कक्षा बारहवीं अर्थशास्त्र पाठ22 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत का निर्धारण' पाठ के प्रश्न उत्तर


1.कीमत और उत्पादन निर्धारण किस पर निर्भर करता है?
उस बाजार के प्रारूप पर जिसमें फर्म कार्य कर रही है।
2.संतुलन का अभिप्राय किस अवस्था से है?
उस अवस्था से जिससे परिवर्तन की प्रवृत्ति नहीं होती।
3.प्रो. मार्शल ने माँग और आपूर्ति की तुलना किससे की?
कैंची के दो फलों से।
4.संतुलन कीमत किस कीमत को कहते हैं?
वह कीमत जिस पर वस्तु की माँग और आपूर्ति दोनों बराबर हों।
5.संतुलन कीमत को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
बाजार समाशोधन कीमत (Market Clearing Price)।
6.माँग आधिक्य किस स्थिति को कहते हैं?
जब कीमत संतुलन कीमत से कम होती है।
7.यदि P < P_e है, तो बाजार में क्या स्थिति होगी?
माँग आधिक्य (Demand Surplus)।
8.माँग आधिक्य की स्थिति में क्या बेचने को तत्पर होते हैं?
विक्रेता कम मात्रा बेचने को तत्पर होते हैं।
9.माँग आधिक्य की स्थिति में क्रेता और विक्रेता किसे ऊपर धकेलते हैं?
कीमत को ऊपर धकेलते हैं।
10.आपूर्ति आधिक्य किस स्थिति को कहते हैं?
जब कीमत संतुलन कीमत से अधिक होती है।
11.यदि P > P_e है, तो बाजार में क्या स्थिति होगी?
आपूर्ति आधिक्य (Supply Surplus)।
12.आपूर्ति आधिक्य की स्थिति में वस्तु की आपूर्ति माँग की तुलना में कैसी होती है?
अधिक होती है।
13.आपूर्ति आधिक्य की स्थिति में विक्रेता कीमत को किस ओर धकेलते हैं?
नीचे की ओर।
14.यदि माँग में वृद्धि होती है, तो संतुलन कीमत और मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संतुलन कीमत और मात्रा दोनों बढ़ जाएंगी।
15.माँग वक्र का दायीं ओर खिसकना क्या दर्शाता है?
माँग में वृद्धि।
16.यदि माँग में कमी होती है, तो संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संतुलन कीमत और मात्रा दोनों घट जाएंगी।
17.माँग वक्र का बायीं ओर खिसकना क्या दर्शाता है?
माँग में कमी।
18.यदि आपूर्ति में वृद्धि होती है, तो संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संतुलन कीमत घट जाएगी।
19.आपूर्ति में वृद्धि से संतुलन मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संतुलन मात्रा बढ़ जाएगी।
20.आपूर्ति वक्र का दायीं ओर खिसकना क्या दर्शाता है?
आपूर्ति में वृद्धि।
21.यदि आपूर्ति में कमी होती है, तो संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संतुलन कीमत बढ़ जाएगी।
22.आपूर्ति में कमी से संतुलन मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संतुलन मात्रा घट जाएगी।
23.आपूर्ति वक्र का बायीं ओर खिसकना क्या दर्शाता है?
आपूर्ति में कमी।
24.जब माँग और आपूर्ति दोनों में समान वृद्धि हो, तो संतुलन मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संतुलन मात्रा बढ़ जाएगी।
25.जब माँग और आपूर्ति दोनों में समान वृद्धि हो, तो संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
कीमत अपरिवर्तित रहेगी।
26.जब माँग और आपूर्ति में समान कमी हो, तो संतुलन मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संतुलन मात्रा घट जाएगी।
27.माँग में कमी और आपूर्ति में वृद्धि का एक साथ होना कीमत को किस ओर धकेलेगा?
कीमत को निश्चित रूप से नीचे की ओर धकेलेगा।
28.माँग में वृद्धि और आपूर्ति में कमी का एक साथ होना कीमत को किस ओर धकेलेगा?
कीमत को निश्चित रूप से ऊपर की ओर धकेलेगा।
29.पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण किस सिद्धांत पर आधारित है?
माँग और आपूर्ति के नियम पर।
30.संतुलन कीमत से कम कीमत पर क्रेता कौन होता है?
निराश क्रेता।

2. अति लघुतात्मक प्रश्न उत्तर (Very Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: संतुलन (Equilibrium) से आपका क्या अभिप्राय है?                             उत्तर: संतुलन का अभिप्राय उस अवस्था से है, जिससे परिवर्तन की कोई प्रवृत्ति नहीं होती और जो एक बार स्थापित होने के बाद, बाहरी कारकों से बाधा न आने तक, बनी रहती है।
  2. प्रश्न: संतुलन कीमत (Equilibrium Price) को परिभाषित कीजिए।         उत्तर: संतुलन कीमत वह कीमत होती है जिस पर किसी वस्तु की बाजार माँग (Demand) और बाजार आपूर्ति (Supply) दोनों बराबर होती हैं।
  3. प्रश्न: माँग आधिक्य (Demand Surplus) की स्थिति कब उत्पन्न होती है?            उत्तर: माँग आधिक्य की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब बाजार कीमत (P) संतुलन कीमत (P_e) से कम होती है (P < P_e), और इस कीमत पर वस्तु की माँग उसकी आपूर्ति से अधिक होती है।
  4. प्रश्न: माँग आधिक्य की स्थिति में कीमत को किस प्रकार पुनः संतुलन कीमत पर लाया जाता है?                                        उत्तर: माँग आधिक्य की स्थिति में क्रेता अधिक कीमत देने को तत्पर होते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा के कारण कीमत ऊपर की ओर धकेली जाती है, और साथ ही उत्पादक अधिक आपूर्ति करने लगते हैं, जिससे संतुलन पुनः स्थापित होता है।
  5. प्रश्न: आपूर्ति आधिक्य (Supply Surplus) की स्थिति कब उत्पन्न होती है?            उत्तर: आपूर्ति आधिक्य की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब बाजार कीमत (P) संतुलन कीमत (P_e) से अधिक होती है (P > P_e), और इस कीमत पर वस्तु की आपूर्ति उसकी माँग से अधिक होती है।
  6. प्रश्न: आपूर्ति आधिक्य की स्थिति में कीमत पर क्या दबाव पड़ता है?                    उत्तर: आपूर्ति आधिक्य की स्थिति में विक्रेता अपनी बिकी हुई न होने वाली वस्तुओं को बेचने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे वे कीमत को नीचे की ओर धकेलने पर मजबूर होते हैं।
  7. प्रश्न: यदि बाजार में माँग बढ़ जाती है, तो संतुलन कीमत और मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?                                           उत्तर: माँग में वृद्धि होने पर संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा दोनों बढ़ जाएंगी।
  8. प्रश्न: संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा पर माँग में कमी के प्रभाव को आरेखीय रूप में कैसे समझा सकते हैं?                        उत्तर: माँग वक्र (DD) बायीं ओर खिसककर D_1D_1 हो जाएगा, जिससे नया संतुलन बिंदु E_1 प्राप्त होगा। E_1 पर कीमत और मात्रा दोनों घट जाएंगी।
  9. प्रश्न: आपूर्ति में वृद्धि होने पर संतुलन कीमत और मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?         उत्तर: आपूर्ति में वृद्धि होने पर संतुलन कीमत घट जाएगी और संतुलन मात्रा बढ़ जाएगी
  10. प्रश्न: संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा पर आपूर्ति में कमी के प्रभाव को आरेखीय रूप में कैसे समझा सकते हैं?                    उत्तर: आपूर्ति वक्र (SS) बायीं ओर खिसककर S_1S_1 हो जाएगा, जिससे नया संतुलन बिंदु E_1 प्राप्त होगा। E_1 पर कीमत बढ़ जाएगी और मात्रा घट जाएगी
  11. प्रश्न: यदि माँग और आपूर्ति दोनों में समान वृद्धि होती है, तो संतुलन कीमत और मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?                       उत्तर: संतुलन मात्रा बढ़ जाएगी, लेकिन संतुलन कीमत अपरिवर्तित रहेगी।
  12. प्रश्न: यदि माँग और आपूर्ति में समान कमी होती है, तो संतुलन कीमत और मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?                            उत्तर: संतुलन मात्रा घट जाएगी, लेकिन संतुलन कीमत अपरिवर्तित रहेगी।
  13. प्रश्न: 'बाजार समाशोधन कीमत' (Market Clearing Price) से आपका क्या अर्थ है? उत्तर: यह संतुलन कीमत का दूसरा नाम है, क्योंकि यह वह कीमत है जिस पर बाजार में न तो कोई माँग आधिक्य रहता है और न ही कोई आपूर्ति आधिक्य, अर्थात बाजार की माँग और आपूर्ति बराबर हो जाती हैं।
  14. प्रश्न: किस कीमत पर क्रेता और विक्रेता दोनों को निराशा होती है?                  उत्तर: संतुलन कीमत से कम कीमत पर क्रेता को निराशा होती है (क्योंकि उन्हें वस्तु नहीं मिल पाती), और अधिक कीमत पर विक्रेता को निराशा होती है (क्योंकि उनकी वस्तु बिक नहीं पाती)।
  15. प्रश्न: यदि माँग वक्र दायीं ओर और आपूर्ति वक्र बायीं ओर खिसकता है, तो संतुलन कीमत पर निश्चित प्रभाव क्या होगा?     उत्तर: संतुलन कीमत निश्चित रूप से बढ़ जाएगी
  16. प्रश्न: यदि माँग वक्र बायीं ओर और आपूर्ति वक्र दायीं ओर खिसकता है, तो संतुलन कीमत पर निश्चित प्रभाव क्या होगा?     उत्तर: संतुलन कीमत निश्चित रूप से घट जाएगी
  17. प्रश्न: पूर्ण प्रतियोगी बाजार में संतुलन कीमत का निर्धारण कौन करता है?                उत्तर: पूर्ण प्रतियोगी बाजार में संतुलन कीमत का निर्धारण माँग और आपूर्ति की बाजार शक्तियाँ करती हैं।
  18. प्रश्न: संतुलन की अवस्था में माँग वक्र और आपूर्ति वक्र के बीच संबंध कैसा होता है? उत्तर: संतुलन की अवस्था में माँग वक्र और आपूर्ति वक्र एक दूसरे को काटते हैं
  19. प्रश्न: कीमत \mathbf{₹ 2} प्रति किलो होने पर, यदि \mathbf{D_x} = 20 और \mathbf{S_x} = 5, तो बाजार में क्या स्थिति होगी?                                    उत्तर: D_x > S_x है, इसलिए बाजार में माँग आधिक्य की स्थिति होगी।
  20. प्रश्न: कीमत \mathbf{₹ 6} प्रति किलो होने पर, यदि \mathbf{D_x} = 5 और \mathbf{S_x} = 20, तो बाजार में क्या स्थिति होगी?                                    उत्तर: S_x > D_x है, इसलिए बाजार में आपूर्ति आधिक्य की स्थिति होगी।

​3. लघुत्रात्मक प्रश्न उत्तर (Short Answer Questions)


प्रश्न: संतुलन कीमत (Equilibrium Price) और संतुलन मात्रा (Equilibrium Quantity) की अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

  • संतुलन कीमत (P_e): यह वह कीमत है जिस पर एक निश्चित समय में किसी वस्तु की माँग की गई मात्रा और उसकी आपूर्ति की गई मात्रा दोनों बाजार में एक-दूसरे के बराबर होती हैं। इसे बाजार समाशोधन कीमत भी कहा जाता है, क्योंकि इस कीमत पर बाजार पूरी तरह से साफ हो जाता है।
  • संतुलन मात्रा (Q_e): यह वस्तु की वह मात्रा है जो संतुलन कीमत पर बाजार में खरीदी और बेची जाती है।



प्रश्न: माँग आधिक्य की स्थिति में बाजार में कीमत किस प्रकार पुनः संतुलन कीमत पर आती है?

उत्तर:

  1. उत्पत्ति: जब बाजार कीमत संतुलन कीमत से कम होती है, तो माँग आधिक्य उत्पन्न होता है (D > S)।
  2. परिणाम: इस कीमत पर विक्रेता कम मात्रा बेचने को तत्पर होते हैं, जिससे कई क्रेता निराश होते हैं।
  3. समायोजन प्रक्रिया: निराश क्रेता वस्तु को प्राप्त करने के लिए अधिक कीमत देने को तत्पर होते हैं। क्रेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण कीमत ऊपर की ओर धकेली जाती है।
  4. पुनः संतुलन: कीमत बढ़ने पर माँग घटने लगती है और आपूर्ति बढ़ने लगती है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक माँग और आपूर्ति फिर से बराबर नहीं हो जाते और संतुलन कीमत पुनः स्थापित नहीं हो जाती।

प्रश्न: आपूर्ति आधिक्य की स्थिति में कीमत पर क्या दबाव पड़ता है और यह कैसे समाप्त होता है?

उत्तर:

  1. उत्पत्ति: जब बाजार कीमत संतुलन कीमत से अधिक होती है, तो आपूर्ति आधिक्य उत्पन्न होता है (S > D)।
  2. परिणाम: इस कीमत पर विक्रेता माँग से अधिक आपूर्ति करते हैं, जिससे उनके पास अविक्रयित स्टॉक जमा हो जाता है।
  3. समायोजन प्रक्रिया: जमा हुए स्टॉक को बेचने के लिए विक्रेता आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं और कीमत को नीचे की ओर धकेलने पर मजबूर होते हैं।
  4. समाप्ति: कीमत गिरने पर माँग बढ़ने लगती है और आपूर्ति घटने लगती है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक माँग और आपूर्ति फिर से बराबर नहीं हो जाते और आपूर्ति आधिक्य समाप्त नहीं हो जाता।



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