कक्षा 12वीं हिंदी पाठ 4 छायावादी काव्य सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और जयशंकर प्रसाद पाठ के प्रश्न और उत्तर


(क) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता "वह तोड़ती पत्थर" पर आधारित प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1: कवि ने 'वह तोड़ती पत्थर' कविता में किस दृश्य का चित्रण किया है?
उत्तर: इस कविता में कवि ने इलाहाबाद (प्रयागराज) की एक सड़क पर भीषण गर्मी में पत्थर तोड़ती एक मज़दूरिन की दयनीय दशा का मार्मिक चित्रण किया है। वह धूप में, बिना किसी छायादार पेड़ के, अपना कठिन काम कर रही है। कवि ने उसके श्रम, समर्पण और समाज की असमानता को उजागर किया है।
प्रश्न 2: मज़दूरिन की दृष्टि में कवि ने क्या विशेष भाव महसूस किया?
उत्तर: मज़दूरिन ने कवि को ऐसी दृष्टि से देखा, "जो मार खा रोयी नहीं।" कवि ने इस दृष्टि में मौन पीड़ा, संघर्ष और स्वाभिमान का भाव महसूस किया। यह एक ऐसी वेदना थी जो व्यक्त नहीं की जा रही थी, बल्कि अंदर ही अंदर सहन की जा रही थी। कवि ने इसे 'सजा सहज सितार' की तरह बताया, जिसकी झंकार सुनी नहीं, बल्कि महसूस की गई।
प्रश्न 3: 'रुई ज्यों जलती हुई भू' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है और यह क्या दर्शाता है?
उत्तर: इस पंक्ति में उपमा अलंकार है। यहाँ कवि ने 'भू' (धरती) की तुलना 'रुई' से की है। इसका मतलब है कि गर्मी इतनी प्रचंड है कि धरती रुई की तरह जलती हुई प्रतीत हो रही है। यह भीषण गर्मी और लू के प्रभाव को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से दर्शाता है।
(ख) जयशंकर प्रसाद की कविता "हिमाद्रि तुंग श्रृंग से..." पर आधारित प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1: 'स्वतंत्रता पुकारती' से कवि का क्या अभिप्राय है?
उत्तर: 'स्वतंत्रता पुकारती' से कवि का अभिप्राय है कि भारत की स्वतंत्रता स्वयं हिमालय की चोटी से पुकार रही है। यह कोई साधारण पुकार नहीं है, बल्कि यह भारतीयों को उनके गौरवशाली इतिहास और वीरता का स्मरण कराते हुए देश की रक्षा और स्वतंत्रता के लिए उठ खड़े होने का आह्वान है।
प्रश्न 2: कवि ने 'अराति सैन्य सिंधु' में 'सुवाडवाग्नि' से जलने के लिए क्यों कहा है?
उत्तर: कवि ने यहाँ रूपक अलंकार का प्रयोग करते हुए शत्रु की सेना (अराति सैन्य) को समुद्र (सिंधु) के समान बताया है। 'सुवाडवाग्नि' (बड़वाग्नि) समुद्र में लगने वाली आग को कहते हैं। इस पंक्ति के माध्यम से कवि वीरों को प्रोत्साहित करते हुए कहते हैं कि वे शत्रु की विशाल सेना रूपी समुद्र को नष्ट करने के लिए बड़वाग्नि की तरह प्रचंड रूप से जलें और उनका विनाश कर दें। यह वीरों को शत्रु का पूरी तरह से नाश करने के लिए प्रेरित करता है।
प्रश्न 3: इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस कविता का मुख्य संदेश देशप्रेम, शौर्य और राष्ट्रीय एकता है। कवि भारतीय वीरों को उनके गौरव का स्मरण कराकर उन्हें एकजुट होने और देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने का आह्वान करते हैं। यह कविता निराशा के समय में भी आशा और उत्साह का संचार करती है और स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ने का संदेश देती है।

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