चित्रकला पाठ 5: पुनर्जागरण (नवजागरण) नोट्स


1. पुनर्जागरण: अर्थ और विशेषताएँ
 * अर्थ: 'पुनर्जागरण' (Renaissance) का अर्थ है पुनर्जीवन या पुनर्जागरण। यह 14वीं से 17वीं शताब्दी के बीच यूरोप में कला, वास्तुकला और साहित्य के क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व विकास और पुनरुत्थान को दर्शाता है।
 * उद्गम: यह यूनान (ग्रीस) और रोम की प्राचीन, प्रतिष्ठित संस्कृति के पुनरुत्थान के साथ शुरू हुआ।
 * विशेषताएँ:
   * यह नए प्रयोगों, नए दृष्टिकोण, नए नियमों और नई खोजों का युग था।
   * इसे 'जागरण का युग' भी कहा जाता है।
   * यह प्राथमिक पुनर्जागरण से शुरू होकर उच्च पुनर्जागरण और अंततः अति पुनर्जागरण के रूप में विकसित हुआ।
2. पुनर्जागरण काल के कलाकार और विशेषताएँ
 * 14वीं शताब्दी के कलाकार:
   * डुच्चो (Duccio) और मासाच्चीयो (Masaccio): ये प्रसिद्ध कलाकार थे।
   * इनके पास शरीर रचना का ज्ञान कम था, लेकिन उनमें 12वीं से 16वीं शताब्दी के दौरान पश्चिमी यूरोपीय वास्तुकला को चित्रित करने की अद्भुत क्षमता थी।
   * उनकी पेंटिंग में वैज्ञानिक साम्य (proportions) और परिप्रेक्ष्य (perspective) का बेहतरीन चित्रण मिलता है।
   * इस युग के कलाकारों में शरीर विज्ञान के ज्ञान की कमी के बावजूद, उनकी चित्रकला में वैज्ञानिक अनुपात और अवलोकन का गुण दिखता है।
 * 15वीं शताब्दी का पुनर्जागरण:
   * इस काल में कला और प्रकृति में संतुलन एवं समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।
   * प्रकाश एवं छाया (Chiaroscuro), संक्षिप्तीकरण (Sfumato) और परिदृश्य की संपूर्णता पर पूरा ध्यान दिया गया।
   * प्रसिद्ध कलाकार: लियोनार्डो दा विंची, राफेल और माइकल एंजेलो।
 * व्यवहारवादी कलाकार (Mannerist Artists):
   * इन्होंने उच्च पुनर्जागरण युग के सिद्धांतों की "दीर्घरूपता" को असंगत ठहराया।
   * इस स्तर पर मानवीय संवेगों और भाव-भंगिमाओं को शारीरिक संरचना से अधिक महत्व दिया गया।
3. उद्देश्य
इस पाठ को पढ़ने के बाद आप निम्न बातें सीख पाएंगे:
 * पुनर्जागरण काल के विकास की प्रक्रिया का वर्णन कर सकेंगे।
 * इस युग के विकास का विवरण दे सकेंगे।
 * इस युग के कलाकारों तथा उनकी कृतियों के विषय में लिख सकेंगे।
 * सूचीबद्ध कला के कार्यों को पहचान सकेंगे।
4. प्रमुख पुनर्जागरण कलाकृतियाँ
4.1 वीनस का जन्म (The Birth of Venus)
 * शीर्षक: वीनस का जन्म
 * कलाकार: सैंड्रो बोत्तिचेल्ली (Sandro Botticelli)
 * काल: 1485-1486
 * शैली: पुनर्जागरण काल
 * संकलन: फ्लोरेंस में गैलेरिया देगली उफीज़ी (Galleria degli Uffizi in Florence)
 * माध्यम: कैनवास पर डिस्टेंपर
सामान्य विवरण:
 * 1486 के आसपास बोत्तिचेल्ली द्वारा निर्मित, यह चित्र दूसरी शताब्दी के महान प्राचीन यूनानी कलाकारों की श्रेष्ठतम कृतियों से प्रेरित है।
 * यह प्राचीन ग्रीक कलाकारों की प्रेरणा से बनी पुनर्जागरण की सबसे बड़ी मिसाल है।
 * चित्र में ग्रीस की प्राचीन देवी वीनस को एक सीपी से जन्म लेते हुए दिखाया गया है।
 * निर्वस्त्र देवी सांसारिक प्रेम के स्थान पर आध्यात्मिक प्रेम को दर्शाती है।
 * वह सौंदर्य और सत्य के प्रतीक के रूप में एक पूरी वयस्क स्त्री के रूप में दिखाई देती है।
 * चित्र में एक ऋतुओं की देवी वीनस को फूलों से कढ़ा हुआ कपड़ा देती है, ताकि वह अपना शरीर ढक सके।
 * दूसरी ओर, पवन देव जैसे देवदूत वायु प्रवाहित करते हुए दिखाई देते हैं।
 * वीनस इन दोनों के बीच विनम्र मुद्रा में खड़ी है, जिसे देखकर प्राचीन गोथिक कला और मूर्तियों का स्मरण होता है।
 * वीनस की शारीरिक संरचना पूर्णतः प्राचीन यथार्थवाद का प्रदर्शन नहीं है, क्योंकि उसकी गर्दन लंबी और बायां कंधा असामान्य तरीके से झुका हुआ है। उसके शरीर के अंग पतले और लंबे हैं।
 * अप्राकृतिक प्रकाश के प्रयोग से चित्र में कोमल और शांतिपूर्ण सौंदर्य का आभास होता है।
4.2 मोनालिसा (Mona Lisa)
 * शीर्षक: मोनालिसा
 * कलाकार: लियोनार्डो दा विंची
 * माध्यम: पहाड़ी लकड़ी पर तैलीय रंग
 * समय: 16वीं शताब्दी
 * शैली: पुनर्जागरण कालीन
 * संकलन: लूव्र संग्रहालय (पेरिस)
सामान्य विवरण:
 * लियोनार्डो दा विंची (1452-1519) एक इतालवी चित्रकार और वैज्ञानिक थे, जो अपनी विभिन्न प्रसिद्ध कलाकृतियों जैसे 'द लास्ट सपर' और 'मोनालिसा' के लिए विश्वव्यापी ख्याति रखते हैं।
 * मोनालिसा 16वीं शताब्दी में पहाड़ी लकड़ी पर तैलीय माध्यम में बनाया गया एक महिला का चित्र है।
 * उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कुराहट है, जो दर्शक का स्वागत करती प्रतीत होती है।
 * लियोनार्डो ने इस चित्र को पिरामिड डिज़ाइन (साम्भीय डिज़ाइन) में बनाया है, जिसमें उसके जुड़े हुए हाथ आधार का काम करते हैं।
 * प्रकाश और छाया का नाटकीय विषमता के साथ प्रयोग हुआ है। चेहरा, बाल, घूंघट और छाया जैसे सूक्ष्म तथ्यों से उद्दीप्त है।
 * मोनालिसा के चित्र में उसके चेहरे पर बाल, भौंहें और पलकें नहीं दिखाई देतीं। फिर भी, महिला के चेहरे पर मुस्कुराहट उसकी आँखों को देखने से बहुत स्पष्ट दिखाई देती है, जबकि मुँह पर देखने से यह इतनी स्पष्ट नहीं दिखती।
 * इस चित्र के पार्श्व में एक विशाल प्राकृतिक दृश्य दिखाई देता है, जिसमें बर्फ से ढके पहाड़, घाटी और एक तिरछी नदी चित्रित है।
 * मोनालिसा के चित्र में लियोनार्डो की मनुष्य को प्रकृति से जोड़ने की सूक्ष्म दृष्टि परिलक्षित होती है।
4.3 पिएटा (Pieta)
 * शीर्षक: पिएटा (Pieta)
 * कलाकार: माइकल एंजेलो (Michelangelo)
 * माध्यम: संगमरमर की मूर्ति
 * समय: 1498 से 1499
 * शैली: पुनर्जागरण
 * संकलन: सेंट पीटर, रोम
सामान्य विवरण:
 * माइकल एंजेलो द्वारा 1498-99 में निर्मित यह मूर्ति संगमरमर की एक ही शिला से बनाई गई है।
 * इस प्रसिद्ध मूर्ति में कुमारी मैरी को निर्जीव यीशु के शरीर को अपनी गोद में लिए हुए दिखाया गया है। माँ बैठी हुई है और यीशु मृत अवस्था में माँ की गोद में है।
 * मूर्तिकार की कला में पुनर्जागरण युग के सौंदर्य का प्राचीन आदर्श तथा कलाकार की अपनी अंतर्दृष्टि और अभिव्यक्ति की समन्वयात्मक एवं संतुलित व्याख्या है।
 * इस वास्तु संरचना की आकृति स्तंभीय (pyramidal) है।
 * कलाकार ने मैडोना की पवित्रता सिद्ध करने के लिए उसे अपने पुत्र यीशु से कम उम्र का दिखाया है।
 * माइकल एंजेलो की यह मूर्ति रचना सबसे उत्कृष्ट और परिष्कृत है।
 * मूर्ति के सजे वस्त्रों में अद्भुत प्रवाह है और शारीरिक संरचना अद्भुत है।
 * माइकल एंजेलो द्वारा बनाए गए डेविड (David), मोसेस (Moses) और रोम में स्थित सिस्टाइन (Sistine) चर्च की छतों पर गीले प्लास्टर पर बनाए गए भित्ति-चित्र भी बहुत मशहूर हैं।
4.4 द नाइट वॉच (The Night Watch)
 * शीर्षक: द नाइट वॉच (The Night Watch)
 * कलाकार: रेम्ब्रांट (Rembrandt)
 * माध्यम: कैनवास पर तैलीय रंग
 * समय: 1642
 * शैली: पुनर्जागरण (बैरोक)
 * संकलन: हॉलैंड, एम्स्टर्डम में रिक्स संग्रहालय (Rijksmuseum, Amsterdam)
सामान्य विवरण:
 * रेम्ब्रांट एक डच चित्रकार थे जो एक यथार्थवादी थे। उनके अधिकांश चित्रों में प्रकाश एवं छाया का रहस्यवादी प्रदर्शन देखा जाता है, जिससे चित्र की आत्मा का अधिक प्रदर्शन होता है।
 * 1640-1642 के बीच रेम्ब्रांट ने 'द नाइट वॉच' का चित्रण किया।
 * काफी समय तक यह चित्र गहरी वार्निश (रोगन) से पुता हुआ था, जिससे लोगों को गलत संदेश मिला कि चित्र में रात्रि के किसी दृश्य का वर्णन किया गया है।
 * हालांकि, जब 1940 में वार्निश हटाई गई, तो यह पता चला कि वह चित्र दिन के उजाले जैसा प्रकाशमान था।
 * यह चित्र एक युवा कप्तान को अपने अधीनस्थ लेफ्टिनेंट को अपनी कंपनी के गैर-सैनिकों को वहाँ से चले जाने का आदेश देते हुए दर्शाता है।
 * इस चित्र में प्रकाश तथा छाया का बड़ा प्रभावशाली प्रयोग हुआ है।
 * कप्तान काली वर्दी पर लाल पेटी बांधे हुए है। लेफ्टिनेंट तथा एक छोटी लड़की पीली ड्रेस पहने हुई दिखाई गई है। ये रंग विजय के प्रतीक हैं।
 * लड़की की पेटी से एक सफेद मरा हुआ चूजा लटक रहा है, जो दुश्मन की पराजय को दर्शाता है।
 * पृष्ठभूमि में एक ड्रम बजाने वाला सिपाही प्रयाण में गति और शक्ति भरने के लिए खड़ा हुआ है।
 * यह चित्र अभिव्यक्ति के साथ पारंपरिक सैन्य चित्रों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।


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