प्रश्न: पृथ्वी का कितना भाग वनों से ढका हुआ है?
उत्तर: पृथ्वी का एक तिहाई भाग वनों से ढका हुआ है।
प्रश्न: वन किस प्रकार का पारितंत्र है?
उत्तर: वन एक जटिल पारितंत्र है जिसमें मुख्य रूप से वृक्ष होते हैं।
प्रश्न: वन के दो मुख्य प्रकार कौन से हैं?
उत्तर: वन के दो मुख्य प्रकार प्राकृतिक वन और मानव निर्मित वन हैं।
प्रश्न: वनों के महत्व के लिए सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कार्य क्या है?
उत्तर: वन मृदा अपरदन से जलागम की रक्षा करके नदियों और जलाशयों को गाद से सुरक्षित करते हैं।
प्रश्न: वन कौन-कौन से चक्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
उत्तर: वन कार्बन, जल, और अन्य तत्वों के चक्र में महत्वपूर्ण हाथ रखते हैं।
प्रश्न: वन उत्पादक कार्य के तहत किन चीज़ों का उत्पादन करते हैं?
उत्तर: वन लकड़ी, फल, रेजिन, क्षारोद, सुगंधित तेल, लेटेक्स और औषधीय तत्वों का उत्पादन करते हैं।
प्रश्न: वनों का रक्षात्मक कार्य क्या है?
उत्तर: वनों का रक्षात्मक कार्य विभिन्न जीवों का पर्यावास, मृदा और जल का संरक्षण, और बाढ़ व भूस्खलन से बचाव है।
प्रश्न: वनों का नियामक कार्य क्या है?
उत्तर: वन गैसों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन), पानी, खनिज तत्वों और विकिरण ऊर्जा को सोखना, मुक्त करना और वायुमंडलीय स्थिति में सुधार लाना है।
प्रश्न: विश्वव्यापी स्तर पर कुल बायोमॉस का लगभग कितना हिस्सा लकड़ी से बना है?
उत्तर: विश्वव्यापी स्तर पर कुल बायोमॉस का लगभग आधा हिस्सा लकड़ी से बना है।
प्रश्न: दुनिया भर में बनाई जाने वाली औषधियों में से कितने प्रतिशत के मुख्य तत्व पौधों और जन्तुओं से निकाले जाते हैं?
उत्तर: दुनिया भर में बनाई जाने वाली औषधियों में 40% के मुख्य तत्व पौधों और जन्तुओं से निकाले जाते हैं।
प्रश्न: मलेरिया के उपचार के लिए कौन सी औषधि प्रयोग होती है और यह किस पेड़ से मिलती है?
उत्तर: मलेरिया के उपचार के लिए कनैन प्रयोग होती है, जो सिनकोना पेड़ से मिलती है।
प्रश्न: दुनिया में सर्वाधिक प्रयोग में आने वाली दवा 'एस्प्रिन' किससे बनाई जाती है?
उत्तर: 'एस्प्रिन' उष्णकटिबंधीय विलो वृक्ष की पत्तियों के रस से बनाई जाती है।
प्रश्न:वनोन्मूलन (Deforestation) को एक वाक्य में कैसे परिभाषित किया जा सकता है?
उत्तर: वनोन्मूलन वह प्रक्रिया है जिसमें जंगलों की हरियाली को इस हद तक हानि पहुँचाना कि उसका प्राकृतिक वन्य फल-फूल आदि विकसित न हो सकें।
प्रश्न: वर्ष 1950 तक विश्व का वन्यावरण घटकर कितना रह गया था?
उत्तर: वर्ष 1950 तक विश्व का वन्यावरण घटकर 4.8 अरब हेक्टेयर रह गया था।
प्रश्न: FAO/UNEP की रिपोर्ट के अनुसार प्रतिवर्ष कितने मिलियन हेक्टेयर उष्णकटिबंधीय वन समाप्त हो रहे हैं?
उत्तर: प्रतिवर्ष 7.3 मिलियन हेक्टेयर उष्णकटिबंधीय वन समाप्त हो रहे हैं।
प्रश्न: वनोन्मूलन का सबसे सामान्य कारण क्या है?
उत्तर: वनोन्मूलन का सबसे सामान्य कारण जलाने के लिए, इमारती लकड़ी के लिए और कागज के लिए पेड़ों को काटना है।
प्रश्न: भारत में राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार कितना प्रतिशत वन्यावरण वांछित है?
उत्तर: राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार 33% वन्यावरण वांछित है।
प्रश्न:स्थानांतरीय जुताई (झूम कृषि) को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: इसे स्लैश और बर्न विधि के नाम से जाना जाता है।
प्रश्न: विश्व की कुल लकड़ी में से कितना प्रतिशत भाग ईंधन की आवश्यकता की पूर्ति करती है?
उत्तर: विश्व की कुल लकड़ी में से 44% लकड़ी ईंधन की आवश्यकता की पूर्ति करती है।
प्रश्न: विकासशील देशों में ईंधन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए लकड़ी का कितना प्रतिशत प्रयोग में लाया जाता है?
उत्तर: विकासशील देशों में ईंधन की आवश्यकता पूर्ति के लिए लकड़ी का 82% प्रयोग में ले लिया जाता है।
प्रश्न:टिहरी पावर परियोजना किन दो नदियों के संगम पर स्थित है?
उत्तर: यह भागीरथी और भीलगंगा के संगम पर स्थित है।
प्रश्न: विश्व की कितनी प्रतिशत जनसंख्या विशेष भूभागों में निवास करने वाले आदिवासियों की है?
उत्तर: विश्व की 4% जनसंख्या आदिवासियों की है।
प्रश्न: वर्ष 1978 में भारत ने किस आपदा का सामना किया था जिसके पीछे वनोन्मूलन एक कारण था?
उत्तर: वर्ष 1978 में भारत ने बहुत भयानक बाढ़ का सामना किया था।
प्रश्न: भारत में मिट्टी की ऊपरी सतह का नुकसान विश्वव्यापी मिट्टी के नुकसान का कितना प्रतिशत है?
उत्तर: यह विश्वव्यापी मिट्टी के नुकसान का 18.56% है।
प्रश्न: वातावरण में उष्णता के संचयन को क्या कहते हैं?
उत्तर: इसे ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse effect) जाना जाता है।
प्रश्न:जैवविविधता किसे कहा जाता है?
उत्तर: जीवन के प्रत्येक रूप को जैवविविधता कहा जाता है।
प्रश्न: संभावित खतरे वाली प्रजातियों को अन्तर्राष्ट्रीय प्राकृतिक संरक्षक संघ (आईयूसीएन) ने कितने वर्गों में बांटा है?
उत्तर: आईयूसीएन ने संभावित खतरे वाली प्रजातियों को चार वर्गों में बांटा है।
प्रश्न: भारत से लुप्त होने वाले पशु का नाम बताइये जो एक समय में आम था?
उत्तर:चीता भारत से लगभग लुप्त हो चुका है।
प्रश्न: एशियाई बाघ अब केवल भारत के किस जंगल में पाया जाता है?
उत्तर: एशियाई बाघ अब केवल भारत के गीर जंगलों में ही पाया जाता है।
प्रश्न:मरुस्थलीकरण (निर्जनीकरण) को कैसे परिभाषित किया जाता है?
उत्तर: मरुस्थलीकरण किसी भूभाग की जैविक क्षमता का हास या विनाश इस तरह होना कि धीरे-धीरे उसमें निर्जनता जैसी स्थितियां बन जाएँ।
II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर (20)
प्रश्न: वन किस प्रकार के सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करते हैं?
उत्तर: वन उद्योगों के लिए कच्चा माल, विभिन्न उत्पाद प्रदान करते हैं, साथ ही पर्यावरण के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करते हैं, मृदा अपरदन रोकते हैं और जलवायु को नियंत्रित करते हैं।
प्रश्न: जंगल अप्रत्यक्ष रूप से मानव का हित किस प्रकार करते हैं?
उत्तर: जंगल मृदा अपरदन से जलागम (Watershed) की रक्षा करके नदियों और जलाशयों को गाद से सुरक्षित करते हैं, और भूजल के स्तर को सुरक्षित रखते हैं।
प्रश्न: पेड़ों को प्राकृतिक वन और मानव निर्मित वन में विभाजित करने का आधार क्या है?
उत्तर:प्राकृतिक वन स्थानीय वृक्षों के उगने से स्वयं बन जाते हैं, जबकि मानव निर्मित वन मानव द्वारा स्वयं रोपित करके तैयार किए जाते हैं।
प्रश्न: वनों के विभिन्न प्रकार निश्चित करने के मुख्य कारक क्या हैं?
उत्तर: मुख्य कारक आयु, मिट्टी का प्रकार, भौगोलिक स्थिति और समुद्र सतह से ऊंचाई हैं।
प्रश्न: लकड़ी पर आधारित कुछ उद्योगों के नाम बताइये।
उत्तर: प्लाईवुड निर्माण, दियासलाई निर्माण, फर्नीचर, खेल का सामान, आरा मशीन, कागज और लुग्दी और पार्टिकल बोर्ड लकड़ी पर आधारित उद्योग हैं।
प्रश्न: औषधीय उपयोग के लिए किन्हीं दो पौधों के नाम और उनके रोग बताइये।
उत्तर: मलेरिया के लिए कनैन (सिनकोना पेड़ से) और पुराने हृदय रोग के लिए डिजिटेलिस (फॉक्सग्लाब के पेड़ से) उपयोग होते हैं।
प्रश्न: भारत में किन राज्यों/क्षेत्रों में खेती की स्थानांतरीय जुताई अभी भी अपनाई जाती है?
उत्तर: आसाम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा राज्यों और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थानांतरीय जुताई अपनाई जाती है।
प्रश्न: औद्योगिक उपयोगों के लिए लकड़ी की अत्यधिक मांग वनोन्मूलन का कारण कैसे बनती है?
उत्तर: लकड़ी का अनियंत्रित दोहन औद्योगिक कार्यों (जैसे- पैकेजिंग, कागज, प्लाईवुड) के लिए होता है। उदाहरण के लिए, सेबों के परिवहन के लिए लकड़ी के बक्से चाहिए, जिससे देवदार जैसे वृक्षों का कटान हुआ है।
प्रश्न: विकासशील देशों में लकड़ी के उपयोग की प्रवृत्ति, विकसित देशों से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: विकासशील देशों में कुल लकड़ी के उपयोग का 82% जलावन (ईंधन) के लिए प्रयोग होता है, जबकि विकसित देशों में इसका केवल 16% ही जलावन के लिए प्रयोग होता है, बाकी औद्योगिक उपयोग के लिए होता है।
प्रश्न: वनोन्मूलन के कारणों को मुख्य रूप से किन श्रेणियों में बाँटा गया है?
उत्तर: कृषि, स्थानांतरीय जुताई, जलावन लकड़ी की मांग, उद्योगों और व्यावसायिक उद्देश्य के लिए लकड़ी की मांग, शहरीकरण और विकास-संबंधी परियोजनाएँ तथा अन्य कारण।
प्रश्न: आदिवासियों का अपने विशेष स्थान से क्या बंधन होता है और वे जैव विविधता की रक्षा कैसे करते हैं?
उत्तर: आदिवासियों का उस स्थान से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और आर्थिक बंधन होता है, और वे पारिस्थितिकी के अनुकूल कृषि विधियों का ज्ञान रखते हैं जिससे वे स्थानीय संस्कृति और संसाधनों का संरक्षण करते हैं।
प्रश्न: वनों का जलवायु पर क्या गहरा प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: वन वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते हैं और ऑक्सीजन का अनुपात उचित रखते हैं। ये जल-नियमन (जल-चक्र) को नियंत्रित रखते हैं और वातावरणीय आर्द्रता को नियमित रखते हैं।
प्रश्न: जैव विविधता में कमी आने के कुछ कारण बताइये।
उत्तर: शिकार/चोरी से शिकार, व्यावसायिक शोषण, वन्यजीवों के निवासों को हटाना, निवास स्थानों को नष्ट करना, और क्षेत्र में नई विदेशी प्रजाति को रखना।
प्रश्न: 'खतरे में' (Endangered) प्रजाति किसे माना जाता है? एक उदाहरण दीजिये।
उत्तर: वह प्रजाति जिसकी संख्या बहुत कम हो और उसके घर का भूभाग बहुत छोटा हो। उदाहरण: शेर की सी दुम वाले बंदर (Lion tailed monkey)।
प्रश्न: 'दुर्लभ' (Rare) प्रजाति किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिये।
उत्तर: वे प्रजातियाँ जिनकी संख्या बहुत कम होती है और वे छोटे क्षेत्र या बहुत असामान्य वातावरण में रहते हैं कि वे बहुत शीघ्रता से गायब हो सकते हैं। उदाहरण: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड।
प्रश्न: वन्य जीवन की हानि का एक बड़ा कारण क्या है, और इसके दो प्रमुख उदाहरण दीजिये।
उत्तर: वन्य जीवन की कमी का एक बड़ा कारण गैरकानूनी ढंग से चोरी से शिकार है। उदाहरण: काले गैंडे का उसके सींग के लिए शिकार, हाथियों का उनके दांत के लिए शिकार।
प्रश्न: थार मरुस्थल की भौगोलिक स्थिति और जलवायु की विशेषता क्या है?
उत्तर: थार मरुस्थल उत्तर पश्चिमी भारत और पूर्वी पाकिस्तान में रेतीला है। यहाँ बहुत कम वर्षा (127 से 254 मिमी) होती है, और तापमान जुलाई में उच्च (52.8°C तक) हो जाता है।
प्रश्न: थार मरुस्थल में पौधों की प्राकृतिक वनस्पति की सबसे बड़ी मात्रा में क्षति किस कारण हुई है?
उत्तर: थार मरुस्थल में प्राकृतिक वनस्पति की सबसे बड़ी मात्रा में क्षति पशुधन द्वारा अति चराई के कारण हुई है।
प्रश्न: मरुस्थलीकरण किस प्रकार की मानवीय गतिविधियों का परिणाम है?
उत्तर: मरुस्थलीकरण अनियंत्रित और अतिशोषण (चारागाह), पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, खनन कार्य, जलस्रोतों के अत्यधिक उपयोग और कृषि संबंधी कुप्रबंधन जैसी मानवीय गतिविधियों का परिणाम है।
प्रश्न:निर्जनीकरण (Desertification) होने पर क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: वंनस्पति समाप्त होती है, हवा का वेग बढ़ जाता है, आर्द्रता का संरक्षण कम होता है, क्षेत्र में शुष्कता बढ़ती है और तापमान प्रचंड हो जाता है।
III. लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर (10)
प्रश्न: वनों को पर्यावरण का सुरक्षा कवच क्यों कहा जाता है? विस्तार से समझाएं।
उत्तर: वनों को पर्यावरण का सुरक्षा कवच कहा जाता है क्योंकि वे कई महत्वपूर्ण नियामक और रक्षात्मक कार्य करते हैं। वे कार्बन, जल, और अन्य तत्वों के चक्र में महत्वपूर्ण हाथ रखते हैं। वे वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर ऑक्सीजन मुक्त करते हैं, जिससे वायुमंडलीय संतुलन बना रहता है। अप्रत्यक्ष रूप से, वे मृदा अपरदन से जलागम की रक्षा करते हैं, बाढ़ और सूखे की तीव्रता को कम करते हैं, और भूजल स्तर को सुरक्षित रखते हैं। इस प्रकार, वे अनेक प्रकार के जीवों को भी पर्यावास प्रदान करते हैं।
प्रश्न: वनोन्मूलन की परिभाषा देते हुए, इसके मुख्य भौतिक और जैविक पर्यावरणीय परिणामों का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर:वनोन्मूलन वह प्रक्रिया है जिसमें जंगलों की हरियाली को इस हद तक हानि पहुँचाई जाती है कि उसका प्राकृतिक वन्य फल-फूल विकसित न हो सकें। इसके मुख्य परिणाम हैं:
भौतिक परिणाम:
मृदा अपरदन और आकस्मिक बाढ़ें: वन विनाश से मिट्टी की ऊपरी सतह बहकर नदियों में गाद की तरह जमा हो जाती है, जिससे भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ता है।
जलवायु में परिवर्तन: वन कार्बन सिंक (Carbon Sink) का काम करते हैं। उनके कटने से वातावरण में \text{CO}_2 का स्तर बढ़ता है, जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव और वैश्विक तापन में वृद्धि होती है।
जैविक परिणाम:
जैव विविधता में कमी: वन वन्यजीवों का निवास स्थान होते हैं। वनों के कटने से उनके पर्यावास नष्ट हो जाते हैं, जिससे अनेक पादप और प्राणी प्रजातियाँ लुप्त होने के कगार पर पहुँच जाती हैं।
प्रश्न: विकास संबंधी परियोजनाएँ किस प्रकार वनोन्मूलन को बढ़ावा देती हैं? टिहरी पावर परियोजना का उदाहरण दें।
उत्तर: विकासशील गतिविधियाँ जैसे सड़कों, रेलवे लाइन, बांध-निर्माण, बस्तियाँ, बिजली आदि के लिए निर्माण कार्य, तथा खनन और कच्चे माल के लिए खुदाई सीधे तौर पर वनोन्मूलन करती है। टिहरी पावर परियोजना इसका एक प्रमुख उदाहरण है। यह 260.5 मीटर ऊंचा बांध भागीरथी और भीलगंगा के संगम पर स्थित है, जिसके कारण लगभग 4,000 हेक्टेयर के अच्छे वन पानी के नीचे डूब गए, जिससे वन्यावरण को भारी नुकसान हुआ और पर्यावरण सम्बन्धी समस्याएं पैदा हुईं।
प्रश्न: 'स्थानांतरीय जुताई' (झूम कृषि) क्या है और यह वनों के विनाश का एक कारण कैसे बनी?
उत्तर:स्थानांतरीय जुताई या झूम कृषि, जिसे स्लैश और बर्न विधि भी कहते हैं, एक 12,000 वर्ष पुरानी कृषि विधि है। इसमें किसान खेती के लिए जंगल के एक भू-भाग को साफ करके जला देते हैं। दो-तीन वर्षों तक खेती करने के बाद, उस भू-भाग को स्वाभाविक रूप से पुनः ठीक होने के लिए वर्षों तक छोड़ दिया जाता था, और खेती के लिए नए जंगल को साफ किया जाता था। इस निरंतर चक्र के कारण बड़े पैमाने पर वनों की कटाई होती गई, जिससे वनों का विनाश सबसे अधिक हुआ।
प्रश्न: आईयूसीएन (IUCN) द्वारा वर्गीकृत संभावित खतरे वाली प्रजातियों के चार वर्गों की संक्षिप्त व्याख्या करें।
उत्तर:
खतरे में (Endangered): वह प्रजाति जिसकी संख्या बहुत कम हो और उसके घर का भूभाग बहुत छोटा हो। विशेष सुरक्षा न मिलने पर ये लुप्त हो सकते हैं (जैसे: शेर की सी दुम वाले बंदर)।
दुर्लभ (Rare): वह प्रजाति जिनकी संख्या बहुत कम होती है और वे बहुत छोटे क्षेत्र या असामान्य वातावरण में रहते हैं कि वे बहुत शीघ्रता से गायब हो सकते हैं (जैसे: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)।
संख्या में कमी (Depleted): वे प्रजातियाँ जिनकी संख्या पहले से बहुत कम हो गई है और निरंतर घटती जा रही है, जिससे उनके दुर्लभ या खतरे में आने वाले वर्ग में पहुँचने की आशंका है (जैसे: तेंदुएं)।
अनिश्चित (Indeterminate): ऐसी प्रजातियाँ जो लुप्त होने के खतरे में हैं, परन्तु उनके विषय में कुछ अधिकृत सूचना उपलब्ध नहीं है।
प्रश्न: मरुस्थलीकरण (निर्जनीकरण) से आप क्या समझते हैं? इसके मानवीय कारणों की पहचान करें।
उत्तर:मरुस्थलीकरण को किसी भूभाग की जैविक क्षमता का हास या विनाश इस तरह होना परिभाषित किया जा सकता है कि धीरे-धीरे उसमें निर्जनता जैसी स्थितियां बन जाएँ। इसके मुख्य मानवीय कारण हैं:
अतिशोषण: चारागाहों का अनियंत्रित और अतिशोषण, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई।
खनन: शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों में खनिज, कोयला, चूना पत्थर निकालने के लिए खनन कार्य।
कृषि कुप्रबंधन: ऐसी भूमि पर खेती करना जिसमें कोई लाभ नहीं है, जिससे उपजाऊ भूमि भी प्रभावित होती है।
जलस्रोतों का अत्यधिक उपयोग: इससे भूजलस्तर घटता है, रिसाव बढ़ता है और मिट्टी में अत्यधिक खारापन आ जाता है।
प्रश्न: वनों के महत्व को उत्पादक, रक्षात्मक और नियामक कार्यों के रूप में वर्गीकृत करते हुए समझाएं।
उत्तर:
उत्पादक कार्य: वन विभिन्न प्रकार की लकड़ी, फलों, रेजिन, औषधीय तत्वों (जैसे- लेटेक्स, सुगंधित तेल) और अन्य उत्पादों का उत्पादन करते हैं जो सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
रक्षात्मक कार्य: वन विभिन्न जीवों के लिए पर्यावास हैं। वे मृदा और जल का संरक्षण करते हैं, भूस्खलन, बाढ़, हवा, सर्दी और शोर से बचाव के लिए आश्रय प्रदान करते हैं।
नियामक कार्य: वन वायुमंडल में गैसों (कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन) के चक्र को नियंत्रित करते हैं, साथ ही पानी और खनिज तत्वों को सोखना, संरक्षित करना और मुक्त करना। ये जलवायु और तापन की स्थिति में सुधार लाते हैं।
प्रश्न: वनोन्मूलन के कारण आदिवासियों पर क्या प्रभाव पड़ते हैं?
उत्तर: आदिवासी समुदाय भोजन, कपड़े और आश्रय सहित अपनी अधिकांश आवश्यकताओं के लिए वनों पर निर्भर रहते हैं। उनका जंगल से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और आर्थिक बंधन होता है। वनोन्मूलन से उनका पारंपरिक निवास स्थान नष्ट हो जाता है। उनके जीविका के साधन छिन जाते हैं (जैसे: जलावन, औषधीय पौधे, खाद्य उत्पाद)। विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापन होने से वे अपनी स्थानीय संस्कृति और संसाधनों के प्रबंधन के कौशल को खो देते हैं, और गरीबी तथा विस्थापन का सामना करते हैं।
प्रश्न: जैव विविधता किसे कहते हैं? इसके संरक्षण के महत्व पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर:जैवविविधता (Biodiversity) जीवन के प्रत्येक रूप को कहा जाता है। यह सभी जीवित प्राणियों और वस्तुओं के प्रकारों, उनकी आनुवांशिक स्ट्रेनों और क्षेत्र की विभिन्न पारिस्थितिकीय भिन्नताओं का माप है।
संरक्षण का महत्व: जैव विविधता के संरक्षण से मानव प्रयोग और कल्याण के लिए अनेक प्रकार के उत्पाद उपलब्ध होते हैं। यह कृषि के लिए बहुत बड़ा संभावित स्रोत है (जैसे: विभिन्न प्रकार की फसलें)। यह पारितंत्र में स्थिरता रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि प्रत्येक प्रजाति पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न: भारत में वनोन्मूलन एक गंभीर समस्या क्यों है? वांछित वन्यावरण की तुलना में वर्तमान स्थिति क्या थी?
उत्तर: भारत में वनोन्मूलन एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है क्योंकि यह देश को चारागाहों, कृषि विस्तार और चाय-कॉफी जैसी फसलों को उगाने के लिए अपने वन्यावरण को खोने के लिए मजबूर करता है। 1950 के प्रारम्भ में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार भारत में केवल 22.7% वन्यावरण था, जबकि राष्ट्रीय वन पॉलिसी के अनुसार 33% वन्यावरण वांछित है। वन क्षेत्र के कम होने से बाढ़, सूखा और मृदा अपरदन जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है, जिससे देश की प्राकृतिक सम्पदा बहुत हद तक प्रभावित होती है।
IV. निबंधात्मक प्रश्न-उत्तर (5)
प्रश्न: वनोन्मूलन के कारणों का विस्तृत विश्लेषण करें, और समझाएं कि मनुष्यों की लालच से जुड़ी आवश्यकताओं ने पर्यावरण को कैसे हानि पहुँचाई है।
उत्तर:परिचय: वनोन्मूलन (Deforestation) जंगलों को साफ करके उस भूमि को खेती, चारागाह, रेगिस्तान या आवास के लिए परिवर्तित करना है। पाठ के अनुसार, मनुष्य की लालच से जुड़ी आवश्यकताओं ने पर्यावरण को गंभीर हानि पहुंचाई है, जिसका प्रभाव भावी पीढ़ी पर अवश्य पड़ेगा।
वनोन्मूलन के विस्तृत कारण:
कृषि और स्थानांतरीय जुताई (Shifting Cultivation): कृषि उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण अधिक भूमि पर खेती शुरू हुई, जिसके लिए जंगलों को समाप्त किया गया। स्थानांतरीय जुताई (झूम कृषि) की स्लैश और बर्न विधि ने 12,000 वर्षों से बड़े पैमाने पर वनों का विनाश किया, क्योंकि हर दो-तीन साल में नए जंगल साफ करने पड़ते थे।
लकड़ी की मांग (जलावन और औद्योगिक):
जलावन लकड़ी: विश्व की कुल लकड़ी का लगभग 44% ईंधन की आवश्यकता पूरी करती है। भारत जैसे विकासशील देशों में गरीबों की ईंधन की आवश्यकता के लिए बड़े पैमाने पर वन्यावरण को काटना पड़ता है (लगभग 10-15 हेक्टेयर प्रतिवर्ष)।
औद्योगिक उपयोग: लकड़ी की टप, पैकिंग के बॉक्स, कागज और लुग्दी, और प्लाईवुड जैसे औद्योगिक कार्यों के लिए अनियंत्रित दोहन होता है। उदाहरण के लिए, सेबों के परिवहन के लिए लकड़ी के बक्से चाहिए, जिससे हिमालयी क्षेत्र के देवदार जैसे वृक्षों का भारी कटान हुआ है।
शहरीकरण और विकास परियोजनाएँ: सड़कों, रेलवे लाइन, बांध-निर्माण (जैसे टिहरी परियोजना), बस्तियाँ, बिजली संयंत्र और खनन आदि जैसी विकासशील गतिविधियाँ वनोन्मूलन का महत्वपूर्ण कारण हैं, क्योंकि ये बड़ी मात्रा में वन क्षेत्रों को नष्ट करती हैं।
अन्य कारण: जंगल में अतिचारण, जंगल की आग, बीमारी, और दीमकों के आक्रमण जैसी प्राकृतिक आपदाएँ भी वनों को नष्ट करती हैं।
लालच से जुड़ी आवश्यकताएँ: मनुष्यों ने बिना सोच-विचार के अपनी आवश्यकताओं के अनुसार प्राकृतिक पारितंत्रों को बदला। यह परिवर्तन केवल जीवनयापन के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक लाभ और उद्योगों के कच्चे माल के लिए हुआ। लकड़ी के उत्पादों का अनियंत्रित दोहन और खेती के लिए जंगलों की अंधाधुंध कटाई दर्शाती है कि अल्पकालिक आर्थिक लाभ के लालच ने दीर्घकालिक पर्यावरणीय सुरक्षा की उपेक्षा की है, जिससे भावी पीढ़ी के लिए गंभीर पारिस्थितिकीय समस्याएं पैदा हुई हैं।
प्रश्न: मरुस्थलीकरण (निर्जनीकरण) क्या है? भारत में इसका विस्तार और इसके कारणों पर एक विस्तृत नोट लिखें।
उत्तर:मरुस्थलीकरण (Desertification):
मरुस्थलीकरण को किसी भूभाग की जैविक क्षमता का हास या विनाश इस तरह होना परिभाषित किया जा सकता है कि धीरे-धीरे उसमें निर्जनता जैसी स्थितियां बन जाएँ। यह विशेष रूप से शुष्क या अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में होता है, जहाँ पुर्नस्थापन धीमा होता है। इसके कारण वनस्पति समाप्त हो जाती है, शुष्कता बढ़ जाती है, और मिट्टी का अपरदन व अपक्षीर्णन होता है।
भारत में मरुस्थलीकरण का विस्तार:
भारत में अधिकतर रेगिस्तान राजस्थान और पश्चिमी गुजरात में हैं।
लगभग 23.8 मिलियन हेक्टेयर भूभाग मरुस्थलीकरण से प्रभावित है।
थार मरुस्थल, उत्तर-पश्चिमी भारत और पूर्वी पाकिस्तान में फैला हुआ, इसका एक वृहत् अध्ययन क्षेत्र है।
मरुस्थल का विस्तार जैसलमेर, गंगानगर, चुरु, बीकानेर, बाड़मेर, नागौर आदि जिलों के क्षेत्र में व्याप्त है।
भारत के पास विश्व के भूक्षेत्र का केवल 2.4% है, लेकिन विश्वव्यापी मिट्टी के नुकसान में भारत में मिट्टी की ऊपरी सतह का नुकसान 18.56% है, जो एक गंभीर समस्या है।
मरुस्थलीकरण के कारण:
वनोन्मूलन: पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से मिट्टी की उर्वर शक्ति कम होती है, मृदा अपरदन बढ़ता है, और वर्षा का ढंग बदल जाता है, जिससे क्षेत्र में शुष्कता बढ़ जाती है।
अतिचारण: अत्यधिक पशुधन द्वारा चराई के कारण गोचर भूमि और चारागाह को क्षति पहुंचाई गई है, जिससे वनस्पति का पुनः पनपना कठिन हो जाता है (विशेषकर थार मरुस्थल में)।
कृषि कुप्रबंधन: अनुपजाऊ भूमि पर खेती करने से आस-पास की उपजाऊ भूमि भी प्रभावित होती है। कृषि संबंधी कुप्रबंधन से मिट्टी का खारापन, जल जमाव और रासायनिक अपक्षीर्णन होता है।
खनन कार्य: शुष्क क्षेत्रों में खनिज और कोयला निकालने के लिए खनन से वृक्षों और वन्यावरण को क्षति पहुँचती है और हरियाली को बढ़ाने में सहायक वनस्पतियों का विनाश होता है।
जलस्रोतों का अत्यधिक उपयोग: जलस्रोतों के अनार्थिक और अत्यधिक उपयोग से भूजलस्तर घटता जाता है, और मिट्टी में खारापन आ जाता है।
मरुस्थलीकरण एक गम्भीर वैश्विक समस्या है, और मानव की गतिविधियों ने पहले से ही शुष्क क्षेत्रों को और अधिक निर्जन बनाया है।
प्रश्न: वनोन्मूलन के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता में कमी के परिणामों को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:1. जलवायु परिवर्तन:
वनों का जलवायु पर गहरा और नियामक प्रभाव होता है। वनोन्मूलन के कारण निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं:
कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि: जंगल वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते हैं (कार्बन सिंक)। उनके कटने से वातावरण में \text{CO}_2 और ऑक्सीजन का अनुपात बिगड़ जाता है। यह ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse effect) का मुख्य कारण बनता है, जिससे वातावरण में उष्णता (ऊष्मा) का संचयन होता है।
तापमान और आर्द्रता का नियमन: वन वातावरणीय आर्द्रता को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। वनों के घटने से स्थानीय अवक्षेपण (वर्षा) में कमी आती है और तापमान प्रचंड हो जाता है। उदाहरण के लिए, हिमालय का पारितंत्र खतरे में है, हिमरेखाएँ पतली हो रही हैं, बारहमासी झरने सूख रहे हैं, और वर्षा 3 से 4% कम होने लगी है।
जल-चक्र का विचलन: वन जल-चक्र को नियंत्रित रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। वनोन्मूलन से मिट्टी की पानी रोकने की शक्ति कम होती है, जिससे बाढ़ और सूखे की तीव्रता बढ़ जाती है।
2. जैव विविधता में कमी:
जैव विविधता (जीवन के प्रत्येक रूप) वनोन्मूलन से सीधे तौर पर प्रभावित होती है:
पर्यावासों का विनाश: वन वन्यजीवों और पादपों के लिए घर (पर्यावास) होते हैं। वनों के कटने से उनके निवास स्थान नष्ट हो जाते हैं या खंडित हो जाते हैं। इससे असंख्य प्रकार के जन्तुओं और पौधों के जीवन को सहारा देने वाली संरचना छिन्न-भिन्न हो जाती है।
प्रजातियों का लुप्त होना: पर्यावास के विनाश के कारण अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो जाती हैं या 'खतरे में' वाली श्रेणी में आ जाती हैं। उदाहरण के लिए, पिछले 2000 वर्षों में पशुओं की 600 प्रजातियाँ लुप्त हो चुकी हैं, और 3000 पौधों को संरक्षण की आवश्यकता है।
असंतुलन: जैव विविधता का विघटन शिकार, चोरी से शिकार, व्यावसायिक शोषण और निवास स्थानों को नष्ट करने के कारण तीव्र गति से होता है। इससे पारितंत्र की स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, काले गैंडे और हाथियों का उनके सींग और दांत के लिए शिकार।
वनोन्मूलन का यह संयुक्त प्रभाव (जलवायु परिवर्तन + जैव विविधता में कमी) पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों को दीर्घकालिक रूप से हानि पहुंचा रहा है।
प्रश्न: थार मरुस्थल की जैविक विविधता और इसके पशु तथा पौधों की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:थार मरुस्थल:
थार मरुस्थल उत्तर पश्चिमी भारत और पूर्वी पाकिस्तान में फैला एक विस्तृत रेतीला मरुस्थल है। इसकी भौगोलिक स्थिति और जलवायु (कम वर्षा: 127 से 254 मिमी, उच्च तापमान: 52.8°C तक) ने इसे अद्वितीय जैविक विविधता प्रदान की है।
पौधों की विविधता (वनस्पति):
वनस्पति का प्रकार: पारिस्थितिकी के अनुसार थार मरुस्थल क्षेत्र में मुख्य रूप से कंटीले वन होते हैं।
खेजरी वृक्ष का महत्व: प्राकृतिक वनस्पति में 'खेजरी' वृक्ष का उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन पेड़ों को बहुत महत्व दिया जाता है और इनका रखरखाव सोच समझ से होता है।
प्रजातियों की संख्या: यहां पौधों की लगभग 700 प्रजातियाँ हैं, जिसमें केवल घास की ही 107 प्रजातियाँ शामिल हैं।
वनस्पति की हानि: इस क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पति की सबसे बड़ी मात्रा में क्षति पशुधन द्वारा अति चराई के कारण हुई है। मरुस्थलीय पौधों का पुनः पनपना बहुत कठिन होता है।
पशुओं की विविधता (प्राणिजात):
लुप्त/खतरे में प्रजातियाँ: एशियाई बाघ (1976 में शिकार), चीता (लगभग लुप्त), तेंदुए, बनबिलाव, जंगली सुअर और एशियाई भेड़िया जैसी प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती थीं, लेकिन अब इनकी संख्या में भारी कमी आई है।
वर्तमान में पाई जाने वाली प्रजातियाँ: भारतीय चिकारा, ब्लू नील बुल (नील गाय), और काला खरगोश (ब्लैक बक) पशुओं की खतरे में आई प्रजाति वर्ग में आते हैं।
पक्षियों की प्रजातियाँ: अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में पाई जाने वाली पक्षियों की प्रजातियाँ भी कम रह गई हैं। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हाउबरा और लेसर फ्लोरिकन राष्ट्रीय पक्षी होने के कारण पूरी सुरक्षा दी जाती है।
सरीसृप: मगरमच्छ और कछुए जैसे सरीसृप अब अरावली की निचली पहाड़ियों और जवाई बांध तक सीमित रह गए हैं।
थार मरुस्थल अपने पौधों और जन्तुओं के साथ अत्यंत प्रतिकूल मौसम को अपना चुका है, लेकिन मानवीय गतिविधियों और संरचनात्मक विकास के कारण यहाँ की अद्वितीय गति से जैव विविधता घट रही है, जिसे रोकना आवश्यक है।
प्रश्न: आदिवासियों और वनों के बीच के संबंध को स्पष्ट करें और बताएं कि वे पर्यावरण के अनुकूल जीवन यापन किस प्रकार करते हैं।
उत्तर:आदिवासी और वनों के बीच संबंध:
आदिवासी (स्थानीय लोग) विश्व की 4% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और विशेष भूभागों में निवास करते हैं। इनका वनों के साथ गहरा सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और आर्थिक बंधन होता है।
निर्भरता: आरम्भिक मानव की तरह, आदिवासी समुदाय भोजन, कपड़े, आश्रय, जलावन और औषधीय पौधों जैसी अपनी सभी आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से वनों पर निर्भर रहते हैं।
अधिकार और प्रबंधन: वे विशेष स्थानों पर अपना अधिकार रखते हैं और उस क्षेत्र को रखने तथा उसके प्रबंधन में स्वयं सक्षम होते हैं। इस तरह वे उस स्थान की जैव विविधता और स्थानीय संस्कृति की रक्षा और संरक्षण करते हैं।
पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान: उनके पास वनों और प्रकृति का पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा गहन ज्ञान होता है, जो उन्हें पर्यावरण के अनुकूल जीवन यापन करने में मदद करता है।
पर्यावरण के अनुकूल जीवन यापन:
पारिस्थितिकी के उपयुक्त कृषि विधियाँ: आदिवासियों को उन कृषि विधियों का ज्ञान है जो पारिस्थितिकी के लिए उपयुक्त हैं। वे जानते हैं कि किस प्रकार के भोजन और रेशा फसलों को एक साथ एक जमीन के टुकड़े पर उगाया जाता है, जिससे वह जमीन कई वर्षों तक लगातार उपजाऊ बनी रहती है।
पुनः जंगल बनने के लिए छोड़ना: स्थानांतरीय जुताई (झूम कृषि) के शुरुआती रूप में, वे खेती के बाद उस जमीन के टुकड़े को कई वर्षों तक स्वाभाविक रूप से पुनः जंगल बनने के लिए छोड़ देते थे, जिससे प्राकृतिक संतुलन बना रहता था।
सतत उपयोग: वे वन्य संसाधनों का अतिदोहन नहीं करते, बल्कि केवल सामयिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं, जिससे संसाधन नवीनीकरण होते रहते हैं।
0 Comments