेज तथा गुरुकुल की स्थापना की, जहाँ सामान्य विषयों के साथ-साथ संस्कृत और वेदों पर विशेष ध्यान दिया जाता था। |
| 5. | स्वामी विवेकानन्द का रामकृष्ण मिशन के माध्यम से क्या संदेश था? 
|
उन्होंने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के मानवतावाद को फैलाया और भारतीय आध्यात्मवाद के माध्यम से हिन्दू धर्म में नवजीवन का संचार किया। उनका संदेश था: "उत्तिष्ठ जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत" (उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत शयन करो)। |
| 6. | डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने दलितों के उत्थान के लिए क्या संगठन बनाए? | 
1924 में उन्होंने बहिष्कृत हितकारिणी सभा का गठन किया, जिसका उद्देश्य दलितों को नागरिक अधिकार दिलवाना था। उन्होंने 'बहिष्कृत भारत' नामक पत्रिका भी निकाली। |
| 7. | स्वतंत्र भारत में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की मुख्य भूमिकाएँ क्या थीं? |
 वे स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री बने और उन्हें भारतीय संविधान समिति का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने संविधान के माध्यम से नागरिकों को व्यापक स्वतंत्रता दी, छुआछूत का अंत किया तथा आरक्षण की व्यवस्था की। |
| 8. | आचार्य तुलसी द्वारा अणुव्रत आंदोलन प्रारम्भ करने का क्या उद्देश्य था? | 
इसका उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव को दूर करना, जातिबंधन को तोड़ना, तथा समाज में चारित्रिक सुदृढ़ता एवं नैतिकता का विकास करना था। यह अहिंसा और मानवीय एकता पर बल देता है। |
| 9. | महात्मा ज्योतिबा फुले का महिला शिक्षा के क्षेत्र में क्या योगदान था? |
 उन्होंने 1848 ई. में पुणे में देश का प्रथम बालिका विद्यालय खोला। शिक्षक न मिलने पर अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले को प्रशिक्षित कर प्रथम शिक्षिका बनाया, भले ही उन्हें उच्च वर्ग के विरोध का सामना करना पड़ा। |
| 10. | महात्मा ज्योतिबा फुले ने सत्य शोधक समाज की स्थापना क्यों की? 
उन्होंने दलितों और निर्धनों को समाज में सम्मानीय स्थान दिलाने, जाति प्रथा के भेदभाव को मिटाने तथा मानवीय एकता का संदेश देने के उद्देश्य से सितंबर 1873 ई. में इसकी स्थापना की। |
3. निबंधात्मक प्रश्न (5 प्रश्न)
 (1)भारतीय पुनर्जागरण के जनक राजा राममोहन राय के सामाजिक और शैक्षणिक योगदान का विस्तृत वर्णन करें।
   * सामाजिक योगदान:
     * उन्होंने सती प्रथा, बहु-विवाह, बाल-विवाह, जाति प्रथा जैसी कुप्रथाओं का शास्त्रों के आधार पर विरोध किया।
     * उनके अथक प्रयासों से 1829 में सती प्रथा को अवैध घोषित किया गया।
     * उन्होंने स्त्रियों को सम्मान दिलाने तथा जाति प्रथा से उत्पन्न असमानता को दूर करने का प्रयास किया।
   * शैक्षणिक योगदान:
     * उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा का समर्थन किया, यह मानते हुए कि पाश्चात्य संपर्क से नवजागृति आएगी।
     * उन्होंने कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज, एंग्लो हिन्दू स्कूल (1822) और वेदांत कॉलेज (1825) की स्थापना की।
     * संचार के माध्यम से जागृति लाने के लिए 'संवाद कौमुदी' (बांग्ला) और 'मिरातुल अखबार' (फारसी) का प्रकाशन किया।
 (2)  स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज के धार्मिक और सामाजिक सुधारों का विश्लेषण कीजिए।
   * धार्मिक सुधार:
     * उन्होंने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को समस्त ज्ञान का आधार माना।
     * उन्होंने मूर्तिपूजा, अंधविश्वासों, कर्मकांडों, पुरोहितवाद तथा जातिप्रथा का विरोध किया।
     * एकेश्वरवाद (एक ब्रह्म की उपासना), यज्ञ, हवन और नैतिक जीवन पर आधारित धर्म की स्थापना की।
   * सामाजिक सुधार:
     * उन्होंने सामाजिक समानता पर बल दिया तथा बहु-विवाह, बाल-विवाह और पर्दा प्रथा का डटकर विरोध किया।
     * उन्होंने विधवा विवाह का समर्थन किया।
     * शुद्धि आंदोलन चलाया, जिसके माध्यम से मध्यकाल में हिन्दू धर्म छोड़कर गए लोगों को वापस हिन्दू धर्म में लाया गया।
 (3)  डॉ. भीमराव अम्बेडकर को 'संविधान निर्माता' के रूप में याद किया जाता है, लेकिन एक समाज सुधारक के रूप में उनके योगदान को रेखांकित कीजिए।
   * डॉ. अम्बेडकर ने अपना जीवन दलितों के उत्थान और अस्पृश्यता (छुआछूत) को हिंदू समाज के लिए कलंक मानते हुए उसे मिटाने में समर्पित कर दिया।
   * दलितों के अधिकार: उन्होंने बहिष्कृत हितकारिणी सभा (1924) का गठन किया जिसका उद्देश्य दलितों को नागरिक अधिकार दिलवाना था। उन्होंने 'बहिष्कृत भारत' पत्रिका भी निकाली।
   * संवैधानिक प्रयास: संविधान निर्माता के रूप में उन्होंने छुआछूत का अंत किया और सभी प्रकार के भेदभावों को गैरकानूनी करार दिया।
   * आरक्षण: उन्होंने दलितों को शिक्षा और नौकरियों में अवसर प्रदान करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की।
   * महिला सम्मान: उन्होंने महिलाओं के प्रति सम्मान रखते हुए, संविधान और हिन्दू कोड बिल के माध्यम से उन्हें गरिमापूर्ण स्थान और संवैधानिक अधिकार दिलाए।
 (4)स्वामी विवेकानन्द के दर्शन और शिकागो धर्म सम्मेलन में उनकी भूमिका का वर्णन करें।
   * दर्शन: स्वामी विवेकानन्द ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के मानवतावाद को अपनाया। उन्होंने भारतीय आध्यात्मवाद के माध्यम से हिन्दू धर्म में नवजीवन का संचार किया। उनका दर्शन भारतीय धर्म दर्शन और जागृति की प्रतिमूर्ति था।
   * संदेश: उनका मूल संदेश था "उत्तिष्ठ जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत" (जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत शयन करो), जो युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण पर बल देता है।
   * शिकागो सम्मेलन (1893): उन्होंने इस विश्व धर्म सम्मेलन में भारत और हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया। उनके "मेरे अमरीका के भाइयों और बहनों" संबोधन ने सबको प्रभावित किया। इसके बाद उनकी ख्याति विश्वव्यापी हुई और उन्होंने भारतीय ज्ञान और दर्शन का पूरे विश्व में प्रचार-प्रसार किया।
 (5) आचार्य तुलसी के 'अणुव्रत आंदोलन' और महात्मा ज्योतिबा फुले के 'सत्य शोधक समाज' के उद्देश्यों की तुलना कीजिए।
   * अणुव्रत आंदोलन (आचार्य तुलसी):
     * उद्देश्य: व्यक्तिगत जीवन में चारित्रिक सुदृढ़ता, नैतिकता और व्यसन मुक्त जीवन का विकास करना।
     * सामाजिक लक्ष्य: जाति-भेदभाव का विरोध, धार्मिक सहिष्णुता और मानवीय एकता में विश्वास, तथा सामाजिक कुरीतियों का विरोध।
     * यह छोटे-छोटे नियमों की आचार संहिता थी जिसका पालन कोई भी व्यक्ति, किसी भी धर्म या जाति का, आसानी से कर सकता था।
   * सत्य शोधक समाज (ज्योतिबा फुले):
     * उद्देश्य: मुख्य रूप से महाराष्ट्र में व्याप्त जाति प्रथा और सामाजिक भेदभाव की नीति का विरोध करना।
     * सामाजिक लक्ष्य: दलितों और निर्धनों को समाज में सम्मानीय स्थान दिलाना। महिला शिक्षा और विधवा विवाह का समर्थन करना।
     * यह ब्राह्मणों एवं पुरोहितों के बिना विवाह संस्कार सम्पन्न करवाने पर भी बल देता था, जिससे समाज में समानता स्थापित हो सके।
   * तुलना: दोनों आंदोलनों का मूल उद्देश्य सामाजिक बुराइयों को दूर करना और समानता स्थापित करना था। अणुव्रत आंदोलन अधिक नैतिक/चारित्रिक विकास पर केंद्रित था, जबकि सत्य शोधक समाज अधिक दलितों और महिला शिक्षा के सामाजिक-राजनीतिक उत्थान पर केंद्रित था।

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