कक्षा दसवीं सामाजिक अध्याय 11: लोकतन्त्र का अर्थ एवं परिभाषाएँ - सरल नोट्स


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​1. लोकतन्त्र का अर्थ एवं परिभाषाएँ

  • अर्थ:
    • ​लोकतन्त्र अंग्रेजी शब्द "Democracy" का हिंदी अनुवाद है, जिसे जनतंत्र या प्रजातंत्र भी कहते हैं।
    • Democracy दो ग्रीक शब्दों से बना है:
      • डेमोस (Demos): मूलतः भीड़, लेकिन आधुनिक काल में जनता
      • क्रेटिया (Kratia): शक्ति या शासन।
    • निष्कर्ष: डेमोक्रेसी का अर्थ है जनता की शक्ति पर आधारित, जनता के द्वारा शासन
  • अन्तर्निहित अर्थ:
    1. ​यह निर्णय लेने की एक विधि है।
    2. ​यह निर्णय लेने के सिद्धान्तों का एक समूह है।
    3. ​यह आदर्शात्मक मूल्यों से संबंधित अवधारणा है।
  • परिभाषाएँ:
    • अब्राहम लिंकन: "लोकतन्त्र जनता का, जनता के लिए तथा जनता द्वारा शासन है।"
    • बर्न्स: "लोकतन्त्र एक ऐसा शब्द है जिसके अनेक अर्थ हैं।"
    • सीले: "लोकतन्त्र वह शासन व्यवस्था है, जिसमें राष्ट्र का अधिकांश भाग शासक होता है।"

​2. लोकतन्त्र के विभिन्न प्रकार

​लोकतन्त्र को आधुनिक काल में चार मुख्य रूपों में देखा जाता है:

  1. राजनीतिक लोकतन्त्र:
    • ​इसे व्यक्तिवादी या पश्चिमी लोकतन्त्र भी कहते हैं (मार्क्सवादी इसे पूँजीवादी लोकतन्त्र कहते हैं)।
    • ​इसमें दो पक्ष हैं:
      • राज्य के रूप में: शक्ति जनता में निहित होती है। जनता को सरकार के निर्माण, नियंत्रण और पदच्युत करने का पूर्ण अधिकार है (लोकतान्त्रिक राज्य)।
      • शासन के रूप में: जनता द्वारा चुनी हुई सरकार का शासन (लोकतान्त्रिक शासन)।
    • मान्यताएँ: जनता का शासन, बहुमत में विश्वास, साध्य नहीं बल्कि साधन (लोकतान्त्रिक मूल्यों की प्राप्ति का)।
  2. सामाजिक लोकतन्त्र:
    • ​इसका अर्थ है समाज में समानता के विचार की प्रबलता।
    • ​किसी भी नागरिक के साथ नस्ल, रंग, वर्ण, जाति, धर्म, भाषा, लिंग, एवं जन्म आदि के आधार पर कोई भेदभाव न हो।
    • आवश्यकताएँ: विशेषाधिकारों की व्यवस्था का अन्त और सभी को सामाजिक प्रगति का समान अवसर
  3. आर्थिक लोकतन्त्र:
    • ​इसका अर्थ है प्रत्येक नागरिक को जीवन यापन हेतु रोजगार (रोटी, कपड़ा, मकान) मिलना चाहिए।
    • ​आर्थिक असमानता कम करना ताकि गरीबी और अमीरी की खाई न बढ़े।
    • उदाहरण: केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर 2009 को "महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम" (मनरेगा) लागू किया, जिसमें 100 दिन का रोजगार उपलब्ध करवाया जाता है।
  4. नैतिक लोकतन्त्र:
    • ​यह लोकतन्त्र को एक नैतिक एवं आध्यात्मिक जीवन दर्शन के रूप में स्वीकार करता है, जिसमें मानव ही शासन का मूल आधार है।
    • सर्वोत्तम अभिव्यक्ति: 1789 की फ्रांसीसी क्रान्ति के मूल्य: स्वतन्त्रता, समानता एवं बन्धुत्व। बन्धुत्व (भाईचारा) के बिना समानता और स्वतन्त्रता संभव नहीं।

​3. लोकतान्त्रिक शासन के प्रकार (कार्यप्रणाली के आधार पर)

  1. प्रत्यक्ष लोकतन्त्र (Direct Democracy):
    • ​जनता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से राज्य की प्रभुत्व शक्ति का पूर्ण प्रयोग करती है (नीति निर्माण और प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति)।
    • उदाहरण: प्राचीन यूनान के नगर-राज्यों और स्विट्जरलैण्ड के पाँच कैण्टनों (प्रान्तों) में।
    • संभव: केवल छोटे आकार और कम जनसंख्या वाले राज्यों में।
  2. प्रतिनिधि/अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र (Representative/Indirect Democracy):
    • ​जनता शासन की शक्ति का प्रयोग अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से करती है।
    • ​यह वर्तमान में अधिकांश बड़े राज्यों में पाया जाता है।

​4. लोकतन्त्र की प्रमुख विशेषताएँ

  • सम्पूर्ण जनता का शासन: यह किसी विशेष जाति, वर्ग या नस्ल का शासन नहीं होता।
  • जनता द्वारा निर्मित शासन: जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो सरकार का निर्माण करते हैं।
  • जनता के प्रति उत्तरदायी शासन: शासन अपने कार्यों के लिए जनता के प्रति उत्तरदायी होता है और जनता उसे बदल सकती है।
  • सीमित/संवैधानिक शासन: शासन स्वेच्छाचारी नहीं होता, बल्कि संविधान द्वारा सीमित शक्तियों का उपभोग करता है।
  • स्वतन्त्रता एवं समानता: यह नागरिकों को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में स्वतन्त्रता व समानता प्रदान करता है।

​5. लोकतन्त्र के गुण और दोष

गुण (Merits)

दोष (Demerits)

सार्वजनिक हितों में वृद्धि: जनप्रतिनिधि पुनः चुनाव जीतने के लिए सार्वजनिक हित में कार्य करते हैं।

जनता सम्बन्धी धारणा अस्पष्ट: व्यक्ति भावनाओं से संचालित होता है, जिससे भीड़तंत्र दिखाई देता है।

कार्यकुशल शासन: नीतियाँ जनमत के अनुसार बनती हैं, जिससे जन सहयोग मिलता है।

बुद्धिजीवी वर्ग की उदासीनता: गुणों की अपेक्षा संख्या को अधिक महत्त्व मिलने से बुद्धिजीवी भाग नहीं लेते।

सार्वजनिक एवं नैतिक शिक्षा का साधन: नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूक होते हैं और बड़े हितों के लिए छोटे हितों का त्याग करना सीखते हैं।

राजनीतिक दलों का दोषपूर्ण संचालन: दलगत स्वार्थ राष्ट्रहित से ऊपर हो जाते हैं।

देशभक्ति की भावना का विकास: राज्य को किसी शासक वर्ग की सम्पत्ति नहीं, बल्कि जनता की सम्पत्ति माना जाता है।

धन एवं समय का अपव्यय: चुनावों, नीतियों के निर्माण और बहसों में अत्यधिक धन और समय की बर्बादी होती है।

क्रान्ति की संभावना नहीं: जनता को शांतिपूर्ण ढंग से सरकार बदलने का अधिकार होता है।

6. लोकतन्त्र की सफलता के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ

​लोकतन्त्र को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित परिस्थितियाँ आवश्यक हैं:

  1. शान्ति व्यवस्था: देश में आन्तरिक शांति और बाहरी आक्रमण का भय न हो।
  2. सुदृढ़ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और आर्थिक समानता: गरीबी और अमीरी की चौड़ी खाई न हो।
  3. सामाजिक समानता: धर्म, जाति, भाषा, रंग, आदि के आधार पर कोई भेदभाव न हो।
  4. जनता का शिक्षित एवं जागरूक होना: शिक्षित जनता ही स्वस्थ जनमत का निर्माण करती है।
  5. जनमत निर्माण के साधनों की स्वतन्त्रता: प्रेस, साहित्य और सभाओं को आलोचना की स्वतन्त्रता हो।
  6. मौलिक स्वतन्त्रताएँ: संविधान द्वारा नागरिकों को मौलिक स्वतन्त्रताएँ प्रदान की गई हों और उनकी रक्षा का प्रबन्ध हो।
  7. स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका: यह नागरिकों की स्वतन्त्रता की रक्षा करती है और सरकार को निरंकुश होने से रोकती है।
  8. योग्य एवं निष्ठावान राजनीतिज्ञ: ऐसे नेता जो राष्ट्रीय समस्याओं का लोकतान्त्रिक हल ढूँढ़ने में समर्थ हों।
  9. सत्ता का विकेन्द्रीकरण: स्थानीय स्व-शासन के माध्यम से आम नागरिक शासन के कार्यों में भाग लें।


संकटकाल में कमजोर शासन: युद्ध या संकटकाल में त्वरित एवं गुप्त निर्णय संभव नहीं होते, जिससे यह कमजोर सिद्ध होता है।




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