कक्षा बारहवीं पर्यावरण पाठ5 'पारितंत्र पाठ के प्रश्न और उत्तर


1. एक पंक्ति वाले प्रश्न और उत्तर (One-Liner Questions and Answers) (20)
| क्र.सं. | प्रश्न (Question) | उत्तर (Answer) |

| 1 | जैव मंडल क्या कहलाता है? | 
पृथ्वी का वह भाग जो जीवन को बनाए रखता है। |
| 2 | पारितंत्र की संकल्पना किसने और कब की? | ए.जी. टेन्सले, 1935 में। |
| 3 | पारितंत्र के दो मुख्य घटक कौन-से हैं? | अजैविक और जैविक घटक। |
| 4 | हरे पौधे किस प्रक्रिया द्वारा भोजन बनाते हैं? | प्रकाश संश्लेषण के द्वारा। |
| 5 | उपभोक्ता किस प्रकार के जीव कहलाते हैं? | विषमपोषी। |
| 6 | शाकाहारी जन्तु किसका भक्षण करते हैं? | सीधे ही पौधों का। |
| 7 | अपघटक क्या कहलाते हैं? |
 मृतपोषी (या अपरदभोजी)। |
| 8 | तालाब किस प्रकार के पारितंत्र का उदाहरण है? |
 पूर्ण, बंद और स्वतंत्र पारितंत्र का। |
| 9 | खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक सोपान क्या कहलाता है? |
 पोषण स्तर (Trophic level)। |
| 10 | ऊर्जा का प्रवाह कैसा होता है? | 
सदैव रैखीय और एकदिशिक। |
| 11 | पारिस्थितिक दक्षता का 10% नियम किसने दिया? |
 लिन्डमेन ने (1942 में)। |
| 12 | भूजैवरासायनिक चक्र में किसका प्रवाह चक्रीय होता है? 
| पोषकों का। |
| 13 | वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का मुख्य स्रोत क्या है? | 
वायुमंडल में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड। |
| 14 | वायुमंडल में नाइट्रोजन का प्रतिशत लगभग कितना है? |
 लगभग 79 प्रतिशत। |
| 15 | अमोनिया का नाइट्रेट और नाइट्राइट में परिवर्तन क्या कहलाता है? | 
नाइट्रीकरण। |
| 16 | नाइट्रेट का पुनः गैसीय नाइट्रोजन में बदलना क्या कहलाता है? |
 विनाइट्रीकरण। |
| 17 | जल चक्र के मुख्य चालक बल कौन से हैं? | सौर विकिरण और गुरुत्वाकर्षण। |
| 18 | पारितंत्रों में आत्मनियमन की क्षमता क्या कहलाती है? | 
समस्थापन (Homeostasis)। |
| 19 | संख्या पिरैमिड क्या दर्शाता है? |
 प्रत्येक पोषण स्तर में जीवों की संख्या। |
| 20 | जलीय पारितंत्रों में जीव संहति का पिरैमिड कैसा होता है? | 
उल्टा (Inverted)। |
2. अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न और उत्तर (Very Short Answer Questions and Answers) (10)
1. पारितंत्र क्या है?
उत्तर: पारितंत्र प्रकृति की क्रियात्मक इकाई है जिसमें इसके जैविक (सजीव) तथा अजैविक (निर्जीव) घटकों के बीच जटिल अन्योन्यक्रियाएँ होती हैं।
2. पारितंत्र के अजैविक घटकों को किन तीन वर्गों में विभाजित किया गया है?
उत्तर:
 * भौतिक कारक (जैसे: सूर्य का प्रकाश, तापमान)।
 * अकार्बनिक पदार्थ (जैसे: जल, \text{CO}_2, \text{O}_2)।
 * कार्बनिक पदार्थ (जैसे: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड)।
3. उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर:
 * उत्पादक (हरे पौधे) अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
 * उपभोक्ता (जंतु) भोजन के लिए उत्पादकों या अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।
 * अपघटक (जीवाणु, कवक) मृत कार्बनिक पदार्थों को सड़ाते हैं।
4. सर्वाहारी किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: सर्वाहारी (Omnivores) वे जीव हैं जो पौधों और जन्तुओं दोनों का भक्षण करते हैं। उदाहरण: मानव, सुअर, गोरैया।
5. खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा प्रवाह सीमित क्यों होता है?
उत्तर: ऊर्जा प्रवाह के प्रत्येक सोपान में (पोषण स्तर पर), ऊर्जा का एक भाग ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में क्षय हो जाता है, जिससे अगले पोषण स्तर के लिए कम ऊर्जा उपलब्ध हो पाती है, इसलिए श्रृंखला में सोपानों की संख्या 4 से 5 तक सीमित हो जाती है।
6. सकल प्राथमिक उत्पादन (GPP) को परिभाषित करें।
उत्तर: सकल प्राथमिक उत्पादन (GPP) हरे पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से सौर ऊर्जा को कार्बनिक पदार्थ के रूप में अवशोषित और संग्रहित करने की वह दर है।
7. पारिस्थितिक पिरामिड कितने प्रकार के होते हैं? नाम लिखिए।
उत्तर: पारिस्थितिक पिरामिड तीन प्रकार के होते हैं:
 * संख्या पिरामिड (Number pyramid)
 * जीव द्रव्यमान पिरामिड (Biomass pyramid)
 * ऊर्जा पिरामिड (Energy pyramid)
8. जीवाणुओं द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण कैसे होता है?
उत्तर: सहजीवी बैक्टीरिया (जैसे: राइजोबियम दलहनी पौधों की ग्रंथिकाओं में) और मुक्तरूप से रहने वाले बैक्टीरिया (जैसे: नॉस्टॉक, एजेंटोबेक्टर) वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया में परिवर्तित करते हैं।
9. कार्बन चक्र में मानव गतिविधियों का मुख्य प्रभाव क्या है?
उत्तर: मानव गतिविधियाँ, विशेषकर जीवाश्म ईंधनों का उपभोग (उद्योग, मोटरवाहन) और वनोन्मूलन, वायुमंडल में \text{CO}_2 के सांद्रण में वृद्धि कर रही हैं, जो भूमंडलीय तापन का मुख्य कारण है।
10. खाद्य श्रृंखलाओं के अध्ययन का कोई एक महत्व बताइए।
उत्तर: यह पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह और पदार्थों के परिसंचरण (पोषकों के चक्रण) की व्याख्या करने में सहायक होता है।
3. लघु उत्तरात्मक प्रश्न और उत्तर (Short Answer Questions and Answers) (5)
1. पारितंत्र के जैविक घटकों (उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर: पारितंत्र के जैविक घटकों में तीन मुख्य वर्ग शामिल हैं:
 * उत्पादक (Producer): मुख्य रूप से हरे पौधे होते हैं जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा सौर ऊर्जा का उपयोग करके पूरे पारितंत्र के लिए भोजन (रासायनिक ऊर्जा) का निर्माण करते हैं। ये स्वपोषी कहलाते हैं।
 * उपभोक्ता (Consumer): ये विषमपोषी होते हैं जो भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्पादकों पर निर्भर होते हैं। इन्हें शाकाहारी, मांसाहारी और सर्वाहारी में वर्गीकृत किया जाता है।
 * अपघटक (Decomposer): ये मुख्य रूप से जीवाणु और कवक होते हैं, जिन्हें मृतपोषी भी कहते हैं। ये मृत पौधों और जन्तुओं के कार्बनिक पदार्थों को अपघटित करके पोषक तत्वों को पुनः मृदा में विमोचित करते हैं, जिससे पोषकों के चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2. खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में क्या अंतर है?
उत्तर:
| विशेषता | खाद्य श्रृंखला (Food Chain) | खाद्य जाल (Food Web) |

| संरचना | यह जीवधारियों का एक रैखिक क्रम है, जिसमें ऊर्जा एक पोषण स्तर से अगले में स्थानांतरित होती है (जैसे: घास \to टिड्डा \to मेंढक)। | यह एक दूसरे से संयोजित खाद्य श्रृंखलाओं का एक नेटवर्क है, जिसमें एक जीव विभिन्न खाद्य स्रोतों का उपयोग कर सकता है। |
| प्रवाह | ऊर्जा का प्रवाह एक ही दिशा में होता है (एकदिशिक)। | ऊर्जा प्रवाह जटिल और बहु-दिशात्मक होता है, जो अधिक यथार्थवादी मॉडल प्रस्तुत करता है। |
| स्थायित्व | कम स्थायित्व को दर्शाता है; एक कड़ी टूटने पर पूरा तंत्र प्रभावित होता है। | पारितंत्र की अधिक स्थिरता सुनिश्चित करता है, क्योंकि जीवों के पास वैकल्पिक खाद्य स्रोत होते हैं। |
3. ऊर्जा पिरामिड हमेशा सीधे (Upright) क्यों होते हैं?
उत्तर: ऊर्जा पिरामिड हमेशा सीधे (कभी उल्टे नहीं) होते हैं क्योंकि:
 * ऊर्जा का क्षय (Loss of Energy): लिन्डमेन के 10% नियम के अनुसार, जब ऊर्जा एक पोषण स्तर से अगले में स्थानांतरित होती है, तो उसका एक बड़ा भाग (लगभग 90%) श्वसन और उपापचय क्रियाओं में ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में नष्ट हो जाता है।
 * उपलब्धता में ह्रास: परिणामतः, उत्तरोत्तर पोषण स्तरों पर उपलब्ध ऊर्जा की मात्रा घटती जाती है। उत्पादकों (आधार) पर सबसे अधिक ऊर्जा होती है, और शीर्ष मांसाहारी (शीर्ष) पर सबसे कम। इस कारण आलेखीय निरूपण में आधार हमेशा सबसे चौड़ा और शीर्ष सबसे संकरा होता है, जिससे पिरामिड की आकृति सीधी बनी रहती है।
4. भूजैवरासायनिक चक्र (नाइट्रोजन चक्र) में नाइट्रीकरण और विनाइट्रीकरण को स्पष्ट करें।
उत्तर: नाइट्रोजन चक्र में ये दो विपरीत प्रक्रियाएँ हैं जो मृदा में नाइट्रोजन की उपलब्धता को नियंत्रित करती हैं:
 * नाइट्रीकरण (Nitrification): यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा अमोनिया (\text{NH}_3) या अमोनियम आयन (\text{NH}_4^+) पहले नाइट्रोसोमोनास जैसे जीवाणुओं द्वारा नाइट्राइट (\text{NO}_2^-) में और फिर नाइट्रोबेक्टर जैसे जीवाणुओं द्वारा नाइट्रेट (\text{NO}_3^-) में परिवर्तित कर दिया जाता है। नाइट्रेट वह रूप है जिसे पौधे आसानी से अवशोषित कर पाते हैं।
 * विनाइट्रीकरण (Denitrification): यह नाइट्रेट (\text{NO}_3^-) को वापस गैसीय नाइट्रोजन (\text{N}_2) में परिवर्तित करने की प्रक्रिया है, जो विनाइट्रीकरण जीवाणुओं (जैसे स्यूडोमोनास) द्वारा ऑक्सीजन-मुक्त माध्यम में की जाती है। इस प्रकार, यह नाइट्रोजन को वायुमंडल में वापस भेजकर मृदा से नाइट्रोजन हटाता है।
5. तालाब पारितंत्र में अजैविक घटकों की क्या भूमिका है?
उत्तर: तालाब पारितंत्र के अजैविक घटक (निर्जीव) इसकी कार्यप्रणाली के लिए मूलभूत हैं:
 * प्रकाश (Solar Energy): सौर विकिरण \to ऊर्जा का एकमात्र स्रोत है, जो उत्पादकों (पादप प्लवक) को प्रकाश संश्लेषण करने के लिए नियंत्रित करता है। प्रकाश की भेदन सीमा के आधार पर तालाब के क्षेत्र (सुप्रकाशित, अप्रकाशित) निर्धारित होते हैं।
 * अकार्बनिक पदार्थ: जल, \text{CO}_2, \text{O}_2, नाइट्रोजन, फास्फोरस आदि पोषक तत्वों की आपूर्ति करते हैं। घुली हुई \text{O}_2 जंतुओं के श्वसन के लिए आवश्यक है, और पोषक तत्व तली के अवसाद में तथा घुलनशील अवस्था में मौजूद रहते हैं।
 * कार्बनिक यौगिक: अमीनो अम्ल, ह्यूमिक अम्ल, और मृत पौधों-जन्तुओं के अपघटित उत्पाद जो पानी में घुले या निलंबित रहते हैं, अपघटकों के लिए खाद्य स्रोत का काम करते हैं और पोषकों के चक्रण में सहायक होते हैं।
4. निबंधात्मक प्रश्न और उत्तर (Essay Questions and Answers) (5)
1. पारितंत्र क्या है? इसके मुख्य घटकों (जैविक और अजैविक) का विस्तार से वर्णन कीजिए और उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
पारितंत्र की संकल्पना
पारितंत्र (Ecosystem) प्रकृति की एक क्रियात्मक इकाई है, जिसकी संकल्पना 1935 में ए.जी. टेन्सले द्वारा दी गई थी। यह जीवों के एक समुदाय और उनके भौतिक पर्यावरण के बीच होने वाली जटिल अन्योन्यक्रियाओं का एक तंत्र है। पारितंत्र में जैविक (सजीव) और अजैविक (निर्जीव) घटक एक साथ कार्य करते हैं, जिससे ऊर्जा का प्रवाह और पोषकों का चक्रण सुनिश्चित होता है।
पारितंत्र के मुख्य घटक
पारितंत्र के घटकों को दो प्रमुख समूहों में वर्गीकृत किया गया है:
1. अजैविक घटक (Abiotic Components - निर्जीव):
ये पारितंत्र के भौतिक और रासायनिक कारक हैं जो जीवों की वृद्धि और वितरण को सीमित व स्थिर बनाए रखते हैं। इन्हें तीन उप-वर्गों में बांटा गया है:
 * भौतिक कारक: ये सीधे ऊर्जा और पर्यावरण की स्थितियों को प्रभावित करते हैं।
   * उदाहरण: सूर्य का प्रकाश, तापमान, वर्षा, आर्द्रता, वायुमंडलीय दाब।
 * अकार्बनिक पदार्थ: ये जीवन के मूलभूत रासायनिक तत्त्व हैं।
   * उदाहरण: जल, ऑक्सीजन (\text{O}_2), कार्बन डाईऑक्साइड (\text{CO}_2), नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, सल्फर, मिट्टी तथा अन्य खनिज।
 * कार्बनिक पदार्थ: ये जैविक और अजैविक घटकों के बीच कड़ी का काम करते हैं, क्योंकि ये जीवित जीवों के अंश होते हैं पर स्वयं निर्जीव होते हैं।
   * उदाहरण: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड तथा ह्यूमिक पदार्थ।
2. जैविक घटक (Biotic Components - सजीव):
ये पारितंत्र के सभी सजीव जीव हैं, जो भोजन प्राप्त करने के तरीके के आधार पर तीन वर्गों में बंटे हैं:
 * उत्पादक (Producer):
   * भूमिका: हरे पौधे जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा (भोजन) में बदलते हैं। इन्हें स्वपोषी कहते हैं।
   * उदाहरण: घास, पेड़, पादप प्लवक (तालाब में)।
 * उपभोक्ता (Consumer):
   * भूमिका: ये भोजन के लिए उत्पादकों या अन्य उपभोक्ताओं पर निर्भर होते हैं। इन्हें विषमपोषी कहते हैं।
   * उदाहरण:
     * शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता): गाय, हिरन, टिड्डा।
     * मांसाहारी (द्वितीयक/तृतीयक उपभोक्ता): शेर, मेढक, कुत्ता।
     * सर्वाहारी: मानव, सुअर।
 * अपघटक (Decomposer):
   * भूमिका: ये मृतपोषी होते हैं जो मृत पौधों और जन्तुओं के जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में अपघटित करते हैं, जिससे पोषक तत्वों का पुनः चक्रण संभव हो पाता है।
   * उदाहरण: बैक्टीरिया (जीवाणु) और कवक।
उदाहरण
एक तालाब पारितंत्र में:
 * अजैविक घटक: पानी, तापमान, घुलित \text{O}_2 और \text{CO}_2, फास्फोरस लवण।
 * जैविक घटक:
   * उत्पादक: पादप प्लवक, जड़युक्त पादप (कमल, हाइड्रिला)।
   * उपभोक्ता: जंतु प्लवक, मछलियां, घोघा, मेढक।
   * अपघटक: वैक्टीरिया, कवक।
2. खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल की व्याख्या करते हुए, इनमें ऊर्जा प्रवाह के सिद्धांत (10% नियम) को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
खाद्य श्रृंखला (Food Chain)
खाद्य श्रृंखला विभिन्न जीवधारियों का एक क्रमवार अनुक्रम है जिसके माध्यम से हरित पादपों (उत्पादक) से ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है। यह एक रैखिक मार्ग है जहाँ एक जीव दूसरे जीव को खाता है और स्वयं भी खाया जाता है।
\text{घास (उत्पादक)} \to \text{टिड्डा (प्राथमिक उपभोक्ता)} \to \text{मेढक (द्वितीयक उपभोक्ता)} \to \text{सांप (तृतीयक उपभोक्ता)}
खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक सोपान को पोषण स्तर (Trophic Level) कहा जाता है।
खाद्य जाल (Food Web)
पारितंत्र में पोषण स्तर रैखिक नहीं होते, बल्कि वे एक दूसरे से जटिल रूप से संयोजित होते हैं। खाद्य जाल किसी पारितंत्र में एक दूसरे से संयोजित खाद्य श्रृंखलाओं का एक नेटवर्क है। यह ऊर्जा प्रवाह का एक अधिक यथार्थ मॉडल है, क्योंकि इसमें एक जीव एक से अधिक खाद्य श्रृंखलाओं का सदस्य हो सकता है (जैसे: मनुष्य सर्वाहारी है)। खाद्य जाल पारितंत्र को स्थायित्व प्रदान करता है, क्योंकि किसी एक खाद्य स्रोत की कमी होने पर जीव वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर हो सकते हैं।
ऊर्जा प्रवाह का 10% नियम (Lindeman's Efficiency)
किसी पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव रैखीय और एकदिशिक होता है। यह प्रवाह 10% के नियम पर आधारित है, जिसे 1942 में लिन्डमेन ने दिया था।
सिद्धांत:
 * यह नियम कहता है कि जब ऊर्जा एक पोषण स्तर से अगले पोषण स्तर में स्थानांतरित होती है, तो केवल लगभग 10% ऊर्जा ही अगले स्तर के लिए उपलब्ध हो पाती है।
 * शेष लगभग 90% ऊर्जा का ह्रास हो जाता है। यह ह्रास मुख्य रूप से निम्न कारणों से होता है:
   * श्वसन और उपापचय: प्रत्येक जीव (उत्पादक और उपभोक्ता) उपलब्ध ऊर्जा के एक भाग का उपयोग स्वयं के जीवन और उपापचय क्रियाओं (\text{R}) में करता है, जो ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है।
   * ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में क्षय: ऊर्जा का रूपांतरण कभी 100% कुशल नहीं होता, जिससे रूपांतरण पर ऊर्जा का एक भाग ऊष्मा के रूप में नष्ट होता है।
   * अनुपयोगी भाग (NU): जीव के कुछ भाग अगले पोषण स्तर द्वारा खाए नहीं जाते (जैसे: जड़ें, हड्डियाँ)।
उदाहरण:
यदि उत्पादक (P) 10,000 किलोकैलोरी ऊर्जा का उत्पादन करते हैं, तो:
\text{उत्पादक (10,000 kcal)} \to \text{शाकाहारी (1,000 kcal)} \to \text{प्राथमिक मांसाहारी (100 kcal)} \to \text{द्वितीयक मांसाहारी (10 kcal)}
इस नियम के कारण ही खाद्य श्रृंखला में पोषण स्तरों की संख्या सीमित (4-5) होती है, क्योंकि शीर्ष स्तर तक पहुंचने पर ऊर्जा बहुत कम हो जाती है।
3. नाइट्रोजन चक्र क्या है? नाइट्रोजन स्थिरीकरण, नाइट्रीकरण और विनाइट्रीकरण की प्रक्रियाओं को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)
नाइट्रोजन प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल (DNA, RNA) का अनिवार्य घटक है, जो सभी सजीव जीवों के लिए आवश्यक है। हमारे वायुमंडल में लगभग 79% नाइट्रोजन गैस (\text{N}_2) है, लेकिन अधिकांश जीव इसे सीधे उपयोग नहीं कर सकते। नाइट्रोजन चक्र वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा गैसीय नाइट्रोजन को विभिन्न जैविक और अजैविक गतिविधियों के माध्यम से उपयोग योग्य रूपों (अमोनिया, नाइट्रेट) में बदला जाता है, और फिर वापस गैसीय रूप में वायुमंडल में विमोचित किया जाता है।
नाइट्रोजन चक्र की मुख्य प्रक्रियाएँ
 * नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation):
   * प्रक्रिया: गैसीय वायुमंडलीय नाइट्रोजन (\text{N}_2) को उपयोग योग्य यौगिकों, मुख्य रूप से अमोनिया (\text{NH}_3) में परिवर्तित करना।
   * विधियाँ:
     * जैविक: राइजोबियम (सहजीवी), नॉस्टॉक (मुक्त-जीवी सायनोबैक्टीरिया) जैसे जीवाणुओं द्वारा।
     * वायुमंडलीय: बिजली के चमकने से उच्च ऊर्जा पर।
     * औद्योगिक: उच्च तापमान और दाब पर अमोनिया निर्माण।
 * नाइट्रीकरण (Nitrification):
   * प्रक्रिया: अमोनिया (\text{NH}_3) का नाइट्रोसोमोनास जैसे जीवाणुओं द्वारा पहले नाइट्राइट (\text{NO}_2^-) में, और फिर नाइट्रोबेक्टर जैसे जीवाणुओं द्वारा नाइट्रेट (\text{NO}_3^-) में ऑक्सीकरण। नाइट्रेट पौधों द्वारा अवशोषित होने वाला नाइट्रोजन का मुख्य रूप है।
 * स्वांगीकरण (Assimilation):
   * प्रक्रिया: पौधों द्वारा मृदा से नाइट्रेट और अमोनियम आयनों को अवशोषित करके, उन्हें कार्बनिक अणुओं जैसे प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल में बदलना, जो जीवों के ऊतकों का निर्माण करते हैं।
 * अमोनीकरण (Ammonification):
   * प्रक्रिया: जीवों के मृत अवशेषों और उत्सर्जित अपशिष्ट पदार्थों (यूरिया, यूरिक अम्ल) का अपघटक बैक्टीरिया द्वारा वापस अकार्बनिक अमोनिया में परिवर्तन।
 * विनाइट्रीकरण (Denitrification):
   * प्रक्रिया: विनाइट्रीकरण जीवाणुओं (जैसे स्यूडोमोनास) द्वारा नाइट्रेट (\text{NO}_3^-) को पुनः गैसीय नाइट्रोजन (\text{N}_2) में परिवर्तित करके वायुमंडल में विमोचन करना। यह नाइट्रीकरण की विपरीत प्रक्रिया है और \text{O}_2-मुक्त माध्यम में होती है।
यह चक्र जीवन को बनाए रखने के लिए नाइट्रोजन की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
4. समस्थापन (Homeostasis) क्या है? पारितंत्र में इसकी भूमिका को तालाब के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समस्थापन (Homeostasis) की परिभाषा
समस्थापन वह प्रक्रिया या क्षमता है जिसके द्वारा कोई तंत्र (पारितंत्र या जीव निकाय) अपनी आंतरिक साम्यावस्था को बनाए रखने के लिए बाहरी या आंतरिक परिवर्तनों का विरोध करता है। पारिस्थितिकी में, यह पारितंत्र की वह प्रवृत्ति है जिसके कारण यह अपनी प्रजातीय संरचना और कार्यात्मक प्रक्रियाओं का आत्म-नियमन कर सकता है, जिससे तंत्र में एक प्रकार का स्थायित्व बना रहता है। इस प्रक्रिया के लिए नकारात्मक पुनर्भरण प्रणाली (Negative Feedback Mechanism) उत्तरदायी होती है।
पारितंत्र में समस्थापन की भूमिका (तालाब के उदाहरण से)
तालाब का पारितंत्र एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो समस्थापन की प्रक्रिया को दर्शाता है।
 * असंतुलन की शुरुआत: मान लीजिए, किसी कारणवश तालाब में जंतुप्लवकों (Zooplanktons) की जनसंख्या बढ़ जाती है।
 * पुनर्भरण क्रिया (Negative Feedback):
   * बढ़े हुए जंतुप्लवक अब अधिक संख्या में पादपप्लवकों (Phytoplanktons) (उत्पादक, उनका भोजन) का उपभोग करना शुरू कर देंगे।
   * परिणामस्वरूप: तालाब में पादपप्लवकों की जनसंख्या में कमी आ जाएगी, क्योंकि उनकी खपत उत्पादन दर से अधिक हो जाएगी।
 * संतुलन की ओर बढ़ना:
   * पादपप्लवकों की कमी के कारण, जंतुप्लवकों के लिए भोजन की आपूर्ति कम हो जाएगी, जिससे भुखमरी के कारण जंतुप्लवकों की जनसंख्या घटने लगेगी।
 * नया संतुलन (साम्यावस्था):
   * जंतुप्लवकों की संख्या घटने से पादपप्लवकों का उपभोग कम हो जाएगा।
   * परिणामस्वरूप: पादपप्लवकों की जनसंख्या में फिर से बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी।
   * कुछ समय पश्चात, पादपप्लवकों की उपलब्धता बढ़ने से जंतुप्लवकों की जनसंख्या भी फिर से बढ़ जाएगी, और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी, जिससे तालाब का जैविक समुदाय एक गतिक साम्यावस्था (Dynamic Equilibrium) में बना रहेगा।
इस प्रकार, समस्थापन किसी भी अति-परिवर्तन को रोककर पारितंत्र की कार्यप्रणाली और संरचना को बनाए रखता है। हालांकि, यह क्षमता असीमित नहीं होती, और मनुष्य पारितंत्रों में असंतुलन का सबसे बड़ा स्रोत है।
5. कार्बन चक्र की व्याख्या कीजिए और इसमें प्रकाश संश्लेषण, श्वसन और अपघटन की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कार्बन चक्र (Carbon Cycle)
कार्बन सभी जीवित पदार्थों का मूलभूत अंग है और यह वायुमंडल, जलमंडल तथा स्थलमंडल के बीच लगातार चक्रित होता रहता है। कार्बन चक्र वह जैव-भू-रासायनिक चक्र है जो कार्बन के विभिन्न रूपों (जैसे: \text{CO}_2, कार्बनिक यौगिक, जीवाश्म ईंधन) के भंडार और उनके परिसंचरण की व्याख्या करता है। वायुमंडल में उपस्थित \text{CO}_2 सभी कार्बनिक पदार्थों का स्रोत है।
कार्बन चक्र की मुख्य प्रक्रियाएँ और भूमिकाएँ
 * प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) - \text{CO}_2 का स्थिरीकरण (Fixation):
   * भूमिका: हरे पौधे और कुछ शैवाल सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायुमंडलीय \text{CO}_2 और जल का उपयोग करके अजैविक कार्बन को कार्बनिक पदार्थ (भोजन) में परिवर्तित करते हैं और \text{O}_2 को विमोचित करते हैं।
   * महत्व: यह वायुमंडल से \text{CO}_2 को हटाकर उसे जीवित जीव संहति (Biomass) में संग्रहित करता है, जो उपभोक्ताओं (शाकाहारी, मांसाहारी) के लिए भोजन का प्राथमिक स्रोत बनता है। वन \text{CO}_2 के विशाल भंडार के रूप में कार्य करते हैं।
 * श्वसन (Respiration) - \text{CO}_2 का विमोचन (Release):
   * भूमिका: यह एक उपापचयी क्रिया है जो सभी जीवधारियों (पौधों, जन्तुओं, अपघटकों) में होती है। इसमें भोजन (कार्बनिक यौगिक) का ऑक्सीकरण किया जाता है, जिससे ऊर्जा मुक्त होती है और कार्बन डाईऑक्साइड (\text{CO}_2) तथा जल मुक्त होते हैं।
   * महत्व: श्वसन \text{CO}_2 को वापस वायुमंडल में विमोचित करके कार्बन चक्र को पूरा करता है।
 * अपघटन (Decomposition) - \text{CO}_2 का पुनर्चक्रण:
   * भूमिका: जब पौधे और जन्तु मर जाते हैं, तो उनके मृत कार्बनिक पदार्थों को सूक्ष्मजीवों (अपघटकों) द्वारा अपघटित किया जाता है।
   * महत्व: अपघटन की प्रक्रिया के दौरान, कार्बनिक पदार्थ सरल यौगिकों में टूटते हैं और \text{CO}_2 श्वसन के माध्यम से वायुमंडल में विमोचित हो जाती है। यह पोषकों (कार्बन) के पुनर्चक्रण में निर्णायक भूमिका निभाता है।
 * दहन (Combustion):
   * जीव संहति (जैसे लकड़ी) या जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) के जलने पर भी बड़ी मात्रा में \text{CO}_2 वायुमंडल में विमोचित होती है।
इन प्रक्रियाओं के माध्यम से, कार्बन लगातार वायुमंडल, जीवमंडल और भूमंडल के बीच गमन करता रहता है।

Post a Comment

0 Comments