📜 परिचय एवं उद्देश्य
 * परिचय: प्राचीन भारत की गौरवशाली संस्कृति के विपरीत, मध्यकाल में विदेशी आक्रमणों से संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई।
 * 19वीं सदी में कई समाज सुधारकों का जन्म हुआ जिन्होंने सामाजिक एवं धार्मिक दोषों (बुराइयों) को दूर कर एक स्वस्थ समाज की रचना में योगदान दिया।
 * उद्देश्य:
   * विद्यार्थियों को समाज सुधारकों और समाज में व्याप्त बुराइयों की जानकारी देना।
   * समाज सेवकों के जीवन से प्रेरणा लेना।
   * स्वस्थ समाज के निर्माण, सामाजिक समरसता और सहअस्तित्व की भावना का विकास करना।
1. राजा राममोहन राय (भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत)
 * जन्म: मई 1772 ई., राधानगर गाँव, हुगली जिला, बंगाल।
 * विशेषताएँ:
   * इन्हें भारतीय पुनर्जागरण और समाज सुधार आंदोलनों का प्रवर्तक माना जाता है।
   * अरबी, फारसी, संस्कृत, फ्रेंच, ग्रीक, लैटिन, हिब्रू आदि भाषाओं के ज्ञानी।
   * ईस्ट इंडिया कंपनी की नौकरी छोड़कर समाज सुधार में जीवन समर्पित किया।
   * धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन किया और भारतीय दर्शन की परंपरा को पुनःस्थापित किया।
   * अंग्रेजी शिक्षा का समर्थन किया, मानते थे कि पाश्चात्य संपर्क से नवजागृति आएगी।
 * साहित्यिक योगदान:
   * 1821 ई. में बांग्ला में 'संवाद कौमुदी'।
   * 1822 ई. में फारसी में 'मिरातुल अखबार'।
   * 'ब्रह्मनीकल' पत्रिका का प्रकाशन।
 * शैक्षणिक योगदान: कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज, 1822 ई. में एंग्लो हिन्दू स्कूल और 1825 ई. में वेदांत कॉलेज की स्थापना की।
1.1 समाज सुधार
 * विरोध: तत्कालीन कुप्रथाएँ जैसे जाति प्रथा, बहु-विवाह, बाल-विवाह, सती प्रथा आदि का शास्त्रों के आधार पर विरोध किया।
 * सती प्रथा उन्मूलन: उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप 4 दिसंबर 1829 ई. को लॉर्ड विलियम बैंटिंक ने अधिनियम पारित कर सती प्रथा को अवैध घोषित किया।
 * नारी सम्मान: स्त्रियों को समाज में सम्मान दिलाने का हर संभव प्रयास किया।
 * बाल विवाह: विरोध किया, जिससे बाद में शारदा एक्ट पास हुआ।
1.2 ब्रह्म समाज
 * स्थापना: 20 अगस्त 1828 ई. को अंधविश्वासों और कुरीतियों को मिटाने तथा भारतीय धर्म आधारित समाज की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से।
 * प्रमुख शिक्षाएँ:
   * ईश्वर एक, अनादि और निराकार है। आत्मा अमर है।
   * मूर्ति पूजा एवं कर्मकांड का विरोध।
   * यह उपनिषदों पर आधारित अद्वैतवादी भारतीय संस्था थी।
 * निधन: 1833 ई. में ब्रिस्टल नगर, इंग्लैंड में।
 * उत्तराधिकार: देवेन्द्रनाथ टैगोर और केशवचन्द्र सेन ने आगे बढ़ाया, बाद में दो भागों में बँटा - (1) आदि ब्रह्म समाज (2) भारतीय ब्रह्म समाज।
 * उपाधि: उन्हें भारतीय पुनर्जागरण का पिता कहा जाता है।
2. स्वामी दयानन्द सरस्वती
 * जन्म: 1824 ई., मौरवी ग्राम, काठियावाड़, गुजरात (एक प्रतिष्ठित परिवार में)।
 * बचपन का नाम: मूलशंकर।
 * ज्ञान की खोज: शिवरात्रि महोत्सव में मूर्ति पर चूहे को देखकर मूर्तिपूजा से विश्वास हटा, 21 वर्ष की आयु में ज्ञान की खोज में घर त्यागा।
 * गुरु: मथुरा में स्वामी विरजानन्द से वैदिक ज्ञान प्राप्त किया।
 * उद्देश्य: समाज में व्याप्त पाखंड, अंधविश्वास और धार्मिक कुरीतियों को दूर कर वैदिक धर्म और संस्कृति की पुनः स्थापना।
 * ग्रंथ: 1874 ई. में 'सत्यार्थ प्रकाश' की रचना।
 * नारा: 'वेदों की ओर लौटो'।
 * आर्य समाज की स्थापना: 10 अप्रैल 1875 ई. को बम्बई (मुंबई) में।
2.1 आर्य समाज के प्रमुख सिद्धान्त
 * ईश्वर अजर, अमर, सर्वज्ञ तथा निराकार है।
 * वेद समस्त ज्ञान का आधार हैं।
 * सत्य को स्वीकार करने के लिए तत्पर रहना चाहिए।
 * वैदिक ज्ञान का अध्ययन करना चाहिए।
 * सत्कर्मों पर आधारित नैतिक जीवन।
 * यज्ञ एवं हवन होना चाहिए।
 * एकेश्वरवाद (एक ब्रह्म की उपासना)।
 * सामाजिक कल्याण की कामना।
2.2 आर्य समाज के माध्यम से सुधार
| क्षेत्र | सुधार कार्य |
|---|---|
| धार्मिक | एकेश्वरवाद, यज्ञ, हवन, सत्कर्म पर जोर। मूर्तिपूजा, कर्मकांडों और जाति प्रथा का विरोध। |
| सामाजिक | जाति प्रथा का विरोध, सामाजिक समानता। विधवा विवाह का समर्थन। बहु-विवाह, बाल-विवाह, पर्दा प्रथा का विरोध। शुद्धि आंदोलन (हिन्दू धर्म छोड़ चुके लोगों की पुनः घर वापसी)। |
| शैक्षणिक | विचारों के प्रसार हेतु D.A.V. स्कूल और कॉलेज तथा गुरुकुल की स्थापना। संस्कृत और वेदों पर विशेष ध्यान। |
| राष्ट्रीयता | सर्वप्रथम 'स्वराज' शब्द का प्रयोग। हिन्दी को राष्ट्रभाषा स्वीकार किया। स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर जोर। |
 * निधन: अक्टूबर 1883 ई. को अजमेर में।
3. स्वामी विवेकानन्द (युवा शक्ति के प्रणेता)
 * जन्म: 12 जनवरी 1863 ई., कलकत्ता।
 * बचपन का नाम: नरेन्द्र नाथ दत्त।
 * शिक्षा: कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक। पश्चिमी दार्शनिकों का अध्ययन किया।
 * गुरु: 1881 ई. में रामकृष्ण परमहंस से भेंट हुई और उनके शिष्य बने।
 * रामकृष्ण मिशन: गुरु के मानवतावाद को विश्व में फैलाया। रामकृष्ण की मृत्यु के बाद बारानगर में मठ का निर्माण किया।
 * नामकरण: भारत भ्रमण के दौरान खेतड़ी नरेश अजीत सिंह ने उन्हें 'विवेकानन्द' नाम दिया।
 * विश्व धर्म सम्मेलन (1893 ई.):
   * स्थान: शिकागो, अमेरिका।
   * अजीत सिंह के आर्थिक सहयोग से भाग लिया।
   * "मेरे अमरीका के भाइयों और बहनों" सम्बोधन से प्रसिद्ध हुए। भारतीय ज्ञान और दर्शन का प्रचार-प्रसार किया।
 * संदेश: "उत्तिष्ठ जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत" (उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत शयन करो)।
 * निधन: 4 जुलाई 1902 ई. को अल्पायु में।
4. डॉ. भीमराव अम्बेडकर (संविधान निर्माता)
 * जन्म: 14 अप्रैल 1891 ई., महू, मध्य प्रदेश (तत्कालीन महार कुल - निम्न जाति)।
 * उपनाम: बाबा साहब।
 * शिक्षा:
   * एलफिन्सटन कॉलेज से स्नातक।
   * गायकवाड़ शासक के सहयोग से कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पी.एच.डी. की उपाधि।
   * 1923 में बैरिस्टर बने।
 * कार्य: दलितों के उत्थान और अस्पृश्यता उन्मूलन के लिए कार्य किया।
   * संगठन: बहिष्कृत हितकारिणी सभा का गठन (दलितों को नागरिक अधिकार दिलवाना उद्देश्य)।
   * पत्रिका: 'बहिष्कृत भारत'।
   * छुआछूत के खिलाफ व्यापक आंदोलन।
   * महिलाओं को समाज में गरिमापूर्ण स्थान और संवैधानिक अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका।
   * आरक्षण (अनुसूचित जाति/जनजाति) की व्यवस्था की।
 * राजनीतिक जीवन:
   * 1930 में प्रवेश।
   * 1932 में पूना पैक्ट (दलितों के लिए 15 सीटें)।
   * प्रथम कानून मंत्री: 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री बने।
   * संविधान समिति अध्यक्ष: भारतीय संविधान समिति के अध्यक्ष बनाए गए।
 * निधन: 6 दिसंबर 1956 ई. को महापरिनिर्वाण।
   * धर्म परिवर्तन: 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में बौद्ध धर्म अपनाया।
   * समाधि स्थल: दादर चौपाटी, बम्बई (मुंबई) (चैत्य भूमि)।
 * सम्मान: मरणोपरान्त सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित।
 * प्रमुख पुस्तकें: बुद्धा एण्ड हिज धम्मा, थॉट्स ऑन पाकिस्तान, द अनटचेबल।
5. आचार्य तुलसी (अणुव्रत आंदोलन के प्रणेता)
 * जन्म: 20 अक्टूबर 1914 ई., लाडनूँ, राजस्थान।
 * दीक्षा: 11 वर्ष की उम्र में जैन धर्म के तेरापंथ के मुनि बने। 22 वर्ष की उम्र में आचार्य बने।
 * आन्दोलन: अणुव्रत आन्दोलन का शुभारम्भ (चूरू के सरदार शहर में)।
 * उद्देश्य: समाज के प्रत्येक वर्ग से जुड़ना, नैतिकता, चारित्रिक सुदृढ़ता का विकास, जाति-भेदभाव का विरोध, सामाजिक समरसता।
 * अणुव्रत आचार संहिता (कुछ नियम):
   * किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं करना।
   * आक्रामक व्यवहार नहीं करना।
   * धार्मिक सहिष्णुता रखना।
   * मानवीय एकता में विश्वास।
   * व्यसन मुक्त जीवन।
   * सामाजिक कुरीतियों का विरोध।
   * पर्यावरण की रक्षा।
 * निधन: बीकानेर के गंगाशहर में महाप्रयाण।
6. ज्योतिबा फुले (सामाजिक क्रांति के अग्रदूत)
 * जन्म: 11 अप्रैल 1827 ई., महाराष्ट्र (माली परिवार)।
 * उपनाम: वंशज फूलमाला आदि बनाने का कार्य करते थे, इसलिए 'फुले' उपनाम से जाने गए।
 * पत्नी: सावित्री बाई फुले (समाज सेविका)।
 * कार्य:
   * जातिप्रथा और समाज में व्याप्त भेदभाव की नीति का विरोध।
   * महिला एवं दलित शिक्षा पर जोर।
   * देश का प्रथम बालिका विद्यालय (1848 ई., पुणे) खोला। पत्नी सावित्री बाई इसकी प्रथम शिक्षिका बनीं।
   * विधवा विवाह का समर्थन, बाल विवाह का विरोध।
   * पुरोहितों के बिना विवाह संस्कार सम्पन्न करवाए।
 * संगठन: सितम्बर 1873 ई. में सत्य शोधक समाज की स्थापना (दलितों एवं निर्धनों को सम्मान दिलाने हेतु)।
 * उपाधि: 1888 ई. में मुम्बई की एक जनसभा में 'महात्मा' के नाम से पुकारा गया।
 * निधन: 28 नवम्बर 1890 ई. को पुणे में।
💡 मुख्य बिंदु (आपने क्या सीखा)
 * 19वीं शताब्दी में धर्म सुधार आन्दोलन हुए, जिनका उद्देश्य समाज में व्याप्त दोषों को दूर करना था।
 * राजा राममोहन राय आधुनिक भारत के पिता कहलाते हैं।
 * दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की।
 * स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लिया।
 * आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आन्दोलन का प्रारम्भ किया था।
 * महात्मा ज्योतिबा फुले ने सत्य शोधक समाज की स्थापना की थी।
 * इन आंदोलनों में दलितोद्धार एवं बालिका शिक्षा पर जोर दिया गया।