1. ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना और शोषण
* पृष्ठभूमि: भारत का गौरवशाली इतिहास था, जिसे 'विश्वगुरु' और 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था। मध्यकाल में मुगल शासन के बाद, 17वीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने व्यापार के उद्देश्य से भारत में प्रवेश किया।
* साम्राज्य का विस्तार: 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद, मुगल साम्राज्य कमजोर हो गया। कंपनी ने इस स्थिति का फायदा उठाकर 1801 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की और 1757 के प्लासी युद्ध के बाद राजनीतिक प्रभुत्व हासिल कर लिया।
* शोषण के प्रकार:
* आर्थिक शोषण: अंग्रेजों ने भारतीय कल-कारखानों और हस्तकला उद्योगों को नष्ट कर दिया। भारत से कच्चा माल सस्ते में ले जाकर ब्रिटेन में तैयार माल ऊँचे दामों पर बेचा, जिससे भारत का धन ब्रिटेन जाने लगा।
* सामाजिक शोषण: उन्होंने भारतीय धर्म और संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया और नस्ल के आधार पर भेदभाव किया (गोरे और काले का भेद)।
* राजनैतिक दमन: लॉर्ड लिटन की प्रतिक्रियावादी नीतियाँ और लॉर्ड डलहौज़ी का 'गोद निषेध कानून' जैसी नीतियों ने भारतीयों में असंतोष पैदा किया।
* राष्ट्रीय चेतना का पुनर्जागरण: लगभग 700 वर्षों की गुलामी और अंग्रेजों के दमन चक्र के कारण 19वीं शताब्दी में भारतीयों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत हुई।
2. राष्ट्रीय पुनर्जागरण के कारण
* भारत का गौरवशाली इतिहास: प्राचीन काल में भारत की भौगोलिक एकता और राजनीतिक सूत्र में बंधे होने की गौरवपूर्ण अनुभूति ने राष्ट्रवाद की भावना जगाई।
* अंग्रेजी राज का प्रभाव: अंग्रेजों के दमनकारी नीतियों के खिलाफ भारतीयों ने खुलकर विरोध किया।
* आधुनिक शिक्षा: लॉर्ड मैकाले की अंग्रेजी शिक्षा पद्धति ने एक नए शिक्षित वर्ग को जन्म दिया। इस वर्ग ने बेन्थम, मिल जैसे पाश्चात्य विचारकों के विचारों को पढ़ा और स्वतंत्रता व स्वशासन की भावना को समझा। अंग्रेजी भाषा ने पूरे देश के लोगों को एक दूसरे से जुड़ने में मदद की।
* संचार साधनों का विकास: रेलवे और सड़कों के जाल ने भारत को एक सूत्र में बाँध दिया। इससे साहित्य और विचारों का आदान-प्रदान आसान हो गया।
* प्रेस एवं समाचार पत्रों की भूमिका: 'इंडियन गजट', 'बंगाल गजट', 'संवाद कौमुदी' और 'मिरातुल अखबार' जैसे समाचार पत्रों ने लोगों में राष्ट्रीय भावनाओं का संचार किया। उदण्ड मार्तण्ड हिंदी का पहला समाचार पत्र था।
* भारतीय साहित्यकारों का योगदान: बंकिम चंद्र चटर्जी ने आनंद मठ और नील दर्पण जैसी रचनाओं के माध्यम से देशभक्ति और किसानों के शोषण को उजागर किया।
* तत्कालीन यूरोपीय आंदोलन: आयरलैंड, अमेरिका, इटली और जर्मनी के स्वतंत्रता संग्राम और एकीकरण आंदोलनों ने भारतीयों को प्रेरित किया।
* आर्थिक शोषण: अंग्रेजों का उद्देश्य भारत से अधिक से अधिक धन इकट्ठा करना था। धन निष्कासन का सिद्धांत इसी पर आधारित था।
* धर्म सुधार आंदोलनों का प्रभाव: राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद सरस्वती और स्वामी विवेकानंद जैसे समाज सुधारकों ने धार्मिक आडंबरों का विरोध कर समाज में समानता और राष्ट्रभक्ति की भावना को बढ़ावा दिया।
3. 1857 से 1857 तक के महत्वपूर्ण विद्रोह
* संन्यासी विद्रोह: बंगाल में अंग्रेजी शासन के खिलाफ संन्यासियों द्वारा किया गया विद्रोह। इसका उल्लेख बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंद मठ में है।
* संथाल विद्रोह: सिधू और कान्हू के नेतृत्व में राजमहल जिले के संथालों ने अंग्रेजों के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई।
* चुआर और कोल विद्रोह: मिदनापुर में चुआर जनजाति और छोटा नागपुर में कोल जनजाति ने भूमि कर और शोषण के खिलाफ विद्रोह किया।
* अहोम विद्रोह: असम में अंग्रेजों के खिलाफ गोमधर कुंवर के नेतृत्व में 1828 में विद्रोह हुआ।
* खासी विद्रोह: बंगाल के जैंतिया और गारो पहाड़ी क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ तीरत सिंह के नेतृत्व में 1833 में विरोध हुआ।
* भील विद्रोह: खान्देश के भीलों ने अंग्रेजों के शोषण के खिलाफ 1812 से 1846 तक आवाज उठाई।
* रामोसी विद्रोह: पश्चिमी घाट की जनजाति रामोसियों ने 1822 में चतर सिंह के नेतृत्व में विद्रोह किया।
* चंपारन सत्याग्रह: 1917 में महात्मा गांधी ने बिहार में नील उत्पादकों के शोषण के विरुद्ध यह आंदोलन चलाया।
* खेड़ा सत्याग्रह: 1919 में गांधीजी के नेतृत्व में गुजरात के किसानों ने मालगुजारी की माफी के लिए आंदोलन किया।
* विजयनगर और ट्रावनकोर का विद्रोह: सहायक संधि और शोषण के खिलाफ वहाँ के राजाओं ने विद्रोह किया।
* सैनिक विद्रोह: भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव, कम वेतन और एनफील्ड राइफल के कारतूसों पर गाय व सूअर की चर्बी की अफवाह ने 1857 के विद्रोह को जन्म दिया।
4. 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
* कारण: अंग्रेजों की दमनकारी नीतियाँ और शोषण के कारण जनता में गुस्सा भरा हुआ था। चर्बी वाले कारतूस ने चिंगारी का काम किया।
* प्रमुख कारण:
* राजनैतिक कारण: लॉर्ड डलहौजी का गोद निषेध कानून और राज्यों का विलय (झांसी, नागपुर, सतारा)।
* सामाजिक कारण: अंग्रेजों का भारतीयों के प्रति घृणा का व्यवहार और नस्लीय भेदभाव।
* धार्मिक कारण: ईसाई धर्म का प्रचार और धर्म परिवर्तन के प्रयास।
* आर्थिक कारण: धन निष्कासन और भारतीय उद्योगों का विनाश।
* सैनिक कारण: भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव और चर्बी वाले कारतूसों का उपयोग।
* विद्रोह का आरंभ: 29 मार्च 1857 को मंगल पांडे ने बैरकपुर में ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला किया। 6 अप्रैल को उन्हें फाँसी दे दी गई।
* नायक:
* बहादुर शाह जफर: विद्रोह का नेतृत्व।
* नानासाहब और तात्या टोपे: कानपुर।
* कुंवर सिंह: बिहार (जगदीशपुर)।
* ठाकुर कुशाल सिंह: राजस्थान (आउवा)।
* मेजर बर्टन: कोटा का पॉलिटिकल एजेंट।
* राजस्थान में विद्रोह:
* आउवा का विद्रोह: ठाकुर कुशाल सिंह के नेतृत्व में। चलो दिल्ली मारो फिरंगी का नारा दिया गया।
* कोटा में विद्रोह: मेजर बर्टन और उसके पुत्रों की हत्या कर दी गई।
* असफलता के कारण:
* संगठित योजना और साधनों का अभाव।
* अस्त्र-शस्त्र और धन की कमी।
* विद्रोह का सीमित क्षेत्र में होना।
* देशी रियासतों का अंग्रेजों का साथ देना।
* समय से पहले विद्रोह का शुरू होना (10 मई 1857)।
* महत्व और परिणाम:
* भारत का शासन कंपनी के हाथ से निकलकर ब्रिटिश क्राउन के हाथों में चला गया।
* इसने भविष्य के स्वतंत्रता आंदोलनों की नींव रखी।
* अंग्रेजों ने फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई।
5. 1857 के बाद के प्रमुख आंदोलन
* भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना: 1885 में ए.ओ. ह्यूम ने इसकी स्थापना की।
* कांग्रेस के चरण:
* उदारवादी युग (1885-1905): फिरोजशाह मेहता, दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले जैसे नेताओं ने प्रार्थना और निवेदन के माध्यम से अपनी माँगें रखीं।
* उग्रवादी युग (1905-1919): लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल (लाल, बाल, पाल) ने उग्र तरीकों से स्वराज्य की मांग की। तिलक ने "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" का नारा दिया।
* गांधी युग (1919-1947): महात्मा गांधी ने सत्याग्रह को अपना मुख्य हथियार बनाया।
* रौलेट एक्ट (1919): इसे 'काला कानून' कहा गया।
* जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियाँ चलाईं।
* असहयोग आंदोलन (1920): गांधीजी ने विदेशी वस्तुओं और सरकारी संस्थानों का बहिष्कार किया।
* सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930): गांधीजी ने नमक कानून तोड़कर आंदोलन शुरू किया।
* भारत छोड़ो आंदोलन (1942): कांग्रेस ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने की चुनौती दी।
* भारत की स्वतंत्रता: 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
6. राजस्थान में किसान एवं जनजातीय आंदोलन
* किसान आंदोलन:
* बिजोलिया आंदोलन: विजय सिंह पथिक के नेतृत्व में हुआ। किसानों से 84 प्रकार के कर (लागतें) लिए जाते थे।
* बेगूं आंदोलन: रामनारायण चौधरी ने इसका नेतृत्व किया।
* बूंदी किसान आंदोलन: पं. नयनूराम शर्मा के नेतृत्व में। नानकजी भील शहीद हुए।
* अलवर किसान आंदोलन: नीमूचाणा हत्याकांड हुआ, जिसे गांधीजी ने 'जलियांवाला बाग से भी वीभत्स' बताया।
* जनजातीय आंदोलन:
* भील आंदोलन: गोविंद गुरु ने 1903 में सम्प सभा की स्थापना की। मानगढ़ पहाड़ी हत्याकांड में कई आदिवासी शहीद हुए। मोतीलाल तेजावत ने भी आदिवासियों के लिए काम किया।
* मीणा आंदोलन: जयपुर रियासत में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के खिलाफ हुआ।
7. प्रजामंडल आंदोलन
* पूरे देश में बढ़ती राष्ट्रवाद की भावना का प्रभाव राजस्थान पर भी पड़ा।
* राज्यों के शोषण के विरुद्ध विभिन्न रियासतों में प्रजामंडल आंदोलनों की शुरुआत हुई, जिन्होंने स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की मांग की।
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