कक्षा 12वीं हिंदी पार्ट 3 रीति काव्य का उपयोग बिहारी और पद्माकर पाठ के प्रश्न उत्तर


प्रश्न 1: "तुमहुँ लागी जगत गुरु, जगन्नाथ जगवाय" पंक्ति में कवि ने किस भाव को व्यक्त किया है?

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने भगवान से सहायता न मिलने पर निराशा और व्यंग्य का भाव व्यक्त किया है। भक्त बार-बार पुकारने पर भी जब भगवान को अपनी सहायता के लिए नहीं आता देखता, तो वह व्यंग्यात्मक रूप से कहता है कि हे भगवान, आपको भी इस सांसारिक माया की हवा लग गई है, जिसने आपको जगाकर अपने जैसा स्वार्थी बना दिया है।

प्रश्न 2: "कनक कनक तैं सौगुनी, मादकता अधिकाय" दोहे में यमक अलंकार का प्रयोग किस तरह किया गया है, स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस दोहे में 'कनक' शब्द का दो बार प्रयोग हुआ है और दोनों बार इसका अर्थ अलग है, इसलिए यहाँ यमक अलंकार है।

  • पहला 'कनक': इसका अर्थ 'धतूरा' है, जिसे खाने से नशा होता है।
  • दूसरा 'कनक': इसका अर्थ 'सोना' या 'धन' है, जिसे पाने से अहंकार और घमंड का नशा होता है।

​कवि कहते हैं कि सोने का नशा धतूरे के नशे से सौ गुना अधिक होता है, क्योंकि धतूरा खाने पर नशा होता है, जबकि सोना तो पाते ही व्यक्ति नशे में चूर हो जाता है।

प्रश्न 3: राधा ने कृष्ण की मुरली क्यों छिपाई? इस शरारत में राधा के स्वभाव की कौन सी विशेषताएँ उजागर होती हैं?

उत्तर: राधा ने कृष्ण की मुरली उनसे बातें करने के लालच (बतरस लालच) में छिपाई। इस शरारत से राधा के स्वभाव की चंचलता, प्रेम, और आत्मीयता जैसी विशेषताएँ उजागर होती हैं। यह उनकी और कृष्ण की आपसी निकटता और प्रेम को दर्शाता है, जहाँ इस तरह की छोटी-मोटी शरारतें उनके संबंध को और गहरा बनाती हैं।

प्रश्न 4: "जगत तपोवन सौ कियौ" पंक्ति में 'जगत' को 'तपोवन' क्यों कहा गया है? इससे ग्रीष्म ऋतु की किस स्थिति का वर्णन होता है?

उत्तर: यहाँ भीषण गर्मी (दीरघ-दाघ, निदाघ) के कारण दुनिया को 'तपोवन' कहा गया है। जिस प्रकार तपोवन में शत्रुता भूलकर सभी जीव-जंतु एक साथ शांतिपूर्वक रहते हैं, उसी प्रकार भीषण गर्मी के कारण सांप, मोर, हिरण और बाघ जैसे जन्मजात शत्रु भी अपनी प्यास बुझाने के लिए एक ही जगह पर एकत्रित हो जाते हैं। इससे ग्रीष्म ऋतु की अत्यधिक गर्मी और उसके भयावह प्रभाव का वर्णन होता है।

पद्माकर के कवित्त पर आधारित प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1: नायिका की आँखों से क्या-क्या धुल गया है और क्या नहीं? इससे क्या भाव प्रकट होता है?

उत्तर: नायिका की आँखों से अबीर (गुलाल) तो धुल गया है, लेकिन 'अहीर' यानी कृष्ण का प्रेम उसके मन से नहीं निकला है। इससे यह भाव प्रकट होता है कि होली का रंग तो क्षणिक था और आसानी से मिट गया, लेकिन कृष्ण का प्रेम उसके हृदय में स्थायी रूप से बस गया है, जो मिटने वाला नहीं है।

प्रश्न 2: नायिका अपनी सखी से कौन-कौन से प्रश्न पूछती है? इससे उसकी किस मानसिक दशा का पता चलता है?

उत्तर: नायिका अपनी सखी से पूछती है, "कैसी करें, कहाँ जाऊँ, कासे कहूँ, कौन सुनै?" ये प्रश्न उसकी मानसिक बेचैनी, निराशा, और विरह वेदना को दर्शाते हैं। वह कृष्ण के प्रेम में इतनी व्याकुल है कि उसे कोई समाधान नहीं सूझ रहा है और वह अपनी पीड़ा को किसी से बाँटना चाहती है।

प्रश्न 3: इस कवित्त में होली के त्यौहार का वर्णन किस प्रकार किया गया है?

उत्तर: इस कवित्त में होली को एक साधारण त्यौहार के रूप में नहीं, बल्कि कृष्ण और नायिका के बीच के गहरे प्रेम और भक्ति के माध्यम से दर्शाया गया है। होली के रंग तो धुल जाते हैं, लेकिन कृष्ण का प्रेम रूपी रंग नायिका के मन में हमेशा के लिए बस जाता है। यह होली के आनंद और प्रेम के स्थायी प्रभाव को दर्शाता है।

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