परिचय
दर्शन, मानव अनुभवों की बौद्धिक व्याख्या और मूल्यांकन का प्रयास है। यह आत्मा, विश्व, ईश्वर और सत्य जैसे मौलिक प्रश्नों का समाधान खोजने की कोशिश है। विश्व के प्रमुख दर्शनों में वैदिक दर्शन, जैन दर्शन, बौद्ध दर्शन, पारसी दर्शन, यहूदी दर्शन, ईसाई दर्शन और इस्लामिक दर्शन शामिल हैं।
2.1 वैदिक दर्शन
- वेद: 'विद' धातु से बना, जिसका अर्थ है 'ज्ञान'। इन्हें अपौरुषेय (ईश्वर द्वारा रचित) माना जाता है।
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वैदिक साहित्य के अंग:
- वेद: चार प्रमुख वेद हैं - ऋग्वेद (सबसे प्राचीन, ज्ञान), सामवेद (उपासना, संगीत), यजुर्वेद (यज्ञ-सम्बन्धी विधि-विधान), और अथर्ववेद (सुखी जीवन के अनुष्ठान)।
- ब्राह्मण ग्रंथ: यज्ञों की क्रिया और विधि को समझाने के लिए रचित।
- आरण्यक: वनों में पढ़ाए जाने वाले ग्रंथ, जिनमें चिंतन को प्रधानता दी गई।
- उपनिषद (वेदांत): वैदिक साहित्य का अंतिम भाग। 108 माने गए हैं, ये पूर्णतः दार्शनिक ग्रंथ हैं।
- वेदांग: वेदों को समझने में सहायता के लिए रचित छह अंग - शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद, और ज्योतिष।
वैदिक दर्शन की प्रमुख विशेषताएँ
- ऋत की धारणा: संपूर्ण जगत और प्रकृति को एक नैतिक व्यवस्था 'ऋत' द्वारा नियंत्रित माना जाता है।
- कर्म सिद्धांत: व्यक्ति के कर्मों के आधार पर पुनर्जन्म होता है।
- वैदिक देवी-देवता: प्रकृति की विभिन्न शक्तियों को देवता माना गया, जैसे इंद्र, वरुण, अग्नि। यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म बताया गया है।
- आश्रम व्यवस्था: मनुष्य के जीवन को 100 वर्ष मानकर चार भागों (आश्रमों) में बांटा गया है: ब्रह्मचर्य, गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थ, और संन्यास।
- पुरुषार्थ: जीवन के चार लक्ष्य हैं - धर्म (कर्तव्यपालन), अर्थ (धन), काम (भोग), और मोक्ष (परम लक्ष्य)।
2.2 जैन दर्शन
- तीर्थंकर: जैन धर्म के विकास में तीर्थंकरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पहले तीर्थंकर ऋषभदेव और 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी थे।
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महावीर स्वामी:
- जन्म 599 ई.पू. के लगभग वैशाली के निकट कुण्डग्राम में।
- बचपन का नाम वर्धमान।
- 30 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद कैवल्य (सर्वोच्च ज्ञान) प्राप्त किया।
- 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी में निर्वाण प्राप्त हुआ।
जैन धर्म की शिक्षाएँ
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त्रिरत्न: मोक्ष प्राप्त करने के तीन उपाय:
- सम्यक् ज्ञान: वास्तविकता की पहचान।
- सम्यक् दर्शन: जैन तीर्थंकरों में दृढ़ विश्वास।
- सम्यक् चरित्र: उच्च और पवित्र आचरण।
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पंच महाव्रत: आत्मा को भौतिक बंधनों से मुक्त करने के लिए पाँच सिद्धांत:
- सत्य: हमेशा सच बोलना।
- अहिंसा: मन, वचन, और कर्म से हिंसा न करना।
- अस्तेय: चोरी न करना।
- अपरिग्रह: किसी भी प्रकार की संपत्ति जमा न करना।
- ब्रह्मचर्य: सभी वासनाओं का त्याग।
- स्यादवाद (अनेकांतवाद): यह मान्यता कि सत्य के प्रति प्रत्येक व्यक्ति का दृष्टिकोण अलग होता है। आंशिक ज्ञान ही सभी विवादों का कारण है।
2.3 बौद्ध दर्शन
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महात्मा बुद्ध:
- जन्म 563 ई.पू. में कपिलवस्तु के लुम्बिनी वन में।
- बचपन का नाम सिद्धार्थ।
- 29 वर्ष की आयु में गृह त्याग दिया (यह घटना महाभिनिष्क्रमण कहलाती है)।
- गया में निरंजना नदी के तट पर बोधिवृक्ष के नीचे सत्यज्ञान प्राप्त किया, जिसके बाद वे बुद्ध कहलाए।
- सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया, जिसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहते हैं।
- 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया।
बौद्ध धर्म की शिक्षाएँ
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चार आर्य सत्य:
- दुःख: संसार दुखों से भरा है।
- दुःख का कारण: सभी दुखों का कारण तृष्णा (लालसा) है।
- दुःख दमन: तृष्णा का विनाश करने से दुःख समाप्त हो सकते हैं।
- दुःख निरोध मार्ग: दुखों को खत्म करने का मार्ग अष्टांगिक मार्ग है।
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अष्टांगिक मार्ग:
- सम्यक् दृष्टि
- सम्यक् संकल्प
- सम्यक् वाणी
- सम्यक् कर्म
- सम्यक् आजीविका
- सम्यक् व्यायाम
- सम्यक् स्मृति
- सम्यक् समाधि
- निर्वाण: जीवन का परम लक्ष्य। इसका अर्थ है 'बुझ जाना' या शांत हो जाना, जिससे व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।
2.4 पारसी दर्शन
- संस्थापक: संत जरथुष्ट्र।
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शिक्षाएँ:
- शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है।
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संसार में दो शक्तियां हैं:
- अहुरमजदा: दैवीय शक्ति, जिसने संसार की रचना की।
- अहरिमन: दानवीय शक्ति, जो शैतान बनाती है।
- अंतिम विजय हमेशा अहुरमजदा की होती है।
- पवित्र ग्रंथ: अवेस्ता-ए-जेद।
- पूजा स्थल: अग्नि मंदिर।
2.5 यहूदी दर्शन
- एकेश्वरवाद: यहूदी धर्म एक ही ईश्वर यहोवा में विश्वास रखता है।
- पैगम्बर: मूसा को मुख्य पैगम्बर मानते हैं।
- धर्माचरण: 10 धर्म सूत्र (कमांडमेंट्स) का पालन करते हैं, जैसे माता-पिता का सम्मान करना और चोरी नहीं करना।
- पूजा स्थल: सिनागॉग कहलाते हैं।
- पवित्र ग्रंथ: तोरा प्रमुख है।
2.6 ईसाई दर्शन
- संस्थापक: ईसा मसीह।
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शिक्षाएँ:
- ईश्वर एक है और सभी प्राणी उसकी दृष्टि में समान हैं।
- ईश्वर का राज्य हर इंसान के भीतर है, जिसे प्रेम, सेवा और अहिंसा से पाया जा सकता है।
- धन-दौलत ईश्वर के राज्य में जाने में बाधक है।
- "पाप से घृणा करो, पापी से नहीं।"
- पवित्र ग्रंथ: बाइबिल।
2.7 इस्लामिक दर्शन
- संस्थापक: हजरत मुहम्मद साहब।
- उदय: 7वीं शताब्दी में अरब में हुआ।
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शिक्षाएँ:
- अल्लाह (ईश्वर) के सिवाय कोई दूसरा ईश्वर नहीं है और मुहम्मद उसके पैगम्बर (दूत) हैं।
- यह शिक्षा उन्हें हिरा नामक गुफा में मिली।
- पवित्र ग्रंथ: कुरान।
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पाँच धार्मिक कृत्य:
- कलमा पढ़ना।
- दिन में पाँच बार नमाज पढ़ना।
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