कक्षा दसवीं सामाजिक पाठ 4 स्वर्णिम भारत: एक संक्षिप्त अवलोकन (प्रारम्भ से 1206 ई.) पाठ के नोट्स


भारतीय इतिहास, संस्कृति और ज्ञान का एक समृद्ध खजाना है। इस कालखंड में भारतीय संस्कृति का आधार सिंधु-सरस्वती सभ्यता से लेकर गुप्त साम्राज्य तक विकसित हुआ। महाजनपद काल से लेकर वर्धन वंश तक का इतिहास, बाहरी आक्रमणों और भारतीय संस्कृति में उनके आत्मसातीकरण को समझने में मदद करता है।
महाजनपद काल (छठी से चौथी शताब्दी ईसा पूर्व)
इस युग में भारत में कोई केंद्रीय सत्ता नहीं थी और छोटे-छोटे राज्य आपस में वर्चस्व के लिए लड़ते रहते थे। इन शक्तिशाली राज्यों को महाजनपद कहा गया।
बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तरनिकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवतीसूत्र' में 16 महाजनपदों का उल्लेख है। इनमें से 4 प्रमुख थे: मगध, कौशल, वत्स और अवन्ति।
16 महाजनपद और उनकी विशेषताएँ
 * अंग: राजधानी चम्पानगरी, जिसे बिम्बिसार ने मगध में मिला लिया।
 * मगध: सबसे शक्तिशाली महाजनपद। इसकी प्राचीन राजधानी राजगृह थी, बाद में पाटलिपुत्र बनी।
 * काशी: राजधानी वाराणसी। इसे बाद में कोशल और फिर मगध ने अपने में मिला लिया।
 * वत्स: राजधानी कौशाम्बी (इलाहाबाद के पास)। प्रसिद्ध राजा उदयन थे।
 * कौशल: राजधानी श्रावस्ती। बुद्ध के समय यहां के राजा प्रसेनजित थे।
 * शूरसेन: राजधानी मथुरा। यहां यदु (यादव) वंश का शासन था।
 * पांचाल: दो भागों में बंटा था। उत्तरी पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र और दक्षिणी की काम्पिल्य थी।
 * कुरु: दिल्ली-मेरठ क्षेत्र। राजधानी इंद्रप्रस्थ थी।
 * मत्स्य: वर्तमान राजस्थान के जयपुर, अलवर और भरतपुर में। राजधानी विराटनगर थी।
 * चेदि: आधुनिक बुंदेलखंड में। राजधानी शक्तमती थी।
 * अवन्ति: पश्चिम भारत में मालवा और मध्य प्रदेश में। उत्तरी राजधानी उज्जयिनी और दक्षिणी माहिष्मती थी।
 * गांधार: पाकिस्तान के पेशावर और रावलपिंडी में। राजधानी तक्षशिला थी।
 * कम्बोज: गांधार के पास। राजधानी हाटक या राजपुर थी।
 * अश्मक: दक्षिण भारत में गोदावरी नदी के तट पर। राजधानी पोटन या पोटलि थी।
 * वज्जि: आठ गणराज्यों का समूह। सबसे प्रसिद्ध लिच्छवि थे, जिनकी राजधानी वैशाली थी।
 * मल्ल: गोरखपुर के पास। दो भागों की राजधानियाँ कुशीनारा और पावा थीं।
राजस्थान के प्रमुख जनपद
 * जांगल: महाभारत काल में यह क्षेत्र कुरु-जांगल और मद्र-जांगल कहलाता था। इसकी राजधानी अहिच्छत्रपुर (नागौर) थी।
 * मत्स्य: जयपुर, अलवर और भरतपुर के क्षेत्रों में। राजधानी विराटनगर थी।
 * शूरसेन: भरतपुर, धौलपुर और करौली के क्षेत्र। राजधानी मथुरा थी।
 * शिवि: राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में। राजधानी शिवपुर थी।
मगध साम्राज्य का उदय एवं विस्तार
मगध सभी महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली था।
 * हर्यक वंश: संस्थापक बिम्बिसार थे। इसके बाद अजातशत्रु और उदायिन प्रमुख शासक हुए।
 * शिशुनाग वंश: हर्यक वंश के बाद आया। कालाशोक के समय द्वितीय बौद्ध संगीति हुई।
 * नंद वंश: संस्थापक महापद्म नंद थे। अंतिम शासक धनानंद था, जिसे चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की मदद से हराकर मौर्य वंश की स्थापना की।
मौर्य वंश (322 ईसा पूर्व - 184 ईसा पूर्व)
मौर्यों ने भारत को राजनीतिक रूप से एक किया। इस वंश के प्रमुख शासक चंद्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार और अशोक थे।
 * चंद्रगुप्त मौर्य (322 - 298 ईसा पूर्व):
   * चाणक्य की सहायता से नंद वंश का अंत किया।
   * यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को हराया और संधि की।
   * दक्षिण भारत तक साम्राज्य का विस्तार किया।
   * जीवन के अंतिम समय में जैन धर्म अपनाया और सल्लेखना द्वारा प्राण त्यागे।
 * बिन्दुसार (298 - 273 ईसा पूर्व):
   * चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र। यूनानी इसे अमित्रघात कहते थे।
 * अशोक (273 - 232 ईसा पूर्व):
   * विश्व के महानतम सम्राटों में से एक।
   * कलिंग युद्ध के भीषण नरसंहार ने उनका हृदय परिवर्तन कर दिया, और उन्होंने धर्म विजय का मार्ग अपनाया।
   * बौद्ध धर्म को राजकीय संरक्षण दिया और तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन करवाया।
   * धम्म (धर्म) के प्रचार के लिए धम्म महामात्र नामक अधिकारी नियुक्त किए।
   * अपने पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए श्रीलंका भेजा।
मौर्य साम्राज्य का पतन
अयोग्य उत्तराधिकारी और अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या के कारण मौर्य साम्राज्य का पतन हुआ।
शुंग वंश
 * संस्थापक पुष्यमित्र शुंग था। उसने अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या करके शुंग वंश की स्थापना की।
 * पुष्यमित्र ने दो अश्वमेध यज्ञ करवाए।
 * अंतिम शासक देवभूति था, जिसकी हत्या उसके मंत्री वासुदेव कण्व ने कर दी।
सातवाहन वंश
 * संस्थापक सिमुक था। ये महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के क्षेत्र में फैले थे।
 * सबसे प्रतापी शासक गौतमीपुत्र सातकर्णी था, जिसने शक शासक नहपान को हराया।
 * इस वंश के राजाओं के नाम के साथ उनकी माता का नाम जुड़ा होता था, जिससे मातृसत्तात्मक व्यवस्था का पता चलता है।
 * अंतिम महान शासक यज्ञश्री शातकर्णी था।
गुप्त वंश (319 ईसवी - 550 ईसवी)
गुप्त काल को प्राचीन भारत का स्वर्णयुग कहा जाता है।
 * श्रीगुप्त: गुप्त वंश का संस्थापक था।
 * चंद्रगुप्त प्रथम: महाराजाधिराज की उपाधि धारण की और गुप्त संवत की शुरुआत की।
 * समुद्रगुप्त (335 - 380 ईसवी):
   * भारत का एक महान विजेता। प्रयाग प्रशस्ति से उसकी विजयों की जानकारी मिलती है।
   * 'कविराज' की उपाधि धारण की।
 * चंद्रगुप्त द्वितीय 'विक्रमादित्य' (380 - 412 ईसवी):
   * शक शासकों पर विजय प्राप्त कर विक्रमादित्य की उपाधि धारण की।
   * चीनी यात्री फाह्यान इन्हीं के काल में भारत आया था।
   * इनके दरबार में 'नवरत्न' थे, जिनमें महाकवि कालिदास प्रमुख थे।
 * कुमारगुप्त: नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की।
 * स्कंदगुप्त: हूणों के आक्रमण का सफलतापूर्वक सामना किया।
वर्धन वंश (पुष्यभूति वंश)
 * संस्थापक प्रभाकरवर्धन थे।
 * उनके पुत्र राज्यवर्धन के बाद हर्षवर्धन (606 - 647 ईसवी) शासक बने।
 * हर्षवर्धन ने अपनी बहन राज्यश्री को बचाया और कन्नौज का शासन संभाला।
 * दक्षिण भारत में चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय से युद्ध में पराजित हुए। इसकी जानकारी एहोल अभिलेख से मिलती है।
 * चीनी यात्री ह्वेनसांग उनके शासनकाल में भारत आया था।
 * हर्ष स्वयं एक लेखक थे और उन्होंने नागानंद, प्रियदर्शिका और रत्नावली नामक नाटक लिखे।
 * उनकी राज्यसभा में बाणभट्ट और मयूरभट्ट जैसे विद्वान थे।
बाह्य आक्रमण एवं आत्मसातीकरण
मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत में राजनीतिक अस्थिरता का दौर आया, जिसका लाभ उठाकर यूनानी, शक, पार्थियन और कुषाण जैसी विदेशी जातियों ने भारत पर आक्रमण किए।
 * शक:
   * मध्य एशिया के निवासी थे।
   * उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शकों को हराया, और इस विजय की स्मृति में 57 ईसा पूर्व में विक्रम संवत की शुरुआत हुई।
   * सबसे प्रसिद्ध शक शासक रुद्रदामन थे, जिन्होंने संस्कृत भाषा में जूनागढ़ अभिलेख जारी किया।
 * हूण:
   * मध्य एशिया से आए।
   * स्कंदगुप्त ने हूणों को पराजित किया। बाद में तोरमाण और मिहिरकुल जैसे हूण शासकों ने भारत पर आक्रमण किए।
 * कुषाण:
   * सबसे प्रमुख विदेशी आक्रमणकारी।
   * संस्थापक कुजुल कडफिसस था।
   * सबसे महान शासक कनिष्क था। उसने 78 ईसवी में शक संवत की शुरुआत की।
   * वह बौद्ध धर्म का प्रबल समर्थक था और कश्मीर में चौथी बौद्ध संगीति का आयोजन करवाया।
आत्मसातीकरण
भारतीय संस्कृति ने इन विदेशी आक्रमणकारियों को अपने में आत्मसात कर लिया। ये जातियां धीरे-धीरे भारतीय समाज का हिस्सा बन गईं।
भारतीय संस्कृति का 'जियो और जीने दो' का सिद्धांत और उसकी उदारता ने बाहरी संस्कृतियों को अपने में समाहित कर लिया।

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