कक्षा दसवीं गृह विज्ञान पाठ 10 तंतु तथा कपड़ा पाठ के प्रश्न और उत्तर


एक-लाइन उत्तर वाले प्रश्न (30)
 * कपड़े किससे बनते हैं?
   * कपड़े तंतुओं से बनते हैं।
 * तंतुओं को एक साथ मरोड़कर क्या बनाया जाता है?
   * धागा या सूत।
 * हम वस्त्र क्यों पहनते हैं?
   * शरीर को ढकने और सुरक्षा के लिए।
 * वस्त्र हमारे व्यक्तित्व में क्या लाते हैं?
   * वस्त्र हमारे व्यक्तित्व में निखार लाते हैं।
 * घर के कार्यों में कपड़ों के कुछ उपयोग क्या हैं?
   * चादर, परदे, कुशन कवर, तौलिये आदि।
 * कपास का तंतु कैसा दिखता है?
   * यह छोटे या बड़े रेशे जैसी एक नरम संरचना होती है जो सफेद बाल जैसी नजर आती है।
 * ऊन के तंतु कहाँ से प्राप्त होते हैं?
   * भेड़, बकरी, खरगोश आदि पशुओं के बालों से।
 * प्राकृतिक तंतु किसे कहते हैं?
   * जो तंतु प्रकृति जैसे पौधों या पशुओं से प्राप्त होते हैं।
 * पौधों से प्राप्त तंतुओं को और क्या कहते हैं?
   * सेल्यूलोसिक तंतु।
 * पशुओं से प्राप्त तंतुओं को क्या कहते हैं?
   * प्रोटीन तंतु।
 * मानव निर्मित तंतु किसे कहते हैं?
   * रसायनों का प्रयोग करके प्रयोगशाला में निर्मित तंतुओं को।
 * कृत्रिम तंतु के दो उदाहरण दें।
   * नायलॉन और पॉलिएस्टर।
 * रेशम के तंतु का स्रोत क्या है?
   * रेशम का कीड़ा।
 * किस तंतु को "तंतुओं की रानी" कहते हैं?
   * रेशम को।
 * किस तंतु को "कृत्रिम रेशम" कहते हैं?
   * रेयॉन को।
 * किस प्रकार के तंतु गर्मियों के वस्त्रों के लिए उपयुक्त होते हैं?
   * कपास और लीनेन।
 * किस प्रकार के तंतु सर्दियों के वस्त्रों के लिए उपयुक्त होते हैं?
   * ऊन।
 * कृत्रिम तंतु से बने वस्त्रों को रसोई में क्यों नहीं पहनना चाहिए?
   * क्योंकि वे आग लगने पर पिघलकर शरीर से चिपक जाते हैं।
 * सूती कपड़े में आसानी से क्या पड़ जाती हैं?
   * सिलवटें।
 * दहन परीक्षण से तंतु की पहचान कैसे होती है?
   * तंतु के जलने के पैटर्न और गंध से।
 * कपास और लीनेन के जलने पर कैसी गंध आती है?
   * कागज के जलने जैसी।
 * रेशम और ऊन के जलने पर कैसी गंध आती है?
   * बाल या पंख के जलने जैसी।
 * बुनाई (Weaving) में सूत के दो समूहों को क्या कहते हैं?
   * ताने और बाने।
 * बुनाई में खड़े सूत को क्या कहा जाता है?
   * ताना।
 * बुनाई में पड़े सूत को क्या कहा जाता है?
   * बाना।
 * बुने हुए कपड़ों में क्या गुण होता है?
   * उनमें खिंचाव नहीं होता।
 * साधारण बुनाई का सबसे आसान तरीका क्या है?
   * एक ताना सूत को वैकल्पिक रूप से एक बाने के ऊपर और दूसरे बाने के नीचे से निकालना।
 * ट्विल बुनाई वाले कपड़े की पहचान कैसे की जा सकती है?
   * एक निरंतर तिरछी रेखा से।
 * निटिंग (Knitting) क्या है?
   * सूत के फंदे बनाने और उन्हें एक-दूसरे से जोड़ने की प्रक्रिया।
 * खादी क्या है?
   * हाथ से काते गए सूत को कहते हैं, जिसे हथकरघे पर बनाया जाता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (20)
 * वस्त्र हमारी दूसरी त्वचा क्यों माने जाते हैं?
   * क्योंकि वे हमारे शरीर को ढकते हैं और हमें प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों से बचाते हैं।
 * व्यक्ति की सामाजिक स्थिति का पता वस्त्रों से कैसे लगाया जा सकता है?
   * व्यक्ति के वस्त्रों की सिलाई, अवसर के अनुसार उनका चुनाव और उनकी स्वच्छता से उसकी आदतों और सामाजिक स्थिति का पता चलता है।
 * कपास और लीनेन के तंतुओं में क्या समानता है?
   * दोनों सेल्यूलोसिक तंतु हैं, गर्मियों के लिए उपयुक्त हैं, और दोनों में आसानी से सिलवटें पड़ जाती हैं।
 * पुनः उत्पादित तंतुओं के दो उदाहरण दें और वे कैसे बनते हैं?
   * उदाहरण: रेयॉन और कैसीन तंतु। ये प्राकृतिक तंतु स्रोतों (जैसे लकड़ी का बुरादा, दूध का प्रोटीन) को रसायनों से विघटित करके बनाए जाते हैं।
 * प्राकृतिक और मानव निर्मित तंतुओं में मुख्य अंतर क्या है?
   * प्राकृतिक तंतु प्रकृति से मिलते हैं (पौधे/पशु), जबकि मानव निर्मित तंतु रसायनों का उपयोग करके प्रयोगशाला में बनाए जाते हैं।
 * स्टेपल तंतु और फिलामेंट तंतु में क्या अंतर है?
   * स्टेपल तंतु लंबाई में छोटे होते हैं (इंच/सेंटीमीटर में मापे जाते हैं), जबकि फिलामेंट तंतु लंबे होते हैं (गज/मीटर में मापे जाते हैं)।
 * सूती कपड़े का उपयोग तौलिये और चादर के लिए क्यों किया जाता है?
   * क्योंकि सूती कपड़ा मजबूत, अवशोषक और धोने में आसान होता है, इसलिए यह उन वस्तुओं के लिए उपयुक्त है जिन्हें बार-बार धोना पड़ता है।
 * ऊन तापरोधी का काम कैसे करता है?
   * ऊनी कपड़े शरीर के ताप को बाहर नहीं निकलने देते, जिससे शरीर गर्म रहता है और वे तापरोधी का काम करते हैं।
 * रेयॉन को "कृत्रिम रेशम" क्यों कहा जाता है?
   * क्योंकि यह रेशम से बहुत मिलता-जुलता है, यह चिकना, चमकदार और नरम होता है।
 * कृत्रिम तंतु से बने कपड़ों का रखरखाव आसान क्यों होता है?
   * क्योंकि इनमें सिलवटें नहीं पड़तीं, ये मजबूत होते हैं, जल्दी सूख जाते हैं और इन्हें धोना आसान होता है।
 * दहन परीक्षण करते समय क्या-क्या अवलोकन करना चाहिए?
   * तंतु आग के पास कैसे व्यवहार करता है, जलने पर लौ का प्रकार, जलने पर आने वाली गंध, और जलने के बाद बचे अवशेष।
 * जलने पर कृत्रिम तंतु किस तरह का अवशेष छोड़ते हैं?
   * एक कठोर, काली और तोड़ी न जा सकने वाली गोली बन जाती है।
 * धागे की मजबूती किस पर निर्भर करती है?
   * धागे की मजबूती प्रति इंच ऐंठनों की संख्या पर निर्भर करती है। जितनी अधिक ऐंठन होगी, धागा उतना ही मजबूत होगा।
 * महात्मा गांधी ने चरखे का प्रचार क्यों किया था?
   * भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान चरखा स्वावलंबन और आय के स्रोत का प्रतीक था।
 * सूत निर्माण की प्रक्रिया में "धुनना (Carding)" क्या होता है?
   * यह वह प्रक्रिया है जिसमें एक-दूसरे से चिपके हुए तंतुओं को अलग करके समानांतर रूप में व्यवस्थित किया जाता है।
 * साधारण सूत और नॉवल्टी सूत में क्या अंतर है?
   * साधारण सूत में मोटाई और सतह समान होती है, जबकि नॉवल्टी सूत की संरचना जटिल होती है और वह दिखने में असामान्य होता है।
 * बुनाई (Weaving) में "किनारी (Selvedge)" का क्या महत्व है?
   * यह कपड़े के दोनों तरफ बुना हुआ एक घना हिस्सा होता है, जो कपड़े के सूत को लंबाईवार छोरों से बाहर निकलने से रोकता है।
 * साधारण बुनाई (Plain Weave) किस प्रकार की बुनाई है?
   * यह सबसे आसान और किफायती बुनाई है, जिसमें एक ताना सूत वैकल्पिक रूप से एक बाने के ऊपर और नीचे से निकलता है।
 * हथकरघा (Handloom) क्या है और भारत में इसका क्या महत्व है?
   * हथकरघा हाथों से कपड़ा बुनने का यंत्र है। यह भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के बाद रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा माध्यम है।
 * बुने हुए (Knitted) कपड़ों के मुख्य गुण क्या हैं?
   * वे लचीले, आरामदायक, फिटिंग वाले और सिलवट रोधी होते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न (5)
 * वस्त्र पहनने और घर के उपयोग के लिए कपड़ों के प्रयोजनों की चर्चा करें।
   * वस्त्र पहनना: कपड़े हमारी "दूसरी त्वचा" की तरह काम करते हैं। वे हमें मौसम की मार (गर्मी, सर्दी, बारिश) से बचाते हैं। इसके अलावा, वस्त्र हमारे व्यक्तित्व को दर्शाते हैं, जैसे कि हमारी रुचि, सामाजिक स्थिति और स्वच्छता के प्रति हमारा दृष्टिकोण। अच्छी तरह से पहने गए वस्त्र व्यक्ति की आदतें दर्शाते हैं।
   * घर में उपयोग: वस्त्रों का उपयोग केवल पहनने के लिए नहीं होता। हमारे घरों में भी उनका महत्वपूर्ण उपयोग है, जैसे चादर, परदे, तौलिये, कुशन कवर और रसोई के लिए पोछे। इन कामों के लिए अक्सर सूती कपड़े का इस्तेमाल होता है, क्योंकि यह मजबूत और टिकाऊ होता है।
 * तंतुओं के स्रोतों और उनके वर्गीकरण को विस्तार से समझाएं।
   * तंतु मुख्य रूप से दो स्रोतों से प्राप्त होते हैं:
     * प्राकृतिक तंतु: ये प्रकृति से मिलते हैं।
       * पौधों से: कपास, लीनेन (फ्लैक्स के डंठल से), जूट आदि। इन्हें सेल्यूलोसिक तंतु भी कहते हैं।
       * पशुओं से: ऊन (भेड़, बकरी आदि के बाल से) और रेशम (रेशम के कीड़े से)। इन्हें प्रोटीन तंतु भी कहते हैं।
     * मानव निर्मित तंतु: ये प्रयोगशाला में रसायनों का उपयोग करके बनाए जाते हैं।
       * पुनः उत्पादित तंतु: ये प्राकृतिक स्रोतों (जैसे लकड़ी की लुगदी) से बने होते हैं, पर रासायनिक प्रक्रिया के बाद। उदाहरण: रेयॉन।
       * कृत्रिम तंतु: ये पूरी तरह से पेट्रोलियम जैसे पेट्रोरसायन उत्पादों से बनते हैं। उदाहरण: नायलॉन, पॉलिएस्टर, एक्रेलिक।
 * दहन परीक्षण (Burning Test) द्वारा तंतुओं की पहचान करने की प्रक्रिया और उसके परिणामों का वर्णन करें।
   * दहन परीक्षण से तंतु के रासायनिक संगठन का पता चलता है।
     * प्रक्रिया: कपड़े या धागे से कुछ रेशे निकालकर उसे आग की लौ से जलाया जाता है।
     * अवलोकन: लौ के पास आने पर तंतु कैसा व्यवहार करता है, जलने पर लौ का रंग और प्रकार, जलने पर आने वाली गंध और जलने के बाद बचे हुए अवशेषों का अवलोकन किया जाता है।
     * परिणाम:
       * सेलुलोसिक तंतु (कपास, लीनेन): ये तेजी से जलते हैं, कागज जलने जैसी गंध देते हैं और हल्की, पंखनुमा राख छोड़ते हैं।
       * प्रोटीन तंतु (ऊन, रेशम): ये धीरे-धीरे जलते हैं, बाल या पंख जलने जैसी गंध देते हैं और काली, आसानी से तोड़ी जा सकने वाली गोली जैसी राख छोड़ते हैं।
       * कृत्रिम तंतु (नायलॉन, पॉलिएस्टर): ये आग के पास पिघलने लगते हैं, रसायनों जैसी गंध देते हैं और कठोर, न तोड़ी जा सकने वाली गोली जैसी राख बनाते हैं।
 * सूत निर्माण की प्रक्रिया को संक्षेप में समझाइए।
   * सूत, तंतुओं को एक साथ मरोड़कर बनाई गई एक लंबी और मजबूत कड़ी होती है। सूत बनाने के कई चरण होते हैं:
     * सफाई: प्राकृतिक तंतुओं से धूल, पत्तियाँ और अन्य अवांछित पदार्थों को अलग किया जाता है।
     * धुनना (Carding): तंतुओं को अलग करके समानांतर रूप में व्यवस्थित किया जाता है, जिससे "स्लाईवर" नामक एक नरम रस्सी बनती है।
     * विजटीकरण (Combing): महीन सूत बनाने के लिए स्लाईवर से लंबे और छोटे तंतुओं को अलग किया जाता है।
     * कताई (Spinning): स्लाईवर को खींचा और ऐंठा जाता है ताकि सूत बन सके। ऐंठन की संख्या सूत की गुणवत्ता और मजबूती को निर्धारित करती है।
     * कुंडलन (Winding): बने हुए सूत को उपयोग के आधार पर गोलों, रीलों या लच्छों में लपेटा जाता है।
 * साधारण, ट्विल और साटिन बुनाई के बीच अंतर स्पष्ट करें।
   * साधारण बुनाई (Plain Weave):
     * संरचना: सबसे सरल बुनाई, जिसमें एक ताना सूत बारी-बारी से एक बाने के ऊपर और नीचे से जाता है।
     * पहचान: सीधी बुनाई, कोई खास पैटर्न नहीं होता।
     * उपयोग: मलमल, पॉपलीन, खादी जैसे हल्के कपड़ों में।
   * ट्विल बुनाई (Twill Weave):
     * संरचना: तीन या चार धागों को एक साथ बुना जाता है।
     * पहचान: कपड़े पर एक निरंतर तिरछी रेखा (वेल्स) बनती है।
     * उपयोग: मजबूत कपड़ों जैसे डेनिम, जीन, और ट्वीड में।
   * साटिन बुनाई (Satin Weave):
     * संरचना: पाँच से बारह धागों का उपयोग होता है, जिसमें एक ताना धागा कई बाना धागों के ऊपर से गुजरता है।
     * पहचान: बहुत चिकनी, चमकदार सतह होती है, जिसमें कोई खास डिज़ाइन नहीं दिखता।
     * उपयोग: औपचारिक पोशाकों और चमकदार कपड़ों में।
निबंधात्मक प्रश्न (5)
 * कपड़े के तंतुओं और उनके गुणों के आधार पर, विभिन्न मौसमों (गर्मियों और सर्दियों) के लिए उपयुक्त कपड़ों का चयन कैसे करेंगे? उदाहरण सहित समझाइए।
   * गर्मियों के लिए: गर्मियों में हमें ऐसे कपड़ों की जरूरत होती है जो शरीर को ठंडा रखें, पसीना सोखें और हवा को आर-पार जाने दें। इसके लिए कपास और लीनेन सबसे उपयुक्त हैं। कपास के तंतु छिद्रिल होते हैं और नमी को अच्छी तरह सोख लेते हैं, जिससे शरीर ठंडा महसूस होता है। लीनेन भी शीतल और अवशोषक होता है। इसलिए, सूती टी-शर्ट, लीनेन शर्ट और खादी के वस्त्र गर्मियों के लिए उत्तम हैं।
   * सर्दियों के लिए: सर्दियों में हमें ऐसे कपड़ों की आवश्यकता होती है जो शरीर की गर्मी को बाहर निकलने से रोकें और हमें गर्म रखें। इसके लिए ऊन और रेशम जैसे तंतु आदर्श हैं। ऊन एक तापरोधी तंतु है, जो हवा को रोककर शरीर को गर्म रखता है। रेशम भी गर्म होता है और ऊन से ज्यादा मजबूत होता है। हालांकि, कुछ मानव निर्मित तंतु जैसे एक्रेलिक और पॉलिएस्टर भी गर्मी का एहसास देते हैं और सर्दियों के कपड़ों में उपयोग होते हैं, लेकिन वे प्राकृतिक तंतुओं जितने आरामदायक नहीं होते।
 * मानव निर्मित तंतुओं के प्रकार, उनके गुण और उपयोगों पर एक विस्तृत निबंध लिखें। साथ ही प्राकृतिक तंतुओं से उनकी तुलना करें।
   * मानव निर्मित तंतु दो प्रकार के होते हैं:
     * पुनः उत्पादित तंतु (Rayon): ये प्राकृतिक स्रोतों को रासायनिक प्रक्रिया से बदलकर बनाए जाते हैं। ये चमकदार, शीतल और अवशोषक होते हैं, इसलिए इन्हें "कृत्रिम रेशम" कहते हैं और गर्मियों के वस्त्रों में उपयोग करते हैं।
     * कृत्रिम तंतु (Nylon, Polyester): ये पूरी तरह से रसायनों से बनते हैं। ये बहुत मजबूत, सिलवट-रोधी, धोने में आसान और जल्दी सूखने वाले होते हैं। इसलिए, इनका उपयोग खेलकूद के कपड़े, जैकेट और रस्सियाँ बनाने में होता है।
   * प्राकृतिक तंतुओं से तुलना: प्राकृतिक तंतु (जैसे कपास) हवादार होते हैं और पसीना सोखते हैं, जबकि कृत्रिम तंतु अक्सर नमी को रोकते हैं, जिससे शरीर में असहजता हो सकती है। प्राकृतिक तंतु पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, जबकि कृत्रिम तंतु पर्यावरण को प्रदूषित कर सकते हैं। हालांकि, कृत्रिम तंतु ज्यादा मजबूत और कम रखरखाव वाले होते हैं।
 * कपड़ा निर्माण की दो मुख्य प्रक्रियाओं (बुनाई और बुनाई) का वर्णन करें। उनके बीच के मुख्य अंतर और गुणों को स्पष्ट करें।
   * बुनाई (Weaving): यह कपड़े बनाने की सबसे पुरानी और सामान्य विधि है। इसमें ताने (लंबवत धागे) और बाने (क्षैतिज धागे) को आपस में 90 डिग्री के कोण पर गुंथा जाता है। इससे बने कपड़े ठोस, मजबूत और खिंचाव-रहित होते हैं, इसलिए इनका उपयोग डेनिम, पैंट, शर्ट और घर के पर्दों में होता है।
   * बुनाई (Knitting): यह एक धागे से फंदे बनाकर और उन्हें आपस में जोड़कर कपड़ा बनाने की प्रक्रिया है। इसमें कपड़े ज्यादा लचीले, नरम और आरामदायक होते हैं। निटिंग से बने कपड़े शरीर के आकार के अनुसार ढल जाते हैं और इनमें सिकुड़न नहीं पड़ती। इनका उपयोग स्वेटर, टी-शर्ट, मोजे और खेलकूद के वस्त्रों में होता है।
   * मुख्य अंतर: बुनाई में दो अलग-अलग धागे उपयोग होते हैं, जबकि निटिंग में एक ही धागा काम आता है। बुनाई से बने कपड़े ठोस होते हैं और उनमें खिंचाव कम होता है, जबकि निटिंग से बने कपड़े लचीले और खींचने वाले होते हैं।
 * दिए गए पाठ के आधार पर, यह स्पष्ट करें कि तंतुओं का ज्ञान हमें सही कपड़ा चुनने में कैसे मदद करता है। उदाहरण सहित समझाइए।
   * पाठ के अनुसार, तंतु कपड़े की मूल इकाई है और कपड़े के सभी गुण तंतु से ही आते हैं।
   * सही चुनाव:
     * मौसम के अनुसार: गर्मियों में हमें ठंडा और पसीना सोखने वाला कपड़ा चाहिए, तो हम कपास या लीनेन को चुन सकते हैं। सर्दियों में गर्मी के लिए ऊन या रेशम का चयन करेंगे।
     * उपयोग के अनुसार: रसोई में काम करने के लिए हमें ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो आग से दूर रहें, इसलिए सूती कपड़े सुरक्षित होते हैं। मजबूत और कम रखरखाव वाले कपड़ों के लिए, जैसे जीन, हम ट्विल बुनाई से बने डेनिम को चुन सकते हैं।
     * रखरखाव के अनुसार: यदि हम ऐसे कपड़े चाहते हैं जिनमें सिलवटें न पड़ें और जो जल्दी सूखें, तो कृत्रिम तंतु (नायलॉन, पॉलिएस्टर) से बने कपड़े अच्छे होते हैं।
   * इस प्रकार, तंतुओं के गुणों को जानकर हम अपनी जरूरत और अवसर के अनुसार सबसे उपयुक्त कपड़ा चुन सकते हैं।
 * दिए गए उदाहरण (गीता और उसके पिता की कहानी) के आधार पर प्राकृतिक और कृत्रिम तंतुओं के व्यवहार में अंतर को स्पष्ट करें।
   * गीता की कहानी से प्राकृतिक और कृत्रिम तंतुओं के बीच का एक महत्वपूर्ण अंतर पता चलता है, खासकर आग के प्रति उनके व्यवहार का।
   * कृत्रिम तंतु (पॉलिएस्टर): गीता ने जो दुपट्टा पहना था वह पॉलिएस्टर का था। जब उसमें आग लगी, तो वह जलने के बजाय पिघल कर गीता के शरीर से चिपक गया, जिससे उसका शरीर जल गया। यह कृत्रिम तंतुओं का एक प्रमुख दोष है कि वे ताप संवेदी (थर्मोप्लास्टिक) होते हैं।
   * प्राकृतिक तंतु (सूती): गीता के पिता ने सूती कपड़ा लपेटा, जिससे आग बुझ गई। उनका खुद का कुर्ता और पैजामा भी सूती था, जिसने उन्हें ज्यादा जलने से बचा लिया। इससे पता चलता है कि सूती कपड़े जलते तो हैं, लेकिन वे पिघलकर शरीर से नहीं चिपकते, जिससे वे आग से बचाव के लिए अधिक सुरक्षित होते हैं।
   * यह उदाहरण दिखाता है कि आग के पास काम करते समय हमें कृत्रिम तंतुओं से बचना चाहिए और प्राकृतिक तंतुओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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