* लघुप्राण शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
* गिलहरी (गिल्लू)
* लेखिका गिल्लू को अपने कमरे में क्यों लाई?
* उसका जीवन बचाने के लिए
* लेखिका ने खिड़की की जाली का एक कोना क्यों खोल दिया?
* गिल्लू को आज़ादी से अंदर-बाहर आने-जाने देने के लिए
* गिल्लू की पसंद का खाना क्या था?
* काजू
* जब लेखिका अस्वस्थ थीं तो गिल्लू क्या करता था?
* वह उनके सिर और बालों को हौले-हौले सहलाता था
* गर्मियों में गिल्लू कहाँ लेटता था?
* लेखिका के पास रखी सुराही पर
* गिलहरियों का जीवन काल कितने वर्ष का होता है?
* लगभग दो वर्ष
* लेखिका को किसकी याद में सोनजुही की कली देखकर दुःख हुआ?
* गिल्लू की
* गिल्लू के नए घर के लिए लेखिका ने क्या बनाया?
* फूल रखने की एक हल्की डलिया में रुई बिछाकर
* गिल्लू ने लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए क्या उपाय खोजा?
* पैर तक आकर सर्र से परदे पर चढ़ जाना और फिर उसी तेज़ी से उतरना
* गिल्लू की आँखों की तुलना किससे की गई है?
* काँच के मनकों से
* लेखिका को कौवे कैसे लगे?
* अनादरित और सम्मानित दोनों
* 'काकभुशुंडि' किसे कहा गया है?
* कौवों को
* गिल्लू किस स्थिति में मिला था?
* कौवों द्वारा घायल और निश्चेष्ट
* गिल्लू को किस स्थान पर दफनाया गया?
* सोनजुही की लता के नीचे
* गिलहरी की प्रजाति को लेखिका ने क्या नाम दिया?
* गिल्लू
* गिल्लू ने क्या देखकर मुक्ति की इच्छा जाहिर की?
* कमरे के बाहर की गिलहरियों का झुंड
* लेखिका ने गिल्लू को शिष्टाचार सिखाने के लिए क्या किया?
* थाली के पास बैठकर खाने की जगह दी
* गिल्लू का प्रिय खाद्य न मिलने पर वह क्या करता था?
* अन्य चीजें लेना बंद कर देता था या झूले से नीचे फेंक देता था
* लेखिका की अस्वस्थता के समय गिल्लू ने काजू क्यों नहीं खाए?
* लेखिका के प्रति अपनी समानुभूति प्रकट करने के लिए
* गिल्लू ने अपना अंतिम समय कैसे बिताया?
* कुछ न खाया, न बाहर गया और लेखिका की उँगली पकड़कर चिपका रहा
* लेखिका ने गिल्लू को उष्णता देने का क्या प्रयास किया?
* हीटर जलाकर
* गिल्लू की समाधि कहाँ बनाई गई?
* सोनजुही की लता के नीचे
* पाठ की शुरुआत में लेखिका किस कली को देखती हैं?
* सोनजुही की पीली कली
* गिल्लू का झूला क्यों उतारकर रख दिया गया?
* उसकी मृत्यु के पश्चात्
* लेखिका को मोटर दुर्घटना में चोट लगने के बाद कहाँ रहना पड़ा?
* अस्पताल में
* गिल्लू अपने घर में क्या हिलाकर झूलता था?
* स्वयं
* गिल्लू लेखिका के साथ किस तरह से खाना खाता था?
* लेखिका की थाली में से एक-एक चावल उठाकर
* गिल्लू के चिक-चिक करने का क्या मतलब था?
* भोजन की इच्छा जाहिर करना
* इस रेखाचित्र की शैली कैसी है?
* संस्मरणात्मक रेखाचित्र
Part 2: Very Short Answers (20 questions)
* गिल्लू को देखकर लेखिका को किस बात की याद आई?
* लेखिका को सोनजुही की कली देखकर गिल्लू की याद आई, क्योंकि गिल्लू को सोनजुही की लता बहुत पसंद थी और लेखिका को ऐसा लगता था कि वह उस कली में ही प्रकट हुआ हो।
* कौवे गिल्लू के लिए क्या कर रहे थे?
* कौवे गिल्लू पर अपनी चोटों से हमला कर रहे थे, मानो वे 'छुआ-छुऔवल' खेल रहे हों, ताकि उसे मारकर खा सकें।
* लेखिका ने कौवों के लिए 'काकभुशुंडि' शब्द का प्रयोग क्यों किया?
* लेखिका ने कौवों को 'काकभुशुंडि' इसलिए कहा क्योंकि कौवे एक तरफ तिरस्कार पाते हैं, वहीं दूसरी तरफ पितृपक्ष में पितरों को संतुष्ट करने के लिए उन्हें सम्मान भी दिया जाता है।
* गिल्लू का जीवन किसने बचाया?
* लेखिका महादेवी वर्मा ने कौवों से बचाकर गिल्लू का उपचार किया और उसे धीरे-धीरे स्वस्थ होने में मदद की।
* गिल्लू का नाम कैसे पड़ा?
* जब गिल्लू थोड़ा बड़ा हो गया, तो लेखिका ने गिलहरी प्रजाति के आधार पर उसका नाम गिल्लू रख दिया।
* गिल्लू अपने झूले में क्या देखता-समझता था?
* वह अपनी काँच के मनकों-सी आँखों से कमरे के भीतर और खिड़की से बाहर न जाने क्या देखता-समझता रहता था, मानो वह इस संसार की विचित्रता को परख रहा हो।
* गिल्लू ने अपने लिए बाहर जाने का रास्ता कैसे बनाया?
* जब गिल्लू बड़ा हो गया और उसने बाहर जाने की इच्छा जताई, तो लेखिका ने खिड़की की जाली का एक कोना खोल दिया, जिससे वह बाहर आ-जा सके।
* गिल्लू बाहर जाकर क्या करता था?
* वह दिन भर गिलहरियों के झुंड का नेता बना, डाल-डाल पर उछलता-कूदता रहता था।
* गिल्लू लेखिका को चौंकाने के लिए क्या करता था?
* वह कभी फूलदान के फूलों में छिप जाता था, कभी परदे की चुन्नट में और कभी सोनजुही की पत्तियों में।
* लेखिका ने गिल्लू को थाली में खाना कैसे सिखाया?
* उन्होंने गिल्लू को थाली के पास बैठाना सिखाया, जहाँ वह एक-एक चावल उठाकर बड़ी सफाई से खाता था।
* गिल्लू की अस्वस्थता में लेखिका की देखभाल कैसे करता था?
* वह लेखिका के तकिये पर सिरहाने बैठकर अपने नन्हे-नन्हे पंजों से उनके सिर और बालों को इतने हौले-हौले सहलाता था, मानो कोई परिचारिका सेवा कर रही हो।
* लेखिका ने गिल्लू की मृत्यु के बारे में क्या कहा?
* लेखिका ने कहा कि प्रभात की पहली किरण के स्पर्श के साथ ही वह किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया।
* लेखिका ने सोनजुही की लता के नीचे गिल्लू को क्यों दफनाया?
* लेखिका ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि गिल्लू को सोनजुही की लता सबसे प्रिय थी।
* 'अनादूत-समादृत' शब्द का क्या अर्थ है?
* अनादृत का अर्थ है 'जिसका अनादर किया गया हो' और समादृत का अर्थ है 'जिसका आदर किया गया हो' । ये दोनों विपरीत अर्थ वाले शब्द हैं।
* पाठ में किन भाषाओं के शब्दों का प्रयोग हुआ है?
* पाठ में तत्सम (संस्कृत से सीधे आए शब्द), तद्भव (संस्कृत से परिवर्तित), देशज (स्थानीय भाषा के), और आगत (विदेशी) शब्दों का प्रयोग हुआ है।
* इस रेखाचित्र में किस साहित्यिक तकनीक का प्रयोग हुआ है?
* इस रेखाचित्र में 'फ्लैशबैक' (पूर्वदीप्ति) तकनीक का बहुत सुंदर प्रयोग किया गया है, जहाँ वर्तमान से कहानी अतीत में चली जाती है और फिर वापस वर्तमान में आती है।
* गिल्लू को किस बात से सबसे अधिक खुशी मिलती थी?
* गिल्लू को अपनी पसंद का खाना, यानी काजू, खाने से सबसे अधिक खुशी मिलती थी।
* गिल्लू के व्यवहार से लेखिका को क्या महसूस हुआ?
* लेखिका को महसूस हुआ कि पशु-पक्षियों में भी मनुष्यों की तरह संवेदना, प्रेम और समझदारी होती है।
* 'स्निग्ध रोएँ' और 'झब्बेदार पूँछ' किसका वर्णन करते हैं?
* ये गिल्लू के यौवन अवस्था में आने वाले शारीरिक परिवर्तनों का वर्णन करते हैं, जहाँ उसके रोएँ चिकने और पूँछ घनी हो गई थी।
* गिल्लू के कमरे से बाहर जाने के बाद लेखिका को किस बात की चिंता रहती थी?
* उसे घर में पाले गए कुत्ते-बिल्लियों से गिल्लू को बचाने की चिंता रहती थी।
Part 3: Short Answers (10 questions)
* मनुष्य और पशु-पक्षियों के बीच के संबंध पर टिप्पणी करें।
* पाठ में बताया गया है कि मनुष्य और पशु-पक्षियों का संबंध बहुत महत्वपूर्ण होता है। जब मनुष्य उनके साथ प्रेम और अच्छे व्यवहार से पेश आता है, तो वे भी मनुष्य को अपना मानने लगते हैं और उसके जीवन का अभिन्न अंग बन जाते हैं। गिल्लू और लेखिका का संबंध इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ दोनों ने एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सहानुभूति और समझदारी का भाव दिखाया।
* लेखिका ने गिल्लू के लिए क्या-क्या उपचार किए?
* जब गिल्लू घायल मिला, तो लेखिका ने उसे कौवों से बचाया। उन्होंने उसे अपने कमरे में लाकर उसके घावों पर पेन्सिलिन नामक मरहम लगाया। उन्होंने दूध के साथ रुई की बत्ती से पानी पिलाया और धीरे-धीरे उसे स्वस्थ किया।
* लेखिका ने किस तरह दिखाया कि गिल्लू एक व्यक्तिवाचक संज्ञा बन गया था?
* लेखिका ने बताया कि 'गिलहरी' एक जातिवाचक संज्ञा है, लेकिन उन्होंने अपने घर में रहने वाली उस गिलहरी को एक विशिष्ट नाम 'गिल्लू' दिया। इस नाम से वह एक विशेष प्राणी बन गया और उसका नाम 'व्यक्तिवाचक संज्ञा' के रूप में प्रयोग होने लगा।
* गिल्लू की बुद्धिमत्ता और समझदारी के कुछ उदाहरण दें।
* गिल्लू की बुद्धिमत्ता के कई उदाहरण हैं। जब उसे भूख लगती थी, तो वह 'चिक-चिक' की आवाज़ करके अपनी इच्छा जाहिर करता था। गर्मियों में, वह सुराही पर लेटकर गर्मी से बचता था और लेखिका के पास भी रहता था। इसके अलावा, लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए उसने पर्दों पर चढ़ने-उतरने का अनोखा तरीका खोज निकाला था।
* गिल्लू ने लेखिका के प्रति अपनी समानुभूति कैसे व्यक्त की?
* जब लेखिका मोटर दुर्घटना में घायल होकर अस्पताल में भर्ती हुईं, तो गिल्लू ने अपनी समानुभूति प्रकट की। वह लेखिका की अनुपस्थिति में उदास रहता था और यहाँ तक कि अपने सबसे प्रिय भोजन, काजू, को भी नहीं खाता था। अस्पताल से लौटने पर लेखिका को उसके झूले में ढेर सारे काजू भरे मिले, जिससे उसकी उदासी और स्नेह का पता चलता है।
* 'छुआ-छुऔवल' शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में किया गया है और इसका क्या महत्व है?
* 'छुआ-छुऔवल' शब्द का प्रयोग कौवों द्वारा घायल गिल्लू को मारने के प्रयास के लिए किया गया है। यह शब्द व्यंग्यात्मक है, क्योंकि यह एक खेल का नाम है, लेकिन कौवे उसे मारने का प्रयास कर रहे थे। इसका प्रयोग कौवों के क्रूर स्वभाव और लेखिका के व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
* लेखिका ने गिल्लू को मुक्त करने की बात क्यों कही?
* लेखिका ने गिल्लू को मुक्त किया क्योंकि उन्होंने देखा कि युवा होने पर वह बाहर की गिलहरियों को देखकर आज़ादी के लिए बेचैन था। लेखिका का मानना था कि किसी भी प्राणी को बंधनों में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि आज़ादी ही उसके स्वाभाविक विकास के लिए आवश्यक है।
* गिल्लू की मृत्यु के समय लेखिका की मनोदशा का वर्णन करें।
* गिल्लू की मृत्यु के समय लेखिका बहुत दुखी थीं। उन्हें उसके बिछड़ने का दर्द महसूस हुआ। उन्होंने उसे बचाने का हर संभव प्रयास किया, जैसे हीटर जलाकर उष्णता देना, लेकिन वह मरणासन्न था। उसकी मृत्यु के बाद, लेखिका ने उसकी याद को जीवित रखने के लिए उसकी समाधि सोनजुही के नीचे बनाई और उसका झूला हटा दिया, जो उनके दुख और वियोग को दर्शाता है।
* 'गिल्लू' रेखाचित्र की भाषा-शैली की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
* इस रेखाचित्र की भाषा-शैली सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण है। इसमें आम बोलचाल की भाषा के साथ-साथ तत्सम, तद्भव और विदेशी शब्दों का भी सहज प्रयोग हुआ है।
* दूसरी विशेषता यह है कि इसकी शैली संस्मरणात्मक और भावात्मक है। लेखिका ने अपनी यादों के आधार पर गिल्लू का ऐसा मार्मिक चित्रण किया है कि पाठक उससे भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं।
* इस पाठ से हमें क्या संदेश मिलता है?
* यह पाठ हमें यह संदेश देता है कि पशु-पक्षी और अन्य जीवों में भी प्रेम, संवेदना और समझदारी होती है। यदि हम उनके साथ अच्छा व्यवहार करें, तो वे हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन सकते हैं। यह पाठ हमें प्राणियों के प्रति दया, सहानुभूति और सम्मान का भाव रखने की प्रेरणा देता है।
Part 4: Essay Answers (5 questions)
* 'गिल्लू' एक संस्मरणात्मक रेखाचित्र है। इस कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
* 'गिल्लू' एक संस्मरणात्मक रेखाचित्र है क्योंकि इसमें लेखिका महादेवी वर्मा ने अपनी स्मृतियों (संस्मरण) के आधार पर एक छोटे से जीव (गिलहरी) का रेखाचित्र (शब्दों से चित्र) प्रस्तुत किया है। यह कहानी गिल्लू की यादों से शुरू होती है, जब लेखिका सोनजुही की कली देखकर पुरानी यादों में खो जाती हैं। वह गिल्लू के मिलने, उसके साथ बिताए समय और अंत में उसकी मृत्यु तक की सभी घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से याद करती हैं। इस कहानी में उन्होंने केवल गिल्लू का बाहरी वर्णन ही नहीं किया, बल्कि उसके भीतर की संवेदनाओं और व्यक्तित्व को भी शब्दों के माध्यम से जीवंत कर दिया है। जैसे एक चित्रकार कुछ रेखाओं से पूरा चित्र बना देता है, उसी तरह लेखिका ने कुछ विशेष घटनाओं और उनके आपसी संबंधों को दर्शाते हुए गिल्लू का एक यादगार और भावुक चित्र प्रस्तुत किया है। इसलिए, 'गिल्लू' संस्मरणात्मक रेखाचित्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
* गिल्लू की विशेषताओं का वर्णन करते हुए स्पष्ट कीजिए कि वह अन्य प्राणियों से किस प्रकार भिन्न था।
* गिल्लू में कई विशेषताएँ थीं जो उसे अन्य पालतू पशु-पक्षियों से अलग करती थीं। वह सिर्फ एक पालतू जीव नहीं, बल्कि एक समझदार और संवेदनशील साथी था।
* आत्मीयता और शिष्टाचार: जहाँ लेखिका के अन्य पशु-पक्षी उनकी थाली में खाने की हिम्मत नहीं करते थे, वहीं गिल्लू उनकी थाली में खाने लगता था। हालांकि, उसने लेखिका द्वारा सिखाया गया शिष्टाचार भी अपनाया और एक-एक चावल उठाकर खाने लगा।
* समानुभूति: लेखिका की बीमारी के दौरान, गिल्लू ने अपनी समानुभूति का अनुपम उदाहरण पेश किया। उसने लेखिका की अनुपस्थिति में अपने प्रिय काजू भी नहीं खाए। यह मानवीय भावनाओं की तरह ही दुख और प्रेम का प्रदर्शन था।
* बुद्धिमत्ता: गिल्लू ने गर्मी से बचने के लिए सुराही पर लेटने का तरीका खोजा, और लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए परदे पर चढ़ने-उतरने की तरकीब निकाली। ये उसकी असाधारण बुद्धिमत्ता के प्रमाण हैं।
* स्नेह-प्रदर्शन: वह नन्हे पंजों से लेखिका का सिर सहलाकर और अंतिम समय में उनकी उँगली पकड़कर अपने गहरे स्नेह को प्रकट करता था, जो अन्य पशुओं में दुर्लभ होता है।
* संक्षेप में, गिल्लू सिर्फ एक पालतू नहीं, बल्कि एक ऐसा साथी था जिसने अपने प्रेम, समझदारी और संवेदना से लेखिका के जीवन में एक अमिट छाप छोड़ी।
* मनुष्य और पशु-पक्षियों के परस्पर संबंध का महत्व पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
* यह पाठ मनुष्य और पशु-पक्षियों के बीच के अनमोल संबंध को उजागर करता है। लेखिका ने गिल्लू के माध्यम से दर्शाया है कि प्रेम, दया और सहानुभूति का व्यवहार न केवल मनुष्यों में, बल्कि पशु-पक्षियों में भी समान रूप से होता है।
* सबसे पहले, यह पाठ हमें जीवों के प्रति दयालुता का भाव सिखाता है। लेखिका ने एक घायल गिलहरी की जान बचाकर एक मानवीय कर्तव्य का पालन किया।
* दूसरे, यह कहानी बताती है कि प्रेम एकतरफा नहीं होता। लेखिका के प्यार और देखभाल के बदले में, गिल्लू ने भी अपना पूरा प्रेम और वफादारी उन्हें दी। उसने लेखिका की बीमारी में उनकी देखभाल की और उनकी अनुपस्थिति में उदास रहा।
* तीसरे, यह संबंध दोनों के जीवन को समृद्ध बनाता है। लेखिका के लिए गिल्लू एक प्यारा साथी बन गया और उसकी नटखट हरकतों से उनके जीवन में खुशी आई। वहीं, गिल्लू को लेखिका के प्यार और सुरक्षा से एक नया जीवन मिला।
* कुल मिलाकर, यह पाठ हमें यह समझने में मदद करता है कि पशु-पक्षी केवल मूक प्राणी नहीं हैं, बल्कि वे भी भावनाओं से परिपूर्ण होते हैं। यदि हम उनके साथ सम्मान से पेश आते हैं, तो वे भी हमें अपनाकर हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं।
* लेखिका ने कौवों के लिए 'काकभुशुंडि' और 'कौवा काँव-काँव' जैसे शब्दों का प्रयोग क्यों किया है? इससे उनकी भाषा-शैली पर क्या प्रभाव पड़ता है?
* लेखिका ने कौवों के लिए 'काकभुशुंडि' और 'कौवा काँव-काँव' जैसे शब्दों का प्रयोग कर उनकी दोहरी पहचान को दर्शाया है। 'काकभुशुंडि' शब्द का प्रयोग उनके ज्ञान और सम्मान को दर्शाता है, जो हिंदू धर्म में उन्हें मिलता है (पितृपक्ष में)। दूसरी तरफ, 'कौवा काँव-काँव' शब्द का प्रयोग उनके कर्कश स्वभाव और तिरस्कार को दर्शाता है। यह व्यंग्यात्मक प्रयोग है, क्योंकि कहानी में कौवे क्रूरता से गिल्लू को घायल कर रहे थे।
* इन शब्दों के प्रयोग से लेखिका की भाषा-शैली में गहराई और व्यंग्य का समावेश होता है। इससे भाषा सरल होने के साथ-साथ अधिक प्रभावशाली बन जाती है। यह लेखिका की सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति को भी दिखाता है, कि उन्होंने कौवों के स्वभाव को इतने सटीक शब्दों में प्रस्तुत किया। यह पाठ को केवल एक कहानी न बनाकर, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों से जोड़ता है।
* गिल्लू की मृत्यु का वर्णन पढ़कर आपके मन में क्या भाव उत्पन्न हुए? विस्तार से लिखिए।
* गिल्लू की मृत्यु का वर्णन पढ़कर मन में कई तरह के भाव उत्पन्न होते हैं। सबसे पहला भाव करुणा और दुख का है। लेखिका का मार्मिक वर्णन, जैसे- "वह किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया" - यह पढ़कर आँखें नम हो जाती हैं। यह मृत्यु को एक अंत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत के रूप में दिखाता है, जो दुख को थोड़ा कम करता है।
* दूसरा भाव प्रेम और कृतज्ञता का है। गिल्लू का अपनी अंतिम साँस में भी लेखिका की उँगली पकड़कर चिपके रहना, उसके गहन प्रेम और कृतज्ञता को दर्शाता है। इससे मन में यह विचार आता है कि एक छोटा सा जीव भी कितना गहरा संबंध बना सकता है।
* तीसरा भाव अमरता का है। सोनजुही की लता के नीचे गिल्लू की समाधि बनाना और लेखिका का उस कली में उसे महसूस करना, यह दर्शाता है कि सच्चा प्रेम कभी नहीं मरता। गिल्लू शारीरिक रूप से भले ही चला गया हो, लेकिन वह लेखिका की स्मृतियों में और उस सोनजुही की कली के रूप में हमेशा के लिए अमर हो गया। यह कहानी हमें जीवन और मृत्यु के चक्र के बारे में भी सोचने पर मजबूर करती है और यह बताती है कि प्रेम और यादें हमेशा जीवित रहती हैं।
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