1. भारतीय चित्रकला
(क) प्राचीन भारत में चित्रकला
 * पाषाण काल: महाराष्ट्र के होशंगाबाद और मध्य प्रदेश के भीमबेटका में गुफा चित्रों के प्रमाण मिले, जिनमें शिकार करते मानव समूह और पशु-पक्षी दर्शाए गए हैं।
 * सिंधु-सरस्वती सभ्यता: मोहरों पर मनुष्य, पशु (एक सींग वाला पशु, वृषभ, गैंडा, बाघ, हाथी) के चित्र और मोहनजोदड़ो व लोथल से प्राप्त मोहरों पर नाव व दो बाघों से लड़ते हुए मानव के चित्र मिलते हैं।
 * गुप्तकाल (तीसरी से छठी सदी ई.):
   * अजंता की गुफाएँ (महाराष्ट्र): 29 गुफाओं में बौद्ध धर्म, बुद्ध और बोधिसत्वों का चित्रण मिलता है। गुफा संख्या 16 में 'मरणासन्न राजकुमारी' का चित्र प्रसिद्ध है। गुफा संख्या 17 को 'चित्रशाला' कहा जाता है।
   * बाघ की गुफाएँ (मध्य प्रदेश): अजंता से भिन्न, इनके चित्र लौकिक जीवन से संबंधित हैं (राजसी वेशभूषा, वीणा बजाती स्त्री, हाथी-घोड़ों पर सवार)।
 * सौंदर्यशास्त्र:
   * वात्स्यायन का 'कामसूत्र': 64 कलाओं में चित्रकला का उल्लेख है।
   * विष्णु धर्मोत्तर पुराण का 'चित्रसूत्र': चित्रकला के छह अंगों (आकृति की विभिन्नता, अनुपात, भाव, चमक, रंगों का प्रभाव) का वर्णन।
 * अन्य प्राचीन चित्रकलाएँ: बादामी (कर्नाटक), कांचीपुरम के मंदिर, सितांवसल (तमिलनाडु) की जैन गुफाओं में भी प्राचीन चित्रकारियाँ मिलती हैं।
(ख) मध्यकालीन भारत में चित्रकला
 * पाल शैली (9-10 शताब्दी): बंगाल, बिहार और उड़ीसा में पाण्डुलिपियों पर चित्रण होता था।
 * दिल्ली सल्तनत (1206-1525 ई.): चित्रकला पर अरबी प्रभाव था, फूल, पत्तों और पौधों का चित्रण प्रमुख था। इस्लाम में चित्रकला वर्जित होने के कारण अधिक विकास नहीं हुआ।
 * मुगलकालीन चित्रकला:
   * संरक्षण: मुगल बादशाहों ने चित्रकारों को संरक्षण दिया। प्रथम महत्वपूर्ण चित्र ग्रंथ 'हम्जानामा' था।
   * प्रमुख चित्रकार: मीर सैय्यद अली, ख्वाजा अब्दुस्समद, उस्ताद मंसूर, बिशनदास।
   * विषय वस्तु: दरबारी चित्रण, पशु-पक्षियों का चित्रण, बाबरनामा के चित्र।
 * क्षेत्रीय शैलियाँ: मुगल काल में कांगड़ा, कुल्लू, बसोली, गढ़वाल जैसी क्षेत्रीय शैलियाँ भी विकसित हुईं।
 * जैन चित्रकला: जैन समुदाय ने जैन शास्त्रों की पाण्डुलिपियाँ चित्रित कीं, जिनमें तीर्थंकरों के जीवन को दर्शाया गया था।
(ग) आधुनिक भारत में चित्रकला
 * 18वीं-19वीं सदी: ब्रिटिश निवासियों द्वारा संरक्षित अर्ध-पाश्चात्य शैलियाँ, जो भारतीय सामाजिक जीवन और मुगल स्मारकों पर आधारित थीं।
 * आधुनिक चित्रकला के जनक: केरल के राजा रवि वर्मा को आधुनिक भारतीय चित्रकला का जनक माना जाता है। उन्होंने महाकाव्यों और धर्मग्रंथों के पात्रों का चित्रण किया। उनके प्रसिद्ध चित्र: अर्जुन व सुभद्रा, शकुंतला, भीष्म प्रतिज्ञा।
 * बंगाल चित्रशैली: शांति निकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर ने 'कला भवन' की स्थापना की। प्रमुख चित्रकार: अवनींद्रनाथ ठाकुर, नंदलाल बोस।
 * अन्य प्रमुख चित्रकार: वैभव मेहता, सतीश गुजराल, कृष्ण खन्ना, मनजीत बाबा आदि।
2. भारत में प्रस्तुति कलाएँ (संगीत, नृत्य, नाटक)
भारतीय संगीत कला का इतिहास
 * प्राचीन काल: संगीत सिंधु-सरस्वती सभ्यता से शुरू हुआ। सामवेद को विश्व का सबसे प्राचीन संगीत ग्रंथ माना जाता है, जिसमें सात प्रकार के स्वरों का उल्लेख है। रामायण और महाभारत में वीणा, मृदंग व कृष्ण की बांसुरी का उल्लेख है।
 * ग्रंथ: भरत मुनि का 'नाट्यशास्त्र' और मतंग का 'वृहद्देशी' (रागों का नामकरण)।
 * गुप्तकाल: गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त एक कुशल वीणावादक थे।
 * मध्यकाल: सूफी और भक्ति संतों (कबीर, मीराबाई, तुलसीदास) ने संगीत को बढ़ावा दिया। अमीर खुसरो संगीत के विशेषज्ञ थे।
 * मुगलकाल: ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर ने ध्रुपद शैली का विकास किया। अकबर के दरबार में तानसेन प्रसिद्ध संगीतज्ञ थे।
 * भारतीय संगीत की शैलियाँ:
   * हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत: उत्तर भारत में प्रसिद्ध।
     * रूप: ध्रुपद, ख्याल, धमार, ठुमरी, टप्पा।
     * घराना: संगीत के विशेष विद्या से संबंधित गुरु-शिष्य परंपरा (जैसे जयपुर घराना)।
   * कर्नाटक संगीत: दक्षिण भारत में प्रसिद्ध।
     * त्रिमूर्ति: श्याम शास्त्री, त्यागराज, मुथुस्वामी दीक्षितार।
     * पिता: पुरंदर दास को कर्नाटक शैली का पिता कहा जाता है।
भारत के नृत्य
 * प्राचीनता: नृत्य का इतिहास मानव जितना पुराना है। 'नाट्यशास्त्र' प्राचीनतम ग्रंथ है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से नृत्यांगना की कांस्य मूर्ति मिली है।
 * शास्त्रीय नृत्य: धार्मिक उद्देश्यों से मंदिरों और राज दरबारों में विकसित हुए।
   * भरतनाट्यम: तमिलनाडु का नृत्य।
   * कथक: उत्तर भारत का नृत्य (कथाओं से संबंधित)।
   * कथकली: केरल का नृत्य।
   * मोहिनीअट्टम: केरल का नृत्य।
   * कुचिपुड़ी: आंध्र प्रदेश का नृत्य।
   * ओडिसी: उड़ीसा का नृत्य।
   * मणिपुरी: मणिपुर का नृत्य।
 * लोक नृत्य: शास्त्रीय नृत्यों के साथ-साथ लोकनृत्य भी विकसित हुए (जैसे असम का बिहू, लद्दाख का धालय)।
भारत में नाटक का विकास
 * अवधारणा: नाटक एक प्रस्तुति कला है जो दर्शकों के हृदय में रसानुभूति कराती है।
 * वैदिक काल: अभिनय और रंगमंच का उद्भव वैदिक काल में हुआ।
 * प्राचीन नाटककार:
   * कालिदास (गुप्तकालीन): संस्कृत के सर्वश्रेष्ठ नाटककार। प्रसिद्ध नाटक: 'मालविकाग्निमित्रम', 'विक्रमोर्वशीयम्', और विश्वप्रसिद्ध 'अभिज्ञानशाकुंतलम्'।
   * भास: कालिदास से पूर्व के नाटककार। प्रसिद्ध नाटक: 'स्वप्नवासवदत्ता'।
   * विशाखदत्त: 'देवीचंद्रगुप्तम्'।
   * शूद्रक: 'मृच्छकटिकम्'।
   * हर्षवर्धन: 'रत्नावली'।
 * आधुनिक नाटककार: भारतेन्दु हरिश्चंद्र ('सत्य हरिश्चंद्र') और जयशंकर प्रसाद ('अजातशत्रु')।
3. भारतीय स्थापत्य कला
(क) प्राचीन भारत में वास्तुकला
 * सिंधु-सरस्वती सभ्यता (लगभग 5000 वर्ष पहले): नगर योजना और निर्माण कार्य आश्चर्यजनक थे। सड़कें समकोण पर काटती थीं, व्यवस्थित नालियाँ, विशाल स्नानागार, अन्नागार।
 * बौद्ध और जैन धर्म: स्तूप (सांची, अमरावती), विहार, चैत्य और मंदिरों का निर्माण हुआ (देलवाड़ा के जैन मंदिर)।
 * मौर्य युग: सम्राट अशोक ने 84,000 स्तूपों और 30 स्तंभों (सारनाथ, सांची) का निर्माण कराया। पहली बार कला में पत्थर का प्रयोग हुआ।
 * गुप्तकाल: मंदिर निर्माण का कार्य इसी समय व्यवस्थित रूप से शुरू हुआ। उदाहरण: देवगढ़ का दशावतार मंदिर, तिगवा का विष्णु मंदिर। बाघ (म.प्र.) और अजंता-एलोरा (महाराष्ट्र) की गुफाएँ।
 * मंदिर निर्माण की शैलियाँ:
   * नागर शैली: उत्तर भारत।
   * बेसर शैली: मध्य भारत।
   * द्रविड़ शैली: दक्षिण भारत (तंजौर का बृहदेश्वर मंदिर)।
 * चट्टानों को काटकर बने मंदिर: एलोरा का कैलाश मंदिर और महाबलीपुरम का रथ मंदिर।
 * अन्य प्रसिद्ध मंदिर: कोणार्क का सूर्य मंदिर, खजुराहो मंदिर, पुरी में जगन्नाथ मंदिर।
(ख) मध्यकालीन वास्तुकला
 * विशेषताएँ: तुर्कों के आगमन से गुंबज, ऊँची मीनारें, मेहराब और मेहराबदार द्वार जैसी फारसी और मध्य एशियाई वास्तुकला का प्रभाव पड़ा। यह न तो पूरी तरह विदेशी थी, न भारतीय।
 * दिल्ली सल्तनत (1206-1525 ई.):
   * गुलाम वंश: कुतुबुद्दीन ऐबक ने कुतुबमीनार, कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनवाया।
   * खिलजी वंश: अलाउद्दीन खिलजी ने अलाई दरवाजा बनवाया।
 * मुगलकालीन वास्तुकला:
   * अकबर: आगरा और फतेहपुर सीकरी में किलों का निर्माण। फतेहपुर सीकरी का बुलंद दरवाजा, सलीम चिश्ती का मकबरा।
   * जहाँगीर: संगमरमर का प्रयोग शुरू हुआ। अकबर का मकबरा (सिकंदरा) और एत्माद्दौला का मकबरा।
   * शाहजहाँ: 'महान भवन निर्माता' कहा जाता है। दिल्ली की जामा मस्जिद, लाल किला, आगरा का ताजमहल।
 * क्षेत्रीय वास्तुकला: विजयनगर (हम्पी में विट्ठलस्वामी मंदिर), बंगाल, गुजरात, जौनपुर (अटाला मस्जिद) और राजस्थानी शैली में भी कई इमारतें बनाई गईं।
(ग) औपनिवेशिक स्थापत्य एवं आधुनिक शहर
 * उद्देश्य: यूरोपीय (पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी, अंग्रेज) व्यापारियों ने अपने शोषण और प्रशासन के लिए भवन बनाए।
 * प्रमुख शहर: बंबई, कलकत्ता, मद्रास।
 * प्रमुख भवन:
   * मद्रास: उच्च न्यायालय भवन, सेंट थॉमस चर्च।
   * कलकत्ता: हावड़ा पुल, मार्बल पैलेस, विक्टोरिया मेमोरियल हॉल।
   * बंबई: सचिवालय, विक्टोरिया टर्मिनल, गेटवे ऑफ इंडिया।
   * दिल्ली: संसद भवन, राष्ट्रपति भवन (वास्तुकार लुट्यिन्स), कनॉट प्लेस।
4. राजस्थान में कला की प्रगति
(क) राजस्थानी चित्रकला
 * प्राचीनता: कोटा के आलनिया दर्रा, जयपुर के बैराठ में आदिम मानव के रेखांकन मिले।
 * प्राचीनतम ग्रंथ: जैसलमेर संग्रहालय में 'ओघ नियुक्ति वृत्ति' (1060 ई.) और 'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' (1260 ई.)।
 * वैज्ञानिक विभाजन: आनंद कुमार स्वामी ने 1916 में 'राजपूत पेंटिंग' नामक पुस्तक में राजस्थानी चित्रकला का वैज्ञानिक विभाजन किया।
 * प्रमुख शैलियाँ (स्कूल): मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती, ढूँढाड़।
 * मेवाड़ शैली: महाराणा जगतसिंह का काल स्वर्ण युग कहलाता है। उन्होंने 'चितेरों की ओवरी' (तस्वीराँ रो कारखानों) की स्थापना की।
 * मारवाड़ शैली: ढोला-मारू, मूमल-निहालदे जैसे प्रेमाख्यान मुख्य विषय थे।
 * हाड़ौती शैली: बूंदी और कोटा की शैलियाँ। बूंदी शैली को 'पशु-पक्षियों की चित्र शैली' कहा जाता है।
 * किशनगढ़ शैली: राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के समय विकसित हुई। बणी-ठणी इस शैली का सर्वोत्तम चित्र है, जिसे 'भारतीय मोनालिसा' कहा जाता है।
(ख) राजस्थानी लोक संगीत
 * संगीतजीवी जातियाँ: लंगा, मांगणियार, कलावंत, ढाढ़ी, मिरासी।
 * मांड गायिकाएँ: गवरी देवी, अल्लाह जिलाह बाई, मांगीबाई, जमीला बानों।
 * गीत:
   * विवाह गीत: परणेत, बन्ना-बन्नी, घोड़ी।
   * जन्म गीत: जच्चा या होलर।
   * त्योहार गीत: गणगौर व तीज के गीत।
   * अन्य: ओल्यूँ, घुड़ला, कांगसियों, चिरमी, बिछूड़ो, मूमल, हिंडोल्या, पणिहारी, ढोला-मारू।
(ग) राजस्थानी नृत्य
 * वर्गीकरण: व्यावसायिक नृत्य (तेरहताली, भवाई), जातीय लोकनृत्य (भीलों के नृत्य), सामाजिक या धार्मिक लोकनृत्य (घूमर, वीर तेजाजी), क्षेत्रीय लोकनृत्य (घुड़ला, डांडिया)।
 * प्रमुख नृत्य:
   * घूमर: राजस्थान की पहचान।
   * तेरहताली: व्यावसायिक नृत्य, कामड़ जाति द्वारा किया जाता है।
   * भवाई नृत्य: व्यावसायिक नृत्य।
   * गुलाबो: कालबेलिया नृत्यांगना, जिसने इस नृत्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी।
(घ) राजस्थान में लोकनाट्य
 * विशेषता: लोकजीवन का दर्पण, मनोरंजन के साथ-साथ भक्ति और आराधना भी।
 * प्रमुख लोकनाट्य:
   * ख्याल: प्रसिद्ध लोकनाट्य, विषय पौराणिक और ऐतिहासिक।
   * नौटंकी: पूर्वी राजस्थान में लोकप्रिय, सामाजिक मेलों में प्रस्तुत की जाती है।
   * स्वांग: किसी प्रसिद्ध चरित्र की वेशभूषा धारण कर नकल करना। कलाकार को 'बहरूपिया' कहा जाता है। जानकीलाल भांड प्रसिद्ध कलाकार थे।
   * फड़: भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा में विकसित। इसमें लोकदेवताओं की कथा को कपड़े पर चित्रित कर भोपे गाते हैं।
   * तमाशा: जयपुर के महाराजा सवाई प्रतापसिंह के समय शुरू हुआ।
(ड) राजस्थान में स्थापत्य कला
 * दुर्ग: वीरता और रक्षा के प्रतीक। राजस्थान में कई दुर्ग हैं, जैसे चित्तौड़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, जैसलमेर, आमेर, गागरोण।
   * विश्व धरोहर सूची में शामिल दुर्ग: रणथंभौर, कुंभलगढ़, जैसलमेर, गागरोण, चित्तौड़, आमेर।
   * रणथंभौर दुर्ग: अबुल फजल ने इसे 'बख्तरबंद' किला कहा।
   * कुंभलगढ़ दुर्ग: शिल्पी मंडन मिश्र, दीवार 36 किमी लंबी।
   * जैसलमेर दुर्ग: 'सोनार का किला'।
   * गागरोण दुर्ग: जल दुर्ग की श्रेणी में आता है।
 * मंदिर:
   * संरचना: तोरण द्वार, उपमंडप, सभा मंडप, गर्भगृह, शिखर, प्रदक्षिणा पथ।
   * प्रसिद्ध मंदिर: रणकपुर के जैन मंदिर, दिलवाड़ा के जैन मंदिर (आबू), जगदीश मंदिर (उदयपुर), करणीमाता मंदिर (बीकानेर), किराडू मंदिर (बाड़मेर)।
 * महल और हवेलियाँ:
   * महल: उदयपुर, आमेर, बीकानेर के महल।
   * हवेलियाँ: शेखावाटी, जैसलमेर और बीकानेर की हवेलियाँ अपनी भव्यता और कलात्मकता के लिए प्रसिद्ध हैं। जैसलमेर की पटवों की हवेली और नथमल की हवेली, शेखावाटी की पोद्दार हवेली।