क्र.सं.
प्रश्न (Question)
उत्तर (Answer)
1
'सुखी राजकुमार' कहानी के लेखक कौन हैं?
अंग्रेज़ी लेखक ऑस्कर वाइल्ड हैं।
2
सुखी राजकुमार की प्रतिमा नगर में किस दिशा में स्थापित थी?
उत्तर की ओर एक ऊँचे से स्तंभ पर।
3
मूर्ति पर क्या मढ़ा हुआ था?
हल्का स्वर्ण-पत्र मढ़ा हुआ था।
4
राजकुमार की आँखों के स्थान पर कौन-से रत्न जड़े थे?
दो चमकदार नीलम जड़े थे।
5
राजकुमार की तलवार की मूठ में कौन-सा रत्न जड़ा था?
एक बड़ा-सा लाल (रूबी) जड़ा था।
6
रात को नगर के समीप कौन पहुँची थी?
एक गौरैया (छोटी चिड़िया)।
7
गौरैया ने कहाँ ठहरने का फैसला किया?
स्तंभासीन (खंभे पर आसीन) मूर्ति के पैरों के पास।
8
गौरैया के ऊपर पानी की बूँदें कहाँ से गिरीं?
राजकुमार की आँखों से आँसू के रूप में।
9
जब राजकुमार जीवित था, तब वह कहाँ रहता था?
आनंद-महल में रहता था।
10
जीवित राजकुमार को किसका परिचय नहीं हुआ था?
आँसुओं और दुख का परिचय नहीं हुआ था।
11
मूर्ति बनने के बाद राजकुमार का हृदय किस धातु का था?
जस्ते (Zinc) का था।
12
मूर्ति ने पहली बार गौरैया को कौन-सा रत्न देने को कहा?
तलवार की मूठ में जड़ा लाल।
13
लाल ले जाते समय गौरैया किसके प्रासाद के समीप से गुज़री?
एक उच्च प्रासाद (महल) के समीप से।
14
गरीब स्त्री किसके नृत्य-वसन पर फूल काढ़ रही थी?
रानी की सर्वसुंदरी अंगरक्षिका के।
15
लाल पहुँचाने के बाद गौरैया को ठंड क्यों नहीं लगी?
क्योंकि उसने एक भलाई का काम किया था।
16
गौरैया मिस्र में कहाँ जाने की बात कर रही थी?
दूसरे प्रपात तक, जहाँ नरकुल की झाड़ियों में दरियाई घोड़े सोते हैं।
17
दूसरी रात राजकुमार ने किसकी मदद करने को कहा?
एक तरुण कलाकार (नाटक लिखने वाला) की।
18
कलाकार किस कारण अपना नाटक पूरा नहीं कर पा रहा था?
ठंड और भूख के कारण।
19
राजकुमार ने कलाकार को देने के लिए क्या मांगा?
अपनी एक आँख का नीलम।
20
राजकुमार के नीलम कहाँ से लाए गए थे?
हज़ारों वर्ष पहले भारत से।
21
नीलम देखकर कलाकार ने उसे क्या समझा?
किसी बड़े भारी प्रशंसक द्वारा भेजा गया उपहार।
22
नीलम निकालने की बात सुनकर गौरैया ने क्या किया?
वह फूट-फूट कर रोने लगी।
23
तीसरी रात राजकुमार ने किसकी मदद करने को कहा?
एक रोती हुई लड़की की।
24
लड़की क्यों रो रही थी?
उसका सौदा नाली में गिर गया था।
25
लड़की ने नीलम को क्या समझा?
रंगीन काँच का टुकड़ा।
26
दोनों आँखें देने के बाद गौरैया ने क्या निश्चय किया?
वह हमेशा राजकुमार के साथ रहेगी।
27
राजकुमार के अनुसार, किससे बड़ा कोई रहस्य नहीं है?
मनुष्य का दुख-दर्द (दुख)।
28
राजकुमार ने गौरैया को स्वर्ण-पत्र निकालकर क्या करने को कहा?
अपनी निर्धन प्रजा में बाँट देने को।
29
सोने का पत्तर उतरने के बाद प्रतिमा कैसी दिखने लगी?
बिल्कुल मटमैला और मनहूस।
30
ईश्वर ने नगर की दो सबसे मूल्यवान वस्तुएँ किसे माना?
जस्ते का दिल (राजकुमार का) और गौरैया की लाश को।
क्र.सं.
प्रश्न (Question)
उत्तर (Answer)
1
राजकुमार के जीवित रहने के दौरान 'आनंद-महल' की क्या विशेषता थी?
आनंद-महल की विशेषता यह थी कि वहाँ दुख को प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। राजकुमार चारों ओर सौंदर्य से घिरा रहता था, इसलिए उसने कभी बाहर की दुनिया देखने का प्रयत्न नहीं किया।
2
मूर्ति बनने के बाद राजकुमार दुख क्यों महसूस करने लगा?
मूर्ति को इतने ऊँचे पर स्थापित किया गया था कि वह संसार की सारी कुरूपता और दुख-दर्द देख सकता था, इसलिए यद्यपि उसका हृदय जस्ते का था, मगर फिर भी वह फटा जा रहा था।
3
गौरैया ने बच्चों से स्नेह न करने का क्या कारण बताया?
गौरैया ने बताया कि पिछले वसंत में दो बच्चे रोज़ आकर उसे ढेले मारा करते थे, जो उसे बड़ी अपमानजनक बात लगी थी, इसलिए उसे बच्चों से ज़रा भी स्नेह नहीं था।
4
राजकुमार की तलवार की मूठ से लाल ले जाने के बाद गौरैया ने क्या किया?
गौरैया ने लाल को अपनी चोंच में दबाया और उड़ चली। उसने गिरजाघर और उच्च प्रासाद के पास से गुज़रकर अंत में उस टूटे-फूटे मकान में मेज़ पर लाल रख दिया।
5
तरुण कलाकार ने नीलम को क्या समझकर राहत महसूस की?
कलाकार ने सोचा कि लोग उसका मोल आँक रहे हैं और यह नीलम शायद किसी बड़े भारी प्रशंसक ने भेजा है, जिससे अब वह ईंधन और खाना खरीदकर अपना नाटक समाप्त कर सकेगा।
6
गौरैया क्यों नहीं चाहती थी कि राजकुमार अपनी दूसरी आँख का नीलम भी दे दे?
गौरैया जानती थी कि दूसरी आँख का नीलम देने पर राजकुमार बिलकुल ही अंधा हो जाएगा, जो उसके लिए बहुत बड़ा त्याग था।
7
स्वर्ण-पत्र बाँटने के बाद राजकुमार की प्रतिमा से समाज का क्या व्यवहार हुआ?
प्रतिमा कुरूप और भद्दी लगने लगी, इसलिए मेयर और सदस्यों ने उसे हटा दिया और भट्टी में गलाने का आदेश दिया, यह कहकर कि अब वह सुंदर नहीं, अतः उसका कोई उपयोग नहीं है।
8
मेयर और उसके साथियों ने प्रतिमा को हटाकर क्या निर्णय लिया?
प्रतिमा को भट्टी में गलाने के बाद कॉरपोरेशन की बैठक में यह प्रश्न उठा कि अब क्या किया जाए। मेयर और हर सदस्य ने अपनी-अपनी मूर्ति स्थापित करवाने की इच्छा व्यक्त की और वे झगड़ने लगे।
9
कहानी में 'मानव-मन पर सीमित और व्यापक अनुभव के प्रभाव का अंतर' कैसे स्पष्ट होता है?
जीवित राजकुमार का अनुभव सीमित था, इसलिए वह सुखी था। मूर्ति बनने के बाद उसका अनुभव व्यापक हुआ, जिससे उसे संसार का दुख-दर्द दिखा और उसके मन में करुणा जागी।
10
जस्ते का दिल भट्टी में क्यों नहीं पिघला?
लोहा गलाने वाले मिस्त्री को यह अचरज हुआ कि टूटा हुआ जस्ते का दिल भट्टी की तेज़ आग में भी नहीं पिघल रहा था, क्योंकि वह मानवीय करुणा से भरा था, जो भौतिक आग से भी ज़्यादा शुद्ध और अविनाशी है।
11
बच्चों के चेहरे पर गुलाबी किरणें झलक आने का क्या अर्थ है?
राजकुमार द्वारा दिए गए स्वर्ण-पत्रों से निर्धन बच्चों को सहायता मिली, जिससे उनकी भूख और ठंडक कुछ कम हुई और उनके चेहरे पर जीवन की खुशी और आशा झलक आई।
12
गौरैया ने राजकुमार के कंधों पर बैठकर किस प्रकार की कहानियाँ सुनाईं?
गौरैया ने लाल बगुलों, स्फ़िन्क्स की मूर्ति, चंद्रमा की घाटियों के राजा, और हरे साँप की कहानियाँ सुनाईं, जो नील नदी और रेगिस्तान से जुड़ी आश्चर्यजनक वस्तुएँ थीं।
13
गौरैया को राजकुमार से स्नेह क्यों हो गया था, जिसके कारण वह मृत्यु तक उसके साथ रही?
राजकुमार के निस्वार्थ करुणा और त्याग को देखकर गौरैया उससे बहुत प्यार करने लगी, इसलिए वह ठंड में अकड़ने के बावजूद भी उसे छोड़ नहीं सकती थी और मृत्यु के समय भी उसके पैरों के पास गिर पड़ी।
14
गौरैया ने राजकुमार को अलविदा कहते हुए क्या कहा और उसकी बात पर राजकुमार की क्या प्रतिक्रिया थी?
गौरैया ने कहा, "मिस्त्र नहीं, मैं मृत्यु के देश जाने की तैयारी कर रही हूँ।" इस पर राजकुमार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि वह समझ चुका था कि अब गौरैया के दिन करीब हैं।
15
गरीब लड़की ने नीलम मिलने पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की?
लड़की ने नीलम को देखकर कहा, "वाह कैसा रंगीन काँच है!" और वह खुशी से हँसकर घर की ओर भागी, क्योंकि अब उसे खाली हाथ जाने पर पिता से मार खाने का डर नहीं था।
16
लेखक ने 'धनी और निर्धन वर्ग की जीवन-स्थितियों की तुलना' कैसे की है?
अमीर अपने महलों में नाच-गाने और रंगरलियों में मग्न थे, जबकि गरीब भूखे बच्चे, बीमार और मेहनती लोग अँधेरी गलियों में दुख-दर्द झेल रहे थे।
17
राजकुमार का नीलम बेचकर कलाकार क्या खरीद सकता था?
कलाकार नीलम को बेचकर अपने लिए ईंधन (कोयला) और खाना खरीद सकता था, जिससे वह ठंड और भूख से बचकर अपना नाटक पूरा कर पाता।
18
राजकुमार ने गौरैया को नगर में क्या देखकर आने को कहा?
राजकुमार ने गौरैया से कहा कि वह शहर पर उड़कर देखे और बताए कि वहाँ क्या हो रहा है, यानी वह नगरवासियों के दुख-दर्द का हाल जानना चाहता था।
19
'अपरिचय और परिचय की स्थितियों में मानव-व्यवहार' की तुलना किस प्रकार की जा सकती है?
अपरिचय (जीवनकाल) में राजकुमार आत्मकेंद्रित था और दुख से दूर था। परिचय (प्रतिमा) के बाद, वह दुख से परिचित हुआ और उसका हृदय करुणा से भर गया, जिससे उसका व्यवहार परोपकारी बन गया।
20
ईश्वर ने राजकुमार और गौरैया को क्या आशीर्वाद दिया?
ईश्वर ने कहा, "मेरे स्वर्ग की डालों पर यह गौरैया सदा चहकेगी और मेरे उपवन में राजकुमार सदा विहार करेगा," यानी उन्हें स्वर्ग में स्थान और सम्मान दिया।
क्र.सं.
प्रश्न (Question)
उत्तर (Answer)
1
राजकुमार के जीवनकाल और प्रतिमा बनने के बाद के व्यक्तित्व में क्या बड़ा अंतर था?
जीवनकाल में: राजकुमार आनंद-महल में विलासपूर्ण जीवन जीता था, जहाँ दुख को प्रवेश करने की इजाज़त नहीं थी। वह आत्मकेंद्रित था और अपने चारों ओर की प्राचीर के कारण बाहर की वास्तविकताओं को जानने का प्रयास नहीं करता था। प्रतिमा बनने के बाद: उसे ऊँचे स्तंभ पर स्थापित किया गया, जिससे वह संसार की सारी कुरूपता और दुख-दर्द देख सका। उसमें करुणा का भाव जागा, और उसने दूसरों के दुख दूर करने के लिए अपने सभी बहुमूल्य रत्न और सोना त्याग दिया।
2
गौरैया के चरित्र में त्याग और प्रेम का विकास कैसे होता है?
शुरू में, गौरैया स्वार्थी थी और मिस्र जाने की जल्दी में थी, लेकिन राजकुमार के उदास चेहरे को देखकर उसे दया आ गई। राजकुमार के बार-बार आग्रह पर भलाई के काम करने से उसे आंतरिक सुख मिला। अंत में, राजकुमार के अंधे हो जाने पर, वह अपने मिस्र जाने के स्वार्थ का त्याग करके निःस्वार्थ प्रेम प्रदर्शित करती है और हमेशा उसके साथ रहने का फैसला करती है, जो उसके चरित्र में आए बड़े परिवर्तन को दर्शाता है।
3
राजकुमार की प्रतिमा को भट्टी में गलाने और जस्ते का दिल न पिघलने की घटना का क्या महत्त्व है?
प्रतिमा का सोना उतर जाने के कारण मेयर और सदस्यों ने उसे अनुपयोगी मानकर भट्टी में गलाने का आदेश दिया। यह सांसारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है जो केवल भौतिक मूल्य को महत्त्व देता है। जस्ते का दिल भट्टी की आग में न पिघलना यह सिद्ध करता है कि सच्ची करुणा और मानवीय प्रेम भौतिक शक्ति से परे और अविनाशी होते हैं। राजकुमार के त्याग का मूल्य भौतिक आग भी नष्ट नहीं कर सकी।
4
कहानी में मेयर और उसके साथियों का व्यवहार राजनीतिक प्रतिनिधियों की किस प्रवृत्ति को उजागर करता है?
मेयर और उसके साथी नगर के व्यवस्था के कर्णधारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी प्रवृत्ति स्वार्थपरता और असंवेदनशीलता की है। उन्हें निर्धन जनता के दुख से कोई सरोकार नहीं था। उन्होंने प्रतिमा के कुरूप होने पर उसे तुरंत हटा दिया और बाद में उस स्थान पर अपनी-अपनी मूर्ति स्थापित करवाने के लिए झगड़ने लगे, जो उनकी केवल व्यक्तिगत यश की इच्छा को दर्शाता है।
5
राजकुमार और गौरैया के संबंध को त्याग, सेवा और मित्रता की अनूठी मिसाल क्यों कहा जाता है?
राजकुमार और गौरैया का संबंध करुणा और सेवा पर आधारित था। राजकुमार स्वयं चल-फिर नहीं सकता था, इसलिए उसने अपने त्याग के लिए गौरैया की सहायता ली। गौरैया ने अपनी इच्छाओं का त्याग करके राजकुमार के आदेशों का पालन किया, भले ही उसमें उसे कष्ट हुआ। अंत में, गौरैया ने राजकुमार के अंधे होने पर उसके साथ रहकर अपनी निष्ठावान मित्रता का प्रमाण दिया, और वे दोनों एक-दूसरे के लिए स्वर्ग में भी मूल्यवान माने गए।
6
राजकुमार ने गौरैया को शहर में अमीरों और गरीबों के बीच के अंतर के बारे में क्या देखा और बताया?
गौरैया ने देखा कि अमीर लोग अपने महलों में नाच-गाने और रंगरलियाँ मना रहे थे, जबकि उसी शहर की अँधेरी गलियों में गरीब लोग हाथ फैलाए भीख माँग रहे थे। उसने भूखे बच्चों को ज़र्द (पीले) चेहरे लटकाए हुए देखा और चौकीदार को बारिश में भीगते हुए बच्चों को पुलिया के नीचे से भगाते हुए भी देखा। यह शहर के सुख और दुख के बीच की भयानक असमानता को दर्शाता है।
7
"अच्छी संगत से सद्गुणों का विकास होता है," इस विचार को कहानी के किस पात्र के माध्यम से समझाया जा सकता है?
यह विचार गौरैया के पात्र के माध्यम से समझाया जा सकता है। राजकुमार (करुणा की मूर्ति) की संगत में आने से पहले, गौरैया आत्मकेंद्रित और स्वार्थी थी। राजकुमार के कहने पर जब उसने भलाई का काम किया, तो उसे आंतरिक खुशी मिली। राजकुमार के बार-बार के त्याग (नीलम देना) ने उसे त्याग और प्रेम के उच्चतम स्तर तक पहुँचा दिया, जिसके कारण उसने अपनी मृत्यु तक राजकुमार का साथ नहीं छोड़ा।
8
'सुखी राजकुमार' कहानी में निहित 'रूप और कर्म के सौंदर्य' पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
कहानी के अनुसार, 'रूप का सौंदर्य' क्षणभंगुर और बाहरी है, जो सोने, नीलम और लाल से सजा था। समाज इसी बाहरी सौंदर्य की प्रशंसा करता है। 'कर्म का सौंदर्य' सच्चा और शाश्वत है, जो निःस्वार्थ त्याग और करुणा में निहित है। राजकुमार ने रूप के सौंदर्य का त्याग करके कर्म के सौंदर्य को अपनाया। अंततः, ईश्वर ने उसी कर्म के सौंदर्य (जस्ते के दिल और गौरैया की सेवा) को सबसे अधिक मूल्यवान मानकर, रूप के सौंदर्य से ऊपर स्थापित किया।
9
गरीब स्त्री, तरुण कलाकार और रोती हुई लड़की के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहता है?
इन गौण पात्रों के माध्यम से लेखक नगर के निर्धन वर्ग की दयनीय स्थिति को उजागर करना चाहता है। गरीब स्त्री रानी के कपड़ों पर काम करके भी अपने बीमार बच्चे को फल नहीं दे सकती। कलाकार भूख और ठंड से अपने सपने तोड़ रहा है। लड़की पिता के डर से रो रही है। ये सभी पात्र गरीबी और व्यवस्था की असंवेदनशीलता के शिकार हैं, जिन्हें राजकुमार और गौरैया के त्याग से थोड़ी राहत मिलती है।
10
गौरैया ने राजकुमार को अलविदा कहते समय क्या इच्छा व्यक्त की और राजकुमार ने उस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
गौरैया ने अलविदा कहते हुए राजकुमार को अपना हाथ चूमने की इच्छा व्यक्त की। राजकुमार ने सोचा कि वह आख़िरकार मिस्र जाने के लिए तैयार हो गई है, लेकिन गौरैया ने स्पष्ट किया कि वह मिस्र नहीं, बल्कि मृत्यु के देश जाने की तैयारी कर रही है। राजकुमार ने यह सुनकर कोई विरोध नहीं किया, क्योंकि वह समझ गया था कि ठंड के कारण गौरैया के अंतिम क्षण करीब हैं।
0 Comments