कक्षा दसवीं सामाजिक अध्याय 5 संघर्षकालीन भारत (712 ई. - 1757 ई.) पाठ के नोट्स



भारत ने प्राचीन काल से ही विदेशी आक्रमणों का सामना किया है। हिमालय और समुद्र से घिरे होने के बावजूद, पश्चिमोत्तर सीमा विदेशी घुसपैठ का आसान रास्ता बन गई। इस क्षेत्र में राजनीतिक एकता की कमी ने विदेशी आक्रमणों को सफल बनाया। यह अध्याय 712 ई. में पहले मुस्लिम आक्रमण से शुरू होकर मुगलों और मराठा शासकों के प्रतिरोध और सहयोग तक का वर्णन करता है। इसमें विजयनगर और बहमनी जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों का भी संक्षिप्त इतिहास है।
5.1 अरब आक्रमण
 * पृष्ठभूमि: हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद भारत में राजनीतिक एकता खत्म हो गई। सिंध एक मजबूत राज्य था जिसने लंबे समय तक अरबों का विरोध किया। अरबों का मकसद भारत की दौलत लूटना, धर्म का प्रचार करना और अपना साम्राज्य बढ़ाना था।
 * प्रारंभिक प्रयास: खलीफा उमर के समय (636 ई.) में अरबों ने मुंबई के पास थाना पर हमला किया, लेकिन असफल रहे।
 * मुहम्मद बिन कासिम का आक्रमण: 711-12 ई. में, सिंध के राजा दाहिर सेन ने उन समुद्री लुटेरों को पकड़ने से इनकार कर दिया, जिन्होंने अल हज्जाज के कीमती उपहार लूटे थे। इससे अल हज्जाज ने अपने भतीजे मुहम्मद बिन कासिम को सिंध पर आक्रमण करने के लिए भेजा।
 * रावरे का युद्ध (712 ई.): कासिम और राजा दाहिर के बीच युद्ध हुआ। दाहिर बहादुरी से लड़े, लेकिन हाथी पर बैठे दाहिर को एक तीर लगा और उनकी मृत्यु हो गई। दाहिर की पत्नी, रानी बाई ने जौहर किया। दाहिर की बेटियों, सूर्यदेवी और परमलदेवी ने कासिम से बदला लिया।
5.2 दिल्ली सल्तनत (1206 ई. - 1526 ई.)
तुर्की आक्रमणों ने 1206 ई. में दिल्ली सल्तनत की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। इसमें पाँच प्रमुख राजवंश थे:
 * 1. गुलाम वंश (1206 ई. - 1290 ई.)
   * कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210 ई.): मुहम्मद गौरी का दास था। उसने लाहौर को राजधानी बनाया। उदारता के कारण उसे लाख बख्श (लाखों का दान देने वाला) कहा जाता था। उसने 'कुवत-उल-इस्लाम' मस्जिद और 'अढ़ाई दिन का झोपड़ा' बनवाया, और कुतुबमीनार का निर्माण शुरू करवाया। चौगान खेलते हुए घोड़े से गिरकर उसकी मृत्यु हो गई।
   * इल्तुतमिश (1211-1236 ई.): ऐबक का दामाद और वास्तविक संस्थापक। उसने राजधानी दिल्ली को बनाया। मंगोल आक्रमण से भारत को बचाया। उसने 'चालीसा' (तुर्कान-ए-चहलगानी) नामक 40 तुर्की सरदारों का एक दल बनाया। उसने कुतुबमीनार का निर्माण पूरा करवाया।
   * रजिया सुल्तान (1236-1240 ई.): इल्तुतमिश की पुत्री और भारत की पहली महिला मुस्लिम शासक। उसके पुरुषोचित व्यवहार और गैर-तुर्की अधिकारियों की नियुक्ति से तुर्क सरदार नाराज थे। 1240 ई. में उसकी मृत्यु हो गई।
   * बलबन (1266-1287 ई.): उसने 'रक्त और लोह' की नीति अपनाई। सुल्तान की सर्वोच्चता स्थापित की। उसने दरबार में 'सिजदा' और 'पैबोस' की प्रथा शुरू की और चालीसा का विनाश किया।
 * 2. खिलजी वंश (1290 ई. - 1320 ई.)
   * जलालुद्दीन फिरोज खिलजी (1290-1296 ई.): खिलजी वंश का संस्थापक।
   * अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.): दिल्ली के सबसे योग्य सुल्तानों में से एक। उसने चार कानून बनाए, स्थायी सेना रखी, और घोड़े दागने और सैनिकों का हुलिया रखने की प्रथा शुरू की। उसने बाज़ार और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बाजार नियंत्रण नीति लागू की। वह गुजरात, रणथंभौर, चित्तौड़गढ़, और जालोर को जीतकर दक्षिण भारत तक पहुँचा। उसके समय के महान कवि अमीर खुसरो थे।
 * 3. तुगलक वंश (1320 ई. - 1414 ई.)
   * गयासुद्दीन तुगलक (1320-1325 ई.): तुगलक वंश का संस्थापक।
   * मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351 ई.): भारतीय इतिहास का सबसे विवादास्पद शासक। उसकी योजनाएँ, जैसे राजधानी परिवर्तन (दिल्ली से देवगिरी), सांकेतिक मुद्रा, आदि असफल रहीं।
   * फिरोज तुगलक (1351-1388 ई.): उसने 5 प्रमुख नहरों और कई शहरों का निर्माण करवाया (फतेहाबाद, हिसार, जौनपुर)। उसने 'जजिया' को एक अलग कर बनाया।
 * 4. सैय्यद वंश (1414 ई. - 1451 ई.)
   * खिज्र खां ने तैमूर के प्रतिनिधि के रूप में इस वंश की स्थापना की।
 * 5. लोदी वंश (1451 ई. - 1526 ई.)
   * बहलोल लोदी (1451-1489 ई.): दिल्ली सल्तनत का पहला अफगान (पठान) राज्य का संस्थापक।
   * सिकंदर लोदी (1489-1517 ई.): उसने 1506 में आगरा शहर की स्थापना की। वह 'गुलरुखी' उपनाम से कविताएँ लिखता था।
   * इब्राहिम लोदी (1517-1526 ई.): 1526 में, पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने उसे हरा दिया। इससे दिल्ली सल्तनत समाप्त हुई और मुगल वंश की नींव पड़ी।
5.3 मुगलकालीन भारत (1526 ई. - 1757 ई.)
 * बाबर (1526-1530 ई.): मुगल साम्राज्य का संस्थापक। उसने पानीपत के पहले युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराया। 1527 में खानवा के युद्ध में राणा सांगा को हराया और गाजी की उपाधि ली। उसने अपनी आत्मकथा 'बाबरनामा' लिखी।
 * हुमायूँ (1530-1556 ई.): बाबर का पुत्र। उसे शेरशाह सूरी ने दो बार हराया, जिससे उसे 15 साल तक निर्वासन में रहना पड़ा। 1555 में उसने दोबारा सिंहासन प्राप्त किया।
 * शेरशाह सूरी (1540-1545 ई.): सूर साम्राज्य का संस्थापक। उसने 'सड़क-ए-आजम' (जिसे आज ग्रैंड ट्रंक रोड कहते हैं) बनवाई। उसने रुपया नामक चांदी का सिक्का चलाया। उसने सासाराम, बिहार में अपना मकबरा बनवाया।
 * अकबर (1556-1605 ई.): हुमायूँ का पुत्र। 1556 में पानीपत के द्वितीय युद्ध में उसने हेमू को हराया। उसने राजपूत शासकों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित किए। हल्दीघाटी का युद्ध (1576 ई.) में उसने महाराणा प्रताप को हराया नहीं, बल्कि उन्हें मेवाड़ के गौरव की रक्षा करने के लिए मजबूर किया। उसने फतेहपुर सीकरी में इबादतखाने का निर्माण करवाया।
 * जहाँगीर (1605-1627 ई.): अकबर का पुत्र। उसका काल चित्रकला का स्वर्णयुग माना जाता है। उसने अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-जहाँगीरी' लिखी।
 * शाहजहाँ (1627-1658 ई.): जहाँगीर का पुत्र। उसका काल वास्तुकला का स्वर्णयुग कहलाता है। उसने ताजमहल, मोती मस्जिद, और लाल किला जैसी भव्य इमारतें बनवाईं।
 * औरंगजेब (1658-1707 ई.): शाहजहाँ का पुत्र। उसने अपने भाइयों को हराकर और अपने पिता को कैद कर सिंहासन पर कब्जा किया। उसने आलमगीर की उपाधि ली। उसकी धार्मिक असहिष्णुता की नीतियों से विद्रोह हुए। 1707 में उसकी मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य का पतन शुरू हो गया।
मुगल प्रशासन
 * शासन का केंद्र सम्राट था।
 * वकील-ए-मुतलक प्रधानमंत्री था।
 * मीर बख्शी सैन्य विभाग का प्रमुख था।
 * प्रशासनिक इकाइयों को सूबा (प्रांत) कहा जाता था, जिसका प्रमुख सूबेदार होता था।
 * सेना का संगठन मनसबदारी प्रणाली पर आधारित था।
राजस्थान में मुस्लिम सत्ता का प्रतिरोध और सहयोग
 * राव शेखा: शेखावाटी क्षेत्र का नामकरण उन्हीं के नाम पर हुआ। उन्होंने पन्नी पठानों को जागीरें दी और उन्हें अपनी सेना में भर्ती किया।
 * हम्मीर देव चौहान: रणथंभौर के शासक। अपनी हठ के लिए प्रसिद्ध थे। 1301 में अलाउद्दीन खिलजी ने उन पर हमला किया। हम्मीर के दो सेनानायकों, रतिपाल और रणमल के विश्वासघात के कारण, हम्मीर की रानी और पुत्री ने जौहर किया।
 * महाराणा प्रताप: मेवाड़ के महान योद्धा। उन्होंने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की। हल्दीघाटी के युद्ध (1576 ई.) में उन्होंने मुगलों से युद्ध किया, लेकिन अकबर उन्हें पकड़ नहीं सका। दिवेर के युद्ध (1582 ई.) में उन्होंने मुगलों को हराया।
 * राव चंद्रसेन: जोधपुर के शासक। वह 'मारवाड़ का प्रताप' कहलाते हैं क्योंकि उन्होंने मुगलों की अधीनता स्वीकार करने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना।
 * बीकानेर के रायसिंह: उन्होंने अकबर और जहाँगीर दोनों की सेवा की। अकबर ने उन्हें जोधपुर का अधिकारी बनाया और 'राय' की उपाधि दी। उन्होंने जूनागढ़ (बीकानेर) दुर्ग का निर्माण करवाया।
 * सवाई जयसिंह: आमेर के शासक। वह एक विद्वान और कूटनीतिज्ञ थे। उन्होंने 5 शहरों (जयपुर, दिल्ली, मथुरा, बनारस, उज्जैन) में वेधशालाएं (जंतर-मंतर) बनवाईं।
मराठों का इतिहास
 * शिवाजी (1627-1680 ई.): मराठा साम्राज्य के संस्थापक। उनका जन्म पूना के पास शिवनेर के किले में हुआ था। उन्होंने अपनी माता जीजाबाई से साहस और देशभक्ति सीखी। उन्होंने गुरिल्ला युद्ध पद्धति अपनाई।

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