* परिचय: चित्रकला और मूर्तिकला की एक शैली, जो लगभग 1907 में पेरिस में शुरू हुई। यह 20वीं शताब्दी की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण कला आंदोलन था।
* पुरोगामी नायक: सेज़ान (Cézanne) को घनवाद का अग्रदूत माना जाता है। उनका मानना था कि प्रकृति की हर वस्तु को बेलन या गोले के रूप में समझा जाना चाहिए।
* प्रमुख कलाकार:
* पिकासो (Picasso)
* ब्रैक (Braque)
* लेजे (Léger)
* मुख्य विषय-वस्तु: जड़ पदार्थ, प्राकृतिक दृश्य और रूपचित्र।
* कला शैली:
* कलाकृतियों के प्रेरक बिंदु छोटे-छोटे अंशों में विभाजित किए गए।
* कलाकार का मुख्य उद्देश्य संरचना पर जोर देना था, भावनाओं पर नहीं।
* आकार पर जोर दिया गया, न कि ज्यामितीय आकारों में प्रयुक्त रंगों की गहराई पर।
* आकार अत्यधिक अमूर्त और सामान्य होते गए।
* अवधि: लगभग 1920 तक यह आंदोलन समाप्त हो गया।
अतियथार्थवाद (Surrealism)
* परिचय: एक कला आंदोलन जो 1924 में शुरू हुआ और 1955 तक चला।
* मुख्य विचार: अतियथार्थवादी कलाकारों ने अचेतन मन की कल्पना को अपनी कला में प्रयोग किया। वे खुद को मनोविश्लेषण से प्रभावित एक नई विचारधारा के प्रतिनिधि मानते थे।
* उत्पत्ति: दादवादी (Dadaist) विद्रोह के परिणामस्वरूप इस क्रांतिकारी आंदोलन का जन्म हुआ।
* प्रसिद्ध कलाकार:
* जॉर्जिओ डे चिरिकी (Giorgio de Chirico)
* साल्वाडोर डाली (Salvador Dalí)
अमूर्त कला (Abstract Art)
* परिचय: 'अभिव्यक्ति विहीन कला' के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला शब्द। यह एक ऐसी कला है जिसके माध्यम से कलाकार समकालीन संसार को वास्तविक रूप में चित्रित करने के लिए तैयार नहीं थे।
* प्रारंभ: 1910 में शुरू हुई।
* पुरोगामी कलाकार:
* कांडिंस्की (Kandinsky)
* डेलौने (Delaunay)
* मॉन्ड्रियन (Mondrian)
* कला शैली: इन कलाकारों ने अमूर्त विचारों को मूर्त रूप देने के लिए चित्रों के रूप में स्वरूप देने का प्रयास किया, क्योंकि वास्तविक रूप में उन्हें दर्शाना संभव नहीं था।
प्रमुख कलाकृतियाँ और उनके विवरण
7.1 मैन विद वायलिन (Man With Violin)
* शीर्षक: मैन विद वायलिन
* माध्यम: कैनवास पर तैलीय रंग
* समय: 1912
* आकार: 100 \times 73 से.मी.
* कलाकार: पाब्लो पिकासो (Pablo Picasso)
* संग्रह: फिलाडेल्फिया का कला संग्रहालय
* सामान्य विवरण:
* पिकासो (1881, मालगा, स्पेन) एक चित्रकार, मूर्तिकार और मृत्तिका शिल्पी थे।
* अपने लंबे जीवनकाल में उन्होंने अमूर्त संरचना के सिद्धांतों का अनुसरण किया और प्रतीकवाद से प्रभावित थे।
* ब्लू पीरियड (1900-1902): पेरिस में विकसित शैली, नीले और हरे रंगों का प्रयोग।
* रोज़ पीरियड (1905-07): गुलाबी रंग का प्रमुखता से प्रयोग।
* इसके बाद अफ्रीकन कला का प्रभाव देखा गया।
* घनवादी काल (1915 से): इस दौरान उन्हें विश्वस्तरीय ख्याति मिली। घनवाद में त्रि-विमीय आकारों के स्थान पर चौरस नमूनों और रंगों से चित्र बनाए गए। रंगों का आंशिक आच्छादन होता था, जिससे विभिन्न आकार और मानवी शरीर या वस्तुओं को आगे-पीछे से एक ही समय में देखा जा सकता था।
* 'मैन विद वायलिन' घनवाद के विश्लेषणात्मक अध्ययन का एक अच्छा उदाहरण है।
* वस्तुओं को विभिन्न हिस्सों में बांटा गया है और एक ही समय में चित्र में अन्य विचारों को भी दर्शाया गया है।
* इस युग के अन्य चित्रों की तरह, इसमें भी चित्रित आकारों को पहचाना जा सकता है, लेकिन सभी आकार घन के रूप में परिवर्तित हो गए हैं।
* मानव आकृति, जो हाथ में वायलिन पकड़े हुए है, को विभिन्न ज्यामितीय आकारों में परिवर्तित कर टुकड़ों में इकट्ठा किया गया है।
* प्रयुक्त रंग (भूरे और हरे का मिश्रण) इस युग के प्रतिनिधि रंग हैं।
* पिकासो के अनुसार, "यथार्थ प्रकृति से भी अधिक यथार्थ है।"
* उनकी सर्वोत्तम कृतियों में स्पेन के गृहयुद्ध पर आधारित गुएर्निका (Guernica) है।
7.2 परसिस्टेंस ऑफ मेमोरी (Persistence of Memory)
* शीर्षक: परसिस्टेंस ऑफ मेमोरी
* माध्यम: कैनवास पर तैलीय रंग
* समय: 1931
* आकार: 9 \frac{1}{2}'' \times 13''
* कलाकार: साल्वाडोर डाली (Salvador Dalí)
* संग्रह: म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट, न्यूयॉर्क
* सामान्य विवरण:
* साल्वाडोर डाली अतियथार्थवादी युग के सर्वाधिक प्रसिद्ध कलाकार (चित्रकार, लेखक, फिल्मकार) थे, जो स्पेन से थे।
* उन्होंने अपनी कलाकृतियों में बेतुके, अरीतिक और विचित्र विषयों एवं वस्तुओं का चित्रण किया।
* 'परसिस्टेंस ऑफ मेमोरी' अतियथार्थवादी आंदोलन का प्रतिनिधि चित्र है।
* चित्र में बिना पेड़ों के प्राकृतिक भू-दृश्य और शांति को चित्रित किया गया है, जो युद्ध के बाद की शून्यता को दर्शाता है।
* चित्र में जीवन से संबद्ध वस्तुएं (लुप्त होती घड़ियां) हैं जो वास्तविक लगती हैं, लेकिन मानव के अशांत मन को दर्शाती हैं।
* डाली की कला में शास्त्रीय और सुस्पष्ट शैली के बावजूद, उनकी विषय-वस्तु उनके स्वप्नों या दुःस्वप्नों से प्रेरित होती थी।
* उनकी कृतियों में वस्तुओं का समूहीकरण उन्मुक्त ढंग से किया गया है और उनका सांकेतिक अर्थ है।
* चींटियां एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर रेंगती हैं, जो सड़े-गले खाने पर होने वाली चींटियों को दर्शाती हैं।
* डाली का कोई भी चित्र वास्तविकता को पूरी तरह प्रस्तुत नहीं करता है; वे अस्वाभाविक लगते हैं।
* उनकी मृत्यु 1989 में हुई, और उन्होंने विलाबर्टिन (Vilabertin), लार्ज हार्लेक्विन (Large Harlequin), स्मॉल बॉटल ऑफ रम (Small Bottle of Rum) और हनी इज़ स्वीटर दैन ब्लड (Honey is Sweeter than Blood) जैसी कृतियां छोड़ीं।
7.3 ब्लैक लाइन्स (Black Lines)
* शीर्षक: ब्लैक लाइन्स
* माध्यम: कैनवास पर तैलीय रंग
* समय: दिसंबर 1913
* आकार: 4 फीट 3 इंच \times 4 फीट 3 \frac{1}{8} इंच
* कलाकार: वैसिली कांडिंस्की (Wassily Kandinsky)
* संग्रह: सोलोमन आर गुगेनहेम म्यूजियम, न्यूयॉर्क
* सामान्य विवरण:
* वैसिली कांडिंस्की (1866, रूस) एक प्रसिद्ध चित्रकार और कला सिद्धांतवादी थे, और अमूर्त कला के जन्मदाताओं में से एक थे।
* उन्होंने अ-सादृश्यमूलक कला को तीन मुख्य श्रृंखलाओं में बांटा:
* प्रभाववाद
* कामचलाऊ प्रबंध
* संयोजन कला
* उनके चित्र अमूर्तिकरण और ज्यामितीय विचारधारा का मिश्रण थे।
* प्रसिद्ध चित्र: अकॉम्पनीड कॉन्ट्रास्ट (Accompanied Contrast), येलो अकॉम्पनीमेंट (Yellow Accompaniment), एंग्युलर स्ट्रक्चर (Angular Structure)।
* 'ब्लैक लाइन्स' को कांडिंस्की ने 1913 में बनाया।
* शीर्षक के अनुसार, रेखाएं काली स्याही से खींची हुई प्रतीत होती हैं, लेकिन वास्तव में वे काले रंग से खींची गई हैं।
* इस संयोजन में, चित्र के एक विशेष कोने में खींची गई रेखाओं से एक भिन्न अर्थ निकलता है।
* इस युग के अन्य चित्रों की भांति, उनके चित्रों में सरलता और शुद्ध रेखांकन हैं, जो कंकाल में मांस न होने जैसा प्रभाव देते हैं।
* रंगीन धब्बे ऐसे लगते हैं मानो विशालकाय हाथों की उंगलियों से बनाए गए हों, जो रेखाओं और उनके प्रभाव से मेल खाते हैं।
* कांडिंस्की के लिए रेखाएं, आकार और रंगों का अपना अलग अर्थ था और वे अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से प्रयोग में आते थे।
* उनके अधिकांश चित्रों में खींची गई रेखाएं अपूर्ण हैं और ऐसा लगता है मानो उनकी अपनी ही जिंदगी है।
* उनकी मृत्यु 1944 में पेरिस में हुई।
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