1. राष्ट्रीय एकता की पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय चेतना: भारत में अनेक शासकों के बावजूद एक राष्ट्रीय चेतना हमेशा मौजूद रही है। मध्यकालीन आक्रमणकारियों के खिलाफ प्रतिरोध और विदेशी शासन के विरुद्ध राष्ट्रीय आंदोलन ने भारत को एक समान राजनीतिक पहचान दी।
- विविधता में एकता: भाषा, जाति, क्षेत्र, संप्रदाय, पहनावा, खान-पान की विविधताओं के बावजूद, भारतीयता की अंतर्निहित एकता के कारण स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया गया।
2. स्वतन्त्रता के समय की स्थिति
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विभाजन: स्वतंत्रता से पूर्व भारत ब्रिटिश भारत (प्रांत) और देशी रियासतों में बंटा हुआ था।
- ब्रिटिश भारत: सीधे ब्रिटिश गवर्नरों के अधीन।
- देशी रियासतें: राजाओं का शासन, जिन्होंने संधियों के माध्यम से ब्रिटिश आधिपत्य स्वीकार कर लिया था।
- रियासतों की संख्या: स्वतंत्रता के समय 500 से अधिक छोटी-बड़ी देशी रियासतें थीं।
- विलय की चुनौती: भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 ने देशी रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने के लिए स्वतंत्र घोषित किया। इन रियासतों का भारत में विलय कर राष्ट्रीय एकीकरण पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी।
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विलय का कार्य:
- गृह मंत्रालय: यह जिम्मेदारी अंतरिम सरकार में गृह मंत्रालय को सौंपी गई, जिसके प्रमुख सरदार वल्लभ भाई पटेल थे।
- महत्वपूर्ण व्यक्ति: सरदार पटेल ने वी. पी. मेनन को अपना सचिव नियुक्त किया।
- विलय प्रक्रिया: 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही दोनों ने मिलकर विलय पत्र तैयार करवाया और अधिकांश रियासतों का भारत में विलय सुनिश्चित किया।
- विलय से शेष: जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ का विलय स्वतंत्रता के पश्चात् हुआ।
3. प्रमुख रियासतों का भारत में विलय
3.1. जम्मू-कश्मीर का विलय
- महत्व: औपनिवेशिक भारत की सबसे बड़ी और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रियासत। इसकी सीमाएं अफगानिस्तान, चीन, तिब्बत से मिलती हैं।
- शासक: महाराजा हरिसिंह (1925 ई. से)।
- राजनीतिक दल: नेशनल कॉन्फ्रेंस (पहले मुस्लिम कॉन्फ्रेंस), जिसके नेता शेख अब्दुल्ला थे।
- विलय की स्थिति: 15 अगस्त 1947 तक महाराजा ने निर्णय नहीं लिया था। पाकिस्तान ने इसे अपने में मिलाने का प्रयास किया।
- घुसपैठ: सितंबर 1947 से पाकिस्तान ने घुसपैठियों के वेश में अपनी सेना को कश्मीर में घुसाना शुरू कर दिया।
- विलय की घोषणा: पाकिस्तानी सेना के श्रीनगर के करीब पहुँचने पर, 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरिसिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय कर दिया।
- पुष्टि: 1951 में हुए चुनाव के बाद, जम्मू-कश्मीर राज्य की संविधान सभा ने 6 फरवरी 1954 को भारत में विलय की पुष्टि की (संविधान की धारा 3 के अनुसार)।
- पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK): भारतीय सेना ने पाकिस्तानी हमलावरों को खदेड़ा, लेकिन कुल भू-भाग का एक तिहाई हिस्सा अभी भी पाकिस्तान के अधीन है।
3.2. हैदराबाद का विलय
- स्थिति: दक्कन के पठार पर स्थित, चारों ओर से भारतीय राज्यों से घिरा।
- शासक: निजाम मीर उस्मान अली।
- आबादी: 85% आबादी हिंदू थी, पर सेना, पुलिस और प्रशासन पर मुसलमानों का दबदबा था।
- निजाम की इच्छा: स्वतंत्र राज्य की स्थापना करना चाहता था, पाकिस्तान से मिलने का प्रयास किया और मामला संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाने की कोशिश की।
- उग्रवादी समूह: रजाकार नामक उग्रवादी मुस्लिम सांप्रदायिक संगठन ने बड़े पैमाने पर अत्याचार शुरू किए।
- सैनिक कार्यवाही: रजाकारों के अत्याचार और पाकिस्तान से हथियार प्राप्त करने की खबरों के बाद, सरदार पटेल ने सैनिक कार्यवाही का निर्णय लिया।
- ऑपरेशन पोलो: 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना ने हैदराबाद पर तीन ओर से आक्रमण किया।
- विलय: 17 सितंबर 1948 को निजाम ने हैदराबाद रियासत के भारत में विलय को स्वीकार कर लिया।
3.3. जूनागढ़ का विलय
- स्थिति: गुजरात राज्य में स्थित।
- शासक: नवाब मोहब्बत खान। अधिकांश जनता गैर-मुस्लिम थी।
- दीवान: शाहनवाज भुट्टो (मुस्लिम लीग नेता)।
- विलय की घोषणा: दीवान के कहने पर नवाब ने रियासत का पाकिस्तान में विलय करने की घोषणा की।
- सरदार पटेल का आक्रोश: पाकिस्तान द्वारा 13 सितंबर 1947 को विलय स्वीकार करने पर पटेल आक्रोशित हुए।
- विलय: भारत ने जूनागढ़ और बाबलियावाड़ में सेना भेज दी। नवाब पाकिस्तान भाग गया।
- जनमत संग्रह: फरवरी 1948 में जनमत संग्रह करवाकर जूनागढ़ का भारत में विलय किया गया।
- निष्कर्ष: इन तीनों रियासतों का भारत में शामिल होना सरदार पटेल के अदम्य साहस का परिणाम था, इसलिए उन्हें भारत का निर्माता और लौह पुरुष कहा जाता है।
5. राजस्थान का एकीकरण
- स्वतंत्रता के समय: राजस्थान में 19 रियासतें, 3 ठिकाने और 1 केन्द्र शासित प्रदेश (अजमेर-मेरवाड़ा) था।
- संवेदनशीलता: जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर जैसी रियासतों की सीमा पाकिस्तान से लगती थी, अतः इनका विलय संवेदनशील था।
- समय: एकीकरण में लगभग 8 वर्ष 7 माह लगे और यह 7 चरणों में पूरा हुआ।
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प्रमुख चरण:
- मत्स्य संघ: (18 मार्च 1948) - अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली। (राजधानी: अलवर)
- पूर्व राजस्थान: (25 मार्च 1948) - 9 रियासतें, जैसे कोटा, बूँदी, झालावाड़, आदि। (राजधानी: कोटा)
- संयुक्त राजस्थान: (18 अप्रैल 1948) - पूर्व राजस्थान + मेवाड़। (राजधानी: उदयपुर)
- वृहत् राजस्थान: (30 मार्च 1949) - संयुक्त राजस्थान + जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर। (राजधानी: जयपुर)
- राजस्थान दिवस: 30 मार्च को मनाया जाता है।
- संयुक्त वृहत् राजस्थान: (15 मई 1949) - वृहत् राजस्थान + मत्स्य संघ का विलय।
- राजस्थान संघ: (26 जनवरी 1950) - सिरोही की दो तहसीलों (आबू व देलवाड़ा को छोड़कर) का विलय।
- वर्तमान राजस्थान का निर्माण: (1 नवम्बर 1956) - राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों पर आबू एवं देलवाड़ा तथा अजमेर-मेरवाड़ा का विलय किया गया।
6. राज्यों का पुनर्गठन
- मांग: स्वतंत्रता के पश्चात् भाषा के आधार पर राज्यों के निर्माण की मांग तेजी से होने लगी (जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब)।
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आंध्रप्रदेश का गठन:
- आंदोलन: आंध्र (मद्रास से अलग) के लिए आक्रामक आंदोलन।
- बलिदान: पोट्टि श्रीरामुलू ने आमरण अनशन किया और 58 दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई।
- स्थापना: अक्टूबर 1953 में आंध्रप्रदेश राज्य की स्थापना की गई, जो भाषा के आधार पर गठित होने वाला पहला राज्य था।
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राज्य पुनर्गठन आयोग:
- गठन: 1953 में।
- अध्यक्ष: न्यायाधीश फजल अली। (सदस्य: के. एम. पणिक्कर और एच. एन. कुंजरू)।
- रिपोर्ट: 1955 में रिपोर्ट दी।
- राज्य पुनर्गठन अधिनियम (1956): आयोग के प्रतिवेदन के आधार पर अधिनियम पारित किया गया, जिसके पश्चात् 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों की व्यवस्था की गई।
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अन्य राज्यों का गठन:
- महाराष्ट्र और गुजरात: बम्बई राज्य को बाँटकर 1960 में।
- नागालैंड: नागा जनजाति के आंदोलन के बाद 1963 में।
- हरियाणा: 1966 में पंजाब का पुनर्गठन कर (चंडीगढ़ साझा राजधानी)।
- हिमाचल प्रदेश: 1971 में पूर्ण राज्य का दर्जा।
- मेघालय, त्रिपुरा: 1972 में पूर्ण राज्य का दर्जा।
- सिक्किम: जनमत संग्रह द्वारा 1975 में भारत में विलय।
- मिजोरम, अरुणाचल, गोवा: 1987 में पूर्ण राज्य बने।
- उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखण्ड: सन् 2000 में क्रमशः उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार से अलग होकर बने।
- तेलंगाना: 2 जून 2014 को आंध्रप्रदेश से अलग होकर बना।
- वर्तमान स्थिति: वर्तमान में 29 राज्य एवं 7 केन्द्र प्रशासित प्रान्त हैं (नोट: नवीनतम जानकारी के अनुसार 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं, लेकिन यह नोट्स केवल दिए गए पाठ पर आधारित हैं)।
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