कक्षा दसवीं भारतीय संस्कृति और विरासत अध्याय 4 धर्म और दर्शन पाठ के प्रश्न और उत्तर


30 एक-लाइन प्रश्न और उत्तर
 * प्रश्न: मानव का स्वाभाविक गुण क्या है, जिस पर भारतीय सभ्यता आधारित है?
   उत्तर: धर्म।
 * प्रश्न: डॉ. राधाकृष्णन ने धर्म को क्या बताया है?
   उत्तर: जीवन की शक्ति।
 * प्रश्न: 'धर्म' शब्द का धातुगत अर्थ क्या होता है?
   उत्तर: धारण करना।
 * प्रश्न: भारतीय ऋषियों ने इंद्रियों से परे जाकर किस विशिष्ट तकनीक का विकास किया?
   उत्तर: योग का।
 * प्रश्न: दार्शनिकों ने मनुष्य के भीतर किस अमर, शाश्वत तत्व को आत्मा कहा है?
   उत्तर: पवित्र चेतना।
 * प्रश्न: सैंधव-सरस्वती सभ्यता के लोग किस योगीश्वर देवता की पूजा करते थे?
   उत्तर: तीन मुख वाले योगी (संभवतः शिव)।
 * प्रश्न: सैंधव सभ्यता में कौन सी पूजा काफी लोकप्रिय रही होगी?
   उत्तर: नारी (मातृदेवी) की पूजा।
 * प्रश्न: सैंधव लोग किस पेड़ की टहनियों की पूजा करते थे, जो अधिकांश मुद्राओं में दिखाई देती हैं?
   उत्तर: पीपल की।
 * प्रश्न: वेद शब्द किस धातु से बना है?
   उत्तर: 'विद्' धातु से।
 * प्रश्न: चारों वेदों में सबसे प्राचीन वेद कौन सा है?
   उत्तर: ऋग्वेद।
 * प्रश्न: ऋग्वेद के बाद के तीन वेदों के युग को क्या कहा गया?
   उत्तर: उत्तर वैदिक काल।
 * प्रश्न: वैष्णव धर्म में किसे समस्त विश्व की रक्षा करने वाला माना गया है?
   उत्तर: विष्णु को।
 * प्रश्न: वैष्णव धर्म की पूजा पद्धति क्या कहलाती थी?
   उत्तर: सात्वत विधि।
 * प्रश्न: शैव धर्म में अनेक सम्प्रदाय बने, उनमें से एक का नाम बताइए।
   उत्तर: पाशुपत शैव धर्म (या कापालिक, कालमुख, वीर शैव)।
 * प्रश्न: वैदिक दर्शन में कितने दार्शनिक संप्रदायों का उद्भव हुआ, जिन्हें षड्दर्शन कहा जाता है?
   उत्तर: छः।
 * प्रश्न: सांख्य दर्शन की रचना किसने की?
   उत्तर: कपिल मुनि ने।
 * प्रश्न: योग का मूल किस ग्रंथ में मिलता है?
   उत्तर: पतंजलि के योगसूत्र में।
 * प्रश्न: न्याय दर्शन के रचयिता किन्हें माना जाता है?
   उत्तर: गौतम ऋषि को।
 * प्रश्न: वैशेषिक दर्शन का मूल ग्रंथ किसने लिखा था?
   उत्तर: कणाद ने।
 * प्रश्न: वेदान्त दर्शन के अनुसार क्या सत्य है और क्या असत्य?
   उत्तर: ब्रह्म सत्य है, जगत असत्य है।
 * प्रश्न: जैन परम्परा के अनुसार कितने तीर्थकर हुए हैं?
   उत्तर: 24।
 * प्रश्न: महावीर स्वामी के अनुसार संसार कितने द्रव्यों से निर्मित है?
   उत्तर: 6 द्रव्यों से।
 * प्रश्न: जैन दर्शन में ज्ञान के कितने स्रोत माने गए हैं?
   उत्तर: 3 (प्रत्यक्ष, अनुमान, तीर्थकरों के उपदेश)।
 * प्रश्न: बौद्ध दर्शन की आधारशिला किसने रखी थी?
   उत्तर: गौतम बुद्ध ने।
 * प्रश्न: बौद्ध दर्शन के मूलाधार कितने आर्य सत्य हैं?
   उत्तर: चार आर्य सत्य।
 * प्रश्न: भक्ति आंदोलन का आरम्भ दक्षिण भारत में किनसे हुआ था?
   उत्तर: आलवारों एवं नायनारों से।
 * प्रश्न: रामानुजाचार्य ने किस सिद्धांत की स्थापना की?
   उत्तर: विशिष्टाद्वैतवाद की।
 * प्रश्न: राजस्थान में निम्बार्क संप्रदाय की प्रधान पीठ कहाँ स्थित है?
   उत्तर: सलेमाबाद (अजमेर) में।
 * प्रश्न: विश्नोई संप्रदाय के जन्मदाता कौन थे?
   उत्तर: जांभोजी।
 * प्रश्न: भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना का श्रेय किसे जाता है?
   उत्तर: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को।
20 अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न और उत्तर
 * प्रश्न: भारत की सभ्यता विश्व में प्राचीनतम क्यों मानी जाती है?
   उत्तर: भारत की सभ्यता विश्व में प्राचीनतम है क्योंकि यह धर्म पर आधारित है, जो मानव का स्वाभाविक गुण है और जिसने मानव की उच्च भावनाओं का विकास किया है।
 * प्रश्न: दर्शन और धर्म को एक सिक्के के दो पहलू क्यों कहा गया है?
   उत्तर: दर्शन हमें सत्य के रूप को दिखलाता है (सिद्धांत), जबकि धर्म जीवन की सही दृष्टि को (अभ्यास) प्रदान करता है, इसलिए ये एक सिक्के के दो पहलू हैं।
 * प्रश्न: सैंधव-सरस्वती सभ्यता के लोग मातृदेवी की आराधना कैसे करते थे?
   उत्तर: सैंधव-सरस्वतीवासी तेल, धूप आदि जलाकर मातृदेवी की आराधना करते थे, जिसकी पुष्टि खुदाई में मिली अनेक नारी मूर्तियों से होती है।
 * प्रश्न: ऋग्वेद में किन तीन वर्गों में देवी-देवताओं का उल्लेख मिलता है?
   उत्तर: ऋग्वेद में देवी-देवताओं को आकाश के देवता, अन्तरिक्ष के देवता और पृथ्वी के देवता - इन तीन वर्गों में बांटा गया है।
 * प्रश्न: उत्तर वैदिक काल में किन देवताओं की प्रधानता बढ़ गई थी?
   उत्तर: उत्तर वैदिक काल में प्राकृतिक शक्तियों के स्थान पर शिव, विष्णु, ब्रह्मा, पार्वती, दुर्गा, भैरव, गणेश आदि देवताओं की प्रधानता बढ़ गई थी।
 * प्रश्न: वैष्णव धर्म का उदय 'एकांतिक' धर्म के रूप में क्यों हुआ?
   उत्तर: वैष्णव धर्म का उदय 'एकांतिक' धर्म के रूप में हुआ क्योंकि यह एकमात्र 'हरि' (विष्णु) में एकाग्र भाव के साथ भक्ति करने वाली साधना पर आधारित था।
 * प्रश्न: षड्दर्शन किन्हें कहा जाता है और वे आस्तिक दर्शन क्यों कहलाते हैं?
   उत्तर: वैदिक दर्शन में उद्भव हुए छः दार्शनिक संप्रदायों को षड्दर्शन कहा जाता है। ये सभी दर्शन आस्तिक कहलाते हैं क्योंकि ये वेदों के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं।
 * प्रश्न: सांख्य दर्शन की मुख्य मान्यता क्या है?
   उत्तर: सांख्य दर्शन की मान्यता है कि सृष्टि पुरुष और प्रकृति से बनी है, जो परस्पर स्वतंत्र और निरपेक्ष हैं, तथा सभी वस्तुओं में इन्हीं के परिणामस्वरूप परिवर्तन होते हैं।
 * प्रश्न: योग दर्शन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
   उत्तर: योग दर्शन का मुख्य उद्देश्य मानसिक क्रियाओं की शुद्धि, नियंत्रण और परिवर्तन के माध्यम से पुरुष को प्रकृति से स्वतंत्र करना है, जिसके लिए अष्टांग योग को महत्व दिया गया है।
 * प्रश्न: न्याय दर्शन में ईश्वर की क्या भूमिका मानी गई है?
   उत्तर: न्याय दर्शन में ईश्वर को सृष्टि का रचयिता, पालनकर्ता और संहारकर्ता माना गया है।
 * प्रश्न: जैन दर्शन के अनुसार संसार किन छह द्रव्यों से निर्मित है?
   उत्तर: जैन दर्शन के अनुसार संसार जीव, पुद्गल (भौतिक तत्व), धर्म, अधर्म, आकाश और काल - इन छह द्रव्यों से निर्मित है।
 * प्रश्न: बौद्ध धर्म में 'प्रतीत्य समुत्पाद' से क्या अभिप्राय है?
   उत्तर: बौद्ध धर्म में 'प्रतीत्य समुत्पाद' दुःख के कारण रूपी अज्ञान चक्र को दर्शाता है, जिसका अर्थ है 'इसके होने से यह उत्पन्न होता है', और इसमें 12 क्रम होते हैं।
 * प्रश्न: भक्ति आंदोलन के किन्हीं दो मुख्य कारणों का उल्लेख कीजिए।
   उत्तर: भक्ति आंदोलन के दो मुख्य कारण समन्वय की प्रेरणा (हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति का प्रभाव) और ब्राह्मणवाद का बौद्धिक सिद्धांत (उसकी जड़ता) थे।
 * प्रश्न: रामानन्द ने भक्तिमार्ग को लोकप्रिय बनाने के लिए क्या विशेष कार्य किया?
   उत्तर: रामानन्द ने भक्तिमार्ग को लोकप्रिय बनाया और श्रीराम को जननायक बनाने का श्रेय उन्हीं को जाता है। उन्होंने जाति, वर्ग और स्त्री-पुरुष भेद से रहित नई भक्ति व्यवस्था का सूत्रपात किया।
 * प्रश्न: वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग का प्रमुख साहित्य क्या है?
   उत्तर: वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग का प्रमुख साहित्य ब्रह्म सूत्र, श्रीमद्भागवत और गीता को घोषित किया गया है, और उनके अनुसार श्री कृष्ण ही परब्रह्म हैं।
 * प्रश्न: सूफी शब्द की उत्पत्ति के संबंध में कोई एक विचार बताइए।
   उत्तर: सूफी शब्द की उत्पत्ति के संबंध में एक विचार यह है कि मदीना में मुहम्मद साहब द्वारा बनवाई गई मस्जिद के बाहर 'सूफा' (चबूतरे) पर आध्यात्मिक शरण लेने वाले लोग सूफी कहलाए।
 * प्रश्न: भारत में सूफियों के मुख्य प्रारंभिक केंद्र कौन से थे?
   उत्तर: भारत में सूफियों के मुख्य प्रारंभिक केंद्र मुल्तान और पंजाब थे, जो धीरे-धीरे कश्मीर, बिहार, बंगाल और दक्षिण में फैल गए।
 * प्रश्न: राजस्थान में रामानंदी सम्प्रदाय की एक प्रमुख गद्दी कहाँ स्थित है?
   उत्तर: राजस्थान में रामानंदी सम्प्रदाय की एक गद्दी जयपुर में 'गलता जी' नामक स्थान में स्थित है।
 * प्रश्न: राजस्थान में जांभोजी द्वारा चलाए गए संत सम्प्रदाय का नाम क्या है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
   उत्तर: जांभोजी द्वारा चलाया गया संत सम्प्रदाय विश्नोई संप्रदाय है, जो अपने 29 उपदेशों, जीव व वृक्ष रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर करने की परम्परा और सत्य व सदाचार पर बल देने के लिए प्रसिद्ध है।
 * प्रश्न: राजस्थान के किन्हीं दो लोक देवताओं के नाम बताइए जो सांपों के देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
   उत्तर: राजस्थान में गोगा जी और तेजाजी दो प्रमुख लोक देवता हैं जो सांपों के देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
10 लघु उत्तरात्मक प्रश्न और उत्तर
 * प्रश्न: भारतीय आध्यात्मिकता में दर्शन और धर्म का क्या संबंध है? स्पष्ट करें।
   उत्तर: भारतीय आध्यात्मिकता में दर्शन और धर्म का गहरा संबंध है, इन्हें एक सिक्के के दो पहलू माना जाता है। दर्शन जीवन के रहस्य और अस्तित्व की खोज से जन्मा है। भारतीय ऋषियों ने इन्द्रियों से परे जाकर योग जैसी तकनीकों का विकास किया, जिससे उन्हें आत्मा (एक अमर, शाश्वत, पवित्र चेतना) का ज्ञान हुआ। दर्शन हमें सत्य के रूप को दिखलाता है, यह सिद्धांत है, जबकि धर्म जीवन की सही दृष्टि को प्रस्तुत करता है, यह अभ्यास है। इस प्रकार, दर्शन सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करता है और धर्म उस ज्ञान को जीवन में उतारने का मार्ग दिखाता है, जिससे मानव का सर्वांगीण विकास होता है।
 * प्रश्न: सैंधव-सरस्वती सभ्यता की धार्मिक मान्यताओं का वर्णन करें।
   उत्तर: सैंधव-सरस्वती सभ्यता के लोगों की गहरी धार्मिक मान्यताएँ थीं, जिनकी जानकारी उनकी कलाकृतियों, मुद्राओं और कब्रों से मिलती है। वे मुख्य रूप से एक तीन मुख वाले योगी (पशुपति शिव) की पूजा करते थे, जो योग मुद्रा में बैठे दिखाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, मातृदेवी या प्रकृति देवी की पूजा भी काफी लोकप्रिय थी, जिनकी अनेक मृण्मूर्तियाँ मिली हैं। ये लोग वृक्षों (जैसे पीपल) और विभिन्न पशु-पक्षियों (जैसे बैल) को भी पूजते थे। खुदाई में यज्ञ वेदियाँ और स्नानागार मिलने से अग्नि और जल पूजा का भी अनुमान लगाया जाता है।
 * प्रश्न: वैदिक धर्म में देवताओं का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया था?
   उत्तर: ऋग्वेद में 33 कोटि (प्रकार) देवी-देवताओं का उल्लेख मिलता है, जिन्हें तीन मुख्य वर्गों में बांटा गया था। पहला वर्ग आकाश के देवता थे, जिनमें द्यौस, वरुण, मित्र, सूर्य, सविता, पूषण, उषा, अदिति और अश्विन प्रमुख थे। दूसरा वर्ग अन्तरिक्ष के देवता थे, जिनमें इंद्र, मरुत और वात आदि शामिल थे। तीसरा वर्ग पृथ्वी के देवता थे, जिनमें स्वयं पृथ्वी, अग्नि, सोम, बृहस्पति और सरस्वती आदि आते थे। उत्तर वैदिक काल में प्राकृतिक शक्तियों के स्थान पर शिव, विष्णु, ब्रह्मा जैसे नए देवताओं की प्रधानता बढ़ी और बहुदेववाद व यज्ञवाद का विकास हुआ।
 * प्रश्न: वैष्णव और शैव धर्म के उदय और प्रमुख विशेषताओं का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
   उत्तर: वैष्णव धर्म में विष्णु को समस्त विश्व का रक्षक माना गया है। इसका उदय 'एकांतिक' धर्म के रूप में हुआ, जो हरि में एकाग्र भक्ति पर बल देता था। इसकी पूजा पद्धति 'सात्वत विधि' कहलाती थी, जिसके मुख्य अंग भक्ति, आत्मसमर्पण और अहिंसा थे। वासुदेव-कृष्ण जैसे व्यक्तियों ने इसका प्रचार किया, जिससे इसे 'वासुदेव धर्म' भी कहा गया। शैव धर्म की उत्पत्ति अत्यंत प्राचीन है, जिसमें शिव की परिकल्पना में अनेक संस्कृतियों का समावेश है। सिंधु सभ्यता से लेकर वैदिक काल तक शिव की आराधना होती रही थी। शैव धर्म में पाशुपत, कापालिक, कालमुख और वीर शैव जैसे अनेक संप्रदाय बने, और शैव सिद्धांत संप्रदाय का प्रचार मुख्य रूप से दक्षिण के तमिल प्रदेशों में हुआ।
 * प्रश्न: जैन दर्शन के प्रमुख सिद्धांत 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) को स्पष्ट करें।
   उत्तर: जैन दर्शन में 'स्यादवाद' या 'अनेकांतवाद' एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है जो ज्ञान और सत्य की सापेक्षता पर बल देता है। इसके अनुसार, संसार की कोई भी वस्तु अपने आप में पूर्ण या निरपेक्ष नहीं है; उसे विभिन्न दृष्टियों (पहलुओं) से समझा जा सकता है। यह सिद्धांत बताता है कि ज्ञान विभिन्न रूपों में व्यक्त किया जा सकता है, जैसे 'है', 'नहीं है', 'है और नहीं है', 'कहा नहीं जा सकता' आदि। इसका तात्पर्य यह है कि किसी भी कथन को पूर्ण सत्य नहीं माना जा सकता, बल्कि वह केवल एक विशेष दृष्टिकोण से ही सत्य होता है। यह ज्ञान की बहुआयामी प्रकृति को स्वीकार करता है।
 * प्रश्न: बौद्ध दर्शन के चार आर्य सत्यों और अष्टांगिक मार्ग का संक्षिप्त वर्णन करें।
   उत्तर: बौद्ध दर्शन के मूलाधार चार आर्य सत्य हैं:
   * दुःख: संसार दुःखमय है।
   * दुःख समुदय: दुःख का कारण है (अर्थात् तृष्णा)।
   * दुःख निरोध: दुःख का निवारण संभव है।
   * अष्टांगिक मार्ग: दुःख निरोध का मार्ग।
     दुखों से मुक्ति पाने के लिए गौतम बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग बताए हैं, जो हैं: सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् चरित्र, सम्यक् आजीविका, सम्यक् प्रयत्न, सम्यक् विचार, और सम्यक् समाधि (ज्ञान)। ये आठ मार्ग व्यक्ति को नैतिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए निर्देशित करते हैं।
 * प्रश्न: भक्ति आंदोलन के उदय के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालिए।
   उत्तर: भक्ति आंदोलन मध्यकालीन भारत में एक महत्वपूर्ण सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन था, जिसके उदय के कई कारण थे। इनमें प्रमुख थे: समन्वय की प्रेरणा (हिन्दू और मुस्लिम संस्कृतियों के संपर्क से उपजा समन्वयवादी विचार), ब्राह्मणवाद का बौद्धिक सिद्धांत (उस समय की धार्मिक जड़ता और आडंबरों के प्रति असंतोष), मुस्लिम आक्रमण (जिसने लोगों को सुरक्षा और आध्यात्मिक शांति की तलाश में प्रेरित किया), वर्ण व्यवस्था की कठोरता (जातिगत भेदभाव से मुक्ति की चाह), इस्लाम और ईसाई धर्म का प्रभाव (उनके एकेश्वरवादी और समानतावादी विचारों का प्रभाव), दिल्ली सल्तनत का धर्म राज्य का विचार (जिसने हिन्दू समाज में प्रतिक्रिया उत्पन्न की), तथा सूफी संतों और हिन्दू धर्म सुधारकों का योगदान (जिन्होंने सरल भक्ति और भाईचारे का प्रचार किया)।
 * प्रश्न: राजस्थान में विश्नोई संप्रदाय और दादू संप्रदाय की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें।
   उत्तर: राजस्थान में निर्गुण भक्ति की अनेक धाराएँ विकसित हुईं। विश्नोई संप्रदाय जांभोजी द्वारा स्थापित किया गया, जिनके 29 उपदेशों के कारण इसे 'विश्नोई' कहा गया। यह संप्रदाय सत्य, सदाचार, निर्गुण निरंजन की भक्ति, जीव रक्षा और जाति-पाति के भेद की अमान्यता पर बल देता है। यह वृक्षों और जीवों की रक्षा के लिए अपने प्राणों तक को न्यौछावर करने के लिए प्रसिद्ध है। दादू संप्रदाय दादू जी द्वारा प्रवर्तित है, जिन्होंने निर्गुण ब्रह्म की उपासना का उपदेश दिया। इन्होंने मूर्तिपूजा, भेदभाव और आडंबरों का विरोध किया तथा ज्ञान मार्ग और गुरु की महत्ता पर बल देते हुए निराकार ईश्वर की उपासना का प्रचार किया। उनका प्रमुख पीठ सांभर के अंतर्गत नरेना ग्राम में स्थित है।
 * प्रश्न: राजस्थान के किन्हीं दो प्रमुख लोक देवताओं के जीवन और उनकी मान्यताओं पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
   उत्तर:
   * गोगा जी: ये चौहान वंश के राजपूत थे, जिनका जन्म 15वीं शताब्दी में ददरेवा (चूरू) में हुआ था। गोगामेड़ी (नोहर) में इनकी समाधि है, जहाँ भाद्रपद की नवमी को भव्य मेला भरता है। इन्हें सांपों के देवता के रूप में पूजा जाता है, क्योंकि इन्होंने सांपों से लोगों की रक्षा की थी। इनकी मान्यता राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी है। गोगा जी का संबंध खेजड़ी के पेड़ से माना जाता है और इनकी छड़ी की पूजा होती है। हिन्दू और मुसलमान दोनों इन्हें श्रद्धा से पूजते हैं।
   * तेजाजी: ये 12वीं शताब्दी के ऐतिहासिक पुरुष थे और इन्हें भी सांपों के देवता के रूप में पूजा जाता है। ये मारवाड़ व अजमेर संभाग में लोकप्रिय हैं और जाटों के आराध्य देव हैं। तेजाजी को परम गौरक्षक, गायों के मुक्तिदाता तथा कृषि कार्यों के उपकारक देवता के रूप में भी पूजा जाता है। इन्होंने लाछा गूजरी की गायों को मेवों से छुड़ाते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। इनकी याद में भाद्रपद सुदी दशमी (तेजा दशमी) को ब्यावर के तेजा चौक में मेला भरता है।
 * प्रश्न: राजस्थान की किन्हीं दो प्रमुख लोक देवियों और उनसे जुड़ी मान्यताओं का वर्णन करें।
   उत्तर:
   * करणीमाता: इन्हें 'चूहों की देवी' के नाम से जाना जाता है और इनका प्रसिद्ध मंदिर बीकानेर के देशनोक में स्थित है। इनका बचपन का नाम 'रिदबाई' था। मंदिर का वर्तमान स्वरूप सूरत सिंह ने दिया था। करणीमाता का मेला प्रतिवर्ष चैत्र व आश्विन नवरात्रों में भरता है। मंदिर में बड़ी संख्या में चूहे स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं, जिन्हें पवित्र माना जाता है।
   * कैला देवी: इनका मंदिर करौली जिले में है। कैला देवी करौली के यदुवंश की कुलदेवी मानी जाती हैं। प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल अष्टमी को इनके मंदिर में भव्य मेला भरता है, जहाँ लांगुरिया नृत्य व गीत गाया जाता है। मंदिर के सामने भक्त बोहरा की छतरी स्थित है। इस देवी को शक्ति और लोक कल्याण का प्रतीक माना जाता है।

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