कक्षा 12वीं पर्यावरण पाठ 4 पारिस्थितिकी सिद्धांत पाठ के नोट्स


​पारिस्थितिकी के सिद्धांत

​1. पारिस्थितिकी क्या है? 🤔

  • परिभाषा: पारिस्थितिकी विज्ञान की वह शाखा है जो जीवों और उनके पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्ययन करती है।
  • उत्पत्ति: यह शब्द 1869 में जर्मन जीवविज्ञानी अर्नेस्ट हैकेल द्वारा गढ़ा गया। यह ग्रीक शब्द 'ओइकॉस' (घर) और 'लोगोस' (अध्ययन) से मिलकर बना है।
  • फोकस: यह जीवों के आपस में और उनके जैविक (बायोटिक) तथा अजैविक (एबायोटिक) घटकों के साथ संबंधों पर जोर देता है।

​2. पारिस्थितिकीय संगठन के स्तर

​पारिस्थितिकी का अध्ययन अलग-अलग स्तरों पर किया जाता है, जो छोटे से बड़े क्रम में इस प्रकार हैं:

  • जीव (व्यष्टि): यह अध्ययन की मूल इकाई है। इसमें किसी एक जीव के शरीर-विज्ञान, व्यवहार और वितरण का अध्ययन होता है।
  • समष्टि (Population): एक ही प्रजाति के जीवों का समूह जो एक निश्चित क्षेत्र में रहते हैं और आपस में प्रजनन करते हैं।
  • समुदाय (Community): एक ही क्षेत्र में रहने वाली विभिन्न प्रजातियों के जीवों का समूह। ये आपस में एक-दूसरे के साथ संबंध रखते हैं।
  • पारितंत्र (Ecosystem): एक समुदाय और उसके भौतिक पर्यावरण के बीच का संबंध, जो मिलकर एक पारिस्थितिकीय इकाई बनाते हैं। इसमें ऊर्जा प्रवाह और पोषक तत्व चक्र का अध्ययन होता है।
  • बायोम (Biome): एक बड़ा क्षेत्र जिसमें एक विशिष्ट प्रकार की वनस्पति, जीव और जलवायु होती है। जैसे जंगल या मरुस्थल।
  • जैवमंडल (Biosphere): पृथ्वी का वह हिस्सा जहाँ जीवन मौजूद है। यह सभी बायोम और जलीय प्रणालियों को मिलाकर बनता है।

​3. प्राकृतिक पर्यावास और निकेत (Niche)

  • प्राकृतिक पर्यावास (Habitat): यह वह भौतिक स्थान है जहाँ कोई जीव रहता है। यह उस जीव को भोजन, पानी और आश्रय जैसी आवश्यक चीजें प्रदान करता है।
    • उदाहरण: हाथी का पर्यावास जंगल है, जबकि शार्क का समुद्र है।
    • संरचनात्मक घटक: स्थान, भोजन, जल और आश्रय।
    • प्रकार: स्थलीय, अलवणीय जल, ज्वारनद मुख (Estuarine) और समुद्री।
  • निकेत (Niche): यह किसी प्रजाति का पर्यावास में कार्यात्मक रोल या "पेशा" है। यह बताता है कि कोई जीव अपने पर्यावास में कैसे रहता है, क्या खाता है और क्या करता है।
    • अंतर: एक पर्यावास में कई प्रजातियाँ रह सकती हैं, लेकिन दो प्रजातियों का निकेत समान नहीं हो सकता, क्योंकि इससे उनके बीच भोजन या संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा शुरू हो जाती है।

​4. अनुकूलन, प्रजाति और विकास

  • अनुकूलन (Adaptation): यह किसी जीव के शरीर की बनावट, व्यवहार या जीवन शैली में वह बदलाव है जो उसे अपने विशिष्ट पर्यावरण में जीवित रहने और प्रजनन करने में मदद करता है।
    • उदाहरण: पक्षियों की चोंच का आकार उनके भोजन के अनुसार अनुकूलित होता है।
  • प्रजाति (Species): समान जीवों का एक समूह जो आपस में प्रजनन कर सकते हैं और जननक्षम (Fertile) संतान पैदा कर सकते हैं।
    • विविधता (Variation): एक ही प्रजाति के सदस्यों में दिखने वाले अंतर। ये उत्परिवर्तन (Mutation) और प्राकृतिक चयन के कारण होते हैं।
  • जैव विकास (Evolution): चार्ल्स डार्विन और अल्फ्रेड वैलेस द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत। यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीवों में समय के साथ धीरे-धीरे परिवर्तन आते हैं, जो उन्हें अपने पर्यावरण के प्रति बेहतर अनुकूलन में मदद करते हैं।
    • प्राकृतिक चयन (Natural Selection): वह प्रक्रिया जिसमें पर्यावरण के अनुकूल बेहतर विविधता वाले जीव जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं, जबकि कमजोर जीव समाप्त हो जाते हैं।

​5. प्रजाति उद्भवन और विलोपन

  • प्रजाति उद्भवन (Speciation): वह प्रक्रिया जिससे नई प्रजातियों की उत्पत्ति होती है।
    • ​यह अक्सर भौगोलिक अलगाव (जैसे नदी या पहाड़) के कारण होता है, जब एक ही प्रजाति की दो समष्टियाँ अलग हो जाती हैं और समय के साथ अलग-अलग वातावरण में विकसित होकर नई प्रजाति बन जाती हैं।
  • विलोपन (Extinction): जब किसी प्रजाति का अंतिम सदस्य भी मर जाता है और वह प्रजाति हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।
    • ​यह प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन आजकल मानवीय गतिविधियों (जैसे प्रदूषण, वनों की कटाई) के कारण इसकी दर बहुत बढ़ गई है।

​6. समष्टि की विशेषताएँ

​समष्टि (Population) के कुछ महत्वपूर्ण लक्षण हैं:

  • घनत्व (Density): किसी दिए गए क्षेत्र में प्रति इकाई क्षेत्रफल में मौजूद जीवों की संख्या।
  • जन्म दर (Birth Rate): जिस दर से समष्टि में नए जीव पैदा होते हैं।
  • मृत्यु दर (Death Rate): जिस दर से समष्टि के जीव मरते हैं।
  • प्रवास और अप्रवास (Migration and Immigration): जीवों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाना।
  • आयु वितरण (Age Distribution): समष्टि में विभिन्न आयु समूहों (पूर्व-जनन, जनन, जननोत्तर) के जीवों का अनुपात।
  • लिंग अनुपात (Sex Ratio): नर और मादा जीवों का अनुपात।

​7. जैविक अन्योन्यक्रियाएँ

​जीव एक-दूसरे के साथ और पर्यावरण के साथ संबंध बनाते हैं। ये संबंध सकारात्मक, नकारात्मक या उदासीन हो सकते हैं।

  • असहभोजिता (Amensalism): एक प्रजाति को नुकसान होता है, जबकि दूसरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
    • उदाहरण: फफूंदी (Penicillium) जो बैक्टीरिया को खत्म करने वाली एंटीबायोटिक बनाती है।
  • परभक्षण (Predation): एक जीव (शिकारी) दूसरे जीव (शिकार) को मारकर खा जाता है।
    • उदाहरण: शेर और हिरण।
  • परजीविता (Parasitism): एक जीव (परजीवी) दूसरे जीव (परपोषी) के शरीर पर या अंदर रहकर उससे लाभ प्राप्त करता है, जबकि परपोषी को नुकसान होता है।
    • उदाहरण: फीताकृमि मनुष्य की आंत में।
  • स्पर्धा (Competition): दोनों प्रजातियों को नुकसान होता है, क्योंकि वे सीमित संसाधनों (जैसे भोजन या स्थान) के लिए एक-दूसरे से मुकाबला करती हैं।
  • सहभोजिता (Commensalism): एक प्रजाति को लाभ होता है, जबकि दूसरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
    • उदाहरण: शार्क के साथ रहने वाली सकरफिश।
  • सहजीविता (Mutualism): दोनों प्रजातियों को लाभ होता है।
    • उदाहरण: दीमक और उसकी आंत में रहने वाले सूक्ष्मजीव जो लकड़ी को पचाने में मदद करते हैं।
  • उदासीनता (Neutralism): दो प्रजातियाँ एक-दूसरे पर कोई प्रभाव नहीं डालती हैं। यह स्थिति बहुत दुर्लभ होती है।

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