1. एक लाइन के प्रश्न उत्तर (30)
- प्राथमिक आंकड़े मूल रूप में होते हैं या द्वितीयक? उत्तर: प्राथमिक आंकड़े मूल रूप में होते हैं।
- अन्वेषक (आंकड़े एकत्र करने वाला) जिस व्यक्ति से पूछताछ करता है, उसे क्या कहते हैं? उत्तर: संसूचक (Informant)।
- वह जानकारी जिसे अन्वेषक पहली बार एकत्र करता है, क्या कहलाती है? उत्तर: प्राथमिक आंकड़े।
- किसी अन्य व्यक्ति द्वारा एकत्र की गई जानकारियों को उपयोग में लाना क्या कहलाता है? उत्तर: द्वितीयक आंकड़े।
- प्राथमिक आंकड़े एकत्र करने की एक विधि का नाम बताएं। उत्तर: प्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार।
- किस विधि में प्रश्नों की सूची प्रतिवादियों के पास डाक द्वारा भेजी जाती है? उत्तर: प्रश्नावली विधि।
- प्राथमिक आंकड़े एकत्र करने में एक कठिनाई बताएं। उत्तर: इसमें बहुत अधिक धन, समय और परिश्रम लगता है।
- द्वितीयक आंकड़ों के दो मुख्य स्रोत कौन-से हैं? उत्तर: पूर्व प्रकाशित स्रोत और अप्रकाशित स्रोत।
- केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) कौन-से आंकड़े प्रकाशित करता है? उत्तर: राष्ट्रीय आय, बचत, पूंजी निर्माण आदि के आंकड़े।
- CSO के प्रकाशन का नाम क्या है? उत्तर: राष्ट्रीय आय लेखा।
- राष्ट्रीय निदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) किस मंत्रालय के अंतर्गत आता है? उत्तर: वित्त मंत्रालय।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) किस प्रकार के आंकड़े प्रकाशित करता है? उत्तर: वित्तीय आंकड़े।
- जनगणना का आयोजन कौन करता है? उत्तर: भारत के महा पंजीकार का कार्यालय।
- अप्रकाशित स्रोतों का एक उदाहरण दें। उत्तर: विभिन्न सरकारी/गैर-सरकारी कार्यालयों में जमा जानकारी या शोधकर्ताओं द्वारा एकत्रित आंकड़े।
- आंकड़ों के संक्षेपण की एक विधि क्या है? उत्तर: आवृत्ति सारणी की रचना।
- आंकड़ों को व्यवस्थित करने के दो प्रकार क्या हैं? उत्तर: श्रृंखला या सारणी, तथा आवृत्ति तालिका।
- सामान्य सारणी कितने प्रकार की हो सकती है? उत्तर: दो प्रकार की (वृद्धिमान क्रम और ह्रासमान क्रम)।
- आवृत्ति (Frequency) का क्या अर्थ है? उत्तर: कोई संख्या श्रृंखला में कितनी बार आती है।
- आवृत्ति सारणी में कितने स्तंभ होते हैं? उत्तर: तीन स्तंभ (मद, संकेत चिन्ह, आवृत्ति)।
- संकेत चिन्ह (Tally Marks) लगाते समय, पांचवीं बार किस चिन्ह का प्रयोग करते हैं? उत्तर: एक तिर्यक चिन्ह (जो पहले चार चिन्हों को काटता हुआ जाता है)।
- आंकड़ों के वर्गीकरण के लिए किसकी आवश्यकता होती है? उत्तर: आवृत्ति बंटन (Frequency Distribution)।
- वर्ग (Class) के दोनों छोर क्या कहलाते हैं? उत्तर: वर्ग सीमा (Class Limits)।
- वर्ग अंतराल (Class Interval) का सूत्र क्या है? उत्तर: वर्ग अंतराल = L_2 - L_1।
- मध्य बिंदु/मध्य मान (M.V.) का सूत्र क्या है? उत्तर: M.V. [span_25](start_span)= \frac{L_1 + L_2}{2}।
- अपवर्जी वर्ग श्रृंखला में वर्ग की उच्च सीमा का मान कहाँ रखा जाता है? उत्तर: अगले वर्ग में।
- समावेशी वर्ग श्रृंखला में वर्ग की उच्च सीमा का मान कहाँ रखा जाता है? उत्तर: उसी वर्ग में।
- किस प्रकार के बंटन में कम-से-कम एक वर्ग की एक सीमा खुली रहती है? उत्तर: खुली सीमा वर्ग बंटन (Open-end Class Distribution)।
- किस बंटन में सभी वर्गों का आकार (अंतराल) एक समान नहीं होता? उत्तर: असमान वर्ग आवृत्ति बंटन।
- आवृत्तियों के उत्तरोत्तर योग द्वारा निर्मित बंटन को क्या कहते हैं? उत्तर: संचयी आवृत्ति बंटन (Cumulative Frequency Distribution)।
- 'से कम' संचयी आवृत्ति बंटन में योग किस ओर से किया जाता है? उत्तर: ऊपर की ओर से।
2. अति लघुतात्मक प्रश्न उत्तर (20)
- प्राथमिक आंकड़े (Primary Data) क्या हैं? उत्तर: प्राथमिक आंकड़े वे मूल आंकड़े हैं जिन्हें अन्वेषक द्वारा पहली बार प्रत्यक्षतः सूचना देने वाले (संसूचक) से एकत्र किया जाता है।
- द्वितीयक आंकड़े (Secondary Data) क्या हैं? उत्तर: द्वितीयक आंकड़े वे होते हैं जो अन्वेषक स्वयं एकत्र नहीं करता, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति या संस्था द्वारा एकत्र की गई जानकारियों को अपने काम योग्य बनाकर उपयोग में लाता है।
- प्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार विधि क्या है? उत्तर: इस विधि में अन्वेषक सीधे प्रतिवादी से बातचीत करके जानकारी प्राप्त करता है। जानकारी देने वाला ही संसूचक होता है।
- अप्रत्यक्ष मौखिक अन्वेषण कब उपयुक्त होता है? उत्तर: यह विधि तब अधिक उपयुक्त होती है जब संबद्ध व्यक्ति सहज उपलब्ध नहीं हो या सीधे बात करने का इच्छुक नहीं हो।
- द्वितीयक आंकड़ों के दो प्रकाशित स्रोतों के उदाहरण दीजिए। उत्तर: केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)।
- भारतीय रिजर्व बैंक के दो मुख्य प्रकाशनों के नाम बताएं। उत्तर: करेंसी और वित्त रिपोर्ट, तथा रिजर्व बैंक बुलेटिन।
- अप्रकाशित स्रोत क्या होते हैं? उत्तर: ऐसी सभी सांख्यिकीय जानकारियां जो प्रायः प्रकाशित नहीं हो पाती हैं, जैसे विभिन्न सरकारी/गैर-सरकारी कार्यालयों में जमा जानकारी या शोधकर्ताओं द्वारा एकत्रित आंकड़े।
- आंकड़ों के व्यवस्थापन का क्या अर्थ है? उत्तर: एकत्रित अव्यवस्थित आंकड़ों को तुलना और विश्लेषण के लिए किसी क्रमिक श्रृंखला या समानताओं पर आधारित वर्गों के अनुसार व्यवस्थित करना ही व्यवस्थापन कहलाता है।
- सामान्य सारणी से क्या पता चलता है? उत्तर: यह आंकड़े के अधिकतम और न्यूनतम प्राप्तांक (या मान) को स्पष्ट करती है, जब आंकड़े वृद्धिमान या ह्रासमान क्रम में सारणीबद्ध होते हैं।
- आवृत्ति सारणी किसे कहते हैं? उत्तर: यह वह सारणी है जिसमें विभिन्न आंकड़ों को उनकी पुनरावृत्ति (आवृत्ति) के साथ दर्शाया जाता है।
- आवृत्ति सारणी की एक मुख्य सीमा बताइए। उत्तर: इससे किसी समूह की विशेषताओं का अनुमान नहीं हो पाता, जैसे यह नहीं जान पाते कि कितने विद्यार्थियों को 40 से 45 के बीच अंक मिले हैं।
- वर्ग (Class) क्या है? उत्तर: वर्ग परिमाणों का एक समूह है, जिसके दोनों छोर (निम्न सीमा L_1 और उच्च सीमा L_2) वर्ग सीमाएं कहे जाते हैं।
- वर्ग अंतराल (Class Interval) से आप क्या समझते हैं? उत्तर: यह उच्च सीमा और निम्न सीमा का अंतर होता है (L_2 - L_1)। इसे वर्ग की चौड़ाई या प्रसार भी कहा जाता है।
- मध्य बिंदु (M.V.) की गणना कैसे की जाती है? उत्तर: यह उच्च सीमा और निम्न सीमा के योग को दो से विभाजित कर ज्ञात होता है: M.V. [span_50](start_span)= (L_1 + L_2) / 2।
- अपवर्जी वर्ग श्रृंखला (Exclusive Class Series) की पहचान क्या है? उत्तर: वर्ग की ऊपरी सीमा को उस वर्ग में शामिल नहीं किया जाता, बल्कि उसे अगले वर्ग में स्थान दिया जाता है।
- समावेशी वर्ग श्रृंखला (Inclusive Class Series) की पहचान क्या है? उत्तर: वर्ग की उच्च और निम्न सीमाओं के समान संख्याएं उसी वर्ग में गिनी जाती हैं।
- खुली सीमा वर्ग बंटन कब प्रयोग किया जाता है? उत्तर: जब न्यूनतम वर्ग की निम्न सीमा या उच्चतम वर्ग की उच्च सीमा ज्ञात न हो।
- असमान वर्ग आवृत्ति बंटन क्या है? उत्तर: यह वह बंटन है जिसमें सभी वर्गों के वर्ग अंतराल (L_2 - L_1) एक समान नहीं होते हैं।
- 'से कम' संचयी आवृत्ति बंटन क्या दिखाता है? उत्तर: यह चर के मान विशेष से कम मान वाली आंकड़ों की संख्या को दिखाता है।
- 'से अधिक' संचयी आवृत्ति बंटन क्या दिखाता है? उत्तर: यह किसी विशेष मान से अधिक मान वाली आंकड़ों की संख्या को दर्शाता है।
3. लघुत्रात्मक प्रश्न उत्तर
- प्राथमिक और द्वितीयक आंकड़ों में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए। उत्तर: प्राथमिक आंकड़े मूल आंकड़े होते हैं, जिन्हें अन्वेषक स्वयं पहली बार एकत्र करता है। ये अध्ययन के उद्देश्य के लिए विश्वसनीय होते हैं। द्वितीयक आंकड़े वे होते हैं जो किसी अन्य व्यक्ति या संस्था द्वारा पहले से ही एकत्र किए गए होते हैं, और अन्वेषक उन्हें केवल उपयोग में लाता है। ये आंकड़े पहले से ही संकलित होते हैं।
- प्राथमिक आंकड़े एकत्र करने की 'प्रश्नावली विधि' कब सबसे उपयुक्त होती है? उत्तर: प्रश्नावली विधि में प्रश्नों की सूची तैयार करके प्रतिवादियों के पास डाक या अन्य माध्यम से भेजी जाती है। यह विधि उस स्थिति में सबसे उपयुक्त होती है, जब बहुत बड़े स्तर पर जानकारी संग्रह की जानी हो। हालाँकि, इसमें अधिक धन, समय और परिश्रम लग सकता है।
- द्वितीयक आंकड़ों के अप्रकाशित स्रोतों का उदाहरण सहित वर्णन करें। उत्तर: सारी सांख्यिकीय जानकारी प्रायः प्रकाशित नहीं हो पाती। अतः ऐसी सभी जानकारियां द्वितीयक आंकड़ों का अप्रकाशित स्रोत बन जाती हैं। उदाहरणतः विभिन्न सरकारी, गैर-सरकारी कार्यालयों में जमा जानकारी, और अनेक शोधकर्ताओं द्वारा एकत्रित आंकड़े आदि द्वितीयक आंकड़ों के महत्त्वपूर्ण अप्रकाशित स्रोत हैं।
- आंकड़ों के व्यवस्थापन और संक्षेपण की आवश्यकता क्यों होती है? उत्तर: एकत्रित आंकड़े प्रायः अव्यवस्थित होते हैं। यदि आंकड़ों की संख्या बड़ी हो, तो श्रृंखला बहुत लंबी हो जाती है और उसे व्यवस्थित करना कठिन हो जाता है। अतः तुलना और विश्लेषण को अर्थपूर्ण बनाने के लिए, तथा आंकड़ों को एक संक्षिप्त रूप देने के लिए व्यवस्थापन (जैसे श्रृंखला सारणी) और संक्षेपण (जैसे आवृत्ति सारणी) अनिवार्य हो जाता है।
-
आवृत्ति सारणी की रचना के मुख्य तीन स्तंभ कौन से होते हैं और उनका क्या महत्व है?
उत्तर: आवृत्ति सारणी की रचना में तीन स्तंभवाली एक तालिका बनाई जाती है:
- मदों की संख्या (X): इसमें सभी आंकड़े एक क्रम में (सामान्यतः बढ़ते क्रम में) केवल एक ही बार लिखे जाते हैं।
- संकेत चिन्ह (Tally Marks): इसमें प्रत्येक मान की पुनरावृत्ति को एक तिर्यक चिन्ह प्रणाली द्वारा अंकित किया जाता है (जैसे हर पाँचवीं पुनरावृत्ति पर एक तिर्यक चिन्ह)।
- आवृत्ति (f): यह संकेत चिन्हों की संख्या को गिनकर लिखा जाता है, जो बताता है कि कोई संख्या कितनी बार आई है।
ई है।
- आवृत्ति बंटन, आवृत्ति सारणी से किस प्रकार भिन्न है? उत्तर: आवृत्ति सारणी के आंकड़े अवर्गीकृत होते हैं और किसी समूह की विशेषताओं का अनुमान नहीं लगा पाती (जैसे 40-45 के बीच अंक)। जबकि, आवृत्ति बंटन आंकड़ों को विभिन्न श्रेणियों या वर्गों (जैसे 40-45) में वर्गीकृत करता है। आवृत्ति बंटन की रचना आवृत्ति सारणी की इस सीमा को दूर कर देती है।
- वर्ग सीमा और वर्ग अंतराल की गणना को एक उदाहरण से स्पष्ट करें। उत्तर: प्रत्येक वर्ग की दो सीमाएं होती हैं: निम्न सीमा (L_1) और उच्च सीमा (L_2)। वर्ग अंतराल (L_2 - L_1) इन सीमाओं का अंतर होता है। उदाहरण के लिए, यदि वर्ग 20-30 है, तो निम्न सीमा (L_1) = 20 और उच्च सीमा (L_2) = 30 होगी। इस वर्ग का वर्ग अंतराल = 30 - 20 = 10 होगा।
- खुली सीमा वर्ग बंटन (Open-end Class Distribution) क्या है? उत्तर: खुली सीमा के वर्ग बंटनों में कम-से-कम एक वर्ग की एक सीमा खुली रहती है। ऐसी श्रृंखलाओं में प्रायः न्यूनतम वर्ग की निम्न सीमा (जैसे '25 से कम') और/या उच्चतम वर्ग की उच्च सीमा (जैसे '55 या अधिक') नहीं दी जाती। यह तब उपयोगी है जब चरम मान (Extreme values) की संख्या अधिक हो।
- असमान वर्ग आवृत्ति बंटन (Unequal Class Frequency Distribution) क्या है और इसकी आवश्यकता कब पड़ती है? उत्तर: असमान वर्ग बंटन वह है जिसमें सभी वर्गों के वर्ग अंतराल (L_2 - L_1) एक समान नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए, एक बंटन में 20-25 (अंतराल 5) और 30-40 (अंतराल 10) के वर्ग हो सकते हैं। इसकी आवश्यकता तब पड़ती है जब आंकड़े श्रृंखला के किसी भाग में बहुत अधिक केंद्रित होते हैं या जब कुछ चरम मानों को एक बड़े वर्ग अंतराल में शामिल करना होता है।
-
संचयी आवृत्ति बंटन कितने प्रकार के होते हैं और उनका निर्माण कैसे होता है?
उत्तर: संचयी आवृत्ति बंटन (Cumulative Frequency Distribution) आवृत्तियों के उत्तरोत्तर योग द्वारा बनाया जाता है।
- 'से कम' संचयी आवृत्ति बंटन: यह आवृत्तियों को ऊपर की ओर से जोड़कर बनाया जाता है।
- 'से अधिक' संचयी आवृत्ति बंटन: यह आवृत्तियों को नीचे की ओर से जोड़कर या कुल आवृत्ति में से क्रमिक आवृत्तियों को घटाकर बनाया जाता है।
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