1.1 संस्कृति का अर्थ व अवधारणा
* संस्कृति शब्द संस्कृत के 'कृ' धातु से बना है, जिसका अर्थ है 'करना'।
* इससे तीन शब्द बनते हैं:
* प्रकृति: मूल स्थिति
* संस्कृति: परिष्कृत स्थिति
* विकृति: अवनति स्थिति
* अंग्रेजी शब्द 'Culture' लैटिन भाषा के 'Cult' या 'Cultus' से आया है, जिसका अर्थ है जोतना, विकसित करना या परिष्कृत करना।
* संस्कृति वह तरीका है जिससे हम सोचते और कार्य करते हैं। इसमें वे सभी चीजें शामिल हैं जो हमें एक समाज के सदस्य के रूप में विरासत में मिली हैं।
* संस्कृति में कला, संगीत, साहित्य, वास्तुकला, शिल्प, दर्शन, धर्म, विज्ञान, रीति-रिवाज, परंपराएँ, पर्व, जीवन जीने के तरीके और व्यक्ति का दृष्टिकोण शामिल हैं।
* यह एक निरंतर चलने वाली और कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है।
* संस्कृति के दो उप-विभाग हैं:
* भौतिक संस्कृति: हमारी वेशभूषा, भोजन, घरेलू सामान आदि।
* अभौतिक संस्कृति: विचार, आदर्श, भावनाएँ और विश्वास।
* संस्कृति एक स्थान से दूसरे स्थान पर बदलती रहती है और ऐतिहासिक प्रक्रिया पर आधारित होती है।
* संक्षेप में, संस्कृति किसी समाज में गहराई तक व्याप्त गुणों का समग्र रूप है।
1.2 संस्कृति की सामान्य विशेषताएँ
* संस्कृति सीखी व प्राप्त की जाती है: जन्मजात नहीं, बल्कि परिवार और समाज से सीखते हैं।
* संस्कृति लोगों के समूह द्वारा बाँटी जाती है: यह एक साझा विचार या कार्य प्रणाली है।
* संस्कृति संचयी होती है: ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होता है और उसमें वृद्धि होती जाती है।
* संस्कृति परिवर्तनशील होती है: नए ज्ञान और विचारों के साथ बदलती रहती है।
* संस्कृति गतिशील होती है: समय के साथ इसमें नए विचार और कौशल जुड़ते रहते हैं।
* संस्कृति स्वीकृत व्यवहारों के तरीके प्रदान करती है: यह बताती है कि कैसे एक कार्य को करना चाहिए।
* संस्कृति वैचारिक होती है: व्यक्ति से समाज द्वारा स्वीकृत विचारों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।
1.3 भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ या मूलभूत लक्षण
* सार्वभौमिक आदर्शों से प्रेरित: सत्य की खोज, मानव कल्याण, सौंदर्य की अभिव्यक्ति (सत्यं शिवं सुंदरम्)।
* प्राचीनता: हजारों वर्ष पुरानी, सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी।
* निरंतरता: मिश्री, सुमेरियन, यूनानी और रोमन संस्कृतियों के विपरीत, भारतीय संस्कृति हजारों वर्षों से निरंतर प्रवाहित है।
* आध्यात्मिकता: भारतीय संस्कृति का मूल, तपोवनों और आश्रमों में विकसित हुई। इसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे पुरुषार्थ शामिल हैं, जिनमें मोक्ष अंतिम लक्ष्य है।
* ग्रहणशीलता: बाहरी तत्वों को आत्मसात करने की क्षमता। शक, हूण, कुषाण जैसे विदेशी आक्रमणकारी भारतीय संस्कृति में घुलमिल गए।
* समन्वयवादिता: गौतम बुद्ध और सम्राट अशोक जैसे मनीषियों ने समन्वय पर बल दिया।
* धार्मिक सहिष्णुता: विभिन्न धर्मों के प्रति सम्मान और सहनशीलता।
* चिंतन की स्वतंत्रता: विचारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी।
* विभिन्नता में एकता: अनेक विविधताओं के बावजूद एक अंतर्निहित एकता।
1.4 मानव जीवन में संस्कृति का महत्व
* संस्कृति मानव जीवन से अतःसंबंधित है। यह हमें जीवन का अर्थ और जीने का तरीका सिखाती है।
* मनुष्य संस्कृति का निर्माता है, और संस्कृति ही व्यक्ति को मानव बनाती है।
* यह परंपराओं, विश्वासों, जीवन शैली और आध्यात्मिक व भौतिक पक्षों से जुड़ी है।
* संस्कृति का संबंध आंतरिक अनुभूतियों से है, जिसमें मन और हृदय की पवित्रता निहित है।
* यह विज्ञान, संगीत, नृत्य, दर्शन, साहित्य सृजन और मानव जीवन की उच्चतर उपलब्धियों को सम्मिलित करती है।
1.7 संस्कृति और विरासत
* सांस्कृतिक विकास एक ऐतिहासिक प्रक्रिया है।
* जो संस्कृति हम अपने पूर्वजों से प्राप्त करते हैं, उसे सांस्कृतिक विरासत कहते हैं।
* यह विरासत कई स्तरों पर मौजूद होती है, जैसे राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत।
* विश्व धरोहर स्थल हमारी विरासत के महत्वपूर्ण अंग हैं जिन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए।
* उदाहरण: आगरा का लाल किला (1983), अजंता की गुफाएँ (1983), ताजमहल (1983), कोणार्क सूर्य मंदिर (1984), काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (1985), खजुराहो मंदिर (1986), कुतुबमीनार (1993), जयपुर का जंतर मंतर (2010), राजस्थान के पहाड़ी किले (2013) आदि। (कृपया ऊपर दी गई पूरी सूची देखें।)
* वास्तु-संबंधित संरचनाओं के अलावा, बौद्धिक उपलब्धियाँ, दर्शन, ज्ञान के ग्रंथ, आविष्कार और खोज भी विरासत का हिस्सा हैं।
* उदाहरण: बोधायन, आर्यभट्ट, भास्कराचार्य (गणित, खगोल विद्या, ज्योतिष), कणाद, वराहमिहिर (भौतिकशास्त्र), नागार्जुन (रसायनशास्त्र), सुश्रुत, चरक (औषधि), पतंजलि (योग)।
* संस्कृति परिवर्तनशील है, लेकिन विरासत परिवर्तनशील नहीं है।
* भारतीय सांस्कृतिक विरासत हमें एक-दूसरे से जोड़े रखती है, जैसे भारतीय साहित्य और धर्मग्रंथ (वेद, उपनिषद, गीता, योग)।
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