मानव का उद्भव और विकास:
* उद्भव: मानव (होमो सेपियंस) का उद्भव लगभग 25 लाख साल पहले हुआ।
* विशेषता: विकसित मस्तिष्क, सोचने और निर्णय लेने की क्षमता।
* शारीरिक बदलाव: दो पैरों पर सीधा चलना शुरू किया, जिससे हाथ काम करने के लिए स्वतंत्र हो गए।
* जीवनशैली: शुरुआत में, भोजन के लिए पूरी तरह से पर्यावरण पर निर्भर थे।
प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग:
* मानव ने धीरे-धीरे पर्यावरणीय संसाधनों का उपयोग केवल भोजन के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य कामों के लिए भी करना शुरू किया।
* पिछले कुछ दशकों में संसाधनों का अत्यधिक दोहन हुआ है, जिससे पर्यावरण को गंभीर खतरा है।
2.1 पर्यावरण में प्राकृतिक संसाधन
अजैविक संसाधन (निर्जीव):
* भूमि: पृथ्वी की सतह का 29% हिस्सा। इसका उपयोग खेती, रहने के लिए मकान, सड़क, और उद्योग बनाने के लिए किया जाता है। बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण भूमि का ह्रास हो रहा है।
* जल: पृथ्वी पर जल का प्राथमिक स्रोत वर्षा है। यह खेती, उद्योगों, और घरेलू कामों के लिए आवश्यक है। यद्यपि यह अक्षय (कभी न खत्म होने वाला) संसाधन है, लेकिन अत्यधिक उपयोग से इसकी कमी हो रही है।
* ऊर्जा:
* प्राथमिक स्रोत: सौर विकिरण।
* जीवाश्म ईंधन: कोयला, पेट्रोलियम, और प्राकृतिक गैस। ये लाखों साल पहले वनस्पतियों और जीवों के दबने से बने। ये ऊर्जा के अनवीकरणीय (non-renewable) स्रोत हैं।
* उपयोग: खाना पकाने, इंजन चलाने, बिजली बनाने, और प्लास्टिक जैसे उत्पाद बनाने में।
* स्वच्छ ईंधन: सीएनजी (संपीडित प्राकृतिक गैस)।
* अन्य स्रोत: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, और नाभिकीय ऊर्जा।
* खनिज अयस्क:
* धातुओं के रासायनिक यौगिक, जैसे एल्युमिनियम, लोहा, तांबा।
* उपयोग: बर्तन, वाहन, हथियार, रेल की पटरियां, और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने में।
* ये सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और अत्यधिक खनन से तेज़ी से खत्म हो रहे हैं।
* चांदी, सोना, और प्लेटिनम जैसी धातुएँ बहुमूल्य मानी जाती हैं।
जैविक संसाधन (सजीव):
* पौधे:
* भोजन: अनाज, फल, सब्जियां, और दालें।
* औद्योगिक कच्चा माल: कपास, जूट, रबर, लकड़ी।
* औषधीय गुण: कई पौधों में औषधीय गुण होते हैं।
* जंतु:
* भोजन: बकरी, मछली, अंडे, मुर्गियां।
* परिवहन: घोड़े, बैल, ऊँट जैसे जानवर सामान ढोने के लिए उपयोग होते थे।
* अन्य: भेड़ों से ऊन, रेशम कीटों से रेशम मिलता है।
* सूक्ष्मजीव:
* उपयोग: एंटीबायोटिक्स बनाने, किण्वन प्रक्रिया (fermentation) में।
* भूमिका: मृत पौधों और जंतुओं का विघटन (decomposing) करते हैं।
2.2 आदिम समाज और पर्यावरण
मानव विकास की कहानी:
* आस्ट्रेलोपिथेकस (Australopithecines): सबसे पुराने मानव पूर्वज, जो लगभग 3.5 लाख वर्ष पहले दक्षिण अफ्रीका में सीधे खड़े होकर चलते थे।
* होमो इरेक्टस: 1.5 से 2 लाख साल पहले के मानव, जिन्होंने हाथ की कुल्हाड़ी बनाई और आग का उपयोग करना सीखा।
* निएन्डरथल मानव (होमो सेपियन्स निएन्डरटलैन्सिस): बेहतर औजार बनाने वाले कुशल शिकारी थे।
* होमो सेपियंस (आधुनिक मानव): लगभग 35,000 साल पहले अस्तित्व में आए और एकमात्र जीवित मानव प्रजाति हैं।
जीवनशैली:
* शिकारी और संग्राहक (Hunter-gatherers): आदिम मानव भोजन के लिए जानवरों का शिकार करते थे और जंगलों से बीज, जड़ें और फल इकट्ठा करते थे।
* खानाबदोश (Nomadic): वे भोजन की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते थे। उनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं था।
* समूह में रहना: वे 20-30 लोगों के समूह में रहते थे, और काम (जैसे शिकार) बाँटकर करते थे।
* आवास: गुफाओं या पौधों से ढके अस्थायी आश्रयों में रहते थे।
2.3 आदिम मानव के औजार और आग की खोज
* औजार:
* आदिम मानव ने जंगली जानवरों को भगाने और शिकार करने के लिए पत्थरों, हड्डियों, और लकड़ियों से औजार बनाए।
* होमो इरेक्टस: कठोर और नुकीले औजार, जैसे कुल्हाड़ी, बनाए।
* निएन्डरथल: अधिक बेहतर तकनीक से चाकू, पिन, मछली पकड़ने के हुक, और सुइयां बनाईं।
* धीरे-धीरे, ये औजार नियोलिथिक (नवपाषाण) युग में पॉलिश किए हुए और भव्य हो गए।
* आग का उपयोग:
* खोज: होमो इरेक्टस ने लगभग 2 लाख वर्ष पहले आग की खोज की।
* लाभ:
* ठंड से बचाव और गर्म रहने के लिए।
* खाना पकाने के लिए, जिससे भोजन स्वादिष्ट और आसानी से पचने योग्य हो गया।
* खतरनाक जानवरों को दूर भगाने के लिए।
2.4 और 2.5 स्थायी जीवन और कृषि का विकास
* स्थायी आवास: औजारों में सुधार और आग की खोज के बाद, मानव ने स्थायी रूप से रहना शुरू किया और समूह में अपने आवास बनाए।
* कृषि की शुरुआत:
* लगभग 12,000 साल पहले, मानव ने पौधों के बीजों को उगाना सीखा।
* इससे उन्हें भोजन खोजने के बजाय एक ही जगह पर भोजन प्राप्त करने का विचार आया।
* लगभग 10,000 साल पहले, आदिम कृषि समाज का गठन हुआ।
* पशुपालन:
* सबसे पहले कुत्ते को पालतू बनाया गया।
* बाद में, खेती के लिए बैलों का उपयोग किया गया, और परिवहन के लिए घोड़े, ऊँट जैसे जानवरों को पाला गया।
* जनसंख्या वृद्धि: स्थायी जीवन और बेहतर भोजन के कारण जनसंख्या में वृद्धि हुई।
* शिल्पकारिता: कृषि उत्पादों की अधिकता होने पर लोग शिल्पकार बन गए और मिट्टी के बर्तन और आभूषण जैसी चीजें बनाने लगे।
2.6 पहिये का आविष्कार
* आविष्कार: पहिये का आविष्कार लगभग 5000 साल पहले इराक, सीरिया और तुर्की में हुआ।
* शुरुआत: पहला पहिया लकड़ी के लट्ठे की गोल स्लाइस जैसा था।
* उपयोग:
* सबसे पहले रथों में किया गया, जिन्हें गधे या घोड़े खींचते थे।
* कुम्हार द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने वाली चाक के रूप में भी उपयोग किया जाता था।
* विकास: लकड़ी के भारी पहियों को बाद में हल्के और मजबूत धातु के स्पोक वाले पहियों से बदल दिया गया।
2.7 और 2.8 औद्योगीकरण और संसाधनों का दोहन
* औद्योगीकरण का प्रारंभ:
* बेहतर औजार बनाने के लिए लकड़ी और पत्थर का उपयोग करना।
* चकमक पत्थर का खनन (खनिक)।
* पहिये बनाना, इमारतें बनाना, और अयस्कों से औजार और आभूषण बनाना।
* धातु की खोज:
* प्रगलन (smelting): उच्च तापमान पर अयस्क से धातु को अलग करने की प्रक्रिया।
* लगभग 8000 साल पहले ईरान और तुर्की में धातु (तांबा और सोना) का उपयोग शुरू हुआ।
* कांस्य युग: तांबे और टिन को मिलाकर कांसा बनाया गया, जो बहुत सख्त था।
* लौह युग: लगभग 1200 ईसा पूर्व में लोहे का उपयोग शुरू हुआ, जो कांस्य से भी बेहतर था।
* औद्योगीकरण की वृद्धि के कारण:
* तकनीकी विकास और बेहतर औजारों का निर्माण।
* जनसंख्या में वृद्धि और बढ़ती ज़रूरतें।
* संसाधनों का दोहन और पर्यावरणीय प्रभाव:
* कृषि और शहरीकरण के लिए जंगलों की कटाई।
* कोयले और अयस्कों का खनन।
* औद्योगिक क्रांति के बाद संसाधनों का अत्यधिक दोहन हुआ।
* परिणामस्वरूप, जंगल तेजी से कम हो रहे हैं, वन्यजीव समाप्त हो रहे हैं, और वायु, जल और मृदा का प्रदूषण बढ़ रहा है।
* आदिम मानव और पर्यावरण के बीच सम्मान का रिश्ता था, लेकिन आधुनिक समाज में यह रिश्ता बदल गया है, जिससे पर्यावरण के अवक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
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