I. एक-पंक्ति वाले प्रश्नोत्तर (One Liner Questions & Answers)
- खनिज क्या हैं?
- उत्तर: प्राकृतिक पदार्थ जो भूमि को खोदकर (खनन द्वारा) प्राप्त किए जाते हैं।
- धात्विक खनिज किसे कहते हैं?
- उत्तर: वह खनिज जिसमें किसी धातु का अंश हो।
- लौह प्रधान धात्विक खनिज का एक उदाहरण दें।
- उत्तर: लौह अयस्क (Iron Ore), क्रोमाईट, पाइराइट।
- अलौह प्रधान धात्विक खनिज का एक उदाहरण दें।
- उत्तर: सोना, चांदी, तांबा, जस्ता, बॉक्साइट।
- अधात्विक खनिज का एक उदाहरण दें।
- उत्तर: चूना पत्थर, डालोमाइट, अभ्रक, जिप्सम।
- ऊर्जा खनिज के मुख्य प्रकार क्या हैं?
- उत्तर: खनिज ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस) और अणु शक्ति खनिज (यूरेनियम, थोरियम)।
- भारत में लौह अयस्क का कौन सा प्रकार सर्वाधिक पाया जाता है?
- उत्तर: हेमेटाइट (Hemmatite) और मैग्नेटाइट (Magnetite)।
- लौह अयस्क उत्पादन में भारत का कौन सा राज्य प्रथम है?
- उत्तर: ओडिशा।
- बैलाडिला खान किस राज्य में स्थित है और किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?
- उत्तर: छत्तीसगढ़ (बस्तर जिला), लौह अयस्क के लिए।
- तांबे का सर्वाधिक उपयोग किस उद्योग में होता है?
- उत्तर: विद्युत उद्योगों में (लगभग 60%)।
- तांबे का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन सा है?
- उत्तर: मध्य प्रदेश।
- राजस्थान में तांबे की मुख्य खान कहाँ है?
- उत्तर: झुंझुनू (खेतड़ी-सिंघाना)।
- बॉक्साइट किस धातु का मुख्य स्रोत है?
- उत्तर: एल्यूमिनियम।
- बॉक्साइट उत्पादन में भारत का प्रथम स्थान किस राज्य का है?
- उत्तर: ओडिशा।
- अभ्रक उत्पादन में विश्व में भारत का कौन सा स्थान है?
- उत्तर: प्रथम स्थान (विश्व का 70 से 80% उत्पादन)।
- भारत में अभ्रक का सर्वाधिक उत्पादन किस राज्य में होता है?
- उत्तर: आंध्र प्रदेश।
- सीसा और जस्ता का सर्वाधिक भंडार और उत्पादन किस राज्य में है?
- उत्तर: राजस्थान (95%)।
- गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों का एक उदाहरण दें।
- उत्तर: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, बायोगैस।
- सर्वोच्च श्रेणी का कोयला कौन सा है?
- उत्तर: एन्थ्रेसाइट कोयला।
- भारत में सामान्यतः कौन सा कोयला सर्वाधिक पाया जाता है?
- उत्तर: मध्यम श्रेणी का बिटुमिनस कोयला।
- कोयला उत्पादन में भारत का सबसे बड़ा राज्य कौन सा है?
- उत्तर: छत्तीसगढ़।
- 'तरल सोना' (Liquid Gold) किसे कहा जाता है?
- उत्तर: पेट्रोलियम (खनिज तेल)।
- भारत में खनिज तेल की पहली खोज कहाँ हुई थी?
- उत्तर: डिगबोई, असम (1860)।
- वर्तमान में राजस्थान के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र कौन से हैं?
- उत्तर: मंगलम, ऐश्वर्या, शक्ति, भाग्यम, विजया, मुढ़ा।
- जल विद्युत की कोई एक विशेषता बताइए।
- उत्तर: प्रदूषण रहित एवं असमाप्य ऊर्जा संसाधन।
- भारत का पहला विद्युत संयंत्र कहाँ स्थापित किया गया था?
- उत्तर: दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल (1897)।
- भारत का सबसे बड़ा जल विद्युत गृह कौन सा है?
- उत्तर: टिहरी बांध (उत्तराखंड) भागीरथी नदी पर (2400 मेगावाट)।
- परमाणु ऊर्जा कितने विधियों से प्राप्त की जाती है?
- उत्तर: दो विधियों से: विखंडन और संयोजन विधि।
- भारत में परमाणु ऊर्जा का उदय एवं विकास कब और कहाँ हुआ?
- उत्तर: 1955 में ट्राम्बे (मुंबई के निकट), महाराष्ट्र में पहली परमाणु भट्टी की स्थापना।
- पवन ऊर्जा उत्पादन में विश्व में भारत का कौन सा स्थान है?
- उत्तर: पाँचवाँ स्थान।
II. अति-लघुत्तरात्मक प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Questions & Answers)
- खनिजों से क्या अभिप्राय है?
- उत्तर: खनिज प्राकृतिक, क्रिस्टलीय (रवेदार) रासायनिक संगठन और विशिष्ट संरचना वाले पदार्थ होते हैं, जो भूमि को खोदकर प्राप्त किए जाते हैं।
-
खनिजों के कोई दो मुख्य उपयोग बताइए।
-
उत्तर:
- धात्विक खनिजों से मशीनों का निर्माण।
- खनिज ईंधन से मशीनों को चलाने के लिए शक्ति (ऊर्जा) प्राप्त होती है।
-
उत्तर:
- धात्विक और अधात्विक खनिजों में मुख्य अंतर क्या है?
- उत्तर: धात्विक खनिजों में धातु का अंश होता है, जबकि अधात्विक खनिजों में धातु का अंश नहीं होता है।
- लौह प्रधान और अलौह प्रधान धात्विक खनिजों में क्या अंतर है?
- उत्तर: लौह प्रधान खनिजों में लोहे का अंश और प्रधानता पाई जाती है (जैसे लौह अयस्क), जबकि अलौह प्रधान खनिजों में लोहे का अंश नहीं पाया जाता है (जैसे तांबा, सोना)।
- भारत में लौह अयस्क के प्रमुख उत्पादक चार राज्यों के नाम लिखिए।
- उत्तर: ओडिशा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, गोवा, झारखंड। (कोई भी चार)
-
तांबे की दो मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
-
उत्तर:
- शुद्ध रूप में बहुत लचीला और आघातवर्धनीय है।
- यह एक श्रेष्ठ विद्युत चालक है।
-
उत्तर:
- तांबा किन धातुओं के साथ मिलकर मिश्र धातु बनाता है? कोई दो उदाहरण दीजिए।
- उत्तर: यह एल्युमीनियम के साथ पीतल, रांगा के साथ कांसा, और निकल के साथ जर्मन सिल्वर बनाता है।
- बॉक्साइट के कोई दो मुख्य उपयोग लिखिए।
- उत्तर: बिजली के तार, वायुयान, अग्निबाण (मिसाइल), जहाजों और घरेलू बर्तनों के निर्माण में।
-
अभ्रक की दो विशिष्ट भौतिक विशेषताएँ बताइए।
-
उत्तर:
- नम्य, हल्का, चमकीला, पारदर्शी और परतदार होता है।
- यह श्रेष्ठ विद्युतरोधी एवं उच्च वॉल्टेज सहन क्षमता वाला होता है।
-
उत्तर:
- अभ्रक का सर्वाधिक उपयोग किस उद्योग में होता है और क्यों?
- उत्तर: विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में, क्योंकि यह विद्युतरोधी है और उच्च वोल्टेज सहन कर सकता है।
- सीसा (Lead) और जस्ता (Zinc) के उपयोग बताइए।
- उत्तर: जस्ते का उपयोग जंगरोधक कार्यों, रसायन और शुष्क बैटरी बनाने में होता है, जबकि सीसे का उपयोग पीतल, कांसा और इंजन सहित कई कार्यों में होता है।
-
परम्परागत और गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन क्या हैं?
-
उत्तर:
- परम्परागत: ऊर्जा के पुराने और समाप्य स्रोत (जैसे कोयला, पेट्रोलियम, जल विद्युत)।
- गैर-परम्परागत: ऊर्जा के आधुनिक, असमाप्य स्रोत (जैसे सौर, पवन, अणुशक्ति ऊर्जा)।
-
उत्तर:
- कोयले की विभिन्न श्रेणियों के नाम कॉर्बन की मात्रा के आधार पर बताइए।
- उत्तर: एन्थ्रेसाइट (सर्वोच्च), बिटुमिनस (द्वितीय), लिग्नाइट (घटिया किस्म का भूरा), और पीट (चतुर्थ श्रेणी का)।
- खनिज तेल (पेट्रोलियम) को 'तरल सोना' क्यों कहा जाता है?
- उत्तर: यह दुर्लभता, विविध उपयोगों, उच्च ताप देने की शक्ति और अपशिष्ट न बचने के कारण मूल्यवान होने से इसे 'तरल सोना' कहा जाता है।
-
भारत में तेल उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों को कितने भागों में विभाजित किया गया है? नाम बताइए।
-
उत्तर: दो भाग:
- स्थलीय क्षेत्र (जैसे असम, गुजरात, राजस्थान)।
- अपतटीय क्षेत्र (जैसे मुंबई हाई, गुजरात अपतटीय क्षेत्र)।
-
उत्तर: दो भाग:
-
जल विद्युत के दो लाभ बताइए।
-
उत्तर:
- यह पूर्ण रूप से प्रदूषण रहित है।
- उत्पादन लागत कम आती है (केवल रख-रखाव खर्च)।
-
उत्तर:
- परमाणु ऊर्जा कैसे प्राप्त की जाती है?
- उत्तर: यूरेनियम और थोरियम जैसे परमाणु खनिजों के विखंडन (परमाणु का टूटना) या संयोजन (परमाणुओं का मिलना) विधि द्वारा।
- जैविक ऊर्जा (बायोगैस) से क्या अभिप्राय है?
- उत्तर: जैविक संसाधनों (जैसे गोबर, शहरों के कूड़ा-करकट, मानव मल-मूत्र) से उत्पन्न ऊर्जा को जैविक ऊर्जा या बायोगैस कहते हैं।
- पवन ऊर्जा के उत्पादन में भारत के प्रमुख चार राज्यों के नाम लिखिए।
- उत्तर: तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान। (कोई भी चार)
- सौर ऊर्जा के कोई दो उपयोग बताइए।
- उत्तर: सोलर वाटर हीटर, सोलर लालटेन, सोलर ड्रायर, खाना पकाने और बिजली बनाने में।
III. लघुत्तरात्मक प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions & Answers)
- किसी देश के सामाजिक, आर्थिक और वैज्ञानिक विकास में खनिजों की क्या भूमिका है?
- उत्तर: खनिज किसी देश की सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक और वैज्ञानिक प्रगति के मुख्य आधार स्तंभ हैं। ये मशीनों, आवासों के निर्माण और औद्योगिक ईंधन के रूप में शक्ति प्रदान करके उद्योगों को आधार देते हैं। नमक, आयोडीन जैसे खनिज भोजन में जीवनदायी घटक हैं, जिससे मानव का जीवन सुगम और आनंददायक बनता है।
- लौह अयस्क के उत्पादन और वितरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
- उत्तर: भारत विश्व में लौह अयस्क के भंडार की दृष्टि से दूसरा बड़ा राष्ट्र है। यहां हेमेटाइट और मैग्नेटाइट प्रकार का लौह अयस्क मिलता है। प्रमुख उत्पादक राज्य ओडिशा (सबसे बड़ा उत्पादक), कर्नाटक (बेल्लारी, चिकमगलूर), छत्तीसगढ़ (बस्तर, दुर्ग, बैलाडिला), गोवा, और झारखंड हैं। भारत अपने लौह अयस्क का निर्यात जापान और यूरोपीय देशों को करता है।
-
भारत में अभ्रक के उत्पादन और उपयोग पर प्रकाश डालिए।
- उत्तर: उत्पादन: भारत अभ्रक उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है। यह आग्नेय और कायांतरित शैलों में पाया जाता है। आंध्र प्रदेश (नेल्लौर) प्रथम स्थान पर है, जिसके बाद राजस्थान (भीलवाड़ा, उदयपुर) और झारखंड (हजारीबाग, कोडरमा) का स्थान है।
- उपयोग: अभ्रक नम्य, पारदर्शी, और उच्च विद्युतरोधी क्षमता वाला होता है। इसका उपयोग विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों (विद्युत मोटरें, डायनेमो), औषधि निर्माण, वायुयान, टेलीफोन, रेडियो, दूरदर्शन और मोटर आदि में किया जाता है।
-
परम्परागत ऊर्जा संसाधनों के महत्व और उनकी सीमाओं का वर्णन करें।
- उत्तर: परम्परागत संसाधन (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलविद्युत) लंबे समय से शक्ति का मुख्य स्रोत रहे हैं। ये आर्थिक विकास, औद्योगिक उत्पादन, परिवहन, और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के लिए आवश्यक हैं।
- सीमाएँ: कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस समाप्य (Finite) संसाधन हैं। कोयला और पेट्रोलियम अत्यधिक प्रदूषण फैलाते हैं, और इनका उपयोग सीमित होने के कारण देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ये पर्याप्त नहीं हैं।
-
कोयले का वर्गीकरण कॉर्बन की मात्रा के आधार पर किस प्रकार किया जाता है?
-
उत्तर: कॉर्बन की मात्रा के आधार पर कोयले को चार भागों में बांटा गया है:
- एन्थ्रेसाइट (80-95% कॉर्बन): सर्वोच्च श्रेणी, कठोर, चमकदार, कम धुआं और सर्वाधिक ताप देता है।
- बिटुमिनस (60-80% कॉर्बन): द्वितीय श्रेणी, मध्यम गुणवत्ता, भारत में सामान्यतः यही पाया जाता है, इससे कोकिंग कोयला बनाया जाता है।
- लिग्नाइट (40-55% कॉर्बन): घटिया किस्म का भूरा कोयला, तापीय विद्युत उत्पादन में अधिक उपयोग।
- पीट (15-35% कॉर्बन): चतुर्थ श्रेणी, कोयला बनने की प्रारंभिक अवस्था, अधिक धुआं और कम ऊष्मा देता है।
-
उत्तर: कॉर्बन की मात्रा के आधार पर कोयले को चार भागों में बांटा गया है:
-
खनिज तेल (पेट्रोलियम) के निर्माण और उपयोग पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
- उत्तर: निर्माण: यह लाखों वर्षों में वनस्पति एवं जीव-जंतुओं के अवशेषों के नदियों की घाटियों या सागरों में कीचड़, मिट्टी और बालू में दबे रह जाने, तथा भूगर्भिक ताप, दाब और रासायनिक क्रियाओं के फलस्वरूप बनता है। यह अवसादी चट्टानों में पाया जाता है।
- उपयोग: यह कोयले से हल्का होता है, पर इसकी ताप शक्ति दुगुनी होती है। इसका उपयोग मोटर वाहनों, वायुयानों, रेलवे में अंतर्दहन इंजन के ईंधन के रूप में, साथ ही उर्वरक, कृत्रिम धागे और कोलतार जैसे उप-उत्पादों के लिए किया जाता है।
-
जल विद्युत की स्थापना के लिए आवश्यक अनुकूल परिस्थितियाँ और इसके लाभ लिखिए।
- उत्तर: अनुकूल परिस्थितियाँ: जल की उपलब्धता, नदी घाटियों पर बांधों का निर्माण, और ढाल वाले क्षेत्र जहाँ पानी को नियंत्रित रूप से गिराया जा सके।
-
लाभ:
- यह असमाप्य और प्रदूषण रहित ऊर्जा संसाधन है।
- उत्पादन में जल का ह्रास नहीं होता, जिसका उपयोग पीने, सिंचाई और उद्योगों में किया जा सकता है।
- एक बार निर्माण होने के बाद उत्पादन लागत बहुत कम हो जाती है।
-
गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों के विकास पर जोर क्यों दिया जा रहा है?
-
उत्तर:
- परम्परागत स्रोत (कोयला, पेट्रोलियम) समाप्य हैं।
- जीवाश्म ईंधन से प्रदूषण अत्यधिक होता है।
- गैर-परम्परागत स्रोत (जैसे सौर, पवन, ज्वारीय ऊर्जा) असीमित और असमाप्य हैं।
- ये पर्यावरण के अनुकूल (प्रदूषण रहित) होते हैं और लंबी अवधि में कम लागत वाले होते हैं।
-
उत्तर:
-
भारत में पवन ऊर्जा की वर्तमान स्थिति और क्षमता पर प्रकाश डालिए।
- उत्तर: भारत पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता में विश्व में पाँचवें स्थान पर है।
- क्षमता: भारत में लगभग 4 लाख पवन चक्कियाँ लगाई जा सकती हैं, जिससे बड़ी मात्रा में शक्ति प्राप्त की जा सकती है।
- उत्पादन: वर्तमान में लगभग 13000 मेगावाट विद्युत उत्पन्न की जा रही है।
- प्रमुख राज्य: तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान अग्रणी उत्पादक राज्य हैं।
-
सौर ऊर्जा क्या है? भारत में इसके विकास की अपार संभावनाएँ क्यों हैं?
- उत्तर: सौर ऊर्जा सूर्य की किरणों को सौर सेल (फोटोवोल्टिक) और सौर तापीय प्रौद्योगिकी द्वारा ऊर्जा में परिवर्तित करने से प्राप्त होती है।
- संभावनाएँ: भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है। उत्तरी पर्वतीय प्रदेश को छोड़कर देश के सभी भागों में 8 से 10 माह तक पर्याप्त मात्रा में सूर्यताप मिलता है। भारत में प्रतिवर्ग किमी क्षेत्र में 20 मेगावाट विद्युत सौर विकिरण से प्राप्त की जा सकती है। यह लागत प्रतिस्पर्धी और पर्यावरण अनुकूलन है।
IV. निबंधात्मक प्रश्नोत्तर (Essay Type Questions & Answers)
-
खनिज क्या हैं? धात्विक और अधात्विक खनिजों का वर्गीकरण सोदाहरण (उदाहरण सहित) स्पष्ट कीजिए।
- उत्तर: खनिज की परिभाषा: खनिज प्राकृतिक, क्रिस्टलीय रासायनिक संगठन और विशिष्ट संरचना वाले पदार्थ होते हैं, जो भूमि को खोदकर (खनन द्वारा) प्राप्त किए जाते हैं। ये मानव जीवन को सुगम, सुविधामय और आनंददायक बनाने में महत्वपूर्ण हैं।
-
खनिजों का वर्गीकरण: खनिजों को उनके भौतिक और रासायनिक गुणों के आधार पर मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जाता है:
-
धात्विक खनिज (Metallic Minerals): जिसमें किसी धातु का अंश होता है। इन्हें आगे दो प्रकारों में बांटा जाता है:
- लौह प्रधान: जिसमें लोहे के अंश की प्रधानता होती है। उदाहरण: लौह अयस्क (Iron Ore), क्रोमाईट, पाइराइट।
- अलौह प्रधान: जिसमें लोहे का अंश नहीं पाया जाता है। उदाहरण: सोना, चांदी, तांबा, जस्ता, बॉक्साइट, टिन।
- अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals): ऐसे खनिज जिसमें किसी धातु का अंश नहीं होता है। उदाहरण: चूना पत्थर, डालोमाइट, अभ्रक, जिप्सम।
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ऊर्जा खनिज (Energy Minerals): जिसे ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। इन्हें भी दो प्रकारों में बांटा जाता है:
- खनिज ईंधन: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस।
- अणु शक्ति खनिज: यूरेनियम, थोरियम।
-
धात्विक खनिज (Metallic Minerals): जिसमें किसी धातु का अंश होता है। इन्हें आगे दो प्रकारों में बांटा जाता है:
- निष्कर्ष: खनिजों की यह विविधता ही किसी देश की औद्योगिक और वैज्ञानिक नींव का आधार बनती है।
-
तांबा और बॉक्साइट के उत्पादन और वितरण पर एक विस्तृत लेख लिखिए।
-
उत्तर:
-
तांबा (Copper):
- उपयोग: प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक तांबा महत्वपूर्ण है। इसका उपयोग तारों, विद्युत उपकरणों (मोटर, ट्रांसफार्मर), नलियों, बर्तनों और मिश्र धातु (पीतल, कांसा) बनाने में होता है।
- वितरण/उत्पादन: भारत में तांबे के भंडार सीमित हैं। मध्य प्रदेश (बालाघाट-मलाजखंड) भारत का प्रथम तांबा उत्पादक राज्य है। राजस्थान (झुंझुनू-खेतड़ी-सिंघाना) और झारखंड (सिंहभूमि, हजारीबाग) अन्य प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।
-
बॉक्साइट (Bauxite) - एल्यूमिनियम का स्रोत:
- उपयोग: बॉक्साइट से एल्यूमिना और फिर एल्यूमिनियम प्राप्त होता है। एल्यूमिनियम हल्का, लचीला, विद्युत चालक और जंग रहित होता है। इसका उपयोग बिजली के तार, वायुयान, मिसाइल, जहाजों और घरेलू बर्तनों में होता है।
- वितरण/उत्पादन: ओडिशा बॉक्साइट उत्पादन में प्रथम स्थान पर है (कोरापुट, कालाहांडी, सम्बलपुर)। गुजरात (जामनगर, भावनगर), झारखंड (गुमला, लोहारदंगा), महाराष्ट्र (कोल्हापुर) और छत्तीसगढ़ (सरगुजा, रायगढ़) अन्य प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
-
तांबा (Copper):
- निष्कर्ष: ये दोनों खनिज अलौह धात्विक श्रेणी में आते हैं और देश के औद्योगिक विकास, विशेषकर विद्युत और विमानन/परिवहन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
-
उत्तर:
-
ऊर्जा संसाधन क्या हैं? भारत में ऊर्जा संसाधनों की आवश्यकता और महत्व का विस्तृत वर्णन कीजिए।
-
उत्तर:
- ऊर्जा संसाधन से अभिप्राय: वे जैविक एवं अजैविक पदार्थ जिनके उपयोग से शक्ति (ऊर्जा) प्राप्त होती है, ऊर्जा संसाधन कहलाते हैं। ऊर्जा किसी भी देश के सर्वांगीण विकास के लिए एक अनिवार्य घटक है।
-
आवश्यकता एवं महत्व:
- आर्थिक विकास में वृद्धि: ऊर्जा, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि और देश के आर्थिक विकास की गति को निर्धारित करती है।
- औद्योगिक उत्पादन: सभी उद्योग (लौह इस्पात से लेकर वस्त्र उद्योग तक) मशीनें चलाने, कच्चे माल के शोधन और उत्पादों के निर्माण के लिए ऊर्जा पर निर्भर हैं।
- परिवहन और संचार: मोटर, रेल, वायुयान, और संचार प्रणालियाँ (इंटरनेट, टेलीफोन) पूरी तरह से ऊर्जा पर आधारित हैं।
- कृषि विकास: सिंचाई, ट्रैक्टर, और कृषि उपकरणों के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है।
- प्रति व्यक्ति आय और जीवन स्तर: ऊर्जा की उपलब्धता से प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है और मानव जीवन सुविधामय बनता है (घरेलू उपकरण, बिजली)।
- राष्ट्रीय और सुरक्षा आवश्यकताएं: रक्षा क्षेत्र (मिसाइल, वायुयान), अंतरिक्ष खोजों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा सहित उच्च क्षमता वाली ऊर्जा अनिवार्य है।
- निष्कर्ष: आज के युग में जो देश जितनी अधिक ऊर्जा उत्पादित करता है, वह उतना ही विकसित देश कहलाता है। देश की बढ़ती जनसंख्या और विकास लक्ष्यों के लिए ऊर्जा संसाधनों का महत्व निरंतर बढ़ रहा है।
-
उत्तर:
-
परमाणु ऊर्जा क्या है? भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और प्रमुख परमाणु खनिजों का उल्लेख कीजिए।
-
उत्तर:
- परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy): इसे नाभिकीय ऊर्जा भी कहते हैं। यह यूरेनियम और थोरियम जैसे खनिजों के परमाणुओं के विखंडन (टूटना) या संयोजन (मिलना) से प्राप्त की जाती है। यह ऊर्जा का एक चमत्कारिक आविष्कार है, क्योंकि 1 किलोग्राम यूरेनियम से लगभग 2500 टन कोयले के बराबर ऊर्जा प्राप्त होती है।
-
प्रमुख परमाणु खनिज:
- यूरेनियम: यह विभिन्न आकार के पिण्डों और शिराओं में मिलता है। भारत में यह झारखंड, राजस्थान (उदयपुर), और आंध्र प्रदेश में पाया जाता है।
- थोरियम: यह मुख्यतः मोनाजाइट (केरल, तमिलनाडु) और इल्मेनाइट (तटीय क्षेत्र) खनिजों से प्राप्त किया जाता है। भारत में थोरियम के बड़े भंडार हैं।
-
भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्र (क्षमता - 5780 मेगावाट):
- तारापुर (महाराष्ट्र): सबसे पहला और सबसे बड़ी क्षमता (1400 MW)।
- कुडनकुलम/कलपक्कम (तमिलनाडु): महत्वपूर्ण केंद्र (1440 MW)।
- रावतभाटा (राजस्थान): (1180 MW)।
- कैगा (कर्नाटक), नरोरा (उत्तर प्रदेश), काकरापार (गुजरात): अन्य महत्वपूर्ण केंद्र।
- निष्कर्ष: परमाणु ऊर्जा एक शक्तिशाली और उच्च क्षमता वाली स्वच्छ ऊर्जा है, जो भारत की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
-
उत्तर:
-
भारत में गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों (पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा) के उत्पादन और विकास की संभावनाओं का आकलन कीजिए।
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उत्तर: गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन (जैसे सौर, पवन, बायोगैस) असमाप्य और पर्यावरण अनुकूल होते हैं, जिन पर भारत सरकार अब विशेष जोर दे रही है।
-
पवन ऊर्जा (Wind Energy):
- संभावनाएँ: भारत में 4 लाख पवन चक्कियाँ लगाने की क्षमता है, जिससे अत्यधिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है। तटीय क्षेत्र और खुली हवा वाली जगहें इसके लिए आदर्श हैं।
- उत्पादन: भारत वर्तमान में विश्व में पाँचवें स्थान पर है। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, और राजस्थान प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
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सौर ऊर्जा (Solar Energy):
- संभावनाएँ: भारत में उत्तरी पर्वतीय प्रदेश को छोड़कर सभी भागों में 8 से 10 माह तक पर्याप्त सूर्यताप मिलता है। प्रति वर्ग किमी क्षेत्र में 20 मेगावाट विद्युत प्राप्त की जा सकती है। राजस्थान और गुजरात में इसके विकास की अपार संभावनाएँ हैं।
- उत्पादन: सौर ऊर्जा सबसे तेजी से बढ़ने वाले ऊर्जा स्रोतों में से एक है। यह कोयला और परमाणु ऊर्जा की अपेक्षा अधिक प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल है।
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पवन ऊर्जा (Wind Energy):
- निष्कर्ष: ये असमाप्य ऊर्जा स्रोत, भारत की बढ़ती जनसंख्या, विकास की आवश्यकताओं, और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण हैं।
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उत्तर: गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन (जैसे सौर, पवन, बायोगैस) असमाप्य और पर्यावरण अनुकूल होते हैं, जिन पर भारत सरकार अब विशेष जोर दे रही है।
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