कक्षा दसवीं हिंदी भारत की ये बहादुर बेटियाँ' पाठ के प्रश्न उत्तर

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​30 प्रश्न-उत्तर (वन लाइन - एक वाक्य में उत्तर)

  1. 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवताः' का क्या अर्थ है? उत्तर: जहाँ नारी का सम्मान होता है वहाँ देवताओं का निवास होता है।
  2. ​प्राचीनकाल की चार प्रसिद्ध विदुषी नारियों के नाम क्या हैं? उत्तर: गार्गी, मैत्रेयी, गौतमी, अपाला
  3. ​आज के समय में महिलाएँ किन क्षेत्रों में काम करती नज़र आती हैं? उत्तर: शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार, तकनीक, अंतरिक्ष और पुलिस-प्रशासन।
  4. ​महिलाओं ने पुरुषों की अपेक्षा अधिक क्या सिद्ध किया है? उत्तर: वे अधिक क्रियाशील, ईमानदार तथा कुशल प्रशासक हैं।
  5. ​फिल्म-संगीत के क्षेत्र में किस महिला का नाम लिया गया है? उत्तर: लता मंगेशकर
  6. ​ओलंपिक स्पर्धाओं के संदर्भ में किन तीन महिलाओं को याद किया गया है? उत्तर: पी.टी. उषा, कर्णम मल्लेश्वरी और सुनीता रानी
  7. ​सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्र में किन महिलाओं को याद किया गया है? उत्तर: सरोजिनी नायडू और अरुणा आसफ अली
  8. ​गरीबों और कुष्ठ रोगियों की सेवा के द्वारा किसने संत की उपाधि पाई? उत्तर: मदर टेरेसा
  9. ​आधुनिक महिलाओं में अंतरिक्ष विज्ञान तथा खेल से जुड़े दो प्रमुख नाम कौन से हैं? उत्तर: कल्पना चावला और बछेंद्री पाल
  10. ​कल्पना चावला का जन्म किस शहर में हुआ था? उत्तर: करनाल, हरियाणा।
  11. ​कल्पना चावला के पिता का नाम क्या था? उत्तर: बनवारी लाल (एक साधारण व्यापारी)।
  12. ​कल्पना की माँ का नाम क्या था? उत्तर: संयोगिता (एक सामान्य गृहिणी)।
  13. ​कल्पना ने 11वीं कक्षा की परियोजना में क्या दर्शाया? उत्तर: मंगल ग्रह
  14. ​कल्पना ने किस कॉलेज से एअरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली? उत्तर: चंडीगढ़ के पंजाब इन्जीनियरिंग कॉलेज से।
  15. ​कल्पना किस वर्ष इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त कर अमेरिका चली गईं? उत्तर: 1982 में।
  16. ​कल्पना ने टेक्सास विश्वविद्यालय से किस विषय में एम.एस. की डिग्री ली? उत्तर: एअरोस्पेस इन्जीनियरिंग में।
  17. ​कल्पना ने कोलराडो विश्वविद्यालय से किस विषय में पी-एच.डी. की डिग्री प्राप्त की? उत्तर: एअरोस्पेस में।
  18. ​कोलंबिया मिशन के लिए कल्पना को क्या बनाया गया था? उत्तर: उस मिशन का विशेषज्ञ
  19. ​कल्पना चावला पहली बार अंतरिक्ष की यात्रा पर कब निकलीं? उत्तर: 19 नवंबर को (1997)।
  20. ​कल्पना जब पहली बार अंतरिक्ष में थीं, तब भारत के प्रधानमंत्री कौन थे? उत्तर: श्री इंद्र कुमार गुजराल
  21. ​कल्पना चावला दूसरी बार अंतरिक्ष की यात्रा पर कब निकलीं? उत्तर: 16 जनवरी, 2003 को।
  22. ​कोलंबिया यान भयानक विस्फोट के साथ कब नष्ट हुआ? उत्तर: 1 फरवरी, 2003 को।
  23. ​कल्पना की स्मृति में किस अंतरिक्ष यान का नाम 'कल्पना' रखा गया? उत्तर: मेट सेट
  24. ​बछेंद्री पाल किस चीज़ की पर्याय हैं? उत्तर: साहस की।
  25. ​बछेंद्री पाल को कौन सा गौरव प्राप्त है? उत्तर: एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला होने का।
  26. ​बछेंद्री पाल का जन्म किस जिले में हुआ था? उत्तर: चमोली जिले में।
  27. ​बछेंद्री पाल ने पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए कौन सा काम सीखा? उत्तर: सिलाई का काम।
  28. ​बछेंद्री पाल एवरेस्ट पर किस तारीख और समय पहुँचीं? उत्तर: 23 मई, 1984 को दोपहर 1 बजकर 7 मिनट पर।
  29. ​बछेंद्री पाल के साथ एवरेस्ट पर कौन से पर्वतारोही थे? उत्तर: अंग दोरजी
  30. ​'भारत की ये बहादुर बेटियाँ' पाठ को किस साहित्यिक विधा का अंश बताया गया है? उत्तर: व्यक्तित्व संबंधी या 'पर्सनैलिटी फीचर'

​20 प्रश्न-उत्तर (अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न-उत्तर)

  1. ​प्राचीनकाल में नारी को किस प्रकार का सदस्य माना जाता था? उत्तर: प्राचीनकाल में नारी बहुत ही सम्माननीय सदस्य थी और समाज के निर्माण कार्यों में अपना योगदान देती थी।
  2. ​महिलाएँ किस आधार पर यह बात सिद्ध कर रही हैं कि वे पुरुषों से कम नहीं हैं? उत्तर: महिलाएँ अपनी क्षमता, साहस और बुद्धिमत्ता के बल पर यह बात सिद्ध कर रही हैं, न कि किसी दया-भावना के कारण।
  3. ​महिलाओं ने किस प्रकार के अभाव को अपनी क्षमता के आगे बौना साबित कर दिया है? उत्तर: साधारण, मध्यम या बिल्कुल निर्धन परिवार में पली-बढ़ी होने पर भी उन्होंने कोई भी अभाव अपनी क्षमता के आगे बौना साबित कर दिया है।
  4. ​अमेरिका और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देशों की तुलना में भारत की महिलाएँ किन क्षेत्रों में आगे हैं? उत्तर: भारत की महिलाएँ चिकित्सा और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में पुरुषों से कहीं आगे हैं।
  5. ​कल्पना चावला और बछेंद्री पाल भारतीय महिला की किन बातों की प्रतीक बन चुकी हैं? उत्तर: वे अदम्य साहस, बुद्धि कौशल और निष्ठा की प्रतीक बन चुकी हैं।
  6. ​कल्पना चावला के माता-पिता उन्हें क्या बनाना चाहते थे और कल्पना की शुरू से किसमें रुचि थी? उत्तर: पिता उसे चिकित्सक या शिक्षिका बनाना चाहते थे, लेकिन कल्पना के मन में शुरू से ही अंतरिक्ष-विज्ञान के प्रति लगाव रहा।
  7. ​परिवार वालों के विरोध के बावजूद कल्पना ने एअरोनॉटिकल इंजीनियरिंग क्यों चुना? उत्तर: क्योंकि उनके मन में अंतरिक्ष की यात्राओं के सपने थे और वह लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करके साहस के साथ आगे बढ़ती रही थीं।
  8. ​कल्पना चावला ने अमेरिका जाकर अपनी शिक्षा में कौन सी दो मुख्य डिग्रियाँ प्राप्त कीं? उत्तर: उन्होंने टेक्सास विश्वविद्यालय से एअरोस्पेस इन्जीनियरिंग में एम.एस. की डिग्री और कोलराडो विश्वविद्यालय से एअरोस्पेस में पी-एच.डी. की डिग्री प्राप्त की।
  9. ​कल्पना की पहली अंतरिक्ष यात्रा के सफल होने के दो प्रमाण क्या थे? उत्तर: तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री इंद्र कुमार गुजराल ने उनसे बात कर उन्हें बधाई दी, और उन्होंने इस अभियान के दौरान कई नए प्रयोग कर अपनी योग्यता का लोहा मनवाया।
  10. ​कोलंबिया यान के दूसरे अभियान में किए गए दो प्रमुख प्रयोगों का उल्लेख कीजिए। उत्तर: इस अभियान में मानव-शरीर और कैंसर कोशिकाओं की परीक्षा तथा कीट-पतंगों पर भारहीनता संबंधी प्रयोग शामिल थे।
  11. ​कल्पना चावला की दुखद मृत्यु से पूरी दुनिया पर क्या असर पड़ा? उत्तर: कल्पना के इस दुर्भाग्यपूर्ण अंत से पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई
  12. ​कल्पना चावला ने अपने अदम्य साहस से क्या कर दिखाया? उत्तर: उन्होंने न सिर्फ महिला जाति का नाम ऊँचा किया, बल्कि पूरे देश का नाम भी इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अंकित कर दिया।
  13. ​बछेंद्री पाल के भाई द्वारा उन्हें मना करने से उन पर क्या प्रभाव पड़ा? उत्तर: इससे बछेंद्री का मनोबल और बढ़ा और पहाड़ पर चढ़ने की इच्छा दृढ़ होती गई।
  14. ​आठवीं पास करने के बाद बछेंद्री पाल ने अपनी आगे की पढ़ाई कैसे जारी रखी? उत्तर: पिता द्वारा खर्च उठाने से मना करने पर उन्होंने सिलाई का काम सीखा और सिलाई करके ही पढ़ाई का खर्च जुटाया।
  15. ​पर्वतारोहण प्रशिक्षण के दौरान बछेंद्री पाल को किस बात से मदद मिली? उत्तर: बचपन में रोज 5 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाने का उनका कठोर परिश्रम पर्वतारोहण प्रशिक्षण के दौरान बहुत काम आया।
  16. ​हिमालय पर्वतारोहियों के सम्मेलन में बछेंद्री पाल ने क्या संकल्प किया? उत्तर: उन्होंने तेनजिंग नोर्गे और जुंके ताबी से मिलकर संकल्प किया कि वह भी उनकी ही तरह एवरेस्ट पर पहुँचेंगी
  17. ​भारतीय महिलाओं ने अपनी अलग पहचान कैसे बनाई है? उत्तर: उन्होंने अदम्य साहस और आत्मविश्वास के बल पर बहुत साधनों के न होते हुए भी कठिनाइयों के सामने घुटने न टेककर पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।
  18. ​फीचर में 'क्या हुआ?' के अलावा और क्या बताया जाता है? उत्तर: फीचर में जो कुछ हुआ, वह 'क्यों और कैसे हुआ' और 'इसका परिणाम क्या होगा' यह बताया जाता है।
  19. ​फीचर को 'समाचारात्मक निबंध' की संज्ञा क्यों दी जाती है? उत्तर: क्योंकि यह पत्रकारिता जगत की महत्त्वपूर्ण विधा है, जिसमें समसामयिक पकड़ को प्रधानता दी जाती है।
  20. ​फीचर की भाषा और शैली कैसी होती है? उत्तर: इसकी भाषा सहज, सरल और सभी को समझ में आने वाली होती है, और इसकी शैली मनोरंजक होती है।

​10 प्रश्न-उत्तर (लघु उत्तरात्मक प्रश्न-उत्तर)

  1. 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवताः' इस कथन का निहितार्थ क्या है? उत्तर: इस कथन का अर्थ है कि जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ सुख-समृद्धि और शांति होती है। यह बात प्राचीन मनुस्मृति में अनुभव से कही गई थी। इसका उद्देश्य नारी को बढ़ावा देना था, क्योंकि प्राचीनकाल में नारी समाज की सम्माननीय सदस्य थी और पुरुषों के बराबर बैठती थी। यह दर्शाता है कि नारी के सम्मान और देश की खुशहाली का सीधा संबंध है।
  2. ​वर्तमान समाज में महिलाएँ किन क्षेत्रों में अपनी क्षमता और बुद्धिमत्ता सिद्ध कर रही हैं? उत्तर: महिलाएँ आज हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध कर रही हैं। वे शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार और तकनीक जैसे सभी क्षेत्रों में काम करती नज़र आती हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने एवरेस्ट, अंतरिक्ष यान की यात्रा, पुलिस-प्रशासन, हवाई जहाज और रेल इंजन चलाने**** जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सफलता अर्जित की है। उन्होंने यह भी सिद्ध किया है कि वे पुरुषों की अपेक्षा अधिक क्रियाशील, ईमानदार तथा कुशल प्रशासक हैं।
  3. ​कल्पना चावला ने एअरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के लिए किस प्रकार विरोध का सामना किया? उत्तर: कल्पना के मन में शुरू से ही अंतरिक्ष-विज्ञान के प्रति लगाव था, जबकि उनके परिवार वाले शायद डॉक्टर या शिक्षिका बनाना चाहते थे। उन्होंने परिवार के लाख मना करने के बावजूद चंडीगढ़ के पंजाब इन्जीनियरिंग कॉलेज में एअरोनॉटिकल इन्जीनियरिंग को अपना विषय चुना। इस चुनाव पर उनके सहपाठियों ने उनका मज़ाक उड़ाया, पर उन्होंने किसी की परवाह नहीं की और साहस के साथ आगे बढ़ती रहीं।
  4. ​कल्पना चावला के अंतरिक्ष अभियान की असफलता के दुखद अंत पर भारतीय प्रतिक्रिया क्या थी? उत्तर: 1 फरवरी, 2003 को कोलंबिया यान के भयानक विस्फोट से कल्पना की मृत्यु के बाद पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई। भारतीय प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी ने संसद में कल्पना के प्रति श्रद्धांजलियाँ व्यक्त कीं। उन्होंने घोषणा की कि अदम्य साहस और कर्त्तव्य-निष्ठा की प्रतीक कल्पना की स्मृति में भारतीय अंतरिक्ष यान 'मेट सेट' का नाम 'कल्पना' रखा जाएगा, जिससे देश ने उन्हें अमर श्रद्धांजलि दी।
  5. ​बछेंद्री पाल ने अपनी पढ़ाई और पर्वतारोहण के लक्ष्य को एक साथ कैसे साधा? उत्तर: बछेंद्री पाल को बचपन में भाई द्वारा पहाड़ों पर जाने से मना किए जाने पर उनका पर्वतारोहण का संकल्प दृढ़ हो गया। आठवीं पास करने के बाद जब पिता ने पढ़ाई का खर्च देने से मना किया, तो उन्होंने सिलाई का काम सीखा और उसी से अपनी संस्कृत से एम.ए. और बी.एड. की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान भी उन्होंने पर्वतारोहण के लक्ष्य को नहीं छोड़ा और कालानाग, गंगोत्री ग्लेशियर आदि की चढ़ाई करके अपने आत्मविश्वास को बढ़ाया, जिससे दोनों लक्ष्य साथ-साथ सधते रहे।
  6. ​बछेंद्री पाल के पर्वतारोहण का संकल्प दृढ़ होने के पीछे क्या मुख्य कारण था? उत्तर: बछेंद्री पाल के पर्वतारोहण के संकल्प के दृढ़ होने का मुख्य कारण परंपरागत पुरुष-वर्चस्व वाले समाज में एक लड़की होने के कारण उनकी उपेक्षा थी। जब उनके बड़े भाई पहाड़ों पर जाते थे और बछेंद्री को डाँट कर मना कर दिया जाता था, तो उनके मन में यह निश्चय दृढ़ हो गया कि वे भी वही करेंगी जो लड़के करते हैं, बल्कि उनसे बेहतर ही कर दिखाएंगी। इसी जज़्बे ने उन्हें पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया।
  7. ​बछेंद्री पाल को एवरेस्ट पर पहुँचकर कैसा गौरव प्राप्त हुआ? उत्तर: बछेंद्री पाल एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 23 मई, 1984 को दोपहर 1 बजकर 7 मिनट पर उन्होंने पर्वतारोही अंग दोरजी के साथ एवरेस्ट पर पहुँचकर भारत का झंडा फहराया। इस उपलब्धि से उन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया कि अदम्य साहस और आत्मविश्वास के बल पर भारतीय महिलाओं ने पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
  8. ​फीचर की विशेषताएँ क्या हैं और यह पाठ 'भारत की ये बहादुर बेटियाँ' किस प्रकार का फीचर है? उत्तर: फीचर पत्रकारिता की महत्त्वपूर्ण विधा है जो रोचक और मनोरंजक शैली में लिखा जाता है। इसकी भाषा सहज, सरल और सभी को समझ में आने वाली होती है। इसकी विशेषता है कि यह 'क्या हुआ?' के साथ-साथ 'क्यों और कैसे हुआ' और उसके 'परिणाम' की भी व्याख्या करता है, जिससे यह पाठक के लिए शिक्षक और पथ-प्रदर्शक का काम करता है। 'भारत की ये बहादुर बेटियाँ' अंश दो प्रमुख व्यक्तित्वों (कल्पना चावला और बछेंद्री पाल) के जीवन पर केंद्रित होने के कारण व्यक्तित्व संबंधी या 'पर्सनैलिटी फीचर' है।
  9. ​फीचर में किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया जाता है? उदाहरण सहित समझाइए। उत्तर: फीचर में प्रसंगानुसार शब्दों का चयन किया जाता है। इसकी भाषा सहज और सरल होती है, लेकिन इसमें अन्य भाषाओं के शब्द भी प्रयोग किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, पाठ में इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं जैसे 'मैकेनिकल', 'कैमिकल' या 'एअरोनॉटिकल' जैसे अंग्रेजी के शब्दों को ज्यों का त्यों ले लिया गया है, ताकि तकनीकी संदर्भ को स्पष्ट किया जा सके। यह शैली की सहजता बनाए रखने के लिए किया जाता है।
  10. ​महिलाओं की सफलता को पाठ में 'साहस और आत्मविश्वास' का परिणाम क्यों कहा गया है? उत्तर: महिलाओं की सफलता को साहस और आत्मविश्वास का परिणाम इसलिए कहा गया है क्योंकि कल्पना चावला और बछेंद्री पाल जैसी महिलाओं का जन्म साधारण परिवारों में हुआ था और उन्हें अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ने के लिए परिवार और समाज के कठोर विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने कम साधनों और अभावों के बीच भी अपने साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति से दुनिया के सबसे कठिन क्षेत्रों (अंतरिक्ष और एवरेस्ट) में सफलता प्राप्त की, जिससे सिद्ध होता है कि आत्मविश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति थी।

​5 प्रश्न-उत्तर (निबंधात्मक प्रश्न-उत्तर)

  1. 'भारत की ये बहादुर बेटियाँ' पाठ के आधार पर कल्पना चावला के जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों का विस्तार से वर्णन कीजिए। उत्तर: कल्पना चावला का जन्म 1961 में हरियाणा के करनाल में एक साधारण व्यापारी परिवार में हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि वह चिकित्सक या शिक्षिका बनें, लेकिन 11वीं कक्षा में अमेरिकी अंतरिक्ष यान 'वाइकिंग' को मंगल ग्रह पर उतरते देखकर उनका मन अंतरिक्ष-विज्ञान के प्रति रोमांचित हो उठा।
    • संघर्ष: परिवार के कठोर विरोध के बावजूद उन्होंने चंडीगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज से एअरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को चुना, जहाँ सहपाठियों ने उनका मज़ाक उड़ाया। 1982 में डिग्री लेकर वह अमेरिका चली गईं और टेक्सासकोलराडो विश्वविद्यालय से एअरोस्पेस में एम.एस. और पी-एच.डी. की डिग्री ली। उन्होंने विरोध और प्रतिकार पर ध्यान न देकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।
    • उपलब्धियाँ: 19 नवंबर को उन्होंने पहली बार अंतरिक्ष की यात्रा की और कोलंबिया मिशन की विशेषज्ञ बनीं। 16 जनवरी, 2003 को वह दूसरी बार अंतरिक्ष की यात्रा पर निकलीं, जहाँ 16 दिन के सफल अभियान में 80 प्रयोग किए गए। उनका दुर्भाग्यपूर्ण अंत 1 फरवरी, 2003 को पृथ्वी पर लौटते समय हुआ। उनके अदम्य साहस, दृढ़ इच्छा शक्ति और कर्त्तव्य-निष्ठा के कारण प्रधानमंत्री वाजपेयी ने 'मेट सेट' का नाम उनकी स्मृति में 'कल्पना' रखने की घोषणा की। कल्पना ने भारत का नाम इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अंकित कर दिया।
  1. बछेंद्री पाल किस प्रकार भारतीय महिला के अदम्य साहस और स्वावलंबन की प्रतीक हैं? उनके जीवन के उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए। उत्तर: बछेंद्री पाल एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला हैं, और उनका जीवन स्वावलंबन और अदम्य साहस का उत्कृष्ट उदाहरण है:
    • साहस का दृढ़ संकल्प: उनका जन्म एक पुरुष-वर्चस्व वाले साधारण परिवार में हुआ। भाई द्वारा पहाड़ों पर जाने से डाँट कर मना किए जाने पर उनका मनोबल बढ़ा और उन्होंने निश्चय किया कि वे लड़कों से बेहतर ही कर दिखाएंगी। यह संकल्प ही उनके पर्वतारोहण प्रशिक्षण का आधार बना।
    • स्वावलंबन से शिक्षा: आठवीं पास करने के बाद जब पिता ने पढ़ाई का खर्च उठाने से मना किया, तो उन्होंने किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। उन्होंने सिलाई का काम सीखा और उसी से अपनी एम.ए. तथा बी.एड. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। यह उनकी स्वावलंबन की भावना को दर्शाता है।
    • अंतिम उपलब्धि: 23 मई, 1984 को उन्होंने पर्वतारोही अंग दोरजी के साथ एवरेस्ट पर भारत का झंडा फहराया। उन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया कि व्यक्ति में आत्मविश्वास, लगन और इच्छाशक्ति हो, तो अभाव या अन्य कोई भी कठिनाई उसका मार्ग नहीं रोक सकती। बछेंद्री पाल का जीवन भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
  1. ​महिलाओं ने किन तर्कों और उदाहरणों से यह सिद्ध किया है कि वे पुरुषों से कम नहीं, बल्कि कई मायनों में अधिक कुशल हैं? पाठ के आधार पर व्याख्या कीजिए। उत्तर: पाठ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि महिलाओं ने यह बात दया-भावना से नहीं, बल्कि सिद्ध कर दिखाई है:
    • सर्वव्यापी भागीदारी: आज ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहाँ महिलाओं की भागीदारी न हो—चाहे वह शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार या तकनीक हो। उन्होंने एवरेस्ट, अंतरिक्ष यान की यात्रा, पुलिस-प्रशासन, हवाई जहाज़ उड़ाने और रेल इंजन चलाने जैसे हर काम में पुरुषों के साथ अपनी जगह बनाई है।
    • कुशल प्रशासक: उन्होंने पूरी दुनिया में यह सिद्ध कर दिखाया है कि वे पुरुषों की अपेक्षा अधिक क्रियाशील, ईमानदार तथा कुशल प्रशासक होती हैं।
    • अभाव पर विजय: चाहे वे साधारण, मध्यम या निर्धन परिवार से हों, कोई भी अभाव उनकी क्षमता के आगे बौना साबित होता है।
    • अंतर्राष्ट्रीय श्रेष्ठता: अमेरिका और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देशों की तुलना में भी भारत की महिलाएँ चिकित्सा और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में पुरुषों से कहीं आगे हैं। कल्पना चावला और बछेंद्री पाल जैसी महिलाओं के उदाहरण यह सिद्ध करते हैं कि साहस और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी बाधा पार की जा सकती है, जिससे उनका लोहा पूरे विश्व ने माना है।
  1. ​पाठ के अनुसार, फीचर क्या है और यह समाचारों से किस प्रकार भिन्न तथा महत्त्वपूर्ण है? उत्तर:
    • फीचर की परिभाषा: फीचर पत्रकारिता जगत की एक महत्त्वपूर्ण विधा है जिसे 'समाचारात्मक निबंध' भी कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य घटना को सरल, मनोरंजक शैली में इस प्रकार प्रस्तुत करना है कि वह रोचक हो।
    • समाचार से भिन्नता:
      • समाचार: केवल यह जानकारी देता है कि 'क्या हुआ?' (जैसे: कल्पना चावला ने अंतरिक्ष में उड़ान भरी)।
      • फीचर: केवल 'क्या हुआ?' से आगे बढ़कर यह बताता है कि घटना 'क्यों और कैसे हुई' और 'इसका परिणाम क्या होगा'
    • महत्त्व: फीचर में घटनाओं को हमारी आँखों के आगे उतार दिया जाता है और कानों में आवाज़ गूँजा दी जाती है। यह हमें शिक्षित करता है और हमारा मनोरंजन करता है। इसकी भाषा सहज, सरल और प्रसंगानुसार शब्दों से युक्त होती है। विषय की प्रस्तुति इसे शक्ति देती है और यह पाठक के लिए शिक्षक, पथ-प्रदर्शक का काम करता है। यह व्यक्तित्व संबंधी, गंभीर विश्लेषणात्मक या मनोरंजक प्रकार का हो सकता है।
  1. आत्मविश्वास, लगन, साहस और इच्छाशक्ति किसी भी व्यक्ति के लिए क्यों आवश्यक हैं? कल्पना चावला और बछेंद्री पाल के जीवन से प्रमाण प्रस्तुत कीजिए। उत्तर: आत्मविश्वास, लगन, साहस और इच्छाशक्ति किसी भी व्यक्ति के लिए आवश्यक हैं क्योंकि ये गुण व्यक्ति को कठिनाइयों के सामने घुटने न टेकने और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम बनाते हैं।
    • कल्पना चावला: उनके पास साहस और आत्मविश्वास था, जिसके बल पर उन्होंने एअरोनॉटिकल इंजीनियरिंग चुनने पर सहपाठियों के मज़ाक और परिवार के कठोर विरोध पर ध्यान नहीं दिया। उनकी लगन और इच्छाशक्ति ही थी जो उन्हें भारत से अमेरिका ले गई और अंततः अंतरिक्ष यात्रा के सपने को साकार किया, जिससे उन्होंने महिला जाति का गौरव बढ़ाया।
    • बछेंद्री पाल: उनके पास अदम्य साहस था, जिसने उन्हें भाई के तिरस्कार और पिता द्वारा पढ़ाई का खर्च न देने जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानने दी। उन्होंने स्वावलंबन से शिक्षा पूरी की और अपनी इच्छाशक्ति से एवरेस्ट जैसे सर्वोच्च शिखर को फतह किया। इन बहादुर बेटियों ने यह सिद्ध कर दिखाया कि यदि व्यक्ति में ये गुण हों, तो अभाव या कोई भी कठिनाई उनकी क्षमता के आगे बौनी हो जाती है और वह दुनिया में अपनी अलग पहचान बना लेता है।

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