2. अति लघुतात्मक प्रश्न उत्तर (Very Short Answer Questions)
- प्रश्न: आपूर्ति की कीमत लोच को परिभाषित कीजिए। उत्तर: आपूर्ति की कीमत लोच किसी वस्तु की कीमत में प्रतिशत परिवर्तन के कारण आपूर्ति में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन की माप है, जो कीमत परिवर्तन के प्रति आपूर्ति की अनुक्रियाशीलता को दर्शाती है।
- प्रश्न: पूर्णतया बेलोच आपूर्ति (e_{s}=0) का क्या अर्थ है? उत्तर: यह वह स्थिति है, जिसमें आपूर्ति स्थिर रहती है (कोई प्रतिक्रिया न होना) चाहे वस्तु की कीमत में कोई भी परिवर्तन क्यों न हो, अर्थात् कीमत घटने या बढ़ने पर भी आपूर्ति की मात्रा ज्यों की त्यों ही रहेगी।
- प्रश्न: इकाई के समान आपूर्ति लोच (e_{s}=1) की मुख्य स्वरूपता क्या होती है? उत्तर: इसकी मुख्य स्वरूपता यह है कि वस्तु की आपूर्ति मात्रा का प्रतिशत परिवर्तन कीमत के प्रतिशत परिवर्तन के ठीक बराबर होता है।
- प्रश्न: आपूर्ति की कीमत लोच की गणना की दो प्रमुख विधियाँ कौन-सी हैं? उत्तर: 1. अनुपातिक या प्रतिशत विधि और 2. ज्यामितीय विधि।
- प्रश्न: आपूर्ति की कीमत लोच का मूल्य सदैव धनात्मक क्यों होता है? उत्तर: आपूर्ति की कीमत लोच का मूल्य सदैव धनात्मक होता है, क्योंकि आपूर्ति की मात्रा तथा वस्तु की कीमत में प्रत्यक्ष (धनात्मक) संबंध होता है।
- प्रश्न: नाशवान वस्तुओं की आपूर्ति की लोच पर उनकी प्रकृति का क्या प्रभाव पड़ता है? उत्तर: नाशवान वस्तुएँ, जैसे ताज़ी सब्ज़ियाँ/फल, की आपूर्ति प्रायः पूर्ण बेलोचदार होती है, क्योंकि इन्हें भविष्य में बेचने के लिए संग्रहित नहीं किया जा सकता, इसलिए कीमत परिवर्तन से आपूर्ति नहीं बदलती।
- प्रश्न: अल्पकाल और दीर्घकाल में से किसमें आपूर्ति लोच अधिक होती है? कारण बताइए। उत्तर: दीर्घकाल में आपूर्ति लोच अधिक होती है, क्योंकि लंबी समयावधि में उत्पादक के लिए वस्तु उत्पादन में वृद्धि या कमी के अनुसार अधिक कारक (आगत) आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे आपूर्ति को सरलतापूर्वक परिवर्तित किया जा सकता है।
- प्रश्न: यदि आपूर्ति वक्र Y अक्ष के समानांतर खड़ी सीधी रेखा है, तो e_{s} का मान क्या होगा? उत्तर: e_{s}=0 (पूर्णतया बेलोच आपूर्ति)।
- प्रश्न: आपूर्ति वक्र पर ढालू आपूर्ति वक्र की तुलना में अधिक चपटी आपूर्ति वक्र क्या दर्शाता है? उत्तर: चपटी आपूर्ति वक्र अधिक लोचदार आपूर्ति लोच दर्शाता है।
- प्रश्न: आपूर्ति की मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन का सूत्र लिखिए। उत्तर: \frac{\Delta Q_{s}}{Q_{s}}\times100।
- प्रश्न: ज्यामितीय विधि के अनुसार e_{s}=1 की स्थिति में आपूर्ति वक्र की विशेषता क्या होती है? उत्तर: आपूर्ति वक्र उद्गम बिंदु (Origin) से होकर गुजरता है।
- प्रश्न: आपूर्ति की इकाई से कम लोच (e_{s}<1) को रेखाचित्र में कैसे प्रदर्शित किया जाता है? उत्तर: आपूर्ति वक्र का ढलान तीव्र होता है और यह X अक्ष से शुरू होता है।
- प्रश्न: यदि e_{s}=0.8 है और \Delta Q=20, P=10, Q=40 है, तो \Delta P का मान क्या होगा? (पाठ के उदाहरण 2 पर आधारित) उत्तर: पाठ के अनुसार \Delta P का मान P_{2}-10 है और गणना में P_{2}=16.25 है, इसलिए \Delta P = 16.25 - 10 = \mathbf{6.25}।
- प्रश्न: उन वस्तुओं की आपूर्ति लोच कैसी होती है जिनकी अतिरिक्त इकाई की उत्पादन लागत तेज़ी से बढ़ती है? उत्तर: उन वस्तुओं की आपूर्ति अपेक्षाकृत बेलोचदार होती है, क्योंकि कीमत बढ़ने पर भी उत्पादक लाभ कम होने के कारण उत्पादन बढ़ाने में रुचि नहीं लेता।
- प्रश्न: यदि आपूर्ति वक्र X अक्ष के समानांतर समतल है, तो लोच का गुणांक क्या होगा? उत्तर: e_{s}=\infty (पूर्णतया आपूर्ति लोच)।
- प्रश्न: पूर्णतया आपूर्ति लोच की परिभाषा दीजिए। उत्तर: जब वस्तु की कीमत में मामूली-सा परिवर्तन या बिना परिवर्तन के, आपूर्ति में विस्तार या संकुचन किसी भी हद तक होता है, तो उसे पूर्ण लोचदार आपूर्ति कहा जाता है।
- प्रश्न: ज्यामितीय विधि में आपूर्ति लोच e_{s}>1 को दर्शाने के लिए BQ और OQ में क्या संबंध होता है? उत्तर: BQ (समस्तरीय खंड) OQ (पूरित मात्रा) से अधिक होता है, अर्थात् BQ > OQ।
- प्रश्न: आपूर्ति की कीमत लोच की प्रतिशत परिवर्तन गणना का सूत्र सांकेतिक रूप में लिखिए। उत्तर: e_{s}=\frac{\Delta Q_{s}}{\Delta P}\times\frac{P}{Q_{s}}।
- प्रश्न: यदि वस्तु की कीमत में 100 प्रतिशत वृद्धि होने पर, मात्रा में भी 100 प्रतिशत वृद्धि हो जाए, तो लोच क्या होगी? उत्तर: e_{s}=1 (इकाई के समान आपूर्ति लोच)।
- प्रश्न: आपूर्ति की लोच को निर्धारित करने वाले किन्हीं तीन कारकों का उल्लेख कीजिए। उत्तर: 1. वस्तु की प्रकृति, 2. अतिरिक्त इकाई की उत्पादन लागत, और 3. समय अवधि।
3. लघुत्रात्मक प्रश्न उत्तर (Short Answer Questions)
प्रश्न: आपूर्ति की कीमत लोच को एक उदाहरण की सहायता से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: आपूर्ति की कीमत लोच किसी वस्तु की कीमत में प्रतिशत परिवर्तन के प्रति आपूर्ति की मात्रा में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन की अनुक्रियाशीलता की माप है।
- उदाहरण: यदि किसी वस्तु की कीमत में 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है और उसकी आपूर्ति में 40 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो आपूर्ति की कीमत लोच e_{s} = \frac{40\%}{20\%} = 2 होगी। चूँकि यह लोच इकाई से अधिक है, इसलिए वस्तु की आपूर्ति अधिक लोचदार मानी जाएगी।
प्रश्न: इकाई से कम लोचदार आपूर्ति (e_{s}<1) और इकाई से अधिक लोचदार आपूर्ति (e_{s}>1) में क्या अंतर है?
उत्तर:
| अंतर का आधार | इकाई से कम लोचदार आपूर्ति (e_{s}<1) | इकाई से अधिक लोचदार आपूर्ति (e_{s}>1) |
| :--- | :--- | :--- |
| परिभाषा | आपूर्ति मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन कीमत के प्रतिशत परिवर्तन से कम होता है। | आपूर्ति मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन कीमत के प्रतिशत परिवर्तन से अधिक होता है। |
| वस्तु का प्रकार | प्रायः नाशवान वस्तुएँ, जिन्हें संग्रहित नहीं किया जा सकता। | प्रायः टिकाऊ वस्तुएँ, जिन्हें सरलता से संग्रहित किया जा सकता है। |
| आपूर्ति वक्र | आपूर्ति वक्र का ढलान तीव्र होता है और यह X-अक्ष से शुरू होता है। | आपूर्ति वक्र का ढलान चपटा होता है और यह Y-अक्ष को काटता है। |
प्रश्न: आपूर्ति की लोच को मापने की प्रतिशत विधि का वर्णन कीजिए और इसके सूत्र की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: प्रतिशत या अनुपातिक विधि e_{s} मापने की प्रसिद्ध विधि है। इस विधि के अनुसार, e_{s} वस्तु की आपूर्ति की मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन तथा कीमत में प्रतिशत परिवर्तन का अनुपात होता है।
- सूत्र: e_{s}=\frac{\text{आपूर्ति की मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन}}{\text{कीमत में प्रतिशत परिवर्तन}}
- सांकेतिक रूप में: e_{s}=\frac{\Delta Q_{s}}{\Delta P}\times\frac{P}{Q_{s}}
- व्याख्या: यहाँ e_{s} आपूर्ति की लोच है। \Delta Q_{s} आपूर्ति की मात्रा में परिवर्तन, \Delta P कीमत में परिवर्तन, P प्रारंभिक कीमत, और Q_{s} प्रारंभिक आपूर्ति मात्रा है। यह सूत्र कीमत परिवर्तन के प्रति आपूर्ति की मात्रा की अनुक्रियाशीलता की वास्तविक गणना करता है।
प्रश्न: उत्पादन की अतिरिक्त इकाई की लागत आपूर्ति की कीमत लोच को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर:
- लागत में तेज़ी से वृद्धि: यदि किसी वस्तु की अतिरिक्त इकाई की उत्पादन लागत तेज़ी से बढ़ती है, तो कीमत बढ़ने पर भी उत्पादक का लाभ नहीं बढ़ेगा (या कम बढ़ेगा)। ऐसे में, उत्पादक पर्याप्त मात्रा में उत्पादन बढ़ाने में रुचि नहीं लेता है। अतः, इस प्रकार की वस्तुओं की आपूर्ति अपेक्षाकृत बेलोचदार होती है।
- लागत में कमी: यदि अतिरिक्त इकाई के उत्पादन में प्रत्येक इकाई की सीमांत लागत घटती है, तो कीमत में थोड़ी-सी भी वृद्धि होने पर उत्पादक उत्पादन को प्रोत्साहित करता है। अतः, इस प्रकार की वस्तुओं की आपूर्ति की मात्रा में अधिक लोच होती है।
0 Comments