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यह अध्याय पिछली शताब्दियों में घटित प्रमुख विश्व घटनाओं और उनके प्रभावों पर केंद्रित है, जिन्होंने आधुनिक विश्व की रूपरेखा तैयार की।
मुख्य घटनाक्रम और प्रभाव
* अस्थिरता का काल: सम्पूर्ण विश्व में अस्थिरता का वातावरण रहा।
* प्रमुख घटनाएँ:
* अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम
* फ्रांस की क्रांति
* रूस की क्रांति
* दो विश्व युद्ध
* क्रांतियों के परिणाम: राजशाही और सामंतवाद का अंत हुआ।
* औपनिवेशिक होड़: विभिन्न राष्ट्रों में अविश्वास बढ़ा, जिसके कारण शस्त्रीकरण हुआ और दो महायुद्धों का सामना करना पड़ा।
* युद्ध के पश्चात: शांति के प्रयास हुए, लेकिन विश्व पूंजीवाद और साम्यवाद दो विचारधाराओं में विभक्त हुआ।
* अन्य विचारधाराओं का उदय: साम्यवाद, नाजीवाद, फासीवाद आदि 'वादों' का जन्म हुआ।
* भारत पर प्रभाव: इन घटनाओं से भारत के लोगों में भी राष्ट्रवादी विचारों का संचार हुआ और अंततः भारत स्वतंत्र हुआ।
7.1 अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम (1776 ई.)
परिचय
* खोज: 1492 ई. में क्रिस्टोफर कोलम्बस द्वारा एशिया का जलमार्ग खोजते हुए आकस्मिक रूप से।
* नामकरण: इटालियन यात्री अमेरिगो वेस्पूची के नाम पर।
* उपनिवेश: स्पेन सबसे पहले अग्रणी था (सेंटऑगस्टाइन, वर्तमान फ्लोरिडा)। बाद में ब्रिटेन सबसे आगे रहा और 18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध तक संपूर्ण अमेरिका पर अधिकार कर लिया।
* ब्रिटिश उपनिवेश: धीरे-धीरे 13 उपनिवेश स्थापित हुए (जैसे: न्यू हैम्पशायर, वर्जीनिया, जॉर्जिया आदि)।
7.1.1 स्वतंत्रता संग्राम के कारण
* त्रुटिपूर्ण व्यापार व्यवस्था: अंग्रेजों ने औपनिवेशिक उत्पादक प्रतिबंध अधिनियम पारित कर अमेरिका में फौलाद, ऊनी, सूती वस्त्र आदि के उत्पादन पर रोक लगाई।
* औपनिवेशिक शोषण: ब्रिटिश गवर्नर जनरल की नियुक्ति, जो अमेरिकी स्वतंत्रता में बाधक माने गए।
* सप्तवर्षीय युद्ध (1756-1763 ई.): इंग्लैंड और फ्रांस में औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा, जिसने अमेरिकी उपनिवेशों को आर्थिक रूप से कमजोर किया।
* टैक्स और अधिनियम:
* शुगर एक्ट (1764 ई.): शक्कर, चाय, कॉफी, शराब के आयात पर कर।
* स्टाम्प एक्ट (1765 ई.): सभी कानूनी दस्तावेजों पर स्टाम्प लगाना अनिवार्य।
* आयात कर अधिनियम (1767 ई.): कागज, चाय, शीशा आदि के आयात पर कर।
* बोस्टन हत्याकांड (1770 ई.): बोस्टन में विद्रोह के दौरान अंग्रेजों द्वारा गोलीबारी।
* बोस्टन टी पार्टी (1773 ई.): राष्ट्रवादियों ने चाय से भरी पेटियों को समुद्र में फेंक दिया। सरकार ने बंदरगाह बंद कर दिया, जिससे असंतोष बढ़ा।
7.1.2 स्वतंत्रता संग्राम का प्रारम्भ एवं परिणाम
* प्रारम्भ:
* 1774 ई. में जनसभा, समस्या का बातचीत से हल संभव नहीं।
* 4 जुलाई 1776 ई. को रिचर्ड हेनरी ली के प्रस्ताव पर स्वतंत्रता की घोषणा की गई।
* जॉर्ज वॉशिंगटन के नेतृत्व में संग्राम शुरू हुआ (1776-1783 ई.)।
* युद्ध: 1778 ई. में फ्रांस ने अमेरिका का साथ दिया। यॉर्कटाउन में ब्रिटिश सेना पराजित हुई।
* समाप्ति: 3 सितंबर 1783 ई. को पेरिस की संधि द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका को एक नवीन देश के रूप में मान्यता मिली।
* परिणाम:
* ब्रिटेन के निरंकुश शासक जॉर्ज तृतीय की सत्ता समाप्त।
* फ्रांस में क्रांति के लिए प्रेरित किया (1789 ई. की क्रांति)।
* अमेरिका में गणतंत्रात्मक व्यवस्था लागू हुई।
* जॉर्ज वॉशिंगटन प्रथम राष्ट्रपति बने।
7.2 फ्रांस की क्रांति (1789 ई.)
पृष्ठभूमि
* अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में फ्रांसीसी सेना ने भाग लिया, जिससे उनके मन में भी स्वतंत्रता, राष्ट्रीयता और समानता की भावनाएँ प्रबल हुईं।
7.2.1 क्रांति के कारण
* सामाजिक विषमता: समाज तीन वर्गों (एस्टेट्स) में विभाजित:
* प्रथम एस्टेट: पादरी वर्ग (विशेषाधिकार युक्त)।
* द्वितीय एस्टेट: कुलीन वर्ग (विशेषाधिकार युक्त)।
* तृतीय एस्टेट: शेष जनता, सर्वहारा एवं कृषक वर्ग (साधनहीन, अधिकारहीन, करों का बोझ)।
* राजनैतिक निरंकुशता: राजा लुई सोलहवाँ निरंकुश, स्वेच्छाचारी और प्रजा के हितों के प्रति उदासीन था।
* आर्थिक असंतोष: शासकों की विलासिता और युद्धों के कारण आर्थिक स्थिति खराब, जनता पर अनेक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर (जैसे: टाइथ)।
* धार्मिक असंतोष: पादरी वर्ग ऐश्वर्यपूर्ण जीवन व्यतीत करता था।
* दार्शनिकों का योगदान: दार्शनिकों (जैसे: रूसो, मॉन्टेस्क्यू, वोल्टेयर) के विचारों ने क्रांति की चेतना जगाई।
7.2.2 क्रांति का प्रारम्भ एवं परिणाम
* प्रारम्भ:
* टेरिस कोर्ट की शपथ (20 जून 1789 ई.): राष्ट्रीय महासभा के प्रतिनिधियों ने संविधान स्थापित होने तक अलग न होने की शपथ ली।
* बैस्तीस का पतन (14 जुलाई 1789 ई.): राजवंश की निरंकुशता के प्रतीक बैस्तीस किले पर हमला, स्वतंत्रता की विजय के रूप में देखा गया (फ्रांस में आज भी राष्ट्रीय दिवस)।
* अगस्त 1789 ई.: सामन्तों के विशेषाधिकार समाप्त।
* 27 अगस्त 1789 ई.: नागरिक अधिकारों की घोषणा।
* 1793 ई. (जनवरी): राजद्रोह के अपराध में लुई सोलहवें को गिलोटिन दे दिया गया।
* परिणाम:
* निरंकुश शासन का अंत: सामंतों के विशेषाधिकार समाप्त, सर्वहारा वर्ग की सरकार बनी।
* स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व पर आधारित राष्ट्र के विकास का विचार।
* धार्मिक शोषण व आडंबरों का अंत, धार्मिक सहिष्णुता।
* राष्ट्रीयता की भावना का उत्कर्ष।
* सामाजिक समानता व मौलिक अधिकारों को प्रोत्साहन।
* शैक्षिक सुधारों का युग।
7.3 रूस की क्रांति (1917 ई.)
पृष्ठभूमि
* फ्रांस की क्रांति की तरह ही रूस में भी असमानता, निरंकुशता और शोषण का माहौल था।
7.3.1 क्रांति के कारण
* जार की निरंकुशता: रूस का जार (शासक) निरंकुश, स्वेच्छाचारी और दैवी सिद्धांत में विश्वास रखने वाला था। ड्यूमा (संसद) की स्थापना हुई, पर वास्तविक अधिकार राजा के पास थे।
* सामाजिक विषमता और शोषण: समाज दो भागों में विभक्त था:
* अधिकारयुक्त: राजपरिवार, सामंत, उच्च कुलीन।
* अधिकारहीन: छोटे किसान, श्रमिक, भूमिहीन (दासों जैसी स्थिति)।
* श्रमिकों का शोषण (14 घंटे काम, कम वेतन)।
* जार निकोलस द्वितीय का व्यक्तित्व: अंधविश्वासी, हठी, अयोग्य। रानी अलैक्जेण्ड्रा और रासपुटिन के प्रभाव में।
* भ्रष्ट नौकरशाही: रूसी नौकरशाही भ्रष्ट व संवेदनहीन थी।
* विचारकों का योगदान: टॉलस्टॉय, मैक्सिम गोर्की, मार्क्स आदि के क्रांतिकारी विचारों का प्रभाव।
* प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय: सैनिकों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं, जनता युद्ध जनित आर्थिक समस्याओं से जूझ रही थी।
7.3.2 क्रांति का स्वरूप एवं परिणाम
* स्वरूप:
* भुखमरी से असंतुष्ट लोगों ने विद्रोह किया, कारखानों में हड़ताल।
* सोवियत (श्रमिकों और सैनिकों के प्रतिनिधियों की परिषद) का गठन।
* जार निकोलस द्वितीय को सिंहासन त्यागना पड़ा, रोमानोव राजवंश का अंत।
* अस्थायी सरकार अधिक दिनों तक नहीं चली, बोल्शेविकों ने सत्ता संभाली।
* सत्ता लेनिन के हाथों में आई, रूस में सर्वहारा की सरकार बनी। रूस अब सोवियत संघ के नाम से जाना जाने लगा।
* परिणाम:
* जारशाही का अंत और प्रथम साम्यवादी सरकार की स्थापना।
* रूस महाशक्ति के रूप में उभरा, विश्व दो गुटों (पूंजीवादी/साम्यवादी) में बंटा।
* रूस प्रथम विश्वयुद्ध से अलग हो गया।
* राष्ट्रवादी एवं प्रगतिशील विचारों का विकास।
* सामाजिक समानता, शिक्षा व महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार।
* अधिनायकवाद (जर्मनी में हिटलर, इटली में मुसोलिनी) का उदय।
7.4 प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918 ई.)
* अवधि: 4 वर्ष, 3 माह, 14 दिन।
7.4.1 युद्ध के कारण
* उग्र राष्ट्रीयता: प्रत्येक राष्ट्र में आपसी ईर्ष्या, औपनिवेशिक विस्तार की चाहत।
* कूटनीतिक संधियाँ: विश्व दो गुटों में बंटा:
* मित्र राष्ट्र: इंग्लैण्ड, फ्रांस, रूस, अमेरिका, जापान आदि।
* धुरी राष्ट्र: जर्मनी, आस्ट्रिया-हंगरी, टर्की, बुल्गारिया।
* सैन्यवाद (शस्त्रीकरण): सुरक्षा व बदला लेने की भावना से अत्यधिक सैन्य उन्माद।
* समाचार पत्रों का योगदान: विभिन्न देशों में द्वेष व कटुतापूर्ण लेखों द्वारा वातावरण दूषित किया।
* साम्राज्यवाद की भावना: औद्योगिक क्रांति के बाद उपनिवेशों पर अधिकार की प्रतिस्पर्धा।
* विलियम कैसर द्वितीय की नीतियाँ (जर्मनी): जर्मनी को शक्तिशाली बनाने हेतु नौसेना का विकास।
* अंतर्राष्ट्रीय संकट: मोरक्को संकट, बाल्कन युद्ध आदि ने तनाव बढ़ाया।
* अंतर्राष्ट्रीय संस्था का अभाव: विवादों को सुलझाने वाली संस्था नहीं थी।
7.4.2 युद्ध का प्रारम्भ एवं परिणाम
* तात्कालिक कारण: आस्ट्रिया के युवराज फ्रांसिस फर्डिनेंड की बोस्निया की राजधानी सेराजेवो में 28 जून 1914 को हत्या। आस्ट्रिया ने सर्बिया पर आक्रमण किया, जिससे युद्ध शुरू हुआ।
* युद्ध की समाप्ति:
* 1917 ई. में अमेरिका मित्र राष्ट्रों के पक्ष में सम्मिलित हुआ।
* 11 नवंबर 1918 ई. को युद्ध विराम।
* पेरिस शांति सम्मेलन में जर्मनी के साथ वर्साय की अपमानजनक संधि की गई।
* परिणाम:
* अपार जन-धन की हानि: 1 करोड़ 30 लाख सैनिक शहीद।
* एकतन्त्रीय शासन व्यवस्था का समापन, गणतंत्र की स्थापना।
* नए राज्यों का उदय (जैसे: पोलैण्ड, फिनलैण्ड)।
* नए 'वादों' का प्रादुर्भाव: रूस में साम्यवाद, जर्मनी में नाजीवाद, इटली में फासीवाद।
* आर्थिक असंतुलन, मंदी।
* अमेरिका विश्व की महाशक्ति के रूप में उभरा।
* राष्ट्र संघ की स्थापना (विल्सन के प्रयासों से)।
7.5 राष्ट्र संघ (स्थापना: 10 जनवरी 1920 ई.)
* उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं शांति की स्थापना करना, विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करना।
* मुख्यालय: जिनेवा (स्विटजरलैण्ड)।
* विफलता: अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सका, जन्मदाता अमेरिका स्वयं इसका सदस्य नहीं बना।
7.6 द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945 ई.)
* प्रारम्भ: 1 सितंबर 1939 ई. को जर्मनी द्वारा पोलैण्ड पर आक्रमण से।
7.6.1 युद्ध के कारण
* वर्साय की संधि: जर्मनी के लिए अपमानजनक संधि, हिटलर के नेतृत्व में उल्लंघन कर शस्त्रीकरण।
* राष्ट्र संघ की असफलता: विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने में विफल।
* निशस्त्रीकरण की असफलता: मित्र राष्ट्रों ने शस्त्रीकरण जारी रखा, जिससे अन्य राष्ट्रों में संदेह।
* तुष्टिकरण की नीति: ब्रिटेन द्वारा रूस के साम्यवादी प्रभाव को रोकने हेतु हिटलर की आक्रामक नीतियों की अनदेखी।
* अधिनायकवादी शक्तियों का उदय: जर्मनी में नाजीवाद (हिटलर), इटली में फासीवाद (मुसोलिनी), जापान में सैनिकवाद।
* साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा: 1930 की आर्थिक मंदी के बाद राष्ट्रों द्वारा माल खपाने हेतु।
7.6.2 युद्ध का स्वरूप एवं परिणाम
* गुट:
* धुरी राष्ट्र: जर्मनी, जापान, इटली आदि।
* मित्र राष्ट्र: ब्रिटेन, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन आदि।
* अमेरिका का प्रवेश: जापान ने 7 दिसंबर 1941 ई. को पर्ल हार्बर बंदरगाह पर आक्रमण किया, जिससे अमेरिका युद्ध में सम्मिलित हुआ।
* समाप्ति:
* अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा और 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर परमाणु बम गिराए।
* 14 अगस्त 1945 ई. को युद्ध समाप्ति की घोषणा।
* परिणाम:
* अपार जन-धन की हानि: लगभग 5 करोड़ व्यक्ति प्रभावित।
* परमाणु बम का प्रयोग पहली बार हुआ, जिससे मानवता की भयानक त्रासदी दिखी।
* क्षेत्रीय संगठनों का प्रादुर्भाव: विश्व दो गुटों (साम्यवादी/पूंजीवादी) में विभक्त हुआ। (नाटो, सीटो, वारसा पैक्ट)
* दो महाशक्तियों का उदय: रूस और अमेरिका।
* शीत युद्ध का प्रारम्भ: रूस और अमेरिका के बीच आरोप-प्रत्यारोप व दुष्प्रचार का दौर।
* साम्राज्यवादी ताकतों का कमजोर होना, कई एशियाई एवं अफ्रीकी देशों को स्वतंत्रता मिली (भारत, चीन)।
* संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की स्थापना (24 अक्टूबर 1945 ई.)।
7.7 संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO)
* स्थापना: 24 अक्टूबर 1945 ई.
* मुख्यालय: न्यूयॉर्क।
* उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा स्थापित करना, राष्ट्रों के मध्य मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना, सहयोग संस्था के रूप में कार्य करना।
7.7.2 संयुक्त राष्ट्र संघ के अंग
* महासभा (General Assembly): प्रमुख व्यवस्थापिका संस्था। प्रत्येक राष्ट्र एक वोट दे सकता है।
* सुरक्षा परिषद् (Security Council): सबसे शक्तिशाली अंग (कार्यपालिका)।
* स्थाई सदस्य (5): अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस, चीन, रूस (वीटो का अधिकार)।
* अस्थाई सदस्य (10): महासभा द्वारा 2 वर्ष के लिए चुने जाते हैं।
* आर्थिक व सामाजिक परिषद् (ECOSOC): विश्व के कमजोर राष्ट्रों का विकास करना।
* संरक्षण परिषद् (Trusteeship Council): पिछड़े राष्ट्रों को स्वायत्त शासन के योग्य बनाना।
* अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice): अंतर्राष्ट्रीय विवादों का हल निकालने के लिए। स्थापना 1946 ई. में हेग (हॉलैण्ड) में।
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