गृह विज्ञान "भोजन तथा उसके पोषक तत्व" नोट्स

 
भोजन तथा उसके पोषक तत्व
2.1 भोजन तथा स्वस्थ जीवन में इसका महत्व
 * भूख और ऊर्जा: भोजन भूख मिटाता है और दैनिक कार्यों के लिए ऊर्जा देता है।
 * सामाजिक भूमिका: सामाजिक अवसरों (जैसे मेहमान नवाज़ी) में महत्वपूर्ण।
 * भावनात्मक संबंध: घर के खाने की याद आना भावनात्मक जुड़ाव दर्शाता है।
 * अन्य कार्य:
   * कार्य करने के लिए ऊर्जा: चलने, खेलने, खाने और सभी गतिविधियों के लिए आवश्यक।
   * ऊतकों का विकास और निर्माण: नई कोशिकाओं के निर्माण और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत के लिए।
   * रोगों से लड़ने की शक्ति: शरीर को रोगों से बचाता है और बीमारी से उबरने में मदद करता है।
   * शारीरिक क्रियाओं को सामान्य बनाए रखना: विश्राम के दौरान भी (हृदय, पाचन, श्वसन) अंगों के सुचारु कार्य के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
   * भूख को तृप्त करना: शारीरिक और मनोवैज्ञानिक संतुष्टि प्रदान करता है।
   * सामाजिक समारोह: लोगों को एकजुट करता है, आराम और खुशनुमा माहौल बनाता है।
   * मनोवैज्ञानिक कार्य: सुरक्षा, प्यार और अपनेपन की भावनात्मक ज़रूरतों को पूरा करता है; परिचित भोजन सुरक्षा की भावना देता है; भोजन बांटना मित्रता दर्शाता है।
2.2 पोषण तथा पोषक तत्व
 * पोषण: वह विज्ञान जो बताता है कि शरीर में भोजन का क्या होता है (पाचन, उपयोग, विकास)।
 * पोषक तत्व: भोजन में मौजूद अदृश्य रासायनिक घटक जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक हैं।
 * सामान्य पोषक तत्व:
   * कार्बोहाइड्रेट
   * प्रोटीन
   * वसा
   * विटामिन
   * खनिज
   * रेशे (फाइबर)
   * पानी
2.3 विभिन्न पोषक तत्व और उनके स्रोत
2.3.1 कार्बोहाइड्रेट
 * कार्य: शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं (ईंधन के समान)।
 * प्रकार:
   * शर्करा (साधारण कार्बोहाइड्रेट): फल, शहद, चीनी।
   * स्टार्च (जटिल शर्करा): अनाज (गेहूँ, चावल, बाजरा, मक्का), आलू, शकरकंदी। पाचन के बाद ग्लूकोज में टूटता है।
 * ऊर्जा: 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट = 4 किलो कैलोरी।
 * दैनिक आवश्यकता: वयस्क को प्रतिदिन 400-420 ग्राम।
 * अन्य कार्य: भोजन की मात्रा बढ़ाता है, प्रोटीन को अन्य कार्य करने के लिए मुक्त करता है, भोजन को स्वादिष्ट बनाता है।
2.3.2 प्रोटीन
 * कार्य:
   * मांसपेशियों के निर्माण और निष्क्रिय/क्षतिग्रस्त कोशिकाओं व ऊतकों के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक।
   * घावों को भरने में सहायक।
   * रक्त, एंजाइम और हार्मोन के निर्माण में सहायक।
 * ऊर्जा: 1 ग्राम प्रोटीन = 4 किलो कैलोरी।
 * दैनिक आवश्यकता: वयस्क को शरीर के प्रति किलोग्राम भार के लिए 1 ग्राम (उदा. 52 किग्रा वजन वाले व्यक्ति को 52 ग्राम)।
 * स्रोत:
   * पशु स्रोत: मांस, अंडे, मछली, मुर्गी, दूध, दही, पनीर।
   * पौधा स्रोत: सभी दालें, गेहूँ, मटर, सोयाबीन, मूंगफली।
2.3.3 वसा (Fats)
 * ऊर्जा: 1 ग्राम वसा = 9 किलो कैलोरी (कार्बोहाइड्रेट से अधिक)।
 * अत्यधिक सेवन: मोटापे का कारण बन सकता है।
 * दैनिक आवश्यकता: वयस्क को प्रतिदिन लगभग 30 ग्राम (2 छोटे चम्मच)।
 * कार्य:
   * ऊर्जा प्रदान करते हैं (ऊर्जा के संग्रहीत स्रोत)।
   * शरीर को गर्म रखती है।
   * वसा में घुलनशील विटामिन (A, D, E, K) के उपयोग में सहायक।
   * शरीर के नाजुक अंगों (हृदय, लीवर) और कंकाल/मांसपेशियों को सुरक्षा प्रदान करती है।
   * भोजन को स्वादिष्ट बनाती है।
 * स्रोत: मक्खन, घी, मूंगफली का तेल, नारियल का तेल, वनस्पति, तला हुआ भोजन, चॉकलेट, बिस्कुट, पेस्ट्री।
2.3.4 खनिज (Minerals)
 * उपस्थिति: सभी शारीरिक ऊतकों और तरल पदार्थों में।
 * प्रकार:
   * मैक्रो/प्रमुख खनिज: शरीर में बड़ी मात्रा में (जैसे कैल्शियम, फास्फोरस – हड्डियों और दाँतों में)।
   * सूक्ष्म खनिज: शरीर में कम मात्रा में (जैसे लौह, आयोडीन)।
 * मुख्य कार्य:
   * शरीर का विकास और हड्डियों को शक्ति प्रदान करना।
   * शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखना।
   * मांस-पेशियों का संकुचन।
   * तंत्रिकाओं की कार्यप्रणाली को सामान्य रखना।
   * आवश्यकता पड़ने पर रक्त के बहाव को रोकना।
क) कैल्शियम (CALCIUM)
 * कार्य:
   * हड्डियों के विकास और मजबूती में सहायक।
   * दाँतों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।
   * रक्त का थक्का जमने में सहायक (जीवन रक्षक कार्य)।
   * मांसपेशियों को गतिशील बनाए रखने में सहायक।
 * विशेष आवश्यकता: बचपन में (इष्टतम विकास), गर्भवती महिलाओं में (भ्रूण के विकास के लिए), बुजुर्गों में (अवशोषण क्षमता कम होने के कारण)।
 * स्रोत: दूध और उसके उत्पाद (पनीर, दही, लस्सी, छाछ), हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी, कड़ीपत्ता, हरा धनिया)।
ख) लौह (IRON)
 * कार्य: रक्त में हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए आवश्यक, जो ऑक्सीजन को शरीर के सभी भागों तक पहुँचाता है।
 * विशेष आवश्यकता: किशोरावस्था (विशेषकर लड़कियों में) में बढ़ती है।
 * स्रोत: हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, सरसों, मेथी, पुदीना), साबुत अनाज, फलियाँ, पशु लीवर, कलेजी, गुर्दा, अंडे की जर्दी, खजूर, अनार, आंवला।
ग) आयोडीन (IODINE)
 * कार्य: मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और शरीर के विकास के लिए आवश्यक; थायरॉयड ग्रंथि की सुचारु कार्यप्रणाली के लिए।
 * कमी के प्रभाव: बौनापन (क्रेटीनिज्म)।
 * स्रोत: समुद्री भोजन (मछली, समुद्री अपतृण), आयोडीन युक्त मिट्टी में उगने वाले पौधे, आयोडीन युक्त नमक।
2.3.5 विटामिन (Vitamins)
 * आवश्यकता: शरीर की सुचारु कार्यप्रणाली के लिए कम मात्रा में आवश्यक।
 * उत्पादन: शरीर के भीतर नहीं बनते, इसलिए भोजन से ग्रहण करना पड़ता है।
 * वर्गीकरण (घुलनशीलता के आधार पर):
   * वसा में घुलनशील विटामिन: विटामिन ए, डी, ई, के।
   * जल में घुलनशील विटामिन: विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी।
| विटामिन | कार्य | स्रोत | अभाव विकार |
|---|---|---|---|
| विटामिन ए | अच्छी दृष्टि (विशेषकर कम प्रकाश में); त्वचा को स्वस्थ रखता है; सामान्य वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक; संक्रमण से प्रतिरक्षा। | सब्जियाँ, फल, दूध, पनीर, अंडे की जर्दी, मक्खन, घी, लीवर, हरी पत्तेदार सब्जियाँ। | रतौंधी (Night Blindness) |
| विटामिन डी | दाँतों तथा हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम और फास्फोरस के साथ कार्य करता है। | तेलयुक्त मछली, दूध, पनीर, मक्खन, घी। शरीर सूर्यप्रकाश के संपर्क में आने पर इसका निर्माण करता है। | बच्चों में रिकेट्स (Rickets), वयस्कों में ऑस्टियोमेलेसिया और ऑस्टियोपोरोसिस। |
| विटामिन ई | कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाता है (एंटीऑक्सीडेंट)। | हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अनाज, दालें, तेल, नट्स। | विटामिनोसिस (Vitaminosis) |
| विटामिन के | रक्त के जमाव प्रक्रिया के लिए आवश्यक। | हरी पत्तेदार सब्जियाँ। | रक्त का थक्का जमने में देरी। |
| विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स | शरीर को ऊर्जा प्राप्त करने में सहायक; पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखता है। | अनाज, साबुत दालें, गेहूँ, चावल। | मुंह का पकना, जीभ के छाले, जीभ का लाल होना, मुंह के किनारे कटना, दस्त। (पहले बेरी-बेरी) |
| विटामिन सी | कोशिकाओं को एक साथ जोड़े रखने के लिए आवश्यक; दाँतों और मसूड़ों को मजबूत बनाता है। | फल, पत्तेदार सब्जियाँ, आलू, अंकुरित अनाज, अमरूद, आंवला। | स्कर्वी (मसूड़े सूजना और खून निकलना, घाव भरने में देरी)। |
2.4 रेशेदार भोजन (Dietary Fibre)
 * परिभाषा: रुक्षांश (roughage) भी कहते हैं; भोजन में उपस्थित अपाच्य कार्बोहाइड्रेट।
 * स्रोत: केवल पादप स्रोतों से (साबुत गेहूँ का आटा, दलिया, फल, साबुत दालें, सब्जियाँ)।
 * प्रसंस्करण का प्रभाव: खाद्य पदार्थों को परिष्कृत करने से रेशे, विटामिन और खनिज नष्ट हो जाते हैं (जैसे पॉलिशयुक्त चावल, छना हुआ आटा)।
 * कार्य:
   * मल को स्थूलता और सुगमता प्रदान करता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल जाता है (कब्ज से बचाव)।
   * अधिक चबाने की आवश्यकता होती है, जिससे संतुष्टि का स्तर बढ़ता है।
 * लाभ: कब्ज, बृहदांत्र (large intestine) के कैंसर, मधुमेह और मोटापे का खतरा कम करता है।
2.5 पानी
 * महत्व: पोषक तत्व न होते हुए भी शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
 * कार्य:
   * सभी शारीरिक द्रव्यों का एक घटक।
   * भोजन पचाने में सहायक और पोषक तत्वों को कोशिकाओं तक पहुँचाता है।
   * मूत्र के रूप में शरीर से अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालने में सहायक।
 * दैनिक आवश्यकता: औसतन 8-10 ग्लास प्रतिदिन (मौसम के अनुसार बदल सकती है)।
2.6 पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोग (Deficiency Diseases)
 * परिभाषा: लंबे समय तक दैनिक आहार में विशिष्ट पोषक तत्वों की कमी या अनुपस्थिति के कारण होने वाले रोग।
 * विशेष जोखिम: बच्चों और बुजुर्गों में अधिक संभावना।
 * पुनर्प्राप्ति: पोषक तत्व को आहार में पुनः शामिल करने पर लक्षण समाप्त हो सकते हैं।
2.6.1 प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण (Protein Energy Malnutrition - PEM)
 * कारण: लंबे समय तक भोजन में प्रोटीन की अनुपस्थिति।
 * प्रभावित आयु: आमतौर पर 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे।
 * प्रकार:
   * क्वाशियोरकर (Kwashiorkor): प्रोटीन की कमी, लेकिन कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा पर्याप्त। बच्चे का पेट मटके की तरह विकसित।
   * मरासमस (Marasmus): लंबे समय तक प्रोटीन और ऊर्जा दोनों की कमी। बच्चे का विकास रुक जाता है, कमजोर हो जाता है।
 * अत्यधिक कैलोरी सेवन: अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट सेवन से मोटापा हो सकता है (संपन्न परिवारों और शहरी क्षेत्रों में बढ़ रही समस्या)।
2.6.2 विटामिन ए की कमी
 * प्रभावित: मुख्य रूप से बच्चों और गर्भवती महिलाओं में।
 * कार्य: शरीर की बढ़ोत्तरी और विकास के लिए जरूरी।
 * लक्षण: आँख की पुतली के सफेद हिस्से में सूखापन और सिकुड़न, कार्निया में धुंधलापन, कम रोशनी में देखने में परेशानी।
 * गंभीर परिणाम: अंधापन (भारत में प्रति वर्ष 40,000 बच्चे नेत्रहीन)।
 * उपाय: भोजन में विटामिन ए युक्त पदार्थों का सेवन बढ़ाना।
2.6.3 लौह तत्व की कमी (एनीमिया)
 * समस्या: भारत में दूसरी सबसे बड़ी पोषण संबंधी समस्या। सभी आयु समूह की महिलाओं और बच्चों में पाई जाती है।
 * कारण:
   * आहार में लौह तत्वों वाले खाद्य पदार्थों की कमी।
   * बड़े बच्चों और वयस्कों में पेट के कीड़े।
   * प्रसूति या दुर्घटना के कारण अधिक रक्तस्राव।
 * लक्षण: खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम, कोशिकाओं को कम ऑक्सीजन मिलना, आलस और थकान महसूस करना, कार्यक्षमता में कमी।
2.6.4 विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की कमी
 * लक्षण: मुंह का पकना, जीभ के छाले, जीभ का लाल होना, मुंह के किनारे कटना, दस्त, पेचिश, भूख न लगना, भोजन पचाने में मुश्किल।
 * ऐतिहासिक नाम: बेरी-बेरी (पहले पॉलिश किए हुए चावल खाने से होता था)।
 * निवारण: पॉलिशरहित (ब्राउन) चावल का सेवन।
2.6.5 विटामिन सी की कमी
 * कारण: ताजे फलों और सब्जियों का सेवन न करना।
 * रोग: स्कर्वी।
 * लक्षण: मसूड़े, दाँत, आँत और हड्डियाँ कमजोर पड़ जाती हैं; मसूड़े फूलना और खून निकलना; घाव जल्दी न भरना।
 * उपाय: भोजन में ताजे फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ाना।
2.6.6 आयोडीन की कमी से विकार
 * आवश्यकता: शरीर के सही ढंग से कार्य करने के लिए।
 * रोग: घेघा (गलगंड), बौनापन (क्रेटीनिज्म), मानसिक विकलांगता, बहरापन।
 * घेघा: किशोरों, युवाओं और स्कूली बच्चों में आम; पुरुषों की अपेक्षा महिलाएँ अधिक प्रभावित।
 * बौनापन: जन्म पूर्व आयोडीन की भारी कमी के कारण गंभीर मानसिक उत्पीड़न।
 * प्रभावित क्षेत्र: हिमालय की तलहटी, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र (आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, केरल)।
 * समाधान: आयोडीनयुक्त नमक का सेवन (सरकार द्वारा गैर-आयोडीनयुक्त नमक प्रतिबंधित)।
 * ध्यान दें: आयोडीन नमक को वायुरोधी डिब्बों में रखें; पकाए जाने वाले भोजन को ढक कर रखें।
2.7 भोजन में विविधता की आवश्यकता
 * कोई भी एक खाद्य पदार्थ सभी पोषक तत्व नहीं दे सकता।
 * स्वस्थ रहने और पोषण अभाव रोगों से बचने के लिए भोजन में विविधता लाना आवश्यक है ताकि शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें।
2.8 पोषण और स्वास्थ्य में अंतः संबंध
 * पोषण संबंधी जानकारी: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा समझने में सहायक।
 * स्वास्थ्य की WHO परिभाषा: "पूर्ण शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक स्वस्थता की स्थिति न कि सिर्फ बीमारियों से मुक्ति।"
 * स्वस्थ व्यक्ति: वह जो न सिर्फ सही तरीके से भोजन ग्रहण करता है बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी स्वस्थ होता है।

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