कक्षा दसवीं भारतीय संस्कृति और विरासत अध्याय-9: भारतीय संस्कृति का विदेशों में प्रसार पाठ के नोट्स



परिचय
 * भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृतियों में से एक है।
 * प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति का संबंध विदेशों से रहा है।
 * सिंधु घाटी सभ्यता के समय से ही जल और थल मार्गों से व्यापार और धार्मिक यात्राएं होती थीं।
 * भारत की भौगोलिक स्थिति (तीन ओर से समुद्र और उत्तर में हिमालय) के बावजूद, भारतीयों ने लंबी यात्राएं कीं और अपनी संस्कृति की छाप छोड़ी।
 * भारत को 'सोने की चिड़िया' भी विदेशी व्यापार के कारण कहा जाता था।
प्रसार के माध्यम
भारतीय संस्कृति का प्रसार मुख्यतः तीन माध्यमों से हुआ, बिना किसी बल प्रयोग या छल-कपट के:
 * व्यापार:
   * व्यापारी सोने की खोज में इंडोनेशिया और कंबोडिया जैसे देशों में गए, जिन्हें 'सुवर्णद्वीप' (सोने का द्वीप) कहा गया।
   * भारत का व्यापार पश्चिम में फारस, यूनान और रोम तक और पूर्व में चीन और तिब्बत से होता था।
   * प्रमुख व्यापारिक नगर: उज्जैन, काशी, पाटलीपुत्र, कटक, पुरी, सोपारा, कावेरीपट्टनम्, ताम्रलिप्ति आदि।
 * बौद्ध धर्म का प्रसार:
   * सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।
   * बौद्ध धर्म आज भी चीन, तिब्बत, जापान, म्यांमार और श्रीलंका में एक प्रमुख धर्म है।
 * प्राचीन विश्वविद्यालयों का योगदान:
   * नालंदा, विक्रमशिला, ओदंतपुरी और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय ज्ञान के प्रमुख केंद्र थे।
   * इन विश्वविद्यालयों में चीन और तिब्बत से बड़ी संख्या में छात्र और विद्वान आते थे और शिक्षा ग्रहण कर भारतीय संस्कृति को अपने देशों में ले जाते थे।
   * चीनी यात्री ह्वेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय का विस्तृत वर्णन किया है।
पश्चिमी देशों में प्रसार
 * मेसोपोटामिया, अरब, सीरिया: सिंधु घाटी सभ्यता के उपकरण मेसोपोटामिया में मिले हैं, जो व्यापारिक संबंधों को दर्शाते हैं।
   * सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के सीरियाई शासक सेल्यूकस से अच्छे संबंध थे।
   * मेगस्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में राजदूत बनकर आया था।
 * मिस्र और यूनान: प्राचीन काल में समुद्री व्यापार होता था। सम्राट अशोक ने पश्चिमी देशों में बौद्ध भिक्षु भेजे थे।
 * रोम: 'पेरिप्लस ऑफ दी एरिथियन सी' नामक पुस्तक से व्यापार की जानकारी मिलती है। भारत से काली मिर्च, मलमल और मोती रोम भेजे जाते थे।
 * ईरान: राजा दारा प्रथम ने भारत के कुछ हिस्सों पर अधिकार किया था। बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ और कला-साहित्य का आदान-प्रदान भी हुआ।
 * अफगानिस्तान: यह बौद्ध धर्म से बहुत प्रभावित था। हड्डा नामक स्थान पर 531 बौद्ध स्तूपों के अवशेष मिले हैं।
मध्य एशिया में प्रसार
 * तिब्बत: सातवीं शताब्दी में तिब्बत के राजा संघ-सैन-गैम्पो ने नेपाल की राजकुमारी से विवाह किया और बौद्ध धर्म अपनाया।
   * भारतीय विद्वान जैसे लिपिवत्त, शांतारक्षित और आचार्य बोधिसत्व तिब्बत गए।
   * तिब्बती वर्णमाला और व्याकरण का सृजन भारतीय भाषाओं के आधार पर हुआ।
 * चीन: महाभारत और कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में चीनी रेशम का उल्लेख है।
   * आचार्य धर्मरक्षित और कश्यप मातंग 65 ई. में चीन गए और बौद्ध ग्रंथों का चीनी में अनुवाद किया।
   * कुमारजीव और गुणवर्मा जैसे कई भारतीय भिक्षु भी चीन गए।
 * कोरिया और जापान: भारतीय संस्कृति चीन के माध्यम से कोरिया और फिर जापान पहुँची।
   * जापान में संस्कृत को पवित्र भाषा माना गया और 'शित्तन' नामक लिपि में मंत्र लिखे जाते थे।
दक्षिण-पूर्वी एशिया में प्रसार
 * श्रीलंका: भगवान राम के समय से ही संबंध रहे हैं। सम्राट अशोक ने महेंद्र और संघमित्रा को बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भेजा था।
   * श्रीलंका में दीपवंश और महावंश बौद्ध धर्म के लिए प्रसिद्ध हैं।
 * म्यांमार (बर्मा): व्यापारियों और भिक्षुओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति यहाँ पहुँची। पगान 11वीं से 13वीं शताब्दी तक बौद्ध संस्कृति का महान केंद्र था।
 * थाईलैंड (स्याम): शहरों के नाम संस्कृत में रखे गए, जैसे अयोध्या। रामायण की कहानियाँ भी बहुत लोकप्रिय हैं।
 * कंबोडिया (कंबुज): इसे भारतीय संस्कृति का केंद्र माना जाता है। यहाँ के राजाओं ने अंगकोरवाट का प्रसिद्ध विष्णु मंदिर बनवाया, जिसकी दीवारों पर रामायण-महाभारत के चित्र अंकित हैं।
 * इंडोनेशिया (हिन्देशिया): जावा, सुमात्रा और बोर्नियो जैसे द्वीपों में भारतीय उपनिवेश स्थापित हुए।
   * जावा में विश्व प्रसिद्ध बोरोबुदुर का स्तूप है।
   * बाली द्वीप पर आज भी हिन्दू संस्कृति और परम्पराएँ जीवित हैं।

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