1.सार-लेखन किसे कहते हैं?
उत्तर - विस्तार से कही गई बात को कम शब्दों में व्यक्त करना ही सार-लेखन कहलाता है ।
2.सार-लेखन का अभ्यास किस भाषाई कौशल में सहायक होता है?
उत्तर -कम शब्दों में अपनी बात कहने के भाषाई कौशल में ।
3.सार-लेखन प्रायः मूल सामग्री का कितना भाग होता है?
उत्तर -मूल सामग्री का लगभग एक-तिहाई भाग होता है ।
4.सरकारी कार्यालयों में सार-लेखन की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर - समय बचाने के लिए सहायक द्वारा पत्रों या पूरी फाइल का सार तैयार करने के लिए ।
5.सार-लेखन में किन तत्वों को अनावश्यक सामग्री माना जाता है?
उत्तर -व्याख्या, उदाहरण, मुहावरे-लोकोक्तियाँ
1.सार-लेखन और भाव-पल्लवन में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर -सार-लेखन में विस्तृत सामग्री को संक्षिप्त किया जाता है, जबकि भाव-पल्लवन में किसी सूक्ति या मूल भाव का विस्तार (फैलाव) किया जाता है ।
2.सार-लेखन की प्रक्रिया का पहला और अंतिम चरण क्या है?
उत्तर -पहला चरण है मूल बिंदु का चयन, और अंतिम चरण है उपयुक्त आकार में सार लिखना ।
3.एक अच्छे सार-लेखक के लिए कौन-सी दो बातें अत्यंत आवश्यक हैं?
उत्तर -एक: मूल भाव और संबंधित बिंदुओं को पहचानना । दो: अनावश्यक सामग्री (जैसे व्याख्या, उदाहरण, दोहराव) को पहचानकर छोड़ना ।
1.सार-लेखन करते समय एक सार-लेखक को किन बातों को छोड़ देना चाहिए?
उत्तर -सार-लेखक को मूल सामग्री से व्याख्या, उदाहरण, और दोहराव को छोड़ देना चाहिए । इसके अलावा, प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयुक्त भाषाई कौशल जैसे मुहावरे-लोकोक्तियाँ, कथाएँ, अलंकार, और सूक्तियों को भी छोड़ देना चाहिए ।
2.सार-लेखन की उपयोगिता जीवन के किन-किन क्षेत्रों में है?
उत्तर -सार-लेखन की उपयोगिता कई क्षेत्रों में है। जैसे: समाचार-पत्रों में जगह के अनुसार समाचारों को संक्षिप्त करने में । 'आकाशवाणी' और 'दूरदर्शन' पर समय के हिसाब से सामग्री प्रस्तुत करने में । सरकारी कार्यालयों में सहायक द्वारा पत्रों और फाइलों का सार तैयार करने में । साथ ही, विस्तृत लेखों और पुस्तकों का सार तैयार करने में भी इसकी उपयोगिता है ।
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