क्या आपने कभी सोचा है कि आपके कपड़े कैसे बनते हैं? हर कपड़े की शुरुआत एक छोटे से तंतु (fiber) से होती है. इन तंतुओं को एक साथ मिलाकर धागा या सूत (yarn) बनाया जाता है, और फिर इन धागों से कपड़ा बुना जाता है.
बाजार में कई तरह के कपड़े मिलते हैं, जैसे सूती, ऊनी, रेशमी, नायलॉन आदि. हर कपड़े के कुछ खास गुण होते हैं, और ये गुण उसके तंतु से आते हैं. इस जानकारी से आप अपनी जरूरत के हिसाब से सही कपड़ा चुन पाएंगे.
कपड़े का उपयोग
हम कपड़े क्यों पहनते हैं?
 * सुरक्षा: कपड़े हमारे शरीर को मौसम की मार से बचाते हैं, जैसे गर्मी, सर्दी और बारिश.
 * व्यक्तित्व: कपड़े हमारे व्यक्तित्व, पसंद और सामाजिक स्थिति को दर्शाते हैं. साफ-सुथरे और इस्त्री किए हुए कपड़े हमारी अच्छी आदतें दिखाते हैं.
 * अन्य उपयोग: कपड़ों का इस्तेमाल सिर्फ पहनने के लिए नहीं होता. घर में इनका उपयोग चादर, पर्दे, तौलिए, मेजपोश (झाइन), और कुशन कवर के रूप में भी होता है.
तंतु के प्रकार और उनके स्रोत
तंतु कपड़े की सबसे छोटी इकाई है. तंतु दो मुख्य प्रकार के होते हैं:
 * प्राकृतिक तंतु (Natural Fibers): ये हमें प्रकृति से मिलते हैं.
   * पौधों से:
     * कपास (Cotton): सफेद और मुलायम, गर्मियों के लिए सबसे अच्छा.
     * लिनन (Linen): मजबूत, चमकदार और चिकना, फ्लैक्स के पौधे से मिलता है.
     * जूट (Jute): खुरदुरा, बोरी और रस्सी बनाने में इस्तेमाल होता है.
   * जानवरों से:
     * ऊन (Wool): भेड़, बकरी या खरगोश के बालों से मिलती है. गर्म होती है, इसलिए सर्दियों के कपड़ों में उपयोग होती है.
     * रेशम (Silk): रेशम के कीड़े से मिलता है. यह बहुत मुलायम, चमकदार और मजबूत होता है, इसे "तंतुओं की रानी" भी कहते हैं.
 * मानव निर्मित तंतु (Man-made Fibers): ये रसायन का उपयोग करके प्रयोगशाला में बनाए जाते हैं.
   * पुनरुत्पादित तंतु: ये प्राकृतिक चीजों (जैसे लकड़ी या कपास) से बनते हैं, पर रासायनिक प्रक्रिया के बाद. रेयॉन (Rayon) इसका एक अच्छा उदाहरण है, जिसे "कृत्रिम रेशम" भी कहते हैं.
   * कृत्रिम तंतु: ये पूरी तरह से रसायनों से बनते हैं. नायलॉन (Nylon), पॉलिएस्टर (Polyester) और एक्रेलिक (Acrylic) इसके उदाहरण हैं. ये मजबूत होते हैं और इनमें सिकुड़न नहीं पड़ती, लेकिन ये आग पकड़ने पर पिघल कर शरीर से चिपक सकते हैं.
तंतु की पहचान कैसे करें?
कपड़े को पहचानने के लिए आप दो आसान तरीके अपना सकते हैं:
 * देखकर और छूकर (Visual and Touch Test):
   * कपास: फीका दिखता है, छूने में मुलायम और ठंडा लगता है. इसमें आसानी से सिकुड़न पड़ जाती है.
   * रेशम: बहुत चमकदार, मुलायम और चिकना होता है.
   * ऊन: गरम और खुरदुरा महसूस होता है. इसमें सिकुड़न नहीं पड़ती.
   * कृत्रिम तंतु: चमकदार या बिना चमक के हो सकते हैं. छूने में चिकने और ताप के प्रति संवेदनशील होते हैं.
 * जलाकर परीक्षण (Burning Test):
   * सूती/प्राकृतिक तंतु: जब जलाते हैं, तो कागज के जलने जैसी गंध आती है और हल्की राख बचती है.
   * ऊनी/रेशमी तंतु: ये धीरे-धीरे जलते हैं और बाल या पंख के जलने जैसी गंध देते हैं. जलने के बाद काली, भुरभुरी राख बचती है.
   * कृत्रिम तंतु: आग के पास सिकुड़ जाते हैं और पिघलने लगते हैं. जलने पर एक कठोर, काली गोली बन जाती है और रसायनों की गंध आती है.
धागा और कपड़ा बनाना
 * धागा बनाना: इसे कताई (spinning) कहते हैं. इसमें छोटे तंतुओं को खींचकर और ऐंठन देकर एक लंबा धागा बनाया जाता है. पुराने समय में महात्मा गांधी चरखे से सूत कातते थे, जो स्वावलंबन का प्रतीक था.
 * कपड़ा बनाना: यह बुनाई (weaving) और सिलाई (knitting) से होता है.
   * बुनाई: इसमें दो धागों को 90 डिग्री के कोण पर एक-दूसरे से गुंथा जाता है. इसमें कपड़े मजबूत और टिकाऊ बनते हैं. जैसे डेनिम और ट्वीड.
   * सिलाई: इसमें एक ही धागे के फंदों को आपस में जोड़कर कपड़ा बनाया जाता है. इससे बने कपड़े लचीले और आरामदायक होते हैं. जैसे स्वेटर, टी-शर्ट