कक्षा 10 हिंदी पाठ 3 गिल्लू पाठ के प्रश्न और उत्तर


एक लाइन के प्रश्न (30)
 * "लघु प्राण" शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
   गिल्लू के लिए।
 * लेखिका गिल्लू को अपने कमरे में क्यों लाईं?
   उसका जीवन बचाने के लिए।
 * कौवों को किस नाम से पुकारा गया है?
   काकभुशुंडि।
 * लेखिका के अनुसार पितर-पक्ष में हमारे पुरखे किस रूप में आते हैं?
   कौवे के रूप में।
 * गिल्लू का घर कहाँ था?
   फूल रखने की हल्की डलिया में।
 * गिल्लू अपनी भूख की सूचना कैसे देता था?
   "चिक-चिक" करके।
 * गिल्लू का सबसे प्रिय खाद्य पदार्थ क्या था?
   काजू।
 * लेखिका ने गिल्लू को कहाँ दफनाया?
   सोनजुही की लता के नीचे।
 * गिल्लू को सोनजुही की लता क्यों प्रिय थी?
   क्योंकि वह उसी की छाया में छिपकर बैठता था।
 * गिल्लू का जीवनकाल कितने वर्ष का होता है?
   दो वर्ष।
 * गिल्लू का जीवन कितने समय में पूर्ण हो गया?
   दो वर्ष में।
 * लेखिका ने खिड़की की जाली का एक कोना क्यों खोला?
   गिल्लू को आज़ादी देने के लिए।
 * गिल्लू को मोटर दुर्घटना के बाद कहाँ रहना पड़ा?
   अस्पताल में।
 * लेखिका के बीमार होने पर गिल्लू क्या करता था?
   तकिए पर बैठकर उनके सिर और बालों को हौले-हौले सहलाता था।
 * गर्मियों में गिल्लू कहाँ लेट जाता था?
   लेखिका के पास रखी सुराही पर।
 * गिल्लू के अंतिम समय में लेखिका ने क्या जलाया?
   हीटर।
 * गिल्लू के जीवन का अंत कैसे हुआ?
   प्रभात की पहली किरण के साथ वह सो गया।
 * सोनजुही की पीली कली को देखकर लेखिका को किसकी याद आई?
   गिल्लू की।
 * गिल्लू के झब्बेदार पूँछ और चमकीली आँखें किस उम्र में सबको विस्मित करने लगीं?
   तीन-चार मास में।
 * लेखिका ने गिल्लू की जातिवाचक संज्ञा को किस रूप में बदल दिया?
   व्यक्तिवाचक संज्ञा (गिल्लू)।
 * जब लेखिका लिखने बैठती थीं तो गिल्लू क्या करता था?
   पर्दे पर चढ़कर ध्यान आकर्षित करता था।
 * गिल्लू के झूले की सफाई करने पर उसमें क्या मिला?
   काजू।
 * गिल्लू का नाम गिल्लू क्यों रखा गया?
   गिलहरी की प्रजाति के आधार पर।
 * बसंत आने पर गिल्लू को बाहर झाँकते देख लेखिका को क्या लगा?
   कि उसे मुक्त करना आवश्यक है।
 * गिल्लू के जीवन में कौन-सी ऋतु पहली बार आई थी?
   बसंत ऋतु।
 * गिल्लू किन चीज़ों से खेलता था?
   कभी फूलों में छिपकर, कभी पर्दे की चुन्नटों में।
 * गिल्लू को अन्य गिलहरियों का नेता किसने बनाया?
   गिल्लू ने स्वयं।
 * "वह किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया।" यह वाक्य किसने कहा?
   लेखिका महादेवी वर्मा ने।
 * गिल्लू को क्यों दफनाया गया?
   पशुओं को जलाने की प्रथा न होने के कारण।
 * लेखिका ने गिल्लू की समाधि कहाँ बनाई?
   सोनजुही की लता के नीचे।
अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (20)
 * गिल्लू को कौवों से किसने बचाया और कैसे?
   लेखिका ने गिल्लू को कौवों की चोंच से घायल अवस्था में पाया और उसे अपने कमरे में लाकर उसका उपचार किया।
 * काकभुशुंडि किसे कहते हैं और कौवों को यह नाम क्यों दिया गया है?
   काकभुशुंडि एक ऋषि थे जो कौवे के रूप में थे। कौवों को यह नाम उनकी बुद्धिमत्ता और ज्ञान की परंपरा से जोड़कर व्यंग्य के रूप में दिया गया है।
 * लेखिका को गिल्लू की याद कैसे आई?
   लेखिका को अपने बगीचे में लगी सोनजुही की पीली कली को देखकर गिल्लू की याद आई, क्योंकि गिल्लू उसी लता में छिपकर बैठता था।
 * पुराने लोग कौवे को किस रूप में मानते हैं?
   पुराने लोग कौवे को पितर-पक्ष में अपने पूर्वजों के प्रतीक के रूप में मानते हैं, जो उनके लिए कुछ पाने के लिए आते हैं।
 * गिल्लू को किस तरह से व्यक्तिवाचक संज्ञा का रूप दिया गया?
   गिलहरी एक जातिवाचक संज्ञा है, लेकिन लेखिका ने उस विशेष गिलहरी को "गिल्लू" नाम दिया, जिससे वह व्यक्तिवाचक संज्ञा बन गया।
 * गिल्लू का घर कहाँ और कैसे बनाया गया था?
   गिल्लू का घर एक हल्की डलिया में रुई बिछाकर तार से खिड़की पर लटकाया गया था।
 * गिल्लू के जीवन में आने वाले बसंत का क्या महत्त्व था?
   बसंत आने पर गिल्लू में आज़ादी की इच्छा जागृत हुई और वह बाहर की गिलहरियों के साथ अपना जीवन बिताना चाहता था।
 * लेखिका ने गिल्लू को मुक्त करने का निर्णय क्यों लिया?
   लेखिका ने देखा कि गिल्लू जाली के पास बैठकर बाहर झाँकता रहता है, जिससे उन्हें लगा कि उसे आज़ादी देना आवश्यक है।
 * अस्पताल से लौटने पर लेखिका को क्या देखकर आश्चर्य हुआ?
   लेखिका ने देखा कि गिल्लू के झूले में उसके प्रिय काजू भरे हुए थे, जिनसे पता चला कि वह उनके बिना कुछ नहीं खा रहा था।
 * लेखिका की बीमारी में गिल्लू किस तरह से सेवा करता था?
   वह तकिए पर सिरहाने बैठकर अपने नन्हे पंजों से लेखिका के सिर और बालों को हौले-हौले सहलाता था।
 * गर्मियों में गिल्लू गर्मी से बचने के लिए क्या करता था?
   वह लेखिका के पास रखी सुराही पर लेट जाता था, जिससे वह ठंडा भी रहता था और लेखिका के पास भी रहता था।
 * गिल्लू के अंतिम समय का वर्णन कीजिए।
   अपने अंतिम समय में उसने खाना-पीना छोड़ दिया था और लेखिका की उँगली को बचपन की तरह ही अपने पंजों में पकड़ लिया था।
 * गिलहरी की नयी पीढ़ी और गिल्लू के झूले का क्या हुआ?
   गिलहरी की नई पीढ़ी जाली के उस पार चिक-चिक करती रहती है, जबकि गिल्लू का झूला उतारकर रख दिया गया है।
 * लेखिका ने गिल्लू की मृत्यु के बाद सोनजुही की लता के नीचे ही समाधि क्यों दी?
   क्योंकि गिल्लू को सोनजुही की लता सबसे अधिक प्रिय थी और लेखिका को विश्वास था कि वह पीले फूल के रूप में फिर से खिलकर उन्हें चौंका देगा।
 * गिल्लू को "अपवाद" क्यों कहा गया है?
   अन्य पशु-पक्षी लेखिका की थाली में नहीं खाते थे, जबकि गिल्लू ऐसा करता था। इसलिए वह एक अपवाद था।
 * गिल्लू के नटखट स्वभाव का एक उदाहरण दीजिए।
   जब लेखिका लिखने बैठती थीं तो वह पर्दे पर सर्र से चढ़ता और उतरता था ताकि लेखिका का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सके।
 * गिल्लू को शिष्टाचार कैसे सिखाया गया?
   लेखिका ने बड़ी कठिनाई से उसे थाली के पास बैठकर चावल के एक-एक दाने को सफाई से खाना सिखाया।
 * रेखाचित्र की भाषा शैली की दो विशेषताएँ बताइए।
   इसकी भाषा सरल, सरस और प्रवाहपूर्ण है, जिसमें आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया गया है।
 * गिल्लू के बिना लेखिका के जीवन में क्या बदलाव आया?
   गिल्लू के बिना उनका जीवन सूना हो गया, और उन्होंने उसका झूला उतारकर जाली बंद करवा दी।
 * लेखिका ने गिल्लू की यादों को अमर कैसे किया?
   उन्होंने उसकी समाधि सोनजुही की लता के नीचे बनाई और एक रेखाचित्र लिखकर उसकी याद को चिरस्थायी कर दिया।
लघु उत्तरात्मक प्रश्न (10)
 * "काकभुशुंडि" शब्द के माध्यम से लेखिका ने कौवों के बारे में क्या बताया है?
   महादेवी वर्मा ने "काकभुशुंडि" शब्द का प्रयोग व्यंग्य के रूप में किया है। वे कहती हैं कि कौवा एक विचित्र पक्षी है, जिसे एक साथ सम्मान और तिरस्कार दोनों मिलते हैं। पितर-पक्ष में उसे हमारे पूर्वजों के प्रतीक के रूप में भोजन दिया जाता है, जबकि दूसरी ओर उसकी कर्कश आवाज़ के कारण उसे अपमानित भी किया जाता है। इस प्रकार, यह शब्द कौवों के द्वैध स्वभाव को दर्शाता है।
 * गिल्लू की आज़ादी की इच्छा को लेखिका ने कैसे समझा और उस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
   बसंत ऋतु आने पर लेखिका ने देखा कि गिल्लू खिड़की की जाली के पास बैठकर बाहर की गिलहरियों को देखता रहता है। गिल्लू की इस बेचैनी को लेखिका ने उसकी आज़ादी की इच्छा के रूप में समझा। उन्होंने यह महसूस किया कि बंधकर रहने से कोई भी प्राणी स्वाभाविक विकास नहीं कर पाता। इसलिए, उन्होंने कीलें निकालकर जाली का एक कोना खोल दिया, ताकि गिल्लू बाहर जा सके।
 * लेखिका की अनुपस्थिति में गिल्लू के व्यवहार में क्या बदलाव आया?
   जब लेखिका मोटर दुर्घटना के बाद अस्पताल में थीं, तो गिल्लू बहुत उदास हो गया था। वह किसी को देखकर अपने झूले से नहीं उतरता था और ना ही वह अपने प्रिय काजू खाता था। जब लेखिका वापस आईं और झूले की सफाई की, तो उसमें बहुत सारे काजू भरे मिले। इससे पता चलता है कि वह लेखिका के बिना अपना प्रिय भोजन भी नहीं खा रहा था।
 * लेखिका और गिल्लू के बीच के प्रेम को किन घटनाओं से दर्शाया गया है?
   लेखिका और गिल्लू के बीच के प्रेम को कई घटनाओं से दर्शाया गया है:
   * लेखिका द्वारा गिल्लू का उपचार करके उसका जीवन बचाना।
   * गिल्लू का लेखिका की थाली में खाना।
   * लेखिका के बीमार होने पर गिल्लू का उनके सिर को सहलाना।
   * गिल्लू का गर्मियों में लेखिका के पास सुराही पर लेट जाना।
   * मृत्यु के समय गिल्लू का लेखिका की उँगली को कसकर पकड़ना।
 * गिल्लू की मृत्यु के बाद लेखिका ने उसकी स्मृति को कैसे सजीव रखा?
   गिल्लू की मृत्यु के बाद लेखिका ने उसकी समाधि सोनजुही की लता के नीचे बनाई, क्योंकि यह जगह गिल्लू को सबसे अधिक प्रिय थी। उन्हें विश्वास था कि सोनजुही के पीले फूल में गिल्लू ही खिलकर उन्हें चौंका देगा। उन्होंने उसका झूला भी उतारकर रख दिया और खिड़की की जाली बंद कर दी। इस तरह, लेखिका ने गिल्लू की यादों को अपने दिल में और सोनजुही की लता में हमेशा के लिए अमर कर दिया।
 * रेखाचित्र के रूप में "गिल्लू" की क्या विशेषताएँ हैं?
   "गिल्लू" एक संस्मरणात्मक रेखाचित्र है। इसमें लेखिका ने शब्दों के माध्यम से एक छोटे से जीव (गिल्लू) का ऐसा चित्र खींचा है कि वह हमारी आँखों के सामने सजीव हो उठता है। इसकी भाषा सरल, सरस और प्रवाहपूर्ण है। लेखिका ने गिल्लू के पूरे जीवन को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक उसके साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं।
 * गिल्लू का नटखट स्वभाव कैसे प्रकट होता था?
   गिल्लू का नटखट स्वभाव कई घटनाओं से प्रकट होता था। जब लेखिका लिखने बैठती थीं, तो वह उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए तेजी से पर्दे पर चढ़ता-उतरता था। कभी वह फूलदान में छिप जाता, तो कभी पर्दे की चुन्नट में। वह सोनजुही की पत्तियों में भी छिपकर लेखिका को चौंका देता था।
 * गिल्लू के व्यवहार में किन शारीरिक और व्यवहारगत परिवर्तनों का उल्लेख है?
   तीन-चार महीने में गिल्लू के रोएँ चिकने हो गए, पूँछ झब्बेदार हो गई और आँखें चमकीली हो गईं। यह उसके शारीरिक परिवर्तन थे। व्यवहारगत रूप से वह ज्यादा चंचल हो गया था, उसने लेखिका का ध्यान खींचने के लिए नए-नए तरीके खोज लिए थे, और वह बाहर की दुनिया को भी समझने लगा था।
 * लेखिका ने "फ्लैश बैक टेक्नीक" का उपयोग कैसे किया है?
   लेखिका ने इस रेखाचित्र की शुरुआत सोनजुही की खिली हुई पीली कली से की, जिसे देखकर उन्हें गिल्लू की याद आती है। फिर वह गिल्लू के मिलने के दिन से लेकर उसकी मृत्यु तक की सारी घटनाओं का स्मरण करती हैं। अंत में वह वापस वर्तमान में लौटकर कली को देखती हैं और गिल्लू की यादों में खो जाती हैं। यह तरीका साहित्य और फिल्मों में "फ्लैश बैक" कहलाता है।
 * "वह किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया।" इस वाक्य से लेखिका का क्या भाव प्रकट होता है?
   यह वाक्य लेखिका की गहरी संवेदनशीलता और गिल्लू के प्रति उनके असीम प्रेम को दर्शाता है। वे गिल्लू की मृत्यु को एक दुखद अंत के बजाय एक नए जीवन की शुरुआत के रूप में देखती हैं। इस तरह, वे मृत्यु के दुख को कम करते हुए एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं, जिससे यह भाव प्रकट होता है कि गिल्लू ने एक और जीवन की यात्रा शुरू कर दी है।
निबंधात्मक प्रश्न (5)
 * "गिल्लू" रेखाचित्र में मनुष्य और पशु-पक्षी के संबंधों को किस तरह चित्रित किया गया है? विस्तार से वर्णन करें।
   महादेवी वर्मा का यह रेखाचित्र मनुष्य और पशु-पक्षियों के बीच के प्रेम, वात्सल्य और गहरे संबंधों का एक सुंदर उदाहरण है। लेखिका ने न केवल गिल्लू को बचाया, बल्कि उसे अपने परिवार का सदस्य भी बना लिया। गिल्लू का लेखिका की थाली में खाना, उनकी बीमारी में सेवा करना, और उनकी अनुपस्थिति में उदास हो जाना, ये सभी घटनाएँ दिखाती हैं कि पशु-पक्षी भी भावनाओं और प्रेम को समझते हैं। लेखिका ने गिल्लू को आज़ादी दी, पर उसने भी लेखिका का स्नेह कभी नहीं भुलाया। यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि हम पशु-पक्षियों के साथ अच्छा व्यवहार करें, तो वे भी हमें अपना मानने लगते हैं और हमारे सुख-दुख के साथी बन जाते हैं। इस प्रकार, यह रेखाचित्र हमें इन मूक प्राणियों के प्रति दया और प्रेम का भाव रखने की प्रेरणा देता है।
 * महादेवी वर्मा ने गिल्लू के व्यक्तित्व को कैसे उभारा है? उसके स्वभाव की विशेषताओं का वर्णन करें।
   महादेवी वर्मा ने गिल्लू के व्यक्तित्व को उसके कार्यों और स्वभाव के माध्यम से उभारा है। गिल्लू एक चंचल, नटखट और बहुत ही बुद्धिमान प्राणी था। वह अपनी भूख "चिक-चिक" करके बताता था और लेखिका का ध्यान खींचने के लिए पर्दे पर चढ़ता-उतरता था। वह खाने में अपने पसंद-नापसंद को भी दर्शाता था, जैसे काजू न मिलने पर अन्य चीजें फेंक देना। लेखिका की बीमारी में उसने एक परिचारिका की तरह सेवा की और गर्मियों में सुराही पर लेटकर गर्मी से बचने का उपाय खोज निकाला। वह एक संवेदनशील और कृतज्ञ प्राणी था, जिसने अंतिम समय में भी लेखिका का साथ नहीं छोड़ा। इन सभी विशेषताओं से गिल्लू का एक विशिष्ट और मनमोहक व्यक्तित्व उभरता है।
 * "गिल्लू" पाठ के आधार पर महादेवी वर्मा की भाषा शैली और लेखन की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।
   महादेवी वर्मा की भाषा शैली सरल, सरस और प्रवाहपूर्ण है। उन्होंने आम बोलचाल के शब्दों के साथ-साथ तत्सम और विदेशी शब्दों का भी सहजता से प्रयोग किया है, जिससे भाषा में स्पष्टता और मधुरता आई है। उनकी लेखन शैली में आत्मीयता और भावात्मकता का गहरा समावेश है, जिससे पाठक कहानी से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। उन्होंने "फ्लैश बैक" जैसी तकनीक का कुशलतापूर्वक उपयोग किया है, जिससे कहानी में रोचकता बनी रहती है। वे शब्दों के माध्यम से एक कुशल चित्रकार की तरह दृश्य प्रस्तुत करती हैं, जिससे गिल्लू का हर एक कार्यकलाप हमारी आँखों के सामने सजीव हो उठता है। उनकी लेखन शैली पशु-पक्षियों के प्रति उनकी गहरी मानवीय दृष्टि और संवेदना को भी दर्शाती है।
 * "गिल्लू" की मृत्यु के बाद लेखिका के मन की भावनाओं को विस्तार से समझाइए।
   गिल्लू की मृत्यु लेखिका के लिए एक गहरा आघात थी। उनका मन उदासी और वियोग से भर गया था। उन्होंने गिल्लू के झूले को उतार दिया और खिड़की की जाली बंद कर दी, जैसे एक माँ अपने बच्चे के चले जाने पर उसकी यादों को संजोकर रखती है। हालाँकि, लेखिका ने मृत्यु को एक अंत नहीं माना, बल्कि "किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया" कहकर एक सकारात्मक दृष्टिकोण दिया। सोनजुही की लता के नीचे समाधि बनाकर उन्होंने गिल्लू की स्मृति को अमर कर दिया। जब भी वे उस पर लगी पीली कली को देखती हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है कि गिल्लू ही उस फूल के रूप में उन्हें चौंकाने आया है। यह उनकी भावना थी कि प्रेम कभी समाप्त नहीं होता, वह केवल रूप बदल लेता है।
 * "गिल्लू" रेखाचित्र के माध्यम से महादेवी वर्मा क्या संदेश देना चाहती हैं?
   "गिल्लू" रेखाचित्र के माध्यम से महादेवी वर्मा कई महत्त्वपूर्ण संदेश देना चाहती हैं। सबसे प्रमुख संदेश यह है कि मनुष्य और अन्य जीवों के बीच गहरा प्रेम और आत्मीयता संभव है। वह बताती हैं कि यदि हम पशु-पक्षियों के प्रति दयालुता और वात्सल्य का भाव रखते हैं, तो वे भी हमें अपना मानकर हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन जाते हैं। यह कहानी वात्सल्य तथा ममता जैसे भावों की गहराई को भी दर्शाती है। इसके अलावा, लेखिका यह भी संदेश देती हैं कि सभी प्राणियों को आज़ादी पसंद होती है और बंधन में उनका स्वाभाविक विकास बाधित होता है। अंत में, यह रेखाचित्र हमें सिखाता है कि हर छोटे से छोटे प्राणी का भी जीवन में महत्त्व होता है और उनकी मृत्यु के बाद उनकी यादों को सजीव रखना प्रेम की पराकाष्ठा है।

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