कक्षा दसवीं सामाजिक अध्याय 11 लोकतंत्र का अर्थ एवं परिभाषाएं पाठ के प्रश्न और उत्तर


​❓ प्रश्नोत्तर (Question & Answers)

​A. वन लाइनर प्रश्नोत्तर (One-Liner Q&A) - 20 प्रश्न

  1. लोकतन्त्र शब्द किन दो ग्रीक शब्दों से मिलकर बना है? उत्तर: डेमोस और क्रेटिया।
  2. ​डेमोस का आधुनिक अर्थ क्या है? उत्तर: जनता।
  3. ​क्रेटिया का क्या अर्थ है? उत्तर: शक्ति।
  4. ​लोकतन्त्र को और किन नामों से जाना जाता है? उत्तर: जनतन्त्र और प्रजातन्त्र।
  5. ​किसने कहा, "लोकतन्त्र जनता का, जनता के लिए तथा जनता द्वारा शासन है?" उत्तर: अब्राहम लिंकन।
  6. ​लोकतन्त्र का कौन सा रूप केवल शासन का एक रूप माना जाता है? उत्तर: आधुनिक काल में।
  7. ​राजनीतिक लोकतन्त्र को अतीत में क्या कहा जाता था? उत्तर: व्यक्तिवादी लोकतन्त्र।
  8. ​मार्क्सवादी राजनीतिक लोकतन्त्र को क्या कहते हैं? उत्तर: पूँजीवादी लोकतन्त्र।
  9. ​राजनीतिक लोकतन्त्र का सैद्धान्तिक पक्ष क्या है? उत्तर: लोकतान्त्रिक राज्य।
  10. ​सामाजिक लोकतन्त्र मुख्य रूप से किस अधिकार पर जोर देता है? उत्तर: सामाजिक समानता का अधिकार।
  11. ​आर्थिक लोकतन्त्र का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर: प्रत्येक नागरिक को काम पाने का अधिकार (रोजगार)।
  12. ​मनरेगा (MGNREGA) अधिनियम कब लागू किया गया? उत्तर: 2 अक्टूबर 2009 को।
  13. ​नैतिक लोकतन्त्र की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति किस क्रांति में हुई थी? उत्तर: सन् 1789 की फ्रांस की क्रांति।
  14. ​प्रत्यक्ष लोकतन्त्र में प्रभुसत्ता का प्रयोग कौन करता है? उत्तर: जनता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से।
  15. ​प्रत्यक्ष लोकतन्त्र वर्तमान में कहाँ पाया जाता है? उत्तर: स्विट्जरलैण्ड के पाँच कैण्टनों में।
  16. ​प्रतिनिधि लोकतन्त्र में शासन की शक्ति का प्रयोग कौन करता है? उत्तर: जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि।
  17. ​लोकतन्त्र की शासन प्रणाली किस सिद्धान्त को स्वीकार करती है? उत्तर: लोक प्रभुत्व के सिद्धान्त को।
  18. ​लोकतन्त्र को "सार्वजनिक शिक्षा प्रदान करने वाला विद्यालय" किसने कहा? उत्तर: गैटेल।
  19. ​लोकतन्त्र के किस दोष के कारण इसे भीड़तन्त्र कहा जाता है? उत्तर: व्यक्ति सम्बन्धी धारणा अस्पष्ट होने के कारण।
  20. ​लोकतन्त्र की सफलता के लिए किस व्यवस्था का अन्त आवश्यक है? उत्तर: विशेषाधिकारों की व्यवस्था का अन्त।

​B. अति लघु उत्तरात्मक प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Q&A) - 10 प्रश्न

  1. लोकतन्त्र के तीन अन्तर्संबंधित अर्थ बताइए। उत्तर: 1. यह निर्णय लेने की एक विधि है। 2. यह निर्णय लेने के सिद्धान्तों का एक समूह है। 3. यह आदर्शात्मक मूल्यों से संबंधित अवधारणा है।
  2. लोकतन्त्र के चार प्रमुख रूप कौन से हैं? उत्तर: 1. राजनीतिक लोकतन्त्र। 2. सामाजिक लोकतन्त्र। 3. आर्थिक लोकतन्त्र। 4. नैतिक लोकतन्त्र।
  3. राजनीतिक लोकतन्त्र के दो मुख्य पक्ष (राज्य और शासन के रूप में) क्या हैं? उत्तर: लोकतान्त्रिक राज्य (शक्ति जनता में निहित) और लोकतान्त्रिक शासन (जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों का शासन)।
  4. सामाजिक लोकतन्त्र की स्थापना के लिए दो आवश्यक बातें क्या हैं? उत्तर: 1. समाज में नस्ल, जाति, लिंग आदि के आधार पर विशेषाधिकारों की व्यवस्था का अन्त किया जाए। 2. सभी को सामाजिक प्रगति का समान अवसर प्रदान किया जाए।
  5. नैतिक लोकतन्त्र की भावना का आधार क्या है? उत्तर: स्वतन्त्रता, समानता एवं बन्धुत्व की भावना, जिसमें मानव को शासन का मूल आधार माना जाता है।
  6. प्रतिनिधि लोकतन्त्र को परिभाषित कीजिए। उत्तर: यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें जनता शासन की शक्ति का प्रयोग अपने द्वारा समय-समय पर चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से करती है।
  7. लोकतन्त्र के दो मुख्य गुण बताइए। उत्तर: 1. सार्वजनिक हितों में वृद्धि। 2. कार्यकुशल शासन (जनसहयोग से नीतियां लागू होती हैं)।
  8. लोकतन्त्र में क्रान्ति की संभावना क्यों नहीं होती? उत्तर: क्योंकि यह शासन जनता के प्रति उत्तरदायी होता है, और जनता को शांतिपूर्ण ढंग से सरकार बदलने का अधिकार होता है।
  9. लोकतन्त्र की असफलता का एक बड़ा कारण क्या हो सकता है? उत्तर: देश में आर्थिक अव्यवस्था या गरीबी व अमीरी के बीच चौड़ी खाई (आर्थिक असमानता)।
  10. लोकतन्त्र की सफलता के लिए जनमत निर्माण के साधन कौन से हैं? उत्तर: प्रेस, साहित्य, रेडियो, टीवी और शान्तिपूर्ण ढंग से होने वाली सभाएँ/आलोचनाएँ।

​C. लघु उत्तरात्मक प्रश्नोत्तर (Short Answer Q&A) - 5 प्रश्न

  1. लोकतन्त्र के सन्दर्भ में 'आर्थिक लोकतन्त्र' का महत्त्व समझाइए। उत्तर: आर्थिक लोकतन्त्र सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक नागरिक को जीवनयापन के लिए रोजगार का अधिकार मिले, जिससे रोटी, कपड़ा और मकान की आवश्यकताएँ पूरी हो सकें। आर्थिक असमानता बढ़ने से समाज में गरीबी और अमीरी की खाई बढ़ती है, जो क्रांति को जन्म दे सकती है। आर्थिक समानता स्थापित करने के लिए ही सरकार द्वारा मनरेगा जैसी योजनाएँ चलाई जाती हैं, ताकि सभी को काम पाने का अधिकार मिल सके और लोकतन्त्र मजबूत हो।
  2. राजनीतिक लोकतन्त्र से संबंधित आधारभूत मान्यताएँ क्या हैं? उत्तर: इसकी आधारभूत मान्यताएँ हैं:
    • ​यह व्यक्ति की बुद्धि और विवेक में विश्वास रखता है।
    • ​यह मानता है कि सभी व्यक्ति मूलतः समान हैं।
    • ​इसका सैद्धान्तिक पक्ष लोकतान्त्रिक राज्य है और व्यवहारिक पक्ष लोकतान्त्रिक शासन
    • ​यह बहुमत के सिद्धान्त पर आधारित है।
    • ​लोकतन्त्र स्वयं में साध्य नहीं, बल्कि लोकतान्त्रिक मूल्यों की प्राप्ति का साधन है।
  3. लोकतन्त्र को नैतिक शिक्षा का साधन क्यों माना जाता है? उत्तर: लॉवेल और ब्राइस जैसे विद्वानों के अनुसार, लोकतन्त्र व्यक्ति को नैतिक शिक्षा प्रदान करता है। राजनीतिक अधिकार मिलने पर नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होते हैं। वे परिवार की संकीर्ण सीमाओं से निकलकर सार्वजनिक हितों पर विचार करने लगते हैं, और साथी नागरिकों के साथ सहयोग, सहिष्णुता, उदारता व सहानुभूति का व्यवहार करना सीखते हैं। इस प्रकार, यह नागरिकों में उच्च नैतिक भावना का विकास करता है।
  4. लोकतन्त्र की सफलता के लिए 'सत्ता का विकेन्द्रीकरण' क्यों आवश्यक है? उत्तर: लोकतन्त्र का आधार ही सत्ता का विकेन्द्रीकरण है। विकेन्द्रीकरण होने पर ही जनता के विभिन्न वर्ग शासन के कार्यों में भाग ले पाते हैं। इसका सर्वश्रेष्ठ रूप स्थानीय स्व-शासन है। स्थानीय स्व-शासन के माध्यम से सामान्य व्यक्ति शासन के कार्यों में रुचि लेता है, जिससे उसे नागरिकता की शिक्षा प्राप्त होती है और लोकतन्त्र मजबूत बनता है।
  5. लोकतन्त्र के किन्हीं तीन दोषों की व्याख्या कीजिए। उत्तर:
    • धन एवं समय का अपव्यय: आम चुनावों, समितियों और लंबी बहसों के कारण राष्ट्रीय धन और समय की बहुत अधिक हानि होती है, जिससे विकास की गति धीमी रहती है।
    • उदासीन एवं निष्क्रिय मतदाता: लोकतन्त्र जनता का शासन कहलाता है, फिर भी चुनावों में मतदाता निष्क्रिय रहते हैं (केवल 50-60% मतदान)। इससे अयोग्य और स्वार्थी प्रतिनिधि भी चुने जा सकते हैं।
    • संकटकाल में कमजोर शासन: युद्ध या संकटकाल की स्थिति में लोकतन्त्र कमजोर सिद्ध होता है, क्योंकि इसमें त्वरित एवं गुप्त निर्णय संभव नहीं होते हैं, जबकि अधिनायकवाद में ये संभव हैं।

​D. निबंधात्मक प्रश्नोत्तर (Essay Type Q&A) - 5 प्रश्न

  1. लोकतन्त्र का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसके विभिन्न रूपों (राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और नैतिक) की विस्तृत व्याख्या कीजिए। उत्तर: (इसमें लोकतन्त्र के अर्थ, परिभाषा (लिंकन/बर्न्स) और चारों प्रकारों की विस्तृत व्याख्या (राजनीतिक के दो रूप, सामाजिक समानता की आवश्यकता, आर्थिक लोकतन्त्र में रोजगार का महत्त्व, और नैतिक लोकतन्त्र में बन्धुत्व) शामिल होगी। निष्कर्ष में चारों रूपों का समन्वय ही सच्चे लोकतन्त्र की नींव है।)
  2. लोकतन्त्र के परम्परागत उदारवादी सिद्धान्त की आधारभूत मान्यताओं और लक्षणों का वर्णन कीजिए। उत्तर: (उदारवादी सिद्धान्त की व्याख्या, व्यक्ति के विवेक, स्वतन्त्रता और समानता में विश्वास। बहुमत का शासन, सरकार का जनता के प्रति उत्तरदायी होना, निश्चित अवधि पर चुनाव, नागरिक स्वतन्त्रताएँ, जनमत का आदर और एक से अधिक राजनीतिक दलों की उपस्थिति जैसे लक्षणों की विस्तृत चर्चा।)
  3. लोकतन्त्र एक कार्यकुशल शासन प्रणाली है, स्पष्ट कीजिए। इसके प्रमुख गुण और दोषों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए। उत्तर: (लोकतन्त्र के गुण: सार्वजनिक हित में वृद्धि, नैतिक व सार्वजनिक शिक्षा का साधन, क्रान्ति की संभावना न होना, देशभक्ति का विकास। दोष: धन/समय का अपव्यय, संकटकाल में कमजोरी, बुद्धिजीवी वर्ग की उदासीनता। तुलनात्मक विश्लेषण में यह दर्शाना कि गुणों की प्रबलता के कारण ही यह सबसे अधिक लोकप्रिय शासन प्रणाली है।)
  4. लोकतन्त्र को सफल बनाने के लिए आवश्यक सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक परिस्थितियाँ कौन-कौन सी हैं? विस्तार से समझाइए। उत्तर: (सामाजिक: सामाजिक समानता, नागरिकों का श्रेष्ठ नैतिक चरित्र। आर्थिक: सुदृढ़ अर्थव्यवस्था, आर्थिक समानता/वर्ग संघर्ष का अभाव। राजनीतिक: शान्ति व्यवस्था, लिखित संविधान, मौलिक स्वतन्त्रताएँ, सत्ता का विकेन्द्रीकरण, स्वतन्त्र न्यायपालिका, योग्य राजनीतिज्ञ और स्वस्थ दलीय व्यवस्था का महत्त्व समझाना।)
  5. प्रत्यक्ष लोकतन्त्र और प्रतिनिधि लोकतन्त्र में क्या अंतर है? प्रतिनिधि लोकतन्त्र की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं और यह आधुनिक राज्यों के लिए क्यों आवश्यक है? उत्तर: (प्रत्यक्ष और प्रतिनिधि लोकतन्त्र में अंतर (जनता स्वयं या प्रतिनिधियों द्वारा शासन)। प्रतिनिधि लोकतन्त्र की विशेषताएँ (जनता का शासन, उत्तरदायी शासन, सीमित शासन) का वर्णन। यह बताना कि वर्तमान में बड़े आकार और विशाल जनसंख्या वाले राज्यों में केवल प्रतिनिधि लोकतन्त्र ही लागू करना संभव है, इसलिए यह आधुनिक राज्यों के लिए आवश्यक है।)

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