कक्षा दसवीं सामाजिक अध्याय14 राज्य सरकार के गठन एवं शक्तियों पाठ के प्रश्न और उत्तर


​📝 30 प्रश्न उत्तर एक पंक्ति के (One-liner Questions)

  1. प्रश्न: संविधान के किस अनुच्छेद में राज्य के लिए विधानमंडल की व्यवस्था की गई है?
    • उत्तर: अनुच्छेद 168 में।
  2. प्रश्न: वर्तमान समय में भारत के कितने राज्यों में द्विसदनात्मक विधानमंडल है?
    • उत्तर: सात राज्यों में।
  3. प्रश्न: द्विसदनात्मक विधानमंडल के तीन अंग कौन-कौन से हैं?
    • उत्तर: राज्यपाल, विधानसभा, और विधान परिषद।
  4. प्रश्न: विधानसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या कितनी निश्चित की गई है?
    • उत्तर: 500।
  5. प्रश्न: विधानसभा के सदस्यों की न्यूनतम संख्या कितनी निश्चित की गई है?
    • उत्तर: 60।
  6. प्रश्न: विधानसभा का प्रत्येक सदस्य कम से कम कितनी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है?
    • उत्तर: 75 हजार जनसंख्या का।
  7. प्रश्न: विधानसभा के सदस्यों का चुनाव किस पद्धति द्वारा होता है?
    • उत्तर: प्रत्यक्ष रूप से साधारण बहुमत की पद्धति द्वारा।
  8. प्रश्न: विधानसभा सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए?
    • उत्तर: 25 वर्ष।
  9. प्रश्न: विधानसभा का सामान्य कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
    • उत्तर: 5 वर्ष।
  10. प्रश्न: विधानसभा का अध्यक्ष किसे त्यागपत्र देता है?
    • उत्तर: उपाध्यक्ष को।
  11. प्रश्न: कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय कौन करता है?
    • उत्तर: विधानसभा का अध्यक्ष।
  12. प्रश्न: राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून निर्माण की शक्ति किसे प्राप्त है?
    • उत्तर: राज्य की विधानसभा को।
  13. प्रश्न: विधान परिषद के सदस्यों की संख्या विधानसभा के सदस्यों की संख्या के कितने भाग से अधिक नहीं होगी?
    • उत्तर: एक तिहाई (1/3) से।
  14. प्रश्न: विधान परिषद के सदस्यों की न्यूनतम संख्या कितनी निर्धारित की गई है?
    • उत्तर: 40।
  15. प्रश्न: विधान परिषद में कितने सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं?
    • उत्तर: कुल सदस्य संख्या के 1/6 भाग।
  16. प्रश्न: विधान परिषद का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए?
    • उत्तर: 30 वर्ष।
  17. प्रश्न: विधान परिषद कैसा सदन है?
    • उत्तर: स्थायी सदन।
  18. प्रश्न: विधान परिषद के कितने सदस्य प्रति दो वर्ष में बदलते हैं?
    • उत्तर: 1/3 सदस्य।
  19. प्रश्न: विधान परिषद साधारण विधेयक को अधिकतम कितने समय तक रोक सकती है?
    • उत्तर: 4 माह तक।
  20. प्रश्न: राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है?
    • उत्तर: राष्ट्रपति।
  21. प्रश्न: राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
    • उत्तर: 5 वर्ष।
  22. प्रश्न: राज्यपाल किसे त्यागपत्र दे सकता है?
    • उत्तर: राष्ट्रपति को।
  23. प्रश्न: राज्यपाल की अनुपस्थिति में अध्यादेश कौन जारी कर सकता है?
    • उत्तर: राज्यपाल (स्वयं)।
  24. प्रश्न: मुख्यमंत्री की नियुक्ति कौन करता है?
    • उत्तर: राज्यपाल।
  25. प्रश्न: राज्य प्रशासन की सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण संस्था कौन-सी है?
    • उत्तर: मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद।
  26. प्रश्न: मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?
    • उत्तर: विधानसभा के प्रति।
  27. प्रश्न: मंत्रिपरिषद का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य क्या है?
    • उत्तर: शासन की नीति निर्धारण करना।
  28. प्रश्न: संविधान के किस अनुच्छेद के अनुसार प्रत्येक राज्य का एक उच्च न्यायालय होगा?
    • उत्तर: अनुच्छेद 214 के अनुसार।
  29. प्रश्न: वर्तमान में भारत में कुल कितने उच्च न्यायालय हैं?
    • उत्तर: 24 उच्च न्यायालय।
  30. प्रश्न: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अधिकतम आयु क्या होती है?
    • उत्तर: 62 वर्ष।

​💡 20 प्रश्न उत्तर अति लघुतात्मक (Very Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: द्विसदनात्मक विधानमंडल वाले सात राज्यों के नाम लिखिए।
    • उत्तर: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, आन्ध्रप्रदेश, तेलगांना और जम्मू कश्मीर।
  2. प्रश्न: संविधान के अनुसार राज्य की विधानसभा के सदस्यों की न्यूनतम और अधिकतम संख्या बताइए।
    • उत्तर: विधानसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 500 और न्यूनतम संख्या 60 होगी।
  3. प्रश्न: विधानसभा की सदस्यता समाप्त होने की कोई दो परिस्थितियाँ बताइए।
    • उत्तर:
      • ​राज्य विधानमंडलों के दोनों सदनों का सदस्य निर्वाचित होने पर एक सदन से त्यागपत्र न देने पर।
      • ​सदन की आज्ञा के बिना लगातार 60 दिन तक बैठकों से अनुपस्थित रहने पर।
  4. प्रश्न: विधानसभा के अध्यक्ष को पद से कैसे हटाया जा सकता है?
    • उत्तर: विधानसभा के बहुमत द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के द्वारा, जिसकी सूचना 14 दिन पूर्व दी जानी आवश्यक है।
  5. प्रश्न: विधानसभा के अध्यक्ष के दो प्रमुख अधिकार या कार्य लिखिए।
    • उत्तर:
      • ​विधानसभा की बैठकों की अध्यक्षता करना और कार्यवाही का संचालन करना।
      • ​सदन में शान्ति और व्यवस्था बनाए रखना।
  6. प्रश्न: साधारण विधेयक के संबंध में विधानसभा को प्राप्त एक विशेष शक्ति बताइए।
    • उत्तर: साधारण विधेयक विधानमंडल के किसी भी सदन में प्रस्तावित किया जा सकता है, लेकिन विधेयक के अंतिम रूप से पारित होने के संबंध में विधानसभा को ही निर्णायक शक्ति प्राप्त है।
  7. प्रश्न: वित्तीय शक्तियों के संदर्भ में विधानसभा की भूमिका संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
    • उत्तर: विधानसभा को राज्य के धन पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त होता है। आय-व्यय का वार्षिक लेखा (बजट) विधानसभा से स्वीकृत होने के बाद ही शासन द्वारा व्यय से संबंधित कार्य किया जा सकता है।
  8. प्रश्न: विधान परिषद के गठन की प्रक्रिया संक्षेप में बताइए।
    • उत्तर: यदि विधानसभा अपनी पूरी सदस्य संख्या के बहुमत से तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों की संख्या के दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दे, तो संसद उस राज्य के लिए विधान परिषद के सृजन या समाप्ति के लिए कानून बनाती है।
  9. प्रश्न: विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन किन पद्धतियों से होता है?
    • उत्तर: विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति की एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा होता है।
  10. प्रश्न: विधान परिषद के सदस्यों की योग्यताएं लिखिए।
    • उत्तर:
      • ​वह भारत का नागरिक हो।
      • ​उसकी आयु कम से कम 30 वर्ष हो।
  11. प्रश्न: राज्यपाल की दो प्रमुख विधायी शक्तियाँ बताइए।
    • उत्तर:
      • ​विधानसभा का अधिवेशन बुलाना, स्थगित करना और विधानसभा को भंग करना।
      • ​विधानमंडल का अधिवेशन नहीं होने पर अध्यादेश जारी करना।
  12. प्रश्न: राज्यपाल की दो प्रमुख वित्तीय शक्तियाँ बताइए।
    • उत्तर:
      • ​राज्य विधानसभा में उनकी पूर्व स्वीकृति के बिना धन विधेयक प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
      • ​वह विधान मंडल के समक्ष प्रतिवर्ष बजट प्रस्तुत करवाते हैं।
  13. प्रश्न: मुख्यमंत्री का सर्वप्रथम कार्य क्या होता है?
    • उत्तर: मुख्यमंत्री का सर्वप्रथम कार्य अपनी मंत्रिपरिषद का निर्माण करना होता है, जिसके लिए वह मंत्रियों का चयन कर सूची राज्यपाल को देता है।
  14. प्रश्न: मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं मंत्रिपरिषद के मध्य किस प्रकार संपर्क स्थापित करता है?
    • उत्तर: मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद के निर्णयों की सूचना राज्यपाल को देता है और राज्यपाल के विचार मंत्रिपरिषद तक पहुँचाता है, इस प्रकार वह एक कड़ी का कार्य करता है।
  15. प्रश्न: मंत्रिपरिषद के सदस्यों के लिए न्यूनतम आवश्यक योग्यता क्या है?
    • उत्तर: मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों के लिए विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य होना आवश्यक है। यदि नियुक्ति के समय सदस्य नहीं है तो 6 माह के अंदर सदस्यता लेनी होगी।
  16. प्रश्न: मंत्रिपरिषद की तीन श्रेणियाँ कौन-सी हैं?
    • उत्तर:
      • ​केबिनेट मंत्री या मंत्रिपरिषद
      • ​राज्य मंत्री
      • ​उपमंत्री
  17. प्रश्न: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?
    • उत्तर: राष्ट्रपति द्वारा।
  18. प्रश्न: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की दो योग्यताएँ लिखिए।
    • उत्तर:
      • ​वह भारत का नागरिक हो।
      • ​वह भारत के राज्य क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष न्यायिक पद धारण कर चुका हो।
  19. प्रश्न: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से कैसे हटाया जा सकता है?
    • उत्तर: संसद के दोनों सदनों के 2/3 बहुमत से पारित प्रस्ताव के बाद राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है।
  20. प्रश्न: उच्च न्यायालय के याचिका (रिट) अधिकारिता में सर्वोच्च न्यायालय से एक अंतर बताइए।
    • उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के लिए याचिका जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों एवं अन्य मामलों के लिए भी याचिका जारी कर सकता है।

​🔑 10 प्रश्न उत्तर लघुतात्मक (Short Answer Questions)

​1. विधानसभा की विधायी शक्तियों का वर्णन कीजिए।

​विधानसभा की विधायी शक्तियाँ व्यापक हैं, जो निम्न प्रकार हैं:

  • कानून निर्माण: राज्य सूची और समवर्ती सूची में दिए गए सभी विषयों पर कानून निर्माण की शक्ति विधानसभा को प्राप्त है।
  • साधारण विधेयक: साधारण विधेयक को पारित करने के संबंध में विधानसभा को ही निर्णायक शक्ति प्राप्त है। विधान परिषद इसे अधिकतम 4 माह तक रोक सकती है, समाप्त नहीं कर सकती।
  • संविधान संशोधन: हालांकि राज्य विधान मंडलों को संविधान में संशोधन का अधिकार नहीं है, लेकिन संविधान की कुछ धाराओं में संशोधन के लिए संसद में विशेष बहुमत के साथ-साथ कम से कम आधे राज्यों के विधान मंडलों द्वारा स्वीकृत होना आवश्यक है।

​2. विधान परिषद की संरचना में राज्यपाल द्वारा मनोनयन की प्रक्रिया को समझाइए।

​विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या के 1/6 सदस्यों का मनोनयन राज्यपाल द्वारा किया जाता है।

मनोनीत किए जाने वाले सदस्य वे होते हैं जो कला, साहित्य, विज्ञान, सहकारिता और समाज सेवा के क्षेत्रों में विशेष रुचि एवं व्यावहारिक ज्ञान रखते हों। यह व्यवस्था परिषद में विशेषज्ञता और अनुभव लाने के उद्देश्य से की गई है।

​3. राज्यपाल की न्यायिक शक्तियों पर प्रकाश डालिए।

​राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 161 के अनुसार कुछ न्यायिक शक्तियाँ प्राप्त हैं:

  • क्षमादान: राज्यपाल किसी विधि के विरुद्ध अपराध करने वाले व्यक्तियों के दंड को क्षमा कर सकता है, या स्थगित कर सकता है।
  • परामर्श: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रपति से परामर्श लेता है
  • कुलपतियों की नियुक्ति: राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में कुलपतियों की नियुक्ति भी करता है।

​4. मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं मंत्रिपरिषद के मध्य संपर्क कड़ी के रूप में कैसे कार्य करता है?

​मुख्यमंत्री राज्यपाल एवं मंत्रिपरिषद के मध्य एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करता है।

  • ​वह शासन से संबंधित सभी विषयों की जानकारी और मंत्रिपरिषद के निर्णयों की सूचना राज्यपाल को देता है
  • ​वह राज्यपाल के विचारों और निर्देशों को पुनः मंत्रिपरिषद तक पहुँचाता है।
  • ​इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री राज्यपाल को किसी मंत्री के व्यक्तिगत निर्णय को सम्पूर्ण मंत्रिपरिषद के सम्मुख विचार हेतु रखने के लिए भी कह सकता है।

​5. मंत्रिपरिषद के गठन में मुख्यमंत्री की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

​मुख्यमंत्री की नियुक्ति के पश्चात् मंत्रिपरिषद का गठन होता है। मंत्रिपरिषद के गठन में मुख्यमंत्री की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है:

  • चयन एवं सलाह: मुख्यमंत्री ही मंत्रियों का चयन करता है और उनके नामों तथा विभागों की सूची राज्यपाल को देता है
  • सदस्य संख्या: मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद में सदस्यों की संख्या का निर्धारण करता है (हालांकि 91वें संविधान संशोधन द्वारा अधिकतम सीमा निश्चित है)।
  • प्रतिनिधित्व: मुख्यमंत्री राज्य के सभी क्षेत्रों, वर्गों और अपने दल को उचित प्रतिनिधित्व प्रदान करते हुए मंत्रिपरिषद का निर्माण करता है ताकि वे एक इकाई के रूप में कार्य कर सकें।

​6. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की योग्यताएँ एवं कार्यकाल बताइए।

  • योग्यताएँ (अनुच्छेद 217 (2)):
    1. ​वह भारत का नागरिक हो।
    2. ​वह भारत के राज्य क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष न्यायिक पद धारण कर चुका हो, अथवा
    3. ​किसी उच्च न्यायालय का अथवा ऐसे दो या अधिक न्यायालयों का लगातार 10 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो।
  • कार्यकाल:
    • ​न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद धारण करता है।
    • ​वह राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र दे सकता है।
    • ​उसे संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित प्रस्ताव पर राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है।

​7. न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की शक्ति का क्या महत्व है?

​न्यायिक पुनरावलोकन उच्च न्यायालय की वह शक्ति है जिसके द्वारा वह केंद्र व राज्य विधायिका व कार्यपालिका के कार्यों को वैध या अवैध घोषित कर सकता है।

  • महत्व:
    • ​यदि राज्य विधानमंडल संविधान का अतिक्रमण करते हैं,
    • ​या मौलिक अधिकारों के विरुद्ध विधि निर्माण करते हैं,
    • ​तो उच्च न्यायालय उसे अवैधानिक घोषित कर सकता है। यह शक्ति संविधान की सर्वोच्चता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करती है।

​8. विधानसभा के नेता के रूप में मुख्यमंत्री के कार्य बताइए।

​मुख्यमंत्री शासन का प्रधान होने के साथ-साथ विधानसभा में बहुमत दल का नेता भी होता है। नेता के रूप में उसके कार्य:

  • कानून निर्माण: कानून निर्माण के क्षेत्र में उसे महत्वपूर्ण स्थिति प्राप्त होती है, और यह कार्य लगभग उसी के परामर्शानुसार होता है।
  • राज्यपाल को परामर्श: वह राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का परामर्श भी दे सकता है।
  • सदन में उत्तर: मंत्रिपरिषद के सदस्य होने के नाते वह सदन में प्रश्नों के उत्तर देते हैं और शासन की नीतियों का समर्थन करते हैं।

​9. विधानसभा की प्रशासनिक शक्तियों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

​विधानसभा की प्रशासनिक शक्तियाँ निम्न हैं:

  • नियंत्रण: राज्य मंत्रिपरिषद अपने कार्यों के लिए विधानमंडल, विशेष रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होता है।
  • प्रश्न पूछना: विधानसभा के सदस्य मंत्रियों से उनके विभागों के संबंध में प्रश्न पूछ सकते हैं
  • निंदा/अविश्वास: मंत्रिपरिषद के विरुद्ध निंदा या आलोचना, काम रोको प्रस्ताव पास किया जा सकता है।
  • पदच्युत: विधानसभा के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पास किया जा सकता है, जिसके कारण संपूर्ण मंत्रिपरिषद को पद त्याग करना पड़ता है।

​10. उच्च न्यायालय की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संविधान में क्या व्यवस्थाएँ की गई हैं?

​उच्च न्यायालय की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए निम्न व्यवस्थाएँ हैं:

  1. नियुक्ति की विशेष प्रक्रिया (राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश और राज्यपाल से परामर्श)।
  2. निश्चित कार्यकाल (62 वर्ष की आयु तक)।
  3. ​संसद में न्यायाधीशों के आचरण पर महाभियोग के अतिरिक्त चर्चा नहीं
  4. ​अवकाश ग्रहण करने के पश्चात जहाँ वह न्यायाधीश रह चुका है, उन न्यायालयों में वकालत नहीं कर सकता
  5. कार्यपालिका से पृथक्करण (न्यायिक प्रशासन के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं)।

​📜 5 प्रश्न उत्तर निबंधात्मक (Essay Type Questions)

​1. विधानसभा के अध्यक्ष के अधिकार एवं कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

​विधानसभा का अध्यक्ष (स्पीकर) सदन का प्रमुख पदाधिकारी होता है, जिसके अधिकार और कार्य सदन की गरिमा और कार्यवाहियों के कुशल संचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

अधिकार एवं कार्य:

  1. बैठकों की अध्यक्षता और संचालन: वह विधानसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है और सदन की कार्यवाही का संचालन करता है।
  2. शान्ति और व्यवस्था बनाए रखना: सदन में शान्ति और व्यवस्था बनाए रखना उसका मुख्य उत्तरदायित्व है, जिसके लिए उसे समस्त आवश्यक कार्यवाही करने का अधिकार है।
  3. भाषण की अनुमति: सदन का कोई भी सदस्य उसकी आज्ञा से ही भाषण दे सकता है।
  4. असंसदीय शब्दों को हटाना: वह सदन की कार्यवाही में ऐसे शब्दों को निकाले जाने का आदेश दे सकता है जो असंसदीय या अशिष्ट हैं।
  5. कार्यवाही का क्रम: वह सदन के नेता के परामर्श से सदन की कार्यवाही का क्रम निश्चित कर सकता है।
  6. प्रश्नों को स्वीकार/अस्वीकार करना: वह सदस्यों के प्रश्नों को स्वीकार करता है और नियम विरुद्ध होने पर उन्हें अस्वीकार भी करता है।
  7. निर्णायक मत का प्रयोग: सामान्य परिस्थिति में वह सदन में मतदान में भाग नहीं लेता है, लेकिन किसी प्रश्न पर पक्ष-विपक्ष में समान मत होने पर वह अपने निर्णायक मत का प्रयोग करता है।
  8. धन विधेयक का निर्णय: कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय अध्यक्ष ही करता है, और उसका निर्णय अंतिम होता है।
  9. दल-बदल सम्बन्धी निर्णय: वह दल-बदल सम्बन्धी याचिकाओं पर भी निर्णय देता है।
  10. उपाध्यक्ष का कार्य: अध्यक्ष की अनुपस्थिति में इन सभी कार्यों का सम्पादन उपाध्यक्ष द्वारा किया जाता है।

​2. विधान परिषद के सदस्यों के निर्वाचन एवं मनोनयन की पद्धति की विस्तृत व्याख्या कीजिए।

​विधान परिषद एक स्थायी सदन है जिसके सदस्यों का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति की एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है।

निर्वाचन (5/6 सदस्य):

  1. स्थानीय संस्थाओं का निर्वाचक मंडल (1/3): राज्य की नगरपालिकाओं, जिला परिषदों और अन्य स्थानीय संस्थाओं के सदस्यों द्वारा कुल सदस्यों के एक तिहाई (1/3) सदस्यों का निर्वाचन किया जाता है।
  2. विधान सभा का निर्वाचक मंडल (1/3): विधान परिषद की निर्धारित संख्या के 1/3 सदस्यों का निर्वाचन विधानसभा के सदस्यों द्वारा किया जाता है। ये निर्वाचित सदस्य विधानसभा के सदस्य नहीं होते।
  3. स्नातकों का निर्वाचक मंडल (1/12): यह उन स्नातक शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों का निर्वाचक मंडल होता है जो उस राज्य में रहते हों और जिन्होंने स्नातक स्तर की परीक्षा तीन वर्ष पूर्व उत्तीर्ण कर ली हो। यह कुल सदस्यों के 1/12 भाग को चुनता है।
  4. अध्यापकों का निर्वाचक मंडल (1/12): इसमें वे शिक्षक शामिल होते हैं जो राज्य के किसी भी माध्यमिक विद्यालय या इससे उच्च शिक्षण संस्था में 3 वर्ष से अधिक से पढ़ा रहे हों। यह भी कुल सदस्यों के 1/12 भाग को चुनता है।

मनोनयन (1/6 सदस्य):

  • राज्यपाल द्वारा मनोनयन: विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या के 1/6 सदस्यों का मनोनयन राज्यपाल द्वारा किया जाता है।
  • ​यह मनोनयन उन व्यक्तियों में से होता है जो कला, साहित्य, विज्ञान, सहकारिता और समाज सेवा के क्षेत्रों में विशेष व्यावहारिक ज्ञान या अनुभव रखते हों।

​3. राज्यपाल की कार्यपालिका शक्तियों एवं कार्यों का विस्तार से विश्लेषण कीजिए।

​राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका का वैधानिक प्रधान होता है। उसकी कार्यपालिका शक्तियाँ व्यापक हैं, जिनका प्रयोग वह स्वयं या अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है।

कार्यपालिका शक्तियाँ:

  1. नियुक्ति:
    • ​वह विधानसभा में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है।
    • ​मुख्यमंत्री के परामर्श से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
    • ​राज्य के महाधिवक्ता, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति करता है।
  2. परामर्श और सहयोग:
    • ​उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रपति से परामर्श लेता है।
    • ​वह मंत्रियों के बीच कार्यों का विभाजन करता है (मुख्यमंत्री के परामर्श से)।
    • ​उसे मुख्यमंत्री से शासन से संबंधित सभी विषयों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।
  3. निर्णयों का पुनर्निवेद
    • ​वह मुख्यमंत्री को किसी मंत्री के व्यक्तिगत निर्णय को सम्पूर्ण मंत्रिपरिषद के सम्मुख विचार के लिए प्रस्तुत करने को कह सकता है।
  4. शपथ:
    • ​राज्यपाल मंत्रिपरिषद के सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाता है।
  5. शक्ति विस्तार:
    • ​राज्यपाल की कार्यपालिका शक्तियाँ राज्य सूची में उल्लेखित विषयों तक विस्तृत हैं।
    • ​समवर्ती सूची के विषयों पर वह राष्ट्रपति की स्वीकृति से अपने अधिकार का प्रयोग करता है।
  6. पद से विमुक्त करना:
    • ​वह मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों को पद विमुक्त भी कर सकता है (सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत)।

​4. राज्य मंत्रिपरिषद की शक्तियों एवं कार्यों का विस्तृत वर्णन कीजिए।

​राज्य मंत्रिपरिषद, जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होता है, राज्य की कार्यपालिका का वास्तविक प्रधान है और शासन की सबसे अधिक महत्वपूर्ण संस्था है।

शक्तियाँ एवं कार्य:

  1. शासन की नीति निर्धारण: यह मंत्रिपरिषद का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। सभी विभागों की नीति का निर्धारण मंत्रिपरिषद द्वारा ही किया जाता है और नीतियों को कार्यरूप में परिणत भी यही करती है।
  2. उच्च पदों पर नियुक्तियाँ: संविधान के अनुसार राज्यपाल द्वारा की जाने वाली सभी उच्च नियुक्तियाँ (जैसे महाधिवक्ता, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष/सदस्य) मंत्रिपरिषद के परामर्श के आधार पर ही की जाती हैं।
  3. कानून निर्माण कार्यक्रम: विधानमंडल में कौन-कौन से विधेयक, कब और किस रूप में प्रस्तावित किए जाएँगे, इसका निर्णय मंत्रिपरिषद ही करती है
  4. वित्तीय कार्य (बजट): राज्य का बजट वित्तमंत्री द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है, जो मंत्रिपरिषद द्वारा निश्चित की गई नीति पर आधारित होता है। बजट को पारित कराने का उत्तरदायित्व भी मंत्रिपरिषद का ही होता है।
  5. विधानमंडल में प्रतिनिधित्व: मंत्रिपरिषद विधानमंडल में शासन का प्रतिनिधित्व करती है। मंत्रीगण विधानसभा एवं विधान परिषद के प्रश्नों का उत्तर देते हैं और शासन की नीतियों का समर्थन करते हैं।
  6. सलाह एवं सहायता: अनुच्छेद 163 के अनुसार, मंत्रिपरिषद का कार्य राज्यपाल को सहायता और परामर्श देना है, हालांकि व्यवहार में शासन संबंधी सभी महत्वपूर्ण निर्णय मंत्रिपरिषद ही लेती है।

​5. उच्च न्यायालय की शक्तियों एवं कार्यक्षेत्र (क्षेत्राधिकार) की विस्तृत विवेचना कीजिए।

​उच्च न्यायालय राज्य स्तर पर सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जिसकी शक्तियाँ एवं कार्यक्षेत्र (क्षेत्राधिकार) व्यापक हैं।

शक्तियाँ एवं कार्यक्षेत्र:

  1. प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार:
    • ​इसका अर्थ है कि उच्च न्यायालय द्वारा सीधे वादों की सुनवाई करना।
    • ​इसके अन्तर्गत संसद एवं विधानमंडल के निर्वाचन सम्बन्धी विवाद, राजस्व एकत्रीकरण, मौलिक अधिकार, वसीयत, विवाह विधि और कंपनी कानून जैसे वाद आते हैं।
  2. याचिका (रिट) अधिकारिता:
    • ​उच्च न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण तथा अधिकार पृच्छा जैसी पाँच प्रकार की याचिकाएँ जारी कर सकता है।
    • ​यह मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य मामलों के लिए भी याचिका जारी कर सकता है, जो इसे सर्वोच्च न्यायालय से इस संदर्भ में अधिक व्यापक शक्ति देती है।
  3. अपीलीय क्षेत्राधिकार: इसे तीन भागों में बांटा गया है:
    • सिविल अपीलीय क्षेत्राधिकार: आयकर, पेटेन्ट, डिजाइन, उत्तराधिकार आदि मामलों में जिला न्यायालयों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।
    • आपराधिक अपीलीय क्षेत्राधिकार: जब अपराधी को सत्र न्यायालय ने चार वर्ष या उससे अधिक का कारावास दण्ड दिया हो, तो उसके विरुद्ध अपील की जा सकती है।
    • संवैधानिक अपीलीय क्षेत्राधिकार: कोई भी ऐसा मुकदमा जिसमें संविधान की व्याख्या का प्रश्न निहित हो, तो उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।
  4. अभिलेख न्यायालय (Court of Record):
    • ​प्रत्येक उच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय होता है, जिसके निर्णय अभिलेख की तरह सुरक्षित रखे जाते हैं।
    • ​उसे अपनी अवमानना के लिए दण्ड देने की शक्ति भी प्राप्त है।
    • ​उसके निर्णय अधीनस्थ न्यायालयों के लिए कानून की तरह कार्य करते हैं।
  5. प्रशासन सम्बन्धी शक्तियाँ:
    • ​उच्च न्यायालय अपने अधीन किसी भी न्यायालय के पत्रों, निर्णयों को मंगवा सकता है और उनकी जाँच कर सकता है।
    • ​यह अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा अपनी शक्ति एवं सीमा का उल्लंघन न करने और कर्तव्यों का पालन निश्चित विधि के अनुसार करने को सुनिश्चित करता है।

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