चित्रकला कक्षा 10 पाठ 6 प्रभाववाद (Impressionism) नोट्स



 * परिभाषा: एक कला आंदोलन जिसने दैनिक जीवन की सादगी से प्रेरणा ली।
 * नामकरण: 1874 में पहली प्रदर्शनी में एक आलोचक द्वारा 'प्रभाववाद' नाम दिया गया।
 * विशेषताएँ:
   * कलाकारों ने वस्तुओं पर प्रकाश के प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया।
   * स्टूडियो के बाहर खुले वातावरण में चित्रकारी शुरू की।
   * दृश्य संसार में देखे और महसूस किए गए प्रभाव को शीघ्रता से कैप्चर करने का प्रयास किया।
   * प्राकृतिक दृश्यों को कल्पना शक्ति से स्वतंत्र रूप से चित्रित किया।
   * यह वर्तमान कला और प्राचीन कला के बीच एक बड़ा विच्छेद था।
   * पारंपरिक और शास्त्रीय मानदंडों के विरुद्ध एक विद्रोह।
   * पसंदीदा विषय: नदियाँ, तालाब, बंदरगाह, नगरीय दृश्य और मानवीय स्वरूप।
 * प्रमुख कलाकार:
   * क्लॉड मॉने (Claude Monet)
   * इदुनादो मॉने (Eduardo Manet)
   * ऑगस्ट रेनोया (Auguste Renoir)
   * एडगर देगा (Edgar Degas)
उत्तर-प्रभाववाद (Post-Impressionism)
 * विशेषताएँ:
   * प्रभाववाद का विस्तार और उसकी कमियों का निषेध।
   * कलाकारों ने विविध रंगों और ब्रश का प्रयोग जारी रखा।
   * वास्तविक जीवन से संबंधित विषयों को प्राथमिकता।
   * कलाकारों ने ज्यामितीय आकारों या विकृत आकारों के माध्यम से आंतरिक भावों को व्यक्त किया।
 * प्रमुख कलाकार और उनकी शैलियाँ:
   * जॉर्ज सूरा (Georges Seurat): बिन्दु चित्रण (छोटे-छोटे रंगीन बिंदुओं का व्यवस्थित प्रयोग)।
   * पॉल सेजान (Paul Cezanne): चित्रकारी में परिमाण और आकार की अनुमति पर जोर; ज्यामितीय आकारों (शंकु, सिलेंडर, घन) में वस्तुओं को चित्रित करने की प्रवृत्ति; घनवाद का जनक माना जाता है।
   * गगै (Gauguin) और विन्सेंट वॉन गग (Vincent Van Gogh): रंगों और ब्रश के कंपन तथा स्ट्रोक से भावनाओं और मानसिकता को सशक्त अभिव्यक्ति दी।
पाश्चात्य कला की भूमिका: मुख्य उद्देश्य
 * प्रभाववादी युग में विभिन्न चित्रकारों की कला की पहुँच और प्रयोग के अंतर को समझना।
 * सूचीबद्ध कलाकारों की शैली का वर्णन करना।
 * प्रभाववाद के जन्म का वर्णन करना।
 * इन विभिन्न कला आंदोलनों के प्रणेता कलाकारों के बारे में बताना।
प्रमुख प्रभाववादी और उत्तर-प्रभाववादी कलाकृतियाँ
6.1 वाटर लिलिज (WATER LILIES)
 * शीर्षक: वाटर लिलिज (Water Lilies)
 * कलाकार: क्लॉड मॉने (Claude Monet)
 * माध्यम: तैलीय रंग
 * समय: 1899
 * शैली: प्रभाववाद
 * संकलन: नेशनल गैलरी, लंदन
 * सामान्य विवरण:
   * मॉने सबसे प्रतिबद्ध और स्वाभाविक प्रभाववादी कलाकार।
   * प्रकृति के बदलते मिजाज को अपनी कलाकृतियों में उतारा।
   * फूलों के प्राकृतिक दृश्यों, भूचित्रों, नदियों, समुद्री दृश्यों और पहाड़ी किनारों के चित्रण के लिए प्रसिद्ध।
   * वाटर लिलिज चित्रों की एक श्रृंखला है (1899-1900)।
   * इनमें तालाब के पार जापानी पुल का चित्रण प्रमुख है, जो बाद में उनके चित्रों का मुख्य विषय बन गया।
   * आसमान अक्सर अनुपस्थित, लेकिन चमकीले रंगों में असाधारण गहराई से प्रतिबिंबित।
   * खिलते हुए लिली के फूल चित्र के सौंदर्य में वृद्धि करते हैं।
6.2 मौलीन दे ला गैलेत (MOULIN DE LA GALETTE)
 * शीर्षक: मौलीन दे ला गैलेत (Moulin De La Galette)
 * कलाकार: ऑगस्ट रेनोया (Auguste Renoir)
 * माध्यम: कैनवास पर तैलीय रंग
 * समय: 1876
 * शैली: प्रभाववादी
 * संकलन: पेरिस स्थित मसी डे इंप्रेसनिस्मे
 * सामान्य विवरण:
   * फ्रांसीसी कलाकार (1841-1919)।
   * चित्र में युवा लोगों को पिकनिक, नृत्य और पार्टी का आनंद लेते हुए दिखाया गया है।
   * उनकी कृतियों में कोमलता, भावात्मकता और लुभावनी छवि का चित्रण।
   * पेरिस समाज की गतिविधियों, वातावरण और समाज का स्पष्ट प्रतिबिंब।
   * बैंगनी, सफेद और नीले रंगों की छाया का सामंजस्य, जिससे मॉडल प्रचलित वस्त्रों में सजे लगते हैं।
   * चित्रों में रंगों की ताजगी और प्रसन्नता से जीवन की झिलमिलाहट।
   * कोमलता, समन्वय और संतुलन का सामंजस्य।
   * सामूहिक रूपचित्र और महिलाओं के मॉडल के गहन अध्ययन को दर्शाना चाहते थे।
   * जीवन के आनंद के अनुभव की अभिव्यक्ति में सिद्धहस्त।
6.3 डांस क्लास (DANCE CLASS)
 * शीर्षक: डांस क्लास
 * कलाकार: ऐडगर डेगा (Edgar Degas)
 * माध्यम: कैनवास पर तैलीय रंग
 * समय: 1873-1876
 * शैली: प्रभाववाद
 * संकलन: म्यूजियम ऑफ आर्ट, टोलेडो, ओहियो (यू.एस.ए.)
 * सामान्य विवरण:
   * पेरिस में जन्मे फ्रांसीसी कलाकार।
   * अन्य प्रभाववादी कलाकारों के विपरीत, प्रकृति से प्रेरणा नहीं ली, बल्कि मानवीय उपस्थिति में रुचि थी।
   * मुख्य उपलब्धियाँ बैले नृत्यांगनाओं के चित्र, जो झालरदार घाघरे में तैयारी करती या घूमती दिखाई देती हैं।
   * चित्रों में मुख्य केंद्र के बिना सहजता की छाप।
   * जिंदगी का पूरा दृश्य प्रस्तुत करने का प्रयास।
   * कुछ चित्रों में सूर्य प्रकाश के बदले रंगमंच के अप्राकृतिक प्रकाश का प्रयोग।
   * पसंदीदा माध्यम: पेस्टल रंग।
   * कई बार एक ही चित्र में विभिन्न माध्यम प्रयुक्त किए, पेस्टल रंगों की परतें चढ़ाईं जिससे पारदर्शिता स्पष्ट हो।
   * चित्रकला के अतिरिक्त मूर्तिकला को भी अपनी लयमयी गति की अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया।
6.4 स्टिल लाइफ विद ओनियन्स (Still Life with Onions)
 * शीर्षक: स्टिल लाइफ विद ओनियन्स
 * कलाकार: पॉल सेजा (Paul Cezanne)
 * माध्यम: कैनवास पर तैलीय रंग
 * समय: 1895-1900
 * शैली: उत्तर-प्रभाववादी
 * संकलन: मसी-द ऑर्से, पेरिस
 * सामान्य विवरण:
   * उत्तर-प्रभाववादी युग का कलाकार जिसने अभिव्यक्ति के नए साधनों की खोज की।
   * चित्रों में प्राकृतिक आकारों की सरलता एवं सहजता।
   * मान्यता: प्रकृति में प्रत्येक वस्तु को ज्यामितीय आकार के ठोस आकार जैसे शंकु, सिलेंडर तथा घन के रूप में बदला जा सकता है।
   * परिचित और वास्तविक आकारों को संरचनात्मक ढांचों में बदलना चाहते थे।
   * अमूर्त चित्रकला को प्रारंभ करने वाले कलाकार के रूप में जाने जाते हैं।
   * घनवाद (Cubism) का जनक कहा जाता है।
   * 'स्टिल लाइफ विद ओनियन्स' में रंगों का सामंजस्य, प्रकाश और छाया को नए अर्थ देकर विभिन्न स्वरूपों को चित्रित किया।
   * रंगों के आंतरिक संबंधों को दर्शाने के लिए साधारण, रूखे स्पर्श का प्रयोग।
   * कलाकृतियों में सीधी (जाबीकरण) और समतल स्तर पर त्रि-विमीय आकारों का सुंदर विन्यास।
   * लाल और पीले रंगों से प्रकाश में कंपन पैदा की गई।
   * नीले तथा सफेद रंगों के कपड़ों से गहराई तथा अंतरिक्ष का आभास कराया गया।
   * सेजा को हमेशा वर्तमान कला का जनक माना जाएगा क्योंकि उनकी कला शैली 19वीं सदी के अंत की प्रभाववादी कला और 20वीं सदी के प्रारंभ की आधुनिक कला या घनवाद के बीच एक सेतु का काम करती है।
6.5 स्टारी नाईट (STARRY NIGHT)
 * शीर्षक: स्टारी नाईट (Starry Night)
 * कलाकार: विनसेंट वेन गग (Vincent Van Gogh)
 * माध्यम: तैलीय रंग
 * समय: 1889
 * शैली: उत्तर-प्रभाववाद
 * संकलन: नेशनल गैलरी, लंदन
 * सामान्य विवरण:
   * डच कलाकार (चित्रकार) (1853-1890)।
   * जीवन में परेशानियाँ, गरीबी और उत्साहहीनता के बावजूद समर्पित चित्रकार।
   * चित्रों में आकार के वर्णन से अधिक रंगों को महत्व दिया।
   * प्रकृति के दृश्यों को केवल रंगों के माध्यम से चित्रित किया, न कि प्रकाश एवं छाया के द्वारा।
   * 'स्टारी नाईट' में सारा आकाश सितारों से भरा हुआ है।
   * सभी रंगों का अच्छा मिश्रण।
   * चित्र में बलखाते हुए बादल, झिलमिलाते सितारे और चमकता हुआ चंद्रमा चित्रित है।
   * पृष्ठभूमि में पहाड़ी के नीचे एक छोटा कस्बा, गिरजाघर और छोटी इमारतें।
   * चित्र के बाईं ओर अकेले साइप्रस पेड़ का ऊपरी भाग गहरी काली बनावट में।
   * रात्रि में आसमान के तारे अपने ही प्रकाश के क्षेत्र में घिरे दिखाई देते हैं।
   * नीले तथा सफेद रंगों की गहरी पट्टियों द्वारा ऐसा चित्रण कि आकाश गंगा के तारे भंवर में घूमते प्रतीत होते हैं।
   * चित्र के अध्ययन से कलाकार के आंतरिक द्वंद्व और निद्राविहीन रात्रि का आभास होता है।
   * सरलता तथा संवेदनशीलता की तीक्ष्णता को अभिव्यक्त करने की दृष्टि।
   

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